वैलेंटाइन जो देखन मै चला

श्री गणेश जी से मोदक ले कर, माँ सरस्वती से वीणा लेकर, शंकर भगवान से चाँद ले कर, कृष्ण भगवान से बाँसुरी ले कर, श्री राम जी से धनुष ले कर, यीशु मसीह के चेहरे से करुणा ले कर और युद्ध के यूनानी देवताओं की कठोरता के साथ बासंती पीले और जूनून के सूर्ख लाल रंग के वस्त्र में, सफ़ेद बाल दाढ़ी लगाकर सांता क्लॉज़ की तरह चौदह फ़रवरी को मैं संत वैलेंटाइन बन के तैयार हो गया और जय मातादी बोल कर प्रेमियों से मिलने निकल पड़ा !

संत वैलेंटाइन का मेरा ये रूप सबसे पहले कुत्तों ने देखा और भौंकने लगे ! पता नहीं मेरे वैलेंटाइन भेष में ऐसा क्या मिश्रण हो गया था जो कुत्तों को आकर्षित कर रहा था ! श्वान – दल ने मेरे जश्न में जुड़ने का मौका नहीं गवाँया और आगे पीछे साथ चलने लगे ! लोकल कुत्तों ने दल बना के मुझे घेर लिया था और भौंक भौंक के मुझसे मेरा परिचय पूछने लगे ! व्यक्ति को जीवन व्यतीत करने के लिए क्या पहनना है और कैसे जश्न मनाना है इन बातों से आधुनिक कुत्तों का क्या लेना देना ? यह सोच कर सोसाइटी के डस्टबिन के पास रुक कर मैंने उनसे बात करने की भी कोशिश की ! मैंने उन्हें बहुत पुचकारा पर वो मानने सुनने को तैयार नहीं थे ! मैंने बाँसुरी भी बजाई पर वो चुप नहीं हो रहे थे ! भौं – भौं का जवाब भौं – भौं से देना मैंने ठीक नहीं समझा और चुपचाप चलता रहा और गुनगुनाता रहा ‘संत वैलेंटाइन चले बाज़ार कुत्ते भौंके हज़ार … ‘

श्वान – दल के शोर का फायदा हुआ ! शोर सुन कर आस पास खेल रहे बच्चों के बाल हनुमान दल ने मुझे देख लिया ! संत वैलेंटाइन का मेरा ये रूप देख कर बच्चे ताली बजाने लगे और खुश हो गए ! मेरे साथ बच्चों को खुश देख कर पास में खड़ा हवा मिठाई बनाने वाला मेरे साथ चल पड़ा ! बच्चों के संग मुझे और हवा मिठाई वाले को साथ देख कर खिलौने वाला भी साथ में आ गया और कुत्तों को भगाने में मेरी मदद करने लगा ! खिलौने वाले के साथ एक बहुरूपिया भी था जो चुनाव के माहौल से प्रेरित हो कर सभी दलों के झंडे और टोपी पहन कर सर्वदलिय नेता का भेष बना कर घूम रहा था और अपनी पार्टी के प्रचार का स्वांग कर के मोहल्ले में सबका मनोरंजन कर रहा था ! सब मेरे साथ चल दिए ! संत वेलेंटाइन बना मैं अब एक छोटे मोटे मेले से घिर गया था ! भीड़ से घिरते हुए अपनी हालत देख कर मुझे लगा संत वैलेंटाइन प्रेम के नहीं विज्ञापन के अच्छे ब्राण्ड एम्बेसडर हो सकते हैं !

शोर और बच्चों की तालियाँ सुन कर बड़े दुकानदार निकल कर मुझे देखने लगे और मुझसे मेरा डिटेल लेने लगे ! मैंने उन्हें बताया वैलेंटाइन ईसाई चर्च में एक साधु था जो भारत में अब प्रेम का ऑनलाइन देवता हो गया है और मैं वही हूँ ! कई शताब्दी पहले के संत को साक्षात देख कर दुकानदार पहले किसान की तरह डर गया फिर कंज्यूमर की तरह कंफ्यूज हो गया पर मेरे साथ बच्चों का बाजार देख कर खुश हो गया ! मुझे देख कर दुकानदार को विशाल खिलौने की दुकान का आइडिया आ गया था और दुकानदार चाह रहा था मैं सदा के लिए उसके दूकान में रुक जाऊं ! दुकानदार की बात सुन कर मैं डर गया और डर के मारे सांता क्लॉज़ की तरह हँसने लगा ! दूकान में क़ैद होने के डर से नर्वस मैं “हो हो हो’ कह कर उसकी बात का स्वागत किया ! मेरे साथ सब बच्चे भी ‘हो हो हो / हो हो हो’ कर के हंसने लगे ! दुकानदार ने मुझे आँख मार कर कहा ठीक है बाबा आप आगे बढिए मुझे आप का व्यापार रहस्य समझ में आ गया है ! दुकानदारों की चंगुल से निकल कर मैं प्रेमियों से मिलने बढ़ गया !

बहरूपिया, दुकानदार और बच्चों की नज़रों से मुझे ये पता चल गया कि सुंदरता देखने वाले की नजर में है ! अपनी समझ से पौराणिक देवताओं और विशुद्ध रूप से काल्पनिक चरित्र की विशेषताओं के रूप में मेरा वैलेंटाइन भेष धर्मनिरपेक्ष था और पौराणिक आंकड़ों के साथ मिल कर नया समीकरण बना रहा था ! अब तक दुकानदारों की सेल्फियों में सफेद बालों वाली तस्वीर के साथ मैं व्हाट्सएप्प का माल बन चूका था ! अब मुझे सिर्फ़ प्रेमियों की तलाश थी ! मोहल्ले के ग्लोब से निकल कर मैं अब सोसाइटी की गैलेक्सी में आ गया था ! मुझे लगा अब प्रेमी दूर नहीं !

बच्चों ने छोड़ा तो मुझे बूढ़ों ने पकड़ लिया जिनका वेलेंटाइन वीक में वेलेंटाइन वीक था पर कामदेव स्ट्रांग रहा था ! मेरे पिंक स्टॉकिंग्स देख कर वो भी मचलने लगे ! हाथ जोड़ के बूढ़ों ने एक स्वर में कहा ‘प्रभु मेरे ह्रदय के कोलाहल को कम कीजिये !’ ‘इसके लिए ऑनलाइन होना जरुरी है’ ये कहते हुए मैंने सबको प्रेम से मोदक चखाया और आगे बढ़ गया !

साथ साथ एक ही क़ुलफ़ी खाते हुए मुझे प्रेमी का एक जोड़ा दिख ही गया ! प्रेमी के इस युगल जोड़े के प्रेम को देख कर मेरा ह्रदय भर गया ! आलिंगन चुम्बन से दूर मुझे ये शुद्ध प्रेमी लगे ! मेरे अंदर का वैलेंटाइन जाग गया था ! वैलेंटाइन उवाच : समाज में दहेज के अभाव में वेश्यावृत्ति में धकेल दी गई लड़कियाँ क्या जानें चॉकलेट डे, प्रपोज़ डे, और प्रोमिस डे का स्वाद ! जैसे ही मैं गुलाब देने प्रेमी युगल की ओर बढ़ा छुपे हुए एक दल ने मुझ पर पिंक चड्डी कहते हुए हमला बोल दिया ! प्रेमी भी उनसे मिले हुए थे ! वो प्रेमी नहीं मुझ जैसे वैलेंटाइन को फ़साने का जाल थे ! चारो तरफ भगदड़ का माहौल बन गया ! मैंने पीताम्बरी खोल के उनको अपना लाल लंगोट भी दिखाया पर बात बनी नहीं ! मेरा चाँद बिखर गया ! वीणा के तार टूट गए ! मोर पंख बाँसुरी, मोदक धनुष सब चूर चूर हो गए !

शराब की लत और बलात्कार जैसी बीमारियों से लड़ने की जगह भूले बिसरे किसी संत को बाँधने की कोशिश करने वाले कौन है ये लोग ? मैं चीख पड़ा ! वैलेंटाइन की सच्चाई यह है कि वह एक व्यक्ति बिल्कुल नहीं है, वह एक विचार है ! मेरी बातों को सुन कर कार्यकर्ताओं के दल ने ऐसे मुंह बनाया जैसे एस एम एस की जगह कागज़ पर हाथ से लिखी चिठ्ठी देख ली हो ! ‘बाबरी वाले समाज में नहीं बराबरी वाले समाज में ही प्रेम पल सकता है ! आप मुझे फादर वैलेंटाइन भी कह सकते हैं ! आप अगर वैलेंटाइन के सहस्त्र नाम ले कर भी पुकारें तो वैलेंटाइन बन के मुझे और आप को ही समाज में आना पड़ेगा !’ मैं लगातार बड़बड़ा रहा था !

मुझ पर काबू पाने के लिए फोन कर के किसी ने निःशुल्क कीटनाशक ब्रिगेड को बुलवा लिया था और वो मेरा निरीक्षण कर के मुझे धुएँ से बेहोश करने की तरक़ीब निकाल रहे थे ! आदमी होने के सबूत के लिए मैंने उन्हें ‘हैप्पी वैलेंटाइन डे’ भी कहा पर तब तक देर हो चुकी थी, मैं उनका शिकार हो चूका था ! कीटनाशक ब्रिगेड के किसी ज़हरीली गैस ने मुझे बेहोश कर दिया ! बाद में पता चला था कि मुझे बचाने के लिए प्रेमियों ने एम्बुलेंस बुलाया पर अफ़सोस जवाब में स्कूल बस आया ! संत वैलेंटाइन की कृपा से मुझे कुछ हुआ नहीं था ! इस दुनिया में आज सब चीजों की तरह प्यार का उत्सव भी नष्ट हो सकता है, इस बात को समझने के लिए संत वैलेंटाइन के साथ किया गया यह बाजारू व्यवहार सबसे अच्छा उदहारण है !

वैलेंटाइन डे धीरे धीरे नाईट की तरफ बढ़ रहा था ! सब जानते हैं वैलेंटाइन – डे का प्यार नाइट में किसी काम का नही होता ! शाम हो रही थी ! लड़की, लड़का, गुलाब, चॉकलेट, टेडी बियर, सब घर लौट रहे थे ! सबके प्यार का एक दिवसीय बुखार उतर चूका था ! संत वैलेंटाइन अपना एक दिन का मेला ख़त्म कर के साल भर के लिए इटली लौट गए थे ! हवा मिठाई वाले की सब हवा निकल गयी थी ! खिलौने वाला अब सिर्फ टैक्स भरने वाला भर रह गया था ! फसल – दराती, हाथ, साइकिल, लालटेन और हाथी के झंडे के साथ सड़क पर चलता हुआ बहुरूपिया अब साधारण नागरिक दिख रहा था ! सब जानते हैं प्रेम नगरों में संत वैलेंटाइन दिवस के दिन स्त्री पुरुष के दो लिंगों के साथ पुलिसिंग तीसरा लिंग होता है !

प्रेमियों और बच्चों ने मिल कर मुझे मेरे घर पहुँचाया ! घर पहुँच कर होश आने के बाद हारमोनियम पर मैंने ये निर्गुण गाया ! ” सुनो कामदेव कहे साधु वैलेंटाइन, टैं – टैं – टैं , वैलेंटाइन जो देखन मै चला वैलेंटाइन ना मिल्या कोय, जो दिल खोजा आपनो मुझसा वैलेंटाइन न कोय “

बसंत के चार यार, लड़का लड़की ग्राहक और बाज़ार / व्यंग्य नाटिका

इस व्यंग्य नाटिका के सभी स्थान और पात्र काल्पनिक हैं !

पात्र –  

लड़का / बसंत ( किसी भी उम्र का एक पुरुष पात्र )

लड़की / मौसम ( किसी भी उम्र की एक स्त्री पात्र )

ग्राहक / सार्वजनिक प्रेमी ( किसी भी लिंग और उम्र का एक पात्र )

बाज़ार / सार्वजनिक प्रेमिका ( मल्टीमिडिया पर्दा / स्क्रीन )

नाटिका में बसंत के एक दिन लड़का, लड़की, ग्राहक और बाज़ार मिल कर ‘एंटी रोमियो स्क्वाड’ बन जाते हैं ! नाटक के अंत में यही सब पात्र मिल कर ‘कामदेव स्क्वाड’ बन जाते है !

