मांस पेशी

शेर और गाय के सम्बन्ध जब से खट्टे हुए, जंगल की राजनीती से सड़ांध की बू आने लगी ! जंगल के नगर निगम ने शेरों के लिए मुश्किल खड़ी कर दी ! सुबह शेर को जब मांस की जगह मांस बंदी का नोटिस मिला तो वो खिसियानी बिल्ली हो गया ! मवेशी वध विरोधी आंदोलन के बंदरों ने पेड़ पर से शेर को खंभा नोचते हुए देखा ! शेर पहले ही जीवन संकट के दौर से गुज़र रहे थे, अब उन्हें खाने के भी लाले पड़ गए ! शेरों को पेट भरने के लिए भैंसे का मांस दिया जाता था जिससे तबेले में असहिष्णुता बढ़ गई और भैंस देशद्रोही हो गए ! बदली परिस्थितियों में ज़िंदा रहने के लिए शेरों को बकरे के मांस से ही काम चलाना पड़ रहा है ! मांस की उपलब्धता न होने की वजह से शेरों और शावकों को मुर्गे का मांस दिया जा रहा है ! पहले तो मौसम और बीमारी शेर के लिए ख़तरा बने और अब उनके राशन पर ही हमला हो गया !

‘ बूचड़खानों पर नहीं हमारी किस्मत पर ताला लग गया है ! कहीं मर ना जाऊँ ‘ ये कह कर शक्तिशाली चीता सुबक सुबक कर रोने लगा ! चीता को रोते हुए देख कर सब माँसाहारी भावुक हो गए ! राजधानी में मांस समस्या पर चर्चा के लिए तत्काल कार्यक्रम रखा गया ! सभी जानवर आये ! कार्यक्रम में फलाहार देख कर मांसाहारी निराश हो गए ! आम, खीरा, ककड़ी, लीची, कटहल, खरबूजा, तरबूजा और अंगूर पसरे रह गए ! स्वागत भाषण में सिंह के मुँह से उत्तर प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड, हरिद्वार, जयपुर जंगल का नाम सुनते ही पशु मांस – मांस करने लगे ! ‘ प्रदेश में अगर मांस की किल्लत हुई तो हम दिल्ली से मटन मंगवाएंगे ! ‘ सिंह के इस घोषणा से सब शांत हुए !

‘ हम भी इंसानों की तरह जैसा देश वैसा भेस बनाने की काबिलियत रखते हैं ‘ सिंह की इस बात से सबके तोते उड़ गए ! ‘ चिकन खा कर थक गयी हूँ ! मांस के बारे में ठंडे दिमाग से बहस करना लगभग असंभव हो गया है ! आने वाले दिन घास – फूस की जुगाली करते ही बिताने पड़ सकते हैं ‘ नथुना फुलाते हुए शेरनी ने कहा और सभा छोड़ के चली गयी ! जंगल के एक कबाबी ने शेरनी को रोकने की कोशिश करते हुए कहा ‘ यह एक कृत्रिम संकट है जिसका लाभ मीडिया उठा रही है !’

‘ मित्रों मक्खन लगाने से मटन की गाड़ी पटरी पर फिर से आ सकती है ! ‘ सियार बोला ! अलग – अलग जायका पसंद करने वाली लोमड़ी बोल पड़ी ‘ खुराक में प्रोटीन की अहम भूमिका है. प्रोटीन शरीर में मांसपेशियों का निर्माण करता है इसलिए मीट पर टैक्स लगाने की योजना बन रही है ‘ ! ज्योत्षी तोते ने कहा ‘ शेर का पेट खराब हो तो वह घास पर मुंह मारता है ! शेर जब चिकन खा – खाकर पेट खराब कर लेगा तो फिर वो घास खाना शुरू कर देगा ‘ ! देखते देखते जंगल में मांस पर तीखी राजनीतिक और धार्मिक बहस शुरू हो गई !

शेर ने फिर बोलना शुरू किया ! ‘ पंजे और नाख़ून के रहते हुए भी कमांड और कंट्रोल दोनों ताक़तें कमज़ोर हो रही हैं ! पेट भर मांस के बिना मेरी मति भ्रम हो गयी है ! सूर्योदय से पहले ही आंखें खुल जाती हैं ! रात और दिन एक भिक्षु की तरह जबरदस्त बेचैनी और तकलीफ महसूस करता हूँ ! बिना कुछ बोले अपने मन से उमड़ रही भावनाओं का सामना करना पड़ता है ! अंदर क्रोध, तनाव, झुंझलाहट और निराशा पिघल रही है !’ शेर की आँखें भर आयीं ! ‘प्रकृति बहुत क्रूर है, जो जीवित रहने के लिए फिट नहीं होते हैं वो विलुप्त हो जाते हैं ! ‘ एक कौव्वे ने यह कह कर सबके जले पर नमक छिड़क दिया !

‘ हमें पहले शिकार से रोका गया और अब भूखा रखा जा रहा है ! हम आबादी पर हमला करेंगे और खून की नदियाँ बहा देंगे !’ मांसाहारी जानवरों की ये बात हाथियों ने सुनते ही कहा ‘हम जंगल छोड़ देंगे !’ अजगर और घड़ियाल बोल पड़े ‘हम एक दुसरे को खा लेंगे !’ क्या प्राकृतिक संतुलन जैसी कोई चीज नहीं है ? गाय के चमड़े से बने कोल्हापुर का पारंपरिक चप्पल पहने भालू ने पुछा !

