फणीश्वरनाथ रेणु से फेसबुक तक कोसी का ‘स्टेट्स अपडेट’ नहीं बदला:पुरानी कहानी नया पाठ / Parallel Cut

1952 में लिखे गए ‘रेणु’ के रिपोर्ताज़ ‘डायन कोसी’ का वर्ष 2014 – 15 में कोसी के अपडेट्स से पैरेलल कट : कोसीरेणु और फेसबुक 

रेणु इस पोस्ट को पढ़ते तो चौंक जाते ! उनके ‘शब्द‘ को बासठ साल बाद भी वही ‘चित्र‘ मिला !

*

bihar-flood-new-courseकोसी नदी भारत और नेपाल के बीच बहने वाली गंगा की सबसे बडी सहायक नदियों में से एक है ! भारत में उत्तरी बिहार से प्रवेश करते हुए यह 9200 किलोमीटर का मार्ग तय करती है और अंत में गंगा से मिलकर बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है ! कामता, बागमती और बूढ़ी गंडक भारत में इसकी प्रमुख उपनदियां है ! बिहार में प्रतिवर्ष इस नदी द्वारा बाढ़ लाए जाने के कारण इसे ‘बिहार के शोक ‘के नाम से भी जाना जाता है ! 

*

Renu-1फणीश्वर नाथ रेणु ‘ ने अपनी कहानियों और उपन्यासों में आंचलिक जीवन के हर धुन, हर गंध, हर लय, हर ताल, हर सुर, हर सुंदरता और हर कुरूपता को शब्दों में बांधने की सफल कोशिश की है ! उनकी भाषा-शैली में एक जादुई सा असर है जो पाठकों को अपने साथ बांध कर रखता है ! रेणु एक अद्भुत किस्सागो थे और उनकी रचनाएँ पढते हुए लगता है मानों कोई कहानी सुना रहा हो ! ग्राम्य जीवन के लोकगीतों का उन्होंने अपने कथा साहित्य में बड़ा ही सर्जनात्मक प्रयोग किया है ! 

*

fb1-1024x682 फेसबुक इंटरनेट पर स्थित एक निःशुल्क सामाजिक नेटवर्किंग सेवा है, जिसके माध्यम से इसके सदस्य अपने मित्रों, परिवार और परिचितों के साथ संपर्क रख सकते हैं ! नेटवर्किग जालस्थल के रूप में फेसबुक पर उपयोक्ताओं को अपने मित्रों को यह बताने की सुविधा है कि किसी विशेष समय वे क्या कर रहे हैं या क्या सोच रहे हैं और उनके आसपास क्या हो रहा है !इसे ‘स्टेट्स अपडेट’ करना कहा जाता है ! 

*

डायन कोसी‘  एक रिपोर्ताज है जिसके रचायिता फणीश्वर नाथ रेणु हैं !  रचना प्रकाशन काल : 1952 

unnamed-736_20130831

Supaul: Level of water increases near a bridge on Kosi river after heavy inflow of water into the river from Nepal's side in Supaul, Bihar on Sunday. PTI Photo(PTI8_3_2014_000111B)

Supaul: Level of water increases near a bridge on Kosi river after heavy inflow of water into the river from Nepal’s side in Supaul, Bihar on Sunday. PTI Photo(PTI8_3_2014_000111B)

” हिमालय की किसी चोटी की बर्फ पिघली या किसी तराई में घनघोर वर्षा हुई और कोसी की निर्मल धारा में गंदले पानी की हल्की रेखा छा गई. ‘कोसी मैया’ का मन मैला हो गया. कोसी के किनारे रहने वाले इंसान ‘मैया’ के मन की बात नहीं समझते, लेकिन कोसी के किनारे चरने वाले जानवर पानी पीने के समय सब कुछ सूंघ लेते हैं. नथुने फुला कर वे सूंघते, ‘फों-फों’ करते और मानो किसी डरावनी छाया को देख कर पूंछ उठाकर भाग खड़े होते. चरवाहे हैरान होते. फिर एक नंग-धड़ग लड़का पानी की परीक्षा करके घोषणा कर देता -‘गेरुआ पानी !’  – रेणु (1952)

cut to – 5 August 2014

‘गेरुआ पानी !’ मुबारक भाई देख रहे हैं कि नेपाल से जो बहुत अधिक पानी आने वाला था, वह आया कि नहीं…

10565181_10152541830816855_2260580642145847429_n

‘गेरुआ पानी !’ मुबारक भाई देख रहे हैं कि नेपाल से जो बहुत अधिक पानी आने वाला था, वह आया कि नहीं… ! ( चित्र – पुष्य मित्र ! पुष्य मित्र जी के फेसबुक वाल से साभार )

10533902_10152546238811855_6213809551200099447_o-1024x768

मो. मुबारक, बनैनियां गांव, कोसी महासेतु के पास बने गाइड बांध पर ! 5 August 2014 ( चित्र – पुष्य मित्र ! पुष्य मित्र जी के फेसबुक वाल से साभार )

‘गेरुआ पानी ?’ – रेणु (1952)

10320414_10152604816444264_6252252772363785377_n

कोसी बाढ़ के इंतजार में … पूर्वी कोसी तटबंध ! ( चित्र – पुष्य मित्र ! फेसबुक वाल से साभार ) August 2014

