अन्ना की अंतड़ी बोल रही है

अन्ना की अंतड़ी बोल रही है
गर्र – गुर्र , गर्र – गुर्र , गर्र – गुर्र , गर्र – गुर्र

देश की गठरी खोल रही है
गुड – गुड, गुड – गुड, गुड – गुड, गुड – गुड

अंजर – पंजर, जंतर – मंतर
अंदर – अंदर, अंदर – अंदर
जंतर – मंतर, जंतर – मंतर
बाहर – बाहर, बाहर – बाहर
अंजर – पंजर, जंतर – मंतर

अनशन – फंक्शन , अनशन – फंक्शन
अनशन – फंक्शन , अनशन – फंक्शन

अन्ना की अंतड़ी बोल रही है
गर्र – गुर्र , गर्र – गुर्र , गर्र – गुर्र , गर्र – गुर्र
देश की गठरी खोल रही है
गुड – गुड, गुड – गुड, गुड – गुड, गुड – गुड

किल – बिल, किल – बिल,
बिल – बिल, बिल – बिल,
टिम – टीम, टिम – टीम,
टीम – टीम, टीम – टीम,

जा – जा, जा – जा,
बाबा – बाबा, बाबा – बाबा

आ – जा, आ – जा,
वाह – वाह, वाह – वाह,
बा – बा, बा – बा, बा -बा, बा -बा

टोपी – सीधी, टोपी – सीधी,
सिद्धि – सिद्धि, टोपी – सिद्धि,

अन्ना की अंतड़ी बोल रही है
गर्र – गुर्र , गर्र – गुर्र ,
देश की गठरी खोल रही है
गुड – गुड, गुड – गुड,

जन का राजी, जनता राजी – जन का राजी, जनता राजी
अन्न ना – अन्न ना, अन्न ना – अन्न ना

कर अन्न – सन्न, कर अप – सन्न, कर संसोधन – कर संसोधन
ठन – ठन, ठन – ठन, ठन – ठन, ठन – ठन
अन्न – सन्न, अन्न – सन्न, अन्न – सन्न, अन्न – सन्न
कर अप – सन्न, कर अप – सन्न,
अन्न – संसोधन, सन्न – संसोधन,
ठन – ठन, ठन – ठन, ठन – ठन, ठन – ठन

अन्ना की अंतड़ी बोल रही है
गर्र – गुर्र , गर्र – गुर्र ,

देश की गठरी खोल रही है
गुड – गुड, गुड – गुड

Funny-amul-ad-over-lokpal-movement-by-anna-hazare

कट टू –

जितना वक़्त ‘कट टु -‘ पढने में लगता है
उतना ही वक़्त ब्रह्माण्ड को छालांगने में
भूखे का पेट भरने में
लड़की को नंगा करने में
किसी रोते हुए बच्चे को हंसाने में
अंडे को चूजा बनाने में
भाप को फिर से पानी बनाने में
और
आदम हव्वा को सेब खाने में लगता है…!

कट टू –
बच्चा !

और बच्चे को सीधा
माँ के नौ महीने के गर्भ संसार,
ममता की छाँव से निकाल कर
एक ही कट में
चक्रव्यूह के आखरी दरवाजे पर पटक देता है –
‘कट टू -‘

घोसले में सांप घुस जाता है
मछली अंगूठी खा जाती है
घर बस जाता है
सत्ता बँट जाती है
दुश्मन मर जाता है
सूरज उगता है
बिछड़े भाई मिल जाते हैं
पिंजरा टूट जाता है
पंछी लौट आते हैं
परदे पर संसार रच देते हैं ये दो शब्द

कट टू –
इश्वर के वो दो हाथ हैं
जिनको अकसर हम भूल जाते हैं !