मुंबई बदन ( मनुष्य और कैमरे के लड़ाई की फैंटसी / एक फंतासी उपन्यासिका )

सोचो मत बस पढ़ने का आनंद लो #मुम्बईबदन

1.

मुम्बई बदन में आने का सबसे अच्छा समय बरसात के दिनों में ही है ! दूर तक फैली घाटी में हरियाली और पानी के झरने देखकर तन मन में थ्रिल और रोमांस बहने लगता है ! मुम्बई बदन में समतल स्थान के आगे तारों की बाड़ लगाई गई है, ताकि लोग इससे आगे न जाएँ ! मुम्बई बदन की सहेलियाँ और दोस्त अलग अलग शहरों से आते हैं ! सब मिल कर मॉल जाने का प्रोग्राम बना लेते हैं ! मुम्बई बदन में रात के बारह बजे रोज़ केक काट कर जन्मदिन मनाया जाता है ! मुम्बई बदन के हाई – वे पर युवाओं के झुण्ड मौज मस्ती का सारा सामान साथ लेकर आते हैं ! मुम्बई बदन के हर स्पॉट पर मेला सा लगा रहता है ! मुम्बई बदन में रह रह कर बारिश होती है ! चाय, भुट्टे, कॉफ़ी और कई स्नैक्स के अलावा बियर और शराब भी मिलती है ! मुम्बई बदन मेंं वृन्दावन के बंदर नही हैं ! मुम्बई बदन मेंं कहीं छेड़छाड़ नहीं है ! मुम्बई बदन की गुफाऐं बड़ी रहस्यमयी हैं ! मुम्बई बदन में थोड़ी थोड़ी देर में दृश्य बदलता रहता है ! मुम्बई बदन मे कैमरा ले जाना मना है ! 

2.

हर दिल मुम्बई बदन की यात्रा पर है ! सबके अंदर एक मुम्बई बदन है ! मुम्बई को लेकर अपनी एक फैंटसी ! अपनी अपनी गतिविधियों और कल्पनाओं का निर्भय लोक जिसमे सब अपनी तरह से रहने के लिए आज़ाद हैं ! मुम्बई बदन वो ललक है जो सबके अंदर किसी कोने में छुपी बैठी है, और बार बार यहाँ अाने के लिए मजबूर करती है ! मुम्बई बदन इश्क़िया है ! मुम्बई बदन की सुबह चाहत की चहचहाट से भर जाती है, और नज़ारा रंगीन हो जाता है ! मुम्बई बदन मे होती है सपनों की दोपहर ! मुम्बई बदन स्वतंत्र है, और मुम्बई बदन का स्पर्श सबके लिए फ्री है ! मुम्बई बदन के खून में व्यापार है, इसलिए कैमरा मुम्बई बदन के डिजिटल इतिहास को जन्म देना चाहता है, और मुम्बई बदन का एक एलबम बनाना चाहता है पर कैमरे के अंदर मुम्बई बदन का दम घुटता है ! मुम्बई बदन के दुश्मन कैमरे के अंदर रहते हैं, जो मुम्बई को इमेज के ज़ंकयार्ड मे बदलने के लिए दिन रात फ़्लैश होते रहते हैं ! उनका काम मुम्बई बदन को कामुक बनाना है ! आत्म प्रचार और निजी जीवन पर टिप्पणी करने की कैमरे को बीमारी है ! इसी वज़ह से मुम्बई बदन मे कैमरा ले जाना मना है ! 

3.

