एक कवि दो पैरोडी

१. पकोड़े की अभिलाषा

चाह नहीं मैं बेरोज़गारों के
बेरोज़गारी में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं संसद में
छन जनता को ललचाऊँ,
चाह नहीं, मन्नतों के चौखट 
पर, हे हरि, डाला जाऊँ
चाह नहीं, देवों के शिर पर,
चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ !
मुझे छान लेना हलवाई 
उस पथ पर देना तुम फेंक,
मातृभूमि में भीख मांगने 
जिस पथ जाएँ बेरोज़गार अनेक !

२.  नागरिक की अभिलाषा 

चाह नहीं मैं बिन गढ्ढों के सड़क पर चल पाऊँ 
चाह नहीं मैं अपनी असहमति कहीं भी दर्ज़ कर पाऊँ 
चाह नहीं मैं देश का अपने गौरव गाथा गाउँ 
चाह नहीं मैं बॉर्डर पर मर जाऊं और झंडे में लिपटा जाऊँ 
मुझे रोक लेना प्रधानमंत्री जी 
उस पथ पर देना तुम फेंक,
हॉकी लेकर दंगा करने 
जिस पर जाएँ काँवरिया अनेक ! 

मेरी उँगलियाँ

लोकसभा चुनाव की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए मेरी उँगलियों ने मुठ्ठी बाँध कर सामाजिक स्तर पर तीन बड़े फ़ैसले किए हैं ! इन फ़ैसलों में चुनावों को प्रभावित करने का दम है !

पहला, मेरी उँगलियाँ नंगी रहेंगी ! न बुर्क़ा पहनेंगी न कोई पगड़ी !

दूसरा, चुटकी में मिडिल फिंगर दिखाएँगी और चुटकी में अंगुल करेंगी !

तीसरा, सारी उँगलियाँ दूसरों की तरफ रहेंगी अपनी तरफ एक भी नहीं !

सआदत हसन मंटो की कहानी ‘टोबा टेकसिंह’ की हास्यानुकृति

टोबा टेक सिंह 1947 से तौबा एक दिन 2047 तक

 ‘टोबा टेकसिंह’ 

बंटवारे के सौ साल बाद पाकिस्तान और हिंदुस्तान की हुकूमतों को ख्याल आया कि कैदियों और पागलों की तरह मंदिर मस्जिद का भी तबादला होना चाहिए, यानी जो मस्जिद हिन्दुस्तान में हैं उन्हें पाकिस्तान पहुंचा दिया जाय और जो मंदिर और गुरुद्वारे पाकिस्तान में है उन्हें हिन्दुस्तान के हवाले कर दिया जाय !

मालूम नहीं, यह बात माक़ूल थी या गै़र माकूल़, बहरहाल दानिशमंदों के फ़ैसले के मुताबिक़ इधर -उधर ऊँची सतह की कान्फ़ेंस हुई ! कमेटियों, उपकमेटियों और मंत्रीय-स्तर के वार्तालापों के बाद आख़िर एक दिन मंदिर और मस्जिदों के तबादले के लिए मुक़र्रर हो ही गया !

अच्छी तरह छानबीन की गई ! वे मस्जिद जिनके मौलवी और संबंधी हिंदुस्तान ही में थे, वहीं रहने दिए गए, बाक़ी जो बचे, उनको सरहद पर रवाना कर दिया गया ! पाकिस्तान से चूंकि करीब – करीब तमाम हिन्दु, सिख जा चुके थे इसलिए मंदिर और गुरुद्वारे को रखने – रखाने का सवाल ही न पैदा हुआ ! हिन्दू – सिख के जितने बचे हुए मंदिर – गुरुद्वारे थे सबके सब पुलिस की हिफाजत में बॉर्डर पर पहुंचा दिये गये !

उधर का मालूम नहीं लेकिन इधर लाहौर के मस्जिदों में जब इस तबादले की ख़बर पहुँची तो बड़ी दिलचस्प गपशप होने लगी !

एक मुसलमान जो बारह बरस से, हर रोज़, बाक़ायदगी के साथ ‘ज़मींदार’ पढ़ता था, उससे जब उसके एक दोस्त ने पूछा, ” मौलवी साब, यह मंदिर क्या होता है ? ” तो उसने बड़े गौरो – फ़िक्र के बाद जवाब दिया, ” हिंदुस्तान में एक ऐसी जगह है जहाँ उस्तरे बनते हैं ! ” यह जवाब सुनकर उसका दोस्त संतुष्ट हो गया !

इसी तरह एक सिख गुरुद्वारे ने एक दूसरे सिख गुरुद्वारे से पूछा, ” सरदार जी, हमें हिंदुस्तान क्यों भेजा जा रहा है, हमें तो वहाँ की बोली नहीं आती ! ” दूसरा मुस्कराया, ” मुझे तो हिन्दुस्तानियों की बोली आती है, हिंदुस्तानी बड़े शैतानी आकड़ आकड़ फिरते हैं ! “

मंदिर मस्जिद के तबादले के फैसले पर एक मस्जिद ने ‘ पाकिस्तान जिन्दाबाद ‘ का नारा इस जोर से बुलन्द किया कि अपनी गूँज से ही ढह गया !

यहाँ सौ साल बाद भी बाज़ मस्जिद ऐसे थे जो मस्जिद नहीं थे, उनमें बहुतायत ऐसे क़ातिलों की थी जिनके रिश्तेदारों ने अफ़सरों को कुछ दे दिलाकर मस्जिदों में रखवा दिया था कि वह फाँसी के फंदे से बच जाएँ ! कुछ मस्जिद समझते थे कि हिंदुस्तान क्यों तक़्सीम हुआ है और यह पाकिस्तान क्या है, लेकिन सही वाक़िआत से वह भी बेख़बर थे, अख़बारों से उन्हें कुछ पता नहीं चलता था और बॉर्डर के पहरेदार सिपाही अनपढ़ और जाहिल थे, जिनकी गुफ़्तगू से भी वह कोई नतीजा बरामद नहीं कर सकते थे ! उनको सिर्फ़ इतना मालूम था कि एक आदमी मुहम्मद अली जिन्नाह है जिसको क़ायदे – आज़म कहते हैं, उसने मुसलमानी के लिए एक अलहदा मुल्क बनाया है जिसका नाम पाकिस्तान है, यह कहाँ हैं, इसकी भौगोलिक स्थिति क्या है, इसके मुताल्लिक़ वह कुछ नहीं जानते थे ! यही वजह है कि वह सब मस्जिद जिनका दिमाग पूरी तरह बिगड़ा हुआ नहीं था, इस मखमसे में गिरफ़्तार थे कि वह पाकिस्तान में हैं या हिंदुस्तान में, अगर हिंदुस्तान में हैं तो पाकिस्तान कहाँ हैं, अगर वह पाकिस्तान में हैं तो यह कैसे हो सकता है कि वह कुछ अर्से पहले यहीं रहते हुए हिंदुस्तान में थे !

