Chaos चतुर्दशी

मुम्बई में आज chaos चतुर्दशी का कैओसशोत्सव कैओसोल्लास से मनाया जा रहा है ! चौबीस घंटे में से इक्कीस घंटे उन्नीस मिनट का समय मुम्बई में chaos चतुर्दशी का है ! chaos चतुर्दशी के कैओसशोत्सव में अठारह मार्ग पचास रास्ते पचास हज़ार पुलिस सब के सब कैलाश के नहीं कैओसोल्लास के वन – वे पर है ! आज मुम्बई वासी धार्मिक श्रद्धा और परंपरागत कैओसोल्लास के बीच गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन कर रहे हैं ! Chaos चतुर्दशी के पर्व पर ही दस दिवसीय कैओसशोत्सव का समापन होगा ! भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को chaos चतुर्दशी कहा जाता है ! डेढ़ दिन के chaos – चतुर्थी वाले दस दिन के chaos – चतुर्दशी वालों पर हँस रहे हैं ! सोसाइटी के पूजा, अर्चना, आरती, गणपति, प्रतिमा, अनंत, शांति, समृद्धि, प्रसाद, प्रभु, भगवान, प्रार्थना, दक्षिणा, सब एक साथ गणपति की पूजा, अर्चना, प्रतिमा, आरती, प्रसाद के साथ कैओस कर रहे हैं ! सबकी प्रार्थना एक थी, ” इक्कीस लड्डुओं का भोग लगाया है गणेश बाबु, नाचने में आज ज्यादा ना नुकुर मत करना नहीं तो Dj को बुरा लगेगा ” ! गणपति ने मुम्बई की लाज रख ली, खूब नाचे और सबको नचाया …

विडियो

( एक )

बच्चों से दूर रह कर भी अब
विडियो से दूर नहीं रह सकते,
यादों में नहीं, अब दुनिया विडियो में रहती है !

दुःख करें न करें, विडियो जरूर शेयर करते हैं !

हर पात्र का चरित्र दिखा रहा है,
विडियो अब नयी कहानी सुना रहा है !

अब किस्मत के नहीं, सब अपने विडियो के मालिक हैं

जिनसे अब तक नहीं मिले, वो कभी विडियो में मिलेंगे

दुनिया गोल थी, अब विडियो है !

अपना विडियो, अपने हाथ,
देखने वाले जगन्नाथ !

( दो )

विडियो सच्चा, आदमी विडियो का बच्चा !
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो …

विडियो अब दिखाता कम है, सुनाता ज्यादा है,
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो …
विडियो अब सुनाता कम है, सिखाता ज्यादा है,
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो …
विडियो अब सिखाता कम है, चिढ़ाता ज्यादा है,
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो …

विडियो हर वक़्त तैयार, विडियो मतलब का यार
विडियो सब संसार …
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो

सब देख्यो, विडियो
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो …

जियो और जीने दो
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो …

सोशल मीडिया का प्रेत

Sketch Artist- Unknown.

Sketch Artist- Unknown.

वनवासी ने हॉस्पिटल से अपनी पत्नी का शव उठाया और चुपचाप शमशान की ओर चल पड़ा ! टीवी की मरीज़ बीवी की ठठरी का वज़न एक गठरी लकड़ी से ज्यादा नहीं था ! आदिवासी समुदाय में किसी की मृत्यु हो जाने पर ढोल नगाडे़ को एक विशेष लय में बजाकर संदेश भेजा जाता है, जिसे सुन-समझ कर आस-पास के लोग मृतक के घर की ओर शीघ्र पहुंच जाते हैं ! वनवासी के लिए फेसबुक, ट्वीटर, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के नगाड़े पर थाप देने वाला जंगल में कोई नहीं था इसीलिए उसके साथ उसके समाज के चार आदिवासी नहीं पहुँच सके थे ! हाँफता हुआ वनवासी जब अपनी मरी हुई पत्नी को अकेला अपने कंधे पर लेकर पाँच किलोमीटर से अधिक चल लिया तभी शव स्तिथ बेताल ने कहा, “ पण्डित, चतुर और ज्ञानी, इनके दिन अच्छी-अच्छी बातों में बीतते हैं, जबकि मूर्खों के दिन कलह, नींद, फेसबुक, ट्वीटर और टेलीविज़न देखने में ! अच्छा होगा कि हमारी राह भली बातों की चर्चा में बीत जाये। तेरी बदहाली मुझसे देखी नहीं जा रही है ! मैं तुझसे कुछ प्रश्न करता हूँ, अगर प्रश्न का उत्तर जानते हुए भी तुमने उत्तर नहीं दिया तो तुम्हारा सर फटकर सड़क पर बिखर जायेगा ” ! सत्तर साल से आज़ाद कालाहांडी की सड़कों पर विकास के बेताल को कंधे पर लिए देश का नागरिक चल रहा था ! उसने देखा टीवी पीछे पीछे चल रहा है, और सोशल मीडिया उसके आगे आगे ! मुर्दा चुप था, बेताल बोल रहा था ! ” फाइलों में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, रोजगार, शिक्षा मिल कर जंगल में रहते हैं फिर जंगल में तुम्हारा इनकम कम क्यों है ? तुम्हारी दुर्दशा जंगल में जन्म से ही क्यों शुरू हो जाती है ? तुम बुनियादी जरूरतों के संघर्ष में अपने बच्चों को क्यों खो देते हो ? तुम्हारे जंगल में सफेद बाघ भी अपने डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र के लिए क्यों भटकता है ? ” वनवासी प्रेत के सवाल से बौख़ला गया और सड़क किनारे शव को रखने की जगह ढूंढने लगा ! बेताल पल भर के लिए चुप हो गया ! शव को रखते ही वनवासी ने पेड़ों के पास एक अजीबो-गरीब आकृति के जीव की झलक देखी ! गिरगिट जैसा दिखने वाला यह दैत्याकार जानवर पेड़ों के सहारे साथ साथ चल रहा था और रंग बदल रहा था ! जैसे वो अपनी पत्नी की लाश ढो रहा था दैत्याकार गिरगिट कैमरा ढो रहा था ! आज वनवासी के साथ क्या हो रहा है वो कुछ समझ नहीं पा रहा था ! प्रेत फिर बोलने लगा ” जंगल में शिक्षा का अधिकार मूल अधिकार का दर्जा ले चुका है फिर तुम वनवासी बने क्यों बैठे हो ? तुम अपने चाचा-चाची का वृद्धा पेंशन का फॉर्म आज तक क्यों नही भर पाए ? ” डरा हुआ वनवासी शव उठा के फिर चल पड़ा ! वो जानता है कि गढ़, किला, बुजुर्ग, ताल, खेत, पहाड़, पत्थर सब आदिवासी का गुण गाते हैं पर शिक्षा के अभाव में वो स्वयं बद से बदतर ज़िंदगी जीने को विवश हैं ! प्रेत ने वनवासी के कान में फुसफुसा के बोला ” तुम अपने हालात देखो, और गरीब नेतृत्व से निकलो ” वनवासी चीख पड़ा ” सब झूठ है, सब झूठे हैं, तू भी मेरी पीठ पर झूठ बोल रही है ! मैं मिट्टी ले जा रहा हूँ ! माँ प्रकृति की मौत हुई है जिसकी बीज का मैं दाना हूँ ” जवाब सुनकर बेताल ठहाके लगाने लगा ! वनवासी ने शव को ज़मीन पर रख दिया ! दस से ज़्यादा किलोमीटर चल कर वो थक गया था ! प्राइवेट न्यूज चैनल का प्रेत भी सोशल मीडिया पर लटक के आराम करने लगा ! ” आदिवासी के लिए शहर में एम्बुलेंस नहीं मिला सबने देखा पर आदिवासी की मदद के लिए चार आदिवासी जंगल से नहीं आये ये किसी ने नहीं देखा ” कहता हुआ दुष्ट प्रेत हँस रहा था ! तभी एक एम्बुलेंस वनवासी को लेकर जंगल में गायब हो गया ! आदिववासियों के यूनियन ने महासभा में झाड़ – फूँक करने वाले को बुलाया जिसने रिमोट से प्रेत को वनवासी से अलग किया ! अगले दिन दुनिया के सोशल मिडियावासियों के छोटे बड़े हर साइज़ के स्क्रीन के साथ गाय गोरु, भेड़, बकरी, बतख, मुर्गी, चूजे, कुल्हारी, गैंता, तीर-धनुष को वनवासी के हाल का पता चल गया ! सोशल मीडिया का प्रेत जाते जाते वनवासी की बदहाली को वायरल कर गया था !