 

पात्र  परिचय –

( मंच पर अँधेरा है ! पात्र एक एक कर के प्रकाश वृत में अपना परिचय देते हैं ! पात्र  परिचय में ही पात्रों का आपसी कोनफ्लिक्ट स्थापित हो जाता है )

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

लड़का : ( रोमांटिक रस ) मैं बसंत हूँ ! मौसम का राजा हूँ ! मैं रोमियो रोमांटिक हूँ !

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

लड़की : ( पावरफुल रस ) मैं मौसम हूँ ! बसंत मेरा दास है ! मैं लैला पावरफुल हूँ !

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

ग्राहक : ( कन्फ्यूज्ड रस ) मैं प्रेमी हूँ ! वाओ बसंत !!! कितना ब्यूटीफुल मौसम है ! मेरा मोबाइल कहाँ है ? मैं कन्फ्यूज्ड क्यों हूँ ?

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

बाजार : ( लॉस्ट रस ) मैं प्रेमिका हूँ ! बसंत के अंधे मजनुओं से कैसे बचूँ ? उफ़ ! ठहरो अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लूँ ! मैं लॉस्ट क्यों हूँ ? ( स्क्रीन ऑफ हो जाता है )

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

सभी पात्र एंटी रोमियो स्क्वाड बनकर कोरस में : ( हाहाकार रस )

आ रही सोशल मिडिया से पुकार

ट्वीटर पूछे बार बार

फेसबुक पर स्टेटस अपार

सब पूछ रहे हैं नेता और संत

रोमियो का कैसा हो बसंत ?

( हाथापाई करते हुए ) बसंत के चार यार / लड़का, लड़की, ग्राहक और बाज़ार

फिर अँधेरा !

दृश्य : एक

स्थान / ह्रदय बाज़ार ! बाज़ार में बहुत सारे ह्रदय लटक और झूल रहे हैं !

लड़का : मुझे बसंत दिखाइए
लड़की : बसंत अभी दूर है ! बसंत के लिए आप का बजट क्या है ?
लड़का : आप ने कितने बसंत देखे हैं ?
लड़की : जितने बसंत आप ने देखे है , उतने बसंत मैंने आज ही बेचे हैं !
लड़का : व्यक्ति को अपना बसंत खुद बनाना पड़ता है !
लड़की : आप जिसकी बात कर रहे हैं वो वो चरित्र है !
लड़का : जी ?
लड़की : चरित्र को बसंत से मत मिलाइये ! चरित्र का अलग स्टोर रूम है !
तुम मुझे अपना बजट दो मैं तुम्हे बसंत दूंगी !
लड़का : ये कैसी राजनीती है ? बसंत में मुझे बजट क्यों सुनाया जा रहा है ?
लड़की : बजट से ही बना मेड इन चाइना बसंत सबकी जेब में है ! नेता हो या संत सबकी जेब में टिंग – टिंग बजता चीन का बसंत !
लड़का : मेड इन इंडिया बसंत कहाँ है ?
लड़की : वो अभी बन रहा है ! बसंत बना सके इसके लिए बसंत देखना जरुरी होता है ! इसीलिए देखिये चीन का बसंत ! ( उँगलियों से रुपये गिनने का इशारा करती है )
( पुलकित होते हुए ) इण्डिया में देखिये अनलिमिटेड चीनी बसंत !
लड़का : मेरे बसंत का ब्रांड क्या होगा ?
लड़की : बसंत एक प्रोडक्ट है जिसका अभी तक कोई ब्रांड नहीं !
लड़का : ( वीर रस में ) ईश्वर का दिया कभी अंत नहीं होता , जो ख़त्म हो जाये वो बसंत नहीं होता !
लड़की : मत भूलो तुम जैसे रोमियो के लिए बाहर लोकल गुंडों का अभ्यास चल रहा है !
लड़का : सभी चीजों की तरह प्यार का ये उत्सव भी ख़त्म हो सकता है ! याद है पर्दा प्रथा, दहेज प्रथा, बाल विवाह प्रथा, सती प्रथा …
लड़की : सुनो कामदेव ! कैंडी और कन्फेक्शनरी से भरा अपना दिमाग उठाओ और यहाँ से दफा हो जाओ !
लड़का : क्षमा ! क्षमा ! क्षमा !

फिर अँधेरा !

दृश्य : दो
स्थान / प्रेमिकाओं का इनबॉक्स ! बसंत की शुभकामनाओं से इनबॉक्स भरा हुआ है !

इनबॉक्स / एक
एस एम् एस
लड़का – बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है …
लड़की – शटअप

इनबॉक्स / दो
एस एम् एस
लड़का – तेरे मेरे सपने अब एक रंग हैं …
लड़की – शटअप

इनबॉक्स / तीन
एस एम् एस
लड़का – गाता रहे मेरा दिल …
लडकी – शट – अप / शट – अप / शट – अप ! आर्चीज बकवास बंद करो !

फिर अँधेरा !

दृश्य : तीन
स्थान / रंग बिरंगे फूलों के बीच कहीं खिले हुए एक पीले फूल के अंदर !

लड़की : मौसम का क्या हाल है ? पेट कैसा है ?
लड़का : पीले – पीले कर रहा है सुबह से …
लड़की : क्या पिलाया ?
लड़का : पीला ! येलो !
लड़की : कैसा पीला ?
लड़का : सरसों के फूल जैसा पीला और गीला गीला भी !
लड़की : लगता है मौसम को बसंत हो गया है ! लव जिहाद से बचाना !
लड़का : जी ! एंटी रोमियो स्क्वाड देने का प्लान है
लड़की : मार्किट में आ गया है ए आर एस ?
लड़का : जी !
लड़की : बसंत को धमकाता है ?
लड़का : जी !
लड़की : वाह !
लड़का : बस एक बार मौसम बसंत से छूट जाये तो कोहरे तक जान बचेगी !
लड़की : कोहरा कहाँ है ?
लड़का : बाहर है !
लड़की : कोहरे में बसंत ले के आ गए ? मौसम का ग्लोबल वॉर्मिंग चेक करवा लेना, नहीं तो बसंत तक पीला पीला करेगा बाद में सब झड़ जायेगा !
लड़का : जी
लड़की : पतझर तक की दवा दे दी है !
लड़का : जी
लड़की : ( मुस्कुराती हुई ) मौसम पर कोई नियंत्रण नहीं है …
लड़का : ( भरी आँखों से ) तुम क्या जानो मौसम क्या है ?
लड़की : मैं तुम्हारे मौसम का डॉक्टर हूँ !
लड़का : मुझे नहीं पता था कि प्रेम में पागलों के डॉक्टर को मौसम का डॉक्टर कहते हैं !
लड़की : जी ?
लड़का : मेरा मौसम सोशल मिडिया में खुला बदन घूम रहा था !
लड़की : हम्म
लड़का : डॉक्टर साहेब मेरे मौसम को सोशल मिडिया के बसंत से बचा लो !
लड़की : अगर आप के भीतर बसंत की चाह नहीं है तो आप को मौसमी कलैंडर में भी बसंत नहीं मिलेगा !
लड़का : सोशल मिडिया में बसंत इतना भर गया है कि …
लड़की : कि ? क्या …
लड़का : बस एक बार मेरा मौसम सोशल मिडिया के बसंत से छूट जाये तो अगले मौसमी बसंत के अटैक तक जी जायेगा …
लड़की : दूसरों की प्रोफाइल में रहकर हम अपना मौसम खो देते हैं ! अपने मौसम के लिए हमें खुद जीवन के धूप में खड़ा रहना होगा !
लड़का : ये सब राजनीति बसंत की वजह से हुआ ! सॉरी मैंने इस मौसम में दुसरे प्रोफाइल से फ़्लर्ट किया
लड़की : अब किसी को इनबॉक्स में भी हैप्पी बसंत मत बोलना !
लड़का : बस एक बार मुझे सोशल मिडिया के बसंत से बचा लो मैं कभी दुबारा बसंत में झाकूँगा भी नहीं !
लड़की : रोगी बने रहो ! मत भूलो मैं तुम्हारे मौसम की डॉक्टर हूँ !
लड़का : मौन

फिर अँधेरा !

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !
सभी पात्र कामदेव स्क्वाड बनकर कोरस में : बसंत के चार यार / लड़का, लड़की, ग्राहक और बाज़ार / शुरू करो लव सेक्स और प्यार का व्यापार ! हम नहीं कहते जमाना कहता है !

( धनुष से बाण चलाते हुए ) शुरू करो लव सेक्स और प्यार का व्यापार …

रोमांटिक रस के संगीत में पर्दा गिरता है !

इस प्रयोगधर्मी नाटिका में किसी भी प्रकार के मंच सज्जा की कोई आवश्यकता नहीं है ! रचनात्मक प्रकाश और ध्वनि / संगीत से चारों दृश्य को अलग अलग ढंग से दिखाया जा सकता है !

 

बजट पच्चीसी

Illustration : Anirban Bora

Illustration : Anirban Bora

१.

मैं बजट हूँ !

समझौता के जादू को बजट कहते हैं ! मैं पत्नी के सहयोग से बनता हूँ ! दिन में घर का बजट ही रात में पति बन जाता है ! समय पर बिल भुगतान करना, कर्जों का सही समय पर निपटारा करना और अपने बचत, निवेश लक्ष्यों को हासिल करना भी मेरे ही अंतर्गत आता है ! घर का बजट बनाने का अर्थ है कि आप मुझे बना रहे हैं !

२.

मेरी बजट राशि !
जैसे घूमती हुई पृथ्वी घूमती हुई दिखाई नहीं देती, वैसे ही बजट भी हमारे इर्द गिर्द घूमता है पर मुझे कहीं घूमता हुआ दिखाई नहीं देता ! ऐसा जान पड़ता है कि मैं धन का नहीं, धन मेरा चक्कर लगा रहा है ! मेरे साथ चन्द्रमा और सूर्य भी मेरी धन राशि वृत्त पर चल रहे हैं ! मैं वृत्त में नहीं वित्त में पड़नेवाले विशिष्ट असंख्य तारा समूह में एक हूँ और सबके साथ मेरी राशि भी वित्त है !

३.

बजट का हनीमून !

मुझे अच्छी तरह पता है, बजट बनाने का मतलब है कि आप शादी के फंदे में फंस गए हैं ! मेरी गृहस्थी में बजट की शुरुआत हनीमून से ही हो गयी थी ! हनीमून पैकेज के साथ मेरे अंदर बजट शब्द की गंभीर यात्रा शुरू हो गयी ! शादी के तुरंत बाद मुझे पता चल गया था बजट का हनीमून से नाता है ! जितना बड़ा बजट उतना बड़ा हनीमून पैकेज ! बड़ा पैकेज मतलब बड़ा हनीमून, छोटा बजट मतलब छोटे पैकेज का छोटा हनीमून !

४.

भारतीय बजट !

फ्रांस में धन के आय और उसके व्यय की सूची को बजट कहते हैं ! फ्रांसीसी भाषा के शब्द से जन्मे इस बहुमंजिले शब्द से ही दुनिया लाभ में रहना सीखी है ! फ्रांस में आज बजट के साथ जो भी हो रहा हो, भारतीय बजट में अपनी आय और व्यय की भावना को मुझे बैंक खाते में रखना पड़ता है ! बहुमंजिला बजट को समझने की प्रतिभा मुझसे ज्यादा मेरी पत्नी में है !

५.

चालू खाता !

खाते ! खाते, खाते, खाते और खाते ! खाते – पीते फिर खाते ! खाते – खाते, पीते – पीते ! बैंक और खाते ! खाते – खाते, बैंक – बैंक ! खाते – बैंक, पीते – बैंक ! बैंक – बैंक ! खाते – खाते ! मेरा खाता , मेरा बैंक ! मेरा खाता मेरी खता ! खाता – खता, बैंक बैंक !

६.

बैलेंस बजट !

बजट ब्रह्म है ! वर्ष / केंद्रीय / कोष  / वित्त / मंत्री / आयोग / सरकार / योजना / ग्रामीण / बदलाव / संसद / प्रदर्शन / बिजली / सड़क / गैस / चर्चा / केंद्र / इत्यादि, इत्यादि ! मैं किसी भी शब्द से बजट पर कोई भी वाक्य पूरा कर सकता हूँ ! मेरा बजट मेरा ब्रह्म है ! मेरे बजट का बैलेंस हर शब्द में बना रहता है !

