विडियो

फोटो बड़ा हो कर विडियो बनता है

( एक )

बच्चों से दूर रह कर भी अब
विडियो से दूर नहीं रह सकते,
यादों में नहीं, अब दुनिया विडियो में रहती है !

दुःख करें न करें, विडियो जरूर शेयर करते हैं !

हर पात्र का चरित्र दिखा रहा है,
विडियो अब नयी कहानी सुना रहा है !

अब किस्मत के नहीं, सब अपने विडियो के मालिक हैं

जिनसे अब तक नहीं मिले, वो कभी विडियो में मिलेंगे

दुनिया गोल थी, अब विडियो है !

अपना विडियो, अपने हाथ,
देखने वाले जगन्नाथ !

( दो )

विडियो सच्चा, आदमी विडियो का बच्चा !
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो …

विडियो अब दिखाता कम है, सुनाता ज्यादा है,
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो …
विडियो अब सुनाता कम है, सिखाता ज्यादा है,
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो …
विडियो अब सिखाता कम है, चिढ़ाता ज्यादा है,
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो …

विडियो हर वक़्त तैयार, विडियो मतलब का यार
विडियो सब संसार …
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो

सब देख्यो, विडियो
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो …

जियो और जीने दो
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो …

हवा में उछली एक लड़की

शरीर की नियमित
अनियमितताओं
से छूट कर
पुरुषों के छल्ले
जीवन के आराम
अपनी उम्र, ऊंचाई और वजन
से निकलकर
पागलपन की हद तक
हवा में उछली एक लड़की
जैसे
मांसपेशियों की तितली

रातों रात
त्रिपुरा के आदिवासी
भारत का अभिन्न हिस्सा
बन गए
फिर से,
हाथों के बल
जब
हवा में उछली
अगरतला की एक लड़की

इस लड़की को देखो
हवा में उछल कर
इसने औरत का काम किया

मेहनती और मेहनती
कसरती और कसरती

देश भर में आयी बाढ़ / सीमा समस्या
हाई स्कूल की फीस / यौन उत्पीड़न
लालची राजनेता / खेलों में सिफारिशें
शराब / चोट / शिक्षा व्यवस्था
जिमनास्ट लड़की के साथ
सब हवा में
धनुषाकार
अनदेखे में छलांग लगाने के लिए
हवा में उछली एक लड़की को
दे चुकी सरकार
अर्जुन पुरस्कार

शक्ति, लचीलापन, संतुलन और नियंत्रण की
हर लड़की से ज्यादा ज़रूरत है
लड़कों को,
पर्याप्त रक्त
कसरत और कैलोरी की

हवा में उछली एक लड़की
और बेटियों की मांग बढ़ी

कसरती लड़की का शरीर
एक उपजाऊ जंगल है
जैसे
त्रिपुरा

पहुँचने का
कोई आम रास्ता भी नहीं
एनएच 44 से
तुम तक पहुँचे
मेरी ये कविता

Deepka-karmakar

deepa

India's Dipa Karmakar competes in the qualifying for the women's Beam event of the Artistic Gymnastics at the Olympic Arena during the Rio 2016 Olympic Games in Rio de Janeiro on August 7, 2016. / AFP / EMMANUEL DUNAND (Photo credit should read EMMANUEL DUNAND/AFP/Getty Images)

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छवि स्रोत: Google

दुखान्त‬

” कागा सब तन खाइयों मेरा चुन चुन खाइयो मांस,
दो नैना मत खाइयो मोहे पिया मिलन की आस “

ना जाने फिर उन दो आँखों का क्या हुआ ? उन आँखों ने अपने जिस्म दे कर भी मिलन की लालसा में अपनी पलकें बिछाए रखीं थीं !  सुना है नरभक्षी कौव्वे उन दो प्रेमी आँखों से सदियों तक बातें करते रहे और प्रेमी के इंतज़ार में उनका साथ दिया ! फिर एक दिन किसी कपटी कौव्वे ने बारी बारी से उन्हें छल लिया ! प्रेम से निकल के जाने वाले प्रेम में कब लौटे पाए हैं ?