एक मौलवी तो हिंदुस्तान और पाकिस्तान, पाकिस्तान और हिंदुस्तान के चक्कर में कुछ ऐसा गिरफ़्तार हुआ कि और ज़्यादा मौलवी हो गया ! झाडू देते – देते वह एक दिन दरख्त़ पर चढ़ गया और टहनी पर बैठकर दो घंटे मुसलसल तक़रीर करता रहा, जो पाकिस्तान और हिंदुस्तान के नाज़ुक मसले पर थी, सिपाहियों ने जब उसे नीचे उतरने को कहा तो वह और ऊपर चढ़ गया ! जब उसे डराया – धमकाया गया तो उसने कहा, ” मैं हिंदुस्तान में रहना चाहता हूँ न पाकिस्तान में, मैं इस दरख़्त पर रहूँगा ” बड़ी देर के बाद जब उसका दौरा सर्द पड़ा तो वह नीचे उतरा और अपने हिंदू – सिख दोस्तों से गले मिल – मिलकर रोने लगा – इस ख़याल से उसका दिल भर आया था कि वह उसे छोड़कर हिंदुस्तान चले जाएँगे !

मस्जिद में एक मौलवी ऐसा भी था जो खुद़ को ख़ुदा कहता था ! उससे जब एक रोज़ बिशन सिंह ने पूछा कि टोबा टेक सिंह पाकिस्तान में हैं या हिंदुस्तान में तो उसने हस्बे – आदत कहकहा लगाया और कहा, ” वह पाकिस्तान में हैं न हिंदुस्तान में, इसलिए कि हमने अभी तक हुक्म ही नहीं दिया ! “

बिशन सिंह ने उस ख़ुदा से कई मर्तबा बड़ी मिन्नत – समाजत से कहा कि वह हुक़्म दे दें ताकि झंझट ख़त्म हो, मगर ख़ुदा बहुत मसरूफ़ था, इसलिए कि उसे और बे – शुमार हुक़्म देने थे !

तबादले की तैयारियाँ मुकम्मल हो चुकी थीं, इधर से उधर और उधर से इधर आनेवाले मंदिरों और मस्जिदों की फ़ेहरिस्तें पहुँच चुकी थीं और तबादले का दिन भी मुक़र्रर हो चुका था !

सख्त़ सर्दियाँ थीं जब लाहौर से हिंदू – सिख गुरुद्वारों और मंदिरों से भरी हुई लारियाँ पुलिस के रक्षक दस्ते के साथ रवाना हुई, संबंधित अफ़सर भी हमराह थे ! वागह के बॉर्डर पर दोनों तरफ़ के सुपरिटेंडेंट एक – दूसरे से मिले और प्रारंभिक कार्रवाई ख़त्म होने के बाद तबादला शुरू हो गया, जो रात – भर जारी रहा !

मंदिर और मस्जिदों को लारियों से निकालना और उनको दूसरे अफ़सरों के हवाले करना बड़ा कठिन काम था ! यह सब करते हुए कोई गालियाँ बक रहा था, कोई गा रहा था क़ुछ आपस में झगड़ रहे थे क़ुछ रो रहे थे , कुछ बिलख रहे थे ! कान पड़ी आवाज़ सुनाई नहीं देती थी ! औरतों का शोर – शराबा अलग था, और सर्दी इतनी कड़ाके की थी कि दाँत से दाँत बज रहे थे !

मंदिर मस्जिदों की अक्सरीयत इस तबादले के हक़ में नहीं थी, इसलिए कि उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि उन्हें अपनी जगह से उखाड़कर कहाँ फेंका जा रहा है, वह चंद जो कुछ सोच – समझ सकते थे, ‘पाकिस्तान : जिंदाबाद’ और ‘पाकिस्तान : मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहे थे, दो – तीन मर्तबा फ़साद होते – होते बचा, क्योंकि बाज मुसलमानों और सिखों को यह नारे सुनकर तैश आ गया था !

बॉर्डर पर पाकिस्तान के अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के मंदिरों की झलकियां देखने के लिए दुनिया भर के मानवाधिकार संगठन इस अदला – बदली पर नज़र गड़ाए थी ! हिंदुस्तान से निकली मस्जिदों में सिर्फ एक तोड़ी गयी थी बाकी सब बुलंद थे !

कराची हिंदू पंचायत जब मंदिरों के खंडहरों को संभाले ट्रक से उतरी तो मंदिरों की हालत देख कर सब दंग रह गए ! सभी मंदिरों का हाल बुरा था ! सभी मंदिर पाकिस्तान सरकार की उपेक्षा का शिकार हो गए थे ! सभी मंदिरों की हालत खस्ता थी, सब जर्जर हो चुके थे !

15 अगस्त को पाकिस्तान में 15 प्रतिशत हिंदू रह गए थे जो अब 1.5 रह गए हैं ! पिछले कुछ वर्षों में लाहौर जैसी जगह पर एक हज़ार से अधिक मंदिर ख़त्म कर दिए गए थे ! ट्रकों में सिर्फ ईंट – पत्थर भरा था ! छोटी दुकानों में धंसा रावलपिंडी का एक मंदिर केवल अपने एक बचे हुए मीनार के कारण अब भी सांसें ले रहा था ! अंदर देवताओं की जगह चावल, दाल और चीनी ने ले लिया था !

जिन मंदिरों में पचास साल से कोई पूजा अर्चना नहीं हुई वे ट्रक से उतरने को तैयार नहीं थे ! उन्हें बहुत समझाया गया कि देखो, अब देवी – देवता हिंदुस्तान में चले गए हैं और अगर नहीं गए हैं तो उन्हें फ़ौरन वहाँ भेज दिया जाएगा ! बचे हुए मंदिर चूंकि बे-ज़रर थे, इसलिए उससे मज़ीद ज़बर्दस्ती न की गई ; उसको वहीं खड़ा रहने दिया गया, और तबादले का बाक़ी काम होता रहा !

जो किसी की भूमि नहीं थी वहां सबने रात में किसी को खड़ा देखा ! सब जानते हैं हिन्दुस्तान पाकिस्तान के बॉर्डर के बीच टोबा टेक सिंह का रहने वाला बिशन सिंह रहता है ! बिशन सिंह ने अकेले रात भर बॉर्डर के बीच अल्लाह – ईश्वर को अपना दुःख सुना कर रोके रखा ! सूरज निकलने से पहले बिना हिले डुले खड़े बिशन सिंह के हलक़ से एक गगनभेदी चीख़ निकली ! इधर – उधर से कई दौड़े आए और उन्होने देखा कि मंदिर मस्जिद जो सौ बरस से दिन – रात दोनों देशों में खड़े थे, अब वे सब नो मेंस लैंड में औंधे मुँह पड़े थे ! ईंट – पत्थर एक हो गए थे ! दोनों देशों के बीच सौ बरस और कई बम विस्फोटों के बाद आज दुश्मन देश के ख़ुदा बिशन सिंह के दुःख की वजह से एक दुसरे से मिटटी में मिल रहे थे ! उधर कंटीली तारों के पीछे हिंदुस्तान था, इधर वैसे ही तारों के पीछे पाकिस्तान, दरमियान में ज़मीन के उस टुकड़े पर जिसका कोई नाम नहीं था, वहाँ मंदिर – मस्जिद पड़े थे !

‘ औपड़ दि गड़ गड़ दि अनैक्स दि बेध्यानाँ दि मुंग दि दाल आफ़ दी पाकिस्तान गवर्नमेंट ! ‘ आज सौ साल बाद मंटो के टोबा टेक सिंह के बिशन सिंह की बड़बड़ाहटें सिर्फ सोशल साइट्स के अपडेट्स हैं !

