प्रिंटिंग मिस्टेक

मीटू क्या लिखता है वाह ! एक अधेड़ आदमी ने ‘खोल दो’ कहानी पढ़ने के बाद मुझसे कहा ! मी टू ? कौन मी टू ? मैं हैरत में था ! मेरी हैरत से वो और बौखला गए ! तुम मीटू को नहीं जानते ? मीटू बदनाम है लेकिन लिखता बहुत अच्छा है ! मीटू जब लिखने बैठता है तब वो औरत – मर्द के रिश्तों की उन परतों को उघाड़ने लगता है जहां से पूरा समाज ही नंगा दिखने लगता है ! इतने बड़े लेखक को नहीं जानते जिसने ‘खोल दो’ लिखा ? तुम जानते नहीं ‘मीटू’ की औरतें बोलने लगी हैं ? उन्होंने मुझसे ये बात अपनी डबडबाई आँखों से देखते हुए कही और कहानी दिखाया ! मैंने देखा कहानी में प्रिंटिंग मिस्टेक से मंटो मीटू हो गए थे ! मैं समझ गया ! मंटो को भाईसाहब मी टू कह रहे थे ! मंटो को एक और पाठक मिल गया है और मरने के तिरसठ साल बाद भी मंटो प्रिंटिंग मिस्टेक से ‘मीटू ‘ बनकर औरत के यौन अधिकार के मुहीम में ज़िंदा हो उठा है ! मैं स्तब्ध था ! 

जाल और जंगल

किसी भी शुभ कार्य को आरंभ करने से पहले सोशल मिडिया में हैशटैग का चिन्ह बनाकर उसको शेयर करने का बहुत महत्व है ! मान्यता है कि ऐसा करने से कार्य वायरल होता है ! हर – हर महादेव में हैशटैग लगा कर देखिये, बात सीधे कैलाश पर्वत पहुँच जायेगी !

ऑनलाइन जंगल में ट्रेंड के सब गुलाम हैं ! इंटरनेट पर जो भी ट्रेंड करता है उसको सब लोग फॉलो करना चाहते हैं और उससे जुड़ना चाहते हैं ! सोशल मीडिया में हैशटैग लगाकर किसी भी सामग्री को साझा करने का मुख्य उद्देश्य यही होता है कि वह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँच सके और बदले में ज्यादा से ज्यादा लोग उनको फॉलो कर सकें !

हैशटैग की जाल में फंसने के बाद कबूतर बहुत उदास हो गए क्योंकि वे जानते थे कि उनका अंत निकट था ! सोशल साइट पर कबूतरों के नेता ने उन्हें हिम्मत न हारने की सलाह दी ! हैश – टैग में जाल की तरह चार प्रकार की रेखाएं होती हैं, जिनका आकार एक समान होता है ! कबूतरों ने जाल को करीब से देखा, जाल हैशटैग का एक चादर था !

एक बुद्धिमान कबूतर जिसे एकता की शक्ति का पता था, उसने जाल के नेता से बात की ! हैशटैग ने राज़ की बात कही कि यदि वे एकजुट होकर जोर लगाएं तो हैशटैग को लेकर उड़ सकते हैं ! सभी कबूतरों ने एक साथ जोर लगाया और हैशटैग के जाल को ही लेकर उड़ गए ! कबूतरों को हैशटैग के साथ उड़ता देख इंटरनेट बहेलिया हाथ मलता रह गया !

# ये कहानी #हैशटैग की है, इससे जुड़े असंख्य शब्द या किसी एक मुहीम की नहीं !

यू. पी में यू.एफ.ओ. की प्रेस विज्ञप्ति

Illustration : Sushil Doshi

यू पी में अनआइडेंटीफाइड ऑब्जेक्ट देख कर किसी ने गोली चला दी है, इसलिए यू.एफ.ओ की तरफ से यूपी में तिवारी एनकाउंटर पर कुछ बातें साफ़ हो जाए तो अच्छा है !

मैं उड़नतश्तरी का ब्राण्ड एम्बैसडर बोल रहा हूँ ! गोमती नगर इलाके में हमारा कोई यू.एफ.ओ एसयूवी यान नहीं उतरा था ! रुपये के इतने निचले स्तर पर हम नहीं उतर सकते इसलिए उत्तर प्रदेश तो क्या पूरे भारत में हम कुछ वर्षों तक नहीं उतरेंगे !

हमारा यान भारतीय पैट्रोल से नहीं उड़ता कृपया अपने शहरों के पेट्रोल का भाव हमसे न पूछें !

पत्रकार बहुत व्यस्त होते हैं इसलिए इस प्रेस विज्ञप्ति में इस घटना से जुडी वास्तविक तथ्य जैसे उत्पाद, सेवाएँ, लोग, लक्ष्य, उद्देश्य, योजना आदि को सम्मलित नहीं किया गया है ! बुलेट में कोई आवाज नहीं होती ! यह बुलेट का ‘प्रभाव’ है जो ‘ध्वनि’ बना रहा है ! ठोस तथ्यों का भाप बनाने से बचिए !

यह सच है कि एप्पल शरीर के लिए आवश्यक मिनरल्स, और पोटेशियम तत्वों को भरपूर मात्रा में उपलब्ध कराता है लेकिन मत भूलिए गोली लगने के बाद एप्पल किसी काम नहीं आता !

पृथ्वी पर सब सरकार के हाथ में नहीं होता, बहुत कुछ मिल्की – वे के बग़ल वाली गैलेक्सी के इंटरनेशनल मार्केट के हिसाब से होता है !

बैकुंठ धाम से हमारी कोई भी सवारी अंतरिक्ष के लिए उड़ान नहीं भरती है ! आप की आत्मा जानती है वो कहाँ जाती है !

