एंग्री सोशल मैन

एंग्री सोशल मैन गुस्से में खड़ा ही रहता है !
एंग्री सोशल मैन राष्ट की इज्जत को की – बोर्ड में रखता है !

एंग्री सोशल मैन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पुतला है !
एंग्री सोशल मैन का गुस्सा ऑड – ईवन नहीं होता !
एंग्री सोशल मैन अपना गुस्सा अपने पोस्ट पर पब्लिक कर देता है !
एंग्री सोशल मैन सच्चा देश भक्त है !
एंग्री सोशल मैन जे एन यू को गाली देता है !
एंग्री सोशल मैन का डायजेस्टिव सिस्टम इंटेलेक्टयूएल का पाखण्ड, विरोध का अपच, विचारधारा का अजीर्ण भी डाइजेस्ट कर लेता है !
एंग्री सोशल मैन बकचोदी नहीं करता !
एंग्री सोशल मैन आमिर खान की फ़िल्म को बायकॉट करता है !
एंग्री सोशल मैन भारत माता की जय नहीं बोलता !
एंग्री सोशल मैन विनम्र श्रद्धांजलि भी गुस्से में देता है !
एंग्री सोशल मैन किसी गुमनाम लड़ाई में सबकी मदद करता है !
एंग्री सोशल मैन रिएक्ट कर के अंड बंड, अकर बकर, अंट शंट, आलतू फालतू, बातें नहीं करता !
एंग्री सोशल मैन का गुस्सा ब्रेक नहीं लेता !
एंग्री सोशल मैन का बस नाम ही पढ़ते रहते हैं,
एंग्री सोशल मैन मिस्टर इंडिया है !

एंग्री सोशल मैन की तस्वीरों के पीछे माओत्से झांकते हैं !
एंग्री सोशल मैन रविश कुमार को गाली देता है !
एंग्री सोशल मैन महान गुप्त गतिविधियों में लिप्त रहता है !
एंग्री सोशल मैन के अनुयायी गलियों में नहीं गालियों में सबका पीछा करते हैं !
एंग्री सोशल मैन मुठ्ठी तान नहीं सकता, उसकी मुठ्ठी में फ़ोन रहता है !

एंग्री सोशल मैन शेयर का चहेता, लाइक का प्रेमी, कमैंट्स का फॉलोवर, और सोशल मिडिया का जंतर – मंतर है !
एंग्री सोशल मैन हर सोशल प्लेटफार्म पर गुस्से में ही मिलेगा !
एंग्री सोशल मैन वर्चुअल दुनिया में हँसता है !
एंग्री सोशल मैन का गुस्सा उसके ‘फ्रेंड्स’ झेलते हैं !

दी लास्ट शो

हज़ार

हज़ार

पांच सौ

शो बीच में ही रुक गया ! सर्कस की दुनिया में भारत सर्कस का कैश शो देखने दुनिया आती ! कैश का सर्कस, सर्कस का सबसे खतरनाक खेल था ! यह खेल हृदय रोगियों और बच्चों के लिए नहीं था फिर भी वे सब शो में हिस्सा लेने आते थे ! कैश शो में पांच सौ हज़ार को ड्रम्स में भर – भर के डायनामाइट से उड़ाया जाता और खिलाडी बने दर्शक जान पर खेल कर रुपयों को घर ले जाने के लिए लूटते ! यह एक हॉरर खेल था और रात में अकेले खेलने के लिए उचित नहीं था ! फिर भी सरकस के लास्ट शो में इसे लोग खेलते थे ! अमीर जीवन जीने के लिए लोग सर्कस का ये शो खेलने और देखने आते ! शो का ऐसा असर होता कि दरिद्र दर्शक धनी हो जाते !  सबकी जेब में एक – एक हज़ार का और एक – एक पांच सौ के नोट आने की सर्कस के जोकर्स की चेतावनी सच हो जाती ! खेल का यही चमत्कार था ! इसीलिए भारत सर्कस दुनिया का सबसे अनोखा सर्कस था !

सर्कस में यही एक शो था जिसे जोकर्स भी बैठ के देखते थे ! खेल शुरू हो चूका था ! हवा में लटकते हुए गुल्लकों में जोकर्स बैठे थे ! उनके बैठने की यही जगह थी ! वे गिरती चवन्नी की झन की आवाज़ के साथ मंच पर गिरते हुए एंट्री लेते ! वो ऐसे थूकते कि चवन्नी का भ्रम होता ! लोग जब उन्हें उठाने के लिए झुकते तो वे खूब हँसते ! कैश के इस ख़तरनाक खेल में अठ्ठनी और चवन्नी जोकर्स बनते थे ! चवन्नी को लेकर सीरियस होना फज़ूल है इसलिये सर्व-सम्मति से सर्कस में खिलाड़ी दर्शकों ने उन्हें जोकर मान लिया था ! हर रात कैश के खेल का शो कौड़ियों से शुरू हो कर लाखों करोड़ों तक पहुँच जाता ! हज़ार पांच सौ कैश शो के हीरो थे !

इस खेल को देखने से पहले जोकर्स सर्कस के दर्शकों के लिए एक भविष्यवाणी पढ़ते थे ! भविष्यवाणी के शब्द थे  ‘लार्ड कुबेर इलेक्ट्रॉनिक मनी ले कर आएँगे ! मिस्टेक होता जायेगा, कर्रेक्शन्स आते जायेंगे ‘ ! इन खेलों को देखने के लिए जमाखोरी, सूदखोरी, मुनाफाखोरी जैसे दर्शनों से सर्कस के दर्शक को गुप्त परिचय कराया जाता ! जोकर दर्शकों का चेहरा पढ़ते और कान में आ कर उन्हें बताते कि वे कंजूस हैं या कामचोर ! दर्शक अपने बारे में सुनकर डरने का अभिनय करते हुए हँसते ! फिर सब हंसने लगते ! शो आगे बढ़ जाता !

खेल में बनिए और बिचौलिए बनावटी और दिखावटी नाम के चरित्र बनते ! कैश के शो के क्लाइमेक्स में हज़ार पांच सौ मिल कर बनावटी बनिए और  दिखावटी बिचौलिए की मदद से काले धन की निर्ममता से नकली हत्या करते थे ! मंच पर ये थ्री डी के लाइट इफ़ेक्ट में होता जिसकी गंभीरता का काला हास्य भीड़ समझ लेती और सर्कस के लास्ट शो में सब खूब हँसते और शो ख़त्म होने के बाद हँसते हँसते कैश ले कर अपने अपने घर जाते !

