किताब और मेला

जैसे ही किताबों के सपने आने लगते हैं मैं समझ जाता हूँ किताबों का मेला लगने वाला है ! किसी भी पुस्तक मेला के लगने से पहले मुझे किताबों के सपने आने लगते हैं ! अच्छे, बुरे, किताबों से जुड़े तरह तरह के सपने देखने लगता हूँ ! किसी सपने में देखता हूँ कि चारो तरफ किताबों के पेड़ लगे हैं … कभी देखता हूँ सबने मिल कर इतनी किताबें लिख दी हैं कि पढ़ने के लिए उन्हें चारो तरफ बिखरा दिया गया है … लोग किताबों को घर नहीं ले जाना चाहते हैं क्योंकि घर पहुँचते ही एक किताब दूसरे किताब को बुला लेती है और बहुत जल्द घर में किताबों का ढेर लग जाता है … किसी सपने में लोग किताबों से डर कर उन्हें घर से बाहर कर देते हैं … बाहर इतनी किताबें हैं कि देख कर न चलें तो किताबों से ठोकर लग सकती है ! ऐसी ठोकर से बचने के लिए लोग किताब पढ़ना शुरू कर देते हैं ! सब जानते हैं किताबों से बचने का बस यही एक तरीका है, उनको चुप – चाप पढ़ लीजिये ! जब तक आप उसे पढ़ न लें, किताबें तब तक ही आपको डराती है ! सपने में एक दिन मैं सुनता हूँ कि विश्व पुस्तक मेला लगने वाला है ! मेरी आँखें खुल जाती हैं ! अखबार में पुस्तक मेला का समाचार देख कर अपने सपने को सच पाता हूँ ! मेला शब्द सुनते ही मेरी इन्द्रियों के पन्ने फड़फड़ाने लगते हैं, मेरे मुंह में पानी आने लगता है ! मैं किताब के पन्नों पर प्रिंट की रोशनाई की ताज़ी गंध सूँघने के लिए बैचैन हो जाता हूँ ! मैं एक किताबी कीड़ा हूँ, मेरी रीढ़ की हड्डी किताब चाटे बगैर सीधी नहीं होती !

निर्धारित दिन सुबह ग्यारह बजे मेला पहुँचने वाले पहले जत्थे में मैं भी शामिल था ! ट्वीट्राटी, फेसबुक, यू ट्यूब, इत्यादि से मेला न पहुँच पाने वाले भी मेले का हाल मुझसे ज्यादा जानते हैं क्योंकि मेला जाते ही मैं किताबों में खो जाता हूँ ! पुस्तक मेले में क्या हो रहा है मुझे इस बात की कोई सुधबुध नहीं रहती है ! जैसे ही मुझे कोई दिलचस्प किताब दिखती है, समय गवाएं बिना मैं उसे पढ़ने लगता हूँ ! किताब को पढ़ते समय मैं उस किताब में घुस जाता हूँ और किताब ही मेरी कोठरी बन जाती है ! जब तक मुझे पुस्तक मेले के चौकीदार किताब से खींच के बाहर नहीं कर देते हैं मैं किताब में ही रहता हूँ ! अगले दिन भी मेला पहुँच कर मैं फिर उसी किताब में घुस जाता हूँ ! जब तक किताब खत्म नहीं हो जाती है मैं किताब को नहीं छोड़ता हूँ ! किताबों के मेले की एक बहस में मेरे तर्क और उदहारण सुन कर जबसे लोग मुझे पाठक बुलाने लगे हैं, मैं लोगों और सोशल मीडिया से बचता फिरता हूँ ! सोशल मीडिया में सबने मिल कर मुझे गुमनाम पाठक बना दिया है और मेरी अनुपस्थिति पर फ़िज़ूल का चिटपुटिया बहस करते रहते हैं ! जबकि मैं सोशल मीडिया के पीठ पीछे चुपचाप कई किताबों को पढ़ कर निकल जाता हूँ !

आज मेले में घुसते ही मुझे कालिदास की शकुंतला मिल गयी ! उफ़ ! क्या मानुषी है ! क्लासिकल शकुंतला के बहाने मुझे साहित्य का ऐश्वर्य देखने का फिर से मन करने लगा ! मैंने प्रेम दुःख से भरे इस काव्य नाटक को पढ़ने के लिए पंडाल में किताब की ढेर के पीछे वाला गुप्त हिस्सा चुन लिया और एकांत में शकुंतला को पढ़ने लगा ! रह रह कर मैं शकुंतला के प्रेम प्रसंगों में खो जाता और उसके दुर्भाग्य पर चुपचाप अविरल रोता रहता ! रात हो गयी ! कहानी मेरे मन को छू गयी थी ! मछुआरे की अँगूठी को देख कर जैसे दुष्यंत को शकुंतला की याद आयी वैसे ही शायद मेले के किसी चौकीदार को मुझ पाठक की याद आ गयी थी ! किताब के एक प्रसंग में दुश्यन्त ने शकुन्तला को जैसे ही ढूँढना शुरू किया मैंने महसूस किया मेले का चौकीदार भी किताबों के छुपे पाठक को किताबों में ढूंढ रहा था ! पाठकों को बाहर खदेड़ने में कई प्रकाशक चौकीदार की मदद कर रहे थे ! मुझ जैसे ज़िद्दी पाठकों को बाहर तक ले जाने के लिए चारो तरफ सीटी बज रही थी ! मैंने दुःख की इस कथा को ख़तम किये बिना मेले से न निकलने की ठान ली और एक ऊँची टेबल के नीचे छुप के पढ़ने लगा ! मेनका की बेटी से अब मुझे पुस्तक मेले का कोई चौकीदार और प्रकाशक अलग नहीं कर सकता था ! अंत में दुष्यंत को शकुंतला मिल गयी पर मैं किसी चौकीदार को नहीं मिल सका !

जब किताब ख़तम हुई हॉल से सब जा चुके थे ! मेला कई घंटे पहले अगले दिन तक के लिए बंद हो चूका था ! लाखों किताबों के बीच मेले में, मैं अकेला छूट गया था ! मैं बिना हिले डुले स्थिति का जायजा लेने दूर से आ रही इधर उधर की आवाज़ों को जोड़ के समझने की कोशिश करने लगा ! घडी में रात के डेढ़ बज रहे थे ! पुस्तक मेले के पंडाल के बाहर का मैदान कोहरे में डूब गया था ! इस वक़्त पुस्तक मेले में मैं किसी चौकीदार के हाथ नहीं आना चाहता था ! यह पाठक का निजी क्षण था ! मैं नहीं चाहता था रात के दुसरे पहर पुस्तक मेले से निकलता हुआ पकड़ा जाऊं और सोशल मिडिया में अगली सुबह उछाल दिया जाऊं ! मुझे अपनी स्थिति में पाठक की मिसअंडरस्टूड स्थिति दिखने लगी और सोशल मीडिया में पाठकों की दुर्दशा पर कई दिखाऊ सेमीनार को जन्म देने का बहाना दिखने लगा ! जैसे ही इस घटना पर सहमति असहमति के लाखों चेहरे की सेल्फ़ी का हाहाकार मेरी कान में गूँजा, मैं इस डरावने ख़याल से निकल आया ! अचानक तभी कहीं से मुझे कई फुसफुसाहट की आवाज़ सुनायी देने लगी ! मैं थोड़ा सहम गया ! किताब पढ़ने की धुन में मैं स्टाल संख्या और हॉल संख्या भूल गया था ! फुसफुसाने की सब अज्ञात आवाज़ें आस पास से आ रही थी, लग रहा था कोई मेरा पीछा करता हुआ यहाँ तक आ पहुँचा है ! बड़ी सावधानी से किताब को कुतरने वाले मेले के वोकेशनल चूहे की तरह मैं पंडाल से बाहर निकलने की जुगत लगाने लगा ! बाहर कहीं अँधेरा था, कहीं रौशनी थी ! बाहर आकर मुझे लगा मैं एक नयी जगह आ गया हूं ! कहाँ गयी वो भीड़ ? कहाँ गए वो असँख्य खरीदार जिसमे मुझ जैसे पाठक दिन में खो जाते हैं !

बाहर आते ही मुझे एक नयी किस्म की भीड़ दिखी ! कुछ ठंढ से और कुछ इस दृश्य को देख कर मैं सिहर गया ! रात के सन्नाटे में बाहर किताबों का मेला लगा था ! पंडालों के भीतर से किताबें बाहर निकल के उत्सव मना रही थी ! ये दृश्य मेरे लिए बिलकुल नया था ! मैं पहली बार पुस्तकों का सच्चा मेला देख रहा था जहाँ किताबें उन्मुक्त थीं ! दूर तक किताब ही किताब … चारों तरफ किताबें बिखरी पड़ी थीं ! पेड़ों पर किताब लटक रहे थे ! मुझे लगा मेरा सपना सच हो गया है ! किताबें किलकारियां मार रही थीं ! उत्तेजना से मुझे और ठंढ लगने लगी ! ठंढ से बचने के लिए मैं कोई जुगाड़ की तलाश में लग गया ! मैंने गर्म कपडे तो पहन रखे थे पर मेरे पास रात की ठंढ की तैयारी नहीं थी ! आग कागज़ का दुश्मन होता है इसलिए अलाव लगाने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता था ! मैं एक पाठक हूँ और पुस्तक प्रेमी हूँ, मैं सोशल मीडिया के प्रेत की तरह औरों की किताब जला के हाथ नहीं सेंक सकता था ! मैंने देखा नौजवान किताबें बूढी किताबों को ध्यान से सुन रही थी और चुप थीं ! नयी मोटी किताब भी पुराने पतली किताब को सुन रही थी ! बुज़ुर्ग की इज़्ज़त किताबों की दुनिया में ज्यादा थी !