संकट की इस घडी में दुष्ट लोमड़ियों ने नया नारा दिया ‘ मानव अधिकार पशु अधिकार नहीं हैं ‘ ‘क्या हम तैर के मछलियों का शिकार नहीं कर सकते ? ‘ मख्खी ने पुछा ! ‘ हम जंगल से गायब हो जाते हैं !’ चीटियों ने राय दी ! ‘ फिर हम कहाँ जायेंगे ? ‘ कौव्वे कौतुहल वश पूछ बैठे ! ‘ हम शहरों में रहेंगे ‘ कुत्तों ने कोरस में कहा ! ‘ हम शहर में आदमियों के मुखोटे पहन के रहेंगे और अपने पसंद का मांस पेट भर के खाएंगे ‘ एक कुत्ते की इस उक्ति पर मारे गए मति के सभी जानवर सहमत हो गए ! मांसाहारी पशुओं के पास कोई चारा नहीं था ! जंगल खाली हो गया ! मनुष्यों ने जंगल के बचे हुए पेड़ पौधों को गमले में रख लिया और शहर में रहते हुए जिन जानवरों का मुखौटा गिर पड़ा वो पकड़ लिए गए ! कुछ को पिंजड़े में, कुछ को सर्कस में, कुछ को चिड़ियाँ घर में, और कुछ को न्यूज़ चैनेल, सोशल साइट और राजनीती में अपने पसंद का कच्चा मांस खाने के लिए छोड़ दिया गया

जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

१.
मैश – अप के हमाम में बोलो हर हर गंगे
मिडिया के रिवेंज पोर्न में सब के पंगे नंगे
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

२.
बूथ दर बूथ पानी हुआ और दूध का दूध
प्रेग्नेंट थी सरकार अब है अबॉर्शन का मूड
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

३.
छोड़ो सबकुछ पकड़ सको तो सिग्नल को पकड़ो
क्या हो जो सबके कपड़े ले उड़ जाए इसरो
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

४.
उफ़ मतला, मक़ता, काफ़िया और रदीफ़
हैं व्याकरण के सब गुंडे हिन्दू और शरीफ़
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

५.
दो पाटन के बीच में कोई बाकी बचा न जात
रेडियो में कौन कर रहा है अपने मन की बात
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

६.
बुर्क़ा पहन के क्यों न निकली चल रहा अभियान
जाना था शमशान कहाँ चली तू बिजली की रमजान
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

७.
कफ़न में भी जेब होंगे डिजिटल जलेगी लाश
मरघट की करें राजनीति कैश है जिसके पास
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

८.
दो हज़ार का नोट चौक पर मांग रहा था भीख
पूछा तो बोला एक हज़ार से उसने ली है सीख
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

९.
गधे भी हार गए आदमी था लाचार
मान गए गधे अब आदमी करें उनका प्रचार
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

१०.
नए लुक में फिर आएगा हज़ार रुपये का नोट
लाइन में सब खड़े होकर पहले दे दो वोट
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

बसंत के चार यार, लड़का लड़की ग्राहक और बाज़ार / व्यंग्य नाटिका

इस व्यंग्य नाटिका के सभी स्थान और पात्र काल्पनिक हैं !

पात्र –  

लड़का / बसंत ( किसी भी उम्र का एक पुरुष पात्र )

लड़की / मौसम ( किसी भी उम्र की एक स्त्री पात्र )

ग्राहक / सार्वजनिक प्रेमी ( किसी भी लिंग और उम्र का एक पात्र )

बाज़ार / सार्वजनिक प्रेमिका ( मल्टीमिडिया पर्दा / स्क्रीन )

नाटिका में बसंत के एक दिन लड़का, लड़की, ग्राहक और बाज़ार मिल कर ‘एंटी रोमियो स्क्वाड’ बन जाते हैं ! नाटक के अंत में यही सब पात्र मिल कर ‘कामदेव स्क्वाड’ बन जाते है !

 

पात्र  परिचय –

( मंच पर अँधेरा है ! पात्र एक एक कर के प्रकाश वृत में अपना परिचय देते हैं ! पात्र  परिचय में ही पात्रों का आपसी कोनफ्लिक्ट स्थापित हो जाता है )

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

लड़का : ( रोमांटिक रस ) मैं बसंत हूँ ! मौसम का राजा हूँ ! मैं रोमियो रोमांटिक हूँ !

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

लड़की : ( पावरफुल रस ) मैं मौसम हूँ ! बसंत मेरा दास है ! मैं लैला पावरफुल हूँ !

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

ग्राहक : ( कन्फ्यूज्ड रस ) मैं प्रेमी हूँ ! वाओ बसंत !!! कितना ब्यूटीफुल मौसम है ! मेरा मोबाइल कहाँ है ? मैं कन्फ्यूज्ड क्यों हूँ ?