 

भीड़ वाली सेल्फ़ी

दोस्तों की उछलकूद है भीड़ वाली सेल्फ़ी / अपने ही आसपास दोस्तों के साथ कहीं भी बन जाती है भीड़ वाली सेल्फ़ी / भीड़ वाली सेल्फ़ी खींचने के लिए कोई दोस्त फ्रेम से बाहर नहीं जाता / दोस्त दोस्त के बीच में ही खिंच जाती है भीड़ वाली सेल्फ़ी / दोस्तों के बीच बहुत पॉपुलर है भीड़ वाली सेल्फ़ी / शार्ट नोटिस पर कोई अचानक ले लेता है भीड़ वाली सेल्फ़ी / जब तक आप कपडे, बाल, मुस्कुराहट ठीक करते हैं, क्लिक हो जाती है किसी दोस्त की मोबाइल में भीड़ वाली सेल्फ़ी / देर रात किसी के वॉल पर अचानक उग आती है भीड़ वाली सेल्फ़ी / जिसका हाथ लम्बा होता है वही लेते हैं भीड़ वाली सेल्फ़ी / आवाज़ देना न भूलें, जब भी कोई ले रहा हो भीड़ वाली सेल्फ़ी / कोई रह न जाये फ्रेम से बाहर जब आप ले रहे हों भीड़ वाली सेल्फ़ी … /
अकेलेपन का हाहाकार है, अकेले ली गयी कहीं भीड़ से बाहर स्वयं की सेल्फ़ी …

साइलेंट मोड में …

चेहरे पर कोई सेवन बना दे या ऐट बना के मेरा मन अनलॉक कर दे या जेड बना दे उँगलियों से और खोल दे मेरे सारे विंडो या एक बार मेरे चेहरे की स्क्रीन पर हाथ फेर के लॉक अनलॉक कर दे मुझे और यूँ ही पड़ा रहने दे साइलेंट मोड में …

‎सोलह बसंत‬

सरसों के खेतों तक आया, इस बार मुझ तक क्यों नहीं पहुंचा मेरा बसंत ? मीनारों पर बैठे गिध्द कैसे खा गए एक गिलहरी का क्यारी भर बसंत ? कौन पेंच दे के काट गया एक बच्चे का पतंग भर बसंत ? फुनगियों पर सहम कर क्यों रह गया इस बार का मौसम भर बसंत ? किस ने मार गिराया विद्यार्थी का हंस भर बसंत ? महानगरों के तकिये पर क्यों सिसकती रही ह्रदय के आकार की हवस भर देह – बसंत ? किसने दी मौसम को गाली, कैसे बचेगा विरोध भर बसंत ? मुक्त कर दो अपने गगन मन से दमन भर बसंत ..

काला हास्य सूँ – सूँ, कूँ – कूँ

रेडिओ दिवस पर
देश में आज
हर फ्रीक्वेंसी में
सूँ – सूँ, कूँ – कूँ क्यों है

जे एन यू टूँ उऊऊँ – टूँ उऊऊँ
कश्मीर किर्र किर्र किर्र किर्र
राजनीति टी – ईईईई टी – ईईईई
नेता टाआआ – टाआआ टीईईईई
टीईईईई – टीईईईई
टूँ उऊऊँ – टूँ उऊऊँ
सूँ – सूँ, कूँ – कूँ

हर फ्रीक्वेंसी में
सूँ – सूँ, कूँ – कूँ क्यों है

आज रेडियो तरंग
में इतने रंग क्यों है
हर फ्रीक्वेंसी में
सूँ – सूँ, कूँ – कूँ क्यों है

शासन सन सन सुउउउउउ
कानून टूँ टूँ टूँ टूँ टूँ टूँ
बहुमत खट्ट खट्ट खट्ट खट्ट
देशभक्ति टी – ईईईई टी – ईईईई
टीईईईई – टीईईईई
टूँ उऊऊँ – टूँ उऊऊँ
सूँ – सूँ, कूँ – कूँ

हर फ्रीक्वेंसी में
सूँ – सूँ, कूँ – कूँ क्यों है

रेडियो के पास
आज की रात
क्यों नहीं है
मेरे मन की बात ?