PS – पाकिस्तान में सबसे ज़्यादा बिकने वाले उर्दू अख़बार ‘जंग’ ने मेरी इस पैरोडी को छापने की इजाज़त मांगी है, मैंने मंटो तक बात पहुंचा दी है वही इस कहानी के मालिक हैं !

पाय लागी फ़ुटबॉल

पाय लागी फ़ुटबॉल

मैं फ़ुटबॉल से थोड़ा अपसेट हूँ ! फुटबॉल को जिस काम को करने के लिए रोका जाए वो जानबूझकर उस काम को करता है ! फ़ुटबॉल बार – बार इलेक्ट्रिक प्लग की तरफ जाता है ! फुटबॉल को लगता है प्रॉब्लम मुझमे है और मैं फूटबाल की कोई बात नहीं मानता ! फुटबॉल की इन हरकतों से गुस्सा आने पर मैं फूटबाल की पिटाई कर देता हूँ और उसे बाथरूम में बंद कर देता हूँ !

मैं सुबह ब्रश करने से लेकर नाश्ता करने और स्कूल जाने तक हर काम मोबाइल पर फ़ुटबॉल देखते हुए ही करता हूँ ! मेरे माता – पिता मल्टी नेशनल कंपनी में काम करते हैं ! वे अक्सर घर पर दफ़्तर का काम करते हुए अपना मोबाइल मुझे पकड़ा दिया करते हैं ताकि मैं उनके काम में बाधा न बनूँ ! फ़ुटबॉल मोबाइल से निकल कर मेरे दिमाग में टप्पे खाने लगता है !

मैं जहाँ भी जाता हूँ फ़ुटबॉल लुढ़कता हुआ मुझ तक पहुँच जाता है ! जहाँ वो नहीं लुढ़क पाता वहां वो किसी अजनबी से किक की मदद ले लेता है ! ऐसा वो कैसे करता है मुझे नहीं पता ! पर वो लुढ़कता हुआ हमेशा मेरे आस पास ही रहता है !

मोबाइल पर कल रात मैं करीब बारह घंटे तक लगातार फुटबॉल खेलता रहा, या शायद इससे भी ज्यादा देर तक मुझे ठीक से याद नहीं है ! मुझे बस इतना याद है कि शाम को चार बजे से मैंने वीडियो गेम खेलना शुरू किया था और जब खेलना खत्म किया था उस वक्त सुबह के करीब साढ़े पाँच बजे थे !

मेरी आंख सुबह देर से खुली ! स्कूल जाने की जल्दबाज़ी में हर काम मैं हड़बड़ी में कर रहा था ! कभी दूध का मग टेबल से गिर रहा था तो कभी जूते के खुले फीते उलझने के कारण मैं गिरते – गिरते बच रहा था ! मुझे स्कूल पहुंचना था और मैं लेट हो रहा था ! फुटबॉल यह सब देख कर हंस रहा था !

अपने ऊपर फुटबॉल को हँसता देख कर मुझे गुस्सा आ गया ! फ़ुटबॉल जानता है हमारी भावनाओं का हमारे शरीर से सीधा कनेक्शन होता है ! वो ये अच्छी तरह जानता है कि हम जो महसूस करते हैं उसका असर हमारे पूरे शरीर पर पड़ता है !

मैंने अपनी पिता की तरह फुटबॉल को कड़ी नज़रों से देखा !
‘ फुटबॉल के एडवाइस की कोई वैल्यू नहीं है ‘ ये कहता हुआ फूटबाल मेरी तरह पलंग के नीचे लुढ़क गया !
‘ तुम मुझसे सजेशन और एडवाइस देना बंद करो ” मैं अपनी माँ की तरह चीखा !
‘ तुम बैक आंसरिंग बहुत करते हो ‘ फूटबाल ने पलंग के नीचे से आवाज़ दी !
सिचुएशन को देखते हुए मैं स्कूल बस की तरफ भागा ! मेरे दिमाग में मेरे पीछे मेरा फूटबाल लुढ़क रहा था !

मेरे पेट के कीड़ों ने मुझे बताया फ़ुटबॉल फुल – टाइम मेरा पर्सनल असिस्टेंट बनना चाहता है ! इस बात से मैं डर गया और फैमिली व्हाट्सऐप ग्रुप में सबकुछ मैंने माता पिता से बता दिया !

फ़ुटबॉल में गोलकीपर ही एक मात्र ऐसा खिलाड़ी होता है जिसे गेंद को रोकने के लिए अपना हाथ इस्तेमाल करने की अनुमति होती है, लेकिन वह अपने गोल के सामने पेनल्टी एरिया तक ही ऐसा कर सकता है ! फुटबॉल के इस नियम के आधार पर बिस्तर के पेनेल्टी एरिया में पिताजी घर के गोलकीपर हैं और एक शाम को अपने मोबाइल से फुटबॉल गेम के ऍप को अपने हाथों से उठा कर उन्होंने डीलीट कर दिया !

फुटबॉल को पता था कि मैं पहले से ही ओवरवेट बच्चा था और पूरे समय घंटों बैठ कर वीडियो गेम्स खेलने से मेरा वजन और बढ़ गया था ! मैं ऐसा टीनएजर बन रहा था, जिसके मेडिकल जांच में प्री-डायबिटिक लक्षण पाए गए थे ! इसका मतलब था कि मैं अठारह साल का होने से पहले ही डायबिटिक बनने के कगार पर था ! मेरी समस्याओं की जड़ में वीडियो गेम के इस्तेमाल को दोषी माना गया !

पहले कम्‍प्‍यूटर पर, फि‍र लैपटॉप और अब स्‍मार्ट फोन पर मुझे वीडियो गेम खेलते हुए लगातार कई वर्ष बीत चुके हैं ! मुझे पता भी नहीं चलता और मेरी उँगलियाँ गेम को डाउनलोड कर लेती हैं !

मेरी पहली भावना ‘मैं खुश हूँ’ फुटबॉल को छीन कर मेरी दूसरी भावना ‘मैं व्यस्त हूँ’ के पास भेज देती है ! उसी समय तीसरी भावना ‘मैं चिंतित हूँ’ चौथी भावना ‘मैं नाराज़ हूँ’ से फूटबाल छीन कर मेरी पाँचवी भावना ‘मुझे आश्चर्य हो रहा है’ की तरफ उछाल देती है ! चाहे मैं कहीं भी रहूँ फुटबॉल मेरे दिमाग में हर दिन नब्बे मिनट तक गेमिंग करता है ! मेरी भावनाओं के बाइस खिलाड़ी दिन रात मेरे दिमाग के दोनों हिस्सों में फूटबाल खेलते रहते हैं !

मेरे दिमाग के सेंटर सर्कल में ‘मैं शर्मिंन्दा हूँ’ है ! दूसरी गतिविधियों में शामिल होने के दौरान भी मैं ऑनलाइन गेम के बारे में ही सोचता रहता हूँ ! बेचैनी जैसी असल जीवन की समस्याओं से भागने के लिए मैं वर्चुअल फुटबॉल गेम का सहारा लेता हूँ ! मेरी भावनाएँ कच्चे खिलाड़ी नहीं हैं ! मेरी भावनाएँ एक ही मैच में बेहतरीन फ़ुटबॉल टैलेंट और बेकार एक्टिंग का नमूना एकसाथ पेश कर सकती हैं !