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

बाजार : ( लॉस्ट रस ) मैं प्रेमिका हूँ ! बसंत के अंधे मजनुओं से कैसे बचूँ ? उफ़ ! ठहरो अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लूँ ! मैं लॉस्ट क्यों हूँ ? ( स्क्रीन ऑफ हो जाता है )

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

सभी पात्र एंटी रोमियो स्क्वाड बनकर कोरस में : ( हाहाकार रस )

आ रही सोशल मिडिया से पुकार

ट्वीटर पूछे बार बार

फेसबुक पर स्टेटस अपार

सब पूछ रहे हैं नेता और संत

रोमियो का कैसा हो बसंत ?

( हाथापाई करते हुए ) बसंत के चार यार / लड़का, लड़की, ग्राहक और बाज़ार

फिर अँधेरा !

दृश्य : एक

स्थान / ह्रदय बाज़ार ! बाज़ार में बहुत सारे ह्रदय लटक और झूल रहे हैं !

लड़का : मुझे बसंत दिखाइए
लड़की : बसंत अभी दूर है ! बसंत के लिए आप का बजट क्या है ?
लड़का : आप ने कितने बसंत देखे हैं ?
लड़की : जितने बसंत आप ने देखे है , उतने बसंत मैंने आज ही बेचे हैं !
लड़का : व्यक्ति को अपना बसंत खुद बनाना पड़ता है !
लड़की : आप जिसकी बात कर रहे हैं वो वो चरित्र है !
लड़का : जी ?
लड़की : चरित्र को बसंत से मत मिलाइये ! चरित्र का अलग स्टोर रूम है !
तुम मुझे अपना बजट दो मैं तुम्हे बसंत दूंगी !
लड़का : ये कैसी राजनीती है ? बसंत में मुझे बजट क्यों सुनाया जा रहा है ?
लड़की : बजट से ही बना मेड इन चाइना बसंत सबकी जेब में है ! नेता हो या संत सबकी जेब में टिंग – टिंग बजता चीन का बसंत !
लड़का : मेड इन इंडिया बसंत कहाँ है ?
लड़की : वो अभी बन रहा है ! बसंत बना सके इसके लिए बसंत देखना जरुरी होता है ! इसीलिए देखिये चीन का बसंत ! ( उँगलियों से रुपये गिनने का इशारा करती है )
( पुलकित होते हुए ) इण्डिया में देखिये अनलिमिटेड चीनी बसंत !
लड़का : मेरे बसंत का ब्रांड क्या होगा ?
लड़की : बसंत एक प्रोडक्ट है जिसका अभी तक कोई ब्रांड नहीं !
लड़का : ( वीर रस में ) ईश्वर का दिया कभी अंत नहीं होता , जो ख़त्म हो जाये वो बसंत नहीं होता !
लड़की : मत भूलो तुम जैसे रोमियो के लिए बाहर लोकल गुंडों का अभ्यास चल रहा है !
लड़का : सभी चीजों की तरह प्यार का ये उत्सव भी ख़त्म हो सकता है ! याद है पर्दा प्रथा, दहेज प्रथा, बाल विवाह प्रथा, सती प्रथा …
लड़की : सुनो कामदेव ! कैंडी और कन्फेक्शनरी से भरा अपना दिमाग उठाओ और यहाँ से दफा हो जाओ !
लड़का : क्षमा ! क्षमा ! क्षमा !

फिर अँधेरा !

दृश्य : दो
स्थान / प्रेमिकाओं का इनबॉक्स ! बसंत की शुभकामनाओं से इनबॉक्स भरा हुआ है !

इनबॉक्स / एक
एस एम् एस
लड़का – बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है …
लड़की – शटअप

इनबॉक्स / दो
एस एम् एस
लड़का – तेरे मेरे सपने अब एक रंग हैं …
लड़की – शटअप

इनबॉक्स / तीन
एस एम् एस
लड़का – गाता रहे मेरा दिल …
लडकी – शट – अप / शट – अप / शट – अप ! आर्चीज बकवास बंद करो !

फिर अँधेरा !

दृश्य : तीन
स्थान / रंग बिरंगे फूलों के बीच कहीं खिले हुए एक पीले फूल के अंदर !