७.

पॉकेट मनी !

मेरे बजट में चार पॉकेट हैं ! दो पैंट के और दो शर्ट के ! मेरे पॉकेट मेरी पत्नी का ही कहा मानते हैं ! मैं सिर्फ उनको धोता और ढोता हूँ ! अपने साल की योजना का इरादा मैं अपने पॉकेट में ही रखता हूँ ! न जाने क्यों जब कभी बजट शब्‍द सुनाई देता है, मेरे हाथ पॉकेट में घुस जाते हैं !

८.

इकोनॉमिक्स !

दिन के, रात के, हफ़्ते के, महीने के, साल के, बजट को पहचानता हूँ ! जैसे घर में मैं अपनी पत्नी को सुनता हूँ वैसे ही टेलीविजन पर सचमुच में वित्त मंत्री को सुनता हूँ ! सिर्फ आलोचना नहीं करता ! मेरे बजट के इकोनॉमिक्स में रुपयों को छोड़ कर फिजिक्स, केमिस्ट्री, हिस्ट्री, जॉग्राफी, बायोलॉजी, स्पोर्ट्स, टेक्नोलॉजी, पर्यावरण, व्यापार, आकाश, पाताल, जंगल, पहाड़, सब है !

९.

मेरी लाइफ !

मेरी लाइफ इस साल भी स्टायलिश लुक के साथ मॉर्डन फीचर्स वाली इंटीरियर की होगी ! मेरे लिए कम बजट में फैमिली कार के बेहतर विकल्प इस साल भी आएंगे ! मार्किट में मल्टी साइज़ के ऑल्टो बजट से मैं इस साल भी बच नहीं पाउँगा ! बेहतर परफॉर्मेंस के साथ-साथ ज्यादा माइलेज के मामले में इस साल भी मेरी लाइफ आगे जाएगी ! किसी भी बजट में मुझे मेरे गंतव्य तक मेरी सरकार पहुँचा ही देगी !

१०.

मेरा हिसाब किताब !

पैसा कैसे काम करता है, इस बात को समझना ही बजट नहीं है ! शादी के कई साल बाद मुझे विश्वास हो गया है कि रोज़ सुबह पूरब में जो उगता है वो बजट है ! दोपहर को दिन भर का बजट आधा हो जाता है ! घरेलू काम की हिस्सेदारी की शेयरिंग ही असली बजट है ! गृहस्थी एक संयुक्त खाता है, बजट का हिसाब किताब दोनों प्राणी को रखना पड़ता है !

११.

बजट का बच्चा !

मेरे बजट के बारह दाढ़ हैं ! इन दांतों के बीच मेरे चार ज्ञान के दाँत हैं जो बजट के नाम पर लोहे का चना चबाते हैं ! दूध के दाँत टूटने तक माता पिता ही बच्चों का बजट हैं ! किशोरावस्था तक जैसे छुप छुप के मैंने इन्टरनेट पर सेक्स समझ लिया था वैसे ही भारतीय बच्चे यू – ट्यूब पर वित्त मंत्रियों को सुन सुन के बजट भी समझ लेंगे !

१२.

बजट पर ज़ुल्म !

बजट के इस पैकेज में हम नए दो हज़ार पांच सौ को विभिन्न स्तर पर भावनात्मक और शारीरिक रूप में ज्यादा जान जायेंगे ! नोटबंदी के नाम पर पिछले ढाई महिने में मुझ पर ना जाने क्या क्या जुल्म हुए, मेरे हज़ार पाँच सौ मेरे नहीं रहे ! लेकिन मैं बजट के साथ रहा किसी के आगे झुका नहीं !

१३.

हास्य बजट !
मुझे अपने बजट को पाने के लिए शेमलेस होना चाहिए था मैं कैश लेस हो गया ! मेरे इस बजट में हास्य बारह परसेंट से पंद्रह परसेंट पर पहुँच गया है ! वर वधु को इस साल भी लिफाफा टिकाया जायेगा ! मैंने सुना है बजट के दिव्यांगों के लिए नए बजट में हेल्पिंग किट्स सस्ते हो गए हैं ! व्यंग – आंगों को मेरा हास्य बजट सुनने पर भाषण के बजट पर लाभांश मिलेगा !

१४.

सबका रुपया एक है !

बजट में पत्नी माँग है और मैं पूर्ती हूँ ! प्रत्येक माह अपने आप को अनुशाशन में रखना होता है तब बजट में लाभ होता है ! मेरी अर्थपूर्ण चाहतों और अनावश्यक इच्छाओं को मुझसे अलग करने को मेरी पत्नी बजट मानती है ! जैसे मेरी आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपया एक है, वैसे ही बजट में अपनी अपनी अठ्ठनी होते हुए भी सबका रुपया एक है !

१५.

लाभ – लाइफ !

लव में लाभ को भी बजट कहते हैं, जैसे प्रेम में हानि को लाभ कहते हैं !

१६ .

स्मार्ट बजट !

मेरा स्मार्टफोन इस बजट में और स्मार्ट होगा ! इस बजट में स्मार्ट शहरों की तरह स्मार्टफोन के सोल्ड आउट होने की जानकारी मुझे फिर मिलेगी ! डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन दिये जाने के साथ – साथ फसलों में प्रचुरता भी इसी साल आएगी ! हेल्थ, एजुकेशन पर इस साल फिर फोकस होगा !

१७.

बजट का श्रृंगार !
बजट का बहिष्कार ही बजट का श्रृंगार है ! जिनके लिए बजट बनता है वही बजट का बहिष्कार करते हैं ! जो आज बनाते हैं वही कल उसकी चुटकी लेते हैं !  बजट एक ऐसा यूनिवर्सल चुटकुला है जो सबको पूरे साल याद रहता है और जिसे सब समझते हैं ! रहमत की बारिश के कीचड़ में इस साल फिर कमल का फूल खिलेगा !

१८.

एक साल की वॉरंटी वाला बजट !
नए बजट में अपने आप को अपग्रेड करने का ऑफर मुझे इस साल भी मिलेगा ! सारे एक्‍सचेंज ऑफर मुझे फिर से पेश किये जायेंगे ! फ्री रजिस्‍ट्रशन और एक साल की वॉरंटी वाला फेस्टिव ऑफर, फेस्टिवल सीजन में कैश डिस्‍काउंट के साथ मुझे इस बजट में फिर मिलेगा ! सोना जीतने का मौका मुझे नया बजट इस साल फिर देगा !

१९.

बजट के बड़े एलान !
‘ बजट इस साल घर का चौका – बर्तन, झाड़ू – पोछा नहीं करेगा ! मशीन से निकाल के कपडे भी नहीं फैलाएगा ! दुकान से राशन भी नहीं लाएगा ! सब्ज़ी खरीदने बाज़ार नहीं जायेगा ! मोबाइल का बिल नहीं भरेगा ! बजट अपना सर – चार्ज करेगा ! ‘ये मैं क्या बड़बड़ा रहा हूँ ! ‘ मुझे किसी बैंक में ले चलो, मुझे डिजिटल साक्षरता की ज़रूरत है !’

२०.

ग्रामीण कम – इन !

ग्रामीण तुम हमें आज ज़मीन दो हम तुम्हे कल घर देंगे ! गाँव में ऋण वसूली बजट के पीठ पीछे होगा ! तीसरा पूर्ण बजट तुम ले लो ! ग्रामीण तुमसे मुझे और कुछ नहीं चाहिए, मुझे कुछ नहीं चाहिए ! कम – इन ग्रामीण !

२१.

बजट का दर्ज़ी !

बजट का दर्ज़ी मेरा साइज़ जानता है ! बजट में मेरे मोबाइल, पर्स, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड के नाप से मेरी इज़्ज़त काटी जाती है ! इस साल युवाओं को अपने साइज़ का पासवर्ड बजट के दर्ज़ी को देना होगा जिससे बचने के लिए युवा अपने कपड़े खुद फाड़ेंगे जिसे सरकार अगले बजट में सिल देगी !

२२.

अच्छा बजट ही एक अच्छा पति है !

कुछ लोग कहते हैं बजट काम नहीं करते ! बजट के साथ यही समस्या है ! बजट का काम किसी को दिखता नहीं है ! अच्छे बजट के पास पैसा होता है, पैसा सबको दिखता है ! ख़राब बजट के पास दिल होता है जिसको अब प्रेमिका भी तोड़ देती है ! कोई ख़ाली जेब को बजट कहता है, एक्सपेंडीचर सेक्रेटरी मेरी पत्नी बचे हुए पैसों को बजट कहती है !

२३.

बजट छुक छुक !

बजट बुद्धिमान ! बजट शक्तिमान ! बजट सुपरमैन ! बजट लक्ष्मी ! बजट शक्ति ! बजट – बुद्धि उत्सुक होता है, बजट अपनी खुशियों की कॉस्मैटिक पटरी पर छुक – छुक होता है !

२४.

बजट पास !

बजट एक बार संसद में पास हो गया तो फिर साल भर तक मेरे पास नहीं आता ! बजट पास होने के बाद बजट को फेल करने की जिम्मेदारी मेरे ही कंधों पर होती है !

२५.

बजट पच्चीसी !

बजट को होना था समृद्धि का बजट सिंहासन बत्तीसी ! ड्रग्स ने बजट को बना दिया बजट बेताल पच्चीसी ! घर का पति मैं, बजट में एक्स व्यक्ति ! इति रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स, इति बजट पच्चीसी !!

दलबदलू का प्रेम पत्र

प्रतीकात्मक तस्वीर : गूगल से साभार

हेलो, जानू लियोनी ! मेरी जानेमन, मेरी ज़िंदगी, मेरी तमन्ना, मेरी खुशी … तुम्हें किस नाम से पुकारूँ, तुम्हें किस तरह से आवाज़ दूँ ?

मेरे शातिर दिमाग़ को तुमसे कैसे प्यार हो गया मुझे आज तक इसका कोई सुराग नहीं है। मैं आज तक तुम्हें अपने दिल की बात नहीं बता पाया ! लिख कर बताऊं भी तो कैसे, यही डर लगता है कि अगर तुमने ना कह दिया तो तुम्हें हमेशा – हमेशा के लिए खो दूँगा ! अभी तुम मेरी हो, मैं तुम्हारे साथ ना सही, तुम ख्यालों में मेरे आसपास ही रहती हो ! लियोनी तुमने मुझे अपनाया नहीं है, लेकिन इनकार भी तो नहीं किया है ना अभी तक ! इसी ख्याल के सहारे मेरे दिन – रात कट रहे हैं कि शायद किसी दिन तुम मेरे प्यार को पहचानो और मेरे पास आकर कहो ” मैने तुम्हारी आँखों में प्यार की दास्तान पढ़ ली है माय लव और आज से हमेशा के लिए मैं तुम्हारी हूँ ”

जानू मैंने फिर से दल बदल लिया है ! मैं अब ‘खपा’ में नहीं हूँ, आज से मैं ‘नपा’ में हूँ ! खुश हूँ आज से मेरा फ़ोन नंबर, ई मेल आईडी, बैंक अकॉउंट नंबर और घर का पता सब बदल जायेगा ! फिर भी भारी मन से कहना पड़ रहा है और ये बहुत दुःख की बात है कि पर्सनल दिल – बदल या पोलिटिकल दल – बदल की खबरें अब किसी को भी चौंकाती या हैरान नहीं करती हैं !