आज कैश शो बीच में ही रुक गया था ! हज़ार पांच सौ जैसे सुपरस्टार के मंच पर रहते रहते सब मिलकर हज़ार पांच सौ पर हंसने के लिए इतने चुटकुले बना लेंगे लोगों ने कभी सोचा नहीं था ! कैश शो के रुकते ही दर्शक दीर्घा में बैठे सर्कस के दर्शक की भीड़ कोरस में रोने लगी और रोते रोते हंसने लगी ! भीड़ की सोशल मीडिया पर सारे तर्क शास्त्री अर्थ शास्त्री बन गए ! कैश ट्रैश हो गया ! रातों रात पांच सौ हज़ार हैश टैग बन गए ! करोड़ कौड़ी हो गया ! हज़ार पांच सौ कैश के शो में चलेबल – रनेबल था, मंच पर अचानक अनेबल हो गया ! भीड़ आपस में बैठ कर तरह – तरह की चिंताएं करने लगी ! दर्शक जहाँ थे वहीँ बैठे बैठे अपने शब्दकोश बनाने लगे ! विचार प्रसारित करने लगे ! दर्शकों में बैठे शराबी अपनी जेबों की नोटों के साथ बच्चों की तरह खेलने लगे और हज़ार के नोट में चखना भर के सेल्फी लेने लगे ! हज़ार इससे ज्यादा पहले कभी अपमानित नहीं हुआ था ! अपनी नज़र में वो दलालों के क़दमों से भी नीचे गिर चूका था ! कैश शो के रुकते ही मंच पर हज़ार पांच सौ दोनों खड़े थे ! पाँच सौ का मुंह उतर गया था ! हज़ार अवाक था !

अभी अभी हज़ार पांच सौ को बीच शो में ही नौकरी से निकाल दिया गया था ! अब तक जो शो का वी आई पी था एक पल में बेसाहारा बन गया था ! सर्कस की कुरूप सच्चाई आज हज़ार पांच सौ के सामने थी ! हज़ार पांच सौ को लगा अब तक उनकी की गयी चापलूसी और भीड़ से मिले चरण स्पर्श का ऋण वे भाषण दे कर ही अदा कर सकते हैं ! चाकरी छोड़ कर मंच पर से उतरने से पहले पांच सौ ने सर्कस के आयोजकों से माइक ले लिया और मौन हो गयी ! ‘ एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर मुझे कूदना सीखाने से ले कर इस खतरनाक खेल तक मुझे किसने पहुँचाया ? ‘  सबने पहली बार रुपये को बोलते हुए सुना ! रुपया उनसे बात करे कईयों के गले से ये बात नहीं उतरी ! भीड़ में बैठे  इंटेलेक्चुअल्स पांच सौ को भाषण देते हुए देख कर हज़ार पांच सौ को उसके मुँह पर ही कोसने लगे ! हज़ार पांच सौ को ये महसूस हो गया कि सब उनसे एक पल में दूर हो गए हैं और नफरत करने लगे हैं ! हाथ का मैल कह कर उनसे हाथ झाड़ने लगे हैं ! हज़ार पांच सौ का दिल टूट गया ! और वो कराहने लगे और बारी बारी से माइक पर अपने दिल की बात करने लगे ! “ इंटेलेक्चुअल्स मुझे क्यों कोस रहे हैं ? बुद्धिजीवी मुझे क्यों गालियाँ दे रहे हैं ? मुझे समझने में आप कहाँ चूक गए ? मुझसे क्या भूल हुई ? “ पांच सौ बोली ! “ इंटेलेक्चुअल्स देश के मूड को पढ़ने में नाकाम क्यों रहे ? “ अब बोलने की बारी हज़ार की थी ! हज़ार का स्वर सपाट था जैसे कहीं कुछ हुआ ही न हो ! “ मेरी कंडीशनिंग किसने की ? जीने के लिए आग पर चलना मुझे किसने सिखाया ? मेरा स्वामी कौन था ? मेरे धारक कहाँ गए ? मेरे धारक … मेरे धारक  “ इतना कह कर दोनों एक साथ रोने लगे ! अब तक पांच सौ और हज़ार भीड़ में फेनोमेना थे पर अब शो के बीच में ही मंच पर अनाथ मेमना हो गए ! दर्शकों की भीड़ ने न जाने क्या सोच कर कुछ पल तक उनको रोने दिया ! भीड़ की अब यही सहानुभूति उनके लिए बची थी, जो उन्हें भीड़ से मिल रही थी !  हज़ार पांच सौ भौचक्के थे ! अचानक उनसे कोई डर नहीं रहा था ! सब तरफ से रिजेक्ट होते देख कर, पाँच सौ ने फिर कहना शुरू किया ! ” सर्कस संघ का शुक्रिया ! सर्कस सोसाइटी वाले, मेरे खेल प्रेमियों, मेरी एक आखरी इच्छा जरुर पूरी करना ! संस्कृति के नुक्कड़ों पर न रख सको तो कम से कम किसी चौक चौराहे पर मेरे नाम से कोई सड़क या चौराहा जरूर बनवा देना “ दोनों एक पल के लिए मौन हो गए ! सब मौन थे ! जसे श्रधांजलि देने में होते हैं ! “ दे दे मेरा पांच रुपैया बारह आना …”  गाते हुए पांच सौ रोने लगी और सबको भावुक कर दिया ! भीड़ ये गीत गुनगुनाने लगी ! तालियाँ बजी ! हर्ष ध्वनि हुआ ! पांच सौ की आँखें डबडबा गयीं ! सब कुछ बहुत नाटकीय हो गया ! भीड़ का समाज एक झटके में नए खेल के लिए तैयार हो गया था ! पांच सौ और हज़ार अब तक जहाँ पूंजीवाद के नाम पर यूज्ड हो रहे थे अब उसी नाम पर वहीँ अब्यूज़्ड होने लगे !  नाटक शुरु होने से पहले जो नाटक होता है वो शुरू हो चूका था ! आम लोगों के साथ खाने, पीने और घूमने का सबसे ज्यादा पोलिटिकल स्टंट किसने किया है ? लोग ये गूगल करने लगे ! उत्तर में पांच सौ हज़ार का नाम सबसे ऊपर था ! प्रशंसा युग के चाटुकार पत्रकारिता काल में रुपया को बचाने कोई नहीं आया गुजरे वक़्त से सारे रिश्ते टूट चुके थे !