लड़की : मौसम का क्या हाल है ? पेट कैसा है ?
लड़का : पीले – पीले कर रहा है सुबह से …
लड़की : क्या पिलाया ?
लड़का : पीला ! येलो !
लड़की : कैसा पीला ?
लड़का : सरसों के फूल जैसा पीला और गीला गीला भी !
लड़की : लगता है मौसम को बसंत हो गया है ! लव जिहाद से बचाना !
लड़का : जी ! एंटी रोमियो स्क्वाड देने का प्लान है
लड़की : मार्किट में आ गया है ए आर एस ?
लड़का : जी !
लड़की : बसंत को धमकाता है ?
लड़का : जी !
लड़की : वाह !
लड़का : बस एक बार मौसम बसंत से छूट जाये तो कोहरे तक जान बचेगी !
लड़की : कोहरा कहाँ है ?
लड़का : बाहर है !
लड़की : कोहरे में बसंत ले के आ गए ? मौसम का ग्लोबल वॉर्मिंग चेक करवा लेना, नहीं तो बसंत तक पीला पीला करेगा बाद में सब झड़ जायेगा !
लड़का : जी
लड़की : पतझर तक की दवा दे दी है !
लड़का : जी
लड़की : ( मुस्कुराती हुई ) मौसम पर कोई नियंत्रण नहीं है …
लड़का : ( भरी आँखों से ) तुम क्या जानो मौसम क्या है ?
लड़की : मैं तुम्हारे मौसम का डॉक्टर हूँ !
लड़का : मुझे नहीं पता था कि प्रेम में पागलों के डॉक्टर को मौसम का डॉक्टर कहते हैं !
लड़की : जी ?
लड़का : मेरा मौसम सोशल मिडिया में खुला बदन घूम रहा था !
लड़की : हम्म
लड़का : डॉक्टर साहेब मेरे मौसम को सोशल मिडिया के बसंत से बचा लो !
लड़की : अगर आप के भीतर बसंत की चाह नहीं है तो आप को मौसमी कलैंडर में भी बसंत नहीं मिलेगा !
लड़का : सोशल मिडिया में बसंत इतना भर गया है कि …
लड़की : कि ? क्या …
लड़का : बस एक बार मेरा मौसम सोशल मिडिया के बसंत से छूट जाये तो अगले मौसमी बसंत के अटैक तक जी जायेगा …
लड़की : दूसरों की प्रोफाइल में रहकर हम अपना मौसम खो देते हैं ! अपने मौसम के लिए हमें खुद जीवन के धूप में खड़ा रहना होगा !
लड़का : ये सब राजनीति बसंत की वजह से हुआ ! सॉरी मैंने इस मौसम में दुसरे प्रोफाइल से फ़्लर्ट किया
लड़की : अब किसी को इनबॉक्स में भी हैप्पी बसंत मत बोलना !
लड़का : बस एक बार मुझे सोशल मिडिया के बसंत से बचा लो मैं कभी दुबारा बसंत में झाकूँगा भी नहीं !
लड़की : रोगी बने रहो ! मत भूलो मैं तुम्हारे मौसम की डॉक्टर हूँ !
लड़का : मौन

फिर अँधेरा !

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !
सभी पात्र कामदेव स्क्वाड बनकर कोरस में : बसंत के चार यार / लड़का, लड़की, ग्राहक और बाज़ार / शुरू करो लव सेक्स और प्यार का व्यापार ! हम नहीं कहते जमाना कहता है !

( धनुष से बाण चलाते हुए ) शुरू करो लव सेक्स और प्यार का व्यापार …

रोमांटिक रस के संगीत में पर्दा गिरता है !

इस प्रयोगधर्मी नाटिका में किसी भी प्रकार के मंच सज्जा की कोई आवश्यकता नहीं है ! रचनात्मक प्रकाश और ध्वनि / संगीत से चारों दृश्य को अलग अलग ढंग से दिखाया जा सकता है !

 

बजट पच्चीसी

Illustration : Anirban Bora

Illustration : Anirban Bora

१.

मैं बजट हूँ !

समझौता के जादू को बजट कहते हैं ! मैं पत्नी के सहयोग से बनता हूँ ! दिन में घर का बजट ही रात में पति बन जाता है ! समय पर बिल भुगतान करना, कर्जों का सही समय पर निपटारा करना और अपने बचत, निवेश लक्ष्यों को हासिल करना भी मेरे ही अंतर्गत आता है ! घर का बजट बनाने का अर्थ है कि आप मुझे बना रहे हैं !

२.

मेरी बजट राशि !
जैसे घूमती हुई पृथ्वी घूमती हुई दिखाई नहीं देती, वैसे ही बजट भी हमारे इर्द गिर्द घूमता है पर मुझे कहीं घूमता हुआ दिखाई नहीं देता ! ऐसा जान पड़ता है कि मैं धन का नहीं, धन मेरा चक्कर लगा रहा है ! मेरे साथ चन्द्रमा और सूर्य भी मेरी धन राशि वृत्त पर चल रहे हैं ! मैं वृत्त में नहीं वित्त में पड़नेवाले विशिष्ट असंख्य तारा समूह में एक हूँ और सबके साथ मेरी राशि भी वित्त है !

३.

बजट का हनीमून !

मुझे अच्छी तरह पता है, बजट बनाने का मतलब है कि आप शादी के फंदे में फंस गए हैं ! मेरी गृहस्थी में बजट की शुरुआत हनीमून से ही हो गयी थी ! हनीमून पैकेज के साथ मेरे अंदर बजट शब्द की गंभीर यात्रा शुरू हो गयी ! शादी के तुरंत बाद मुझे पता चल गया था बजट का हनीमून से नाता है ! जितना बड़ा बजट उतना बड़ा हनीमून पैकेज ! बड़ा पैकेज मतलब बड़ा हनीमून, छोटा बजट मतलब छोटे पैकेज का छोटा हनीमून !

४.

भारतीय बजट !

फ्रांस में धन के आय और उसके व्यय की सूची को बजट कहते हैं ! फ्रांसीसी भाषा के शब्द से जन्मे इस बहुमंजिले शब्द से ही दुनिया लाभ में रहना सीखी है ! फ्रांस में आज बजट के साथ जो भी हो रहा हो, भारतीय बजट में अपनी आय और व्यय की भावना को मुझे बैंक खाते में रखना पड़ता है ! बहुमंजिला बजट को समझने की प्रतिभा मुझसे ज्यादा मेरी पत्नी में है !