कहानी कहने का गुण सिर्फ पृथ्वी वासियों के पास है ! मामले को अलग अलग चश्मे से देख कर कहानी कहते हुए सिर्फ मनुष्यों की आँखें भींग जाती हैं और आवाज़ रून्ध जाता है !

रात का समय त्वचा को आराम, सुकून देने और इसे हेल्थी रखने के लिए होता है ! चमड़ी मोटी न हो तो रात को विचरण न करें नहीं तो बन्दुक की किरणों का विकरण आपकी जान ले सकती है !

अज्ञात वस्तुओं को आकाश में और पृथ्वी पर उड़ता देखने का दावा करने वालों की संख्या बढ़ रही है ! हम पृथ्वी पर विज्ञान के प्यार को प्रोत्साहित करना पसंद करते हैं ! जब तक बुलेटप्रूफ कार में आप सवार नहीं हो पृथ्वी पर घूमना ठीक नहीं !

कल्पना लोक में ब्रेकनेक गति के साथ उड़ने वाले रक्त प्रेमीयों गर्व से कहो कि हम सब यू एफ ओ हैं ! जय अंतरिक्ष !

ह्रदय परिवर्तन

जैसे ही मैंने अपना ह्रदय महंगे पैट्रोल को देने के लिए निकाला कि फोन की घंटी बजने लगी, अपना ह्रदय वहीं रख कर मैं जरुरी फोन को अटेंड करने लगा ! जब तक फोन की बात ख़त्म हुई कोई मेरा ह्रदय ले कर चला गया था और अपना साफ़ ह्रदय छोड़ गया था , पैट्रोल की बढ़ी कीमतों की वजह से मेरा ह्रदय परिवर्तन हो गया था ! 

भजन का वजन

मेरा ह्रदय ये जानता है कि भजन के वजन की कमी का कारण पैट्रोल के बढे हुए दाम हैं, पर अपनी भौतिक जरूरतों के इन्द्रियों से हार गए भजन के वजन की चर्चा किस मुँह से अपने भजन मंडली में करूँ, ये सोच कर नर्क भोग रहा हूँ ! अपनी इनकम डबल करने के लिए मैं भजन गाता हूँ, मंडली को कहीं ये पता चल गया तो मेरी भक्ति पर सब हसेंगे !

खाली और खुले हाथों से अपने भजन का वजन एक हफ्ते से बढ़ाने में लगा हूँ ! भजन का वजन कम होते ही भजन की लम्बाई भी कम हो गयी है ! कम वजन के मेरे भजन कम दूरी के हो कर ईश्वर तक पहुँच नहीं पा रहे हैं !

नागरिक की हैसियत से उदार नीतियों का वामपंथी भजन, राइटिस्ट का रूढ़िवादी भजन, समझौता वाला सरकारी भजन, एक एक कर के मैंने सब भजन गा कर देख लिया है ! महँगाई पर किसी भजन का असर नहीं हो रहा है ! मेरे कंज्यूमर पडोसी और मोहल्ले के इनवेस्टर्स रात में अच्छे दिन का भजन गा ही कर रहे थे कि सुबह महँगाई बेकाबू हो गई !

देश में गाँव के गरीब और गरीबी रेखा के नीचे भजन करने वाले लोगों के वजन को घटता देख कर अपना वजन बढ़ाने लिए मैंने भजन के साथ उपवास भी शुरू कर दिया है ! दिन भर के पेट का उपवास तो किसी तरह काट लेता हूँ पर रात भर मन में सौतन महँगाई से सहवास का क्या करूँ ये समझ नहीं पा रहा हूँ ? महँगाई मुझे और मेरी भजन साधना को भ्रष्ट कर रही है !

दिन की शुरुआत मैं हल्के-फुल्के भजन से करता हूँ , क्योंकि इससे भजन की भूख बढ़ती है ! सुबह उठते ही कम से कम दो भजन जरूर गाता हूँ ! आज सुबह जैसे ही मैंने भजन गाना शुरू किया, पत्नी मुझे पलट के घूरने लगी मानो मुझसे पूछ रही हो मेरी प्रशंसा में गाये जाने वाले गीत का वजन कम क्यों हुआ ? भजन में वजन की कमी अब पत्नी से भी छुपी नहीं है ! पत्नी बगल में सोयी रहती है इसीलिए मैंने भजन को गुनगुनाना उचित समझा !

आवेग में आकर कोई भी भजन गाने का फैसला ठीक नहीं होता ! उच्चस्तरीय भजन के लिए शरीर को शिथिल और मन को उदासीन करना पड़ता है ! भजन का वजन बढ़ाने के लिए मुझे कुछ घरेलु उपाय अपनाना पड़ा है जिसे आप भी अपना सकते हैं !

घर में देखिए कि बाजार जा कर किन चीजों की खरीदारी करनी है और उन सामानों की लिस्ट बनाइए, जो आपको खरीदने हैं और उनके भजन शुरू कर दीजिये ! लिस्ट बनाने के बाद भजन करने में आसानी होती है ! घर से निकलते ही भजन शुरू कर दीजिये ! ऐसा नहीं करने से खाने पर आपका खर्च आने वाले महीनों में बढ़ने वाला है !

जून में कम बारिश के चलते पहले ही सब्जियों के दाम बढ़ने लगे हैं ! इसके साथ मॉनसून के फेल होने का असर भी महंगाई पर पड़ सकता है ! नागरिकों को मज़बूत मानसून भजन की भी जरुरत है जिसे गा कर मानसून को खुश किया जा सके !

जबसे रेलवे ने किराये में बढ़ोतरी की है, उसका असर मुझ जैसे कंज्यूमर यात्रियों पर हुआ है ! जब भी माल भाड़े में बढ़ोतरी होती है, बाज़ार में सभी प्रॉडक्ट्स और कमोडिटी पर असर पड़ता है, ऐसे हालात में मुझे ईश्वर भजन का नहीं अच्छे और नए रेलवे भजन की जरुरत है जिसे सुनकर रेलवे फ़ौरन अपने भाड़े में कमी कर सके !

