बजट पच्चीसी

Illustration : Anirban Bora

Illustration : Anirban Bora

१.

मैं बजट हूँ !

समझौता के जादू को बजट कहते हैं ! मैं पत्नी के सहयोग से बनता हूँ ! दिन में घर का बजट ही रात में पति बन जाता है ! समय पर बिल भुगतान करना, कर्जों का सही समय पर निपटारा करना और अपने बचत, निवेश लक्ष्यों को हासिल करना भी मेरे ही अंतर्गत आता है ! घर का बजट बनाने का अर्थ है कि आप मुझे बना रहे हैं !

२.

मेरी बजट राशि !
जैसे घूमती हुई पृथ्वी घूमती हुई दिखाई नहीं देती, वैसे ही बजट भी हमारे इर्द गिर्द घूमता है पर मुझे कहीं घूमता हुआ दिखाई नहीं देता ! ऐसा जान पड़ता है कि मैं धन का नहीं, धन मेरा चक्कर लगा रहा है ! मेरे साथ चन्द्रमा और सूर्य भी मेरी धन राशि वृत्त पर चल रहे हैं ! मैं वृत्त में नहीं वित्त में पड़नेवाले विशिष्ट असंख्य तारा समूह में एक हूँ और सबके साथ मेरी राशि भी वित्त है !

३.

बजट का हनीमून !

मुझे अच्छी तरह पता है, बजट बनाने का मतलब है कि आप शादी के फंदे में फंस गए हैं ! मेरी गृहस्थी में बजट की शुरुआत हनीमून से ही हो गयी थी ! हनीमून पैकेज के साथ मेरे अंदर बजट शब्द की गंभीर यात्रा शुरू हो गयी ! शादी के तुरंत बाद मुझे पता चल गया था बजट का हनीमून से नाता है ! जितना बड़ा बजट उतना बड़ा हनीमून पैकेज ! बड़ा पैकेज मतलब बड़ा हनीमून, छोटा बजट मतलब छोटे पैकेज का छोटा हनीमून !

४.

भारतीय बजट !

फ्रांस में धन के आय और उसके व्यय की सूची को बजट कहते हैं ! फ्रांसीसी भाषा के शब्द से जन्मे इस बहुमंजिले शब्द से ही दुनिया लाभ में रहना सीखी है ! फ्रांस में आज बजट के साथ जो भी हो रहा हो, भारतीय बजट में अपनी आय और व्यय की भावना को मुझे बैंक खाते में रखना पड़ता है ! बहुमंजिला बजट को समझने की प्रतिभा मुझसे ज्यादा मेरी पत्नी में है !

५.

चालू खाता !

खाते ! खाते, खाते, खाते और खाते ! खाते – पीते फिर खाते ! खाते – खाते, पीते – पीते ! बैंक और खाते ! खाते – खाते, बैंक – बैंक ! खाते – बैंक, पीते – बैंक ! बैंक – बैंक ! खाते – खाते ! मेरा खाता , मेरा बैंक ! मेरा खाता मेरी खता ! खाता – खता, बैंक बैंक !

६.

बैलेंस बजट !

बजट ब्रह्म है ! वर्ष / केंद्रीय / कोष  / वित्त / मंत्री / आयोग / सरकार / योजना / ग्रामीण / बदलाव / संसद / प्रदर्शन / बिजली / सड़क / गैस / चर्चा / केंद्र / इत्यादि, इत्यादि ! मैं किसी भी शब्द से बजट पर कोई भी वाक्य पूरा कर सकता हूँ ! मेरा बजट मेरा ब्रह्म है ! मेरे बजट का बैलेंस हर शब्द में बना रहता है !

७.

पॉकेट मनी !

मेरे बजट में चार पॉकेट हैं ! दो पैंट के और दो शर्ट के ! मेरे पॉकेट मेरी पत्नी का ही कहा मानते हैं ! मैं सिर्फ उनको धोता और ढोता हूँ ! अपने साल की योजना का इरादा मैं अपने पॉकेट में ही रखता हूँ ! न जाने क्यों जब कभी बजट शब्‍द सुनाई देता है, मेरे हाथ पॉकेट में घुस जाते हैं !

८.

इकोनॉमिक्स !

दिन के, रात के, हफ़्ते के, महीने के, साल के, बजट को पहचानता हूँ ! जैसे घर में मैं अपनी पत्नी को सुनता हूँ वैसे ही टेलीविजन पर सचमुच में वित्त मंत्री को सुनता हूँ ! सिर्फ आलोचना नहीं करता ! मेरे बजट के इकोनॉमिक्स में रुपयों को छोड़ कर फिजिक्स, केमिस्ट्री, हिस्ट्री, जॉग्राफी, बायोलॉजी, स्पोर्ट्स, टेक्नोलॉजी, पर्यावरण, व्यापार, आकाश, पाताल, जंगल, पहाड़, सब है !