५.

चालू खाता !

खाते ! खाते, खाते, खाते और खाते ! खाते – पीते फिर खाते ! खाते – खाते, पीते – पीते ! बैंक और खाते ! खाते – खाते, बैंक – बैंक ! खाते – बैंक, पीते – बैंक ! बैंक – बैंक ! खाते – खाते ! मेरा खाता , मेरा बैंक ! मेरा खाता मेरी खता ! खाता – खता, बैंक बैंक !

६.

बैलेंस बजट !

बजट ब्रह्म है ! वर्ष / केंद्रीय / कोष  / वित्त / मंत्री / आयोग / सरकार / योजना / ग्रामीण / बदलाव / संसद / प्रदर्शन / बिजली / सड़क / गैस / चर्चा / केंद्र / इत्यादि, इत्यादि ! मैं किसी भी शब्द से बजट पर कोई भी वाक्य पूरा कर सकता हूँ ! मेरा बजट मेरा ब्रह्म है ! मेरे बजट का बैलेंस हर शब्द में बना रहता है !

७.

पॉकेट मनी !

मेरे बजट में चार पॉकेट हैं ! दो पैंट के और दो शर्ट के ! मेरे पॉकेट मेरी पत्नी का ही कहा मानते हैं ! मैं सिर्फ उनको धोता और ढोता हूँ ! अपने साल की योजना का इरादा मैं अपने पॉकेट में ही रखता हूँ ! न जाने क्यों जब कभी बजट शब्‍द सुनाई देता है, मेरे हाथ पॉकेट में घुस जाते हैं !

८.

इकोनॉमिक्स !

दिन के, रात के, हफ़्ते के, महीने के, साल के, बजट को पहचानता हूँ ! जैसे घर में मैं अपनी पत्नी को सुनता हूँ वैसे ही टेलीविजन पर सचमुच में वित्त मंत्री को सुनता हूँ ! सिर्फ आलोचना नहीं करता ! मेरे बजट के इकोनॉमिक्स में रुपयों को छोड़ कर फिजिक्स, केमिस्ट्री, हिस्ट्री, जॉग्राफी, बायोलॉजी, स्पोर्ट्स, टेक्नोलॉजी, पर्यावरण, व्यापार, आकाश, पाताल, जंगल, पहाड़, सब है !

९.

मेरी लाइफ !

मेरी लाइफ इस साल भी स्टायलिश लुक के साथ मॉर्डन फीचर्स वाली इंटीरियर की होगी ! मेरे लिए कम बजट में फैमिली कार के बेहतर विकल्प इस साल भी आएंगे ! मार्किट में मल्टी साइज़ के ऑल्टो बजट से मैं इस साल भी बच नहीं पाउँगा ! बेहतर परफॉर्मेंस के साथ-साथ ज्यादा माइलेज के मामले में इस साल भी मेरी लाइफ आगे जाएगी ! किसी भी बजट में मुझे मेरे गंतव्य तक मेरी सरकार पहुँचा ही देगी !

१०.

मेरा हिसाब किताब !

पैसा कैसे काम करता है, इस बात को समझना ही बजट नहीं है ! शादी के कई साल बाद मुझे विश्वास हो गया है कि रोज़ सुबह पूरब में जो उगता है वो बजट है ! दोपहर को दिन भर का बजट आधा हो जाता है ! घरेलू काम की हिस्सेदारी की शेयरिंग ही असली बजट है ! गृहस्थी एक संयुक्त खाता है, बजट का हिसाब किताब दोनों प्राणी को रखना पड़ता है !

११.

बजट का बच्चा !

मेरे बजट के बारह दाढ़ हैं ! इन दांतों के बीच मेरे चार ज्ञान के दाँत हैं जो बजट के नाम पर लोहे का चना चबाते हैं ! दूध के दाँत टूटने तक माता पिता ही बच्चों का बजट हैं ! किशोरावस्था तक जैसे छुप छुप के मैंने इन्टरनेट पर सेक्स समझ लिया था वैसे ही भारतीय बच्चे यू – ट्यूब पर वित्त मंत्रियों को सुन सुन के बजट भी समझ लेंगे !

१२.

बजट पर ज़ुल्म !

बजट के इस पैकेज में हम नए दो हज़ार पांच सौ को विभिन्न स्तर पर भावनात्मक और शारीरिक रूप में ज्यादा जान जायेंगे ! नोटबंदी के नाम पर पिछले ढाई महिने में मुझ पर ना जाने क्या क्या जुल्म हुए, मेरे हज़ार पाँच सौ मेरे नहीं रहे ! लेकिन मैं बजट के साथ रहा किसी के आगे झुका नहीं !

१३.

