काला हास्य सूँ – सूँ, कूँ – कूँ

रेडिओ दिवस पर
देश में आज
हर फ्रीक्वेंसी में
सूँ – सूँ, कूँ – कूँ क्यों है

जे एन यू टूँ उऊऊँ – टूँ उऊऊँ
कश्मीर किर्र किर्र किर्र किर्र
राजनीति टी – ईईईई टी – ईईईई
नेता टाआआ – टाआआ टीईईईई
टीईईईई – टीईईईई
टूँ उऊऊँ – टूँ उऊऊँ
सूँ – सूँ, कूँ – कूँ

हर फ्रीक्वेंसी में
सूँ – सूँ, कूँ – कूँ क्यों है

आज रेडियो तरंग
में इतने रंग क्यों है
हर फ्रीक्वेंसी में
सूँ – सूँ, कूँ – कूँ क्यों है

शासन सन सन सुउउउउउ
कानून टूँ टूँ टूँ टूँ टूँ टूँ
बहुमत खट्ट खट्ट खट्ट खट्ट
देशभक्ति टी – ईईईई टी – ईईईई
टीईईईई – टीईईईई
टूँ उऊऊँ – टूँ उऊऊँ
सूँ – सूँ, कूँ – कूँ

हर फ्रीक्वेंसी में
सूँ – सूँ, कूँ – कूँ क्यों है

रेडियो के पास
आज की रात
क्यों नहीं है
मेरे मन की बात ?

हाहाकार

सुनो पुरुष, योनि का कोई पिछला दरवाज़ा नहीं होता ! तुम स्त्री से आँख मिलाने अगर उसके सामने नहीं आ सकते तो जा के अपने लिंग में अपना मुंह छुपा लो ! अपने पथरीले काले ह्रदय को अगर उसके लाल सिन्दूर से ढंकना चाहते हो तो याद रखो स्त्री के पांच दिन का बहता हुआ रक्त स्त्राव तुम्हे नंगा कर के बहा देगा ! शनि के पत्थर पर तेल चढ़ा कर तुम स्त्री को शनि से दूर नहीं रख सकते ! फेंका हुआ तेल तुम्हे पवित्र नहीं रख सकता ! स्त्री का ह्रदय स्त्री की बपौती है तुम्हारी माँ की आँख नहीं ..