मेरी एक भावना जब कभी सामने वाली भावना से भिड़ती है तो वो ऐसी चोट लगने का ‘नाटक’ करते हैं जैसे कोई बहुत बड़ा हादसा हो गया हो ! मेरे दिमाग में खेल चलता रहता है !

पहले पैंतालीसवें मिनट में ‘मैं ठीक हूँ’ ‘मैं एडिक्ट नहीं हूँ’ ‘फिर मिलेंगे’ सभी भावनाएँ वहां आ गई और गर्मा – गर्मी बढ़ने का ख़तरा पैदा हो गया है ! भावनाओं की भीड़ की वजह से खेल को रोकना पड़ा है ! मैच के पहले हॉफ़ में मेरी भावनाओं की दोनों ही टीमों में से कोई गोल नहीं कर सकीं !

फर्स्ट हॉफ के अंत में मेरी पहली भावना ‘मैं खुश हूँ’ के चेहरे पर कनफ्यूजन साफ – साफ पसरा हुआ है ! वर्चुअल फुटबॉल के ऑनलाइन वीडियो गेम खेलने की आदत ने रियल फुटबॉल को आलसी बना दिया है ! मेरा रिजल्ट आ गया है ! मैं, अपने दिमाग में दुनिया का सबसे बड़ा फुटबॉल स्टार आज अपनी क्लास में फेल हो गया हूँ !

दूसरे हाफ में भी मेरी भावनाएँ खेल रही हैं ! मेरी भावनाओं की हताशा बढ़ रही है ! गेम खेलने का टाइम लगातार बढ़ता जा रहा है ! मेरी विपरीत भावना ‘मैं शांत हूँ’ और ‘मैं दुःखी हूँ’ भी फुटबॉल खेलने लगे हैं ! मैं खेल में खोया रहता हूँ और किसी सोशल फंक्शन में नहीं जाता ! ऑनलाइन खाना आर्डर कर के अपने आप को कमरे में बंद कर लेता हूँ ! मेरी ये कहानी आप सभी के लिये हैं जिन्होंने भारतीय फुटबॉल से उम्मीदें छोड़ दी हैं ! वीडियो गेम की लत से बच्चों के मुँह लगे फुटबॉल को पाय लागी फ़ुटबॉल कहना जरुरी है ! इस युग में घर की मुर्गी दाल बराबर हो न हो घर के वीडियो गेम माँ – बाप बराबर जरूर हो गए हैं !

एहसास का स्वगत 

मंच पर अँधेरा था ! मैंने टटोल कर अपने पाँव रखे ! मंच पर रौशनी आने से पहले मेरा पैर उसकी छाती पर होना जरुरी है ! दर्शकों के लिए ये वो क्षण है जब मंच पर काली को अपने रौद्र रूप में देखेंगे !

मेरी ये कोशिश रहती है कि मेरे पाँव का दवाब संतुलन में रहे ! किसी पुरुष की छाती पर अपना पैर रखने का ये मेरा पहला अनुभव है ! मैं जैसे ही उसकी छाती पर पाँव रखती हूँ मेरे ह्रदय से तनाव और भय का नाश हो जाता है !

मेरी छाती तेज़ धड़कने लगी है ! अगले क्षण मेरी छाती पर स्त्री का पैर आने वाला है ये सोच कर मेरा रोम रोम काँप जाता है ! पता नहीं शिव की छाती पर अपने पाँव रख कर काली को क्या एहसास हुआ पर मेरी छाती पर एक स्त्री का पैर मुझे उन्मुक्त पुरुष बना जाता है !

मंच पर रौशनी आते ही दर्शकों को लगता है कोई जादू हो गया हो ! स्त्री पुरुष का ऐसा साक्षात दर्शन देख कर दर्शक मुग्ध हैं ! दर्शकों की तालियाँ सुन कर लगता है जैसे उन्होंने अभिनेताओं के दिल की मौन धड़कन सुन ली हो !

गुब्बारे में क्या था ?

गुब्बारे में क्या था ?

‘ गुब्बारे में क्या था ? ‘ पत्नी ने जब पूछा तो मेरी इन्द्रियाँ वातावरण सूंघने लगीं ! पत्नी ने ऐसे पूछा जैसे मैंने कोई बैंक लूट लिया हो और गुब्बारे में भर कर घर ले आया हूँ !
‘ क्या था गुब्बारे में ? ‘ मैंने भी पलट कर पूछ लिया ! किसी रिफ्लेक्स एक्शन की तरह ये रिफ्लेक्स प्रश्न था !
‘ तुम पर जो फूटा है उस गुब्बारे में क्या था ? पत्नी ने सख़्ती से पुछा !
‘ मुझ पर जो फूटा है उस गुब्बारे में क्या था ? मैंने भी आश्चर्य से पुछा !

इस बार होली के गुब्बारे में कहीं किसी पर उम्मीद की किरण फूटी थी तो कहीं किसी की किस्मत ! पता नहीं मेरे गुब्बारे में क्या भरा था ? मैं तेजी से सोचने लगा ! गुब्बारा तो मुझ पर फेंका गया था, पर मेरी पत्नी के तेवर से लगा जो मुझ पर फेंका गया था वो उस पर फूट पड़ा है !

मेरी शादी उसी लड़की से हुई है जिस पर मैंने अपने कुँवारेपन में जीवन का पहला और आखरी गुब्बारा फेंका था ! इस पल जो नाक और भौं चढ़ा कर मेरे सामने खड़ी थी मैंने उस पर इत्र और गुलाब जल भरा गुब्बारा फेंका था ! पच्चीस साल बाद पता नहीं कौन सा गुब्बारा मुझ पर फूटा है ! मेरा सफ़ेद बुशर्ट जो पीछे से लाल हो चूका था मेरे सामने था !

‘ ये लाल दाग़ किसी रंग का तो नहीं लगता है ? ‘ पत्नी ने कहा ! गुब्बारे में क्या था इस पर गहन शोध की ज़रूरत इस होली से पहले शायद न आई हो ! अब मेरी पत्नी हर दाग और उसकी छींटों को और क़रीब से देख रही थी, साथ ही साथ रंग, खुशबू और बदबू सभी का आकलन कर रही थी ! ‘ अनार का रस ? ‘ गाढ़े लाल दाग़ को देखते हुए मैंने पत्नी की तरफ़ देख कर पूछा ! ‘ अनार का रस ? ‘ पत्नी ने ऐसे पूछा जैसे उसने सांप देख लिया हो और मुझे वो दिखाई नहीं दे रहा हो ! लाल रंग देख कर मुझे लगा गुब्बारे में अनार का रस भरा था ! मैंने सोचा क्या पता मुझ पर गुब्बारे फेंकने वाले को पता हो कि मैं बीमार हूँ ! मेरी सेहत की फिक्र में उसने गुब्बारे में अनार का रस भर के मुझ पर फेंका हो ! क्या मेरे गुब्बारे में अनार का रस भरा था ?

‘ ये सफ़ेद दाग क्या है ? ‘ सहसा पत्नी चीखी मानो किसी तरल पदार्थ से भरा गुब्बारा घर में उस पर फट गया हो ! क्रोध अगर तरल पदार्थ के रूप में भरा जा सकता तो मेरी पत्नी गुब्बारे में भरी हुई मिलती !