इराक संकट भी सामने है, जिससे इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल के दाम बढ़ रहे हैं ! हमें इराक भजन की भी जरुरत है ! शुगर इंपोर्ट पर पाबंदी से डोमेस्टिक मार्केट में इसकी कीमत भी बढ़ रही है ! अब हमें अच्छे और ज्यादा मीठे शुगर भजन की जरुरत है !

पत्नी को खुश करने के लिए पत्नी भजन अब आउट डेटेड है, पत्नी को ‘प्रेमिका भजन’ की जरुरत है ! पत्नी को प्रेमिका मानने में ही क़ानूनी भलाई है ! पत्नी के हक़ में मेरे हर भजन का सीधा प्रसारण हो ताकि पत्नी को पता चले कि मैं किसका भजन गा रहा हूँ ! मेरे भजन को राम चंद्र जी के आधार से लिंक कर दिया जाए ताकि भौतिक भजन से भी उनसे भक्ति बनी रहे !

हर प्रोडक्ट अपने ब्रांड का भजन गा रहा है ! सदियों से गाये जाने वाले भजनों का असर ईश्वर पर नहीं हुआ लेकिन बाजार में कंज्यूमर पर बाजारू भजन का असर हो रहा है ! धीरे धीरे मुझ पर भी भजन का असर होने लगा है ! जिस तरह जीवन में स्वस्थ रहने के लिए सही डाइट का पता होना जरूरी है, उसी तरह भक्ति में हर भक्त को अपने भजन के सही वजन का पता होना भी जरुरी है ! भजन का वजन तर्क पर नहीं, श्रद्धा एवं विश्वास पर अवलंबित है !

महँगाई की मार से मेरे भजन का वजन इतना कम हो चूका है कि मैं भजन कर के बाजार में जब कुछ खरीदने जाता हूँ तो उस वस्तु का मूल्य पहले से अधिक हो चुका होता है ! पिछले एक हफ्ते से मेरे भजन का वजन लगातार घट रहा है ! मेरे भजन की शक्ति इतनी क्षीण हो गयी है कि ‘पत्नी भजन’ का असर पत्नी पर ही नहीं हो पा रहा है !

एक कवि दो पैरोडी

१. पकोड़े की अभिलाषा

चाह नहीं मैं बेरोज़गारों के
बेरोज़गारी में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं संसद में
छन जनता को ललचाऊँ,
चाह नहीं, मन्नतों के चौखट 
पर, हे हरि, डाला जाऊँ
चाह नहीं, देवों के शिर पर,
चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ !
मुझे छान लेना हलवाई 
उस पथ पर देना तुम फेंक,
मातृभूमि में भीख मांगने 
जिस पथ जाएँ बेरोज़गार अनेक !

२.  नागरिक की अभिलाषा 

चाह नहीं मैं बिन गढ्ढों के सड़क पर चल पाऊँ 
चाह नहीं मैं अपनी असहमति कहीं भी दर्ज़ कर पाऊँ 
चाह नहीं मैं देश का अपने गौरव गाथा गाउँ 
चाह नहीं मैं बॉर्डर पर मर जाऊं और झंडे में लिपटा जाऊँ 
मुझे रोक लेना प्रधानमंत्री जी 
उस पथ पर देना तुम फेंक,
हॉकी लेकर दंगा करने 
जिस पर जाएँ काँवरिया अनेक ! 

सआदत हसन मंटो की कहानी ‘टोबा टेकसिंह’ की हास्यानुकृति

टोबा टेक सिंह 1947 से तौबा एक दिन 2047 तक

 ‘टोबा टेकसिंह’ 

बंटवारे के सौ साल बाद पाकिस्तान और हिंदुस्तान की हुकूमतों को ख्याल आया कि कैदियों और पागलों की तरह मंदिर मस्जिद का भी तबादला होना चाहिए, यानी जो मस्जिद हिन्दुस्तान में हैं उन्हें पाकिस्तान पहुंचा दिया जाय और जो मंदिर और गुरुद्वारे पाकिस्तान में है उन्हें हिन्दुस्तान के हवाले कर दिया जाय !

मालूम नहीं, यह बात माक़ूल थी या गै़र माकूल़, बहरहाल दानिशमंदों के फ़ैसले के मुताबिक़ इधर -उधर ऊँची सतह की कान्फ़ेंस हुई ! कमेटियों, उपकमेटियों और मंत्रीय-स्तर के वार्तालापों के बाद आख़िर एक दिन मंदिर और मस्जिदों के तबादले के लिए मुक़र्रर हो ही गया !

अच्छी तरह छानबीन की गई ! वे मस्जिद जिनके मौलवी और संबंधी हिंदुस्तान ही में थे, वहीं रहने दिए गए, बाक़ी जो बचे, उनको सरहद पर रवाना कर दिया गया ! पाकिस्तान से चूंकि करीब – करीब तमाम हिन्दु, सिख जा चुके थे इसलिए मंदिर और गुरुद्वारे को रखने – रखाने का सवाल ही न पैदा हुआ ! हिन्दू – सिख के जितने बचे हुए मंदिर – गुरुद्वारे थे सबके सब पुलिस की हिफाजत में बॉर्डर पर पहुंचा दिये गये !

उधर का मालूम नहीं लेकिन इधर लाहौर के मस्जिदों में जब इस तबादले की ख़बर पहुँची तो बड़ी दिलचस्प गपशप होने लगी !

एक मुसलमान जो बारह बरस से, हर रोज़, बाक़ायदगी के साथ ‘ज़मींदार’ पढ़ता था, उससे जब उसके एक दोस्त ने पूछा, ” मौलवी साब, यह मंदिर क्या होता है ? ” तो उसने बड़े गौरो – फ़िक्र के बाद जवाब दिया, ” हिंदुस्तान में एक ऐसी जगह है जहाँ उस्तरे बनते हैं ! ” यह जवाब सुनकर उसका दोस्त संतुष्ट हो गया !