९.

मेरी लाइफ !

मेरी लाइफ इस साल भी स्टायलिश लुक के साथ मॉर्डन फीचर्स वाली इंटीरियर की होगी ! मेरे लिए कम बजट में फैमिली कार के बेहतर विकल्प इस साल भी आएंगे ! मार्किट में मल्टी साइज़ के ऑल्टो बजट से मैं इस साल भी बच नहीं पाउँगा ! बेहतर परफॉर्मेंस के साथ-साथ ज्यादा माइलेज के मामले में इस साल भी मेरी लाइफ आगे जाएगी ! किसी भी बजट में मुझे मेरे गंतव्य तक मेरी सरकार पहुँचा ही देगी !

१०.

मेरा हिसाब किताब !

पैसा कैसे काम करता है, इस बात को समझना ही बजट नहीं है ! शादी के कई साल बाद मुझे विश्वास हो गया है कि रोज़ सुबह पूरब में जो उगता है वो बजट है ! दोपहर को दिन भर का बजट आधा हो जाता है ! घरेलू काम की हिस्सेदारी की शेयरिंग ही असली बजट है ! गृहस्थी एक संयुक्त खाता है, बजट का हिसाब किताब दोनों प्राणी को रखना पड़ता है !

११.

बजट का बच्चा !

मेरे बजट के बारह दाढ़ हैं ! इन दांतों के बीच मेरे चार ज्ञान के दाँत हैं जो बजट के नाम पर लोहे का चना चबाते हैं ! दूध के दाँत टूटने तक माता पिता ही बच्चों का बजट हैं ! किशोरावस्था तक जैसे छुप छुप के मैंने इन्टरनेट पर सेक्स समझ लिया था वैसे ही भारतीय बच्चे यू – ट्यूब पर वित्त मंत्रियों को सुन सुन के बजट भी समझ लेंगे !

१२.

बजट पर ज़ुल्म !

बजट के इस पैकेज में हम नए दो हज़ार पांच सौ को विभिन्न स्तर पर भावनात्मक और शारीरिक रूप में ज्यादा जान जायेंगे ! नोटबंदी के नाम पर पिछले ढाई महिने में मुझ पर ना जाने क्या क्या जुल्म हुए, मेरे हज़ार पाँच सौ मेरे नहीं रहे ! लेकिन मैं बजट के साथ रहा किसी के आगे झुका नहीं !

१३.

हास्य बजट !
मुझे अपने बजट को पाने के लिए शेमलेस होना चाहिए था मैं कैश लेस हो गया ! मेरे इस बजट में हास्य बारह परसेंट से पंद्रह परसेंट पर पहुँच गया है ! वर वधु को इस साल भी लिफाफा टिकाया जायेगा ! मैंने सुना है बजट के दिव्यांगों के लिए नए बजट में हेल्पिंग किट्स सस्ते हो गए हैं ! व्यंग – आंगों को मेरा हास्य बजट सुनने पर भाषण के बजट पर लाभांश मिलेगा !

१४.

सबका रुपया एक है !

बजट में पत्नी माँग है और मैं पूर्ती हूँ ! प्रत्येक माह अपने आप को अनुशाशन में रखना होता है तब बजट में लाभ होता है ! मेरी अर्थपूर्ण चाहतों और अनावश्यक इच्छाओं को मुझसे अलग करने को मेरी पत्नी बजट मानती है ! जैसे मेरी आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपया एक है, वैसे ही बजट में अपनी अपनी अठ्ठनी होते हुए भी सबका रुपया एक है !

१५.

लाभ – लाइफ !

लव में लाभ को भी बजट कहते हैं, जैसे प्रेम में हानि को लाभ कहते हैं !

१६ .

स्मार्ट बजट !

मेरा स्मार्टफोन इस बजट में और स्मार्ट होगा ! इस बजट में स्मार्ट शहरों की तरह स्मार्टफोन के सोल्ड आउट होने की जानकारी मुझे फिर मिलेगी ! डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन दिये जाने के साथ – साथ फसलों में प्रचुरता भी इसी साल आएगी ! हेल्थ, एजुकेशन पर इस साल फिर फोकस होगा !

१७.

बजट का श्रृंगार !
बजट का बहिष्कार ही बजट का श्रृंगार है ! जिनके लिए बजट बनता है वही बजट का बहिष्कार करते हैं ! जो आज बनाते हैं वही कल उसकी चुटकी लेते हैं !  बजट एक ऐसा यूनिवर्सल चुटकुला है जो सबको पूरे साल याद रहता है और जिसे सब समझते हैं ! रहमत की बारिश के कीचड़ में इस साल फिर कमल का फूल खिलेगा !