हास्य बजट !
मुझे अपने बजट को पाने के लिए शेमलेस होना चाहिए था मैं कैश लेस हो गया ! मेरे इस बजट में हास्य बारह परसेंट से पंद्रह परसेंट पर पहुँच गया है ! वर वधु को इस साल भी लिफाफा टिकाया जायेगा ! मैंने सुना है बजट के दिव्यांगों के लिए नए बजट में हेल्पिंग किट्स सस्ते हो गए हैं ! व्यंग – आंगों को मेरा हास्य बजट सुनने पर भाषण के बजट पर लाभांश मिलेगा !

१४.

सबका रुपया एक है !

बजट में पत्नी माँग है और मैं पूर्ती हूँ ! प्रत्येक माह अपने आप को अनुशाशन में रखना होता है तब बजट में लाभ होता है ! मेरी अर्थपूर्ण चाहतों और अनावश्यक इच्छाओं को मुझसे अलग करने को मेरी पत्नी बजट मानती है ! जैसे मेरी आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपया एक है, वैसे ही बजट में अपनी अपनी अठ्ठनी होते हुए भी सबका रुपया एक है !

१५.

लाभ – लाइफ !

लव में लाभ को भी बजट कहते हैं, जैसे प्रेम में हानि को लाभ कहते हैं !

१६ .

स्मार्ट बजट !

मेरा स्मार्टफोन इस बजट में और स्मार्ट होगा ! इस बजट में स्मार्ट शहरों की तरह स्मार्टफोन के सोल्ड आउट होने की जानकारी मुझे फिर मिलेगी ! डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन दिये जाने के साथ – साथ फसलों में प्रचुरता भी इसी साल आएगी ! हेल्थ, एजुकेशन पर इस साल फिर फोकस होगा !

१७.

बजट का श्रृंगार !
बजट का बहिष्कार ही बजट का श्रृंगार है ! जिनके लिए बजट बनता है वही बजट का बहिष्कार करते हैं ! जो आज बनाते हैं वही कल उसकी चुटकी लेते हैं !  बजट एक ऐसा यूनिवर्सल चुटकुला है जो सबको पूरे साल याद रहता है और जिसे सब समझते हैं ! रहमत की बारिश के कीचड़ में इस साल फिर कमल का फूल खिलेगा !

१८.

एक साल की वॉरंटी वाला बजट !
नए बजट में अपने आप को अपग्रेड करने का ऑफर मुझे इस साल भी मिलेगा ! सारे एक्‍सचेंज ऑफर मुझे फिर से पेश किये जायेंगे ! फ्री रजिस्‍ट्रशन और एक साल की वॉरंटी वाला फेस्टिव ऑफर, फेस्टिवल सीजन में कैश डिस्‍काउंट के साथ मुझे इस बजट में फिर मिलेगा ! सोना जीतने का मौका मुझे नया बजट इस साल फिर देगा !

१९.

बजट के बड़े एलान !
‘ बजट इस साल घर का चौका – बर्तन, झाड़ू – पोछा नहीं करेगा ! मशीन से निकाल के कपडे भी नहीं फैलाएगा ! दुकान से राशन भी नहीं लाएगा ! सब्ज़ी खरीदने बाज़ार नहीं जायेगा ! मोबाइल का बिल नहीं भरेगा ! बजट अपना सर – चार्ज करेगा ! ‘ये मैं क्या बड़बड़ा रहा हूँ ! ‘ मुझे किसी बैंक में ले चलो, मुझे डिजिटल साक्षरता की ज़रूरत है !’

२०.

ग्रामीण कम – इन !

ग्रामीण तुम हमें आज ज़मीन दो हम तुम्हे कल घर देंगे ! गाँव में ऋण वसूली बजट के पीठ पीछे होगा ! तीसरा पूर्ण बजट तुम ले लो ! ग्रामीण तुमसे मुझे और कुछ नहीं चाहिए, मुझे कुछ नहीं चाहिए ! कम – इन ग्रामीण !

२१.

बजट का दर्ज़ी !

बजट का दर्ज़ी मेरा साइज़ जानता है ! बजट में मेरे मोबाइल, पर्स, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड के नाप से मेरी इज़्ज़त काटी जाती है ! इस साल युवाओं को अपने साइज़ का पासवर्ड बजट के दर्ज़ी को देना होगा जिससे बचने के लिए युवा अपने कपड़े खुद फाड़ेंगे जिसे सरकार अगले बजट में सिल देगी !

२२.

अच्छा बजट ही एक अच्छा पति है !

कुछ लोग कहते हैं बजट काम नहीं करते ! बजट के साथ यही समस्या है ! बजट का काम किसी को दिखता नहीं है ! अच्छे बजट के पास पैसा होता है, पैसा सबको दिखता है ! ख़राब बजट के पास दिल होता है जिसको अब प्रेमिका भी तोड़ देती है ! कोई ख़ाली जेब को बजट कहता है, एक्सपेंडीचर सेक्रेटरी मेरी पत्नी बचे हुए पैसों को बजट कहती है !

२३.

बजट छुक छुक !

बजट बुद्धिमान ! बजट शक्तिमान ! बजट सुपरमैन ! बजट लक्ष्मी ! बजट शक्ति ! बजट – बुद्धि उत्सुक होता है, बजट अपनी खुशियों की कॉस्मैटिक पटरी पर छुक – छुक होता है !

२४.

बजट पास !