जानू तुम जानती हो मैं ‘खपा’ में विचारों की वजह से था ! पिछड़ों और दलितों के लिए काम करने वाली पार्टी अब सिर्फ कॉरपोरेट्स से पैसे लेकर राजनीति में ला रही है ! ‘खपा’ में वसूली के सिवा कोई काम नहीं हो रहा था ! पार्टी में विचार खत्म हो चुके थे, इसलिए मैंने साहेब के कामों और विचारों से प्रेरित होकर ‘नपा’ ज्वाइन कर ली है ! आज दल बदलने के शुभ अवसर पर हो रहे प्रेस कॉन्फ्रेंस में पिछले दस साल में राज्य की माली हालत ख़राब करने का ठीकरा मैं स्वयं कल तक जिस पार्टी में था उसके सर पर ही फोड़ दूंगा ! शराब का ठेका, होटलों की सस्ती नीलामी, करोड़ों रुपये की वैट चोरी, का माल जिस थाली में कल तक खा रहा था आज उसी में छेद कर दूंगा ! जानू मुझे धोबी का कुत्ता नहीं बनना ! आज कई नेता अपनी पार्टी में धोबी के कुत्ते वाली हालत में हैं, ना घर के ना घाट के ! तुम्हारा दलबदलू अपना घर और घाट समय पर चुन लेता है ! ‘नपा’ में अब तक मुझे बहुत सम्मान मिला है ! आगे भी उम्मीद है कि जैसा मैंने ‘नपा’ के लिए सोचा था, वैसा ही होगा ! किसी एक – दो सीट से कभी बात नहीं बनती – बिगड़ती ! जानू लियोनी, पार्टी में अपना नाम नहीं देख कर दिल या दल मत बदल लेना ! अभी पहली लिस्‍ट आई है ! मेरे रहते तुम जैसी किसी कार्यकर्ता या नेता को अपमानित नहीं होना पड़ेगा ! हम दोनों के दिल का जब तक तालमेल बना रहेगा, तुम बेफिक्र रहो दल में सीटों का तालमेल भी बना रहेगा !

” चुनावी बिगुल के बजते ही इन बिन पेंदी के लोटों को कुछ – कुछ होने लगता है … ये सावन के अंधे चुनाव के माहौल में सिसकारी मारने लगते हैं … ये थाली के बैंगन अपनी खीचड़ी अचानक अलग पकाने लगते हैं ! ” तुम बताओ मेरे बारे में ये सब कहना क्या बहनजी को शोभा देता है ? हाँ ये सच है कि उन्होंने कहीं मेरा नाम नहीं लिया, लेकिन पार्टी में सब जानते हैं कि आज की सब टिप्पणी बहनजी ने मेरे लिए ही की है ! मैं राजनीति में होने के कारण हर शख्स के कॉन्टैक्ट में हूं ! इसका कोई गलत मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए ! दल बदलने में कोई बुराई नहीं है !

मैं बहनजी से हाथ जोड़कर माफ़ी मांगता हूँ और उनके इस चुनाव से विदा लेता हूँ ! जानू मैं प्रण करता हूं आज़ादी की शाम नहीं होने दूंगा, वीरों की समाधि को बदनाम नहीं होने दूंगा, जब तक तन में गरम लहू की एक बूंद भी बाक़ी है, मात्रभूमि का आंचल बदनाम नहीं होने दूंगा !

जानू मैं अपना सच जानता हूँ ! मेढकों को तराजू में नहीं तौला जा सकता यह कहावत मेरे लिए ही है ! हाँ मैं एक दलबदलू हूँ ! पर जो मुझे दलबदलू कहकर बदनाम करने में लगे हैं वो अपनी चिंता करें ! अब उनके प्रेस नोट को भी कोई पढ़ना नहीं चाहता ! मैं जानता हूँ मेरी उछल – कूद की प्रवृत्ति से समाज हैरान – परेशान है, पर ऐसा करने वाले नामों की फेहरिस्त लंबी है, और मुझे गर्व है मेरा नाम सबसे ऊपर है ! इस बात का मुझे अपार हर्ष हैं कि मुझे देखते ही लोग कहते हैं ‘ राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता !’ राजनीती में अपनी दलबदलू सूझ बूझ से ही मैं कभी न छोटी की जा सकने वाली दलबदलू परंपरा की लकीर को लंबा कर पाया हूँ !

जानू इस बात से दुखी हूँ कि दलबदलू जैसे गुप्त राजनितिक चाल को ‘सबका साथ सबका विकास’ का नारा लगाते हुए सार्वजनिक किया जा रहा है और हर दलबदलू को पार्टी में घुसाया जा रहा है ! पार्टियों ने हम जैसे छोटे छोटे दल-बदलुओं के लिए भी बड़े बड़े दरवाज़े खोल दिए हैं ! अक्सर मैं सोचता हूँ, आखिर सभी दलों को दल-बदलू क्यों पसंद आते हैं ? क्या राजनीति में निष्ठा, नीति और नीयत की बातें बेमानी हो गयी हैं ? क्या आज सियासत भी कॉरपोरेट घराने की तरह हो गई है जहां लोग पैसा, पावर और पद के लिए सारे रिश्ते नाते भूल जाते हैं ?

जानू लोकतांत्रिक समाज में हर व्यक्ति की अपनी सोच होती है और वह उसे कभी भी बदलने का अधिकार रखता है ! दल-बदल को राजनीतिक प्रक्रिया का एक सामान्य अंग ही माना जाना चाहिए ! आज तुमने ट्वीटर पर कहा कि तिवारी ने मुझे आया – राम, गया – राम बुलाया है ! जानू मुझे अपने ऊपर भरोसा है अगर प्रेस रूम में भी कोई बार बार मेरे मुँह पर मुझे आया – राम, गया – राम बुलाएगा फिर भी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा ! मैं अपने कान की खाल इतनी मोटी कर चुका हूँ जिस पर सब मिल कर भी अगर इस नाम का ढ़िढोरा पीट लेंगे तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा ! जानू तुम जानती हो न हाथी चले बाजार तो कुत्ते भोंके हजार ! पर जानू लियोनी, इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि मुझ जैसे दिग्गज दलबदलुओं द्वारा भी पार्टी चुनाव जीत ही लेगी ! आज के युग में क्या किसी को किसी बात के लिए गारंटी देता है ?

चोटी के सशक्त राजनेताओं के बीच अपनी जगह बनाने की तुम्हारी महत्वाकांक्षा ने मुझे तुम्हारे और क़रीब ला दिया है ! दलबदलू नेता जनता के बीच अपनी जो विश्वसनीयता खो चुके हैं वो तुम्हारे राजनीती में आने से लौट सकती है ! तुम्हारे साथ मेरे चुनावी सभा की माँग बढ़ जाएगी ! शक्ति प्रदर्शन में तुम मेरा साथ दे सकती हो ! सत्ता की दौड़ की राजनीति के मैदान के खिलाड़ी दलबदलू परम्परा से जो खेल खेलते चले आ रहे हैं, मुझे भरोसा है तुम इस खेल को खेल कर हम दलबदलुओं को एक नयी चाल दोगी ! तुम एक मेहनती औरत हो और कड़ी मेहनत से तुमने पैसे कमाए हैं ! युवा पीढ़ी के लिए तुम एक अच्छी मॉडल हो ! राजनीति, नौकरशाही और मीडिया में मेरे मित्रों को भी तुम्हारे दिल – बदलु टैलेंट पर बहुत भरोसा है ! तुमने नाम बदला ! पेशा बदला ! देश बदला ! अब तुम मेरी तरह भारतीय राजनीती भी बदल डालो ! तुम्हारे पास दोहरी राष्ट्रीयता है अब तुम अपनी दोहरी मानसिकता भी दिखा दो ! कामुक नर्तकी से तुम अश्लील फिल्म अभिनेत्री बनी, व्यापार-जगत से जुड़ी, और मॉडल होने के बाद आज बिन पेंदी के लोटे बॉलीवुड की एक सुपर स्टार हो ! तुम्हारी तुलना सुनहरे पर्दे की मीनाकुमारी और मधुबाला से की जाने लगी है ! राजनीति में आ कर तुम अपनी तुलना मैडम, दीदी, बहनजी से करवा सकती हो ! जैसे तुमने प्रोफेशन बदला है वैसे अगर तुम दल बदलोगी तो मेरी भविष्यवाणी है कि तुम भविष्य में प्रधानमन्त्री बन जाओगी ! अश्लील फिल्म के बाद राजनीति में मेरे साथ और प्रसिद्धि पाने के लिए तुम्हे तरह-तरह के विवादों और अफ़वाहों से घिरा रहना पड़ेगा ! हम दोनों की यही बात पत्रकारों को आकर्षित करेगी ! मेरे साथ तुम्हारी ज़िन्दगी की विस्मयकारी दास्तान तुम्हे महान नेता बना देगी ! ‘आधी छोड़ सारी को धावे, सारी रहे न आधी पावे’ मुहावरे को तुम ही झुठला सकती हो लियोनी ! आधी, सारी सब छोड़ के दलबदलू राजनीति को सत्ता के खेल में तुम ही निर्वस्त्र कर सकती हो !

तुमको पत्र लिखते हुए हमेशा डरता हूँ, सोचता हूँ कभी मेरा अकाउंट हैक हो गया तो क्या होगा ? फिर तुम्हारी एक फ़िल्मी बात मेरी कानो में गूंजने लगती है और मुझे वो पल याद आ जाता है जब तुम अपनी लियोनी अदा में मुझसे कहती हो ” लोगों से सुना है किताबों में लिखा है / सब ने यही कहा है / प्यार करने वाले कभी डरते नहीं / जो डरते हैं वो प्यार करते नहीं … ” फिर मैं कहता हूँ ‘तुम ही मेरी लियोनी हो ! लियोनी असली और नकली नहीं होती …’ इस बात पर तुम कितनी हंसती हो … और हँसती हुई बिलकुल सच्ची सलोनी लियोनी लगती हो …

मेरी जेब की मुद्रा स्थिति से ले कर मेरे शरीर मुद्रा की हर स्थितियाँ मेरी कल्पना में तुम जानती हो ! जानू तुम इस दलबदलू को कभी अकेला मत छोड़ना ! कल मैं अपने दिल की फिर सुनूँगा ! दिल जब बोलेगा बदल जाऊंगा और कोई दल जब बुलाएगा तो दिल बदल लूँगा ! मैंने तो दल बदल लिया है अब देखना है मेरे पीछे – पीछे मेरे क्षेत्र की जनता भी अपना दिल बदल कर मेरा साथ देती है की नहीं …

बी बी सी की टीम दलबदलू नेताओं पर फीचर में मुझसे इंटरव्यू लेने आयी है, मुझे अभी जाना पड़ेगा …

तुम्हारा और सिर्फ़ तुम्हारा जानू दलबदलू
चीयर्स

अभी आप इन्टरनेट के माध्यम से जमा किया गया एक दलबदलू का प्रेम पत्र पढ़ रहे थे ! सोशल मिडिया के परदे के पीछे से एक दलबदलू की आभासी उपस्थिति को पढ़ कर मुझे लग रहा है कि दलबदलू बिचारा होता है और अपने दिल का मारा होता है ! मैंने एक दलबदलू के वर्चुअल लव लाइफ को सामाजिक हित में हैक किया है ! मेरे इस कृत्य का किसी राजनितिक सीट को बनाए रखने से कोई लेना देना नहीं है ! दलबदलू जो अपनी पार्टी के साथ करते हैं वही अपने दिल के साथ भी करते हैं ! दलबदलू दिल और दल एक काल्पनिक – दैविक मज़बूरी में बदलते हैं ! प्रिये काका हाथरसी ठीक कह गए हैं, दलबदलू दार्शनिक होते हैं ! – एक देशप्रेमी हैकर, जय हिन्द !

किताब और मेला

पुस्तक प्रेमी

जैसे ही किताबों के सपने आने लगते हैं मैं समझ जाता हूँ किताबों का मेला लगने वाला है ! किसी भी पुस्तक मेला के लगने से पहले मुझे किताबों के सपने आने लगते हैं ! अच्छे, बुरे, किताबों से जुड़े तरह तरह के सपने देखने लगता हूँ ! किसी सपने में देखता हूँ कि चारो तरफ किताबों के पेड़ लगे हैं … कभी देखता हूँ सबने मिल कर इतनी किताबें लिख दी हैं कि पढ़ने के लिए उन्हें चारो तरफ बिखरा दिया गया है … लोग किताबों को घर नहीं ले जाना चाहते हैं क्योंकि घर पहुँचते ही एक किताब दूसरे किताब को बुला लेती है और बहुत जल्द घर में किताबों का ढेर लग जाता है … किसी सपने में लोग किताबों से डर कर उन्हें घर से बाहर कर देते हैं … बाहर इतनी किताबें हैं कि देख कर न चलें तो किताबों से ठोकर लग सकती है ! ऐसी ठोकर से बचने के लिए लोग किताब पढ़ना शुरू कर देते हैं ! सब जानते हैं किताबों से बचने का बस यही एक तरीका है, उनको चुप – चाप पढ़ लीजिये ! जब तक आप उसे पढ़ न लें, किताबें तब तक ही आपको डराती है ! सपने में एक दिन मैं सुनता हूँ कि विश्व पुस्तक मेला लगने वाला है ! मेरी आँखें खुल जाती हैं ! अखबार में पुस्तक मेला का समाचार देख कर अपने सपने को सच पाता हूँ ! मेला शब्द सुनते ही मेरी इन्द्रियों के पन्ने फड़फड़ाने लगते हैं, मेरे मुंह में पानी आने लगता है ! मैं किताब के पन्नों पर प्रिंट की रोशनाई की ताज़ी गंध सूँघने के लिए बैचैन हो जाता हूँ ! मैं एक किताबी कीड़ा हूँ, मेरी रीढ़ की हड्डी किताब चाटे बगैर सीधी नहीं होती !