‘ सफ़ेद दाग ? ‘ मैंने भी सवाल दोहरा दिया ! ‘ हाँ – हाँ सफ़ेद दाग ‘ सुनते नहीं क्या ? कान पर कोई गुब्बारा तो नहीं पड़ा है ? पत्नी चिंतित होते हुए बोली ! मुझे पता नहीं क्या हो गया था ! इस होली में मैं लोगों के व्यवहार से गूंगा बहरा ही हो गया था ! मैं अवाक था ! ‘ लाल को अनार कहा, सफ़ेद को माखन मत कह देना ! ‘ पत्नी बड़बड़ा रही थी ! ‘ तुम पर तो कोई अपना काला – धन भी फेंक देगा तो तुमको पता नहीं चलेगा ! ‘ माखन, काला धन ? ‘ मैं चौंका ! क्या मेरे गुब्बारे में किसी का माखन भरा था ?

कल तक माखन एक दुग्ध – उत्पाद था ! गुब्बारे में आज का माखन एक यूथ – उत्पात है ! ‘ माखन रूपी काले धन ‘ को पानी से मिलाया जाए तो क्या होता है ? सर्च इंजन ने बताया ‘ माखन रूपी काले धन’ को अगर पानी में मिलाया जाए तो ‘काला धन’ गाढ़ा हो कर ‘लिक्विड’ फॉर्म में रह सकता है ! पर कई नागरिकों ने कहा कि ‘ माखन ‘ से ‘ काले धन ‘ को इकट्ठा कर गुब्बारे में भरना मुमकिन नहीं और इसके लिए कई दिन तक ‘ काला धन ‘ जमा करते रहना होगा और गुब्बारा भरने लायक ‘ काला धन ‘ जुटाने में कई महीने के ‘ माखन ‘ लग जाएंगे ! माखन और काला धन के चक्कर में मेरे दिमाग का मंथन हो गया ! मुद्दा और पेचीदा तब हो गया जब ये पता चला कि सरकार की नज़र भी ‘काले धन’ पर है और ‘काले धन’ का भी बैंक होता है !

‘ भोले मत बनो ‘ पत्नी ने झूठ बोले कौआ काटे वाली अदा में कहा ‘ तुम्हे हर रंग का मतलब पता है ! दिन भर ‘ केसरिया केसरिया ‘ ठुमरी गाते हो ! मैं जानती हूँ ‘ हरा रंग ‘ मेरी सौत है ! असली माखन चोर तो तुम ही हो ! कहीं कोई गोपी उलाहना देने न चली आये ‘ तुम्हारे लाल ने मुझ पर माखन फेंका है ! ‘ मैंने देखा मेरी पत्नी पर फाग चढ़ गया है ! माखन – माखन करती गज़ब की सूंदर गोपी लग रही थी ! मेरे अंदर गुब्बारे फूटने लगे जिनमे मैंने पच्चीस साल पहले इत्र और गुलाब जल भरा था ! आज की गोपियाँ माखन का हर स्वाद जानती हैं ! ताजा माखन मधुर, हलका, नेत्रों को हितकारी, रक्त पित्त नाशक, तनिक कसैला और तनिक अम्ल रसयुक्त होता है ! बासी माखन खारा, चटपटा और खट्टा हो जाने से वमन, बवासीर, चर्म रोग, कफ प्रकोप, भारी और मोटापा करने वाला होता है ! गोपियाँ जानती हैं बासी माखन सेवन योग्य नहीं ! गोपियों को कन्हैया को जो भाता है वही ताज़ा माखन पसंद है ! इस वैचारिक मंथन से मेरे शरीर में कम्पन होने लगा !

मुझ पर जो फूटा है उस गुब्बारे में क्या था, ये साबित होना बाक़ी है ! उधर, सड़कों पर गुब्बारे पड़ना जारी है ! लड़के भी फेंक रहे हैं और लड़कियां भी ! मैंने सुना लोग एक – दूसरे से कह रहे हैं ‘ गुब्बारा मारने से पहले बता दो भई तुम्हारे गुब्बारे में क्या भरा है ?

बैंक में चूना

” बैंक में चूना लगाना सबके बस की बात नहीं ! “

भारत सरकार द्वारा जारी किए गए मतदाता आईडी कार्ड / ड्राइविंग लाइसेंस / पैन कार्ड / आधार कार्ड / पासपोर्ट / फोटो आईडी की स्वयं साक्ष्य प्रति / निवास का सबूत – हाल के टेलीफोन बिल / बिजली बिल ( दो महीने से अधिक पुराना नहीं ) / बैंक पासबुक का बैंक के अधिकारियों द्वारा सही रूप में प्रमाणित नवीनतम खाता विवरण / सरकार द्वारा जारी जाति प्रमाणपत्र / नगर पालिका के मोहर के साथ अपनी हाल की तस्वीर की दो प्रतियां ( 6 महीने से अधिक पुरानी नहीं ) / अपने पहचान के सभी सबूत लेकर मैं बैंक के चौकीदार के पास पहुँच गया ! चौकीदार मेरी खाली जेबों की निरक्षण के बाद ये सब पेपर्स देखना चाहता था ! सभी कागज़ों के सूक्ष्म निरिक्षण के बाद उसने उनका एक पुलिंदा बनाकर उसने किसी जन्मकुण्डली की तरह लपेट दिया और पुरस्कार की तरह ससम्मान मुझे भेंट कर दिया ! उन कागज़ों को लेते हुए अगर कोई अपने मोबाईल से फोटो खींच लेता तो उसे देखकर लगता जैसे मैं बैंक के चौकीदार से किसी राष्ट्रीय स्तर का पहचान पत्र पुरस्कार ले रहा हूँ !

अपने गुटका साधना को भंग करते हुए उसने मौन रस थूका और पूछा ” क्या काम है ? “
” साहब से मिलना है ” मैंने कहा !
” कौन से वाले साहब से ? ” मुँह में बचा हुआ मौन का उप – रस भी अब ज़मीन सूँघ रहा था ! वो मौन रस से पूरी तरह बाहर आ गया था !
” चूना वाले साहब से ” मैंने जवाब दिया !
” चूना ?? ” उसने मुझ पर दया की दृष्टि डालते हुए पूछा !
” हाँ ” मैंने गर्दन हिलाया !
” कित्ते का ?? ” दर्द भरी आवाज़ में उसने हलके से पूछा !
” अभी पता नहीं, साहब से मिलने पर पता चलेगा ” मैंने जवाब दिया !
पता नहीं क्यों उसकी आँखें भर आयी और उसने मुझे ढाँढस देते हुए इज़्ज़त से बोला ” हिम्मत कर के सीधे ब्रांच मैनेजर के पास चले जाइये ” उसने मुझे बैंक के एयर कंडीशंड वातावरण में प्रवेश करने की इज़ाज़त दे दी !

बैंक में कामकाजी वातावरण था ! बचत और ब्याज की चिंता में लोग एक दुसरे से पूछ – पूछ कर नए – नए फॉर्म में तरह तरह के सवाल का जवाब भर रहे थे ! मैं सबको देख रहा था पर मुझ पर किसी का ध्यान नहीं था ! मैं सीधा ब्रांच मैनेजर की कैबिन में घुस गया ! यह कमरा बैंक का सबसे ठंढा कमरा था ! बैंक छोटा था लेकिन बैंक मैनेजर का कमरा बड़ा था !