पुस्तक मेले में छात्रों का प्रवेश नि:शुल्क था ! कोई शरारती छात्रा पुस्तक मेले में आयी तो स्कूल ड्रेस में थी पर अंदर अपने कपडे बदल के स्कूल ड्रेस वाला अपना बैग भूल गयी थी ! पुस्तक मेले में पूरा बाल साहित्य इस बाल मानुषी की शरारत को घेर के भावुक हो कर सोया था ! ठंढ से बचने के लिए मैंने बाल साहित्य से छुप कर उस मानुषी के झोले से उसके यूनिफॉर्म का पिंक स्वेटर और पिंक स्कार्फ निकाल कर पहन लिया ! अब मैं आधा बाल मानुषी और आधा वयस्क था ! मुझे लगा आधी रात को अँधेरे में पुस्तकों को चीर कर निकला मुझ पाठक का ये एक नया बाल अर्ध नारीश्वर अवतार है जो अवतरित दृष्टि से एक नया सच देख पा रहा है ! दिन भर अपना सर्वस्व लुटा कर बाहर मेले में किताबें सुस्ता रही थीं ! पुस्तक – प्रेमियों की याद में कुछ किताबों ने रत जगा किया था ! किताब से निकल कर कई पात्र और चरित्र के पुतले किताबों का मेले में साथ दे रहे थे ! मुझे दूर कोहरे में डूबा मेरे प्रिय साबू का पुतला भी दिखा ! रात के इस पहर में ठंढ से बच कर पुस्तक मेले के सभी चौकीदार किताबों की गोद में दुबक के सो रहे थे जैसे उन्हें सपनो के गर्म संसार में ले जा कर छोड़ दिया गया हो ! मेरी नज़रों के सामने पुस्तक मेले की विद्रूपता पराकाष्ठा पर थी !

बाहर निकलते ही कुछ बड़ी और मोटी किताबों ने झुण्ड बना के मुझे घेर लिया ! मुझे देख कर सबके पन्ने फड़कने लगे ! उसकी फड़फड़ाहट की आवाज़ सुन कर कई किताबें मौन हो गयी और उनसे आ मिलीं ! ‘हमारे इस मेले में तुम्हारा क्या काम ?’ रोबदार आवाज़ में एक किताब ने अपने पन्ने खोल कर सवाल किया ! डर विस्मय और मिक्स्ड फीलिंग की वजह से कुछ हॉरर किताबों के अक्षर इधर उधर बिखर के भागने लगे ! कुछ किताबों ने मुझे बाल साहित्य से निकला कोई कठपुतली समझ लिया और पास आ कर मुझे छूने की कोशिश करने लगे ! मुझे लगा मैंने पुस्तक मेले के रंग को भंग कर दिया है ! ‘क्या तुम हमें चुराने आये हो ?’ मोटी किताब ने दूसरा सवाल किया ? मैं कोई जवाब देता इससे पहले एक पतली लंबी गोरी सस्ती फ्रेंच किताब जो अबतक जोर जोर से फुसफुसा रही थीं मुझे देख कर चिल्लाने लगीं ! ‘तुम कोई नयी किताब तो नहीं लिख रहे ?’ अपनी पतली आवाज़ में उसने घबराते हुए पूछा ! उसकी बात सुन कर कहीं से नि:शुल्क बाइबिल दौड़ा हुआ आया और मुझ पर दया बरसाने की प्रार्थना करने लगा ! ज्ञान की इस असली गंगा में मैंने चुप रहना ही ठीक समझा !

थिंक टैंक से निकल कर कुछ गंभीर किताब मार्च करते हुए मुझ तक आये और औपचारिक रूप से मेरा परिचय माँगा ! मैंने कहा मैं शुद्ध पाठक हूँ ! मुझे किताबों से सच्चा प्यार है ! पुस्तक मेला मेरे लिए किसी देवालय से कम नहीं है ! मेरी बात को सुनकर मोटी किताबें जो सबसे ज्यादा गुस्से में थीं उनका सारा पन्ना शांत हो गया ! मेरे पाठक होने के सम्मान में ऑटोग्राफ्ड बुक मेरे पास आकर मुझसे सोशल होने लगे ! मुझे उन पर दया आ रही थी, मुझे उनका सच पता था ! हस्ताक्षर वाले किताब सोल्ड फील कर रहे थे पर वो बिके नहीं थे ! उनकी हालत टोबा टेक सिंह जैसी थी ! वो चाह कर भी मेरा दस्तख़त नहीं ले पा रहे थे ! उन्हें किताब की सीमा कहाँ ख़त्म होती है और पाठक की सीमा कहाँ शुरू होती है इसका भ्रम हो गया था ! वे सब डिप्रेस्सेड थीं और वे पुस्तक मेले में मुक्त हो कर भी अपने आप को अनदेखे खूँटे में बंधा हुआ महसूस कर रही थीं !

मैंने देखा रात में किताबों के लिए पुस्तक मेले का सेल्फी पॉइंट एक भूतहा जगह बन जाती हैं जहाँ कोई भी किताब जाने से डरती हैं ! चुटकुले की किताब क्रिकेट खिलाडियों से किसी बात पर रूठी हुई थीं और बात बात पर हंसने की जगह रो रही थी ! अपने डिजिटल और प्रिंट में होने को लेकर चल रहे गंभीर बहस में हास्य किताबें मौन थीं ! एक शेर के दिल पर लिखी किताब का पेम्पलेट दहाड़ने की कोशिश कर रहा था ! जेएनयू घटना, दिल्ली में वाहन प्रदूषण, वर्तमान सरकार, भारतीय मीडिया, समलैंगिक अधिकारों की किताबों की तस्वीरें लापता हुए लोगों की तरह मेले में चिपकी हुई थीं ! पीछे पुस्तक मेले में कागज़ी घोड़े कलम तोड़ के दौड़ रहे थे ! कुछ घटिया किताबें जो पॉपुलर थी – उनके कैटेलॉगस – रात भर उड़ते रहे ! पेम्प्लेट्स आवारा होती हैं और अपने रीसाइकल्ड नियति की वज़ह से निडर और फ्री होती हैं !

किताबों ने मुझे बताया दुनिया में स्त्रियों द्वारा लिखी स्त्रियों को समझने वाली किताब सबसे ज्यादा बिक रही हैं ! पुरुषों में स्त्री को नए सिरे से समझने की होड़ लगी है ! मेले में पुरुष के सवाल से भरी किताब को किसी ने उठाया भी नहीं ! राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुनाव, मौसम और नया साल का बोलबाला था ! फौजी किताबों की दाल गल नहीं रही थी उसमे कुछ काला था !

मैंने देखा राजनीति से संबंधित एक किताब का सेवानिवृत्त क़िताबों से कोई विमर्श चल रहा था ! दूर एक रौशनी के फव्वारे के पास व्यंग्य की जुगलबंदी चल रही थी जो धीरे धीरे कव्वाली का रूप ले रही थी ! राजनीति, अर्थशास्त्र, कला, संगीत, सिनेमा, खेल की कई किताबें प्रमुख घटनाओं की किताब को ध्यान से सुन रही थी ! पास में ही हिन्दी और धर्म एक साथ नाच रहे थे ! नाचते नाचते वो इतने एक हो गए कि हिंदी और धर्म में भ्रम होने लगा ! समझ में ही नहीं आ रहा था कि धर्म क्या है और हिंदी कौन है ? देखते देखते हिंदी धार्मिक हो गयी और धर्म सिर्फ हिंदी का हो कर रह गया !

एक किताब ने मुझे जो बताया वो बात मुझे पता थी ! उसने कहा देखने की किताब अलग होती है, खरीदने की किताब अलग होती है और पढ़ने वाली किताब बिलकुल अलग ! मेले में उपन्यास, संस्मरण, कहानी-संग्रह, कविता संग्रह, नाटक के साथ इतिहास, भूगोल, ज्ञान-विज्ञान, साहित्य, यात्रा, धर्म, भाषा, जीवन-वृत्त आदि सभी विषयों पर पुस्तकें थीं और ये उनका ही मेला था !

रात भर किताबों के साथ उनकी दुनिया में रह कर मैंने किताबों को थोड़ा और करीब से जाना ! किताबें बहुत कोमल मन की होती है ! पढ़ने का मन न हो फिर भी किसी किताब को कभी ठोकर मत मारिये ! लोगों की ठोकर से किताबें कराहती हैं ! जब आप किसी किताब को बिखरा हुआ देखें उसे समेटने की कोशिश जरूर करें ! किताब से जुड़े हर मामले में कोई न कोई आप का साथ जरूर दे देगा और आप कभी अकेले नहीं रहेंगे ! किताबें ज़िद्दी होती हैं ! दुनिया की हर किताब अपने पढ़े जाने का तब तक इंतज़ार करती हैं जब तक पाठक पढ़ रहे किताब को पढ़ कर ख़त्म न कर दे ! किताबों के पास धरती का धैर्य है ! आप जब भी किताबों से मिलेंगे किताबें कभी आप को निराश नहीं करेंगी ! किताबों में प्रतियोगिता नहीं होती प्रतियोगिता उसे पढ़ने वालों में होती है ! किताबों की आँख नहीं होती वो सबको एक दृष्टि से देखती हैं ! किताबें भोली होती हैं ! पढ़ने वाला अपनी लगाता है वर्ना किताब के पास तर्क शक्ति नहीं होती ! किताबे पढ़ना लिखना नहीं जानती उनके लिए काला अक्षर भैंस बराबर है ! अपने अमेज़न और फ्लिपकार्ट के सपनों के साथ किताबें अब पूरे विश्व में मिलती हैं ! ‘हर किताब, अब विश्वविख्यात’ ये किताबों के लिए नया नारा है !