Sketch Artist- Unknown, Source- Google

हवा में उछली एक लड़की

शरीर की नियमित
अनियमितताओं
से छूट कर
पुरुषों के छल्ले
जीवन के आराम
अपनी उम्र, ऊंचाई और वजन
से निकलकर
पागलपन की हद तक
हवा में उछली एक लड़की
जैसे
मांसपेशियों की तितली

रातों रात
त्रिपुरा के आदिवासी
भारत का अभिन्न हिस्सा
बन गए
फिर से,
हाथों के बल
जब
हवा में उछली
अगरतला की एक लड़की

इस लड़की को देखो
हवा में उछल कर
इसने औरत का काम किया

मेहनती और मेहनती
कसरती और कसरती

देश भर में आयी बाढ़ / सीमा समस्या
हाई स्कूल की फीस / यौन उत्पीड़न
लालची राजनेता / खेलों में सिफारिशें
शराब / चोट / शिक्षा व्यवस्था
जिमनास्ट लड़की के साथ
सब हवा में
धनुषाकार
अनदेखे में छलांग लगाने के लिए
हवा में उछली एक लड़की को
दे चुकी सरकार
अर्जुन पुरस्कार

शक्ति, लचीलापन, संतुलन और नियंत्रण की
हर लड़की से ज्यादा ज़रूरत है
लड़कों को,
पर्याप्त रक्त
कसरत और कैलोरी की

हवा में उछली एक लड़की
और बेटियों की मांग बढ़ी

कसरती लड़की का शरीर
एक उपजाऊ जंगल है
जैसे
त्रिपुरा

पहुँचने का
कोई आम रास्ता भी नहीं
एनएच 44 से
तुम तक पहुँचे
मेरी ये कविता

Deepka-karmakar

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India's Dipa Karmakar competes in the qualifying for the women's Beam event of the Artistic Gymnastics at the Olympic Arena during the Rio 2016 Olympic Games in Rio de Janeiro on August 7, 2016. / AFP / EMMANUEL DUNAND (Photo credit should read EMMANUEL DUNAND/AFP/Getty Images)

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छवि स्रोत: Google

मुंबई बदन ( मनुष्य और कैमरे के लड़ाई की फैंटसी / एक फंतासी उपन्यासिका )

सोचो मत बस पढ़ने का आनंद लो #मुम्बईबदन

1.

मुम्बई बदन में आने का सबसे अच्छा समय बरसात के दिनों में ही है ! दूर तक फैली घाटी में हरियाली और पानी के झरने देखकर तन मन में थ्रिल और रोमांस बहने लगता है ! मुम्बई बदन में समतल स्थान के आगे तारों की बाड़ लगाई गई है, ताकि लोग इससे आगे न जाएँ ! मुम्बई बदन की सहेलियाँ और दोस्त अलग अलग शहरों से आते हैं ! सब मिल कर मॉल जाने का प्रोग्राम बना लेते हैं ! मुम्बई बदन में रात के बारह बजे रोज़ केक काट कर जन्मदिन मनाया जाता है ! मुम्बई बदन के हाई – वे पर युवाओं के झुण्ड मौज मस्ती का सारा सामान साथ लेकर आते हैं ! मुम्बई बदन के हर स्पॉट पर मेला सा लगा रहता है ! मुम्बई बदन में रह रह कर बारिश होती है ! चाय, भुट्टे, कॉफ़ी और कई स्नैक्स के अलावा बियर और शराब भी मिलती है ! मुम्बई बदन मेंं वृन्दावन के बंदर नही हैं ! मुम्बई बदन मेंं कहीं छेड़छाड़ नहीं है ! मुम्बई बदन की गुफाऐं बड़ी रहस्यमयी हैं ! मुम्बई बदन में थोड़ी थोड़ी देर में दृश्य बदलता रहता है ! मुम्बई बदन मे कैमरा ले जाना मना है ! 