काला हास्य

विष्णु को मानने वाले वैष्णव थे अब सहिष्णु को मानने वाले सहैष्णव हैं !
गाँधी जी सहिष्णु हो कर मुझ हिन्दू अब हिष्णु को माफ़ कीजियेगा ! प्रस्तुत है दुःखी जनों के लिए मेरी पैरोडी

सहैष्णव जन तो तेने कहिये, जे स्टेटमेंट पराई जाणे रे
पर ट्वीट उपकार करे तोये, मन कमेण्ट न आणे रे ।।
सोशल मीडिया मां सहुने वन्दे, निन्दा न करे केनी रे ।।
असहिष्णु सहिष्णु मन निश्चल राखे, धन-धन जननी तेरी रे ।।

सहैष्णव जन तो तेने कहिये, जे स्टेटमेंट पराई जाणे रे ।।

किरण आमिर ने तृष्णा त्यागी, पर स्त्री जेने मात रे ।।
जिहृवा थकी असत्य न बोले, सत्यमेव जयते हाथ रे ।।
इनटोलेरेंट व्यापे नहि जेने, सेलिब्रेटी जेना तन मा रे ।।
राम नामशुं ताली लागी, सकल तीरथ तेना देश मा रे ।।
वण लोभी ने कपट रहित छे, काम क्रोध निवार्या रे ।।
मस्तान तेनु दरसन करता, मजोरिटी कुळ तार्या रे ।।

सहैष्णव जन तो तेने कहिये, जे स्टेटमेंट पराई जाणे रे ।।

वैष्णव जन तो तेने कहिये गुजरात के संत कवि नरसी मेहता द्वारा रचित भजन है जो महात्मा गाँधी को बहुत प्रिय था

आत्मरहस्य‬

एक यक्ष प्रश्न है-‘किमाश्चर्यं मतः परम’ अर्थात् सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है ? हम अपने आपको नहीं जानते यही सबसे बड़ा आश्चर्य है ! हजारों वर्षों से आदमी के सामने प्रश्न है – कोऽहम् ‘मैं कौन हूं ?’ ‘मैं कौन हूं’ इस प्रश्न के अन्वेषण में आदमी ने अपने अस्तित्व की कई परतें उघाड़ी ! उसे प्रतीत हुआ मेरा यह शरीर मैं नहीं है, मेरी इन्द्रियां, मेरी बुद्धि मैं नहीं है ! एक बिन्दु आया, एक अन्तिम ठहराव आया, साधक के अनुभव में, वह अनुभव था, ‘सोऽहम’ ‘मैं हूं’ मेरे सिवाय अन्य किसी वस्तु का अस्तित्व नहीं है ! ऐसी कितनी ही बातें हैं और ज्ञान की तलाश का कोई निश्चित मार्ग नहीं है ! मैं #आत्मरहस्य को स्वयं अपने अनुभवों से और अनुभूतियों में तलाश रहा हूँ ! मैं अपनी आध्यात्मिक यात्रा में अकेला भटक रहा हूँ ! मेरी लेखनी से यह जाना जा सकता है ! मैं रोज लिखता हूँ जो मेरी अपनी व्यक्तिगत अनुभूतियों से निकली हुई अनर्गल भाव से होते हैं ! मैं अभी सूक्ष्म को नहीं जानता ! स्थूल को जानता हूँ ! शरीर को जानता हूँ ! जो मेरी भावनाओं में लिप्त है ! मैं अपनी पीड़ाओं को देखता हुआ जब अपनी आत्मा में झांकता हूँ तो मुझे कुम्हार के पके हुए बर्तन से दाग दीखते हैं ! कुम्हार के पास कई बर्तन बे दाग भी होते हैं ! लोग उनको ही लेना पसंद करते हैं ! पर मुझे वो बर्तन भी भाते हैं जिन पर भट्टी की आग की ताप की कालिख का दाग होता है ! और मैं अक्सर अपने आप को वैसा ही पाता हूँ ! अन्य सत्य भी है और जो मेरी अनुभूति है वो भी …

१.

पवित्र मन भी कहीं – कहीं से काला होता जाता है ! तपता हुआ, कुंदन होता हुआ, भष्म होने के लिए छोड़ दिया गया अहंकार, अज्ञान, काम, क्रोध, ईर्ष्या की ज्वाला की लपटें आत्मसाक्षात्कार की भट्टी पर चढ़ी आत्मा पर कालिख छोड़ ही जाती है …

२.