खेल में परदे के पीछे बैठा हुआ काला धन ये सब अपनी आँखों से देखने के लिए घबराया हुआ दौड़ा दौड़ा ग्रीन रूम से मंच पर आ गया और अचानक हांफता हुआ स्पॉट लाइट में फंस गया ! वो पहली बार सबको साफ़ दिख रहा था ! काले धन को मेकअप करने का मौका नहीं मिला था ! वो अपनी सादगी में भी भयानक लग रहा था !

आज सर्कस के कैश शो के बीच में ही 8 बजे भारत सर्कस के प्रमुख की एक घोषणा ने खेल बदल दिया ! भारत सर्कस के प्रमुख की बात किसी सरकारी कानून से कम नहीं था ! प्रमुख सर कह रहे है तो सही ही कह रहे होंगे भीड़ ने सोचा और उनकी हर बात कानून हो कर लागू हो गया ! हज़ार पांच सौ आज आधी रात से अब चाकरी में नहीं होंगे ! चलता हुआ कैश शो बीच में ही रुक गया !

आना, सवैया, पहाड़े में ज़िंदगी का हिसाब लगाने वाला समाज पनियाही आँखों से सर्कस का ये लास्ट शो देख रहा था ! कैश शो के रुकते ही भीड़ शो ख़त्म होने के उल्लास में ताली बजा कर हर्ष ध्वनि में चिल्लाने लगी ! अफरा – तफरी में सब उल्टा पुल्टा होने लगा ! लोग टेलीविज़न में छपने लगे और अख़बार में दिखने लगे ! डिजिटल होते हुए देश के डिजिटल शून्य और डिजिटल एक, भीड़ को चीर कर सामने मंच पर आ गए और मंच का संचालन करने लगे ! भीड़ ने अपने विचार प्रक्रिया से पांच सौ हज़ार को तत्काल हटा दिया ! सबकी नज़रों के सामने भीड़ धीरे धीरे डिजिटल अंक में बदलने लगा !

सर्कस का अर्थशास्त्र जोकर ही समझ सकता है, भीड़ भरे किसी शो का कोई बेपरवाह दर्शक नही ! आगे बढ़ कर चवन्नी – छाप जोकर्स ने ही नया डिजिटल शो संभाला ! अपने पुश्तैनी भारत सरकस में इन जोकरों का इतिहास चवन्निया मेम्बरी से ही शुरू हुआ था ! जोकर अपने गुलाबी और बैंगनी कपड़ों में मिल कर दस रूपये की साइज़ का बच्चों के स्टीकर टाइप दो हज़ार का नोट बन गए ! एक दिन के दूधमुँहे नोट का अभिनय सब जोकर मिल कर बहुत खूबी से करने लगे ! जोकर्स ने दर्शकों का ध्यान खींचना शुरू कर दिया ! एक पैसे से दो हज़ार तक की नए डिजिटल कहानी में पांच सौ और हज़ार से एक पल में सबका कनेक्ट ख़तम हो गया !  ‘ चूरन वाला नोट ‘ चिल्लाती हुई शो में बॉयफ्रेंड के साथ आयी लड़कियों ने जोकर्स का साथ देना शुरू कर दिया ! भीड़ में सबकी अपनी अपनी सेल्फी थी ! भीड़ के पास सबकुछ अपना था ! अपने सिद्धांत, अपनी पूंजी ! अपनी किताबें, अपनी फिल्म, अपने ब्लॉग ! नई दुनिया की नयी जेनेरेशन भीड़ पर सबसे ज्यादा यकीन करती है और पैसा भीड़ का सबसे बड़ा सिद्धांत है ! भीड़ सर्कस के इस खेल को देश की व्यख्या कहने लगी ! जोकर्स के डिजिटल खेल से इकॉनमी के माइक्रो मच्छर मंगल यान से मार्स पर जाने का सपना देखने लगे ! शो में इस बार कोई भविष्य वाणी नहीं हुआ सबको सीधा भविष्य दर्शन हो गया ! भीड़ के सामने हज़ार पांच सौ का जाना बचे खुचे का जाना हो कर रह गया ! दो हज़ार का टिकट कूपन सा दिखने वाला नोट जोकर्स ने शो में सबके लिए बाँट दिए ! भीड़ को राहत मिली ! कुछ ही देर में ज़ोकरों ने अच्छे खासे सर्कस को नौटंकी बना दिया ! दर्शकों ने भी बिना बात के नाचने का मन बना लिया ! अब्दुला की शादी के सब बेगाने, दीवाने बन के नाचने लगे ! भीड़ में कौन कहाँ सक्रिय हो गए कहना मुश्किल हो गया ! सब अपने कूपन लहराने लगे और उन्हें छोटे छोटे रुपयों में बदलवाने के लिए बैंक की ओर बढ़ गए ! सर्कस के बाहर भी लोग खुश थे ! न पैसा है न बदलवाने की झंझट कहते और मुस्कुराते !  लोग देख रहे थे और नौटंकी चल रहा था ! लग रहा था लास्ट शो में ख़ुशी की सबको कोई नयी करन्सी मिल गयी थी ! और इस करंसी का आनंद लेने के लिए काम करते हुए लोग कतार में खड़े हो गए ! पांच सौ हज़ार के युग में कोई बर्तन मांजना नहीं चाहता था, पर अब जनता सब करने को तैयार थी !

अपने सपनो का भारत देखने के लिए लोग लाइन में खड़े हो गए ! जिन्हें नहीं आती थी वो भी पैसों के लिए ए टी एम के सामने एक्टिंग करने लगे और भीड़ में एक दुसरे के भाषण की खूबियों से पेट भरने लगे ! लोगों ने उम्रदराज़ लोगों को बैंकों के आगे झुकते देखा ! सबको मनोवैज्ञानिक आज़ादी मिल गयी थी ! एक युवती ने ख़ुशी में अपना टॉप उतार दिया ! वामपंथी और समाजवादी, पुंजीपतियों की मदद के लिये सडकों पर आ गये ! ज़माना सच में बदलने लगा ! जिस तरह की हताश युवाओं ने शिक्षा पायी, आनन फानन में सबको रोज़गार मिल गया !  इसी दिन के लिए पाल पोस के नयी पीढ़ियों को बड़ा किया गया था ताकि ऐसे युद्ध में वो पुरानी पीढ़ी को डिस्पोज़बल कप्स में पानी पिलाये ! जोकर्स ने युवाओं की हताशा को ऊलजुलूल के लिंक से विद्रोह में बदलना चाहा पर खुद हताश हो गए !