मेले में सुबह तक मेरी पढ़ी हुई कई किताबें भी मुझसे मिलीं ! पढ़ी हुई किताबों से मिलना बहुत आत्मीय होता है ! पढ़ ली गयी किताब और पाठक के रिश्ते को मैं बाप और बेटी या माँ और बेटी के रिश्ते से कम नहीं मानता हूँ ! किसी किताब को पढ़ कर देखिये, आप को मेरी हर बात सच लगेगी ! किताब और पाठक या पाठिका का अमिट रिश्ता जीवन भर नहीं टूटता है ! पहला पाठक ही हर किताब का पहला प्यार है ! मैं किताबों को एक जीवित भावनाओं का पुलिंदा मानता हूँ ! किताबों में प्राण नहीं होता तो वो हमें हँसाती और रुलाती कैसे ? वो जीवित नहीं होती हैं तो हमारा जीवन कैसे बदलतीँ हैं ? किताबों का मेला नहीं लगता तो हम किताबों से मिलते कैसे ? नयी और पुरानी किताबों से हमारा परिचय कैसे होता ? रात की इस घटना के बाद मुझे एक बात अच्छी तरह समझ में आ गयी है कि हर किताब जाने या अनजाने में आप में एक परिवर्तन जरूर ले आता है ! जैसे पढ़ लिए जाने के बाद किताब एक पाठक पुरानी हो जाती है वैसे ही हम भी किसी किताब को पढ़ने के बाद एक किताब पुराने हो जाते हैं !

सुबह होने लगी थी ! किताबों ने मिल कर मेरे लिए कोरस में ‘हम होंगे कामयाब’ गीत गया और ख़ुशी ख़ुशी मुझे विदा किया ! पुस्तक मेले से लौटते हुए मेरी आँखें पता नहीं क्यों उस बाप की तरह भर गयी थी जो अपनी बेटी को हॉस्टल में छोड़ कर आ जाता है !

मैंने देखा एक पल में सभी किताबें अपनी जगह लौट गयी थीं ! मैं भी अपनी दुनिया में खोने के लिए लौट रहा था ! तभी बाहर से आती हुई एक मानुषी ने मुझसे पूछा ‘बुक फेयर कहाँ है ?’
‘जी ?’ मैं समझा नहीं …! क्या मैं कहीं खो गया हूँ ?’ मेरे मन में ये प्रश्न उठा !
‘बुक फेयर प्लीज ? फेसबुक लाइव करना है, जल्दी कहिये बुक फेयर कहाँ है ?’ उसने मुझे फिर टोका ! वो बहुत जल्दी में थी !
‘यही पुस्तक मेला है !’ मैंने जवाब दिया !
मानुषी ने मुझे ऐसे देखा जैसे साक्षात् प्रेमचंद को देख लिया हो !
क्या पुस्तक मेला और बुक फेयर दो अलग आयोजन हैं ? और अगर ऐसा है तो क्या किताबें ये जानती हैं ? पिंक स्कार्फ़ और स्वेटर उतारते हुए मैं सोचने लगा !
अचानक मानुषी चिल्लाने लगी ‘आए लव बुक्स … आए लव बुक्स !’ और आए लव बुक्स चिल्लाते हुए अंदर की तरफ भाग गयी ! उसे उस किताब का पोस्टर दिख गया था जिसको वो लाइव करने आयी थी ! मैं उसको पुस्तक मेले में जाता हुआ देखता रहा ! क्या पता मानुषी के रूप में अनायास ही मैं भविष्य की किसी लेखिका से सीधा संवाद कर चूका था ! इस कल्पना मात्र से ही मन में गुदगुदी हो रही थी ! मैं किताब के मेले से बच्चों की तरह नाचता हुआ लौट रहा था !

ट्रिविया दास

रेप हुआ तो रेपिस्ट से मिल लिए / फिल्म बनी तो आर्टिस्ट से मिल लिए / गीत बना तो सिंगर से मिल लिए / जिधर भीड़ देखी चल दिए / कोई फोटो नहीं जिससे नहीं मिले / किसी ने कुछ पकाया तो उसे डिश बना के मिल गए / अजनबियों को फ्रेंडशिप बता के निकल गए / शेर को अपना बना लिया / सियार की पीठ ठोक दी / जैसे ही आप मुड़े, हँस के अपनी ही सेल्फी ले ली / वाह रे सोशल जमाना ! यहाँ पहुँचा, फोटो देखिये ! ये खाया, फोटो देखिये ! ये मेरे बगल में खड़े थे, फोटो देखिये ! फोटो के एक फ्रेम में सिमट के रह गया है जीवन अनुभव का विस्तार ! ये ट्रिविया काल है ! सब ट्रिवियल बाते करते हैं ! न पढ़ते हैं, न सुनते हैं, न सोचते हैं, बस टी वी देखते हैं और ट्रीवयल जीते हैं ! एक फोटो फ्रेम में सबका अनुभव संसार समा गया है ! विस्तृत कुछ भी नहीं ! मैं कई ट्रिविया विशेषज्ञ को जानता हूँ जो पचास शब्द में दस लोगों को टैग करते हैं ! ट्रिविया ने सबको अपना दास बना लिया है ! जो हर व्यक्ति, जगह, किताब, फिल्म, कला, संगीत और हर रचना के जादू में एक टूरिस्ट की तरह घुस जाते हैं, अपने पसंद का रायता फैलाते हैं और फोटो खिंचा के निकल जाते हैं ! ऐसे मिस्टर ट्रिविया दास को समर्पित मेरी कुछ ट्रिवियल कविता

ट्रिविया ( एक )

जब थी / मैं था
मेरी / मेरे
कल शाम की बात है /
ये थे, वो थे /
ओह ! मैं भी !

*

ट्रिविया ( दो )

वैसे मैं पिछले बीस-बाइस सालों से उन्हें जानता हूं …
पहली पंक्ति /

कुछ साल पहले उनसे मिला …
इनसे मिला,
उनसे मिला,
गले,
हार …
फोटो !

मैंने कहा कि …
फोटो !
पिछले हफ्ते …
फोटो !
उनका संदेश आया कि …
फोटो !

सुबह …
फोटो !
दोपहर …
फोटो !
शाम …
फोटो !
रात्रि …
फोटो !
मेरे हाथ में …
फोटो !
शुक्रिया ये जी /
शुक्रिया वो जी,
यूं बोले …
मैं बोला
फिर वो बोले,
हम अबोले –
सब पढ़ते हैं !
*

ट्रिविया ( तीन )

ये जी
वो जी
जब ये …
जब वो …
तब से हम /

छह साल पहले
दो दिन पहले
परसों
कल
सब ट्रीवीअल !
*

ट्रिविया ( चार )

बरसों पहले
एक चिट्ठी लिखी
कल छपी
आज सुबह
बहरहाल,
मैं पास में खड़ा हूं !
*

ट्रिविया ( पाँच )

हमारे प्यारे दोस्त
निशांत
विक्रान्त
सूर्यकान्त
सिद्धान्त

मौका मिला
इनके साथ
उनके साथ
सब मैं किया !

सन ’97 अगस्त महीने में,
लगभग साल भर
दोपहर में लंच से पहले …
मैं उन्हें !
मैं,
मैं,
मैं !
छोटे फाॅन्ट में
उनका नाम
बड़े फॉण्ट में मेरा नाम !

मुझे यक़ीन नहीं हुआ,
मुझे मालूम नहीं था …
मैंने सोचा
मुझे लगा
पिछले कुछ सालों से
बीती रात की …

धन्यवाद !
फलाँ बाबु
करीब दो साल पहले …
हम बहुत कम मिले …
लेकिन जब भी मिले …
मेरा / उससे
अफ़सोस … !

और अंत में –
वो होते तो आपको जरूर टैग करते /
मैंने किया …
आपने किया ?

केवल चापाकल,
सब ट्रिवियल !