रात दिन के भरोसे नहीं रहती ! और दिन रात के भरोसे नहीं रहता ! रात, अपने सितारे अपना आकाश और अपना अँधेरा सब अपने साथ लाती है, और उन्हें अपने साथ ही ले जाती है ! दिन भी रात के लिए कुछ नहीं छोड़ता ! अपनी रौशनी, अपना आसमान और अपना तारा अपने साथ ही लाता है और उन्हें अपने साथ ही ले जाता है ! हम भी दोनों को अपने आप का अलग – अलग हिस्सा देते हैं ! दिन में हम अलग होते हैं, और रात में बिलकुल अलग ! हमारे दिन का मन अलग होता है और रात का बिलकुल अलग ! बीच – बीच में हम भी रात और दिन की तरह ही अलग – अलग होते हैं ! जैसे दिन में सुबह अलग होती है और दोपहर अलग ! रात में शाम अलग होती है और आधी रात अलग ! रात और दिन की तरह ही हम हर पल बदलते रहते हैं ! जैसे रात हर पल दिन की तरफ बढ़ती रहती है और दिन हर पल रात की तरफ बढ़ता रहता है ! हम भी कभी कहीं एक जैसे नहीं होते ! हमारी कोई रात किसी और रात सी नहीं होती ! हमारा कोई दिन किसी और दिन सा नहीं होता ! ये कोई जादू है या फिर कोई रहस्य ? कहाँ से आतीं हैं इतने रातें ? और कहाँ से आते हैं इतने दिन ? और इनको अलग – अलग देने के लिए हर पल हमारे पास अलग – अलग नया मन कहाँ से आता रहता है ?

३.

अपने ही मंदार में लिपटा हुआ आज मैं अपना नाग स्वयं था ! अपनी मुंह और अपनी पूँछ में बँटा हुआ अपनी मंथन में अपना वासुकि भी आज मैं स्वयं बना ! मेरे मुँह की तरफ मेरे दैत्य थे और मेरे देवताओं ने मेरी पूँछ पकड़ रखी थी ! भगवान नारायण ने दानव रूप से दानवों में और देवता रूप से देवताओं में शक्ति का संचार किया ! मंथन से सबसे पहले हलाहल विष निकला ! विष की ज्वाला से मेरे देवता और मेरे दैत्य जलने लगे ! उनकी चमक फीकी पड़ने लगी ! मेरे देवताओं और मेरे दैत्यों ने मिल कर शिव की आराधना की ! नीलकण्ठ ने मेरी हथेली पर मेरे विष को रख दिया और मुझ से पीने के लिए कहा ! मैंने हलाहल उनकी चरणो में रख कर अपनी आँखें मूँद लीं ! मेरी आँखें जब खुलीं तो मेरी आंसुओं में आज मेरा सारा गरल बह गया ! आज अपने आत्ममंथन में अपना महादेव भी मैं स्वयं था …

४.

अंतरिक्ष के जिस रौशनी में अभी पृथ्वी नहा रही है वहां की रिक्तता कितनी भयावह होती होगी ? जब पृथ्वी घूमती हुई अन्धकार में चली जाती है, अंतरिक्ष के शून्य में व्याप्त रौशनी कितनी रिक्त और निर्जीव हो जाती होगी …

५.

डार से बिछुड़ते ही हम फिर मिलने की उम्मीद से बंध जाते हैं … टूटते ही फिर से जुड़ने की परिकल्पना बन जाती है … जाने के बाद ही आना होता है …सच के भरोसे ही झूठ को हम टटोलते हैं …पता नहीं ख़ुशी को ग़म के बगैर कैसे पहचानते… ? अन्त ही शुरुआत है  …

६.

मैं दो हिस्से में हूँ ! एक फूला हुआ और एक पिचका हुआ ! सांस लेता हूँ तो फूल जाता हूँ और जब सांस छोड़ता हूँ तो पिचक जाता हूँ ! इसके अलावा मैं और कोई नहीं हूँ ! मेरी इन दोनों अवस्था के अलावा अगर आप मुझे किसी और रूप में देखते हैं तो वो मिथ्या है, भ्रम है, दोष है, माया है, तृष्णा है ! और मेरा कोई ‘ब्रांच’ नहीं है जो मेरे फूलने और पिचकने के अलावा कुछ और करता हो ! देखिये अभी जैसे ही मुझे ये ज्ञान प्राप्त हुआ है मैं ख़ुशी से फूलने लगा हूँ ! और जैसे ही आप मेरी इस बात पर हंस देंगे मैं पिचक जाऊंगा ! लेकिन आप को हंसाने के बाद, पूरी तरह से पिचक जाने के बाद मैं फिर फूलने लगूँगा ! मैंने कहा न मेरी सिर्फ यही दो अवस्था है ! आप मुझसे मुंह फुला लीजिये या मेरे साथ हंस के अपना फेफड़ा खाली कीजिये और पिचक जाइए ! आप जैसे भी लेना चाहें मैं आप का साथ सिर्फ अपने दो हिस्सों से ही दे सकता हूँ ! आप चाहेंगे तो मैं आप के साथ फूल जाऊंगा और फिर हम एक साथ पिचक जायेंगे ! सांस लेता हूँ तो फूल जाता हूँ और जब सांस छोड़ता हूँ तो पिचक जाता हूँ ! आप कोई भी हों मैं अपने दोनों अवस्था के अलावा और कोई नहीं हूँ …

७.