नोट बदल गया था लोग बदल गए थे ! पैसा निकालने की सीमा समाप्त हो गयी ! एटीएम से अब एक दिन में कोई कुछ भी निकाल सकता था ! सुबह की चाय से लेकर लेटने की चटाई तक ! दूध , ब्रेड, अंडा और सब्जी तरकारी के साथ गुप्त रूप से ए टी एम की मशीन में जरुरत का सब सामान मिलने लगा ! जिनके पास गुप्त पासवर्ड था वे लोग दूध जमा कर के ए टी एम की मशीन से दही निकालने लगे ! कहीं कहीं किसी मशीन से घी भी निकला और फिर मशीन बंद हो गयी !

टेलीविज़न पर बैठे कबाड़ी बीस रुपये किलो के भाव से हज़ार और पांच सौ को तौलने निकल पड़े ! दवाई की कम्पनियों और डॉक्टरों की फ़ौज ने सबको बिमार, बहुत बिमार बना दिया था ! शहरों में लोगों को सबसे पहले हॉस्पिटल की याद आयी ! गाँव में बैंक के समीप खुले आकाश के नीचे ज़ेरॉक्स मशीन लग गए ! सबका धंधा चल पड़ा ! नोट-एक्सचेन्ज फ़ॉर्म एक नया सर्कस था !

दुनिया जानती है भारत सर्कस के कैश शो में दर्शक की भीड़ पैसे वाली पार्टी है ! इस भीड़ के पास पैसे की अपनी परंपरा है, पैसे की विरासत है, और पैसे का गौरव है ! इसीलिए ये शो चल रहा था ! भीड़ प्राय: बुद्धि विरोधी होते हैं और भीड़ सिर्फ बेहतर जीवन शैली के लिए जीती है ! भीड़ का समाज एक झटके में नए खेल के लिए तैयार हो गया ! व्यापारियों ने अपने दिमाग में जुगाड़ का गणित झटपट लगा लिया ! कर्मचारियों की सैलरी कैश हो गयी ! उनके दिमाग में उनका कर्मचारी नोट बदलवाने के लिए लाइन में खड़ा हो चूका था ! पांच सौ हज़ार को पूरी पिक्चर समझ में आ गयी ! सरकस में उनकी शो की तम्बू का बम्बू उठ चूका था ! बचत का मतलब सिर्फ महिलायें जानती थी ! महिलाओं का जो गुप्त धन नंगा हुआ उस पर जोकर हंसने लगे ! कोई कह रहा था पांच सौ की इस नोट से ये लड़ाई पांच सौ वर्षों से चल रही थी, आज जीत मिली है ! कोई एक हाथ में सौ सौ के नोट का पंखा बना कर दुसरे हाथ से सेल्फी ले रहा था ! सौ का नोट सबसे ज्यादा बिजी हो गया ! अपने से सभी छोटे नोटोँ का वो फिर से लीडर बन बैठा ! सौ के नीलेपन में थोड़ा मोर पँख और घुल गया , सौ आसमान का राजा नील कंठ हो गया !

शो खत्म होते होते ये ऑफिसियल हो गया था कि देश की अस्सी प्रतिशत आबादी को कैश का ये शो अब सर्कस में नहीं चाहिए इसलिए इस खेल को अब खत्म कर देना चाहिए ! असली नकली के अपने हर रूप में अब तक सबके जीवन में काम आने वाला और हर लिंग की मर्दानी ताक़त हज़ार पांच सौ, बड़े बे आबरू हो कर मंच पर से उतरे ! कोई कह रह था ऐसा पहले भी हुआ है ! कोई कह रह था ऐसा ही कुछ उसने कभी सपने में देखा था !

अपने अपने कैमरे के सामने सब सौ – सौ के नोट लेते देते ह्यूमन लगने लगे !  हज़ार पांच सौ स्कूल, अस्पताल, रोड और रेल लाइन से भी विदा हो गए ! सरकार के साथ साथ  पुलिस, पंचायत, बाजार, फ़ौज, सबका कल्याण हुआ ! एक, दो, पांच, दस के सिक्कों की टोपी पहने जोकर सफ़ेद – ग्रे – काला झंडा लिए ‘भूखे हैं, हम भी भूखे हैं’ कह कर छाती पीटने लगे, यह सब देख कर लास्ट शो में दर्शकों का हँसते हँसते बुरा हाल था ! खुल्ले के फेर में इस दूकान से उस दूकान भीड़ चक्कर नहीं लगाना चाहती ! इसीलिए नए सरकस में इन जोकरों की उपस्थिति ज्यादा फनी हो गया था ! जोकर की नौकरी नए सर्कस में पक्की हो गयी !

इस बीच किसी जोकर ने पांच सौ हज़ार की पीठ पर सरकस की शो का अमर वाक्य लिख दिया था ! मंच पर से उतरने के लिए जैसे ही वे दोनों मुड़े सबने उनकी पीठ पर ‘द – एन्ड’ पढ़ लिया ! जाते जाते उनपर कोई जूते फेंकने लगा तो किसी ने स्याही लहरा दी ! किसी जोकर ने उसी वक़्त लाइट्स आउट कर दिया ! पांच सौ हज़ार अँधेरे में हमेशा के लिए डूब गए ! कैश खत्म, शो ख़तम ! ये उनका लास्ट शो था ! हज़ार पाँच सौ जाते जाते मंच के अँधेरे में काले धन से मिल गए और अँधेरे में अफरा तफरी मचाने की कोशिश की ! इसी अफरा तफरी के हिसाब-किताब की मज़बूरी में सर्कस लास्ट शो के बाद दो दिन तक बंद रहा !

 

लल्लन टॉप में प्रकाशित 

मिक्स्ड फीलिंग्स / मनः स्टेटस

 

मनः स्टेटस

मनः स्टेटस

1.

किसी को मुझे छोटा दिखाना होता है तो मेरी फिल्मों की असफलता की बात जरूर करते हैं ! फिर चरित्र पर चोट करते हैं ! ये कोई नयी बात नहीं है ! फेसबुक पर मेरी हालत चंद्रधर शर्मा गुलेरी की कहानी ‘उसने कहा था’ के लड़के जैसी हो जाती है ! इनबॉक्स से निकल कर घर लौटते लौटते लगता है रास्ते में एक लड़के को मोरी में ढकेल दिया हो ,एक छावड़ीवाले की दिन-भर की कमाई खो दी हो ,एक कुत्ते पर पत्थर मारा हो और एक गोभीवाले के ठेले में दूध उड़ेल दिया हो … सामने नहा कर आती हुई किसी वैष्णवी से टकरा कर अन्धे की उपाधि तो पा ही लेता हूँ … गॉसिप का हिस्सा होता हूँ, ब्लॉक होता हूँ ,अनफ्रेंड होता हूँ तब कहीं घर पहुँचता हूँ …

 

2.