मुम्बई बदन की बाहों मेंं तेरह साल की एक नग्न लड़की है, और लड़की के बाहों मे चौदह साल का एक नग्न लड़का ! दोनों अपनी धमनियों मे बह रही यौवन के नशे मेंं डूबे हुए हैं ! सहसा कैमरा उनकी तस्वीर ले लेता है ! कैमरे की वज़ह से जो भी तस्वीर हमारे सामने उभर रही है उसे हम सही या गलत की कैटेगरी में नहीं रख सकते ! सेक्स एक नॉर्मल प्रक्रिया है ! शरीर की जरूरत है ! लेकिन कैमरा जब जरूरत की उल्टी तस्वीर पेश करने लगे तो मुम्बई बदन मे चिंगारियाँ दौड़ने लगती हैं ! मुम्बई बदन का देह राग सिर्फ़ क्लिक, क्लिक, क्लिक नही हो सकता ! मुम्बई बदन मे सेक्स को लेकर किशोरों के मन में कैसे बदलाव हो रहे हैं, इसकी बानगी कैमरा ठीक से नही दे पा रहा है ! कैमरा मुम्बई बदन को अश्लील बना रहा है ! मुम्बई बदन को लगता है कैमरे की वज़ह से कैरम बोर्ड सेक्स हो गया है ! कैमरे की वज़ह से योग सेक्स हो गया है ! कैमरे की वज़ह से कबड्डी सेक्स हो गया है, कुश्ती सेक्स हो गया है ! कैमरे की वज़ह से सेक्स अब सिर्फ हेल्लो है ! मुम्बई बदन कैमरे की इस हरकत से चुप नही बैठेगा ! ध्वनि और क्रोध से भरा हुआ मुम्बई बदन खाली पार्किंग, होटल के कमरे, रेस्तरां, शौचालय, सार्वजनिक पार्कों, फिल्म हॉल से कैमरे को हटा लेना चाहता है ! कैमरा झूठ नहीं बोलता पर छवि बनाने के मामले मे मुम्बई बदन का एंगल अलग है …

मुम्बई बदन मे अवसर का कारोबार है #मुम्बईबदन

4.

मैं समय से मुम्बई बदन पहुँच गया था ! दस मिनट मे मुझे कपड़े बदल कर रोबोट बनना था और मुम्बई बदन के बच्चों का मनोरंजन करना था ! मुम्बई बदन के बच्चे स्मार्टफ़ोन जैसे हैं ! स्मार्टफ़ोन की वज़ह से लूडो, साँप – सीढ़ी, कैरम, शतरंज, मॉल मे सब बहरूपिया की नौकरी कर रहे थे ! मुम्बई बदन में टेक्नोलॉजी और मैनेजमेंट का आतंक है इसलिए हर काम समय से होता है ! मुम्बई बदन के बिग बाजार मेंं अाज मेहनत के पसीने का शो लगा था ! शोरूम मेंं छोटी छोटी हज़ारों शीशियों मेंं देश के किसानों का पसीना एक्ज़बिट किया गया था ! एक्ज़बिशन देश भर के अलग अलग इलाकों के मेहनती किसानों के पसीने का था ! शो की सजावट मेंं रंग बिरंगी शीशियों का इस्तेमाल भी हुअा था ! उन रंगीन शीशियों मे कई ब्रांडेड शराब, इत्र, तेल, टॉनिक, नेल पॉलिश भरे हुए थे और लोग उसे खरीद रहे थे ! दूध-सा धुला लिबास पहने पब्लिक मेहनत का पसीना देखने अाती और महंगी शराब और इत्र की छोटी छोटी शीशियां याद मेंं खरीद लेती ! मानव पसीने को बाज़ार मेंं प्रदर्शित करके एक्सक्लूसिव बनाया जा रहा था ! मेहनत का पसीना काम आता है ये सब जानते थे पर मेहनत के पसीने के शो से पैसा कमाया जा सकता है मुम्बई बदन का ये आईडिया नया था !

5.