१८.

एक साल की वॉरंटी वाला बजट !
नए बजट में अपने आप को अपग्रेड करने का ऑफर मुझे इस साल भी मिलेगा ! सारे एक्‍सचेंज ऑफर मुझे फिर से पेश किये जायेंगे ! फ्री रजिस्‍ट्रशन और एक साल की वॉरंटी वाला फेस्टिव ऑफर, फेस्टिवल सीजन में कैश डिस्‍काउंट के साथ मुझे इस बजट में फिर मिलेगा ! सोना जीतने का मौका मुझे नया बजट इस साल फिर देगा !

१९.

बजट के बड़े एलान !
‘ बजट इस साल घर का चौका – बर्तन, झाड़ू – पोछा नहीं करेगा ! मशीन से निकाल के कपडे भी नहीं फैलाएगा ! दुकान से राशन भी नहीं लाएगा ! सब्ज़ी खरीदने बाज़ार नहीं जायेगा ! मोबाइल का बिल नहीं भरेगा ! बजट अपना सर – चार्ज करेगा ! ‘ये मैं क्या बड़बड़ा रहा हूँ ! ‘ मुझे किसी बैंक में ले चलो, मुझे डिजिटल साक्षरता की ज़रूरत है !’

२०.

ग्रामीण कम – इन !

ग्रामीण तुम हमें आज ज़मीन दो हम तुम्हे कल घर देंगे ! गाँव में ऋण वसूली बजट के पीठ पीछे होगा ! तीसरा पूर्ण बजट तुम ले लो ! ग्रामीण तुमसे मुझे और कुछ नहीं चाहिए, मुझे कुछ नहीं चाहिए ! कम – इन ग्रामीण !

२१.

बजट का दर्ज़ी !

बजट का दर्ज़ी मेरा साइज़ जानता है ! बजट में मेरे मोबाइल, पर्स, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड के नाप से मेरी इज़्ज़त काटी जाती है ! इस साल युवाओं को अपने साइज़ का पासवर्ड बजट के दर्ज़ी को देना होगा जिससे बचने के लिए युवा अपने कपड़े खुद फाड़ेंगे जिसे सरकार अगले बजट में सिल देगी !

२२.

अच्छा बजट ही एक अच्छा पति है !

कुछ लोग कहते हैं बजट काम नहीं करते ! बजट के साथ यही समस्या है ! बजट का काम किसी को दिखता नहीं है ! अच्छे बजट के पास पैसा होता है, पैसा सबको दिखता है ! ख़राब बजट के पास दिल होता है जिसको अब प्रेमिका भी तोड़ देती है ! कोई ख़ाली जेब को बजट कहता है, एक्सपेंडीचर सेक्रेटरी मेरी पत्नी बचे हुए पैसों को बजट कहती है !

२३.

बजट छुक छुक !

बजट बुद्धिमान ! बजट शक्तिमान ! बजट सुपरमैन ! बजट लक्ष्मी ! बजट शक्ति ! बजट – बुद्धि उत्सुक होता है, बजट अपनी खुशियों की कॉस्मैटिक पटरी पर छुक – छुक होता है !

२४.

बजट पास !

बजट एक बार संसद में पास हो गया तो फिर साल भर तक मेरे पास नहीं आता ! बजट पास होने के बाद बजट को फेल करने की जिम्मेदारी मेरे ही कंधों पर होती है !

२५.

बजट पच्चीसी !

बजट को होना था समृद्धि का बजट सिंहासन बत्तीसी ! ड्रग्स ने बजट को बना दिया बजट बेताल पच्चीसी ! घर का पति मैं, बजट में एक्स व्यक्ति ! इति रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स, इति बजट पच्चीसी !!

दलबदलू का प्रेम पत्र

प्रतीकात्मक तस्वीर : गूगल से साभार

हेलो, जानू लियोनी ! मेरी जानेमन, मेरी ज़िंदगी, मेरी तमन्ना, मेरी खुशी … तुम्हें किस नाम से पुकारूँ, तुम्हें किस तरह से आवाज़ दूँ ?