निर्धारित दिन सुबह ग्यारह बजे मेला पहुँचने वाले पहले जत्थे में मैं भी शामिल था ! ट्वीट्राटी, फेसबुक, यू ट्यूब, इत्यादि से मेला न पहुँच पाने वाले भी मेले का हाल मुझसे ज्यादा जानते हैं क्योंकि मेला जाते ही मैं किताबों में खो जाता हूँ ! पुस्तक मेले में क्या हो रहा है मुझे इस बात की कोई सुधबुध नहीं रहती है ! जैसे ही मुझे कोई दिलचस्प किताब दिखती है, समय गवाएं बिना मैं उसे पढ़ने लगता हूँ ! किताब को पढ़ते समय मैं उस किताब में घुस जाता हूँ और किताब ही मेरी कोठरी बन जाती है ! जब तक मुझे पुस्तक मेले के चौकीदार किताब से खींच के बाहर नहीं कर देते हैं मैं किताब में ही रहता हूँ ! अगले दिन भी मेला पहुँच कर मैं फिर उसी किताब में घुस जाता हूँ ! जब तक किताब खत्म नहीं हो जाती है मैं किताब को नहीं छोड़ता हूँ ! किताबों के मेले की एक बहस में मेरे तर्क और उदहारण सुन कर जबसे लोग मुझे पाठक बुलाने लगे हैं, मैं लोगों और सोशल मीडिया से बचता फिरता हूँ ! सोशल मीडिया में सबने मिल कर मुझे गुमनाम पाठक बना दिया है और मेरी अनुपस्थिति पर फ़िज़ूल का चिटपुटिया बहस करते रहते हैं ! जबकि मैं सोशल मीडिया के पीठ पीछे चुपचाप कई किताबों को पढ़ कर निकल जाता हूँ !

आज मेले में घुसते ही मुझे कालिदास की शकुंतला मिल गयी ! उफ़ ! क्या मानुषी है ! क्लासिकल शकुंतला के बहाने मुझे साहित्य का ऐश्वर्य देखने का फिर से मन करने लगा ! मैंने प्रेम दुःख से भरे इस काव्य नाटक को पढ़ने के लिए पंडाल में किताब की ढेर के पीछे वाला गुप्त हिस्सा चुन लिया और एकांत में शकुंतला को पढ़ने लगा ! रह रह कर मैं शकुंतला के प्रेम प्रसंगों में खो जाता और उसके दुर्भाग्य पर चुपचाप अविरल रोता रहता ! रात हो गयी ! कहानी मेरे मन को छू गयी थी ! मछुआरे की अँगूठी को देख कर जैसे दुष्यंत को शकुंतला की याद आयी वैसे ही शायद मेले के किसी चौकीदार को मुझ पाठक की याद आ गयी थी ! किताब के एक प्रसंग में दुश्यन्त ने शकुन्तला को जैसे ही ढूँढना शुरू किया मैंने महसूस किया मेले का चौकीदार भी किताबों के छुपे पाठक को किताबों में ढूंढ रहा था ! पाठकों को बाहर खदेड़ने में कई प्रकाशक चौकीदार की मदद कर रहे थे ! मुझ जैसे ज़िद्दी पाठकों को बाहर तक ले जाने के लिए चारो तरफ सीटी बज रही थी ! मैंने दुःख की इस कथा को ख़तम किये बिना मेले से न निकलने की ठान ली और एक ऊँची टेबल के नीचे छुप के पढ़ने लगा ! मेनका की बेटी से अब मुझे पुस्तक मेले का कोई चौकीदार और प्रकाशक अलग नहीं कर सकता था ! अंत में दुष्यंत को शकुंतला मिल गयी पर मैं किसी चौकीदार को नहीं मिल सका !

जब किताब ख़तम हुई हॉल से सब जा चुके थे ! मेला कई घंटे पहले अगले दिन तक के लिए बंद हो चूका था ! लाखों किताबों के बीच मेले में, मैं अकेला छूट गया था ! मैं बिना हिले डुले स्थिति का जायजा लेने दूर से आ रही इधर उधर की आवाज़ों को जोड़ के समझने की कोशिश करने लगा ! घडी में रात के डेढ़ बज रहे थे ! पुस्तक मेले के पंडाल के बाहर का मैदान कोहरे में डूब गया था ! इस वक़्त पुस्तक मेले में मैं किसी चौकीदार के हाथ नहीं आना चाहता था ! यह पाठक का निजी क्षण था ! मैं नहीं चाहता था रात के दुसरे पहर पुस्तक मेले से निकलता हुआ पकड़ा जाऊं और सोशल मिडिया में अगली सुबह उछाल दिया जाऊं ! मुझे अपनी स्थिति में पाठक की मिसअंडरस्टूड स्थिति दिखने लगी और सोशल मीडिया में पाठकों की दुर्दशा पर कई दिखाऊ सेमीनार को जन्म देने का बहाना दिखने लगा ! जैसे ही इस घटना पर सहमति असहमति के लाखों चेहरे की सेल्फ़ी का हाहाकार मेरी कान में गूँजा, मैं इस डरावने ख़याल से निकल आया ! अचानक तभी कहीं से मुझे कई फुसफुसाहट की आवाज़ सुनायी देने लगी ! मैं थोड़ा सहम गया ! किताब पढ़ने की धुन में मैं स्टाल संख्या और हॉल संख्या भूल गया था ! फुसफुसाने की सब अज्ञात आवाज़ें आस पास से आ रही थी, लग रहा था कोई मेरा पीछा करता हुआ यहाँ तक आ पहुँचा है ! बड़ी सावधानी से किताब को कुतरने वाले मेले के वोकेशनल चूहे की तरह मैं पंडाल से बाहर निकलने की जुगत लगाने लगा ! बाहर कहीं अँधेरा था, कहीं रौशनी थी ! बाहर आकर मुझे लगा मैं एक नयी जगह आ गया हूं ! कहाँ गयी वो भीड़ ? कहाँ गए वो असँख्य खरीदार जिसमे मुझ जैसे पाठक दिन में खो जाते हैं !

बाहर आते ही मुझे एक नयी किस्म की भीड़ दिखी ! कुछ ठंढ से और कुछ इस दृश्य को देख कर मैं सिहर गया ! रात के सन्नाटे में बाहर किताबों का मेला लगा था ! पंडालों के भीतर से किताबें बाहर निकल के उत्सव मना रही थी ! ये दृश्य मेरे लिए बिलकुल नया था ! मैं पहली बार पुस्तकों का सच्चा मेला देख रहा था जहाँ किताबें उन्मुक्त थीं ! दूर तक किताब ही किताब … चारों तरफ किताबें बिखरी पड़ी थीं ! पेड़ों पर किताब लटक रहे थे ! मुझे लगा मेरा सपना सच हो गया है ! किताबें किलकारियां मार रही थीं ! उत्तेजना से मुझे और ठंढ लगने लगी ! ठंढ से बचने के लिए मैं कोई जुगाड़ की तलाश में लग गया ! मैंने गर्म कपडे तो पहन रखे थे पर मेरे पास रात की ठंढ की तैयारी नहीं थी ! आग कागज़ का दुश्मन होता है इसलिए अलाव लगाने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता था ! मैं एक पाठक हूँ और पुस्तक प्रेमी हूँ, मैं सोशल मीडिया के प्रेत की तरह औरों की किताब जला के हाथ नहीं सेंक सकता था ! मैंने देखा नौजवान किताबें बूढी किताबों को ध्यान से सुन रही थी और चुप थीं ! नयी मोटी किताब भी पुराने पतली किताब को सुन रही थी ! बुज़ुर्ग की इज़्ज़त किताबों की दुनिया में ज्यादा थी !

पुस्तक मेले में छात्रों का प्रवेश नि:शुल्क था ! कोई शरारती छात्रा पुस्तक मेले में आयी तो स्कूल ड्रेस में थी पर अंदर अपने कपडे बदल के स्कूल ड्रेस वाला अपना बैग भूल गयी थी ! पुस्तक मेले में पूरा बाल साहित्य इस बाल मानुषी की शरारत को घेर के भावुक हो कर सोया था ! ठंढ से बचने के लिए मैंने बाल साहित्य से छुप कर उस मानुषी के झोले से उसके यूनिफॉर्म का पिंक स्वेटर और पिंक स्कार्फ निकाल कर पहन लिया ! अब मैं आधा बाल मानुषी और आधा वयस्क था ! मुझे लगा आधी रात को अँधेरे में पुस्तकों को चीर कर निकला मुझ पाठक का ये एक नया बाल अर्ध नारीश्वर अवतार है जो अवतरित दृष्टि से एक नया सच देख पा रहा है ! दिन भर अपना सर्वस्व लुटा कर बाहर मेले में किताबें सुस्ता रही थीं ! पुस्तक – प्रेमियों की याद में कुछ किताबों ने रत जगा किया था ! किताब से निकल कर कई पात्र और चरित्र के पुतले किताबों का मेले में साथ दे रहे थे ! मुझे दूर कोहरे में डूबा मेरे प्रिय साबू का पुतला भी दिखा ! रात के इस पहर में ठंढ से बच कर पुस्तक मेले के सभी चौकीदार किताबों की गोद में दुबक के सो रहे थे जैसे उन्हें सपनो के गर्म संसार में ले जा कर छोड़ दिया गया हो ! मेरी नज़रों के सामने पुस्तक मेले की विद्रूपता पराकाष्ठा पर थी !

बाहर निकलते ही कुछ बड़ी और मोटी किताबों ने झुण्ड बना के मुझे घेर लिया ! मुझे देख कर सबके पन्ने फड़कने लगे ! उसकी फड़फड़ाहट की आवाज़ सुन कर कई किताबें मौन हो गयी और उनसे आ मिलीं ! ‘हमारे इस मेले में तुम्हारा क्या काम ?’ रोबदार आवाज़ में एक किताब ने अपने पन्ने खोल कर सवाल किया ! डर विस्मय और मिक्स्ड फीलिंग की वजह से कुछ हॉरर किताबों के अक्षर इधर उधर बिखर के भागने लगे ! कुछ किताबों ने मुझे बाल साहित्य से निकला कोई कठपुतली समझ लिया और पास आ कर मुझे छूने की कोशिश करने लगे ! मुझे लगा मैंने पुस्तक मेले के रंग को भंग कर दिया है ! ‘क्या तुम हमें चुराने आये हो ?’ मोटी किताब ने दूसरा सवाल किया ? मैं कोई जवाब देता इससे पहले एक पतली लंबी गोरी सस्ती फ्रेंच किताब जो अबतक जोर जोर से फुसफुसा रही थीं मुझे देख कर चिल्लाने लगीं ! ‘तुम कोई नयी किताब तो नहीं लिख रहे ?’ अपनी पतली आवाज़ में उसने घबराते हुए पूछा ! उसकी बात सुन कर कहीं से नि:शुल्क बाइबिल दौड़ा हुआ आया और मुझ पर दया बरसाने की प्रार्थना करने लगा ! ज्ञान की इस असली गंगा में मैंने चुप रहना ही ठीक समझा !