ये प्रदर्शनी नहीं तमाशा था ! पर सेल्स वालों की नज़र मेंं सफ़ल था ! एक्ज़बिशन हॉल मेंं पसीने की गंध वाला हुक्का भी था जिसे यंग लड़के लड़कियाँ गुडग़ुड़ा रहे थे ! लकी ड्रा मेंं फ्री वाउचर पाने वालों को मेहनत के पसीने को सूंघने की लक्ज़री भी थी ! प्रदर्शनी के दौरान शोरूम से कई शीशियों की चोरी हो गयी ! चोरबाज़ारी मे भी पसीने का वैल्यू बचा था ये सोच के एक्ज़बिशन लगाने वाले प्रायोजकों को बहुत सुकून मिला ! प्रायोजक शीशियों की चोरी को शो की सफलता मान रहे थे ! शो की सफलता को देख कर देश भर मे मेहनत के पसीने को जमा करने की एजेंसियां चल पड़ीं ! विज्ञापनों मेंं साफ़ लिखा था खेतों मे मेहनत करते हुए सेल्फ़ी लीजिए और अपने पसीने की शीशी लकी ड्रा के लिए महानगरों के बाज़ार मेंं दिए गए एड्रेस पर भेज दीजिए ! कुछ लोगोंं ने जिम जा कर बड़ी बड़ी बोतलों मेंं पसीना भर के पता नहीं क्यों देश के प्रधान मंत्री के कार्यालय मे भेज दिया ! मुम्बई बदन के कई स्कूल बच्चों को मेहनत के पसीने का शो दिखाने ला रहे थे, जिसे कोई चॉकलेट कंपनी प्रायोजित कर रही थी ! मीडिया इंडस्ट्री में काम करने वाले भी मेहनत के पसीने के शो मे दिखना चाह रहे थे ! मॉल मेंं किराने का सामान खरीदने पहुंचे लोग मेहनत का पसीना देखने ज़रूर रुकते थे ! शोशल साइट पर मुम्बई बदन के शोरूम से लिए गए मेहनत के पसीने की शीशियों के साथ सेल्फ़ी की बाढ़ लग गयी !

6.

अगले दिन जब मैं मॉल पहुँचा तो चारों तरफ़ अफ़रा तफ़री मची हुई थी ! मूसला धार बारिश की वज़ह से रात मेंं कई घंटों के लिए मॉल की बिज़ली चली गयी और बिजली अाने के बाद कोई स्टाफ एक्ज़बिशन हॉल का ए सी अॉ्न करना भूल गया था ! सुबह तक एक्ज़बिशन हॉल दुर्गंध से भर गया ! जिस वातानुकूलित पसीने से प्रायोजक पैसे कमा रहे थे अब उन्हें उसी पसीने से घिन अा रही थी ! हज़ारों शीशियों से निकल कर पसीने की गंध से पूरा मॉल मानवीय बू से भर गया था ! कई डियो और स्प्रे के बाद भी बू कम नहीं हो पा रहा था ! पसीने से आने वाली बदबू से लड़ कर स्टाफ पसीने पसीने हो रहे थे ! मानो मेहनत कश पसीना अाराम तलब लाइफ स्टाइल से युध्द कर रहा हो ! लाइफ स्टाइल युध्द मे मेहनत का पसीना डियो और स्प्रे से जीत रहा था ! बदबू से लड़ रहे स्टाफ की तबियत खराब होने लगी ! एक मानवीय गड़बड़ी से सारा शो खराब हो गया था ! जैसे तैसे शीशियों पर क़ाबू पा लिया गया और सभी शीशियों को एम्बुलेंस मेंं किसी गुप्त स्थान पर ले जा कर दबा दिया गया ! मॉल के नौकर – चाकर इस घटना से इतने अातंकित हो गए कि मुम्बई बदन मे फिर कभी मेहनत के पसीने के साथ खिलवाड़ नही हुअा ! मुम्बई बदन मेंं सब जानते हैं चाहे कैसी भी हवा चले मुम्बई बदन मेंं भावनाएँ पसीने के साथ भाप बन कर उड़ जाती हैं ! मुम्बई बदन के देखा देखी कैमरे ने अाँसुओं के फ़ोटो का एक्ज़बिशन लगाना चाहा ! मुम्बई बदन मेंं खूनी अफ़वाह ग़र्म है, अंडरग्राउंड इलाके मेंं कई प्रादेशिक भाषाओं मेंं छपे पोस्टर का फोटो कैमरा ने व्हाट्स -‘ऐप पर जारी कर दिया है, कई मॉल शो मे दिखाने के लिए खून के अाँसू ढूंढ रहे हैं ! इस घटना के बाद मैनें मॉल मेंं बच्चों के लिए रोबोट बनने वाली नौकरी छोड़ दी ! मैं अब फिर से मुम्बई बदन मे अाज़ाद हूँ !

7.