मेरे शातिर दिमाग़ को तुमसे कैसे प्यार हो गया मुझे आज तक इसका कोई सुराग नहीं है। मैं आज तक तुम्हें अपने दिल की बात नहीं बता पाया ! लिख कर बताऊं भी तो कैसे, यही डर लगता है कि अगर तुमने ना कह दिया तो तुम्हें हमेशा – हमेशा के लिए खो दूँगा ! अभी तुम मेरी हो, मैं तुम्हारे साथ ना सही, तुम ख्यालों में मेरे आसपास ही रहती हो ! लियोनी तुमने मुझे अपनाया नहीं है, लेकिन इनकार भी तो नहीं किया है ना अभी तक ! इसी ख्याल के सहारे मेरे दिन – रात कट रहे हैं कि शायद किसी दिन तुम मेरे प्यार को पहचानो और मेरे पास आकर कहो ” मैने तुम्हारी आँखों में प्यार की दास्तान पढ़ ली है माय लव और आज से हमेशा के लिए मैं तुम्हारी हूँ ”

जानू मैंने फिर से दल बदल लिया है ! मैं अब ‘खपा’ में नहीं हूँ, आज से मैं ‘नपा’ में हूँ ! खुश हूँ आज से मेरा फ़ोन नंबर, ई मेल आईडी, बैंक अकॉउंट नंबर और घर का पता सब बदल जायेगा ! फिर भी भारी मन से कहना पड़ रहा है और ये बहुत दुःख की बात है कि पर्सनल दिल – बदल या पोलिटिकल दल – बदल की खबरें अब किसी को भी चौंकाती या हैरान नहीं करती हैं !

जानू तुम जानती हो मैं ‘खपा’ में विचारों की वजह से था ! पिछड़ों और दलितों के लिए काम करने वाली पार्टी अब सिर्फ कॉरपोरेट्स से पैसे लेकर राजनीति में ला रही है ! ‘खपा’ में वसूली के सिवा कोई काम नहीं हो रहा था ! पार्टी में विचार खत्म हो चुके थे, इसलिए मैंने साहेब के कामों और विचारों से प्रेरित होकर ‘नपा’ ज्वाइन कर ली है ! आज दल बदलने के शुभ अवसर पर हो रहे प्रेस कॉन्फ्रेंस में पिछले दस साल में राज्य की माली हालत ख़राब करने का ठीकरा मैं स्वयं कल तक जिस पार्टी में था उसके सर पर ही फोड़ दूंगा ! शराब का ठेका, होटलों की सस्ती नीलामी, करोड़ों रुपये की वैट चोरी, का माल जिस थाली में कल तक खा रहा था आज उसी में छेद कर दूंगा ! जानू मुझे धोबी का कुत्ता नहीं बनना ! आज कई नेता अपनी पार्टी में धोबी के कुत्ते वाली हालत में हैं, ना घर के ना घाट के ! तुम्हारा दलबदलू अपना घर और घाट समय पर चुन लेता है ! ‘नपा’ में अब तक मुझे बहुत सम्मान मिला है ! आगे भी उम्मीद है कि जैसा मैंने ‘नपा’ के लिए सोचा था, वैसा ही होगा ! किसी एक – दो सीट से कभी बात नहीं बनती – बिगड़ती ! जानू लियोनी, पार्टी में अपना नाम नहीं देख कर दिल या दल मत बदल लेना ! अभी पहली लिस्‍ट आई है ! मेरे रहते तुम जैसी किसी कार्यकर्ता या नेता को अपमानित नहीं होना पड़ेगा ! हम दोनों के दिल का जब तक तालमेल बना रहेगा, तुम बेफिक्र रहो दल में सीटों का तालमेल भी बना रहेगा !

” चुनावी बिगुल के बजते ही इन बिन पेंदी के लोटों को कुछ – कुछ होने लगता है … ये सावन के अंधे चुनाव के माहौल में सिसकारी मारने लगते हैं … ये थाली के बैंगन अपनी खीचड़ी अचानक अलग पकाने लगते हैं ! ” तुम बताओ मेरे बारे में ये सब कहना क्या बहनजी को शोभा देता है ? हाँ ये सच है कि उन्होंने कहीं मेरा नाम नहीं लिया, लेकिन पार्टी में सब जानते हैं कि आज की सब टिप्पणी बहनजी ने मेरे लिए ही की है ! मैं राजनीति में होने के कारण हर शख्स के कॉन्टैक्ट में हूं ! इसका कोई गलत मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए ! दल बदलने में कोई बुराई नहीं है !

मैं बहनजी से हाथ जोड़कर माफ़ी मांगता हूँ और उनके इस चुनाव से विदा लेता हूँ ! जानू मैं प्रण करता हूं आज़ादी की शाम नहीं होने दूंगा, वीरों की समाधि को बदनाम नहीं होने दूंगा, जब तक तन में गरम लहू की एक बूंद भी बाक़ी है, मात्रभूमि का आंचल बदनाम नहीं होने दूंगा !