2.

हर दिल मुम्बई बदन की यात्रा पर है ! सबके अंदर एक मुम्बई बदन है ! मुम्बई को लेकर अपनी एक फैंटसी ! अपनी अपनी गतिविधियों और कल्पनाओं का निर्भय लोक जिसमे सब अपनी तरह से रहने के लिए आज़ाद हैं ! मुम्बई बदन वो ललक है जो सबके अंदर किसी कोने में छुपी बैठी है, और बार बार यहाँ अाने के लिए मजबूर करती है ! मुम्बई बदन इश्क़िया है ! मुम्बई बदन की सुबह चाहत की चहचहाट से भर जाती है, और नज़ारा रंगीन हो जाता है ! मुम्बई बदन मे होती है सपनों की दोपहर ! मुम्बई बदन स्वतंत्र है, और मुम्बई बदन का स्पर्श सबके लिए फ्री है ! मुम्बई बदन के खून में व्यापार है, इसलिए कैमरा मुम्बई बदन के डिजिटल इतिहास को जन्म देना चाहता है, और मुम्बई बदन का एक एलबम बनाना चाहता है पर कैमरे के अंदर मुम्बई बदन का दम घुटता है ! मुम्बई बदन के दुश्मन कैमरे के अंदर रहते हैं, जो मुम्बई को इमेज के ज़ंकयार्ड मे बदलने के लिए दिन रात फ़्लैश होते रहते हैं ! उनका काम मुम्बई बदन को कामुक बनाना है ! आत्म प्रचार और निजी जीवन पर टिप्पणी करने की कैमरे को बीमारी है ! इसी वज़ह से मुम्बई बदन मे कैमरा ले जाना मना है ! 

3.

मुम्बई बदन की बाहों मेंं तेरह साल की एक नग्न लड़की है, और लड़की के बाहों मे चौदह साल का एक नग्न लड़का ! दोनों अपनी धमनियों मे बह रही यौवन के नशे मेंं डूबे हुए हैं ! सहसा कैमरा उनकी तस्वीर ले लेता है ! कैमरे की वज़ह से जो भी तस्वीर हमारे सामने उभर रही है उसे हम सही या गलत की कैटेगरी में नहीं रख सकते ! सेक्स एक नॉर्मल प्रक्रिया है ! शरीर की जरूरत है ! लेकिन कैमरा जब जरूरत की उल्टी तस्वीर पेश करने लगे तो मुम्बई बदन मे चिंगारियाँ दौड़ने लगती हैं ! मुम्बई बदन का देह राग सिर्फ़ क्लिक, क्लिक, क्लिक नही हो सकता ! मुम्बई बदन मे सेक्स को लेकर किशोरों के मन में कैसे बदलाव हो रहे हैं, इसकी बानगी कैमरा ठीक से नही दे पा रहा है ! कैमरा मुम्बई बदन को अश्लील बना रहा है ! मुम्बई बदन को लगता है कैमरे की वज़ह से कैरम बोर्ड सेक्स हो गया है ! कैमरे की वज़ह से योग सेक्स हो गया है ! कैमरे की वज़ह से कबड्डी सेक्स हो गया है, कुश्ती सेक्स हो गया है ! कैमरे की वज़ह से सेक्स अब सिर्फ हेल्लो है ! मुम्बई बदन कैमरे की इस हरकत से चुप नही बैठेगा ! ध्वनि और क्रोध से भरा हुआ मुम्बई बदन खाली पार्किंग, होटल के कमरे, रेस्तरां, शौचालय, सार्वजनिक पार्कों, फिल्म हॉल से कैमरे को हटा लेना चाहता है ! कैमरा झूठ नहीं बोलता पर छवि बनाने के मामले मे मुम्बई बदन का एंगल अलग है …

मुम्बई बदन मे अवसर का कारोबार है #मुम्बईबदन

4.

मैं समय से मुम्बई बदन पहुँच गया था ! दस मिनट मे मुझे कपड़े बदल कर रोबोट बनना था और मुम्बई बदन के बच्चों का मनोरंजन करना था ! मुम्बई बदन के बच्चे स्मार्टफ़ोन जैसे हैं ! स्मार्टफ़ोन की वज़ह से लूडो, साँप – सीढ़ी, कैरम, शतरंज, मॉल मे सब बहरूपिया की नौकरी कर रहे थे ! मुम्बई बदन में टेक्नोलॉजी और मैनेजमेंट का आतंक है इसलिए हर काम समय से होता है ! मुम्बई बदन के बिग बाजार मेंं अाज मेहनत के पसीने का शो लगा था ! शोरूम मेंं छोटी छोटी हज़ारों शीशियों मेंं देश के किसानों का पसीना एक्ज़बिट किया गया था ! एक्ज़बिशन देश भर के अलग अलग इलाकों के मेहनती किसानों के पसीने का था ! शो की सजावट मेंं रंग बिरंगी शीशियों का इस्तेमाल भी हुअा था ! उन रंगीन शीशियों मे कई ब्रांडेड शराब, इत्र, तेल, टॉनिक, नेल पॉलिश भरे हुए थे और लोग उसे खरीद रहे थे ! दूध-सा धुला लिबास पहने पब्लिक मेहनत का पसीना देखने अाती और महंगी शराब और इत्र की छोटी छोटी शीशियां याद मेंं खरीद लेती ! मानव पसीने को बाज़ार मेंं प्रदर्शित करके एक्सक्लूसिव बनाया जा रहा था ! मेहनत का पसीना काम आता है ये सब जानते थे पर मेहनत के पसीने के शो से पैसा कमाया जा सकता है मुम्बई बदन का ये आईडिया नया था !

5.