कबीरा खड़ा बाजार में सबकी मांगे खैर। ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर !

 

फेसबुक पर पूरी तरह उन्मुक्त हो गया हूँ ! ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर ! मेरा कोई चेला नहीं ! मैं किसी का गुरु नहीं ! मेरा कोई गैंग नहीं है और न ही मैं किसी गैंग का हिस्सा हूँ ! मेरा कोई ब्रांच नहीं है और न ही मेरा कोई सिक्का चलता है ! किसी को खुश करने के लिए मैं एक बार भी लाइक बटन पर चटका नहीं लगाता और न ही किसी के द्वारा लाइक नहीं किये जाने पर बुरा मानता हूँ ! चापलूस और चमचे मुझसे दूर भागते हैं ! मैं अपनी मर्ज़ी से जो चाहता हूँ लिखता हूँ और अपने लिखे हुए पर सबकी राय को ठेंगे पर रखता हूँ ! एरोगेंट तो था ही अब ज़हर हो गया हूँ ! ऐसी दोस्ती को चूल्हे में झोंक आया हूँ जो सिर्फ मतलब के लिए की जाती है और निभाई जाती है ! जिसने भी मुझे समझने का दावा किया उनके दिल में मेरे लिए एक कचोट जरूर है क्योंकि वो मुझसे कभी मिले नहीं और मिले भी तो मैं उनके किसी काम न आ सका ! मेरे लिए बनायी गयी हर राय को मैं स्वीकार करता हूँ ! फेसबुक पर मैं एक लूज़र हूँ, अपने मुठ्ठी भर दोस्तों के साथ बहुत खुश हूँ और निडर हूँ !

 

3.

मेरे लिए कुछ भी नया नही है ! मैं हर बात पर, हर काम मे सिर्फ येस का मोहताज़ नहीं ! नो … नहीं …माफ़ करिए .. नही हो सकता … सॉरी … फ़िर कभी … गो अवे … माफ़ी … समय नही है … हो नही सका … विल कॉल यू बैक … बजट नही है … अनफ्रेंड, ब्लॉक, नो रिप्लाई, मेरा जीवन है ! इन सबकी अनुभूति अद्भुत है ! बेशकीमती ! इतना आज़ाद इतना मुक्त इतना अच्छा पहले कभी नही लगा ! कोई कमिटमेंट नहीं / कोई बंधन नही / कोई अनुग्रह, पूर्वाग्रह, कुछ भी नही !! या हू !!! सबका शुक्रिया, सबको सलाम !

 

PS – ये व्यक्तिगत है ! इस पोस्ट पर राजनीतिक / सामाजिक या कोई कट -पेस्ट ज्ञान न पेलें ! अाप से नहीं हो पाएगा, मेरे अनुभव का एक अंश भी अाप का सच नही है …

 

Pic Credit : Google

मैं बैन का समर्थक नहीं

 

मैं बैन का समर्थक नहीं

मैं बैन का समर्थक नहीं

 

एक /

हम अभी लाइव टेलीकास्ट के लिए तैयार नहीं …

हमें क्रिकेट लाइव दिखाना आता है, देश नहीं
उपवास नहीं
उत्सव, त्यौहार नहीं
बलिदान नहीं, अधिकार नहीं

हमें फैशन शो दिखाना आता है
संस्कार नहीं
हमला नहीं , वार नहीं
हम अभी लाइव टेलीकास्ट के लिए तैयार नहीं !

हमें भाषण दिखाना आता है
खेल नहीं. पुरस्कार नहीं
समाचार नहीं
हम अभी लाइव टेलीकास्ट के लिए तैयार नहीं !

हमें मेंडेट दिखाना आता है
कैंडिडेट नहीं
हमें चमत्कार दिखाना आता है
पत्रकार नहीं
हम अभी लाइव टेलीकास्ट के लिए तैयार नहीं !

हम बैनर बनने को तैयार है
हम अभी बैन होने को तैयार नहीं …

 

दो /

बैन का पहाड़ा

बैन एकम बैन
बैन दूनी सर्कस
बैन तिये स्टेटस
बैन चौके बकवास
बैन पंजे काला
बैन छके हास्य
बैन सत्ते नैन
बैन अठ्ठे रुपया
बैन नामे एन डी टी वी
बैन दसे बांस

इंटरव्यू

अपने बारे में पढ़ना मुझे संकोच से भर देता है ! फिर भी Jey Sushil ने मेरे बारे में जो कुछ भी फेसबुक पर लिखा है अपने दोस्तों से बाँट रहा हूँ ! अपने काम काज के प्रति पारदर्शिता और ईमानदारी में सुशील का जवाब नहीं ! मुझे मुझसे ही मिलवाने और डिस्कवर करने के लिए शुक्रिया सुशील बाबु !

 

Pic Credit : Sushil Jha

किसी को जानना हो तो उसे सुनना चाहिए…….घंटों तक….आदमी कितना झूठ बोलेगा….बोलते बोलते….अंत में सच बोलेगा……अंदर की बात खोलेगा…वो आपको तोलेगा…….आपके सवालों से…आपकी बातों से फिर अपना जिगर खोलेगा….आपको मौका देगा उसे समझने का….ये मौके बार बार नहीं आते.
बंबई में दो फिल्मकारों से मिला..दोनों को जानने की कोशिश में सिर्फ यही करने की कोशिश की ….उनको सुनने की….दोनों ही बिल्कुल अलग अलग स्टाइल के फिल्ममेकर. लंबा संघर्ष..छोटी छोटी कहानियां..चेहरे पर मुस्कुराहटें..किसी के बारे में फैसले वाले अंदाज़ में टिप्पणी न करने की आदत.

अपने काम के बारे में कम बोलना…आलोचना को लेकर सजग लेकिन चिंतित नहीं. दोनों को खुद पर भरोसा…अपने पर अपने क्राफ्ट पर. दोनों के बैकग्राउंड बिल्कुल अलग लेकिन कहीं न कहीं एक ललक दोनों में अच्छा सिनेमा बनाने की.