कैबिन में मेरे प्रवेश करते ही मैनेजर साहब ने अपने आप को चेक़ बुक की तरह समेट लिया और कलम की तरह अकड़ के बैठ गए ! अब मेरे लचीले होने की बारी थी ! एक हाथ से अपने कागज़ों को समेटते हुए मैंने दूसरे हाथ से एक – हथ्था अभिवादन किया ! बैंक मैनेजर ने मुझे कैशलेस ए टी एम की तरह देखा और अपने मोबाइल को घूरते हुए लोन मुद्रा में चले गए ! कैबिन में अगर कोई अपने मोबाईल से फोटो खींच लेता तो उसे देखकर लगता जैसे मैं किसी बैंक के मैनेजर के मोम के पुतले के सामने खड़ा उसे निहार रहा हूँ ! कैबिन में टंगे हुए महात्मा गाँधी की तस्वीर यह सब देख रही थी ! थोड़ी देर में कैबिन के किसी अदृश्य शक्ति ने हमें स्टेचू के खेल से निकाला ! इससे पहले मैं अपना मुँह खोलता मुझे मैनेजर की आवाज़ सुनाई दी ! ” होम लोन ? “
” न ! “
” क्रेडिट कार्ड ? “
” न !! “
” परसनल लोन ? “
” न !!! “
” पेंशन ? “
मैंने ना कहने के लिए गर्दन हिला दिया !
” फिर क्यों आये हैं ? “
” मैं चूना लगाने आया हूँ ! “
बैंक मैनेजर ने मुझे ऐसे देखा जिससे मुझे पहली बार लगा जैसे वो मुझे पहचान गया हो और मैं उसके काम का आदमी हूँ !
” मैं बैंक में चुना लगाना चाहता हूँ ! बैंक के चौकीदार ने बताया चूना लगाने के लिए मुझे ब्रांच मैनेजर से मिलना होगा ! ” मैंने अपनी बात पूरी की ! यह सुनते ही न जाने क्यों ब्रांच मैनेजर ने राहत की सांस ली !
” बैंक में चूना लगाना सबके बस की बात नहीं ! ” मैनेजर ने मुझे चैलेंज करते हुए कहा !
” मेरे ग्रेट ग्रैंड फादर अमर चूनावाला थे, ग्रैंड फादर अकबर चूनावाला थे और मेरे फादर अन्थोनी चूनावाला हैं ! चूना लगाना हमारा पारंपरिक काम है ! ” मैंने अपने सारे पहचान पत्रों को टेबल पर फैलाते हुए जवाब दिया ! ” मैं बस एक बार आपके बैंक में साधारण चूना लगाना चाहता हूँ ! “
मैनेजर मुस्कुराए ! ” बैंक में चूना लगाना ईको फ्रेंडली काम है ! बैंक में आप साधारण चूना नहीं लगा सकते ! ” बैंक मैनेजर ने दिलचस्पी लेते हुए कहा ! उन्होंने आगे कहा ” चूना लगाने वाले को हम ही चुनते हैं, कोई भी बैंक में चूना नहीं लगा सकता ! बैंक विशाल संगठन हैं, चूना लगाना एक ऐतिहासिक प्रक्रिया है ! एक एप्लिकेशन लिख कर दीजिये कि इस बैंक में आप चूना लगाना चाहते हैं ! ” अपने पारंपरिक अनुभव से मैं जानता हूँ कि बैंकों में चूना लगाने में हर तरह का हथकंडा अपनाया जाता है ! मैं चुप ही रहा ! मैंने पत्र में लिखा – ‘ मैं एक गैर – लाभकारी आम आदमी हूँ ! जीवन यापन और मेरी ज़िन्दगी को सरकार और कॉरपोरेट दबाव से मुक्त रखने के लिए मुझे बैंक में चूना लगाने का काम देने की कृपा करें ! ‘ एप्लिकेशन दे कर मैं बैंक में चूना लगाने के सपनो में खोया हुआ घर लौट आया !

‘ बैंक का लक्ष्य गरीबी को कम करना है ! ‘ बैंक की एक दिवार पर धूमिल अक्षरों में यह लिखा था ! जिसे पढ़ कर मेरी हाथ में खुजली होने लगी ! मुझे उस पर चूना लगाना था ! मुझे बैंक के कई स्लोगन पर चूना लगाना था ! दीवार पर चूना लगाना दीवार के इतिहास को छुपाने की प्रक्रिया भी है ! सब जानते हैं सफ़ेद चूना काला जादू है जिससे सबकुछ पूर्ववत हो जाता है ! बैंक में चूना लगाने का ये काला जादू मैं करना चाहता था !

एक हफ्ते बाद मुझे बैंक में इंटरव्यू के लिए बुलाया गया !

” आप के हिसाब से बैंक में कौन से महीने में चूना लगाया जाता है ? ” उनका पहला प्रश्न था !
” लोग बैंक में मार्च या अप्रैल में यह सोचकर चूना लगाते हैं कि चूने के सफेद रंग को देखकर ग्राहक आकर्षित होंगे ! जबकि ये धारणा बिल्कुल ही गलत है ! ग्राहक ब्याज को देखकर आकर्षित होती है ना कि चूने के सफेद रंग को देखकर ! ” मैंने जवाब दिया !

” बैंक को चूना लगाने की जरुरत क्यों पड़ती है ? ” दूसरा सवाल था !
” राशि जमा रखने तथा ऋण प्रदान करने के अतिरिक्त बैंक अन्य कई गुप्त काम भी करता है जिसके रंगीन इश्तहारों से बैंक की दिवार का रंग ख़राब हो जाता है ! ग्राहकों में अपनी साख बनाये रखने के लिए बैंक को अपनी दीवारों पर चूने की सफेदी करते रहना पड़ता है ! ” मैंने जवाब दे कर उनको संतुष्ट किया !

” बैंक में चूना लगाने के लिए आप को कितना समय चाहिए ? उनका तीसरा प्रश्न था !
” बैंक में आप बार बार चूना नहीं लगा सकते ! बैंक में चूना लगाना एक ऐसी परियोजना है जिसे एक दिन से भी कम समय में पूरा किया जाना चाहिए नहीं तो इससे ग्राहक सेवा में खलल पड़ती है ! बैंक मैनेजर कस्टमर के घेरे में आ जाता है ! उसके केबिन का ए सी काम करना बंद कर देता है ! झुण्ड में लोग बैंक में घुस जाते हैं और ब्रांच मैनेजर का केबिन रिकॉर्डिंग और लाइव कार्यक्रम का रिले सेंटर बन जाता है ! ” मैंने जवाब दिया !

एक हफ्ते बाद रिज़ल्ट आ गया ! बैंक में चूना लगाने का काम आखिर मुझे मिल ही गया !
नियत सुबह जब मैं बैंक में चूना लगाने का अपना रोज़गार करने पहुँचा तो गार्ड द्वारा पता चला बैंक को कोई और चूना लगा गया था ! काम काज ठप्प था !

खैनी के लिए चूना लेने जब पास के पान बीड़ी की दूकान पर पहुँचा तो पान वाला किसी से कह रहा था ” चूना खाइए पर चूना लगाइए मत ! वो ईमारत खड़ी हैं जिनमे चूना लगा है ! चूना लगने के बाद क्या मजाल है कि ढांचा टस से मस हो जाए ! ” सब घंटा घर की तरफ देख रहे थे मैं भी देखने लगा !