थिंक टैंक से निकल कर कुछ गंभीर किताब मार्च करते हुए मुझ तक आये और औपचारिक रूप से मेरा परिचय माँगा ! मैंने कहा मैं शुद्ध पाठक हूँ ! मुझे किताबों से सच्चा प्यार है ! पुस्तक मेला मेरे लिए किसी देवालय से कम नहीं है ! मेरी बात को सुनकर मोटी किताबें जो सबसे ज्यादा गुस्से में थीं उनका सारा पन्ना शांत हो गया ! मेरे पाठक होने के सम्मान में ऑटोग्राफ्ड बुक मेरे पास आकर मुझसे सोशल होने लगे ! मुझे उन पर दया आ रही थी, मुझे उनका सच पता था ! हस्ताक्षर वाले किताब सोल्ड फील कर रहे थे पर वो बिके नहीं थे ! उनकी हालत टोबा टेक सिंह जैसी थी ! वो चाह कर भी मेरा दस्तख़त नहीं ले पा रहे थे ! उन्हें किताब की सीमा कहाँ ख़त्म होती है और पाठक की सीमा कहाँ शुरू होती है इसका भ्रम हो गया था ! वे सब डिप्रेस्सेड थीं और वे पुस्तक मेले में मुक्त हो कर भी अपने आप को अनदेखे खूँटे में बंधा हुआ महसूस कर रही थीं !

मैंने देखा रात में किताबों के लिए पुस्तक मेले का सेल्फी पॉइंट एक भूतहा जगह बन जाती हैं जहाँ कोई भी किताब जाने से डरती हैं ! चुटकुले की किताब क्रिकेट खिलाडियों से किसी बात पर रूठी हुई थीं और बात बात पर हंसने की जगह रो रही थी ! अपने डिजिटल और प्रिंट में होने को लेकर चल रहे गंभीर बहस में हास्य किताबें मौन थीं ! एक शेर के दिल पर लिखी किताब का पेम्पलेट दहाड़ने की कोशिश कर रहा था ! जेएनयू घटना, दिल्ली में वाहन प्रदूषण, वर्तमान सरकार, भारतीय मीडिया, समलैंगिक अधिकारों की किताबों की तस्वीरें लापता हुए लोगों की तरह मेले में चिपकी हुई थीं ! पीछे पुस्तक मेले में कागज़ी घोड़े कलम तोड़ के दौड़ रहे थे ! कुछ घटिया किताबें जो पॉपुलर थी – उनके कैटेलॉगस – रात भर उड़ते रहे ! पेम्प्लेट्स आवारा होती हैं और अपने रीसाइकल्ड नियति की वज़ह से निडर और फ्री होती हैं !

किताबों ने मुझे बताया दुनिया में स्त्रियों द्वारा लिखी स्त्रियों को समझने वाली किताब सबसे ज्यादा बिक रही हैं ! पुरुषों में स्त्री को नए सिरे से समझने की होड़ लगी है ! मेले में पुरुष के सवाल से भरी किताब को किसी ने उठाया भी नहीं ! राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुनाव, मौसम और नया साल का बोलबाला था ! फौजी किताबों की दाल गल नहीं रही थी उसमे कुछ काला था !

मैंने देखा राजनीति से संबंधित एक किताब का सेवानिवृत्त क़िताबों से कोई विमर्श चल रहा था ! दूर एक रौशनी के फव्वारे के पास व्यंग्य की जुगलबंदी चल रही थी जो धीरे धीरे कव्वाली का रूप ले रही थी ! राजनीति, अर्थशास्त्र, कला, संगीत, सिनेमा, खेल की कई किताबें प्रमुख घटनाओं की किताब को ध्यान से सुन रही थी ! पास में ही हिन्दी और धर्म एक साथ नाच रहे थे ! नाचते नाचते वो इतने एक हो गए कि हिंदी और धर्म में भ्रम होने लगा ! समझ में ही नहीं आ रहा था कि धर्म क्या है और हिंदी कौन है ? देखते देखते हिंदी धार्मिक हो गयी और धर्म सिर्फ हिंदी का हो कर रह गया !

एक किताब ने मुझे जो बताया वो बात मुझे पता थी ! उसने कहा देखने की किताब अलग होती है, खरीदने की किताब अलग होती है और पढ़ने वाली किताब बिलकुल अलग ! मेले में उपन्यास, संस्मरण, कहानी-संग्रह, कविता संग्रह, नाटक के साथ इतिहास, भूगोल, ज्ञान-विज्ञान, साहित्य, यात्रा, धर्म, भाषा, जीवन-वृत्त आदि सभी विषयों पर पुस्तकें थीं और ये उनका ही मेला था !

रात भर किताबों के साथ उनकी दुनिया में रह कर मैंने किताबों को थोड़ा और करीब से जाना ! किताबें बहुत कोमल मन की होती है ! पढ़ने का मन न हो फिर भी किसी किताब को कभी ठोकर मत मारिये ! लोगों की ठोकर से किताबें कराहती हैं ! जब आप किसी किताब को बिखरा हुआ देखें उसे समेटने की कोशिश जरूर करें ! किताब से जुड़े हर मामले में कोई न कोई आप का साथ जरूर दे देगा और आप कभी अकेले नहीं रहेंगे ! किताबें ज़िद्दी होती हैं ! दुनिया की हर किताब अपने पढ़े जाने का तब तक इंतज़ार करती हैं जब तक पाठक पढ़ रहे किताब को पढ़ कर ख़त्म न कर दे ! किताबों के पास धरती का धैर्य है ! आप जब भी किताबों से मिलेंगे किताबें कभी आप को निराश नहीं करेंगी ! किताबों में प्रतियोगिता नहीं होती प्रतियोगिता उसे पढ़ने वालों में होती है ! किताबों की आँख नहीं होती वो सबको एक दृष्टि से देखती हैं ! किताबें भोली होती हैं ! पढ़ने वाला अपनी लगाता है वर्ना किताब के पास तर्क शक्ति नहीं होती ! किताबे पढ़ना लिखना नहीं जानती उनके लिए काला अक्षर भैंस बराबर है ! अपने अमेज़न और फ्लिपकार्ट के सपनों के साथ किताबें अब पूरे विश्व में मिलती हैं ! ‘हर किताब, अब विश्वविख्यात’ ये किताबों के लिए नया नारा है !

मेले में सुबह तक मेरी पढ़ी हुई कई किताबें भी मुझसे मिलीं ! पढ़ी हुई किताबों से मिलना बहुत आत्मीय होता है ! पढ़ ली गयी किताब और पाठक के रिश्ते को मैं बाप और बेटी या माँ और बेटी के रिश्ते से कम नहीं मानता हूँ ! किसी किताब को पढ़ कर देखिये, आप को मेरी हर बात सच लगेगी ! किताब और पाठक या पाठिका का अमिट रिश्ता जीवन भर नहीं टूटता है ! पहला पाठक ही हर किताब का पहला प्यार है ! मैं किताबों को एक जीवित भावनाओं का पुलिंदा मानता हूँ ! किताबों में प्राण नहीं होता तो वो हमें हँसाती और रुलाती कैसे ? वो जीवित नहीं होती हैं तो हमारा जीवन कैसे बदलतीँ हैं ? किताबों का मेला नहीं लगता तो हम किताबों से मिलते कैसे ? नयी और पुरानी किताबों से हमारा परिचय कैसे होता ? रात की इस घटना के बाद मुझे एक बात अच्छी तरह समझ में आ गयी है कि हर किताब जाने या अनजाने में आप में एक परिवर्तन जरूर ले आता है ! जैसे पढ़ लिए जाने के बाद किताब एक पाठक पुरानी हो जाती है वैसे ही हम भी किसी किताब को पढ़ने के बाद एक किताब पुराने हो जाते हैं !

सुबह होने लगी थी ! किताबों ने मिल कर मेरे लिए कोरस में ‘हम होंगे कामयाब’ गीत गया और ख़ुशी ख़ुशी मुझे विदा किया ! पुस्तक मेले से लौटते हुए मेरी आँखें पता नहीं क्यों उस बाप की तरह भर गयी थी जो अपनी बेटी को हॉस्टल में छोड़ कर आ जाता है !

मैंने देखा एक पल में सभी किताबें अपनी जगह लौट गयी थीं ! मैं भी अपनी दुनिया में खोने के लिए लौट रहा था ! तभी बाहर से आती हुई एक मानुषी ने मुझसे पूछा ‘बुक फेयर कहाँ है ?’
‘जी ?’ मैं समझा नहीं …! क्या मैं कहीं खो गया हूँ ?’ मेरे मन में ये प्रश्न उठा !
‘बुक फेयर प्लीज ? फेसबुक लाइव करना है, जल्दी कहिये बुक फेयर कहाँ है ?’ उसने मुझे फिर टोका ! वो बहुत जल्दी में थी !
‘यही पुस्तक मेला है !’ मैंने जवाब दिया !
मानुषी ने मुझे ऐसे देखा जैसे साक्षात् प्रेमचंद को देख लिया हो !
क्या पुस्तक मेला और बुक फेयर दो अलग आयोजन हैं ? और अगर ऐसा है तो क्या किताबें ये जानती हैं ? पिंक स्कार्फ़ और स्वेटर उतारते हुए मैं सोचने लगा !
अचानक मानुषी चिल्लाने लगी ‘आए लव बुक्स … आए लव बुक्स !’ और आए लव बुक्स चिल्लाते हुए अंदर की तरफ भाग गयी ! उसे उस किताब का पोस्टर दिख गया था जिसको वो लाइव करने आयी थी ! मैं उसको पुस्तक मेले में जाता हुआ देखता रहा ! क्या पता मानुषी के रूप में अनायास ही मैं भविष्य की किसी लेखिका से सीधा संवाद कर चूका था ! इस कल्पना मात्र से ही मन में गुदगुदी हो रही थी ! मैं किताब के मेले से बच्चों की तरह नाचता हुआ लौट रहा था !

ट्रिविया दास

रेप हुआ तो रेपिस्ट से मिल लिए / फिल्म बनी तो आर्टिस्ट से मिल लिए / गीत बना तो सिंगर से मिल लिए / जिधर भीड़ देखी चल दिए / कोई फोटो नहीं जिससे नहीं मिले / किसी ने कुछ पकाया तो उसे डिश बना के मिल गए / अजनबियों को फ्रेंडशिप बता के निकल गए / शेर को अपना बना लिया / सियार की पीठ ठोक दी / जैसे ही आप मुड़े, हँस के अपनी ही सेल्फी ले ली / वाह रे सोशल जमाना ! यहाँ पहुँचा, फोटो देखिये ! ये खाया, फोटो देखिये ! ये मेरे बगल में खड़े थे, फोटो देखिये ! फोटो के एक फ्रेम में सिमट के रह गया है जीवन अनुभव का विस्तार ! ये ट्रिविया काल है ! सब ट्रिवियल बाते करते हैं ! न पढ़ते हैं, न सुनते हैं, न सोचते हैं, बस टी वी देखते हैं और ट्रीवयल जीते हैं ! एक फोटो फ्रेम में सबका अनुभव संसार समा गया है ! विस्तृत कुछ भी नहीं ! मैं कई ट्रिविया विशेषज्ञ को जानता हूँ जो पचास शब्द में दस लोगों को टैग करते हैं ! ट्रिविया ने सबको अपना दास बना लिया है ! जो हर व्यक्ति, जगह, किताब, फिल्म, कला, संगीत और हर रचना के जादू में एक टूरिस्ट की तरह घुस जाते हैं, अपने पसंद का रायता फैलाते हैं और फोटो खिंचा के निकल जाते हैं ! ऐसे मिस्टर ट्रिविया दास को समर्पित मेरी कुछ ट्रिवियल कविता

ट्रिविया ( एक )

जब थी / मैं था
मेरी / मेरे
कल शाम की बात है /
ये थे, वो थे /
ओह ! मैं भी !

*

ट्रिविया ( दो )

वैसे मैं पिछले बीस-बाइस सालों से उन्हें जानता हूं …
पहली पंक्ति /

कुछ साल पहले उनसे मिला …
इनसे मिला,
उनसे मिला,
गले,
हार …
फोटो !

मैंने कहा कि …
फोटो !
पिछले हफ्ते …
फोटो !
उनका संदेश आया कि …
फोटो !