” मूक पशुओं की आंखों में भयानक भविष्य की तस्वीर उतर आती है.” – रेणु  (1952)

cut to – 2014

मूक पशुओं की आंखों में भयानक भविष्य की तस्वीर 2014

मूक पशुओं की आंखों में भयानक भविष्य की तस्वीर 2014

कोसी बिहार 2015 Pic By - Ajay Kumar

कोसी बिहार 2015 Pic By – Ajay Kumar

मूक पशुओं का वर्तमान ( 2014 )

मूक पशुओं का वर्तमान ( 2014 )

” गेरुआ पानी. खतरे की घंटी. धुंधला भविष्य. मौत की छाया.”  – रेणु (1952)

cut to – 2014

The Kosi river flowing through the eastern Indan state of Bihar is the sustainer of millions of people through its rich fertile deposits along its banks and is considered as a godess among the masses. On August 18, Kosi, changed its course after breaking an embankment upstream in Nepal and flooded hundreds of villages in five districts of Bihar. Continuous rainfall in the days immediately after the break in embankment has led to one of the worst flooding seen in India in decades. About 3.5 million people have been affected by the floods. About one million people have been evacuated and sent to safer locations. More than 300,000 people are living in 260 relief camps set up by the provincial government. Crops in more than 2000 square km of land have been destroyed. The casualty figures for human beings as well as cattle is yet to be properly assessed. Incidentally, Kosi brings floods every year in the areas along its normal course of flow and is known as “Bihar’s River of Sorrow”. The people in this belt were considered to be among the poorest in India but after these floods they were literally left with nothing. /// A generl view of submerged villages from a national highway at Madhepura district, Bihar.

धुंधला भविष्य. मौत की छाया … SIX FEET UNDER- SORROW OF BIHAR

” आस-पास के गाँवों से दिन-रात लकड़ी और बांस काटने की आवाजें आतीं. घर-घर में खूंटे गड़ते, मचान बनते और घर की पुरानी ‘टाटियों’ की मरम्मत होने लगती, मानो किसी अखिल भारतीय संस्था के कॉन्फ्रेंस की तैयारी हो रही हो.” – रेणु (1952)

cut to – 2015

मानो किसी अखिल भारतीय संस्था के कॉन्फ्रेंस की तैयारी हो रही हो …

अखिल भारतीय संस्था के कॉन्फ्रेंस की तैयारी 2015 Pic By Ajay Kumar

अखिल भारतीय संस्था के कॉन्फ्रेंस की तैयारी 2015 Pic By Ajay Kumar

बांस काटने की आवाजें 2015 Pic By Ajay Kumar

बांस काटने की आवाजें 2015 Pic By Ajay Kumar

Pic By Ajay Kumar

Pic By Ajay Kumar

Pic By Ajay Kumar

Pic By Ajay Kumar

Pic By - Ajay Kumar

Pic By – Ajay Kumar

Pic By - Ajay Kumar

Pic By – Ajay Kumar

Pic By - Ajay Kumar

Pic By – Ajay Kumar

Pic By - Ajay Kumar

Pic By – Ajay Kumar

Pic By - Ajay Kumar

Pic By – Ajay Kumar

Pic By - Ajay Kumar

Pic By – Ajay Kumar

Pic By - Ajay Kumar

Pic By – Ajay Kumar

Pic By - Ajay Kumar

Pic By – Ajay Kumar

Pic By - Ajay Kumar

Pic By – Ajay Kumar

Pic By - Ajay Kumar

Pic By – Ajay Kumar

photo-HANNA-RUSZCZYK

10494563_10204640690842265_7906767157162135200_n” गेरुआ पानी ! गर्भवती औरतों के लिए मौत का पैगाम ! कोसी मैया गर्भवती औरतों को बर्दाश्त नहीं करती, पहले वेग में गर्भवतियों को ही समेटती है. हालांकि सैकड़ों निन्यानबे कोखें उन्हीं की मनौती के बाद भरती हैं. इसलिए ‘मैया’ के कोप को शांत करने के लिए इलाके के ‘सिद्ध ओझा, प्रसिद्ध गुणी’ चक्र सजा कर दिन-रात मंत्र जाप करते हैं. धूप-दीप, अड़हुल के फूल, सामने सजा हुआ ‘चक्र’, चक्र के चारों ओर बैठी हुई पीली-पीली गर्भवतियां. भक्तमंडली झांझ-मृदंग बजा कर गाती, ‘पहले बंदनियां बंदौ तोहरी चरनवां हे ! कोसी मैया !’ – रेणु (1952)

cut to – 2015

कोसी मैया गर्भवती औरतों को बर्दाश्त नहीं करती, पहले वेग में गर्भवतियों को ही समेटती है. हालांकि सैकड़ों निन्यानबे कोखें उन्हीं की मनौती के बाद भरती हैं.