बजट एक बार संसद में पास हो गया तो फिर साल भर तक मेरे पास नहीं आता ! बजट पास होने के बाद बजट को फेल करने की जिम्मेदारी मेरे ही कंधों पर होती है !

२५.

बजट पच्चीसी !

बजट को होना था समृद्धि का बजट सिंहासन बत्तीसी ! ड्रग्स ने बजट को बना दिया बजट बेताल पच्चीसी ! घर का पति मैं, बजट में एक्स व्यक्ति ! इति रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स, इति बजट पच्चीसी !!

एंग्री सोशल मैन

एंग्री सोशल मैन गुस्से में खड़ा ही रहता है !
एंग्री सोशल मैन राष्ट की इज्जत को की – बोर्ड में रखता है !

एंग्री सोशल मैन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पुतला है !
एंग्री सोशल मैन का गुस्सा ऑड – ईवन नहीं होता !
एंग्री सोशल मैन अपना गुस्सा अपने पोस्ट पर पब्लिक कर देता है !
एंग्री सोशल मैन सच्चा देश भक्त है !
एंग्री सोशल मैन जे एन यू को गाली देता है !
एंग्री सोशल मैन का डायजेस्टिव सिस्टम इंटेलेक्टयूएल का पाखण्ड, विरोध का अपच, विचारधारा का अजीर्ण भी डाइजेस्ट कर लेता है !
एंग्री सोशल मैन बकचोदी नहीं करता !
एंग्री सोशल मैन आमिर खान की फ़िल्म को बायकॉट करता है !
एंग्री सोशल मैन भारत माता की जय नहीं बोलता !
एंग्री सोशल मैन विनम्र श्रद्धांजलि भी गुस्से में देता है !
एंग्री सोशल मैन किसी गुमनाम लड़ाई में सबकी मदद करता है !
एंग्री सोशल मैन रिएक्ट कर के अंड बंड, अकर बकर, अंट शंट, आलतू फालतू, बातें नहीं करता !
एंग्री सोशल मैन का गुस्सा ब्रेक नहीं लेता !
एंग्री सोशल मैन का बस नाम ही पढ़ते रहते हैं,
एंग्री सोशल मैन मिस्टर इंडिया है !

एंग्री सोशल मैन की तस्वीरों के पीछे माओत्से झांकते हैं !
एंग्री सोशल मैन रविश कुमार को गाली देता है !
एंग्री सोशल मैन महान गुप्त गतिविधियों में लिप्त रहता है !
एंग्री सोशल मैन के अनुयायी गलियों में नहीं गालियों में सबका पीछा करते हैं !
एंग्री सोशल मैन मुठ्ठी तान नहीं सकता, उसकी मुठ्ठी में फ़ोन रहता है !

एंग्री सोशल मैन शेयर का चहेता, लाइक का प्रेमी, कमैंट्स का फॉलोवर, और सोशल मिडिया का जंतर – मंतर है !
एंग्री सोशल मैन हर सोशल प्लेटफार्म पर गुस्से में ही मिलेगा !
एंग्री सोशल मैन वर्चुअल दुनिया में हँसता है !
एंग्री सोशल मैन का गुस्सा उसके ‘फ्रेंड्स’ झेलते हैं !

मैं बैन का समर्थक नहीं

 

मैं बैन का समर्थक नहीं

मैं बैन का समर्थक नहीं

 

एक /

हम अभी लाइव टेलीकास्ट के लिए तैयार नहीं …

हमें क्रिकेट लाइव दिखाना आता है, देश नहीं
उपवास नहीं
उत्सव, त्यौहार नहीं
बलिदान नहीं, अधिकार नहीं

हमें फैशन शो दिखाना आता है
संस्कार नहीं
हमला नहीं , वार नहीं
हम अभी लाइव टेलीकास्ट के लिए तैयार नहीं !

हमें भाषण दिखाना आता है
खेल नहीं. पुरस्कार नहीं
समाचार नहीं
हम अभी लाइव टेलीकास्ट के लिए तैयार नहीं !

हमें मेंडेट दिखाना आता है
कैंडिडेट नहीं
हमें चमत्कार दिखाना आता है
पत्रकार नहीं
हम अभी लाइव टेलीकास्ट के लिए तैयार नहीं !

हम बैनर बनने को तैयार है
हम अभी बैन होने को तैयार नहीं …

 

दो /

बैन का पहाड़ा

बैन एकम बैन
बैन दूनी सर्कस
बैन तिये स्टेटस
बैन चौके बकवास
बैन पंजे काला
बैन छके हास्य
बैन सत्ते नैन
बैन अठ्ठे रुपया
बैन नामे एन डी टी वी
बैन दसे बांस

विडियो

फोटो बड़ा हो कर विडियो बनता है

( एक )

बच्चों से दूर रह कर भी अब
विडियो से दूर नहीं रह सकते,
यादों में नहीं, अब दुनिया विडियो में रहती है !

दुःख करें न करें, विडियो जरूर शेयर करते हैं !

हर पात्र का चरित्र दिखा रहा है,
विडियो अब नयी कहानी सुना रहा है !