इसी तरह एक सिख गुरुद्वारे ने एक दूसरे सिख गुरुद्वारे से पूछा, ” सरदार जी, हमें हिंदुस्तान क्यों भेजा जा रहा है, हमें तो वहाँ की बोली नहीं आती ! ” दूसरा मुस्कराया, ” मुझे तो हिन्दुस्तानियों की बोली आती है, हिंदुस्तानी बड़े शैतानी आकड़ आकड़ फिरते हैं ! “

मंदिर मस्जिद के तबादले के फैसले पर एक मस्जिद ने ‘ पाकिस्तान जिन्दाबाद ‘ का नारा इस जोर से बुलन्द किया कि अपनी गूँज से ही ढह गया !

यहाँ सौ साल बाद भी बाज़ मस्जिद ऐसे थे जो मस्जिद नहीं थे, उनमें बहुतायत ऐसे क़ातिलों की थी जिनके रिश्तेदारों ने अफ़सरों को कुछ दे दिलाकर मस्जिदों में रखवा दिया था कि वह फाँसी के फंदे से बच जाएँ ! कुछ मस्जिद समझते थे कि हिंदुस्तान क्यों तक़्सीम हुआ है और यह पाकिस्तान क्या है, लेकिन सही वाक़िआत से वह भी बेख़बर थे, अख़बारों से उन्हें कुछ पता नहीं चलता था और बॉर्डर के पहरेदार सिपाही अनपढ़ और जाहिल थे, जिनकी गुफ़्तगू से भी वह कोई नतीजा बरामद नहीं कर सकते थे ! उनको सिर्फ़ इतना मालूम था कि एक आदमी मुहम्मद अली जिन्नाह है जिसको क़ायदे – आज़म कहते हैं, उसने मुसलमानी के लिए एक अलहदा मुल्क बनाया है जिसका नाम पाकिस्तान है, यह कहाँ हैं, इसकी भौगोलिक स्थिति क्या है, इसके मुताल्लिक़ वह कुछ नहीं जानते थे ! यही वजह है कि वह सब मस्जिद जिनका दिमाग पूरी तरह बिगड़ा हुआ नहीं था, इस मखमसे में गिरफ़्तार थे कि वह पाकिस्तान में हैं या हिंदुस्तान में, अगर हिंदुस्तान में हैं तो पाकिस्तान कहाँ हैं, अगर वह पाकिस्तान में हैं तो यह कैसे हो सकता है कि वह कुछ अर्से पहले यहीं रहते हुए हिंदुस्तान में थे !

एक मौलवी तो हिंदुस्तान और पाकिस्तान, पाकिस्तान और हिंदुस्तान के चक्कर में कुछ ऐसा गिरफ़्तार हुआ कि और ज़्यादा मौलवी हो गया ! झाडू देते – देते वह एक दिन दरख्त़ पर चढ़ गया और टहनी पर बैठकर दो घंटे मुसलसल तक़रीर करता रहा, जो पाकिस्तान और हिंदुस्तान के नाज़ुक मसले पर थी, सिपाहियों ने जब उसे नीचे उतरने को कहा तो वह और ऊपर चढ़ गया ! जब उसे डराया – धमकाया गया तो उसने कहा, ” मैं हिंदुस्तान में रहना चाहता हूँ न पाकिस्तान में, मैं इस दरख़्त पर रहूँगा ” बड़ी देर के बाद जब उसका दौरा सर्द पड़ा तो वह नीचे उतरा और अपने हिंदू – सिख दोस्तों से गले मिल – मिलकर रोने लगा – इस ख़याल से उसका दिल भर आया था कि वह उसे छोड़कर हिंदुस्तान चले जाएँगे !

मस्जिद में एक मौलवी ऐसा भी था जो खुद़ को ख़ुदा कहता था ! उससे जब एक रोज़ बिशन सिंह ने पूछा कि टोबा टेक सिंह पाकिस्तान में हैं या हिंदुस्तान में तो उसने हस्बे – आदत कहकहा लगाया और कहा, ” वह पाकिस्तान में हैं न हिंदुस्तान में, इसलिए कि हमने अभी तक हुक्म ही नहीं दिया ! “

बिशन सिंह ने उस ख़ुदा से कई मर्तबा बड़ी मिन्नत – समाजत से कहा कि वह हुक़्म दे दें ताकि झंझट ख़त्म हो, मगर ख़ुदा बहुत मसरूफ़ था, इसलिए कि उसे और बे – शुमार हुक़्म देने थे !

तबादले की तैयारियाँ मुकम्मल हो चुकी थीं, इधर से उधर और उधर से इधर आनेवाले मंदिरों और मस्जिदों की फ़ेहरिस्तें पहुँच चुकी थीं और तबादले का दिन भी मुक़र्रर हो चुका था !

सख्त़ सर्दियाँ थीं जब लाहौर से हिंदू – सिख गुरुद्वारों और मंदिरों से भरी हुई लारियाँ पुलिस के रक्षक दस्ते के साथ रवाना हुई, संबंधित अफ़सर भी हमराह थे ! वागह के बॉर्डर पर दोनों तरफ़ के सुपरिटेंडेंट एक – दूसरे से मिले और प्रारंभिक कार्रवाई ख़त्म होने के बाद तबादला शुरू हो गया, जो रात – भर जारी रहा !

मंदिर और मस्जिदों को लारियों से निकालना और उनको दूसरे अफ़सरों के हवाले करना बड़ा कठिन काम था ! यह सब करते हुए कोई गालियाँ बक रहा था, कोई गा रहा था क़ुछ आपस में झगड़ रहे थे क़ुछ रो रहे थे , कुछ बिलख रहे थे ! कान पड़ी आवाज़ सुनाई नहीं देती थी ! औरतों का शोर – शराबा अलग था, और सर्दी इतनी कड़ाके की थी कि दाँत से दाँत बज रहे थे !