संजय मस्तान Sanjay Jha Mastan– पटना से रंगकर्म, एनएसडी से पढ़ाई फिर क्लैप देने से लेकर डायरेक्शन तक का सफर. एक अलग तरह का डार्क ह्यूमर और फिल्मों का एक एकैडेमिक लैंग्वेज विकसित करने की जिजीविषा. संभवत संजय ने पहली बार किसी कविता को फिल्मों में पिरोया था. फिल्म थी स्ट्रिंग्स और कविता थी नागार्जुन की मंत्र. विरोध प्रदर्शन हुए कविता के विरोध में जबकि कविता पर कभी कोई प्रतिबंध नहीं था. यूट्यूब पर लाखों लोग वो मंत्र कविता सुन चुके हैं .कम लोग जानते हैं वो आइडिया संजय मस्तान का था.

फिर मुंबई चकाचक जो सुनील शेट्टी के कचरा रायते में फंस गया. किसी फिल्मकार के लिए फिल्म तैयार होने के बाद रिलीज़ नहीं होना कैसा होता है ये पूछना भी नहीं चाहिए. संजय भाई को भी बुरा लगा ही होगा लेकिन अब वो नई ऊर्जा से अपनी नई योजनाओं पर बात करते हैं.

वो अकीरा कुरोसावा के फैन हैं और कहते हैं अकीरा के अनुसार किसी फिल्मकार के पास एक समय में पांच स्क्रिप्ट होनी चाहिए और मेरे पास तीन स्क्रिप्ट्स हैं..दो और स्क्रिप्टों पर काम कर रहा हूं. उनकी रुचियों की सूची लंबी है. उनके जैसा दुनिया भर के स्टांपों का कलेक्शन मैंने जीवन में किसी और के पास नहीं देखा है.
वो डिजिटल दुनिया के नए कामों पर बात करते हैं. और उनसे आगे की सोच रखते हैं. उनकी फिल्मों की ही नहीं उनकी बातचीत की भाषा भी ग्लोबल है. वो थिंकिंग फिल्ममेकर हैं शायद इसलिए बॉलीवुड में कम लोग उनकी भाषा समझते हैं.

फेसबुक पर वो अपनी छोटी छोटी टिप्पणियां लिखते हैं. बहस नहीं करते..वो जानते हैं….ये सतही माध्यम है. फिल्मों को कंपलीट माध्यम मानते हैं और फिल्म बनाना उनके लिए साधना है.

उनसे बात करते करते कई बार लगा और मैंने कहा भी कि वो अपने समय से आगे के फिल्ममेकर हैं. उनके आइडियाज़ सुनने के दौरान मेरे पास बहुत कम ही था उसमें कुछ जोड़ने को…

वो वर्ल्ड सिनेमा के स्तर की बात कर रहे थे. मैं बस सुन रहा था. उनके घर में रखी हज़ारों किताबों, मैगज़ीनों, पर्चों, पोस्टरों को पलट रहा था. छोटे से घर में करीने स से रखे हज़ारों स्टांप्स, भरत मुनि का नाट्यशास्त्र और न जाने किन किन विषयों पर किताबें.

मैं उनकी निर्माणाधीन फिल्म पर कोई बात कह नहीं सकता लेकिन मैं अपनी छोटी सी समझ से कह सकता हूं कि यह एक कल्ट फिल्म होगी. अगले पांच वर्षों में जब कभी भी आए वो अपने समय से बहुत आगे की फिल्म होगी.

संजय बात बात पर क्राफ्ट की बात करते हैं…और क्राफ्ट पर बतियाते बतियाते वो मुंबई, कला, जीवन और न जाने कितनी बातों के छोर से छोर मिलाते हुए सहजता से अपनी बात रखते जाते हैं.

अपनी फिल्मों पर बात करते हुए वो बच्चों की तरह खुश हो जाते हैं. अपनी असफलताओं को छुपाते नहीं. उनके आगे के दो दांतों के बीच का खाली हिस्सा मुस्कुराता रहता है.

उन्हें आलोचनाओं से फर्क नहीं पड़ता. वो अपनी दुनिया में मस्त रहते हैं. उनको पता है फिल्म कैसे बनती है..उनको पता है उन्हें कैसी फिल्म बनानी ही. उनकी चुनौती बस ये है कि उन्होंने जो सोचा है वो पर्दे पर कैसे उतरे..क्योंकि इसी चुनौती में हर कोई सफल या असफल होता है……

आभार – सुशील झा

Sushil Jha

सुशील झा / Pic Credit : Anurag Vats

डिजिटल कचरा

 

digital-data

डिजिटल डाटा

 

डिजिटल कचरे में शब्द कम होते हैं, चित्र ज्यादा

 

एक /

कुत्ता जल रहा है ! लड़की मर रही है ! भाषण चल रहा है ! ब्रीफकेश, अटैची, हैंडबैग सब नोटों से भरा है ! अपनी अपनी तस्वीरों में लोग द्वारका, आगरा, और कशमीर से लेकर कन्या कुमारी तक खड़े हैं ! मसूर और मूँग की दाल, आलू और टमाटर के साथ फोटो खिंचा रहे हैं ! सब एक दुसरे को श्रद्धांजलि और जन्मदिन मुबारक एक ही फोटो पर दे रहे हैं ! फोटो में कोई उज्जैन जा रहा है तो कोई साकीनाका ! बाढ़ के दौरा में मंत्रीजी के हेलीकॉप्टर से पीड़ित कम दिख रहे थे और फोटोशॉप ज़्यादा ! फोटो शॉप की मदद से किसी ने सबकी थाली गायब कर दी है , अस्पतालों में पागलों की तरह लोग फर्श पर खाते दिख रहे हैं ! पेट पर लात और पीठ पर लाश, गाय और गुजरात, हर तरफ है फोटोशॉप का पलटवार ! डिजिटल रायता फ़ैल चूका है !

दो /

कोई फर्श पर खा रहा है तो कोई गाय की पीठ पर, कोई पाकिस्तान के नक़्शे पर खा रहा है तो कोई अपनी ही कार्टून पर ! कोई लाल पानी पर खा रहा है तो कोई आदिवासी के कंधे पर ! बहुत लोग अपने मन की बात पर खा रहे हैं, कविता कहानी जिस पर भी आपका मन हो आप खा सकते हैं ! किसी दिन हम लाल किला पर खा लेते हैं और किसी दिन पथ्थर फेंकते कश्मीर पर ! कोई अपने कहे की फोटो पर ही खा रहा है, कोई सबकी सुन कर खा रहा है ! जो भूखे हैं उनके फोटो पर भी कोई खा रहा है ! जितने देशवासी उतनी थाली और जितनी थाली उतने छेद ! फोटो शॉप से थाली को मिटाया जा रहा है, सबके लिए खाना है पर सबकी थाली गायब …

* कंडीशंस अप्लाई / इस पोस्ट पर आप चाहें तो खा सकते हैं, पर भूख नहीं मिटेगी, पेट नहीं भरेगा

 

Pic Credit : Google

सावधान !