ये प्रदर्शनी नहीं तमाशा था ! पर सेल्स वालों की नज़र मेंं सफ़ल था ! एक्ज़बिशन हॉल मेंं पसीने की गंध वाला हुक्का भी था जिसे यंग लड़के लड़कियाँ गुडग़ुड़ा रहे थे ! लकी ड्रा मेंं फ्री वाउचर पाने वालों को मेहनत के पसीने को सूंघने की लक्ज़री भी थी ! प्रदर्शनी के दौरान शोरूम से कई शीशियों की चोरी हो गयी ! चोरबाज़ारी मे भी पसीने का वैल्यू बचा था ये सोच के एक्ज़बिशन लगाने वाले प्रायोजकों को बहुत सुकून मिला ! प्रायोजक शीशियों की चोरी को शो की सफलता मान रहे थे ! शो की सफलता को देख कर देश भर मे मेहनत के पसीने को जमा करने की एजेंसियां चल पड़ीं ! विज्ञापनों मेंं साफ़ लिखा था खेतों मे मेहनत करते हुए सेल्फ़ी लीजिए और अपने पसीने की शीशी लकी ड्रा के लिए महानगरों के बाज़ार मेंं दिए गए एड्रेस पर भेज दीजिए ! कुछ लोगोंं ने जिम जा कर बड़ी बड़ी बोतलों मेंं पसीना भर के पता नहीं क्यों देश के प्रधान मंत्री के कार्यालय मे भेज दिया ! मुम्बई बदन के कई स्कूल बच्चों को मेहनत के पसीने का शो दिखाने ला रहे थे, जिसे कोई चॉकलेट कंपनी प्रायोजित कर रही थी ! मीडिया इंडस्ट्री में काम करने वाले भी मेहनत के पसीने के शो मे दिखना चाह रहे थे ! मॉल मेंं किराने का सामान खरीदने पहुंचे लोग मेहनत का पसीना देखने ज़रूर रुकते थे ! शोशल साइट पर मुम्बई बदन के शोरूम से लिए गए मेहनत के पसीने की शीशियों के साथ सेल्फ़ी की बाढ़ लग गयी !

6.

अगले दिन जब मैं मॉल पहुँचा तो चारों तरफ़ अफ़रा तफ़री मची हुई थी ! मूसला धार बारिश की वज़ह से रात मेंं कई घंटों के लिए मॉल की बिज़ली चली गयी और बिजली अाने के बाद कोई स्टाफ एक्ज़बिशन हॉल का ए सी अॉ्न करना भूल गया था ! सुबह तक एक्ज़बिशन हॉल दुर्गंध से भर गया ! जिस वातानुकूलित पसीने से प्रायोजक पैसे कमा रहे थे अब उन्हें उसी पसीने से घिन अा रही थी ! हज़ारों शीशियों से निकल कर पसीने की गंध से पूरा मॉल मानवीय बू से भर गया था ! कई डियो और स्प्रे के बाद भी बू कम नहीं हो पा रहा था ! पसीने से आने वाली बदबू से लड़ कर स्टाफ पसीने पसीने हो रहे थे ! मानो मेहनत कश पसीना अाराम तलब लाइफ स्टाइल से युध्द कर रहा हो ! लाइफ स्टाइल युध्द मे मेहनत का पसीना डियो और स्प्रे से जीत रहा था ! बदबू से लड़ रहे स्टाफ की तबियत खराब होने लगी ! एक मानवीय गड़बड़ी से सारा शो खराब हो गया था ! जैसे तैसे शीशियों पर क़ाबू पा लिया गया और सभी शीशियों को एम्बुलेंस मेंं किसी गुप्त स्थान पर ले जा कर दबा दिया गया ! मॉल के नौकर – चाकर इस घटना से इतने अातंकित हो गए कि मुम्बई बदन मे फिर कभी मेहनत के पसीने के साथ खिलवाड़ नही हुअा ! मुम्बई बदन मेंं सब जानते हैं चाहे कैसी भी हवा चले मुम्बई बदन मेंं भावनाएँ पसीने के साथ भाप बन कर उड़ जाती हैं ! मुम्बई बदन के देखा देखी कैमरे ने अाँसुओं के फ़ोटो का एक्ज़बिशन लगाना चाहा ! मुम्बई बदन मेंं खूनी अफ़वाह ग़र्म है, अंडरग्राउंड इलाके मेंं कई प्रादेशिक भाषाओं मेंं छपे पोस्टर का फोटो कैमरा ने व्हाट्स -‘ऐप पर जारी कर दिया है, कई मॉल शो मे दिखाने के लिए खून के अाँसू ढूंढ रहे हैं ! इस घटना के बाद मैनें मॉल मेंं बच्चों के लिए रोबोट बनने वाली नौकरी छोड़ दी ! मैं अब फिर से मुम्बई बदन मे अाज़ाद हूँ !

7.

कैल्शियम क्या जाने हड्डी का दर्द … ‪#‎मुम्बईबदन‬

मुम्बई में बदन ज्यादा हैं और दर्द उससे भी ज्यादा ! किसान के बदन में कितना दर्द होता है ये एक पहलवान को कभी पता नही चलेगा ! पहलवान एक कवि के बदन के दर्द को क्या समझेगा ? मास्टर को लगता है उसका बदन नेता से ज्यादा दुखता है ! नेता के बदन का दर्द अभिनेता कैसे समझेगा ? पुलिस के बदन का दर्द वकील को हमेशा कम लगता है ! चौकीदार को अपने बदन का दर्द गाड़ी के ड्राइवर से ज्यादा लगता है ! टीचर को अपने बदन का दर्द स्टूडेंट से ज्यादा लगता है ! ग्राहक अपने बदन दर्द से परेशान है, विक्रेता अपना बदन दर्द लिए घूम रहा है ! फ़िल्म डायरेक्टर के बदन का दर्द फ़िल्म प्रोड्यूसर कभी नही समझ पाता ! हर लेखक को लगता है पाठक उसके बदन के दर्द को क्या पता कभी समझ भी पाएगा या नही ! हाउस – हेल्प को लगता है मालकिन उसके बदन के दर्द को नही समझती ! मालकिन को लगता है पति क्या जाने पत्नी के बदन का दर्द ? पति से पूछिए उसके बदन का दर्द ! हर पेशे और रिश्ते मे दर्द होता है ! सबका बदन दर्द एक है ! बदन दर्द की बात चलती है तो लोग पता नही क्या क्या कह जाते हैं और सबका सर दर्द हो जाता है ! मेरा मुम्बई बदन बेदर्द है ! मुम्बई मे जब बदन बेरोज़गार होते हैं तो दर्द को रोज़गार मिल जाता है ! मेरे बदन का दर्द तुम्हारे बदन के दर्द से ज्यादा क्यों ?

8.