दुःख से निकलने का निर्णय ही दुःख से निकलने का रास्ता है …

८ .

जी भर के रो लेने के बाद भी जीवन में वही बदलता है जो हम बदलना चाहते हैं ! रोना सिर्फ मन के दुःख को सहलाने का तरीका है …

क्रमशः

मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ?

मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ? आप अपने स्टेटस में क्या रखते हैं ? आप मोदी रख लीजिये मैं देश रख लेता हूँ ! क्या ? आपको मोदी नहीं रखना ? ओ के ! फिर देश आप रख लीजिये मैं मोदी रख लेता हूँ ! मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ? आप अपने स्टेटस में क्या रखते हैं ?

मैं कार्टून रख लेता हूँ, आप संसद रख लीजिये ! क्या ? आपको संसद नहीं रखना ? ओ के ! फिर कार्टून आप रख लीजिये मैं संसद रख लेता हूँ ! मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ? आप अपने स्टेटस में क्या रखते हैं ?

आप किसान रख लीजिये मैं पोर्न रख लेता हूँ ! क्या ? आपको किसान नहीं रखना ? ओ के ! फिर पोर्न आप रख लीजिये मैं किसान रख लेता हूँ ! मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ? आप अपने स्टेटस में क्या रखते हैं ?

आप कांग्रेस रख लीजिये मैं आज़ादी रख लेता हूँ ! क्या ? आपको कांग्रेस नहीं रखना ? ओ के ! फिर आज़ादी आप रख लीजिये मैं कांग्रेस रख लेता हूँ ! मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ? आप अपने स्टेटस में क्या रखते हैं ?

आप सलामी रख लीजिये मैं तस्वीर रख लेता हूँ ! क्या ? आपको सलामी नहीं रखना ? ओ के ! फिर तस्वीर आप रख लीजिये मैं सलामी रख लेता हूँ ! मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ? आप अपने स्टेटस में क्या रखते हैं ?

आप विज्ञापन रख लीजिये मैं कार्यक्रम रख लेता हूँ ! क्या ? आपको विज्ञापन नहीं रखना ? ओ के ! फिर कार्यक्रम आप रख लीजिये मैं विज्ञापन रख लेता हूँ ! मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ? आप अपने स्टेटस में क्या रखते हैं ?

आप सिद्धांत रख लीजिये मैं शुभकामनाएँ रख लेता हूँ ! क्या ? आपको सिद्धांत नहीं रखना ? ओ के ! फिर शुभकामनायें आप रख लीजिये मैं सिद्धांत रख लेता हूँ ! मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ? आप अपने स्टेटस में क्या रखते हैं ?

आप संबंध रख लीजिये मैं दिशा रख लेता हूँ ! क्या ? आपको संबंध नहीं रखना ? ओ के ! फिर दिशा आप रख लीजिये मैं संबंध रख लेता हूँ ! मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ? आप अपने स्टेटस में क्या रखते हैं ?

आप विरोधी रख लीजिये मैं संस्कृति रख लेता हूँ ! क्या ? आपको विरोधी नहीं रखना ? ओ के ! फिर संस्कृति आप रख लीजिये मैं विरोधी रख लेता हूँ ! मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ? आप अपने स्टेटस में क्या रखते हैं ?

आप मामला रख लीजिये मैं माहौल रख लेता हूँ ! क्या ? आपको मामला नहीं रखना ? ओ के ! फिर माहौल आप रख लीजिये मैं मामला रख लेता हूँ ! मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ? आप अपने स्टेटस में क्या रखते हैं ?

आप रायता रख लीजिये मैं बूंदी रख लेता हूँ ! क्या ? आपको रायता नहीं रखना ? ओ के ! फिर बूंदी आप रख लीजिये मैं रायता रख लेता हूँ ! मैं अपने स्टेटस में क्या रखता हूँ ? आप अपने स्टेटस में क्या रखते हैं ?