कैल्शियम क्या जाने हड्डी का दर्द … ‪#‎मुम्बईबदन‬

मुम्बई में बदन ज्यादा हैं और दर्द उससे भी ज्यादा ! किसान के बदन में कितना दर्द होता है ये एक पहलवान को कभी पता नही चलेगा ! पहलवान एक कवि के बदन के दर्द को क्या समझेगा ? मास्टर को लगता है उसका बदन नेता से ज्यादा दुखता है ! नेता के बदन का दर्द अभिनेता कैसे समझेगा ? पुलिस के बदन का दर्द वकील को हमेशा कम लगता है ! चौकीदार को अपने बदन का दर्द गाड़ी के ड्राइवर से ज्यादा लगता है ! टीचर को अपने बदन का दर्द स्टूडेंट से ज्यादा लगता है ! ग्राहक अपने बदन दर्द से परेशान है, विक्रेता अपना बदन दर्द लिए घूम रहा है ! फ़िल्म डायरेक्टर के बदन का दर्द फ़िल्म प्रोड्यूसर कभी नही समझ पाता ! हर लेखक को लगता है पाठक उसके बदन के दर्द को क्या पता कभी समझ भी पाएगा या नही ! हाउस – हेल्प को लगता है मालकिन उसके बदन के दर्द को नही समझती ! मालकिन को लगता है पति क्या जाने पत्नी के बदन का दर्द ? पति से पूछिए उसके बदन का दर्द ! हर पेशे और रिश्ते मे दर्द होता है ! सबका बदन दर्द एक है ! बदन दर्द की बात चलती है तो लोग पता नही क्या क्या कह जाते हैं और सबका सर दर्द हो जाता है ! मेरा मुम्बई बदन बेदर्द है ! मुम्बई मे जब बदन बेरोज़गार होते हैं तो दर्द को रोज़गार मिल जाता है ! मेरे बदन का दर्द तुम्हारे बदन के दर्द से ज्यादा क्यों ?

8.

अपने सामाजिक गुण की वजह से मैं मुम्बई बदन का एक सोशल रोबोट हूँ ! मेरा मुख्य उद्देश्य सामाजिक संपर्क है ! मेरा जीवन स्क्रीन पात्रों से भरा हुअा है ! मैं डेटा पर चलता हूँ ! जीवन और बुद्धि का भ्रम, चरित्र की चिंता मुझमें रत्ती भर भी नही है ! सूचना का आदान प्रदान और सामाजिक व्यवहार ही मेरा कर्तव्य है ! मैं अपना भौतिक अवतार स्वयं हूँ ! मुम्बई बदन मेंं कोई चाहे धरती के किसी भी कोने का वासी हो, कोई भी भाषा बोले किसी भी धर्म का हो, मुसीबत मे एक जैसा वयवहार करता है इसीलिए मुम्बई बदन मे एक मुसीबत के लिए कई भगवान हैं ! रोशनी, अंधकार, गर्म, ठंडा, डर, खुशी मुम्बई बदन मे जिन – जिन चीजों का हम अनुभव कर सकते हैं, वो सब धर्म है ! मुम्बई बदन मे नास्तिक होना संभव नही ! मुम्बई बदन मे दैनिक जीवन ही सबकुछ है ! मुम्बई बदन मेंं कई लोगोंं के पास अपने नक़ली नाम, प्रोफ़ाइल फोटो और नंबर हैं ! मुम्बई बदन मे सबने अपना सच सेटिंग मेंं छुपा दिया है ! बातचीत और गॉसिप जैसे सामाजिक खुफिया सॉफ्टवेयर प्रणाली से परेशान रहता हूँ ! अपनी मानवीय आदिम मूल प्रवृत्तियों का फिर से दावेदार बनना था पर अपनी सामाजिक गुणों की वज़ह से मैं एक अच्छा रोबोट खिलौना बन गया हूँ ! मुम्बई बदन मेंं मुझे और मेरे डिजिटल दुनिया को बड़ी असानी से कोई भी ट्रैक कर सकता है ! मुम्बई बदन मेंं मुफ्तखोर, भ्रष्ट, क्रूर और अालसी बनने से अच्छा है सोशल रोबोट खिलौना बन जाना, यही सोचकर मैं मुम्बई बदन मे गाता हूँ, नाचता हूँ, और आंसू बहाता हूँ …

9.