जानू मैं अपना सच जानता हूँ ! मेढकों को तराजू में नहीं तौला जा सकता यह कहावत मेरे लिए ही है ! हाँ मैं एक दलबदलू हूँ ! पर जो मुझे दलबदलू कहकर बदनाम करने में लगे हैं वो अपनी चिंता करें ! अब उनके प्रेस नोट को भी कोई पढ़ना नहीं चाहता ! मैं जानता हूँ मेरी उछल – कूद की प्रवृत्ति से समाज हैरान – परेशान है, पर ऐसा करने वाले नामों की फेहरिस्त लंबी है, और मुझे गर्व है मेरा नाम सबसे ऊपर है ! इस बात का मुझे अपार हर्ष हैं कि मुझे देखते ही लोग कहते हैं ‘ राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता !’ राजनीती में अपनी दलबदलू सूझ बूझ से ही मैं कभी न छोटी की जा सकने वाली दलबदलू परंपरा की लकीर को लंबा कर पाया हूँ !

जानू इस बात से दुखी हूँ कि दलबदलू जैसे गुप्त राजनितिक चाल को ‘सबका साथ सबका विकास’ का नारा लगाते हुए सार्वजनिक किया जा रहा है और हर दलबदलू को पार्टी में घुसाया जा रहा है ! पार्टियों ने हम जैसे छोटे छोटे दल-बदलुओं के लिए भी बड़े बड़े दरवाज़े खोल दिए हैं ! अक्सर मैं सोचता हूँ, आखिर सभी दलों को दल-बदलू क्यों पसंद आते हैं ? क्या राजनीति में निष्ठा, नीति और नीयत की बातें बेमानी हो गयी हैं ? क्या आज सियासत भी कॉरपोरेट घराने की तरह हो गई है जहां लोग पैसा, पावर और पद के लिए सारे रिश्ते नाते भूल जाते हैं ?

जानू लोकतांत्रिक समाज में हर व्यक्ति की अपनी सोच होती है और वह उसे कभी भी बदलने का अधिकार रखता है ! दल-बदल को राजनीतिक प्रक्रिया का एक सामान्य अंग ही माना जाना चाहिए ! आज तुमने ट्वीटर पर कहा कि तिवारी ने मुझे आया – राम, गया – राम बुलाया है ! जानू मुझे अपने ऊपर भरोसा है अगर प्रेस रूम में भी कोई बार बार मेरे मुँह पर मुझे आया – राम, गया – राम बुलाएगा फिर भी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा ! मैं अपने कान की खाल इतनी मोटी कर चुका हूँ जिस पर सब मिल कर भी अगर इस नाम का ढ़िढोरा पीट लेंगे तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा ! जानू तुम जानती हो न हाथी चले बाजार तो कुत्ते भोंके हजार ! पर जानू लियोनी, इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि मुझ जैसे दिग्गज दलबदलुओं द्वारा भी पार्टी चुनाव जीत ही लेगी ! आज के युग में क्या किसी को किसी बात के लिए गारंटी देता है ?

चोटी के सशक्त राजनेताओं के बीच अपनी जगह बनाने की तुम्हारी महत्वाकांक्षा ने मुझे तुम्हारे और क़रीब ला दिया है ! दलबदलू नेता जनता के बीच अपनी जो विश्वसनीयता खो चुके हैं वो तुम्हारे राजनीती में आने से लौट सकती है ! तुम्हारे साथ मेरे चुनावी सभा की माँग बढ़ जाएगी ! शक्ति प्रदर्शन में तुम मेरा साथ दे सकती हो ! सत्ता की दौड़ की राजनीति के मैदान के खिलाड़ी दलबदलू परम्परा से जो खेल खेलते चले आ रहे हैं, मुझे भरोसा है तुम इस खेल को खेल कर हम दलबदलुओं को एक नयी चाल दोगी ! तुम एक मेहनती औरत हो और कड़ी मेहनत से तुमने पैसे कमाए हैं ! युवा पीढ़ी के लिए तुम एक अच्छी मॉडल हो ! राजनीति, नौकरशाही और मीडिया में मेरे मित्रों को भी तुम्हारे दिल – बदलु टैलेंट पर बहुत भरोसा है ! तुमने नाम बदला ! पेशा बदला ! देश बदला ! अब तुम मेरी तरह भारतीय राजनीती भी बदल डालो ! तुम्हारे पास दोहरी राष्ट्रीयता है अब तुम अपनी दोहरी मानसिकता भी दिखा दो ! कामुक नर्तकी से तुम अश्लील फिल्म अभिनेत्री बनी, व्यापार-जगत से जुड़ी, और मॉडल होने के बाद आज बिन पेंदी के लोटे बॉलीवुड की एक सुपर स्टार हो ! तुम्हारी तुलना सुनहरे पर्दे की मीनाकुमारी और मधुबाला से की जाने लगी है ! राजनीति में आ कर तुम अपनी तुलना मैडम, दीदी, बहनजी से करवा सकती हो ! जैसे तुमने प्रोफेशन बदला है वैसे अगर तुम दल बदलोगी तो मेरी भविष्यवाणी है कि तुम भविष्य में प्रधानमन्त्री बन जाओगी ! अश्लील फिल्म के बाद राजनीति में मेरे साथ और प्रसिद्धि पाने के लिए तुम्हे तरह-तरह के विवादों और अफ़वाहों से घिरा रहना पड़ेगा ! हम दोनों की यही बात पत्रकारों को आकर्षित करेगी ! मेरे साथ तुम्हारी ज़िन्दगी की विस्मयकारी दास्तान तुम्हे महान नेता बना देगी ! ‘आधी छोड़ सारी को धावे, सारी रहे न आधी पावे’ मुहावरे को तुम ही झुठला सकती हो लियोनी ! आधी, सारी सब छोड़ के दलबदलू राजनीति को सत्ता के खेल में तुम ही निर्वस्त्र कर सकती हो !