Pic By - Ajay Kumar

Pic By – Ajay Kumar

11825544_1622564784684464_5778083809847454251_n

Pic By – Ajay Kumar

Pic By – Ajay Kumar

Pic By - Ajay Kumar

Pic By – Ajay Kumar

×æ´ ·¤è ××Ìæ Ñ ÚUçßßæÚU ·¤æð âèÌæÂéÚU ·ð¤ âæ‡ÇUæ ÿæð˜æ ·ð¤ »æðçÇU¸ØÙÂéÚUßæ »æ´ß ×ð´ °·¤ ×æ´ Ùð ¥ÂÙð ×æâê× ·¤æð ÕæɸU âð Õ¿æÙð ·ð¤ çÜ° ÕÙæØæ Õæ´â ·ð¤ ׿æÙ ÂÚU ¥æçàæØæÙæ ȤæðÅUæð Øæð»ðàæ ŸæèßæSÌß

कोसी मैया

” प्राइमरी स्कूल के पंडितजी पत्रकारिता का परिचय देते हैं. इस बार उनके संवाद को अवश्य स्थान मिलेगा, संपादकजी ! कोसी अंचल की त्रस्त जनता की पुकार. भीषण बाढ़ की आशंका. सरकार शीघ्र ध्यान दे. ”  – रेणु (1952)

cut to – 2014

भीषण बाढ़ की आशंका Pic By Ajay Kumar

भीषण बाढ़ की आशंका Pic By Ajay Kumar

पुष्यमित्र पत्रकारिता का परिचय देते हैं !इस बार उनके संवाद को अवश्य स्थान मिलेगा, संपादकजी !

कोसी अंचल की त्रस्त जनता की पुकार. – पुष्यमित्र 2014

" भीषण बाढ़ की आशंका. सरकार शीघ्र ध्यान दे." - Pushy Mitra

” भीषण बाढ़ की आशंका. सरकार शीघ्र ध्यान दे.” – Pushy Mitra

भीषण बाढ़ की आशंका. सरकार शीघ्र ध्यान दे, 2015 – अजय कुमार 

Ajay Kumar Clicking ''Kosi Bihar'' Pic - Rakesh kumar

Ajay Kumar Clicking ”Kosi Bihar” Pic – Rakesh kumar

Kosi Bihar Pic By Ajay Kumar

Kosi Bihar Pic By Ajay Kumar

0

” लेकिन जानवरों का नथुना फुला कर फों-फों करना, नंग-धड़ंग चरवाहे की घोषणा, सिद्ध ओझा जी का चक्र-पूजन और पंडितजी के भीषण त्रस्त आशंकापूर्ण संवाद का कोई शुभ फल नहीं निकलता. – रेणु (1952)

cut to – 2014

जानवरों का नथुना फुला कर फों-फों करना  Pic By Ajay Kumar

जानवरों का नथुना फुला कर फों-फों करना  Pic By Ajay Kumar

नंग-धड़ंग चरवाहे की घोषणा

नंग-धड़ंग चरवाहे की घोषणा

अखबारों के प्रथम पृष्ठ पर मोटी सुर्खियां 3 August 2014

अखबारों के प्रथम पृष्ठ पर मोटी सुर्खियां 3 August 2014

10509486_10152668585911967_82516288335509738_n

04bihar1

न कोसी का कोप शांत होता और न अखबारों के प्रथम पृष्ठ पर मोटी सुर्खियां ही लगतीं. और कोसी मैया के मन का मैल बढ़ता ही जाता. सबसे पहले किनारे का ठूंठा बबूल, फिर झरबेर की झाड़ी पानी में डूब जाती. इठलाती हुई लहरें खेतों और खलिहानों में खेलने लग जातीं. युगों से किनारे पर खड़ा ‘पुराना पीपल’ पानी मापता. कुदरती मीटर. लोग ताज्जुब करते हैं, पिछले साल दोनों ओर के कछार कट कर पानी में गिर गए, बूढ़ा बरगद और इमली के तीनों पेड़ कट कर बह गए, मगर पुराना पीपल आज भी खड़ा है. पुराना पीपल पहले भुताहा समझा जाता था. भुताहा, जिसकी डाल-डाल पर भूतों का बसेरा था, जिसके पत्ते-पत्ते पर प्रेतनियां नाचती थीं. अब यह ‘देवहा’ समझा जाता है. कोसी मैया भी जिसे नष्ट नहीं कर सकी. इसलिए पुराने पीपल के पत्तों पर मंत्र लिखकर ओझाजी ने जंत्र बना कर गाँव में बांट दिया है.” – रेणु (1952)

kosi-flood

kosi-flood

cut to – 2014

भीषण त्रस्त आशंकापूर्ण संवाद – Friday, August 08, 2014, पुष्यमित्र

Pic Kanahiya jee

Pic Kanahiya jee

” रात के सन्नाटे में छिन्नमस्ता कोसी अपने असली रूप में गरजती हुई आती हैं.” –  रेणु (1952)

cut to – 2014

तटबंध के अंदर नाव आता देख लोग मदद की आस लिए दौड़ पड़ते हैं ....... कुछ पार ले जाने के लिए तो कुछ राशन पानी के लिए ……… नवहट्टा प्रखंड में आज एक और गाँव " धोबियाही " का अस्तित्व मिट गया … यहाँ 40 परिवारों के कुल 250 लोगों की बस्ती बसी थी ....... सभी पीड़ित तटबंध पर शरण ले रहे हैं …… Pic Kanahiya jee