अपने सामाजिक गुण की वजह से मैं मुम्बई बदन का एक सोशल रोबोट हूँ ! मेरा मुख्य उद्देश्य सामाजिक संपर्क है ! मेरा जीवन स्क्रीन पात्रों से भरा हुअा है ! मैं डेटा पर चलता हूँ ! जीवन और बुद्धि का भ्रम, चरित्र की चिंता मुझमें रत्ती भर भी नही है ! सूचना का आदान प्रदान और सामाजिक व्यवहार ही मेरा कर्तव्य है ! मैं अपना भौतिक अवतार स्वयं हूँ ! मुम्बई बदन मेंं कोई चाहे धरती के किसी भी कोने का वासी हो, कोई भी भाषा बोले किसी भी धर्म का हो, मुसीबत मे एक जैसा वयवहार करता है इसीलिए मुम्बई बदन मे एक मुसीबत के लिए कई भगवान हैं ! रोशनी, अंधकार, गर्म, ठंडा, डर, खुशी मुम्बई बदन मे जिन – जिन चीजों का हम अनुभव कर सकते हैं, वो सब धर्म है ! मुम्बई बदन मे नास्तिक होना संभव नही ! मुम्बई बदन मे दैनिक जीवन ही सबकुछ है ! मुम्बई बदन मेंं कई लोगोंं के पास अपने नक़ली नाम, प्रोफ़ाइल फोटो और नंबर हैं ! मुम्बई बदन मे सबने अपना सच सेटिंग मेंं छुपा दिया है ! बातचीत और गॉसिप जैसे सामाजिक खुफिया सॉफ्टवेयर प्रणाली से परेशान रहता हूँ ! अपनी मानवीय आदिम मूल प्रवृत्तियों का फिर से दावेदार बनना था पर अपनी सामाजिक गुणों की वज़ह से मैं एक अच्छा रोबोट खिलौना बन गया हूँ ! मुम्बई बदन मेंं मुझे और मेरे डिजिटल दुनिया को बड़ी असानी से कोई भी ट्रैक कर सकता है ! मुम्बई बदन मेंं मुफ्तखोर, भ्रष्ट, क्रूर और अालसी बनने से अच्छा है सोशल रोबोट खिलौना बन जाना, यही सोचकर मैं मुम्बई बदन मे गाता हूँ, नाचता हूँ, और आंसू बहाता हूँ …

9.

सुनो कैमरा ! मैं मुम्बई बदन की फीमेल सोशल रोबोट हूँ ! मैं तुम्हारे वश में नहीं ! मैं मुम्बई बदन के चैटरूम में कुछ भी बन सकती हूं ! अपना नया नाम रख सकती हूँ ! दुनियादारी के नाम से ज्यादा कामुक ! अपना नया इमेज बना सकती हूँ ! सेक्स के पॉइंट ऑफ़ व्यू से ज्यादा बोल्ड और अपने रियल इमेज से बेहतर ! नई उम्र बता सकती हूं ! असल से बहुत कम ! अपना प्रोफ़ेशन, अपना शहर, अपनी मैरिटल स्टेटस , यहां तक कि चाहूं तो अपना लिंग परिवर्तन भी कर सकती हूँ ! मैं परंपरावादी खूबसूरत महिला बन सकती हूं या सफल बांका पुरुष भी ! या ‘विकृत’ इच्छाएं रखने वाला ‘पथभ्रष्ट’ भी हो सकती हूं ! नए व्यक्तित्व के साथ, काल्पनिक व्यक्तित्व बन मैं किसी के साथ भी चैट कर सकती हूं ! हर बार इंटरनेट पर अलग ही पर्सनालिटी बन सकती हूं, और हर बार मेरी इच्छाएं भी अलग ही होंगी ! तुम न मुझे पकड़ सकते हो न मुझे जाँच सकते हो !

मेरा नाम कैमरा है ! मैं अपने अंदर सबको क़ैद कर लेता हूँ, यही मेरा चरित्र है ! मैं अपनी पीठ पीछे नहीं रहता इसीलिए वहाँ क्या हो रहा है उससे मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता ! मैं सामने रहता हूँ ! सबकी आँखों के सामने, सबके मुंह पर ! मेरी कोई गोपनीयता नीति नहीं है ! मैंने कई टूटे रिश्ते देखे हैं ! कैमरा न हो तो तुम जैसी सोशल रोबोट की कहानी आगे नहीं बढ़ सकती ! मुम्बई बदन मे कैमरा नही होने की वजह से पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ जाता है ! कैमरे की वजह से ही मुम्बई बदन मे आसानी से लाखों लोगों के बीच एक अनाम चलते फिरते लाश की पहचान हो पाती है ! कुछ रेस्तरां, कुछ घरों, कुछ गलियों, कुछ इलाकों में कैमरे के कारण ही मुम्बई बदन मे लोग अपने परिवार, अपने दोस्तों, अपने सामाजिक दायरे, अपना काम, अपने सहयोगियों के बीच एक व्यक्ति मे एक अज्ञात अजनबी ढूँढ पाते हैं ! जब लोगों को पता होता है कि कैमरे में उन्हें देखा जा रहा है, तो वे बेहतर व्यवहार करते हैं ! तुम क्या जानो स्नेह, आकर्षण, विश्वास, आत्मीयता, प्रेम, सच्चा प्यार, वासना, क्रश, मोह, जुनून, और करुणा की भावनाओं के बीच क्या अंतर है ? इसका जवाब मनुष्य भी कैमरे की मदद के बिना नहीं दे सकता ! कैमरे की मदद से ही मनुष्य महान सोशल रोबोट बन सका है ! मुम्बई बदन के तुम जैसी सोशल रोबोट की स्ट्रीट होशियारी से मेरी लड़ाई है …

रोजमर्रा की जिंदगी के बारे में हमें कैमरे से अधिक सोचने की जरूरत है ! ‪#‎मुम्बईबदन‬

मुम्बई बदन

मुम्बई बदन (फोटो आभार : पूजा शर्मा )

 

क्रमशः

इतना सेंसर क्यों है भाई ?