तुमको पत्र लिखते हुए हमेशा डरता हूँ, सोचता हूँ कभी मेरा अकाउंट हैक हो गया तो क्या होगा ? फिर तुम्हारी एक फ़िल्मी बात मेरी कानो में गूंजने लगती है और मुझे वो पल याद आ जाता है जब तुम अपनी लियोनी अदा में मुझसे कहती हो ” लोगों से सुना है किताबों में लिखा है / सब ने यही कहा है / प्यार करने वाले कभी डरते नहीं / जो डरते हैं वो प्यार करते नहीं … ” फिर मैं कहता हूँ ‘तुम ही मेरी लियोनी हो ! लियोनी असली और नकली नहीं होती …’ इस बात पर तुम कितनी हंसती हो … और हँसती हुई बिलकुल सच्ची सलोनी लियोनी लगती हो …

मेरी जेब की मुद्रा स्थिति से ले कर मेरे शरीर मुद्रा की हर स्थितियाँ मेरी कल्पना में तुम जानती हो ! जानू तुम इस दलबदलू को कभी अकेला मत छोड़ना ! कल मैं अपने दिल की फिर सुनूँगा ! दिल जब बोलेगा बदल जाऊंगा और कोई दल जब बुलाएगा तो दिल बदल लूँगा ! मैंने तो दल बदल लिया है अब देखना है मेरे पीछे – पीछे मेरे क्षेत्र की जनता भी अपना दिल बदल कर मेरा साथ देती है की नहीं …

बी बी सी की टीम दलबदलू नेताओं पर फीचर में मुझसे इंटरव्यू लेने आयी है, मुझे अभी जाना पड़ेगा …

तुम्हारा और सिर्फ़ तुम्हारा जानू दलबदलू
चीयर्स

अभी आप इन्टरनेट के माध्यम से जमा किया गया एक दलबदलू का प्रेम पत्र पढ़ रहे थे ! सोशल मिडिया के परदे के पीछे से एक दलबदलू की आभासी उपस्थिति को पढ़ कर मुझे लग रहा है कि दलबदलू बिचारा होता है और अपने दिल का मारा होता है ! मैंने एक दलबदलू के वर्चुअल लव लाइफ को सामाजिक हित में हैक किया है ! मेरे इस कृत्य का किसी राजनितिक सीट को बनाए रखने से कोई लेना देना नहीं है ! दलबदलू जो अपनी पार्टी के साथ करते हैं वही अपने दिल के साथ भी करते हैं ! दलबदलू दिल और दल एक काल्पनिक – दैविक मज़बूरी में बदलते हैं ! प्रिये काका हाथरसी ठीक कह गए हैं, दलबदलू दार्शनिक होते हैं ! – एक देशप्रेमी हैकर, जय हिन्द !

किताब और मेला

पुस्तक प्रेमी

जैसे ही किताबों के सपने आने लगते हैं मैं समझ जाता हूँ किताबों का मेला लगने वाला है ! किसी भी पुस्तक मेला के लगने से पहले मुझे किताबों के सपने आने लगते हैं ! अच्छे, बुरे, किताबों से जुड़े तरह तरह के सपने देखने लगता हूँ ! किसी सपने में देखता हूँ कि चारो तरफ किताबों के पेड़ लगे हैं … कभी देखता हूँ सबने मिल कर इतनी किताबें लिख दी हैं कि पढ़ने के लिए उन्हें चारो तरफ बिखरा दिया गया है … लोग किताबों को घर नहीं ले जाना चाहते हैं क्योंकि घर पहुँचते ही एक किताब दूसरे किताब को बुला लेती है और बहुत जल्द घर में किताबों का ढेर लग जाता है … किसी सपने में लोग किताबों से डर कर उन्हें घर से बाहर कर देते हैं … बाहर इतनी किताबें हैं कि देख कर न चलें तो किताबों से ठोकर लग सकती है ! ऐसी ठोकर से बचने के लिए लोग किताब पढ़ना शुरू कर देते हैं ! सब जानते हैं किताबों से बचने का बस यही एक तरीका है, उनको चुप – चाप पढ़ लीजिये ! जब तक आप उसे पढ़ न लें, किताबें तब तक ही आपको डराती है ! सपने में एक दिन मैं सुनता हूँ कि विश्व पुस्तक मेला लगने वाला है ! मेरी आँखें खुल जाती हैं ! अखबार में पुस्तक मेला का समाचार देख कर अपने सपने को सच पाता हूँ ! मेला शब्द सुनते ही मेरी इन्द्रियों के पन्ने फड़फड़ाने लगते हैं, मेरे मुंह में पानी आने लगता है ! मैं किताब के पन्नों पर प्रिंट की रोशनाई की ताज़ी गंध सूँघने के लिए बैचैन हो जाता हूँ ! मैं एक किताबी कीड़ा हूँ, मेरी रीढ़ की हड्डी किताब चाटे बगैर सीधी नहीं होती !