तटबंध के अंदर नाव आता देख लोग मदद की आस लिए दौड़ पड़ते हैं ……. कुछ पार ले जाने के लिए तो कुछ राशन पानी के लिए ……… नवहट्टा प्रखंड में आज एक और गाँव ” धोबियाही ” का अस्तित्व मिट गया … यहाँ 40 परिवारों के कुल 250 लोगों की बस्ती बसी थी ……. सभी पीड़ित तटबंध पर शरण ले रहे हैं …… Pic Kanahiya jee

” आ गई …. मैया आ गई. जय, कोसी महारानी की जय …. विक्षुब्ध उत्ताल तरंगों और लहरों का तांडव नृत्य …, मैया की जय-जयकार हाहाकार में बदल जाती है. ” –  रेणु (1952)

cut to – 2014

आ गई …. मैया आ गई. जय, कोसी महारानी की जय …

0-1

महिषी प्रखंड के 11 पंचायत पूर्वी और पश्चिमी कोशी तटबंध के मध्य अवस्थित है। यह तस्वीर ऐना पंचायत के सिसौनी और झाड़ा गाँव की है। कोशी का पानी प्रत्येक घरों में है। तस्वीरों को देख कर स्थिति का आकलन किया जा सकता है। ‪#‎NDRF‬ कोलकाता दल के साथ गए श्री कुंदन कुमार मिश्रा [ Kundan Mishra ] से साभार

महिषी प्रखंड के 11 पंचायत पूर्वी और पश्चिमी कोशी तटबंध के मध्य अवस्थित है। यह तस्वीर ऐना पंचायत के सिसौनी और झाड़ा गाँव की है। कोशी का पानी प्रत्येक घरों में है। तस्वीरों को देख कर स्थिति का आकलन किया जा सकता है। ‪#‎NDRF‬ कोलकाता दल के साथ गए श्री कुंदन कुमार मिश्रा [ Kundan Mishra ] से साभार

बाढ़ में ऐसे दिन गुजारने की नौबत आ जाती है. Pic By Mihir Sinha

बाढ़ में ऐसे दिन गुजारने की नौबत आ जाती है. Pic By Mihir Sinha

इंसान, पशु, पक्षियों का सह रुदन. कोसी की गड़गड़ाहट, डूबते और बहते हुए प्राणियों की दर्द भरी पुकार रफ्ता-रफ्ता तेज होती जाती है मगर आसमान बच्चों का बैलून नहीं जो यूं ही बात-बात में फट जाए. –  रेणु  (1952)

cut to – 2014

राजगिद्ध पंखों को तौल कर उड़ता है. चक्कर काटता हुआ आसमान में बहुत दूर चला जाता है, फिर चक्कर काटने लगता है …

‘राजगिद्ध’ 2014

‘राजगिद्ध’ 2014

सुबह को पुराने पीपल की फुनगी पर बैठा हुआ ‘राजगिद्ध’ अपनी व्यापक दृश्टि से देखता है और पैमाइश करता है. पानी … पानी … पानी. ओर, इस बार तो सबसे ऊँचा गांव बलुआटोली भी डूब गया. उंह. पीपल की फुनगी पर बैठ कर जल के फैलाव का अंदाज लगाना असंभव. राजगिद्ध पंखों को तौल कर उड़ता है. चक्कर काटता हुआ आसमान में बहुत दूर चला जाता है, फिर चक्कर काटने लगता है, मानो कोई रिपोर्टर कोसी की विभीषिका का आँखों देखा हाल ब्रॉडकास्ट करने के लिए हवाई जहाज में उड़ रहा है.  – रेणु  (1952)

cut to – 2014

हम अभी सहरसा जिले के उत्तरी छोर पर उड़ रहे हैं …

नितीश कुमार 2014

नितीश कुमार 2014

पानी… पानी ….. जहां तक निगाहें जाती हैं, पानी ही पानी. – रेणु  (1952)

हम अभी सहरसा जिले के उत्तरी छोर पर उड़ रहे हैं. नीचे धरती पर कहीं भी हरियाली नजर नहीं आती. –  रेणु (1952)

cut to – 2014

नीचे धरती पर कहीं भी हरियाली नजर नहीं आती

नीचे धरती पर कहीं भी हरियाली नजर नहीं आती

हां वह धब्बा.. धब्बा नहीं … आम का बाग है जो यहां से ‘चिड़िया का नहला’ सा मालूम होता है. – रेणु (1952)

cut to – 2014

चिड़िया का नहला

biharfl

B-29, PTN-240801 - AUGUST 25, 2008 - Saharsa: People reach for safer places in the flood affected area of Saharsa, near the river Koshi in North Bihar. PTI Photo