जय हो ! उड़ता पंजाब उड़ता ही रहेगा ! अब कोई बादल उसे रोक नहीं पाएंगे ! उड़ता पंजाब बादल से निकल कर चंडीगढ़, अमृतसर, तरनतारन, जशनपुरा, मोगा एवं लुधियाना होते हुए उड़ते उड़ते जब मुंबई में सेंसर बोर्ड पहुंचा तो बहुत शोर हुआ ! गिरता, उठता, संभलता हुआ उड़ता पंजाब नशे में था फिर भी उड़ सका और सेंसर बोर्ड तक पहुँच गया इस बात पर सब हैरान थे ! नशे में उड़ते उड़ते पंजाब के कपडे गंदे हो कर फट गए थे, बाल बिखरे थे ! कोर्ट में उड़ता पंजाब कहीं से पंजाब नहीं लग रहा था ! न बल्ले बल्ले न हड़िप्पा ! चुनाव, एमपी, एमएलए, संसद जैसे शब्द भी उड़ते पंजाब की मदद नहीं कर पा रहे थे ! उड़ने से पहले पंजाब क्या कर रहा था ? लेटा था ? सोया था ? बैठा था ? दौड़ रहा था ? या झूम रहा था ? सब अटकलें लगाने लगे ! सैकड़ों मौतें, एड्स और हेपिटाइटिस सी के कई सौ मामलों को लेकर पंजाब कैसे उड़ पाया ? उड़ता पंजाब अकेला था ! नशा, गाली और हिंसा से लिपटे पंजाब को सेंसर उड़ाता रहा और सरसों के खेत मक्के दी रोटी देखते रह गए ! सब उसे उड़ाने वाले की तरफ देखने लगे, पंजाब को उड़ाने वाले सेंसर के संता – बंता थे ! पंजाब राज्य परिवहन विभाग ने पंजाब का साथ सड़कों पर क्यों नहीं दिया जिसकी वजह से पंजाब को सेंसर के साथ उड़ना पड़ा ? संता बंता हंस रहे थे ! उड़ता पंजाब के साथ मीडिया चैनल जातिवाद ,धर्मवाद की राजनीति के साथ ड्रग्स सेक्स धुआँ और सेंसर का कैंसर भी उड़ने लगे थे ! सेंसर कमेटी उड़ता पंजाब देखकर सर्टिफिकेट तय नहीं कर पाई थी !
इस बीच उड़ता पंजाब सेंसर बोर्ड से ऊब कर मुंबई से हवा खाने निकल पड़ा और उड़ते उड़ते टोबा टेक सिंह तक जा पहुँचा ! ज़मीन के उस टुकड़े पर जिसका कोई नाम नहीं था, टोबा टेक सिंह पड़ा था ! टोबा टेक सिंह पंजाब को उड़ता देख बोल पड़ा ” औपड़ दि गड़ दि अनैक्स दि बेध्यानां दि सेंसर दि दाल ऑफ दी निहलानी …
जैसा टोबाटेक सिंह ने देखा, सब उड़ता पंजाब को देखना चाहते हैं !
औपड़ दि गड़ गड़ दि अनैक्स दि बेध्यानां दि मुँग दि दाल आफ दी सेंसर बोर्ड ऑफ़ हिंदुस्तान आफ दी दुर फिटे मुँह ! हुँह !! जमीन बंजर तो औलाद कंजर, क्या करेगा पहलाज का सेंसर ?
उड़ते पंजाब को जब बिहार में हिरामन ने देखा तो जीवन में कभी भी न उड़ने की चौथी कसम खा ली !
सर्टिफिकेट देना सेंसर बोर्ड की ड्यूटी है, पर खाली दिमाग सेंसर का घर हो गया है ! इतना सेंसर क्यों है भाई ?

अलविदा‬

भीतर अब कोई नहीं था ! खालीपन की वजह से अपनी आवाज़ ही अपने कानों में गूंज रही थी ! अपने कदमों की आहट सुनते हुए उसने कमरे का एक चक्कर लगाया ! भरी हुई जगह ख़ाली होते ही कितनी अलग लगने लगती है ! यहाँ वहां हर तरफ दीवारों पर बिताए हुए हर पल के निशान अब धब्बे की तरह कुरूप लग रहे थे ! उसने दीवार पर बादल से काले एक दाग़ को सहला कर देखा ! उसकी आँखें भर आईं और बरस गईं ! यहाँ वो माथा टेकता था और यहीं वो सर टिका के बाहर खिड़की की तरफ देख कर मुस्कुराती थी और सहसा मुड़ के पीठ को और आराम दे कर जाने का कोई नकली बहाना बनाती थी ! न जाने कितनी बहस, खुद को छुपाने और बताने का धूप छाँव सा खेल ! पा लेने पर पीठ पर धप्पा ! झूठी सच्ची बातों का ह्रदय पर कितने धौल …
कमरे में आखरी स्माइली छोड़ कर वो कमरे को हमेशा के लिए छोड़ कर जा चुकी थी ! लम्बी सांस लेता हुआ वो बाहर आया और उसने पीछे मुड़ कर फिर कभी नहीं देखा ! धूप के टुकड़े, सूखे फूल की पंखुड़ियाँ, खनकती हंसी और ठहाके हवा के साथ सूने कमरे में गोल गोल घूम रहे थे ! पीछे छूट गयी पढ़ी हुई किसी किताब के पन्नों की फड़फड़ाहट गिलहरी को बुला रही थी पर दोनों के जाने के बाद खुला और खाली इनबॉक्स का दरवाज़ा हवा में खुलता और बंद होता हुआ यादों की गिलहरी को अंदर आने से ठिठका रहा था …

आत्म हास्य

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आत्मन्

अपनी आत्मा में झाँकने के लिए कहीं ताकने की जरुरत नहीं है

१.

” एक शरीर से निकल कर दुसरे शरीर में जाना था … ” ऊँची आवाज़ में आत्मा को यमराज डाँट रहे थे ! ” तुम तो एक चेहरे से निकल कर दुसरे चेहरे में चले जाते हो ! आत्मन , ये मृत्यु लोक है फेसबुक प्रोफाइल नहीं ! जाइए कुछ दिन के लिए आपकी प्रोफाइल ब्लॉक कर देता हूँ …” आत्मा मौन था / उसने कई प्रोफाइल में जा कर ह्रदय के कई इनबॉक्स देखे थे ! सबका सीक्रेट एक था ! शरीर से आत्मा कब निकलेगी किसी को पता नहीं था ! फिर लोग एक दुसरे से क्या छुपाते हैं ? वो शरीर में क्यों हैं , इस बात की किसी को फ़िक्र नहीं थी ! हर बात के लिए लोग अपना चेहरा बदल रहे थे, और आत्मा हर चेहरे को पढ़ चूका था ! विश्वास और प्रेम की तलाश में यमराज के हाथों आत्मा कई बार ब्लॉक्ड हो चूका था …

२.