” युद्ध शुरू हो चुका है ” / ” पाक साफ “/ ” पाकिस्तान पूरी तरह से ख़त्म हो गया ” इत्यादि इत्यादि ! देशवासियों कृपया ऐसे स्टेटस से बचें और घर बैठे बैठे सोशल मीडिया पर एक दुसरे के स्टेटस से युद्ध न करें ! सर्जिकल स्ट्राइक युद्ध नहीं है ! ये एक सैन्य कार्रवाई है जिसके लिए प्रधान मंत्री और सेना बधाई के पात्र हैं ! पर ये युद्ध नहीं है ! अधीर न हों ! युद्ध में सोशल मीडिया सबसे पहले हम सबका साथ छोड़ देगा या ये कहिये हम छूट जायेंगे ! युद्ध हुआ तो बिजली और पानी जैसी बुनियादी चीजों के लिए देशवासी बैचैन हो जायेंगे ! आप का स्टेटस पढ़ने के लिए सोशल साइट पर कोई नहीं होगा जब युद्ध की स्थिति में एयर स्ट्राइक से देश को जूझना होगा ! युद्ध से हम डरते नहीं हैं ! धैर्य रखें, जरुरत हुई तो युद्ध भी होगा और सबको सेना की मदद भी करनी होगी जिसकी कोई जानकारी हम सबको नहीं है ! जैसा आप सोचते हैं युद्ध वैसा नहीं होगा ! युद्ध टेलीविजन पर नहीं होगा ! युद्ध सबकी आँखों के सामने होगा और तबाही चारों ओर होगी ! जलने और मरने से चारों तरफ हाहाकार होगा ! सिस्टम और इंफ़्रास्ट्रक्चर चरमरा जायेगा ! आप सावधान नहीं हुए तो अफ़वाह के शिकार होंगे और हर हाल में देश का नुकसान होगा ! सावधान ! युद्ध टेस्ट मैच नहीं है ! युद्ध से तबाही की कल्पना आप सब खुद कीजिये और प्लीज इसकी कामना आने वाली पीढ़ी और बच्चों के हित में मत कीजिये ! सेना को अपना काम करने दीजिये और चलिए हम सब अपना काम करें ! जय हिन्द !

जलते पटाखा का बुझता प्रेमी

पटाखा को लेकर मेरा एक प्यारा सपना था, जिसको मेरी पटाखा ने ही मेरी आंखों में धूल झोंक कर फोड़ दिया है. मेरी पटाखा दरअसल सिर्फ़ मेरी प्रेमिका नहीं बल्कि मेरा एक विचार है. पटाखा की देह गंध मेरे आनन्द का स्रोत रही है. पटाखा के अंदर मेरे बचपन की खुशियां भरी थी और इसकी पवित्र चिंगारी का मैं प्रेमी था. मैं अब तक अपनी पटाखा की प्रेम अग्नि में उत्सव की तरह जलता रहा हूं. इस बार दिवाली के नाम पर अश्लील ढंग से फट कर पटाखा ने मेरा दिल तोड़ा है और मेरे प्रेम के विश्वास में मुझे धोखा दिया है. उसके धोखे से इस बार मेरे अंदर धुआं भर गया, मुझे सांस लेने में तक़लीफ़ होने लगी. पटाखा के धोखे और धुएं से दम घोंटू वातावरण बन गया. उसकी अय्याश रंगरेलियों की आतिशबाजी के धुएं और बेवफ़ाई के विषाक्त धूल से आंखों में जलन और बेचैनी बढ़ने लगी, मुझे उबकाई आने लगी और मैं हिचक के रोने लगा.

मेरी प्रिय पटाखा. मेरे दिल के अनार, चकरी और फुलझड़ियों को धोखा दे कर मेरी रोशनी, दिए, कंदील और मिठाइयों को छोड़ कर तुम अपने सीसा, मैग्नीशियम, कैडमियम, नाइट्रेट, सोडियम फॉस्फोरस की घमंड में जिसके इर्द – गिर्द चकरघिन्नी खा रही हो तुम्हारे वो ग्राहक अपनी कामनाओं की वासना में तुम्हे जला के भष्म कर देंगे. हम दोनों के प्रेम के दिए जलते तो वाकई रौशनी के फूल खिलते, पर तुम इस दिवाली में किसी की कामुकता का पटाखा बन के फटी हो तो दिल जल रहा है. बज कर फुस्स हो जाने का तुम्हारा एक दिन का ज़िद भरा जश्न हर बार मेरे लिए ध्वनि प्रदूषण और हानिकारक गैसों से नुक्सान का कारण बनता रहा है. इस दिवाली किसी और की पटाखा बन के तुमने हम दोनों के प्रेम का पर्यावरण भी जला दिया.

मेरी पटाखा, तुम्हारी बारूदी आंखें मेरी देह के भीतर फटती तो मेरी आत्मा में उत्सव का धमाका होता पर जैसे तुम फट रही हो वह प्यार नहीं है, या कोमलता, या स्नेह, या अपने आप में जीवन, यह सब कुछ भी नहीं है. पटाखा इस दिवाली में तुम्हारे फटने की कामुक कराह का शोर मुझ पर एक भयानक प्रभाव छोड़ गया है. तुम्हारा धमाका खोखले सेक्स की तरह था, जिसमे तुम फटने के बाद हर बार अन्धकार में छूट जाती हो. अपने बारूद के बदले दुसरे के अहम् की देह गंध से बार बार भर जाना क्या तुम्हे घिन से नहीं भरता ? फिर तुम हर बार फटती हुई ऐसे क्यों छटपटाती हो जैसे जलते हुए अनार को किसी ने लात मार दिया हो ? वासना की अराजक सड़कों पर तुम अब चलती कार में हवस का शिकार बन कर बजने लगी हो, मनोरंजन के नाम पर तुम अपने नगर में शोर, धुआं, प्रदूषण का एक विरासत हो और कुछ नहीं. यह भयानक है. मेरी मासूम पटाखा तुम पार्क में हवा साफ करने के लिए सूर्य नमस्कार करते – करते प्रदुषण और अन्धकार की नगर वधु कैसे बन गयी ?