KRISHNA_PHUYALL

24-17-1402998772-08-1378615892-22-maner-flood

हम और नीचे जा रहे हैं … और नीचे … पेड़ों पर भी लोग लदे-फदे नजर आ रहे हैं. – रेणु  (1952)

cut to – 2014

Flood in Kosi 2014

Flood in Kosi 2014

कुछ किश्तियां … शायद रिलीफ की हैं.. और वहां रेंगता हुआ क्या आगे बढ़ रहा है … अजगर… नहीं, पानी बढ़ रहा है … हां … पानी ही है … बांध पर लोगों को बड़ा भरोसा था शायद. –  रेणु (1952)

cut to – 2014

पानी बढ़ रहा है

पानी बढ़ रहा है

अजगर... नहीं, पानी बढ़ रहा है 2014

अजगर… नहीं, पानी बढ़ रहा है 2014

बांध पर लोगों को बड़ा भरोसा था शायद

बांध पर लोगों को बड़ा भरोसा था शायद

अभी गांव में भगदड़ मची हुई है … सांप को देखकर चिड़ियों की जो हालत होती हैं … सुखसर नदी का पानी अब गांवों में घुस रहा है … वह डूबा .. गांव…. हरे भरे खेत सफेद हो गए… अब हम पूर्णिया और सहरसा जिले के बॉर्डर पर हैं … पानी-पानी-पानी… बहते हुए झोंपड़े… और वह ?… शायद लाशें हैं… तो अब मुर्दे फूल कर पानी पर तैरने लगे…! – रेणु  (1952)

cut to – 2014

अभी गांव में भगदड़ मची हुई है 2014

अभी गांव में भगदड़ मची हुई है 2014

पानी - पानी - पानी ...

पानी – पानी – पानी …

दुर्गंधमंसरुधिरमेदागृद्धस्यालस्वनं ! – रेणु  (1952)

राजगिद्ध की आंखें खुशी से चमक उठती हैं. कोसी की निर्मल धारा में गंदले पानी की गंध को पहले-पहले सूंघ कर भीषण भविष्य की कल्पना से भयभीत पशुओं के झुंड शायद बह गए होंगे. गेरुए पानी की परीक्षा करके घोषणा करने वाला बालक किसी पेड़ की डाली पर बैठ कर पत्तियां चबा रहा होगा और पत्रकार पंडितजी अपने टूटे हुए मचान पर कराहती हुई आसन्नप्रसूता पत्नी के साथ रिलीफ की नावों का इंतजार कर रहे होंगे.- रेणु (1952) 

cut to – 2014

अनाज, कपड़े, तेल, दवा

download-1

रिलीफ

रिलीफ

Kosi ‘रिलीफ’ 2014

Kosi ‘रिलीफ’ 2014

और ‘रिलीफ’ आती है. खाली नावों की रिलीफ, लाइफबोट. फिर रिलीफ की चीजों से भरी हुई नावें … अनाज, कपड़े, तेल, दवा. ऊंची जगहों पर बांस-फूस के झोंपड़ों, टेंटों के कैंप. – रेणु  (1952)

cut to – 2014

2014

2014

कोई नई बात नहीं.  – रेणु  (1952)

cut to – 2014

कोई नई बात नहीं

कोई नई बात नहीं

यह तो हर साल की बात है.  – रेणु  (1952)

cut to – 2014

यह तो हर साल की बात है.

यह तो हर साल की बात है.

800px-NDRF_in_Bihar_Flood_2

हर साल बाढ़ आती है-बर्बादियां लेकर.  – रेणु  (1952)

cut to – 2014

10460273_10204656230190739_4642087091994657875_n

रिलीफें आती हैं, सहायता लेकर.  – रेणु  (1952)

cut to – 2014

images-6

कोई नई बात नहीं 2014

कोई नई बात नहीं.  – रेणु  (1952)

cut to – 2014

कोई नई बात नहीं

कोई नई बात नहीं

पानी घटता है.  – रेणु  (1952)

cut to – 2014

यह तो हर साल की बात है. Flood in Kosi river

यह तो हर साल की बात है. Flood in Kosi river

महीनों डूबी हुई धरती. धरती तो नहीं, धरती की लाश बाहर निकलती हैं. – रेणु  (1952)

cut to – 2014

Pic By Pushy Mitra

Pic By Pushy Mitra

धरती की लाश पर लड़खड़ाती हुई जिंदे नरकंकालों की टोली फिर से अपनी दुनिया बसाने को आगे बढ़ती है. – रेणु  (1952)

cut to – 2014

फिर से अपनी दुनिया बसाने को आगे बढ़ती है

Pic By Ajay Kumar

Pic By Ajay Kumar

मेरा घर यहां था… वहां तुम्हारा … पुराना पीपल मेरे घर के ठीक सामने था… देखो. न मानते हो तो नक्शा लाओ… अमीन बुलाओ, वर्ना फौजदारी हो जाएगी….. फिर रोज वही पुराने किस्से. और जमीन सूखने नहीं पाती कि बीमारियों की बाढ़ मौत की नई-नई सूरतें लेकर आ जाती है. – रेणु  (1952)

cut to – 2014

मेरा घर यहां था... वहां तुम्हारा Pic By Ajay Kumar

मेरा घर यहां था… वहां तुम्हारा Pic By Ajay Kumar

Pic By Ajay Kumar

Pic By Ajay Kumar

Pic By Ajay Kumar

Pic By Ajay Kumar

नौगछिया के सोहदा मकनपुर गांव में कोसी के बाढ़ की कुछ जीवंत तसवीरें . तसवीरें आज की है. गांव एक बार फिर कोसी में समा गया है. 1984 में भी इसी तरह यह गांव कोसी में समा गया था. 18 August 2014 Pic by Mihir Sinha