मंदिर मस्जिदों की अक्सरीयत इस तबादले के हक़ में नहीं थी, इसलिए कि उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि उन्हें अपनी जगह से उखाड़कर कहाँ फेंका जा रहा है, वह चंद जो कुछ सोच – समझ सकते थे, ‘पाकिस्तान : जिंदाबाद’ और ‘पाकिस्तान : मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहे थे, दो – तीन मर्तबा फ़साद होते – होते बचा, क्योंकि बाज मुसलमानों और सिखों को यह नारे सुनकर तैश आ गया था !

बॉर्डर पर पाकिस्तान के अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के मंदिरों की झलकियां देखने के लिए दुनिया भर के मानवाधिकार संगठन इस अदला – बदली पर नज़र गड़ाए थी ! हिंदुस्तान से निकली मस्जिदों में सिर्फ एक तोड़ी गयी थी बाकी सब बुलंद थे !

कराची हिंदू पंचायत जब मंदिरों के खंडहरों को संभाले ट्रक से उतरी तो मंदिरों की हालत देख कर सब दंग रह गए ! सभी मंदिरों का हाल बुरा था ! सभी मंदिर पाकिस्तान सरकार की उपेक्षा का शिकार हो गए थे ! सभी मंदिरों की हालत खस्ता थी, सब जर्जर हो चुके थे !

15 अगस्त को पाकिस्तान में 15 प्रतिशत हिंदू रह गए थे जो अब 1.5 रह गए हैं ! पिछले कुछ वर्षों में लाहौर जैसी जगह पर एक हज़ार से अधिक मंदिर ख़त्म कर दिए गए थे ! ट्रकों में सिर्फ ईंट – पत्थर भरा था ! छोटी दुकानों में धंसा रावलपिंडी का एक मंदिर केवल अपने एक बचे हुए मीनार के कारण अब भी सांसें ले रहा था ! अंदर देवताओं की जगह चावल, दाल और चीनी ने ले लिया था !

जिन मंदिरों में पचास साल से कोई पूजा अर्चना नहीं हुई वे ट्रक से उतरने को तैयार नहीं थे ! उन्हें बहुत समझाया गया कि देखो, अब देवी – देवता हिंदुस्तान में चले गए हैं और अगर नहीं गए हैं तो उन्हें फ़ौरन वहाँ भेज दिया जाएगा ! बचे हुए मंदिर चूंकि बे-ज़रर थे, इसलिए उससे मज़ीद ज़बर्दस्ती न की गई ; उसको वहीं खड़ा रहने दिया गया, और तबादले का बाक़ी काम होता रहा !

जो किसी की भूमि नहीं थी वहां सबने रात में किसी को खड़ा देखा ! सब जानते हैं हिन्दुस्तान पाकिस्तान के बॉर्डर के बीच टोबा टेक सिंह का रहने वाला बिशन सिंह रहता है ! बिशन सिंह ने अकेले रात भर बॉर्डर के बीच अल्लाह – ईश्वर को अपना दुःख सुना कर रोके रखा ! सूरज निकलने से पहले बिना हिले डुले खड़े बिशन सिंह के हलक़ से एक गगनभेदी चीख़ निकली ! इधर – उधर से कई दौड़े आए और उन्होने देखा कि मंदिर मस्जिद जो सौ बरस से दिन – रात दोनों देशों में खड़े थे, अब वे सब नो मेंस लैंड में औंधे मुँह पड़े थे ! ईंट – पत्थर एक हो गए थे ! दोनों देशों के बीच सौ बरस और कई बम विस्फोटों के बाद आज दुश्मन देश के ख़ुदा बिशन सिंह के दुःख की वजह से एक दुसरे से मिटटी में मिल रहे थे ! उधर कंटीली तारों के पीछे हिंदुस्तान था, इधर वैसे ही तारों के पीछे पाकिस्तान, दरमियान में ज़मीन के उस टुकड़े पर जिसका कोई नाम नहीं था, वहाँ मंदिर – मस्जिद पड़े थे !

‘ औपड़ दि गड़ गड़ दि अनैक्स दि बेध्यानाँ दि मुंग दि दाल आफ़ दी पाकिस्तान गवर्नमेंट ! ‘ आज सौ साल बाद मंटो के टोबा टेक सिंह के बिशन सिंह की बड़बड़ाहटें सिर्फ सोशल साइट्स के अपडेट्स हैं !

PS – पाकिस्तान में सबसे ज़्यादा बिकने वाले उर्दू अख़बार ‘जंग’ ने मेरी इस पैरोडी को छापने की इजाज़त मांगी है, मैंने मंटो तक बात पहुंचा दी है वही इस कहानी के मालिक हैं !

पाय लागी फ़ुटबॉल

पाय लागी फ़ुटबॉल

मैं फ़ुटबॉल से थोड़ा अपसेट हूँ ! फुटबॉल को जिस काम को करने के लिए रोका जाए वो जानबूझकर उस काम को करता है ! फ़ुटबॉल बार – बार इलेक्ट्रिक प्लग की तरफ जाता है ! फुटबॉल को लगता है प्रॉब्लम मुझमे है और मैं फूटबाल की कोई बात नहीं मानता ! फुटबॉल की इन हरकतों से गुस्सा आने पर मैं फूटबाल की पिटाई कर देता हूँ और उसे बाथरूम में बंद कर देता हूँ !