चुनाव और दंगल

मैं जन्म से नागरिक हूँ, मैं किस राजनितिक पार्टी में जाऊँ इसका चुनाव होने वाला है ! समाचार पाठक ने जबसे मुझे बताया है कि मेरे चुनाव के लिए सभी दल मेरे साथ दंगल करने वाले हैं, मेरी नींद उड़ गयी है ! इंटरनेट पर मैंने देख लिया है देश के करोड़ों नागरिक पहलवान में एक मेरा नाम भी है ! देश के मतदान सूचि में नाम होना किसी महाकाव्य में अपने नाम को देखने जैसा है ! मेरा पूरा नाम, मध्य नाम, अंतिम नाम, आयु, लिँग, जन्म तिथि, राज्य, जिला, शहर, गांव, जन्म स्थान, घर का दरवाजा – नंबर, स्ट्रीट, क्षेत्र, मोहल्ला, डाकघर, पिन कोड, थाना, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, चुनाव आयोग के पास है ! मतदाता सूची में नाम होने की वज़ह से अब मैं इस दंगल से बच नहीं सकता ! बुद्धिमान बुद्धिजीवी लोग वोट देने क्यों नहीं जाते हैं मेरी समझ में आ गया ! हमारे देश में अधिक वजन और मोटापे से ग्रस्त लोगों की संख्या अधिक क्यों है इसका कारण भी मुझे समझ में आने लगा है ! इस चुनावी दंगल के लिए नागरिक पहलवान अपने शरीर के साथ पांच साल की तैयारी करते हैं, और पहलवान से दिखते है ! दंगल में कोई हारना नहीं चाहता ! चुनाव और दंगल, मतलब फिट टू फैट तक की जर्नी और जंगल में मंगल !
मैं उचित शारीरिक स्थिति में हूँ ! सात मिनट में एक मील चल लेता हूँ पर पहलवान के आकार का नहीं हूँ ! सभी पार्टियों के पहलवानों की सूची जारी हो रही है ! उम्मीदवारों की तस्वीर और उनके यश की कद काठी देख कर मुझे डरावने सपने आने लगे हैं ! न जाने क्यों मेरे मन में राजनितिक पार्टीयों द्वारा आम आदमी के साथ अब तक किए गए मोलेस्टेशन का दंगल शुरू हो गया है ! आँख लगते ही अखाड़े में पहुँच जाता हूँ जहाँ मेरी पसलियां टूट जातीं है, घुटने घायल हो जाते हैं और मेरी नींद उचट जाती है ! मुझे अपनी बॉडी कमज़ोर लगने लगी है ! मैं शुद्ध शाकाहारी हूँ और मैंने कभी वज़न नहीं उठाया है !
अगले दिन मैं एक फिटनेस ट्रेनर के सामने बैठा था ! ‘एक नागरिक पहलवान के साथ दंगल करने के लिए हर राजनितिक उम्मीदवार अपने ऊपर बीस से अठ्ठाईस लाख रुपये खर्च कर रहा है ! आप का बजट क्या है ?’ उन्होंने पूछा !
‘जी ? ‘ जिम की इतनी फीस होगी मैंने सपने में भी नहीं सोचा था ! मैं चुप हो गया था ! मुझे गौर से देखते हुए उन्होंने कहा ‘उम्मीदवारों के सामने टिके रहने के लिए आप को नए उपाय सोचने होंगे ! आप का अकॉउंट किस वोट बैंक में है ?’ उन्होंने पूछा ! ‘स्टेट बैंक में’ मैंने जवाब दिया !
‘सबका स्टेट बैंक एक है ! आपका वोट बैंक कौन सा है ?’
मैं ब्लेंक था ! वो संमझ गए कि इस दंगल में मैं नया पहलवान हूँ !
‘नाश्ते में क्या करूँ ?’ सवाल करने की मेरी बारी थी !
‘नाश्ते में विचार कीजिये !’
‘वो तो डिनर में किया था’ मैंने जवाब दिया !
उन्होंने मुझे निहारते हुए जवाब दिया ‘यही प्रॉब्लम है, आप ने ज्यादा विचार किया ! आप कैसा शरीर चाहते हैं ?’
‘मैं बस दंगल जीतना चाहता हूँ !’
‘आप को समय देना होगा !’
‘मेरा पूरा समय ले लीजिये … ‘
‘आप बेरोज़गार हैं ?’
‘जी नहीं मैं लेखक हूँ !’
‘जी एक ही बात है …’ उन्होंने कहा !
मैं अवाक था !
‘रिजल्ट कब से आना शुरू हो जायेगा ?’ मैंने पूछा !
‘ग्यारह मार्च को’
‘जी ?’
‘ओह , बॉडी ? आप की बॉडी अगले चुनाव तक बन जाएगी !’
‘और इस दंगल में ?’
‘इस दंगल में कसरत से शरीर बनाना असंवैधानिक हैं ! इस दंगल में आप बस हमारा साथ दीजिये !’ मेरे फिटनेस ट्रेनर ने कहा स्वस्थ जीवन शैली, व्यायाम, पोषण, आदि का ज्ञान मुझे वोट बैंक में मिल जायेगा ! पूछता पूछता मैं वोट बैंक पहुँच गया ! वोट बैंक स्वचालित रूप से डिफ़ॉल्ट राष्ट्रीय हित है ! इस बैंक को सब लोग संदेह की नजर से क्यों देखते हैं मुझे नहीं पता ! वोट बैंक में ब्याज दर सबसे अच्छा है !
‘आप किस नाम और निशान से अकाउंट खोलना चाहते हैं ?’
‘जी मैं अपने नाम से अकॉउंट खोलना चाहता हूँ !’ वो मुस्कुराये ! मैं भी मुस्कुरा दिया !
वोट बैंक में पता चला आहार के लिए इन्टरनेट और कैशलेस इकॉनमी है ! प्रोटीन गूगल पर है ! यूट्यूब पर हर व्यायाम है ! स्वस्थ शरीर के लिए बस खुश रहना जरुरी है !
अगले दिन सुबह समाचार पाठक ने ओपिनियन पोल में बताया कि चुनाव दंगल में मैं जीत रहा हूँ ! मैं अपनी जीत से चौंक गया ! न मैं बूथ पर गया था न अखाड़े पर फिर बिना दंगल लड़े और अखाड़े पर गए मैं जीत कैसे गया ?

चुनाव और दंगल

कैशलेस इकॉनमी का पहला कदम

काले धन पर अंकुश लगाने जब मैं कैशलेस की दिशा में चलने लगा तब मैंने महसूस किया मेरा कोई पीछा कर रहा है ! मैंने देखा साइबर अपराधी बैंकों के डेटाबेस लिए छुप के खड़े थे उन्होंने मुझे देख लिया था और मेरा पीछा कर रहे थे ! नज़र बचा कर साइबर अपराधियों से बचने के लिए मैं पांच सौ और हज़ार की खाली जगह में जा कर छुप गया ! हज़ार पाँच सौ के खाली गढ्ढों में बहुत शोर था वहाँ ड्रग्स, तस्करी, दांव, डकैती, कर चोरी, रिश्वतखोरी सब अपना सर पीट के रो रहे थे ! नकदी जो अभी भी छोटे मूल्य के घरेलू भुगतान में काम आ रहा था, मुझे साइबर अपराधियों से छुपते देख लिया और रेंगता हुआ मेरे पास आ गया ! ” जरा सोचो, आपकी कोई लीकेज और भ्रष्ट practices हो तो याद करो ” नकदी मुझसे फुसफुसा के बात करने लगा ! “व्हाट ?? ” मैंने चिढ के कहा ! ” जरा सोचो, आपकी कोई लीकेज और भ्रष्ट practices हो तो याद करो ” नकदी मुझसे फुसफुसा के फिर बोला ! मैंने उसकी तरफ देखा और कोई जवाब नहीं दिया ! हम दोनों की नज़रें मिलीं और एक साइलेंट पल बीत गया ! वो बस मुझे मुस्कुराता हुआ घूर रहा था ! ” डिजिटल प्रणाली का कोई मुकाबला नहीं है फिर भी मुझे डिजिटल लेनदेन से क्यों डर लगता है ? ” मैंने पूछा ! ” यहाँ बहुत सी बातें अवैध हैं ” नकदी ने कहा ! ” डिजिटल लेनदेन से डरते क्यों हो ? कैशलेस इकॉनमी में और कोई रास्ता नहीं है ” मैंने इशारे से साइबर अपराधियों की तरफ़ इंगित किया ! उसने मुझे ऐसे देखा जैसे वहां कोई न हो ! ” जरा सोचो, आपकी कोई लीकेज और भ्रष्ट practices हो तो याद करो ” नकदी मुझसे फुसफुसा के तीसरी बार फिर बोला ! मैं समझ गया नकदी नोटबंदी से डिप्रेस्सेड हो कर अपना मानसिक संतुलन खो रहा है !
नकली मुद्रा के खतरे से बचते हुए सामने से किसी देश की एक कैशलेस अर्थव्यवस्था चली आ रही थी ! उसके साथ क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और ऑनलाइन बैंकिंग भी चल रहे थे ! सफेद और शुद्ध अर्थव्यवस्था देखने में बहुत सुंदर लग रही थी ! नकदी और मैं हज़ार पाँच सौ के जाने से बने गड्डों में साइबर अपराधियों से बचने के लिए ये विद्रूप तमाशा देख रहे थे !
” उठो, देखो एटीएम में पैसा आ गया है ! सब अपना कार्ड स्वाईप करने जा रहे हैं ! जाओ बैंक से पैसे भर लाओ ” पत्नी ने जगा दिया और कैशलेस इकॉनमी का मेरा डरावना सपना टूट गया ! बैंक जाने के लिए जब मैं घर से निकला तो बाहर लेन – देन का कर्कश रिकॉर्ड बज रहा था ! बैंक की लंबी यात्रा के लिए पाँव नहीं उठ रहे थे …

रामनवमी से कैशलेश इकोनॉमी तक

कैशलेश इकोनॉमी

आठ नवंबर को आठ बजे की उद्घोषणा के बाद नवमी तिथि से सब कैशलेस होना शुरू हो गए, राम का नाम ले कर नवम्बर नवमी से नए रामराज्य की शुरुआत हो गयी ! नए रामराज्य की यात्रा रामनवमी से कैशलेश इकोनॉमी तक की है ! पुराने रामराज्य में ज़ुबान एटीएम से कम नहीं था, जो बोल दें मिल जाए ! इसीलिए रामायण में चरित्र वरदान दे और ले रहे थे, कहीं एटीएम का कार्ड नहीं दिखता, कहीं एटीएम का कियोस्क नहीं दिखता, बस सब जुबानी चलता था ! शिक्षा देनें वाले वशिष्ठ गुरूजी भी बच्‍चों के सिर के हिसाब से गुरू दक्षिणा धान – चना – मुर्रा – लाई के रूप में ले लेते थे ! पुराने रामराज्य में कैशलेश इकोनॉमी थी और सब राम भजते थे ! ज्यादातर कैशलेस ट्रांजैक्शन के लिए यूजर्स को अच्छी स्पीड वाले इंटरनेट की जरुरत होती है, राम राज्य में अयोध्या से पंचवटी तक पूरा जंगल ही वाई फाई था ! रामराज्य में शबरी के बेर की क़ीमत ,राम सेतु बनाने में बानरों की तनख़्वा, नाँव के केवट का शुल्क सब कैशलेस हुआ ! वनवास में सीता राम और लक्ष्मण के पास लगभग कोई लगेज नहीं था क्योंकि वो कैशलेस थे ! वन जाते समय उर्मिला ने तो अपना कार्ड भी लक्ष्मण को देकर कैश की चिन्ता से निश्चिन्त हो कर सो गयीं ! रामराज्य में राम भरोसे राज्य को छोड़ कर भरत भी कैश की चिंता से मुक्त हो गए और गद्दी पर खड़ाऊँ रख दिया ! पुराने रामराज्य में कैशलेश इकोनॉमी को लेकर संसद में कभी हंगामा नहीं हुआ ! रामराज्य में कैशलेस इकॉनमी से आम लोगों को कभी परेशानी नहीं हुई, जन आक्रोश आंदोलन नहीं हुआ ! कैशलेस ट्रांजैक्शन के लिए स्मार्टफोन, पर्सनल कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्टिविटी की जरूरत तो होती है पर नए रामराज्य में कैशलेश इकोनामी की सब बेसिक समस्याएं हनुमान जी दूर करेंगे !

कैशलेस देश बनने से काले धन को रोकने में काफी हद तक कामयाबी मिलती है जैसे लंका पहुँच के हनुमान जी को पता चला रामराज्य का सारा कालाधन सोने की लंका में था और उन्होंने आग लगा दी ! नए रामराज्य में अपनी लंका अपने सोने से बनाने में जनता जुटी है ! कैशलेस इकॉनमी में बैंक के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के जरिये लेन-देन करने में वक्त भी बचता है, जिसे हम लाइन में खड़े – खड़े काले धन का राम नाम सत्य हो कह कर बिता सकते हैं, कैशलेस इकॉनमी में दो चार घंटे का कोई मोल नहीं ! रामराज्य में साइबर सिक्योरिटी मजबूत थी ! फिर भी डेटा प्रोटेक्शन में सेंध मार के थोड़ी गड़बड़ी रावण ने कर दी और रामराज्य की लक्ष्मी सीता को ले कर भाग गया पर वो भी जरुरी था, नहीं तो साइबर क्रिमिनल रावण मरता कैसे ?