निर्धारित दिन सुबह ग्यारह बजे मेला पहुँचने वाले पहले जत्थे में मैं भी शामिल था ! ट्वीट्राटी, फेसबुक, यू ट्यूब, इत्यादि से मेला न पहुँच पाने वाले भी मेले का हाल मुझसे ज्यादा जानते हैं क्योंकि मेला जाते ही मैं किताबों में खो जाता हूँ ! पुस्तक मेले में क्या हो रहा है मुझे इस बात की कोई सुधबुध नहीं रहती है ! जैसे ही मुझे कोई दिलचस्प किताब दिखती है, समय गवाएं बिना मैं उसे पढ़ने लगता हूँ ! किताब को पढ़ते समय मैं उस किताब में घुस जाता हूँ और किताब ही मेरी कोठरी बन जाती है ! जब तक मुझे पुस्तक मेले के चौकीदार किताब से खींच के बाहर नहीं कर देते हैं मैं किताब में ही रहता हूँ ! अगले दिन भी मेला पहुँच कर मैं फिर उसी किताब में घुस जाता हूँ ! जब तक किताब खत्म नहीं हो जाती है मैं किताब को नहीं छोड़ता हूँ ! किताबों के मेले की एक बहस में मेरे तर्क और उदहारण सुन कर जबसे लोग मुझे पाठक बुलाने लगे हैं, मैं लोगों और सोशल मीडिया से बचता फिरता हूँ ! सोशल मीडिया में सबने मिल कर मुझे गुमनाम पाठक बना दिया है और मेरी अनुपस्थिति पर फ़िज़ूल का चिटपुटिया बहस करते रहते हैं ! जबकि मैं सोशल मीडिया के पीठ पीछे चुपचाप कई किताबों को पढ़ कर निकल जाता हूँ !

आज मेले में घुसते ही मुझे कालिदास की शकुंतला मिल गयी ! उफ़ ! क्या मानुषी है ! क्लासिकल शकुंतला के बहाने मुझे साहित्य का ऐश्वर्य देखने का फिर से मन करने लगा ! मैंने प्रेम दुःख से भरे इस काव्य नाटक को पढ़ने के लिए पंडाल में किताब की ढेर के पीछे वाला गुप्त हिस्सा चुन लिया और एकांत में शकुंतला को पढ़ने लगा ! रह रह कर मैं शकुंतला के प्रेम प्रसंगों में खो जाता और उसके दुर्भाग्य पर चुपचाप अविरल रोता रहता ! रात हो गयी ! कहानी मेरे मन को छू गयी थी ! मछुआरे की अँगूठी को देख कर जैसे दुष्यंत को शकुंतला की याद आयी वैसे ही शायद मेले के किसी चौकीदार को मुझ पाठक की याद आ गयी थी ! किताब के एक प्रसंग में दुश्यन्त ने शकुन्तला को जैसे ही ढूँढना शुरू किया मैंने महसूस किया मेले का चौकीदार भी किताबों के छुपे पाठक को किताबों में ढूंढ रहा था ! पाठकों को बाहर खदेड़ने में कई प्रकाशक चौकीदार की मदद कर रहे थे ! मुझ जैसे ज़िद्दी पाठकों को बाहर तक ले जाने के लिए चारो तरफ सीटी बज रही थी ! मैंने दुःख की इस कथा को ख़तम किये बिना मेले से न निकलने की ठान ली और एक ऊँची टेबल के नीचे छुप के पढ़ने लगा ! मेनका की बेटी से अब मुझे पुस्तक मेले का कोई चौकीदार और प्रकाशक अलग नहीं कर सकता था ! अंत में दुष्यंत को शकुंतला मिल गयी पर मैं किसी चौकीदार को नहीं मिल सका !