दो कोहरा एक काला एक गोरा

फोटो : गूगल के कोहरे से

गोरा – ( कैमरे में देखते हुए ) मैं सफ़ेद कोहरा हूँ ! मुझे बोलते हुए आप नहीं देख सकते क्योंकि मैं अभी घना हूँ ! मुझे बस आप सुन सकते हैं ! कड़ाके की ठंड है और मैं दिन भर छाया रहूँगा ! मेरी वजह से दोपहर तक सड़कों पर वाहन लाइट जलाकर रेंगते रहेंगे !

काला – ( कैमरे में देखते हुए ) मुझे भी बोलते हुए आप नहीं देख सकते क्योंकि आप सब जानते हैं रंगों का सफर कर्म से होकर आज की तथाकथित जाति पर आकर पूर्णत: विकृत हो चला है ! मुझे देखने की कोशिश करेंगे तो मैं आपकी आँखों में चुभ जाऊँगा ! मैं काला कोहरा हूँ !

गोरा – जैसे कुछ व्यक्ति मुझ सफ़ेद कोहरे की तरह योग्यता या शुद्धाचरण न होते हुए भी स्वयं को ऊंचा या ऊंची जाति का और पवित्र मानने लगे हैं वैसे ही कुछ अपने को ( काले कोहरे को इंगित करते हुए ) काले कोहरे की तरह नीच और अपवित्र समझ कर इम्पोर्टेंस भी लेने लगे हैं !

काला – संविधान में रंग और जाति के आधार पर भेदभाव पर रोक है, लेकिन ( सफ़ेद कोहरे को देखते हुए ) तुम जैसे सफ़ेद धुंध की वजह से समाज और सरकार उसे रोकने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं …

गोरा – ( काले कोहरे को काटते हुए ) पहले हम सुर और असुर, फिर आर्य और अनार्य और फिर वैष्णव और शैव में बदल गए ! फिर ब्राह्मण और शूद्र में बदल कर धर्म का नाश कर दिया ! इस दौरान लोगों ने अपने – अपने वंश चलाये ! फिर ये वंश समाज में बदल गए ! अब काला और गोरा कोहरा सबके सामने है …

काला – ( सफ़ेद कोहरे को काटते हुए ) आज मैं अभी लाईव हूँ , प्रेस कॉन्फ्रेंस जैसा माहौल है पर सफ़ेद कोहरे की वजह से कुछ भी साफ़ नहीं है …

गोरा – ( हँसते हुए ) कोहरा काल में काले कोहरे के फेसबुक लाइव कार्यक्रम से क्या होगा ?

काला – ( कैमरे में देखते हुए ) सफ़ेद कोहरे के ख़िलाफ़ आज मैंने अपनी चुप्पी तोड़ी है …

गोरा – लेकिन अगर वाकई गलत हो रहा है तो चुप्पी तोड़ना भी समाधान नहीं ! अब तो विरोध जताने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती ( हँसता है )

काला – सुन ओ सफ़ेद कोहरे, तुम्हारी वजह से पता ही नहीं चलता क्या सही है, क्या गलत ! सफ़ेद कोहरे की वजह से न्याय व्यवस्था पर भरोसा करना कठिन हो चला है, इसलिए मुझे लाइव आना पड़ा !

गोरा – अपने काले कोहरे की लाइव चादर को उतना ही फैलाओ जितना …

काला – क्या जितना ? किसके जितना ? हमारे देश में जितनी फ़िल्में हैं, जितने विज्ञापन हैं, जितनी ब्यूटी मैग़ज़ीन्स हैं और टीवी सीरियल हैं, सब कहते रहते हैं कि काला रंग पर्याप्त सुंदर नहीं हैं ! ख़ूबसूरती की जो परिभाषा गढ़ी गई है काला रंग उसमे फिट नहीं है ! बहुत से मुल्कों में काले रंग को लेकर हीन भावना है ! काले कोहरे पर रंग भेद का अभियान ‘डार्क इज़ ब्यूटीफ़ुल’ भी लागू नहीं होता ( रुआँसा हो जाता है )

गोरा – गोरी त्वचा के लिए दीवानगी मैंने भी देखी है काले ! तुम्हारा दुःख समझ सकता हूँ दोस्त ! देश के कॉस्मेटिक बाज़ार में गोरापन बढ़ाने वाली क्रीम की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है ! यहां तक कि बॉलीवुड के कई अभिनेता और अभिनेत्रियां इन कॉस्मेटिक्स का विज्ञापन भी करते रहे हैं ( रोते हुए ) फिर भी किसी सफेदी में मुझ सफ़ेद कोहरे का नाम तक नहीं लेते …

काला – सफ़ेद कोहरे तुम चाहते क्या हो ? मेरा ‘लाइव’ क्यों मार रहे हो ?

गोरा – ( कैमरे में देखते हुए ) मुझे बिना अंधविश्वास का जीवन चाहिए ! एक जीवन जिसमें आस्था मानवता के प्रति हो, न कि एक अज्ञात भगवान के प्रति ! जीवन जो दूसरे मनुष्यों के लिए करुणा और सम्मान पर आधारित हो ! गरिमा और आत्मसम्मान से भरा जीवन ! जाति व्यवस्था से परे जीवन ! इसलिए मैं लाइव हूँ …

काला – मैं सबसे पहले यह बता दूँ कि दुनिया में किसी भी समाज, व्यवस्था और धर्म का निर्माण किसी भी ईश्वर, अल्लाह या गॉड ने नहीं किया है …

गोरा – पर भारत में पिछले कुछ समय में दलितों और ऊंची जातियों के बीच काला कोहरा बढ़ा है ! हालांकि सरकारें अलग अलग समय पर दलितों के उत्थान के लिए कदम उठाती रही हैं ! एनडीए ने राष्ट्रपति पद के लिए दलित उम्मीदवार ही चुना …

काला – ( गोरे कोहरे को काटते हुए ) जाति पर भाषण मत पढ़ो, कोहरे की बात करो … अपनी बात करो ! सब जानते हैं दुनिया की सभी व्यवस्थाओं को मनुष्य ने बनाया है !

गोरा – तो ? समाज में तुमने जिस प्रकार विघटन किया है, क्षय किया है, प्रगति में बाधक बने हो उसे देखते हुए कई समाज सुधारको और संगठनों ने समय समय पर तुम पर बैन नहीं लगाया है … ?

काला – गोरे भाई साहेब राजनीति में कोहरा बनाना और कोहरा लागू करना केवल एक भौगोलिक प्रक्रिया नहीं है !

गोरा – जानता हूँ देखते नहीं मैं भी लाइव हूँ … ! ( कैमरा में देखते हुए ) जिनकी भी रुचि दलित विषय में है, जो नस्लीय, जातिगत, लिंगगत और धर्मांध दुनिया के खिलाफ हैं ! उन्हें मेरा लाइव जरूर देखना चाहिए !

काला – तुम जैसे सफ़ेद कोहरे अक्सर दिखावटी शान , चमड़ी के रंग, खाने-पीने की आदतों, महिलाओं से द्वेष, होमोफ़ोबिया और जातिवाद के इर्द – गिर्द फ़ैल के वातावरण को धुंधला बना देते हैं ! तुम ही सभी अपराधों की जड़ हो ! ( कैमरे में देखते हुए ) राजनीति में अन्धकार सफ़ेद कोहरे से है !