मानो तो देव नहीं तो पत्थर ! जो भी चाहें नाम दे दें, प्रकृति कैशलेस इकॉनमी से ही चलती है ! पृथ्वी से बनी गंध, जल से बनी रसना, तेज़ से बनी आँखें, वायु से स्पर्श बना, आकाश से बने श्रुति और शब्द ! पंचभूतों से बनी हमारी पाँचों इन्द्रियाँ भी कैशलेस ही चलती हैं ! कैशलेश इकोनॉमी की माँग ने सिद्ध कर दिया कि जीवन और दुनिया के माध्यम से कैश चलता था, कैश से दुनिया और जीवन नहीं चल सका !

कैशलेश इकोनामी के राम राज्य में सभी पुरुष मात्र एक कार्ड – व्रती थे ! इसी प्रकार स्त्रियाँ भी मन, वचन और कर्म से अपने एक कार्ड से ही अपना हित करने वाली थीं ! कैशलेस इकॉनमी के नए रामराज्य की अर्थव्यवस्था में सिर्फ़ राम के अर्थ की व्यवस्था है बाकी सब ठन – ठन गोपाल !

कैशलेश इकोनॉमी का सपना लिए नए रामराज्य का नकदहीन समाज कैशलेस दुःख और कैशलेस दर्द में छटपटाने लगा है ! आये थे रामभजन को ओटन लगे कपास ! जनता न कैश की रही न कार्ड की ! ये सच है नकदहीन समाज में दण्ड केवल फकीरों के हाथों में है और हमारे बीच भी अब कैशलेश इकोनॉमी का एक फ़क़ीर हैं !

कैशलेश इकोनामी का राम राज्य होते ही सर्वत्र हर्ष व्याप्त हो जाएगा, सारे भय – शोक दूर हो जाएँगे एवं दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति मिल जाएगी ! कोई भी अल्पमृत्यु, रोग – पीड़ा से ग्रस्त नहीं रहेगा, सभी स्वस्थ, बुद्धिमान, साक्षर, गुणज्ञ, ज्ञानी तथा कृतज्ञ हो जाएँगे !

राम राज्य में सब कैशलेस थे पर कोई थैंकलेस नहीं था ! नए रामराज्य में सब थैंकलेस हैं अभी कैशलेस कोई नहीं ! जहाँ कैशलेस इकॉनमी में चिल्लर सिर्फ़ मोबाइल एप्लीकेशन है वहाँ नया रामराज्य पूरी तरह से कैशलेस नहीं बन पायेगा, लेकिन धीरे धीरे राम भरोसे कुछ हद तक होमलेस और जॉबलेस के साथ नया रामराज्य कैशलेस भी हो जाएगा !

सर्दी की वापसी

मौसम

जबसे ऑस्कर विजेता अभिनेत्री जुलिया राबर्ट्स ने हिंदूू धर्म अपना लिया है मेरा मौसम पर से विश्वास उठ गया है ! मैंने सोचा इससे पहले ये सर्दी का मौसम गर्मी में बदल जाए इसे लौटा देना चाहिए ! इस बीच वापसी की अफवाहें काफी तेज हो रही थी, कोई घर वापसी कर रहा था तो कोई नोट ! कन्फर्म ट्रेन टिकट, क्रिकेट, फिल्म, जेल, सत्ता, संन्यास, टेलीविजन, राजनीति, ऋण, धर्म, पुरस्कार से ले कर दिए गए ज़ुबान तक की लोग वापसी कर रहे थे ! मैं भी सर्दी वापसी के लिए एक दिन मौसम डिपार्टमेंट में पहुँच गया ! सर्दी की वापसी के लिए मैं मौसम केंद्र में समय से पहले पहुँच गया था ! कोई लाइन नहीं थी ये देख कर मैंने अपनी ज़ेब टटोली और खाली जेब से मुझे याद आया मैं बैंक में नहीं हूँ ! एक लाईन से निकलकर दूसरी लाईन में लगना ही जीवन का सार है, भारतीय नागरिक के रूप में ये बात मैं अच्छी तरह जानता हूँ ! तब तक काउन्टर खुल गया था !
” मुझे सर्दी से शिकायत है, सर्दी की वापसी करनी है ” मैंने कहा !
” आप हमारे ऑनलाइन स्टोर से खरीदे गये उत्पादों से बहुत खुश होंगे ” जवाब आया !
” हर विवरण झूठा है, मौसम की मार से मैं परेशान हूँ ,आप मुझसे मेरी सर्दी वापस ले लें, मुझे सर्दी नहीं चाहिए ” मैंने कहा !
” आपने इस सर्दी के लिए कितने रुपये भरे थे ? ”
” मैंने तो रुपये नहीं भरे ! मुझे लगा मौसम मुफ्त में मिलता है ”
” रुपये नहीं भरे ? ”
” नहीं ”
” ठीक है फिर फॉर्म भरिये ”
यंग मैन ने मुझे ग़ौर से देखा और बोला ” सर्दी साथ लाये हैं ? ”
” जी ” मैंने कहा !
” कहाँ है ? ”
” नाक में भरा है ” मैंने भारी आवाज़ में जवाब दिया !
” ये क्या हाल बना रखा है, कुछ लेते क्यों नहीं ? ” अचानक उसके मुँह से ये सुना सुनाया वाक्य निकला ! सर्दी से मेरी आँखें भर गयी ! उसने समझा मैं भावुक हो गया हूँ ! उसने मुझे टच किया और वो टच्ड हो गया, पर रोने की जगह छींकने लगा ! ” सर आपकी सर्दी स्ट्रांग है ” कहते हुए उसने रुमाल निकाला ! देखा देखी मैंने भी रुमाल निकाल लिया ! रुमाल के साथ हम दोनों ने लगभग एक ही एक्शन किया !
” आप क्रेता हैं या विक्रेता ? ”
” मैं आम आदमी हूँ ”
‘आप’ हैं ?
” जी, मैं हूँ ”
‘आप’ पार्टी कार्ड लाये हैं ?
यंग मैन ने जैसे मेरी तरफ देखा मैं समझ गया कुछ गड़बड़ है !
” मैं आम आदमी हूँ, पर दिल्ली वाला आम आदमी नहीं, देश के कार्टून वाला आम आदमी हूँ ”
मैंने कहा ! फिर लगा आम आदमी कह कर गलती कर बैठा हूँ ! भक्त हूँ कह देता तो शायद काम बन जाता ! आम आदमी या भक्त ? भक्त या आम आदमी ? मेरा ये कॉन्फ्लिक्ट मुझे परेशान करने लगा ! उसने मेरा चेहरा पढ़ लिया !
” क्रेता और विक्रेता के बीच एग्रीमेंट के बाद जो पंजीयन शुल्क जमा होता है, वह वापसी के समय वापस किया जाना चाहिए। जब दोनों पक्ष संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए आते हैं उस दौरान पंजीयन के लिए जमा राशि की रसीद कार्यालय में पेश करनी होती है। उस रसीद नंबर के आधार पर ही क्रेता के खाते में पैसे ट्रांसफर किए जाते हैं। जब से ई-रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू हुई है, तब से किसी भी वापसी में आए-दिन कोई न कोई समस्या आ रही है। सॉफ्टवेयर में त्रुटि के कारण कई क्रेताओं को पंजीयन राशि वापस नहीं मिल रही है। रजिस्ट्री होने के बाद भी पैसे वापस न मिलने पर महानिरीक्षक,पंजीयन एवं मुद्रांक के लिए दिल्ली कार्यालय आवेदन करना होता है। उसके बाद भी पैसे मिलने की प्रक्रिया काफी लंबी है। इसके चलते अपनी रकम पाने के लिए क्रेता को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है ! आपकी सर्दी तो मुफ्त की है हम ये नहीं ले सकते ”
एक सांस में वो सारी बात कह गया ! मुझे कुछ समझ नहीं आया ! मेरे भीतर से भक्तिकाल की आवाज आयी और मैं चीख पड़ा ” यह लैं अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहिं नाच नचायो, मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो ” यह सुन कर यंग मैन मुझे आश्चर्य से देखने लगा और मुस्कुराने लगा ! ” आप तो भक्त हैं ” उसकी ये बात सुन कर मैं सिहर गया !
” सर ये इ – कॉमर्स का मामला है ! आपको अच्छी तरह समझना होगा ” मुस्कुराते हुए उसने कहा ” वापसी का अनुरोध फॉर्म भरिये, यह है वापसी की प्रक्रिया ” एक सी डी देते हुए उसने आगे कहा ” कल इसे देख कर आइयेगा ! यह कार्यक्रम सर्दी के मौसम की आम जानकारी देता है और साथ में ये फॉर्म फिल कर के लाइयेगा ” मैंने जी के आकार में सर हिलाया ! ” हम भक्तों के लिए नया मौसम ले के जल्द ही वापस आ रहे हैं, आपका स्वागत है ! ” उसने कहा ! मैंने भी सोचा रिटर्न और रिफंड से किसका मन भरता है, लोग करते ही रहते हैं ! पर आँखों से निकल कर आँसुओं की वापसी कभी नहीं हुई, आँसू चाहे दुःख – सुख के हों या सर्दी के ! पता नहीं मैं हंस रहा था या रो रहा था ! बैंक में पैसे नहीं थे और मेरी जेब खाली थी, सर्दी से मेरा बुरा हाल था ! मैंने मौसम विभाग में यूँ ही टाइम पास के लिए लाइन लगाने की ठानी, बदले में मुझे एक फॉर्म भरने के लिए मिला और मौसम की जानकारी वाली जुलिया राबर्ट्स की कोई सी डी !