नौगछिया के सोहदा मकनपुर गांव में कोसी के बाढ़ की कुछ जीवंत तसवीरें . तसवीरें आज की है. गांव एक बार फिर कोसी में समा गया है. 1984 में भी इसी तरह यह गांव कोसी में समा गया था. 18 August 2014 Pic by Mihir Sinha

मलेरिया, काला-आजार, हैजा, चेचक, निमोनिया, टायफॉइड और कोई नई बीमारी जिसे कोई डाक्टर समझ नहीं पाते. चीख, कराह, छटपटाते और दम तोड़ते हुए अधर में इंसान. – रेणु  (1952)

cut to – 2014

'अधर में' Kosi river at Kusaha village 2014

‘अधर में’ Kosi river at Kusaha village 2014

मलेरिया, काला-आजार, हैजा, चेचक, निमोनिया, टायफॉइड 2014

मलेरिया, काला-आजार, हैजा, चेचक, निमोनिया, टायफॉइड 2014

पुराने पीपल की डालियों में ‘घंटियां बांधने की जगह नहीं मिलती  – रेणु  (1952)

cut to – 2014

पुराने पीपल की डालियों में ‘घंटियां बांधने की जगह नहीं मिलती.’  Pic By Pushy Mitra

पुराने पीपल की डालियों में ‘घंटियां बांधने की जगह नहीं मिलती.’  Pic By Pushy Mitra

धरती की लाश पर बसने वाले अजीबों-गरीब बाशिंदे. – रेणु  (1952)

cut to – 2015

धरती की लाश पर बसने वाले अजीबों-गरीब बाशिंदे

Pic By Ajay Kumar

Pic By Ajay Kumar

बसने वाले Pic By Ajay Kumar

बसने वाले Pic By Ajay Kumar

अजीबों-गरीब बाशिंदे. 2015 Pic By Ajay Kumar

अजीबों-गरीब बाशिंदे. 2015 Pic By Ajay Kumar

बाशिंदे 2015 Pic By Ajay Kumar

बाशिंदे 2015 Pic By Ajay Kumar

अजीबों-गरीब बाशिंदे Pic Ajay Kumar

अजीबों-गरीब बाशिंदे Pic Ajay Kumar

कोसी का पदचिह्न Pic By Ajay Kumar

कोसी का पदचिह्न Pic By Ajay Kumar

धरती की लाश पर 2015 Pic By Ajay Kumar

धरती की लाश पर 2015 Pic By Ajay Kumar

बसने वाले 2015 Pic By Ajay Kumar

बसने वाले 2015 Pic By Ajay Kumar

अजीबों-गरीब बाशिंदे 2015 Pic By Ajay Kumar

अजीबों-गरीब बाशिंदे 2015 Pic By Ajay Kumar

2015 Pic By Ajay Kumar

2015 Pic By Ajay Kumar

हां, धरती की लाश जिसे कोसी का पदचिह्न कह लीजिए. एक बार जो धरती कोसी की बाढ़ में डूबी, वो मर जाती है. – रेणु  (1952)

cut to – 2014

एक बार जो धरती कोसी की बाढ़ में डूबी, वो मर जाती है.

एक बार जो धरती कोसी की बाढ़ में डूबी, वो मर जाती है.

सुजला-सुफला धरती वंध्या हो जाती है. सोना उपजाने वाली मिट्टी बालू का ढेर बन कर रह जाती है. – रेणु  (1952)

सफेद बालू, सफेद कफन की तरह. – रेणु  (1952)

cut to – 2014

यह तटबंध की हालत है जो कोसी की तबाही से बचाने के लिए बनायी गयी है, जिसकी सुरक्षा के लिए हर साल करोड़ों खर्च होते हैं.

सुजला-सुफला धरती वंध्या हो जाती है. सफेद बालू, सफेद कफन की तरह.

सुजला-सुफला धरती वंध्या हो जाती है. सफेद बालू, सफेद कफन की तरह.

सोना उपजाने वाली मिट्टी बालू का ढेर बन कर रह जाती है.

सोना उपजाने वाली मिट्टी बालू का ढेर बन कर रह जाती है.

तटबंध की हालत Pic By Pushy Mitra

तटबंध की हालत Pic By Pushy Mitra

पूर्णिया जिले में सिमराहा से लेकर कटिहार तक की वीरान धरती, कफन से ढंकी हुई लाखों एकड़ धरती की लाश, जिस पर दूब भी नहीं पनप पाती है, आज से करीब सौ वर्ष पहले मिस्टर बुकानन ने अपनी रिपोर्ट में जिस भूभाग को जिले का मशहूर उपजाऊ हिस्सा बतलाया है. – रेणु  (1952)