अब किस्मत के नहीं, सब अपने विडियो के मालिक हैं

जिनसे अब तक नहीं मिले, वो कभी विडियो में मिलेंगे

दुनिया गोल थी, अब विडियो है !

अपना विडियो, अपने हाथ,
देखने वाले जगन्नाथ !

( दो )

विडियो सच्चा, आदमी विडियो का बच्चा !
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो …

विडियो अब दिखाता कम है, सुनाता ज्यादा है,
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो …
विडियो अब सुनाता कम है, सिखाता ज्यादा है,
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो …
विडियो अब सिखाता कम है, चिढ़ाता ज्यादा है,
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो …

विडियो हर वक़्त तैयार, विडियो मतलब का यार
विडियो सब संसार …
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो

सब देख्यो, विडियो
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो …

जियो और जीने दो
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो …

हवा में उछली एक लड़की

शरीर की नियमित
अनियमितताओं
से छूट कर
पुरुषों के छल्ले
जीवन के आराम
अपनी उम्र, ऊंचाई और वजन
से निकलकर
पागलपन की हद तक
हवा में उछली एक लड़की
जैसे
मांसपेशियों की तितली

रातों रात
त्रिपुरा के आदिवासी
भारत का अभिन्न हिस्सा
बन गए
फिर से,
हाथों के बल
जब
हवा में उछली
अगरतला की एक लड़की

इस लड़की को देखो
हवा में उछल कर
इसने औरत का काम किया

मेहनती और मेहनती
कसरती और कसरती

देश भर में आयी बाढ़ / सीमा समस्या
हाई स्कूल की फीस / यौन उत्पीड़न
लालची राजनेता / खेलों में सिफारिशें
शराब / चोट / शिक्षा व्यवस्था
जिमनास्ट लड़की के साथ
सब हवा में
धनुषाकार
अनदेखे में छलांग लगाने के लिए
हवा में उछली एक लड़की को
दे चुकी सरकार
अर्जुन पुरस्कार

शक्ति, लचीलापन, संतुलन और नियंत्रण की
हर लड़की से ज्यादा ज़रूरत है
लड़कों को,
पर्याप्त रक्त
कसरत और कैलोरी की

हवा में उछली एक लड़की
और बेटियों की मांग बढ़ी

कसरती लड़की का शरीर
एक उपजाऊ जंगल है
जैसे
त्रिपुरा

पहुँचने का
कोई आम रास्ता भी नहीं
एनएच 44 से
तुम तक पहुँचे
मेरी ये कविता

Deepka-karmakar

deepa

India's Dipa Karmakar competes in the qualifying for the women's Beam event of the Artistic Gymnastics at the Olympic Arena during the Rio 2016 Olympic Games in Rio de Janeiro on August 7, 2016. / AFP / EMMANUEL DUNAND (Photo credit should read EMMANUEL DUNAND/AFP/Getty Images)

Rio-Olympics-Saina-Sania-was-also-disappointed-after-Dipa-Karmakar-news-in-hindi-152309

 

छवि स्रोत: Google

दुखान्त‬

” कागा सब तन खाइयों मेरा चुन चुन खाइयो मांस,
दो नैना मत खाइयो मोहे पिया मिलन की आस “

ना जाने फिर उन दो आँखों का क्या हुआ ? उन आँखों ने अपने जिस्म दे कर भी मिलन की लालसा में अपनी पलकें बिछाए रखीं थीं !  सुना है नरभक्षी कौव्वे उन दो प्रेमी आँखों से सदियों तक बातें करते रहे और प्रेमी के इंतज़ार में उनका साथ दिया ! फिर एक दिन किसी कपटी कौव्वे ने बारी बारी से उन्हें छल लिया ! प्रेम से निकल के जाने वाले प्रेम में कब लौटे पाए हैं ?

 

भीड़ वाली सेल्फ़ी

दोस्तों की उछलकूद है भीड़ वाली सेल्फ़ी / अपने ही आसपास दोस्तों के साथ कहीं भी बन जाती है भीड़ वाली सेल्फ़ी / भीड़ वाली सेल्फ़ी खींचने के लिए कोई दोस्त फ्रेम से बाहर नहीं जाता / दोस्त दोस्त के बीच में ही खिंच जाती है भीड़ वाली सेल्फ़ी / दोस्तों के बीच बहुत पॉपुलर है भीड़ वाली सेल्फ़ी / शार्ट नोटिस पर कोई अचानक ले लेता है भीड़ वाली सेल्फ़ी / जब तक आप कपडे, बाल, मुस्कुराहट ठीक करते हैं, क्लिक हो जाती है किसी दोस्त की मोबाइल में भीड़ वाली सेल्फ़ी / देर रात किसी के वॉल पर अचानक उग आती है भीड़ वाली सेल्फ़ी / जिसका हाथ लम्बा होता है वही लेते हैं भीड़ वाली सेल्फ़ी / आवाज़ देना न भूलें, जब भी कोई ले रहा हो भीड़ वाली सेल्फ़ी / कोई रह न जाये फ्रेम से बाहर जब आप ले रहे हों भीड़ वाली सेल्फ़ी … /
अकेलेपन का हाहाकार है, अकेले ली गयी कहीं भीड़ से बाहर स्वयं की सेल्फ़ी …