एंग्री सोशल मैन

एंग्री सोशल मैन गुस्से में खड़ा ही रहता है !
एंग्री सोशल मैन राष्ट की इज्जत को की – बोर्ड में रखता है !

एंग्री सोशल मैन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पुतला है !
एंग्री सोशल मैन का गुस्सा ऑड – ईवन नहीं होता !
एंग्री सोशल मैन अपना गुस्सा अपने पोस्ट पर पब्लिक कर देता है !
एंग्री सोशल मैन सच्चा देश भक्त है !
एंग्री सोशल मैन जे एन यू को गाली देता है !
एंग्री सोशल मैन का डायजेस्टिव सिस्टम इंटेलेक्टयूएल का पाखण्ड, विरोध का अपच, विचारधारा का अजीर्ण भी डाइजेस्ट कर लेता है !
एंग्री सोशल मैन बकचोदी नहीं करता !
एंग्री सोशल मैन आमिर खान की फ़िल्म को बायकॉट करता है !
एंग्री सोशल मैन भारत माता की जय नहीं बोलता !
एंग्री सोशल मैन विनम्र श्रद्धांजलि भी गुस्से में देता है !
एंग्री सोशल मैन किसी गुमनाम लड़ाई में सबकी मदद करता है !
एंग्री सोशल मैन रिएक्ट कर के अंड बंड, अकर बकर, अंट शंट, आलतू फालतू, बातें नहीं करता !
एंग्री सोशल मैन का गुस्सा ब्रेक नहीं लेता !
एंग्री सोशल मैन का बस नाम ही पढ़ते रहते हैं,
एंग्री सोशल मैन मिस्टर इंडिया है !

एंग्री सोशल मैन की तस्वीरों के पीछे माओत्से झांकते हैं !
एंग्री सोशल मैन रविश कुमार को गाली देता है !
एंग्री सोशल मैन महान गुप्त गतिविधियों में लिप्त रहता है !
एंग्री सोशल मैन के अनुयायी गलियों में नहीं गालियों में सबका पीछा करते हैं !
एंग्री सोशल मैन मुठ्ठी तान नहीं सकता, उसकी मुठ्ठी में फ़ोन रहता है !

एंग्री सोशल मैन शेयर का चहेता, लाइक का प्रेमी, कमैंट्स का फॉलोवर, और सोशल मिडिया का जंतर – मंतर है !
एंग्री सोशल मैन हर सोशल प्लेटफार्म पर गुस्से में ही मिलेगा !
एंग्री सोशल मैन वर्चुअल दुनिया में हँसता है !
एंग्री सोशल मैन का गुस्सा उसके ‘फ्रेंड्स’ झेलते हैं !

दी लास्ट शो

हज़ार

हज़ार

पांच सौ

शो बीच में ही रुक गया ! सर्कस की दुनिया में भारत सर्कस का कैश शो देखने दुनिया आती ! कैश का सर्कस, सर्कस का सबसे खतरनाक खेल था ! यह खेल हृदय रोगियों और बच्चों के लिए नहीं था फिर भी वे सब शो में हिस्सा लेने आते थे ! कैश शो में पांच सौ हज़ार को ड्रम्स में भर – भर के डायनामाइट से उड़ाया जाता और खिलाडी बने दर्शक जान पर खेल कर रुपयों को घर ले जाने के लिए लूटते ! यह एक हॉरर खेल था और रात में अकेले खेलने के लिए उचित नहीं था ! फिर भी सरकस के लास्ट शो में इसे लोग खेलते थे ! अमीर जीवन जीने के लिए लोग सर्कस का ये शो खेलने और देखने आते ! शो का ऐसा असर होता कि दरिद्र दर्शक धनी हो जाते !  सबकी जेब में एक – एक हज़ार का और एक – एक पांच सौ के नोट आने की सर्कस के जोकर्स की चेतावनी सच हो जाती ! खेल का यही चमत्कार था ! इसीलिए भारत सर्कस दुनिया का सबसे अनोखा सर्कस था !

सर्कस में यही एक शो था जिसे जोकर्स भी बैठ के देखते थे ! खेल शुरू हो चूका था ! हवा में लटकते हुए गुल्लकों में जोकर्स बैठे थे ! उनके बैठने की यही जगह थी ! वे गिरती चवन्नी की झन की आवाज़ के साथ मंच पर गिरते हुए एंट्री लेते ! वो ऐसे थूकते कि चवन्नी का भ्रम होता ! लोग जब उन्हें उठाने के लिए झुकते तो वे खूब हँसते ! कैश के इस ख़तरनाक खेल में अठ्ठनी और चवन्नी जोकर्स बनते थे ! चवन्नी को लेकर सीरियस होना फज़ूल है इसलिये सर्व-सम्मति से सर्कस में खिलाड़ी दर्शकों ने उन्हें जोकर मान लिया था ! हर रात कैश के खेल का शो कौड़ियों से शुरू हो कर लाखों करोड़ों तक पहुँच जाता ! हज़ार पांच सौ कैश शो के हीरो थे !

इस खेल को देखने से पहले जोकर्स सर्कस के दर्शकों के लिए एक भविष्यवाणी पढ़ते थे ! भविष्यवाणी के शब्द थे  ‘लार्ड कुबेर इलेक्ट्रॉनिक मनी ले कर आएँगे ! मिस्टेक होता जायेगा, कर्रेक्शन्स आते जायेंगे ‘ ! इन खेलों को देखने के लिए जमाखोरी, सूदखोरी, मुनाफाखोरी जैसे दर्शनों से सर्कस के दर्शक को गुप्त परिचय कराया जाता ! जोकर दर्शकों का चेहरा पढ़ते और कान में आ कर उन्हें बताते कि वे कंजूस हैं या कामचोर ! दर्शक अपने बारे में सुनकर डरने का अभिनय करते हुए हँसते ! फिर सब हंसने लगते ! शो आगे बढ़ जाता !

खेल में बनिए और बिचौलिए बनावटी और दिखावटी नाम के चरित्र बनते ! कैश के शो के क्लाइमेक्स में हज़ार पांच सौ मिल कर बनावटी बनिए और  दिखावटी बिचौलिए की मदद से काले धन की निर्ममता से नकली हत्या करते थे ! मंच पर ये थ्री डी के लाइट इफ़ेक्ट में होता जिसकी गंभीरता का काला हास्य भीड़ समझ लेती और सर्कस के लास्ट शो में सब खूब हँसते और शो ख़त्म होने के बाद हँसते हँसते कैश ले कर अपने अपने घर जाते !

आज कैश शो बीच में ही रुक गया था ! हज़ार पांच सौ जैसे सुपरस्टार के मंच पर रहते रहते सब मिलकर हज़ार पांच सौ पर हंसने के लिए इतने चुटकुले बना लेंगे लोगों ने कभी सोचा नहीं था ! कैश शो के रुकते ही दर्शक दीर्घा में बैठे सर्कस के दर्शक की भीड़ कोरस में रोने लगी और रोते रोते हंसने लगी ! भीड़ की सोशल मीडिया पर सारे तर्क शास्त्री अर्थ शास्त्री बन गए ! कैश ट्रैश हो गया ! रातों रात पांच सौ हज़ार हैश टैग बन गए ! करोड़ कौड़ी हो गया ! हज़ार पांच सौ कैश के शो में चलेबल – रनेबल था, मंच पर अचानक अनेबल हो गया ! भीड़ आपस में बैठ कर तरह – तरह की चिंताएं करने लगी ! दर्शक जहाँ थे वहीँ बैठे बैठे अपने शब्दकोश बनाने लगे ! विचार प्रसारित करने लगे ! दर्शकों में बैठे शराबी अपनी जेबों की नोटों के साथ बच्चों की तरह खेलने लगे और हज़ार के नोट में चखना भर के सेल्फी लेने लगे ! हज़ार इससे ज्यादा पहले कभी अपमानित नहीं हुआ था ! अपनी नज़र में वो दलालों के क़दमों से भी नीचे गिर चूका था ! कैश शो के रुकते ही मंच पर हज़ार पांच सौ दोनों खड़े थे ! पाँच सौ का मुंह उतर गया था ! हज़ार अवाक था !