cut to – 2015

न मालूम कोसी मैया कब अपने मायके पहुंचेगी …

Pic By Ajay Kumar 2015

Pic By Ajay Kumar 2015

न मालूम कोसी मैया कब अपने मायके पहुंचेगी. जब तक मायके नहीं पहुंचती, मैया का गुस्सा शांत नहीं होता. पूरब मुलुक बंगाल से अपने ससुराल से रूठ कर, झगड़ कर, मैया पश्चिम की ओर अपने मायके जा रही है. रोती-धोती, सिर पीटती हुई जा रही है और आंसुओं से नदी-नाले बनते जाते हैं. सफेद बालू पर उनके पदचिह्न हैं. एक बार ससुराल से निकली हुई कलंकिनी वधू फिर ससुराल न आ सके, इसलिए उसकी झगड़ालू सास, बबूल, झरबेर, कास, घास, पटेर, झौआ, झलास, कंटैया, सेमल वगैरह जंगली और कुकाठों से राह बंद करती जाती है. न मालूम कोसी मैया कब अपने मायके पहुंचेगी ! मैया के मायके पहुंचने की उम्मीद में कोसी अंचल की जनता बैठी हुई है. क्योंकि गुस्सा शांत होने पर जब वह उलट कर देखेगी तो धरती फिर जिंदा हो जाएगी, फिर सोने की वर्षा होगी ! बस, यही एक आशा है जिस पर वे मर-मर कर जिए जाते हैं. कोसी अंचल की जनता के दिलों में कोई उम्मीद नहीं बस सकती. मरी हुई धरती पर बसने वाले इंसान जिनके एहसास मर चुके है, जिनकी नस्ल में घुन लग गए हैं और जिनकी आशा में काई रंग नहीं. कास के फूलों की तरह सफेद और कमजोर उनकी आशा, जो हवा के हलके झोंके से ही बिखर कर उड़ने लगते हैं. विश्वास जमने भी नहीं पाता कि कोसी बहा ले जाती है.  – रेणु  (1952)

cut to – 2015

विश्वास जमने भी नहीं पाता कि कोसी बहा ले जाती है

Pic By Ajay Kumar 2015

Pic By Ajay Kumar 2015

Pic By Ajay Kumar 2015

Pic By Ajay Kumar 2015

Pic By Ajay Kumar 2015

Pic By Ajay Kumar 2015

Pic By Ajay Kumar 2015

Pic By Ajay Kumar 2015

Pic By Ajay Kumar 2015

Pic By Ajay Kumar 2015

12109254_1642643259343283_846351565414686663_n

cut to – 2014

10bhrflood_174540

Pic By Ajay Kumar

Pic By Ajay Kumar

Pic By Ajay Kumar

Pic By Ajay Kumar

Kosi Bihar 2015 Pic By Ajay Kumar

Kosi Bihar 2015 Pic By Ajay Kumar

साल में छह महीने बाढ़, महामारी, बीमारी और मौत से लड़ने के बाद बाकी छह महीनों में दर्जनों पर्व और उत्सव मनाते हैं. पर्व, मेले, नाच, तमाशे ! सांप पूजा से लेकर सामां-चकेवा, पक्षियों की पूजा, दर्द-भरे गीतों से भरे हुए उत्सव ! जी खोल कर गा लो, न जाने अगले साल क्या हो. इसलिए कोसी अंचल में बड़े-बड़े मेले लगते हैं. सिर्फ पौष-पूर्णिमा में कोसी के किनारे, मरी हुई कोसी की सैकड़ों धाराओं के किनारे भी सौ से ज्यादा मेले लगते हैं. कोसी नहान मेला ! और इन मेलों में पीड़ित प्राणियों की भूखी आत्माओं को कोई स्पष्ट देख सकता है. काला-आजार में जिसके चारों जवान बेटे मर गए, उस बूढ़े किसान को देखिए, कार्निवल के अड्डे पर चार आने के टिकट में ही ग्रामोफोन जीत लेने के लिए बाजी लगाता है, वह जवान विधवा कलेजे के दाग को ढंकने के लिए पैरासूट का ब्लाउज खरीद कर कितना खुश है ! इलाके का मशहूर गोपाल अपनी बची हुई अकेली बुढ़िया गाय को बेच कर सपरिवार नौटंकी देख रहा है …. लल्लन बाई गा रही है, ‘चलती बेरिया नजर भरके देख ले.’ आकाश में पौष-पूर्णिमा का सुनहला चांद मुस्करा कर उग आया, कोसी भक्त जनता डुबकी लगाती है, ‘जय, कोसी मैया की जय !’   रेणु  (1952)

cut to – 2015

जय, कोसी मैया की जय

‘जय, कोसी मैया की जय ’ Pic By Ajay Kumar

‘जय, कोसी मैया की जय ’ Pic By Ajay Kumar

Pic By Ajay Kumar

Pic By Ajay Kumar

पर्व 2015 Pic By Ajay Kumar

पर्व 2015 Pic By Ajay Kumar

Pic By Ajay Kumar

Pic By Ajay Kumar

‘जय, कोसी मैया की जय !’ 2015 Pic By Ajay Kumar

‘जय, कोसी मैया की जय !’ 2015 Pic By Ajay Kumar

मेला Pic By Ajay Kumar

मेला Pic By Ajay Kumar

Pic By Ajay Kumar

Pic By Ajay Kumar

Pic By Ajay Kumar

Pic By Ajay Kumar

Pic By Ajay Kumar

Pic By Ajay Kumar

99th BIHAR DIWAS KI TAYARI

99th BIHAR DIWAS KI TAYARI

और सफेद बालुओं की ढेर में डेग भर की पतली-सी सिमटी, सिकुड़ी धारा ! कोसी मैया चुपचाप बहती जाती है. डायन ! – रेणु  (1952)

cut to – 2014

कोसी मैया चुपचाप बहती जाती है. डायन …

और सफेद बालुओं की ढेर में डेग भर की पतली-सी सिमटी, सिकुड़ी धारा !