मैं सुबह ब्रश करने से लेकर नाश्ता करने और स्कूल जाने तक हर काम मोबाइल पर फ़ुटबॉल देखते हुए ही करता हूँ ! मेरे माता – पिता मल्टी नेशनल कंपनी में काम करते हैं ! वे अक्सर घर पर दफ़्तर का काम करते हुए अपना मोबाइल मुझे पकड़ा दिया करते हैं ताकि मैं उनके काम में बाधा न बनूँ ! फ़ुटबॉल मोबाइल से निकल कर मेरे दिमाग में टप्पे खाने लगता है !

मैं जहाँ भी जाता हूँ फ़ुटबॉल लुढ़कता हुआ मुझ तक पहुँच जाता है ! जहाँ वो नहीं लुढ़क पाता वहां वो किसी अजनबी से किक की मदद ले लेता है ! ऐसा वो कैसे करता है मुझे नहीं पता ! पर वो लुढ़कता हुआ हमेशा मेरे आस पास ही रहता है !

मोबाइल पर कल रात मैं करीब बारह घंटे तक लगातार फुटबॉल खेलता रहा, या शायद इससे भी ज्यादा देर तक मुझे ठीक से याद नहीं है ! मुझे बस इतना याद है कि शाम को चार बजे से मैंने वीडियो गेम खेलना शुरू किया था और जब खेलना खत्म किया था उस वक्त सुबह के करीब साढ़े पाँच बजे थे !

मेरी आंख सुबह देर से खुली ! स्कूल जाने की जल्दबाज़ी में हर काम मैं हड़बड़ी में कर रहा था ! कभी दूध का मग टेबल से गिर रहा था तो कभी जूते के खुले फीते उलझने के कारण मैं गिरते – गिरते बच रहा था ! मुझे स्कूल पहुंचना था और मैं लेट हो रहा था ! फुटबॉल यह सब देख कर हंस रहा था !

अपने ऊपर फुटबॉल को हँसता देख कर मुझे गुस्सा आ गया ! फ़ुटबॉल जानता है हमारी भावनाओं का हमारे शरीर से सीधा कनेक्शन होता है ! वो ये अच्छी तरह जानता है कि हम जो महसूस करते हैं उसका असर हमारे पूरे शरीर पर पड़ता है !

मैंने अपनी पिता की तरह फुटबॉल को कड़ी नज़रों से देखा !
‘ फुटबॉल के एडवाइस की कोई वैल्यू नहीं है ‘ ये कहता हुआ फूटबाल मेरी तरह पलंग के नीचे लुढ़क गया !
‘ तुम मुझसे सजेशन और एडवाइस देना बंद करो ” मैं अपनी माँ की तरह चीखा !
‘ तुम बैक आंसरिंग बहुत करते हो ‘ फूटबाल ने पलंग के नीचे से आवाज़ दी !
सिचुएशन को देखते हुए मैं स्कूल बस की तरफ भागा ! मेरे दिमाग में मेरे पीछे मेरा फूटबाल लुढ़क रहा था !

मेरे पेट के कीड़ों ने मुझे बताया फ़ुटबॉल फुल – टाइम मेरा पर्सनल असिस्टेंट बनना चाहता है ! इस बात से मैं डर गया और फैमिली व्हाट्सऐप ग्रुप में सबकुछ मैंने माता पिता से बता दिया !

फ़ुटबॉल में गोलकीपर ही एक मात्र ऐसा खिलाड़ी होता है जिसे गेंद को रोकने के लिए अपना हाथ इस्तेमाल करने की अनुमति होती है, लेकिन वह अपने गोल के सामने पेनल्टी एरिया तक ही ऐसा कर सकता है ! फुटबॉल के इस नियम के आधार पर बिस्तर के पेनेल्टी एरिया में पिताजी घर के गोलकीपर हैं और एक शाम को अपने मोबाइल से फुटबॉल गेम के ऍप को अपने हाथों से उठा कर उन्होंने डीलीट कर दिया !

फुटबॉल को पता था कि मैं पहले से ही ओवरवेट बच्चा था और पूरे समय घंटों बैठ कर वीडियो गेम्स खेलने से मेरा वजन और बढ़ गया था ! मैं ऐसा टीनएजर बन रहा था, जिसके मेडिकल जांच में प्री-डायबिटिक लक्षण पाए गए थे ! इसका मतलब था कि मैं अठारह साल का होने से पहले ही डायबिटिक बनने के कगार पर था ! मेरी समस्याओं की जड़ में वीडियो गेम के इस्तेमाल को दोषी माना गया !

पहले कम्‍प्‍यूटर पर, फि‍र लैपटॉप और अब स्‍मार्ट फोन पर मुझे वीडियो गेम खेलते हुए लगातार कई वर्ष बीत चुके हैं ! मुझे पता भी नहीं चलता और मेरी उँगलियाँ गेम को डाउनलोड कर लेती हैं !

मेरी पहली भावना ‘मैं खुश हूँ’ फुटबॉल को छीन कर मेरी दूसरी भावना ‘मैं व्यस्त हूँ’ के पास भेज देती है ! उसी समय तीसरी भावना ‘मैं चिंतित हूँ’ चौथी भावना ‘मैं नाराज़ हूँ’ से फूटबाल छीन कर मेरी पाँचवी भावना ‘मुझे आश्चर्य हो रहा है’ की तरफ उछाल देती है ! चाहे मैं कहीं भी रहूँ फुटबॉल मेरे दिमाग में हर दिन नब्बे मिनट तक गेमिंग करता है ! मेरी भावनाओं के बाइस खिलाड़ी दिन रात मेरे दिमाग के दोनों हिस्सों में फूटबाल खेलते रहते हैं !

मेरे दिमाग के सेंटर सर्कल में ‘मैं शर्मिंन्दा हूँ’ है ! दूसरी गतिविधियों में शामिल होने के दौरान भी मैं ऑनलाइन गेम के बारे में ही सोचता रहता हूँ ! बेचैनी जैसी असल जीवन की समस्याओं से भागने के लिए मैं वर्चुअल फुटबॉल गेम का सहारा लेता हूँ ! मेरी भावनाएँ कच्चे खिलाड़ी नहीं हैं ! मेरी भावनाएँ एक ही मैच में बेहतरीन फ़ुटबॉल टैलेंट और बेकार एक्टिंग का नमूना एकसाथ पेश कर सकती हैं !