अभी अभी हज़ार पांच सौ को बीच शो में ही नौकरी से निकाल दिया गया था ! अब तक जो शो का वी आई पी था एक पल में बेसाहारा बन गया था ! सर्कस की कुरूप सच्चाई आज हज़ार पांच सौ के सामने थी ! हज़ार पांच सौ को लगा अब तक उनकी की गयी चापलूसी और भीड़ से मिले चरण स्पर्श का ऋण वे भाषण दे कर ही अदा कर सकते हैं ! चाकरी छोड़ कर मंच पर से उतरने से पहले पांच सौ ने सर्कस के आयोजकों से माइक ले लिया और मौन हो गयी ! ‘ एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर मुझे कूदना सीखाने से ले कर इस खतरनाक खेल तक मुझे किसने पहुँचाया ? ‘  सबने पहली बार रुपये को बोलते हुए सुना ! रुपया उनसे बात करे कईयों के गले से ये बात नहीं उतरी ! भीड़ में बैठे  इंटेलेक्चुअल्स पांच सौ को भाषण देते हुए देख कर हज़ार पांच सौ को उसके मुँह पर ही कोसने लगे ! हज़ार पांच सौ को ये महसूस हो गया कि सब उनसे एक पल में दूर हो गए हैं और नफरत करने लगे हैं ! हाथ का मैल कह कर उनसे हाथ झाड़ने लगे हैं ! हज़ार पांच सौ का दिल टूट गया ! और वो कराहने लगे और बारी बारी से माइक पर अपने दिल की बात करने लगे ! “ इंटेलेक्चुअल्स मुझे क्यों कोस रहे हैं ? बुद्धिजीवी मुझे क्यों गालियाँ दे रहे हैं ? मुझे समझने में आप कहाँ चूक गए ? मुझसे क्या भूल हुई ? “ पांच सौ बोली ! “ इंटेलेक्चुअल्स देश के मूड को पढ़ने में नाकाम क्यों रहे ? “ अब बोलने की बारी हज़ार की थी ! हज़ार का स्वर सपाट था जैसे कहीं कुछ हुआ ही न हो ! “ मेरी कंडीशनिंग किसने की ? जीने के लिए आग पर चलना मुझे किसने सिखाया ? मेरा स्वामी कौन था ? मेरे धारक कहाँ गए ? मेरे धारक … मेरे धारक  “ इतना कह कर दोनों एक साथ रोने लगे ! अब तक पांच सौ और हज़ार भीड़ में फेनोमेना थे पर अब शो के बीच में ही मंच पर अनाथ मेमना हो गए ! दर्शकों की भीड़ ने न जाने क्या सोच कर कुछ पल तक उनको रोने दिया ! भीड़ की अब यही सहानुभूति उनके लिए बची थी, जो उन्हें भीड़ से मिल रही थी !  हज़ार पांच सौ भौचक्के थे ! अचानक उनसे कोई डर नहीं रहा था ! सब तरफ से रिजेक्ट होते देख कर, पाँच सौ ने फिर कहना शुरू किया ! ” सर्कस संघ का शुक्रिया ! सर्कस सोसाइटी वाले, मेरे खेल प्रेमियों, मेरी एक आखरी इच्छा जरुर पूरी करना ! संस्कृति के नुक्कड़ों पर न रख सको तो कम से कम किसी चौक चौराहे पर मेरे नाम से कोई सड़क या चौराहा जरूर बनवा देना “ दोनों एक पल के लिए मौन हो गए ! सब मौन थे ! जसे श्रधांजलि देने में होते हैं ! “ दे दे मेरा पांच रुपैया बारह आना …”  गाते हुए पांच सौ रोने लगी और सबको भावुक कर दिया ! भीड़ ये गीत गुनगुनाने लगी ! तालियाँ बजी ! हर्ष ध्वनि हुआ ! पांच सौ की आँखें डबडबा गयीं ! सब कुछ बहुत नाटकीय हो गया ! भीड़ का समाज एक झटके में नए खेल के लिए तैयार हो गया था ! पांच सौ और हज़ार अब तक जहाँ पूंजीवाद के नाम पर यूज्ड हो रहे थे अब उसी नाम पर वहीँ अब्यूज़्ड होने लगे !  नाटक शुरु होने से पहले जो नाटक होता है वो शुरू हो चूका था ! आम लोगों के साथ खाने, पीने और घूमने का सबसे ज्यादा पोलिटिकल स्टंट किसने किया है ? लोग ये गूगल करने लगे ! उत्तर में पांच सौ हज़ार का नाम सबसे ऊपर था ! प्रशंसा युग के चाटुकार पत्रकारिता काल में रुपया को बचाने कोई नहीं आया गुजरे वक़्त से सारे रिश्ते टूट चुके थे !

खेल में परदे के पीछे बैठा हुआ काला धन ये सब अपनी आँखों से देखने के लिए घबराया हुआ दौड़ा दौड़ा ग्रीन रूम से मंच पर आ गया और अचानक हांफता हुआ स्पॉट लाइट में फंस गया ! वो पहली बार सबको साफ़ दिख रहा था ! काले धन को मेकअप करने का मौका नहीं मिला था ! वो अपनी सादगी में भी भयानक लग रहा था !

आज सर्कस के कैश शो के बीच में ही 8 बजे भारत सर्कस के प्रमुख की एक घोषणा ने खेल बदल दिया ! भारत सर्कस के प्रमुख की बात किसी सरकारी कानून से कम नहीं था ! प्रमुख सर कह रहे है तो सही ही कह रहे होंगे भीड़ ने सोचा और उनकी हर बात कानून हो कर लागू हो गया ! हज़ार पांच सौ आज आधी रात से अब चाकरी में नहीं होंगे ! चलता हुआ कैश शो बीच में ही रुक गया !

आना, सवैया, पहाड़े में ज़िंदगी का हिसाब लगाने वाला समाज पनियाही आँखों से सर्कस का ये लास्ट शो देख रहा था ! कैश शो के रुकते ही भीड़ शो ख़त्म होने के उल्लास में ताली बजा कर हर्ष ध्वनि में चिल्लाने लगी ! अफरा – तफरी में सब उल्टा पुल्टा होने लगा ! लोग टेलीविज़न में छपने लगे और अख़बार में दिखने लगे ! डिजिटल होते हुए देश के डिजिटल शून्य और डिजिटल एक, भीड़ को चीर कर सामने मंच पर आ गए और मंच का संचालन करने लगे ! भीड़ ने अपने विचार प्रक्रिया से पांच सौ हज़ार को तत्काल हटा दिया ! सबकी नज़रों के सामने भीड़ धीरे धीरे डिजिटल अंक में बदलने लगा !

सर्कस का अर्थशास्त्र जोकर ही समझ सकता है, भीड़ भरे किसी शो का कोई बेपरवाह दर्शक नही ! आगे बढ़ कर चवन्नी – छाप जोकर्स ने ही नया डिजिटल शो संभाला ! अपने पुश्तैनी भारत सरकस में इन जोकरों का इतिहास चवन्निया मेम्बरी से ही शुरू हुआ था ! जोकर अपने गुलाबी और बैंगनी कपड़ों में मिल कर दस रूपये की साइज़ का बच्चों के स्टीकर टाइप दो हज़ार का नोट बन गए ! एक दिन के दूधमुँहे नोट का अभिनय सब जोकर मिल कर बहुत खूबी से करने लगे ! जोकर्स ने दर्शकों का ध्यान खींचना शुरू कर दिया ! एक पैसे से दो हज़ार तक की नए डिजिटल कहानी में पांच सौ और हज़ार से एक पल में सबका कनेक्ट ख़तम हो गया !  ‘ चूरन वाला नोट ‘ चिल्लाती हुई शो में बॉयफ्रेंड के साथ आयी लड़कियों ने जोकर्स का साथ देना शुरू कर दिया ! भीड़ में सबकी अपनी अपनी सेल्फी थी ! भीड़ के पास सबकुछ अपना था ! अपने सिद्धांत, अपनी पूंजी ! अपनी किताबें, अपनी फिल्म, अपने ब्लॉग ! नई दुनिया की नयी जेनेरेशन भीड़ पर सबसे ज्यादा यकीन करती है और पैसा भीड़ का सबसे बड़ा सिद्धांत है ! भीड़ सर्कस के इस खेल को देश की व्यख्या कहने लगी ! जोकर्स के डिजिटल खेल से इकॉनमी के माइक्रो मच्छर मंगल यान से मार्स पर जाने का सपना देखने लगे ! शो में इस बार कोई भविष्य वाणी नहीं हुआ सबको सीधा भविष्य दर्शन हो गया ! भीड़ के सामने हज़ार पांच सौ का जाना बचे खुचे का जाना हो कर रह गया ! दो हज़ार का टिकट कूपन सा दिखने वाला नोट जोकर्स ने शो में सबके लिए बाँट दिए ! भीड़ को राहत मिली ! कुछ ही देर में ज़ोकरों ने अच्छे खासे सर्कस को नौटंकी बना दिया ! दर्शकों ने भी बिना बात के नाचने का मन बना लिया ! अब्दुला की शादी के सब बेगाने, दीवाने बन के नाचने लगे ! भीड़ में कौन कहाँ सक्रिय हो गए कहना मुश्किल हो गया ! सब अपने कूपन लहराने लगे और उन्हें छोटे छोटे रुपयों में बदलवाने के लिए बैंक की ओर बढ़ गए ! सर्कस के बाहर भी लोग खुश थे ! न पैसा है न बदलवाने की झंझट कहते और मुस्कुराते !  लोग देख रहे थे और नौटंकी चल रहा था ! लग रहा था लास्ट शो में ख़ुशी की सबको कोई नयी करन्सी मिल गयी थी ! और इस करंसी का आनंद लेने के लिए काम करते हुए लोग कतार में खड़े हो गए ! पांच सौ हज़ार के युग में कोई बर्तन मांजना नहीं चाहता था, पर अब जनता सब करने को तैयार थी !

अपने सपनो का भारत देखने के लिए लोग लाइन में खड़े हो गए ! जिन्हें नहीं आती थी वो भी पैसों के लिए ए टी एम के सामने एक्टिंग करने लगे और भीड़ में एक दुसरे के भाषण की खूबियों से पेट भरने लगे ! लोगों ने उम्रदराज़ लोगों को बैंकों के आगे झुकते देखा ! सबको मनोवैज्ञानिक आज़ादी मिल गयी थी ! एक युवती ने ख़ुशी में अपना टॉप उतार दिया ! वामपंथी और समाजवादी, पुंजीपतियों की मदद के लिये सडकों पर आ गये ! ज़माना सच में बदलने लगा ! जिस तरह की हताश युवाओं ने शिक्षा पायी, आनन फानन में सबको रोज़गार मिल गया !  इसी दिन के लिए पाल पोस के नयी पीढ़ियों को बड़ा किया गया था ताकि ऐसे युद्ध में वो पुरानी पीढ़ी को डिस्पोज़बल कप्स में पानी पिलाये ! जोकर्स ने युवाओं की हताशा को ऊलजुलूल के लिंक से विद्रोह में बदलना चाहा पर खुद हताश हो गए !

नोट बदल गया था लोग बदल गए थे ! पैसा निकालने की सीमा समाप्त हो गयी ! एटीएम से अब एक दिन में कोई कुछ भी निकाल सकता था ! सुबह की चाय से लेकर लेटने की चटाई तक ! दूध , ब्रेड, अंडा और सब्जी तरकारी के साथ गुप्त रूप से ए टी एम की मशीन में जरुरत का सब सामान मिलने लगा ! जिनके पास गुप्त पासवर्ड था वे लोग दूध जमा कर के ए टी एम की मशीन से दही निकालने लगे ! कहीं कहीं किसी मशीन से घी भी निकला और फिर मशीन बंद हो गयी !