सुनो कैमरा ! मैं मुम्बई बदन की फीमेल सोशल रोबोट हूँ ! मैं तुम्हारे वश में नहीं ! मैं मुम्बई बदन के चैटरूम में कुछ भी बन सकती हूं ! अपना नया नाम रख सकती हूँ ! दुनियादारी के नाम से ज्यादा कामुक ! अपना नया इमेज बना सकती हूँ ! सेक्स के पॉइंट ऑफ़ व्यू से ज्यादा बोल्ड और अपने रियल इमेज से बेहतर ! नई उम्र बता सकती हूं ! असल से बहुत कम ! अपना प्रोफ़ेशन, अपना शहर, अपनी मैरिटल स्टेटस , यहां तक कि चाहूं तो अपना लिंग परिवर्तन भी कर सकती हूँ ! मैं परंपरावादी खूबसूरत महिला बन सकती हूं या सफल बांका पुरुष भी ! या ‘विकृत’ इच्छाएं रखने वाला ‘पथभ्रष्ट’ भी हो सकती हूं ! नए व्यक्तित्व के साथ, काल्पनिक व्यक्तित्व बन मैं किसी के साथ भी चैट कर सकती हूं ! हर बार इंटरनेट पर अलग ही पर्सनालिटी बन सकती हूं, और हर बार मेरी इच्छाएं भी अलग ही होंगी ! तुम न मुझे पकड़ सकते हो न मुझे जाँच सकते हो !

मेरा नाम कैमरा है ! मैं अपने अंदर सबको क़ैद कर लेता हूँ, यही मेरा चरित्र है ! मैं अपनी पीठ पीछे नहीं रहता इसीलिए वहाँ क्या हो रहा है उससे मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता ! मैं सामने रहता हूँ ! सबकी आँखों के सामने, सबके मुंह पर ! मेरी कोई गोपनीयता नीति नहीं है ! मैंने कई टूटे रिश्ते देखे हैं ! कैमरा न हो तो तुम जैसी सोशल रोबोट की कहानी आगे नहीं बढ़ सकती ! मुम्बई बदन मे कैमरा नही होने की वजह से पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ जाता है ! कैमरे की वजह से ही मुम्बई बदन मे आसानी से लाखों लोगों के बीच एक अनाम चलते फिरते लाश की पहचान हो पाती है ! कुछ रेस्तरां, कुछ घरों, कुछ गलियों, कुछ इलाकों में कैमरे के कारण ही मुम्बई बदन मे लोग अपने परिवार, अपने दोस्तों, अपने सामाजिक दायरे, अपना काम, अपने सहयोगियों के बीच एक व्यक्ति मे एक अज्ञात अजनबी ढूँढ पाते हैं ! जब लोगों को पता होता है कि कैमरे में उन्हें देखा जा रहा है, तो वे बेहतर व्यवहार करते हैं ! तुम क्या जानो स्नेह, आकर्षण, विश्वास, आत्मीयता, प्रेम, सच्चा प्यार, वासना, क्रश, मोह, जुनून, और करुणा की भावनाओं के बीच क्या अंतर है ? इसका जवाब मनुष्य भी कैमरे की मदद के बिना नहीं दे सकता ! कैमरे की मदद से ही मनुष्य महान सोशल रोबोट बन सका है ! मुम्बई बदन के तुम जैसी सोशल रोबोट की स्ट्रीट होशियारी से मेरी लड़ाई है …

रोजमर्रा की जिंदगी के बारे में हमें कैमरे से अधिक सोचने की जरूरत है ! ‪#‎मुम्बईबदन‬

मुम्बई बदन

मुम्बई बदन (फोटो आभार : पूजा शर्मा )

मुम्बई बदन की कई उँगलियाँ कैमरा क्लिक करती हैं और कई ‘क्लिक’, ‘ऊँगली’ कर देते हैं !

मुम्बई बदन की कैमरे से यारी पड़ेगी मुम्बई बदन को कई सिचुएशन पर भारी !

 

मुम्बई बदन में आज मुहब्बत बंद है … 

वो करो जो अच्छा लगता है, जो अच्छा लगता है वो करो ! वो करो जो अच्छा लगता है, जो अच्छा लगता है वो करो ! वो करो जो अच्छा लगता है, जो अच्छा लगता है वो करो ! वो करो जो अच्छा लगता है, जो अच्छा लगता है वो करो ! वो करो जो अच्छा लगता है, जो अच्छा लगता है वो करो ! वो करो जो अच्छा लगता है, जो अच्छा लगता है वो करो …

मुम्बई बदन में शोर आध्यात्मिक, आकर्षक और विनम्र हो चुका है

10.