सुबह …
फोटो !
दोपहर …
फोटो !
शाम …
फोटो !
रात्रि …
फोटो !
मेरे हाथ में …
फोटो !
शुक्रिया ये जी /
शुक्रिया वो जी,
यूं बोले …
मैं बोला
फिर वो बोले,
हम अबोले –
सब पढ़ते हैं !
*

ट्रिविया ( तीन )

ये जी
वो जी
जब ये …
जब वो …
तब से हम /

छह साल पहले
दो दिन पहले
परसों
कल
सब ट्रीवीअल !
*

ट्रिविया ( चार )

बरसों पहले
एक चिट्ठी लिखी
कल छपी
आज सुबह
बहरहाल,
मैं पास में खड़ा हूं !
*

ट्रिविया ( पाँच )

हमारे प्यारे दोस्त
निशांत
विक्रान्त
सूर्यकान्त
सिद्धान्त

मौका मिला
इनके साथ
उनके साथ
सब मैं किया !

सन ’97 अगस्त महीने में,
लगभग साल भर
दोपहर में लंच से पहले …
मैं उन्हें !
मैं,
मैं,
मैं !
छोटे फाॅन्ट में
उनका नाम
बड़े फॉण्ट में मेरा नाम !

मुझे यक़ीन नहीं हुआ,
मुझे मालूम नहीं था …
मैंने सोचा
मुझे लगा
पिछले कुछ सालों से
बीती रात की …

धन्यवाद !
फलाँ बाबु
करीब दो साल पहले …
हम बहुत कम मिले …
लेकिन जब भी मिले …
मेरा / उससे
अफ़सोस … !

और अंत में –
वो होते तो आपको जरूर टैग करते /
मैंने किया …
आपने किया ?

केवल चापाकल,
सब ट्रिवियल !

चुनाव और दंगल

मैं जन्म से नागरिक हूँ, मैं किस राजनितिक पार्टी में जाऊँ इसका चुनाव होने वाला है ! समाचार पाठक ने जबसे मुझे बताया है कि मेरे चुनाव के लिए सभी दल मेरे साथ दंगल करने वाले हैं, मेरी नींद उड़ गयी है ! इंटरनेट पर मैंने देख लिया है देश के करोड़ों नागरिक पहलवान में एक मेरा नाम भी है ! देश के मतदान सूचि में नाम होना किसी महाकाव्य में अपने नाम को देखने जैसा है ! मेरा पूरा नाम, मध्य नाम, अंतिम नाम, आयु, लिँग, जन्म तिथि, राज्य, जिला, शहर, गांव, जन्म स्थान, घर का दरवाजा – नंबर, स्ट्रीट, क्षेत्र, मोहल्ला, डाकघर, पिन कोड, थाना, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, चुनाव आयोग के पास है ! मतदाता सूची में नाम होने की वज़ह से अब मैं इस दंगल से बच नहीं सकता ! बुद्धिमान बुद्धिजीवी लोग वोट देने क्यों नहीं जाते हैं मेरी समझ में आ गया ! हमारे देश में अधिक वजन और मोटापे से ग्रस्त लोगों की संख्या अधिक क्यों है इसका कारण भी मुझे समझ में आने लगा है ! इस चुनावी दंगल के लिए नागरिक पहलवान अपने शरीर के साथ पांच साल की तैयारी करते हैं, और पहलवान से दिखते है ! दंगल में कोई हारना नहीं चाहता ! चुनाव और दंगल, मतलब फिट टू फैट तक की जर्नी और जंगल में मंगल !
मैं उचित शारीरिक स्थिति में हूँ ! सात मिनट में एक मील चल लेता हूँ पर पहलवान के आकार का नहीं हूँ ! सभी पार्टियों के पहलवानों की सूची जारी हो रही है ! उम्मीदवारों की तस्वीर और उनके यश की कद काठी देख कर मुझे डरावने सपने आने लगे हैं ! न जाने क्यों मेरे मन में राजनितिक पार्टीयों द्वारा आम आदमी के साथ अब तक किए गए मोलेस्टेशन का दंगल शुरू हो गया है ! आँख लगते ही अखाड़े में पहुँच जाता हूँ जहाँ मेरी पसलियां टूट जातीं है, घुटने घायल हो जाते हैं और मेरी नींद उचट जाती है ! मुझे अपनी बॉडी कमज़ोर लगने लगी है ! मैं शुद्ध शाकाहारी हूँ और मैंने कभी वज़न नहीं उठाया है !
अगले दिन मैं एक फिटनेस ट्रेनर के सामने बैठा था ! ‘एक नागरिक पहलवान के साथ दंगल करने के लिए हर राजनितिक उम्मीदवार अपने ऊपर बीस से अठ्ठाईस लाख रुपये खर्च कर रहा है ! आप का बजट क्या है ?’ उन्होंने पूछा !
‘जी ? ‘ जिम की इतनी फीस होगी मैंने सपने में भी नहीं सोचा था ! मैं चुप हो गया था ! मुझे गौर से देखते हुए उन्होंने कहा ‘उम्मीदवारों के सामने टिके रहने के लिए आप को नए उपाय सोचने होंगे ! आप का अकॉउंट किस वोट बैंक में है ?’ उन्होंने पूछा ! ‘स्टेट बैंक में’ मैंने जवाब दिया !
‘सबका स्टेट बैंक एक है ! आपका वोट बैंक कौन सा है ?’
मैं ब्लेंक था ! वो संमझ गए कि इस दंगल में मैं नया पहलवान हूँ !
‘नाश्ते में क्या करूँ ?’ सवाल करने की मेरी बारी थी !
‘नाश्ते में विचार कीजिये !’
‘वो तो डिनर में किया था’ मैंने जवाब दिया !
उन्होंने मुझे निहारते हुए जवाब दिया ‘यही प्रॉब्लम है, आप ने ज्यादा विचार किया ! आप कैसा शरीर चाहते हैं ?’
‘मैं बस दंगल जीतना चाहता हूँ !’
‘आप को समय देना होगा !’
‘मेरा पूरा समय ले लीजिये … ‘
‘आप बेरोज़गार हैं ?’
‘जी नहीं मैं लेखक हूँ !’
‘जी एक ही बात है …’ उन्होंने कहा !
मैं अवाक था !
‘रिजल्ट कब से आना शुरू हो जायेगा ?’ मैंने पूछा !
‘ग्यारह मार्च को’
‘जी ?’
‘ओह , बॉडी ? आप की बॉडी अगले चुनाव तक बन जाएगी !’
‘और इस दंगल में ?’
‘इस दंगल में कसरत से शरीर बनाना असंवैधानिक हैं ! इस दंगल में आप बस हमारा साथ दीजिये !’ मेरे फिटनेस ट्रेनर ने कहा स्वस्थ जीवन शैली, व्यायाम, पोषण, आदि का ज्ञान मुझे वोट बैंक में मिल जायेगा ! पूछता पूछता मैं वोट बैंक पहुँच गया ! वोट बैंक स्वचालित रूप से डिफ़ॉल्ट राष्ट्रीय हित है ! इस बैंक को सब लोग संदेह की नजर से क्यों देखते हैं मुझे नहीं पता ! वोट बैंक में ब्याज दर सबसे अच्छा है !
‘आप किस नाम और निशान से अकाउंट खोलना चाहते हैं ?’
‘जी मैं अपने नाम से अकॉउंट खोलना चाहता हूँ !’ वो मुस्कुराये ! मैं भी मुस्कुरा दिया !
वोट बैंक में पता चला आहार के लिए इन्टरनेट और कैशलेस इकॉनमी है ! प्रोटीन गूगल पर है ! यूट्यूब पर हर व्यायाम है ! स्वस्थ शरीर के लिए बस खुश रहना जरुरी है !
अगले दिन सुबह समाचार पाठक ने ओपिनियन पोल में बताया कि चुनाव दंगल में मैं जीत रहा हूँ ! मैं अपनी जीत से चौंक गया ! न मैं बूथ पर गया था न अखाड़े पर फिर बिना दंगल लड़े और अखाड़े पर गए मैं जीत कैसे गया ?

चुनाव और दंगल

कैशलेस इकॉनमी का पहला कदम

काले धन पर अंकुश लगाने जब मैं कैशलेस की दिशा में चलने लगा तब मैंने महसूस किया मेरा कोई पीछा कर रहा है ! मैंने देखा साइबर अपराधी बैंकों के डेटाबेस लिए छुप के खड़े थे उन्होंने मुझे देख लिया था और मेरा पीछा कर रहे थे ! नज़र बचा कर साइबर अपराधियों से बचने के लिए मैं पांच सौ और हज़ार की खाली जगह में जा कर छुप गया ! हज़ार पाँच सौ के खाली गढ्ढों में बहुत शोर था वहाँ ड्रग्स, तस्करी, दांव, डकैती, कर चोरी, रिश्वतखोरी सब अपना सर पीट के रो रहे थे ! नकदी जो अभी भी छोटे मूल्य के घरेलू भुगतान में काम आ रहा था, मुझे साइबर अपराधियों से छुपते देख लिया और रेंगता हुआ मेरे पास आ गया ! ” जरा सोचो, आपकी कोई लीकेज और भ्रष्ट practices हो तो याद करो ” नकदी मुझसे फुसफुसा के बात करने लगा ! “व्हाट ?? ” मैंने चिढ के कहा ! ” जरा सोचो, आपकी कोई लीकेज और भ्रष्ट practices हो तो याद करो ” नकदी मुझसे फुसफुसा के फिर बोला ! मैंने उसकी तरफ देखा और कोई जवाब नहीं दिया ! हम दोनों की नज़रें मिलीं और एक साइलेंट पल बीत गया ! वो बस मुझे मुस्कुराता हुआ घूर रहा था ! ” डिजिटल प्रणाली का कोई मुकाबला नहीं है फिर भी मुझे डिजिटल लेनदेन से क्यों डर लगता है ? ” मैंने पूछा ! ” यहाँ बहुत सी बातें अवैध हैं ” नकदी ने कहा ! ” डिजिटल लेनदेन से डरते क्यों हो ? कैशलेस इकॉनमी में और कोई रास्ता नहीं है ” मैंने इशारे से साइबर अपराधियों की तरफ़ इंगित किया ! उसने मुझे ऐसे देखा जैसे वहां कोई न हो ! ” जरा सोचो, आपकी कोई लीकेज और भ्रष्ट practices हो तो याद करो ” नकदी मुझसे फुसफुसा के तीसरी बार फिर बोला ! मैं समझ गया नकदी नोटबंदी से डिप्रेस्सेड हो कर अपना मानसिक संतुलन खो रहा है !
नकली मुद्रा के खतरे से बचते हुए सामने से किसी देश की एक कैशलेस अर्थव्यवस्था चली आ रही थी ! उसके साथ क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और ऑनलाइन बैंकिंग भी चल रहे थे ! सफेद और शुद्ध अर्थव्यवस्था देखने में बहुत सुंदर लग रही थी ! नकदी और मैं हज़ार पाँच सौ के जाने से बने गड्डों में साइबर अपराधियों से बचने के लिए ये विद्रूप तमाशा देख रहे थे !
” उठो, देखो एटीएम में पैसा आ गया है ! सब अपना कार्ड स्वाईप करने जा रहे हैं ! जाओ बैंक से पैसे भर लाओ ” पत्नी ने जगा दिया और कैशलेस इकॉनमी का मेरा डरावना सपना टूट गया ! बैंक जाने के लिए जब मैं घर से निकला तो बाहर लेन – देन का कर्कश रिकॉर्ड बज रहा था ! बैंक की लंबी यात्रा के लिए पाँव नहीं उठ रहे थे …

रामनवमी से कैशलेश इकोनॉमी तक

कैशलेश इकोनॉमी

आठ नवंबर को आठ बजे की उद्घोषणा के बाद नवमी तिथि से सब कैशलेस होना शुरू हो गए, राम का नाम ले कर नवम्बर नवमी से नए रामराज्य की शुरुआत हो गयी ! नए रामराज्य की यात्रा रामनवमी से कैशलेश इकोनॉमी तक की है ! पुराने रामराज्य में ज़ुबान एटीएम से कम नहीं था, जो बोल दें मिल जाए ! इसीलिए रामायण में चरित्र वरदान दे और ले रहे थे, कहीं एटीएम का कार्ड नहीं दिखता, कहीं एटीएम का कियोस्क नहीं दिखता, बस सब जुबानी चलता था ! शिक्षा देनें वाले वशिष्ठ गुरूजी भी बच्‍चों के सिर के हिसाब से गुरू दक्षिणा धान – चना – मुर्रा – लाई के रूप में ले लेते थे ! पुराने रामराज्य में कैशलेश इकोनॉमी थी और सब राम भजते थे ! ज्यादातर कैशलेस ट्रांजैक्शन के लिए यूजर्स को अच्छी स्पीड वाले इंटरनेट की जरुरत होती है, राम राज्य में अयोध्या से पंचवटी तक पूरा जंगल ही वाई फाई था ! रामराज्य में शबरी के बेर की क़ीमत ,राम सेतु बनाने में बानरों की तनख़्वा, नाँव के केवट का शुल्क सब कैशलेस हुआ ! वनवास में सीता राम और लक्ष्मण के पास लगभग कोई लगेज नहीं था क्योंकि वो कैशलेस थे ! वन जाते समय उर्मिला ने तो अपना कार्ड भी लक्ष्मण को देकर कैश की चिन्ता से निश्चिन्त हो कर सो गयीं ! रामराज्य में राम भरोसे राज्य को छोड़ कर भरत भी कैश की चिंता से मुक्त हो गए और गद्दी पर खड़ाऊँ रख दिया ! पुराने रामराज्य में कैशलेश इकोनॉमी को लेकर संसद में कभी हंगामा नहीं हुआ ! रामराज्य में कैशलेस इकॉनमी से आम लोगों को कभी परेशानी नहीं हुई, जन आक्रोश आंदोलन नहीं हुआ ! कैशलेस ट्रांजैक्शन के लिए स्मार्टफोन, पर्सनल कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्टिविटी की जरूरत तो होती है पर नए रामराज्य में कैशलेश इकोनामी की सब बेसिक समस्याएं हनुमान जी दूर करेंगे !