मेरी एक भावना जब कभी सामने वाली भावना से भिड़ती है तो वो ऐसी चोट लगने का ‘नाटक’ करते हैं जैसे कोई बहुत बड़ा हादसा हो गया हो ! मेरे दिमाग में खेल चलता रहता है !

पहले पैंतालीसवें मिनट में ‘मैं ठीक हूँ’ ‘मैं एडिक्ट नहीं हूँ’ ‘फिर मिलेंगे’ सभी भावनाएँ वहां आ गई और गर्मा – गर्मी बढ़ने का ख़तरा पैदा हो गया है ! भावनाओं की भीड़ की वजह से खेल को रोकना पड़ा है ! मैच के पहले हॉफ़ में मेरी भावनाओं की दोनों ही टीमों में से कोई गोल नहीं कर सकीं !

फर्स्ट हॉफ के अंत में मेरी पहली भावना ‘मैं खुश हूँ’ के चेहरे पर कनफ्यूजन साफ – साफ पसरा हुआ है ! वर्चुअल फुटबॉल के ऑनलाइन वीडियो गेम खेलने की आदत ने रियल फुटबॉल को आलसी बना दिया है ! मेरा रिजल्ट आ गया है ! मैं, अपने दिमाग में दुनिया का सबसे बड़ा फुटबॉल स्टार आज अपनी क्लास में फेल हो गया हूँ !

दूसरे हाफ में भी मेरी भावनाएँ खेल रही हैं ! मेरी भावनाओं की हताशा बढ़ रही है ! गेम खेलने का टाइम लगातार बढ़ता जा रहा है ! मेरी विपरीत भावना ‘मैं शांत हूँ’ और ‘मैं दुःखी हूँ’ भी फुटबॉल खेलने लगे हैं ! मैं खेल में खोया रहता हूँ और किसी सोशल फंक्शन में नहीं जाता ! ऑनलाइन खाना आर्डर कर के अपने आप को कमरे में बंद कर लेता हूँ ! मेरी ये कहानी आप सभी के लिये हैं जिन्होंने भारतीय फुटबॉल से उम्मीदें छोड़ दी हैं ! वीडियो गेम की लत से बच्चों के मुँह लगे फुटबॉल को पाय लागी फ़ुटबॉल कहना जरुरी है ! इस युग में घर की मुर्गी दाल बराबर हो न हो घर के वीडियो गेम माँ – बाप बराबर जरूर हो गए हैं !

एहसास का स्वगत 

मंच पर अँधेरा था ! मैंने टटोल कर अपने पाँव रखे ! मंच पर रौशनी आने से पहले मेरा पैर उसकी छाती पर होना जरुरी है ! दर्शकों के लिए ये वो क्षण है जब मंच पर काली को अपने रौद्र रूप में देखेंगे !

मेरी ये कोशिश रहती है कि मेरे पाँव का दवाब संतुलन में रहे ! किसी पुरुष की छाती पर अपना पैर रखने का ये मेरा पहला अनुभव है ! मैं जैसे ही उसकी छाती पर पाँव रखती हूँ मेरे ह्रदय से तनाव और भय का नाश हो जाता है !

मेरी छाती तेज़ धड़कने लगी है ! अगले क्षण मेरी छाती पर स्त्री का पैर आने वाला है ये सोच कर मेरा रोम रोम काँप जाता है ! पता नहीं शिव की छाती पर अपने पाँव रख कर काली को क्या एहसास हुआ पर मेरी छाती पर एक स्त्री का पैर मुझे उन्मुक्त पुरुष बना जाता है !

मंच पर रौशनी आते ही दर्शकों को लगता है कोई जादू हो गया हो ! स्त्री पुरुष का ऐसा साक्षात दर्शन देख कर दर्शक मुग्ध हैं ! दर्शकों की तालियाँ सुन कर लगता है जैसे उन्होंने अभिनेताओं के दिल की मौन धड़कन सुन ली हो !

गुब्बारे में क्या था ?

गुब्बारे में क्या था ?

‘ गुब्बारे में क्या था ? ‘ पत्नी ने जब पूछा तो मेरी इन्द्रियाँ वातावरण सूंघने लगीं ! पत्नी ने ऐसे पूछा जैसे मैंने कोई बैंक लूट लिया हो और गुब्बारे में भर कर घर ले आया हूँ !
‘ क्या था गुब्बारे में ? ‘ मैंने भी पलट कर पूछ लिया ! किसी रिफ्लेक्स एक्शन की तरह ये रिफ्लेक्स प्रश्न था !
‘ तुम पर जो फूटा है उस गुब्बारे में क्या था ? पत्नी ने सख़्ती से पुछा !
‘ मुझ पर जो फूटा है उस गुब्बारे में क्या था ? मैंने भी आश्चर्य से पुछा !

इस बार होली के गुब्बारे में कहीं किसी पर उम्मीद की किरण फूटी थी तो कहीं किसी की किस्मत ! पता नहीं मेरे गुब्बारे में क्या भरा था ? मैं तेजी से सोचने लगा ! गुब्बारा तो मुझ पर फेंका गया था, पर मेरी पत्नी के तेवर से लगा जो मुझ पर फेंका गया था वो उस पर फूट पड़ा है !

मेरी शादी उसी लड़की से हुई है जिस पर मैंने अपने कुँवारेपन में जीवन का पहला और आखरी गुब्बारा फेंका था ! इस पल जो नाक और भौं चढ़ा कर मेरे सामने खड़ी थी मैंने उस पर इत्र और गुलाब जल भरा गुब्बारा फेंका था ! पच्चीस साल बाद पता नहीं कौन सा गुब्बारा मुझ पर फूटा है ! मेरा सफ़ेद बुशर्ट जो पीछे से लाल हो चूका था मेरे सामने था !