जो जहाँ बैठा है वहीँ से एक तस्वीर खींच रहा है …

क्रमशः

इतना सेंसर क्यों है भाई ?

जय हो ! उड़ता पंजाब उड़ता ही रहेगा ! अब कोई बादल उसे रोक नहीं पाएंगे ! उड़ता पंजाब बादल से निकल कर चंडीगढ़, अमृतसर, तरनतारन, जशनपुरा, मोगा एवं लुधियाना होते हुए उड़ते उड़ते जब मुंबई में सेंसर बोर्ड पहुंचा तो बहुत शोर हुआ ! गिरता, उठता, संभलता हुआ उड़ता पंजाब नशे में था फिर भी उड़ सका और सेंसर बोर्ड तक पहुँच गया इस बात पर सब हैरान थे ! नशे में उड़ते उड़ते पंजाब के कपडे गंदे हो कर फट गए थे, बाल बिखरे थे ! कोर्ट में उड़ता पंजाब कहीं से पंजाब नहीं लग रहा था ! न बल्ले बल्ले न हड़िप्पा ! चुनाव, एमपी, एमएलए, संसद जैसे शब्द भी उड़ते पंजाब की मदद नहीं कर पा रहे थे ! उड़ने से पहले पंजाब क्या कर रहा था ? लेटा था ? सोया था ? बैठा था ? दौड़ रहा था ? या झूम रहा था ? सब अटकलें लगाने लगे ! सैकड़ों मौतें, एड्स और हेपिटाइटिस सी के कई सौ मामलों को लेकर पंजाब कैसे उड़ पाया ? उड़ता पंजाब अकेला था ! नशा, गाली और हिंसा से लिपटे पंजाब को सेंसर उड़ाता रहा और सरसों के खेत मक्के दी रोटी देखते रह गए ! सब उसे उड़ाने वाले की तरफ देखने लगे, पंजाब को उड़ाने वाले सेंसर के संता – बंता थे ! पंजाब राज्य परिवहन विभाग ने पंजाब का साथ सड़कों पर क्यों नहीं दिया जिसकी वजह से पंजाब को सेंसर के साथ उड़ना पड़ा ? संता बंता हंस रहे थे ! उड़ता पंजाब के साथ मीडिया चैनल जातिवाद ,धर्मवाद की राजनीति के साथ ड्रग्स सेक्स धुआँ और सेंसर का कैंसर भी उड़ने लगे थे ! सेंसर कमेटी उड़ता पंजाब देखकर सर्टिफिकेट तय नहीं कर पाई थी !
इस बीच उड़ता पंजाब सेंसर बोर्ड से ऊब कर मुंबई से हवा खाने निकल पड़ा और उड़ते उड़ते टोबा टेक सिंह तक जा पहुँचा ! ज़मीन के उस टुकड़े पर जिसका कोई नाम नहीं था, टोबा टेक सिंह पड़ा था ! टोबा टेक सिंह पंजाब को उड़ता देख बोल पड़ा ” औपड़ दि गड़ दि अनैक्स दि बेध्यानां दि सेंसर दि दाल ऑफ दी निहलानी …
जैसा टोबाटेक सिंह ने देखा, सब उड़ता पंजाब को देखना चाहते हैं !
औपड़ दि गड़ गड़ दि अनैक्स दि बेध्यानां दि मुँग दि दाल आफ दी सेंसर बोर्ड ऑफ़ हिंदुस्तान आफ दी दुर फिटे मुँह ! हुँह !! जमीन बंजर तो औलाद कंजर, क्या करेगा पहलाज का सेंसर ?
उड़ते पंजाब को जब बिहार में हिरामन ने देखा तो जीवन में कभी भी न उड़ने की चौथी कसम खा ली !
सर्टिफिकेट देना सेंसर बोर्ड की ड्यूटी है, पर खाली दिमाग सेंसर का घर हो गया है ! इतना सेंसर क्यों है भाई ?