कैशलेस देश बनने से काले धन को रोकने में काफी हद तक कामयाबी मिलती है जैसे लंका पहुँच के हनुमान जी को पता चला रामराज्य का सारा कालाधन सोने की लंका में था और उन्होंने आग लगा दी ! नए रामराज्य में अपनी लंका अपने सोने से बनाने में जनता जुटी है ! कैशलेस इकॉनमी में बैंक के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के जरिये लेन-देन करने में वक्त भी बचता है, जिसे हम लाइन में खड़े – खड़े काले धन का राम नाम सत्य हो कह कर बिता सकते हैं, कैशलेस इकॉनमी में दो चार घंटे का कोई मोल नहीं ! रामराज्य में साइबर सिक्योरिटी मजबूत थी ! फिर भी डेटा प्रोटेक्शन में सेंध मार के थोड़ी गड़बड़ी रावण ने कर दी और रामराज्य की लक्ष्मी सीता को ले कर भाग गया पर वो भी जरुरी था, नहीं तो साइबर क्रिमिनल रावण मरता कैसे ?

मानो तो देव नहीं तो पत्थर ! जो भी चाहें नाम दे दें, प्रकृति कैशलेस इकॉनमी से ही चलती है ! पृथ्वी से बनी गंध, जल से बनी रसना, तेज़ से बनी आँखें, वायु से स्पर्श बना, आकाश से बने श्रुति और शब्द ! पंचभूतों से बनी हमारी पाँचों इन्द्रियाँ भी कैशलेस ही चलती हैं ! कैशलेश इकोनॉमी की माँग ने सिद्ध कर दिया कि जीवन और दुनिया के माध्यम से कैश चलता था, कैश से दुनिया और जीवन नहीं चल सका !

कैशलेश इकोनामी के राम राज्य में सभी पुरुष मात्र एक कार्ड – व्रती थे ! इसी प्रकार स्त्रियाँ भी मन, वचन और कर्म से अपने एक कार्ड से ही अपना हित करने वाली थीं ! कैशलेस इकॉनमी के नए रामराज्य की अर्थव्यवस्था में सिर्फ़ राम के अर्थ की व्यवस्था है बाकी सब ठन – ठन गोपाल !

कैशलेश इकोनॉमी का सपना लिए नए रामराज्य का नकदहीन समाज कैशलेस दुःख और कैशलेस दर्द में छटपटाने लगा है ! आये थे रामभजन को ओटन लगे कपास ! जनता न कैश की रही न कार्ड की ! ये सच है नकदहीन समाज में दण्ड केवल फकीरों के हाथों में है और हमारे बीच भी अब कैशलेश इकोनॉमी का एक फ़क़ीर हैं !

कैशलेश इकोनामी का राम राज्य होते ही सर्वत्र हर्ष व्याप्त हो जाएगा, सारे भय – शोक दूर हो जाएँगे एवं दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति मिल जाएगी ! कोई भी अल्पमृत्यु, रोग – पीड़ा से ग्रस्त नहीं रहेगा, सभी स्वस्थ, बुद्धिमान, साक्षर, गुणज्ञ, ज्ञानी तथा कृतज्ञ हो जाएँगे !

राम राज्य में सब कैशलेस थे पर कोई थैंकलेस नहीं था ! नए रामराज्य में सब थैंकलेस हैं अभी कैशलेस कोई नहीं ! जहाँ कैशलेस इकॉनमी में चिल्लर सिर्फ़ मोबाइल एप्लीकेशन है वहाँ नया रामराज्य पूरी तरह से कैशलेस नहीं बन पायेगा, लेकिन धीरे धीरे राम भरोसे कुछ हद तक होमलेस और जॉबलेस के साथ नया रामराज्य कैशलेस भी हो जाएगा !

सर्दी की वापसी

मौसम

जबसे ऑस्कर विजेता अभिनेत्री जुलिया राबर्ट्स ने हिंदूू धर्म अपना लिया है मेरा मौसम पर से विश्वास उठ गया है ! मैंने सोचा इससे पहले ये सर्दी का मौसम गर्मी में बदल जाए इसे लौटा देना चाहिए ! इस बीच वापसी की अफवाहें काफी तेज हो रही थी, कोई घर वापसी कर रहा था तो कोई नोट ! कन्फर्म ट्रेन टिकट, क्रिकेट, फिल्म, जेल, सत्ता, संन्यास, टेलीविजन, राजनीति, ऋण, धर्म, पुरस्कार से ले कर दिए गए ज़ुबान तक की लोग वापसी कर रहे थे ! मैं भी सर्दी वापसी के लिए एक दिन मौसम डिपार्टमेंट में पहुँच गया ! सर्दी की वापसी के लिए मैं मौसम केंद्र में समय से पहले पहुँच गया था ! कोई लाइन नहीं थी ये देख कर मैंने अपनी ज़ेब टटोली और खाली जेब से मुझे याद आया मैं बैंक में नहीं हूँ ! एक लाईन से निकलकर दूसरी लाईन में लगना ही जीवन का सार है, भारतीय नागरिक के रूप में ये बात मैं अच्छी तरह जानता हूँ ! तब तक काउन्टर खुल गया था !
” मुझे सर्दी से शिकायत है, सर्दी की वापसी करनी है ” मैंने कहा !
” आप हमारे ऑनलाइन स्टोर से खरीदे गये उत्पादों से बहुत खुश होंगे ” जवाब आया !
” हर विवरण झूठा है, मौसम की मार से मैं परेशान हूँ ,आप मुझसे मेरी सर्दी वापस ले लें, मुझे सर्दी नहीं चाहिए ” मैंने कहा !
” आपने इस सर्दी के लिए कितने रुपये भरे थे ? ”
” मैंने तो रुपये नहीं भरे ! मुझे लगा मौसम मुफ्त में मिलता है ”
” रुपये नहीं भरे ? ”
” नहीं ”
” ठीक है फिर फॉर्म भरिये ”
यंग मैन ने मुझे ग़ौर से देखा और बोला ” सर्दी साथ लाये हैं ? ”
” जी ” मैंने कहा !
” कहाँ है ? ”
” नाक में भरा है ” मैंने भारी आवाज़ में जवाब दिया !
” ये क्या हाल बना रखा है, कुछ लेते क्यों नहीं ? ” अचानक उसके मुँह से ये सुना सुनाया वाक्य निकला ! सर्दी से मेरी आँखें भर गयी ! उसने समझा मैं भावुक हो गया हूँ ! उसने मुझे टच किया और वो टच्ड हो गया, पर रोने की जगह छींकने लगा ! ” सर आपकी सर्दी स्ट्रांग है ” कहते हुए उसने रुमाल निकाला ! देखा देखी मैंने भी रुमाल निकाल लिया ! रुमाल के साथ हम दोनों ने लगभग एक ही एक्शन किया !
” आप क्रेता हैं या विक्रेता ? ”
” मैं आम आदमी हूँ ”
‘आप’ हैं ?
” जी, मैं हूँ ”
‘आप’ पार्टी कार्ड लाये हैं ?
यंग मैन ने जैसे मेरी तरफ देखा मैं समझ गया कुछ गड़बड़ है !
” मैं आम आदमी हूँ, पर दिल्ली वाला आम आदमी नहीं, देश के कार्टून वाला आम आदमी हूँ ”
मैंने कहा ! फिर लगा आम आदमी कह कर गलती कर बैठा हूँ ! भक्त हूँ कह देता तो शायद काम बन जाता ! आम आदमी या भक्त ? भक्त या आम आदमी ? मेरा ये कॉन्फ्लिक्ट मुझे परेशान करने लगा ! उसने मेरा चेहरा पढ़ लिया !
” क्रेता और विक्रेता के बीच एग्रीमेंट के बाद जो पंजीयन शुल्क जमा होता है, वह वापसी के समय वापस किया जाना चाहिए। जब दोनों पक्ष संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए आते हैं उस दौरान पंजीयन के लिए जमा राशि की रसीद कार्यालय में पेश करनी होती है। उस रसीद नंबर के आधार पर ही क्रेता के खाते में पैसे ट्रांसफर किए जाते हैं। जब से ई-रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू हुई है, तब से किसी भी वापसी में आए-दिन कोई न कोई समस्या आ रही है। सॉफ्टवेयर में त्रुटि के कारण कई क्रेताओं को पंजीयन राशि वापस नहीं मिल रही है। रजिस्ट्री होने के बाद भी पैसे वापस न मिलने पर महानिरीक्षक,पंजीयन एवं मुद्रांक के लिए दिल्ली कार्यालय आवेदन करना होता है। उसके बाद भी पैसे मिलने की प्रक्रिया काफी लंबी है। इसके चलते अपनी रकम पाने के लिए क्रेता को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है ! आपकी सर्दी तो मुफ्त की है हम ये नहीं ले सकते ”
एक सांस में वो सारी बात कह गया ! मुझे कुछ समझ नहीं आया ! मेरे भीतर से भक्तिकाल की आवाज आयी और मैं चीख पड़ा ” यह लैं अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहिं नाच नचायो, मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो ” यह सुन कर यंग मैन मुझे आश्चर्य से देखने लगा और मुस्कुराने लगा ! ” आप तो भक्त हैं ” उसकी ये बात सुन कर मैं सिहर गया !
” सर ये इ – कॉमर्स का मामला है ! आपको अच्छी तरह समझना होगा ” मुस्कुराते हुए उसने कहा ” वापसी का अनुरोध फॉर्म भरिये, यह है वापसी की प्रक्रिया ” एक सी डी देते हुए उसने आगे कहा ” कल इसे देख कर आइयेगा ! यह कार्यक्रम सर्दी के मौसम की आम जानकारी देता है और साथ में ये फॉर्म फिल कर के लाइयेगा ” मैंने जी के आकार में सर हिलाया ! ” हम भक्तों के लिए नया मौसम ले के जल्द ही वापस आ रहे हैं, आपका स्वागत है ! ” उसने कहा ! मैंने भी सोचा रिटर्न और रिफंड से किसका मन भरता है, लोग करते ही रहते हैं ! पर आँखों से निकल कर आँसुओं की वापसी कभी नहीं हुई, आँसू चाहे दुःख – सुख के हों या सर्दी के ! पता नहीं मैं हंस रहा था या रो रहा था ! बैंक में पैसे नहीं थे और मेरी जेब खाली थी, सर्दी से मेरा बुरा हाल था ! मैंने मौसम विभाग में यूँ ही टाइम पास के लिए लाइन लगाने की ठानी, बदले में मुझे एक फॉर्म भरने के लिए मिला और मौसम की जानकारी वाली जुलिया राबर्ट्स की कोई सी डी !