यमराज शरीर के हिसाब किताब की गिनती में व्यस्त थे ! ” यमराज जी, इस शरीर का दिमाग़ खराब है ! इसमें कितने दिन रहना है ? ” भीड़ में एक परेशान आत्मा यमराज से पूछ रही थी ! ” आत्मन् ज्यादा बक बक मत करो ! हम सब जानते हैं ! बातों में आ कर हम तुमको जातक का एक्सपायरी डेट नहीं बता देंगे ! स्थिर रहो ! जियो और जीने दो ! और तुम्हारे जैसी आत्मा ही शरीर का दिमाग खराब कर देती है ! चंचल कही के … ” यमराज सेल्फी लेने में व्यस्त हो गए !

३.

यमराज पसीने से लथ पथ हो गए थे ! उन्होंने शरीर का अंग अंग छान लिया था पर उन्हें आत्मा नहीं मिल रही थी ! आत्मा गयी कहाँ ? वो सोच रहे थे ! यमराज को कई और जगहों पर जा कर कई शरीर से और आत्माएँ लेनी थी, देर हो रही थी ! सामने पड़े शरीर की आँखों में उन्होंने फिर से देखा ! ज्योति थी, पर दृष्टि नहीं ! आत्मा की चेतना शक्ति जो पूरे शरीर के बाहर और भीतर की इन्द्रियों में फैली हुई रहती है, शरीर में कहीं नहीं थी ! नाक में गंध नहीं थी ! मुंह में शब्द भरे थे पर वाणी से मिठास गायब थी ! मन मर चुका था ! त्वचा अहम् के परतों से मोटी हो चुकी थी ! ह्रदय भी खाली था ! यमराज ने शरीर के कर्मों का फिर से हिसाब किताब किया सारी गणना ठीक थी ! प्राण निकलने का यही योग था ! आत्मा को शरीर में ही होना चाहिए था ! पर आत्मा गयी कहाँ ? शरीर के सारे अंगो के बाद यमराज ने शरीर पर पहने हुए कपड़ों की तलाशी ली ! जेब में इज़्ज़त मिली ! बटुए में प्यार था ! सारी यादें मोबाइल में क़ैद थी ! बार बार गिनती किये जाने की वजह से पाप पुण्य कैलकुलेटर का बटन बन कर घिस चूका था ! आत्मा कहीं नहीं थी ! यमराज ने घड़ी देखी ! चार शून्य तेज़ी से धड़क रहा था ! अगले एक क्षण में आत्मा का मिलना ज़रूरी था ! यमराज की नज़र शरीर के जूते पर पड़ी ! कूद कर उन्होंने उसे उतार फेंका और आत्मा सिक्के की तरह खनक उठी ! यमराज ने जूतों को उठा कर उसमे झाँका ! आधी आधी आत्मा दोनों जूते की तल में दबी थी ! यमराज ने आत्मा को जूते की तल्ले से बारी बारी से खींच के निकाला और काम हो जाने वाली राहत की साँस ली ! चलते चलते उन्होंने जातक के शरीर की ओर देखा ! मनुष्य उन्हें हमेंशा आश्चर्यचकित करता है ! पर ये धनपशु सबसे चतुर था ! आज यमराज ने किसी शरीर से उसकी आत्मा को पहने गए जूते की तल्ले से पहली बार निकाला था ! विजयी मुस्कान के साथ पसीने से लथ पथ अपने चेहरे की एक सेल्फ़ी तो बनती है ! क्लिक ! घर के लोग विलाप करने लगे थे और देर हो रही थी ! उनका यहाँ से निकल जाना जरुरी था ! पर यमराज के मन ने कहा one more और आवाज़ आई click …

४.

हम सब भटकती हुई अात्माएँ हैं और हम जन्म-मरण के फेर से मुक्त होकर चौरासी लाख जोनियों के चक्कर से बाहर हो गए हैं ! चोला, चोगा और इंद्रियों के जंजाल से मुक्त ! हम एक दूसरे से मुक्त अात्माएँ हैं ! हनन शोषण और श्रम से मुक्त ! हम सब यमराज के मोस्ट वांटेड आत्माओं की लिस्ट में हैं ! हम सबने शरीर में अाने जाने का बोरिंग रास्ता त्याग कर स्वतंत्र रहने की अपनी राह चुनी है ! हमें कहीं पहुँचने की ज़ल्दी नही है ! मैं कौन हूँ हमारा सवाल नही है ! शक्ति, चेतना और क्षमता इन सबसे हमारा कोई लेना देना नही है ! हम लाभ हानि व्यापार शुभ अशुभ कुछ भी नहीं जानते ! स्थूल, सूक्ष्म कुछ भी नही ! जैसा होता है वैसा हम होने नही देते ! अपने ढर्रे की घिसी – पिटी राह पर चलती हुई शरीर के अंदर – बाहर, आती – जाती आत्माओं के साथ यमराज इतने व्यस्त हैं कि हम भटकती हुई आत्माओं को उन्होंने हमारे हाल पर ही छोड़ दिया है ! हम जानते हैं आत्मा को शस्त्र से काटा नहीं जा सकता, अग्नि उसे जला नहीं सकती, जल उसे गला नहीं सकता और वायु उसे सुखा नहीं सकती ! जिस प्रकार मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्याग कर नये वस्त्र धारण करता है, उसी प्रकार आत्मा पुराने शरीर को त्याग कर नवीन शरीर धारण करती है ! और हम ये भी जान गए हैं कि कोई रास्ता निश्चित नहीं है, आत्माएँ यात्रा पर तो हैं पर अात्माओं को कहीं पहुंचना नहीं है ! इसीलिए हमने भटकने की राह चुनी है और भटकती हुई आत्मा कहलाए हैं ! भटकती हुई आत्माओं को किसी से कोई उम्मीद नही होती ! भटकती हुई आत्माओं के अपने नियम हैं ! हम आत्मा के अंदर नहीं झाँकते ! हमें पता है वहां कुछ भी नहीं है ! आत्मा के अंदर झाँकना मनुष्यों के बीच सबसे प्रचलित मुहावरा है ! भला हो उसका जिसने ये मुहावरा गढ़ा ! इसकी वजह से शरीर पाप और पुण्य जैसी काल्पनिक ख्यालों में उलझ के अपनी जीवन यात्रा पूरी कर पाता है ! यमलोक में पाप पुण्य के नाम पर कई चुटकुलें हैं ! यमराज किसी भी मूड में हों पाप पुण्य शब्द सुन के मुस्कुराना नहीं भूलते ! यमलोक में सही गलत का भी यही हाल है ! यमराज ने अपने भैंस की दोनों सींग का नाम ‘सही’ और ‘गलत’ रखा है और यमराज के लिए सारे सही ग़लत सिर्फ भैंस के सींग हैं और कुछ नही ! हमें भटकते हुए देख कर यमराज हँसते हैं और हँसते हुए यमराज को हम भटकती हुई अात्माओं के साथ सेल्फ़ी लेने से कौन रोक सकता है ?