तुम्हारी कामुक आतिशबाजी को बच्चों और बुजुर्गों से भरा तुम्हारा परिवार भी बर्दाश्त नहीं कर सकता है. तुम जब भी बजती हो वो दिन और रात घर में बच्चों और बुजुर्गों के लिए एक भयानक दिन और रात होती है. इसीलिए तुम छुप छुप कर प्लास्टिक पीढ़ी के आवारा मर्दों की जेब खर्च से बजने लगी हो. उम्र भर टाइम बम की टिक टिक की तरह तुम्हे मेरी ह्रदय की धड़कन बन कर रहना था पर तुमने चुना बस एक कामुक ध्वनि, देह का विस्फोट और अब सब स्वाहा. तुम्हारे बजने की बीमार आदत ने मेरी भावनाओं की दुख:मय अंत्येष्टि कर दी है. मुझे पता है तुम अपने विस्फोटों के बीच मेरे शब्दों के माध्यम से मेरी दुःख की सिसकती आवाज सुन रही हो.

सुनो पटाखा तुम जलो और बजो पर अपने प्रेमी के लिए दमघोंटू माहौल बना कर किसी दूसरे की खुशियों के लिए अपने इस पागल प्रेमी की ख़ुशी को तो कम न करो. मेरे प्रेम की सारी आक्सीजन सोंख ली तुम्हारे पटाखे के धुएं ने. अपना उल्लास इतना महत्वपूर्ण है कि दूसरों की शांति में खलल डालते हुए तुम्हे ज़रा भी संकोच नहीं होता है ? मेरी पटाखा आखिर तुम इतनी ज़्यादा सेल्फ सेंटर्ड क्यों हो ?

तुम तो मेरे ह्रदय की मासूम पटाखा थी, दुःख की बात है तुम मुझे धोखा दे कर किसी की छाती पर चढ़ कर बज गयी. तुमने मुझे प्रेम में धोखा दिया है, याद रखना तुम्हे पता भी नहीं चलेगा कि तुम कब आखरी बार बज गयी हो और कब आखरी बार फट के अपने ग्राहकों के दिमाग में बारूदहीन कचरा बन गयी. अब तुम्हारी सल्फर, कोयला और पोटेशियम नाइट्रेट से भरी देह से प्रेम करने में कोई गौरव, सम्मान या आध्यात्मिक इनाम नहीं है. जाओ पटाखा, अपने प्रेमी के रौशनी से पवित्र प्रेम की आतिशबाजी को छल कर जिनके फेफड़े में क्षणिक सुख के लिए तुम सल्फर डाइऑक्साइड भर रही हो तुम्हारे वो ग्राहक तुम्हारे सौंदर्य के फॉस्फोरस के राख होते ही तुम्हे सड़क पर अंधेरे में छोड़ देंगे. प्यार से भरे मेरे दिल से निकल कर अपने कामुक ग्राहकों के पर्स में ज्यादा दिन तक रह पाओ अब तुम जैसी जलती पटाखा के लिए धोखा खाए मुझ जैसा बुझता प्रेमी यही कामना कर सकता है. पंछी और जानवरों के साथ साथ तुमने मुझमे भी भ्रम, चिंता, और भय भर दिया है. मुझे तुमसे अब एलर्जी है. एग्जॉस्ट फैन और वैक्यूम पंप चला कर मैं अपने दिल से ही नहीं तुम्हे फेफड़े से भी हमेशा के लिए निकाल रहा हूं. गुडबाय पटाखा.

लल्लन टॉप में प्रकाशित 

मेरे अंदर एक लाल पान की बेगम है

 

लाल पान की बेगम

लाल पान की बेगम

मेरे अंदर एक लाल पान की बेगम है जिसका मैं गुलाम हूँ ! मेरा मुख्य कर्तव्य दिन रात उस स्त्री की सेवा से जुड़ा हुआ है ! मेरे अंदर उसको बराबरी का दर्जा हासिल है ! अंदर की उकता देनेवाली पुनरावृत्ति और स्नायुओं में भर गयी जड़ता से वो मुझे मुक्त कराती है और वही स्त्री मुझे आत्मनिर्भर बनाती है ! मेरे ह्रदय को एक नहीं अनेक स्त्रियों ने ढाला है ! मैं अपनी स्त्री के बारे में लिख सकता हूँ इसीलिए लिख रहा हूँ ! माँ, बहन, प्रेमिका, दोस्त, पत्नी और अब बेटी, रिश्तों की हर तह में स्त्री को जानने की ललक ही रही होगी जिसकी वजह से मुझे इतना स्त्री धन मिला है ! मौसी, बुआ, मामी, चाची, भाभी, बहु और सबकी बेटियाँ ! बहुत बड़े परिवार के साथ रह कर पला बढ़ा जिसकी वजह से मेरा संसार स्त्रियों से भरा है !

नाट्य, कलाकर्म, साहित्य और अब सिनेमा से जुड़ा जीवन ! गुरु, गाइड, दोस्त, सहकर्मी, अजनबी सब किस्म की स्त्रियों से मिलने और सीखने का सौभाग्य मिला ! स्त्रियों के साथ इतने रिश्तों में जीना, मेरा ही नहीं किसी भी भारतीय या विश्व के स्वस्थ समाज में बिताये अपने बचपन और जी रहे किसी भी उम्र के आदमी का सामान्य जीवन है, जिस पर लाखों करोड़ों लोगों की तरह मुझे भी गर्व है ! मैं आज भी स्त्रियों से आकर्षित और प्रभावित होता रहता हूँ और स्त्री ही मेरे भीतर उत्सव और आनंद का बीज बोती है !

जब भी अपने अंदर झांकता हूँ, मुझे लगता है मेरे अंदर भी एक स्त्री है जो पल रही है और मुझे पाल रही है ! मेरे अंदर की लाल पान की बेगम ही मेरी दुर्गा है, देवी है, काली है, सहचरी है, मेरे जीवन की प्राण शक्ति है ! जो मेरे भीतर के आशावादी, विजयी और सुंदर चेतना की सच्चाई है ! इस स्त्री पर अभी तो कुछ सौ शब्द लिख रहा हूँ पर मैं स्त्री पर अपने हर शब्द न्योछावर कर के उसकी आँचल में बांधेने को तैयार हूँ ! दस दिनों का दशहरा या नौ दिनों की नवरात्रि मेरे लिए स्त्रयों में मेरी आस्था से फिर फिर जुड़ने का संकल्प है !

शब्द

मेरी कई बातों का अर्थ आप नहीं लगा पाएंगे, मेरी दोस्ती शब्दों से है और बहुत सारे शब्द मुझसे मिले हुए हैं ! जैसे ही आप रंग बदलेंगे, वो अर्थ बदल लेंगे