गोरा – ( कैमरे में देखते हुए ) सभी जानते हैं मुझे ! मैं सभी पंचायतों ,प्रखंडों ,जिला एवं प्रदेशों में एक उच्च जाति का कोहरा हूँ ! ( काले कोहरे से ) काले कोहरे तुम चाहते क्या हो ? मेरा ‘लाइव’ क्यों मार रहे हो ?

काला – ( कैमरे में देखते हुए ) मैं चाहता हूँ कि जब मैं सड़कों पर चलूं तो सुरक्षित महसूस करूं और एक वज़ूद की तरह रहूँ ! मुझे स्त्रियों की तरह छूने या तंग करने का अधिकार किसी को न हो !

गोरा – फिर मेरे पास क्या कर रहा है ?

‘लाइव’ दर्शकों के ठहाके का आइकॉन हवा में तैरने लगते हैं !

( काला अवाक और मौन ! गोरा मौन पर चेहरे पर जीत की मुस्कराहट )

काला – क्यों ? तुम नहीं जानते तुम्हारा और मेरा जनम – जनम का साथ है !

गोरा – जनम का साथ है ? दूर हो यहाँ से !

काला – हम सगे हैं ! अच्छे और बुरे, सच्चाई और झूठ एक विशेष परिप्रेक्ष्य के सभी रिश्तेदार हैं !

गोरा – तू जानलेवा है !

काला – हम दोनों के बीच रासायनिक संबंध है ! हम मिल कर ही तो कोहरेवाद को समाप्त करने के विभिन्न प्रयास आज भी यदा कदा करते रहते हैं !

गोरा – तुम्हारे कैमरे में अतीत का काला कोहरा है !

काला – गोरे एक बात बताओ, हम और तुम क्यों हैं ?

गोरा – क्योंकि हम रंग में देखते हैं

काला – अतीत में इतनी धूल नहीं थी, और जलवायु भी बेहतर थी ! अतीत में कोहरा नहीं था ! अब अतीत शब्द के अर्थ का अनर्थ हो गया है !

गोरा – ( कैमरे में देखते हुए ) व्हाइट कोहरा और ब्लैक कोहरा इसमें कोई ताल मेल नहीं है …

काला – गोरे कोहरे सच कह रहे हो ! तुम सिर्फ जनवरी में बीस इक्कीस दिन के लिए माने जाते हो, मैं तीन सौ पैंसठ दिन का हूँ ! मुझे फैलने के लिए गर्म मौजे, इनर जैकेट, टोपा, मफलर, दस्ताने, रजाई के मौसमी नाटक की कोई जरुरत नहीं होती ! हमारा कोई मेल नहीं ! तुम ग्राउंड – स्तरीय हो ! मैं आकाश स्तरीय हूँ !

गोरा – ( कैमरे में देखते हुए ) हालांकि प्रमाणों की आवश्यकता नहीं है, परंतु अपने विचारों को पुष्ट करने के लिए मैं बताना चाहता हूं कि कुछ जातियों की संरचना ( काले की तरफ देखते हुए ) नकल से हुई है !

काला – ( कैमरा में देखते हुए जोश में ) मित्रों ! देखिये तथाकथित जातिवादी व्यवस्था की आड़ में मुझ जैसे सनातन काले कोहरे को भी बदनाम ‍किए जाने का कुचक्र बढ़ा है ! सैकड़ों वर्ष की गुलामी के काल में जातिवाद का कोहरा इतना नहीं था जितना की आजादी के बाद इन सत्तर वर्षों के सफ़ेद कोहरे में देखने को मिला है !

गोरा – ( कैमरा में देखते हुए ) भारत के नागरिकों खांसी, गले और सीने में जलन जैसी समस्याओँ के मालिक मेरे सामने खड़े हैं !

काला – काला और सफेद सोच मूलतः सोच का एक बहुत आलसी तरीका है !

गोरा – वास्तव में हम दोनों को बहुत सोचने की जरूरत नहीं है ( हँसता है ) काले और सफेद रंग में चीजों को देखना मानवीय स्वभाव है !

काला – काले और सफेद रंग में चीजें देखकर हमें सही निर्णय लेने में मदद मिलती है !

गोरा – फिर हमें काले और सफेद सोच से मुक्ति कैसे मिलेगी ?

काला – ( कैमरे में देखते हुए ) इससे साफ हुआ कि देश में मौजूदा दौर में जाति प्रथा को ख़त्म करने का शोर भले ज्यादा हो कोहरा कम नहीं हुआ है !

गोरा – मौसम विभाग का कहना है कि दिनभर धुंध जैसी स्थिति बनी रह सकती है …

काला – भारत के मौसम की आधिकारिक भविष्यवाणी करना स्वयंवर में धनुष तोड़ने जैसा है !

गोरा – ( कैमरे में देखते हुए ) भारत भविष्य में कोहरा प्रधान देश बना रहेगा …

लाउडस्पीकर की आवाज़ – कोहरा क्रांति बंद करो ! ( दोनों कोहरे ऑफ लाइन हो जाते हैं ) मैं मौसम विभाग बोल रहा हूँ, दर्शकों मुझे बोलते हुए आप नहीं देख सकते क्योंकि अभी घना कोहरा है ! कोहरे ने सबकुछ अपने चपेट में ले लिया है ! सेंसिटिव लोगों के लिए यह काफी नुकसानदायक भी होता है !

पकोड़े की अभिलाषा

चाह नहीं मैं बेरोज़गारों के
बेरोज़गारी में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं संसद में
छन जनता को ललचाऊँ,
चाह नहीं, मन्नतों के चौखट
पर, हे हरि, डाला जाऊँ
चाह नहीं, देवों के शिर पर,
चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ !
मुझे छान लेना हलवाई
उस पथ पर देना तुम फेंक,
मातृभूमि में भीख मांगने
जिस पथ जाएँ बेरोज़गार अनेक !

पूर्ण बजट ग्रहण

पूर्ण बजट ग्रहण

बजट में दिलचस्पी रखने वाले लोग देश के अलग – अलग हिस्सों के लिए बने बजट का दीदार सोशल मिडिया के कई प्लेटफार्म से कर रहे हैं ! दशकों बाद बजट ज्यादा बड़ा और चमकीला दिखाई दे रहा है ! बजट ग्रहण को लेकर कई तरह के अंधविश्वास होने के बाद भी लोग इसे बड़ी तादाद में देख रहे हैं ! बजट ग्रहण के दौरान रुपयों की छाया मनुष्यों पर पड़ती दिखाई देती है ! इस बार राहू की छाया से ग्रसित बजट को देख श्रद्धालुओं ने ईश वंदना शुरू कर दी है !

साल में एक दिन जब धन और सरकार के बीच नागरिक आ जाता है तो उसकी छाया बजट पर पड़ती है ! इससे बजट के छाया वाला भाग अंधकारमय रहता है और इस स्थिति में जब हम नागरिक को देखते हैं तो वो हमें काला दिखाई पड़ता है इसी वजह से इसे बजट ग्रहण कहा जाता है ! धन की परिक्रमा के दौरान नागरिक बजट और सरकार के बीच में इस तरह आ जाता है कि नागरिक बजट की छाया से छिप जाता है ! यह तभी संभव है जब सरकार, धन और बजट अपनी कक्षा में एक दूसरे के बिल्कुल सीध में हों ! भारत के लोगों को बजट के नाम पर इस बार इस बार ब्लडबजट सुपरबजट और ब्लूबजट एक साथ नज़र आ गया है !