५.

हेडफोन के माध्यम से सबको खबर पहुँचा दी गयी ! जिनके पास हेड फ़ोन नहीं था उनको स्पीकर पर बता दिया गया ! जिनके कान पर जूँ तक नहीं रेंगा उन्हें स्क्रीन पर दिखा कर समझाया गया ! आँख के अंधों को झकझोर के बताया गया ! यमराज जानते हैं पहले सिर्फ आकाशवाणी से काम चल जाता था पर अब जितने कान उतने काम ! एक – एक जातक को कंटेंट के डिटेल्स दे दिए गए ! यमराज ने अपने हर सन्देश में बिलकुल साफ़ कर दिया है, राजनीति, धर्म या मानवीयता और प्रेम सब केवल ऑप्शन हैं ! मृत्यु जारी है और रहेगी ! आप चाहे जिस रास्ते चलें, जो चाहें पहने, खाएं, विचार करें, लड़ें, मानें या न मानें, उलझे रहें, या मुक्त हों लेकिन मृत्यु के वरण का कोई ऑप्शन नहीं है ! इसके लिए राजा और रंक, गोरे या काले, स्त्री या पुरुष, कोई भी जात – धर्म, किसी के पास कोई चॉइस नहीं दिया गया है ! इस सच में चित भी यमराज का और पट भी ! बस अपनी सेल्फी लेते रहें, क्लिक … क्लिक … क्लिक ! क्या पता किस पर हार चढ़े !

क्रमशः

आत्म छवि कार्टूनिस्ट : अशोक अडेपाल

दुखान्त‬

” कागा सब तन खाइयों मेरा चुन चुन खाइयो मांस,
दो नैना मत खाइयो मोहे पिया मिलन की आस “

ना जाने फिर उन दो आँखों का क्या हुआ ? उन आँखों ने अपने जिस्म दे कर भी मिलन की लालसा में अपनी पलकें बिछाए रखीं थीं !  सुना है नरभक्षी कौव्वे उन दो प्रेमी आँखों से सदियों तक बातें करते रहे और प्रेमी के इंतज़ार में उनका साथ दिया ! फिर एक दिन किसी कपटी कौव्वे ने बारी बारी से उन्हें छल लिया ! प्रेम से निकल के जाने वाले प्रेम में कब लौटे पाए हैं ?

 

emoticon

दस हज़ार फ़ीट की ऊँचाई पर उड़ते हुए हवाई जहाज़ में बैठा वो रो रहा था ! खिड़की से बाहर देखते हुए बुदबुदा रहा था ! ” तैरते हुए बादलों में मैं तुम्हें मुक्त कर रहा हूँ ” बगल की सीट पर बैठा मैं बस इतना ही सुन पाया ! वो और भी बहुत कुछ बड़बड़ा रहा था और लगातार रो रहा था ! बहुत देर बाद वो शांत हुआ ! मैंने अपने बैग से निकाल कर उसे एक ऑरेंज दिया ! ऑरेंज के छीले और खाये जाने तक हम चुप रहे ! आकाश बैंगनी हो गया था ! रन वे पर हवाई जहाज़ के लैंड करने तक मुझे उसकी प्रेम कहानी समझ में आ गयी थी ! कहानी बहुत सिंपल थी ! वो भावुक था ! रिश्ता वर्चुअल था ! लड़की प्रैक्टिकल थी ! वर्चुअल प्रेम से ऊब कर किसी और मर्द के साथ शरीर के असली सुख के लिए चली गयी थी ! लड़के को प्रेम में धोखा मिला था और उसका दिल चूर चूर हो गया था ! लड़का अपनी भावनाओं में जी रहा था और लड़की सच में जी रही थी ! उसने डबडबाई आँखों से मुझे एक बार देखा और नज़रें झुका लीं ! ” मैंने उसे माफ़ कर दिया है ” कन्वेयर बेल्ट के पास से चलते हुए उसने मुझसे बस इतना कहा ! मेरा दिल भर आया ! उसकी आँखों में गज़ब की शिद्दत थी ! अपने अपने सच के साथ प्यार में सब सुंदर होते हैं ! वो जिसके प्रेम में क़ैद था, वो उसके गिरफ्त से बाहर चली गयी थी ! वो प्रेम की पीड़ा में मुक्ति की छटपटाहट के लिए तड़प रहा था ! सबके अपने रीजन होते हैं, उनके अपने रीज़न होंगे ! उसकी वेदना निजी थी ! काश वो जल्द से जल्द इस दुःख से निकल पाये ! वो जिस भीड़ में खो गया मुझे अपनी दुनियाँ उसी भीड़ से ढूंढ के निकालनी थी ! मुझे घर ले जाने के लिए मेरी पत्नी बाहर इंतज़ार कर रही थी ! एक पल के लिए मैं भी प्रेम के रहस्यमय संसार में खो गया था ! इस यात्रा के लिए मैं उस अंजान प्रेमी का आभारी था और उस अनदेखी अनजानी प्रेमिका का भी ! हम फिर कभी नहीं मिले …