और सफेद बालुओं की ढेर में डेग भर की पतली-सी सिमटी, सिकुड़ी धारा !

कोसी मैया चुपचाप बहती जाती है. डायन !

कोसी मैया चुपचाप बहती जाती है. डायन !

Pic By Ajay Kumar

Pic By Ajay Kumar

'डायन कोसी'

‘डायन कोसी’

Illustration आभार : Anirban Bora

Illustration आभार : Anirban Bora

cut to – 2015

जो सूचनाएं हैं, उसके हिसाब से नेपाल में सिंधुपाल चौक के पास जहां नदी बाधित है, वहां अब और विस्फोट नहीं किये जायेंगे, पहले से बने सूराख को ही बड़ा किया जायेगा. जा रहा होगा… इससे पानी नियंत्रित तरीके से भारतीय इलाकों में पहुंचेगा. सरकार के आश्वस्त होने की यही बड़ी वजह है …

BIHAR, ONE MONTH LATER

BIHAR, ONE MONTH LATER

जानकार बता रहे हैं कि भारतीय सीमा मेंजो तटबंध केइलाके हैं वो कमोबेस सुरक्षित हैं. मगर नेपाल की सीमा में तटबंध को लेकर बहुत आश्वस्त नहीं रहा जा सकता. इसलिए सरकार फिलहाल पूरी तरह से ऐहतियात नहीं हटा रही. फिर भी यह माना जा सकता है कि बहुत हद तक खतरा टल गया है…

कमोबेस सुरक्षित 'KOSI WOMAN'

कमोबेस सुरक्षित ‘KOSI WOMAN’

बिहार सरकार ने कोसी की चाल को देखते हुए 10 में से तीन जिलों में लोगों को विस्‍थापित करने का काम बंद कर दिया है। इन जिलों में लोगों को राहत कैंप से वापस जाने को कहा है। बाकी बचे जिलों में नये कैंप बनाने से रोक दिया गया है। केवल सुपौल, सहरसा और मधेपुरा में ही खतरा संभावित रहा है। बाकी जिलों में राहतकर्मी तैनात रहेंगे, एनडीआरएफ की टीमें क्षेत्र में तैनात रहेंगी।

Israeli-born Sephi Bergerson’s Photo at Kusheshwar Asthan '2012, no electricity.

Israeli-born Sephi Bergerson’s Photo at Kusheshwar Asthan ‘2012, no electricity.

रेणु को सुनना किसी टाइम मशीन के जरिए बीते समय में प्रवेश करने जैसा है | सम्‍भवत: उनकी यही एक मात्र रि‍कार्डिंग उपलब्‍ध है

Kosi # 1.

Vishaal Nityanand ने कोसी तटबंध के मसले पर स्तब्ध करने वाली फिल्म बनायी है. उन्होंने मुझसे फिल्म का लिंक शेयर किया है . आधे घंटे की इस फिल्म में उन्होंने कोसी तटबंध से जुड़े उन तमाम मसलों को संवेदनशील तरीके से सामने लाने की कोशिश की है, जिसका दंश पिछले साठ सालों से लाखों लोग झेल रहे हैं. अगर आप कोसी के दुख दर्द को समझना चाहते हैं और आपके पास आधे धंटे का वक्त है तो इस फिल्म को जरूर देखें.

Kosi # 2

Kosi # 3

Kosi # 4

रेणु रचित ‘डायन कोसी’ को मैं अपने स्कूल के दिनों से पढ़ रहा हूँ ! डायन कोसी को रेणु का सबसे चर्चित रिपोर्ताज माना गया है !

Ajay Kumar. Photo Journalist Kosi Bihar

Ajay Kumar. Photo Journalist Kosi Bihar

इस रिपोर्ताज को अपने संकलित चित्रों से सजाने की मेरी परिकल्पना फेसबुक पर अजय कुमार के कोसी क्षेत्र के चित्रों के बिना संभव नहीं होता !सारे जीवंत फोटो Ajay जी ने खींचे हैं जो इस क्षेत्र को गहराई से समझते हैं |

Pushya Mitra Journalist at Prabhat Khabar, Patna

Pushya Mitra Journalist at Prabhat Khabar, Patna

पत्रकार Pushya Mitra की किताब ‘फ.र.कि.या.’ बिहार के कोसी के एक खास इलाके की मुकम्मल पड़ताल है | जिसके साथ राजा टोडरमल ने भी फरक किया | आज के हुक्मरान भी फरक कर रहे हैं | इसी फरक को अपनी किताब ‘फ.र.कि.या.’ के जरिए जानने की कोशिश की है लेखक ने | कोसी बांध के अन्दर और बाहर बसे लोगों का इलाका |और फेसबुक पर ही पुष्य मित्र की कोसी रिपोर्टिंग के लिए आभारी हूँ !

आश्चर्य किन्तु सत्य है कि रेणु का रिपोर्ताज बासठ साल बाद भी समसामयिक है ! आज राजनितिक चहल – पहल के बीच अपने राज्य बिहार के दुर्भाग्य पर और कुछ कहने की इच्छा नहीं होती …

Continue reading