‘ ये लाल दाग़ किसी रंग का तो नहीं लगता है ? ‘ पत्नी ने कहा ! गुब्बारे में क्या था इस पर गहन शोध की ज़रूरत इस होली से पहले शायद न आई हो ! अब मेरी पत्नी हर दाग और उसकी छींटों को और क़रीब से देख रही थी, साथ ही साथ रंग, खुशबू और बदबू सभी का आकलन कर रही थी ! ‘ अनार का रस ? ‘ गाढ़े लाल दाग़ को देखते हुए मैंने पत्नी की तरफ़ देख कर पूछा ! ‘ अनार का रस ? ‘ पत्नी ने ऐसे पूछा जैसे उसने सांप देख लिया हो और मुझे वो दिखाई नहीं दे रहा हो ! लाल रंग देख कर मुझे लगा गुब्बारे में अनार का रस भरा था ! मैंने सोचा क्या पता मुझ पर गुब्बारे फेंकने वाले को पता हो कि मैं बीमार हूँ ! मेरी सेहत की फिक्र में उसने गुब्बारे में अनार का रस भर के मुझ पर फेंका हो ! क्या मेरे गुब्बारे में अनार का रस भरा था ?

‘ ये सफ़ेद दाग क्या है ? ‘ सहसा पत्नी चीखी मानो किसी तरल पदार्थ से भरा गुब्बारा घर में उस पर फट गया हो ! क्रोध अगर तरल पदार्थ के रूप में भरा जा सकता तो मेरी पत्नी गुब्बारे में भरी हुई मिलती !

‘ सफ़ेद दाग ? ‘ मैंने भी सवाल दोहरा दिया ! ‘ हाँ – हाँ सफ़ेद दाग ‘ सुनते नहीं क्या ? कान पर कोई गुब्बारा तो नहीं पड़ा है ? पत्नी चिंतित होते हुए बोली ! मुझे पता नहीं क्या हो गया था ! इस होली में मैं लोगों के व्यवहार से गूंगा बहरा ही हो गया था ! मैं अवाक था ! ‘ लाल को अनार कहा, सफ़ेद को माखन मत कह देना ! ‘ पत्नी बड़बड़ा रही थी ! ‘ तुम पर तो कोई अपना काला – धन भी फेंक देगा तो तुमको पता नहीं चलेगा ! ‘ माखन, काला धन ? ‘ मैं चौंका ! क्या मेरे गुब्बारे में किसी का माखन भरा था ?

कल तक माखन एक दुग्ध – उत्पाद था ! गुब्बारे में आज का माखन एक यूथ – उत्पात है ! ‘ माखन रूपी काले धन ‘ को पानी से मिलाया जाए तो क्या होता है ? सर्च इंजन ने बताया ‘ माखन रूपी काले धन’ को अगर पानी में मिलाया जाए तो ‘काला धन’ गाढ़ा हो कर ‘लिक्विड’ फॉर्म में रह सकता है ! पर कई नागरिकों ने कहा कि ‘ माखन ‘ से ‘ काले धन ‘ को इकट्ठा कर गुब्बारे में भरना मुमकिन नहीं और इसके लिए कई दिन तक ‘ काला धन ‘ जमा करते रहना होगा और गुब्बारा भरने लायक ‘ काला धन ‘ जुटाने में कई महीने के ‘ माखन ‘ लग जाएंगे ! माखन और काला धन के चक्कर में मेरे दिमाग का मंथन हो गया ! मुद्दा और पेचीदा तब हो गया जब ये पता चला कि सरकार की नज़र भी ‘काले धन’ पर है और ‘काले धन’ का भी बैंक होता है !

‘ भोले मत बनो ‘ पत्नी ने झूठ बोले कौआ काटे वाली अदा में कहा ‘ तुम्हे हर रंग का मतलब पता है ! दिन भर ‘ केसरिया केसरिया ‘ ठुमरी गाते हो ! मैं जानती हूँ ‘ हरा रंग ‘ मेरी सौत है ! असली माखन चोर तो तुम ही हो ! कहीं कोई गोपी उलाहना देने न चली आये ‘ तुम्हारे लाल ने मुझ पर माखन फेंका है ! ‘ मैंने देखा मेरी पत्नी पर फाग चढ़ गया है ! माखन – माखन करती गज़ब की सूंदर गोपी लग रही थी ! मेरे अंदर गुब्बारे फूटने लगे जिनमे मैंने पच्चीस साल पहले इत्र और गुलाब जल भरा था ! आज की गोपियाँ माखन का हर स्वाद जानती हैं ! ताजा माखन मधुर, हलका, नेत्रों को हितकारी, रक्त पित्त नाशक, तनिक कसैला और तनिक अम्ल रसयुक्त होता है ! बासी माखन खारा, चटपटा और खट्टा हो जाने से वमन, बवासीर, चर्म रोग, कफ प्रकोप, भारी और मोटापा करने वाला होता है ! गोपियाँ जानती हैं बासी माखन सेवन योग्य नहीं ! गोपियों को कन्हैया को जो भाता है वही ताज़ा माखन पसंद है ! इस वैचारिक मंथन से मेरे शरीर में कम्पन होने लगा !

मुझ पर जो फूटा है उस गुब्बारे में क्या था, ये साबित होना बाक़ी है ! उधर, सड़कों पर गुब्बारे पड़ना जारी है ! लड़के भी फेंक रहे हैं और लड़कियां भी ! मैंने सुना लोग एक – दूसरे से कह रहे हैं ‘ गुब्बारा मारने से पहले बता दो भई तुम्हारे गुब्बारे में क्या भरा है ?