टेलीविज़न पर बैठे कबाड़ी बीस रुपये किलो के भाव से हज़ार और पांच सौ को तौलने निकल पड़े ! दवाई की कम्पनियों और डॉक्टरों की फ़ौज ने सबको बिमार, बहुत बिमार बना दिया था ! शहरों में लोगों को सबसे पहले हॉस्पिटल की याद आयी ! गाँव में बैंक के समीप खुले आकाश के नीचे ज़ेरॉक्स मशीन लग गए ! सबका धंधा चल पड़ा ! नोट-एक्सचेन्ज फ़ॉर्म एक नया सर्कस था !

दुनिया जानती है भारत सर्कस के कैश शो में दर्शक की भीड़ पैसे वाली पार्टी है ! इस भीड़ के पास पैसे की अपनी परंपरा है, पैसे की विरासत है, और पैसे का गौरव है ! इसीलिए ये शो चल रहा था ! भीड़ प्राय: बुद्धि विरोधी होते हैं और भीड़ सिर्फ बेहतर जीवन शैली के लिए जीती है ! भीड़ का समाज एक झटके में नए खेल के लिए तैयार हो गया ! व्यापारियों ने अपने दिमाग में जुगाड़ का गणित झटपट लगा लिया ! कर्मचारियों की सैलरी कैश हो गयी ! उनके दिमाग में उनका कर्मचारी नोट बदलवाने के लिए लाइन में खड़ा हो चूका था ! पांच सौ हज़ार को पूरी पिक्चर समझ में आ गयी ! सरकस में उनकी शो की तम्बू का बम्बू उठ चूका था ! बचत का मतलब सिर्फ महिलायें जानती थी ! महिलाओं का जो गुप्त धन नंगा हुआ उस पर जोकर हंसने लगे ! कोई कह रहा था पांच सौ की इस नोट से ये लड़ाई पांच सौ वर्षों से चल रही थी, आज जीत मिली है ! कोई एक हाथ में सौ सौ के नोट का पंखा बना कर दुसरे हाथ से सेल्फी ले रहा था ! सौ का नोट सबसे ज्यादा बिजी हो गया ! अपने से सभी छोटे नोटोँ का वो फिर से लीडर बन बैठा ! सौ के नीलेपन में थोड़ा मोर पँख और घुल गया , सौ आसमान का राजा नील कंठ हो गया !

शो खत्म होते होते ये ऑफिसियल हो गया था कि देश की अस्सी प्रतिशत आबादी को कैश का ये शो अब सर्कस में नहीं चाहिए इसलिए इस खेल को अब खत्म कर देना चाहिए ! असली नकली के अपने हर रूप में अब तक सबके जीवन में काम आने वाला और हर लिंग की मर्दानी ताक़त हज़ार पांच सौ, बड़े बे आबरू हो कर मंच पर से उतरे ! कोई कह रह था ऐसा पहले भी हुआ है ! कोई कह रह था ऐसा ही कुछ उसने कभी सपने में देखा था !

अपने अपने कैमरे के सामने सब सौ – सौ के नोट लेते देते ह्यूमन लगने लगे !  हज़ार पांच सौ स्कूल, अस्पताल, रोड और रेल लाइन से भी विदा हो गए ! सरकार के साथ साथ  पुलिस, पंचायत, बाजार, फ़ौज, सबका कल्याण हुआ ! एक, दो, पांच, दस के सिक्कों की टोपी पहने जोकर सफ़ेद – ग्रे – काला झंडा लिए ‘भूखे हैं, हम भी भूखे हैं’ कह कर छाती पीटने लगे, यह सब देख कर लास्ट शो में दर्शकों का हँसते हँसते बुरा हाल था ! खुल्ले के फेर में इस दूकान से उस दूकान भीड़ चक्कर नहीं लगाना चाहती ! इसीलिए नए सरकस में इन जोकरों की उपस्थिति ज्यादा फनी हो गया था ! जोकर की नौकरी नए सर्कस में पक्की हो गयी !

इस बीच किसी जोकर ने पांच सौ हज़ार की पीठ पर सरकस की शो का अमर वाक्य लिख दिया था ! मंच पर से उतरने के लिए जैसे ही वे दोनों मुड़े सबने उनकी पीठ पर ‘द – एन्ड’ पढ़ लिया ! जाते जाते उनपर कोई जूते फेंकने लगा तो किसी ने स्याही लहरा दी ! किसी जोकर ने उसी वक़्त लाइट्स आउट कर दिया ! पांच सौ हज़ार अँधेरे में हमेशा के लिए डूब गए ! कैश खत्म, शो ख़तम ! ये उनका लास्ट शो था ! हज़ार पाँच सौ जाते जाते मंच के अँधेरे में काले धन से मिल गए और अँधेरे में अफरा तफरी मचाने की कोशिश की ! इसी अफरा तफरी के हिसाब-किताब की मज़बूरी में सर्कस लास्ट शो के बाद दो दिन तक बंद रहा !

 

लल्लन टॉप में प्रकाशित 

मिक्स्ड फीलिंग्स / मनः स्टेटस

 

मनः स्टेटस

मनः स्टेटस

1.

किसी को मुझे छोटा दिखाना होता है तो मेरी फिल्मों की असफलता की बात जरूर करते हैं ! फिर चरित्र पर चोट करते हैं ! ये कोई नयी बात नहीं है ! फेसबुक पर मेरी हालत चंद्रधर शर्मा गुलेरी की कहानी ‘उसने कहा था’ के लड़के जैसी हो जाती है ! इनबॉक्स से निकल कर घर लौटते लौटते लगता है रास्ते में एक लड़के को मोरी में ढकेल दिया हो ,एक छावड़ीवाले की दिन-भर की कमाई खो दी हो ,एक कुत्ते पर पत्थर मारा हो और एक गोभीवाले के ठेले में दूध उड़ेल दिया हो … सामने नहा कर आती हुई किसी वैष्णवी से टकरा कर अन्धे की उपाधि तो पा ही लेता हूँ … गॉसिप का हिस्सा होता हूँ, ब्लॉक होता हूँ ,अनफ्रेंड होता हूँ तब कहीं घर पहुँचता हूँ …

 

2.

कबीरा खड़ा बाजार में सबकी मांगे खैर। ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर !

 

फेसबुक पर पूरी तरह उन्मुक्त हो गया हूँ ! ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर ! मेरा कोई चेला नहीं ! मैं किसी का गुरु नहीं ! मेरा कोई गैंग नहीं है और न ही मैं किसी गैंग का हिस्सा हूँ ! मेरा कोई ब्रांच नहीं है और न ही मेरा कोई सिक्का चलता है ! किसी को खुश करने के लिए मैं एक बार भी लाइक बटन पर चटका नहीं लगाता और न ही किसी के द्वारा लाइक नहीं किये जाने पर बुरा मानता हूँ ! चापलूस और चमचे मुझसे दूर भागते हैं ! मैं अपनी मर्ज़ी से जो चाहता हूँ लिखता हूँ और अपने लिखे हुए पर सबकी राय को ठेंगे पर रखता हूँ ! एरोगेंट तो था ही अब ज़हर हो गया हूँ ! ऐसी दोस्ती को चूल्हे में झोंक आया हूँ जो सिर्फ मतलब के लिए की जाती है और निभाई जाती है ! जिसने भी मुझे समझने का दावा किया उनके दिल में मेरे लिए एक कचोट जरूर है क्योंकि वो मुझसे कभी मिले नहीं और मिले भी तो मैं उनके किसी काम न आ सका ! मेरे लिए बनायी गयी हर राय को मैं स्वीकार करता हूँ ! फेसबुक पर मैं एक लूज़र हूँ, अपने मुठ्ठी भर दोस्तों के साथ बहुत खुश हूँ और निडर हूँ !

 

3.

मेरे लिए कुछ भी नया नही है ! मैं हर बात पर, हर काम मे सिर्फ येस का मोहताज़ नहीं ! नो … नहीं …माफ़ करिए .. नही हो सकता … सॉरी … फ़िर कभी … गो अवे … माफ़ी … समय नही है … हो नही सका … विल कॉल यू बैक … बजट नही है … अनफ्रेंड, ब्लॉक, नो रिप्लाई, मेरा जीवन है ! इन सबकी अनुभूति अद्भुत है ! बेशकीमती ! इतना आज़ाद इतना मुक्त इतना अच्छा पहले कभी नही लगा ! कोई कमिटमेंट नहीं / कोई बंधन नही / कोई अनुग्रह, पूर्वाग्रह, कुछ भी नही !! या हू !!! सबका शुक्रिया, सबको सलाम !

 

PS – ये व्यक्तिगत है ! इस पोस्ट पर राजनीतिक / सामाजिक या कोई कट -पेस्ट ज्ञान न पेलें ! अाप से नहीं हो पाएगा, मेरे अनुभव का एक अंश भी अाप का सच नही है …

 

Pic Credit : Google

मैं बैन का समर्थक नहीं

 

मैं बैन का समर्थक नहीं

मैं बैन का समर्थक नहीं

 

एक /

हम अभी लाइव टेलीकास्ट के लिए तैयार नहीं …

हमें क्रिकेट लाइव दिखाना आता है, देश नहीं
उपवास नहीं
उत्सव, त्यौहार नहीं
बलिदान नहीं, अधिकार नहीं

हमें फैशन शो दिखाना आता है
संस्कार नहीं
हमला नहीं , वार नहीं
हम अभी लाइव टेलीकास्ट के लिए तैयार नहीं !

हमें भाषण दिखाना आता है
खेल नहीं. पुरस्कार नहीं
समाचार नहीं
हम अभी लाइव टेलीकास्ट के लिए तैयार नहीं !

हमें मेंडेट दिखाना आता है
कैंडिडेट नहीं
हमें चमत्कार दिखाना आता है
पत्रकार नहीं
हम अभी लाइव टेलीकास्ट के लिए तैयार नहीं !

हम बैनर बनने को तैयार है
हम अभी बैन होने को तैयार नहीं …

 

दो /

बैन का पहाड़ा

बैन एकम बैन
बैन दूनी सर्कस
बैन तिये स्टेटस
बैन चौके बकवास
बैन पंजे काला
बैन छके हास्य
बैन सत्ते नैन
बैन अठ्ठे रुपया
बैन नामे एन डी टी वी
बैन दसे बांस