कट टू –

जितना वक़्त ‘कट टु -‘ पढने में लगता है
उतना ही वक़्त ब्रह्माण्ड को छालांगने में
भूखे का पेट भरने में
लड़की को नंगा करने में
किसी रोते हुए बच्चे को हंसाने में
अंडे को चूजा बनाने में
भाप को फिर से पानी बनाने में
और
आदम हव्वा को सेब खाने में लगता है…!

कट टू –
बच्चा !

और बच्चे को सीधा
माँ के नौ महीने के गर्भ संसार,
ममता की छाँव से निकाल कर
एक ही कट में
चक्रव्यूह के आखरी दरवाजे पर पटक देता है –
‘कट टू -‘

घोसले में सांप घुस जाता है
मछली अंगूठी खा जाती है
घर बस जाता है
सत्ता बँट जाती है
दुश्मन मर जाता है
सूरज उगता है
बिछड़े भाई मिल जाते हैं
पिंजरा टूट जाता है
पंछी लौट आते हैं
परदे पर संसार रच देते हैं ये दो शब्द

कट टू –
इश्वर के वो दो हाथ हैं
जिनको अकसर हम भूल जाते हैं !

cut to – my new blog

कई बार कई रूप में ब्लॉग लिखने की शुरुआत की है … कई कारणों से असफल रहा …जो ब्लॉग लिखते हैं वो उन कारणों से परिचित भी होंगे… आलस्य के साथ साथ तकनिकी दांव – पेंच उनमे से एक है ! मै भी कहाँ हार मानने वाला हूँ ?…अब ये मेरा नया ब्लॉग है ! फिर से एक नयी शुरुआत !
इसके लिए ललित भाई को बहुत बहुत धन्यवाद उन्होंने इस ब्लॉग को setup करने में बड़ी मदद की है ! वो प्रेरित करने वाले कई ब्लोग्स चलाते हैं और कविता कोष के जनक हैं !
दोस्तों आशा है स्थाई तौर पर लगातार लिखने की कोशिश इस बार सफल होगी !