जब किताब ख़तम हुई हॉल से सब जा चुके थे ! मेला कई घंटे पहले अगले दिन तक के लिए बंद हो चूका था ! लाखों किताबों के बीच मेले में, मैं अकेला छूट गया था ! मैं बिना हिले डुले स्थिति का जायजा लेने दूर से आ रही इधर उधर की आवाज़ों को जोड़ के समझने की कोशिश करने लगा ! घडी में रात के डेढ़ बज रहे थे ! पुस्तक मेले के पंडाल के बाहर का मैदान कोहरे में डूब गया था ! इस वक़्त पुस्तक मेले में मैं किसी चौकीदार के हाथ नहीं आना चाहता था ! यह पाठक का निजी क्षण था ! मैं नहीं चाहता था रात के दुसरे पहर पुस्तक मेले से निकलता हुआ पकड़ा जाऊं और सोशल मिडिया में अगली सुबह उछाल दिया जाऊं ! मुझे अपनी स्थिति में पाठक की मिसअंडरस्टूड स्थिति दिखने लगी और सोशल मीडिया में पाठकों की दुर्दशा पर कई दिखाऊ सेमीनार को जन्म देने का बहाना दिखने लगा ! जैसे ही इस घटना पर सहमति असहमति के लाखों चेहरे की सेल्फ़ी का हाहाकार मेरी कान में गूँजा, मैं इस डरावने ख़याल से निकल आया ! अचानक तभी कहीं से मुझे कई फुसफुसाहट की आवाज़ सुनायी देने लगी ! मैं थोड़ा सहम गया ! किताब पढ़ने की धुन में मैं स्टाल संख्या और हॉल संख्या भूल गया था ! फुसफुसाने की सब अज्ञात आवाज़ें आस पास से आ रही थी, लग रहा था कोई मेरा पीछा करता हुआ यहाँ तक आ पहुँचा है ! बड़ी सावधानी से किताब को कुतरने वाले मेले के वोकेशनल चूहे की तरह मैं पंडाल से बाहर निकलने की जुगत लगाने लगा ! बाहर कहीं अँधेरा था, कहीं रौशनी थी ! बाहर आकर मुझे लगा मैं एक नयी जगह आ गया हूं ! कहाँ गयी वो भीड़ ? कहाँ गए वो असँख्य खरीदार जिसमे मुझ जैसे पाठक दिन में खो जाते हैं !

बाहर आते ही मुझे एक नयी किस्म की भीड़ दिखी ! कुछ ठंढ से और कुछ इस दृश्य को देख कर मैं सिहर गया ! रात के सन्नाटे में बाहर किताबों का मेला लगा था ! पंडालों के भीतर से किताबें बाहर निकल के उत्सव मना रही थी ! ये दृश्य मेरे लिए बिलकुल नया था ! मैं पहली बार पुस्तकों का सच्चा मेला देख रहा था जहाँ किताबें उन्मुक्त थीं ! दूर तक किताब ही किताब … चारों तरफ किताबें बिखरी पड़ी थीं ! पेड़ों पर किताब लटक रहे थे ! मुझे लगा मेरा सपना सच हो गया है ! किताबें किलकारियां मार रही थीं ! उत्तेजना से मुझे और ठंढ लगने लगी ! ठंढ से बचने के लिए मैं कोई जुगाड़ की तलाश में लग गया ! मैंने गर्म कपडे तो पहन रखे थे पर मेरे पास रात की ठंढ की तैयारी नहीं थी ! आग कागज़ का दुश्मन होता है इसलिए अलाव लगाने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता था ! मैं एक पाठक हूँ और पुस्तक प्रेमी हूँ, मैं सोशल मीडिया के प्रेत की तरह औरों की किताब जला के हाथ नहीं सेंक सकता था ! मैंने देखा नौजवान किताबें बूढी किताबों को ध्यान से सुन रही थी और चुप थीं ! नयी मोटी किताब भी पुराने पतली किताब को सुन रही थी ! बुज़ुर्ग की इज़्ज़त किताबों की दुनिया में ज्यादा थी !

पुस्तक मेले में छात्रों का प्रवेश नि:शुल्क था ! कोई शरारती छात्रा पुस्तक मेले में आयी तो स्कूल ड्रेस में थी पर अंदर अपने कपडे बदल के स्कूल ड्रेस वाला अपना बैग भूल गयी थी ! पुस्तक मेले में पूरा बाल साहित्य इस बाल मानुषी की शरारत को घेर के भावुक हो कर सोया था ! ठंढ से बचने के लिए मैंने बाल साहित्य से छुप कर उस मानुषी के झोले से उसके यूनिफॉर्म का पिंक स्वेटर और पिंक स्कार्फ निकाल कर पहन लिया ! अब मैं आधा बाल मानुषी और आधा वयस्क था ! मुझे लगा आधी रात को अँधेरे में पुस्तकों को चीर कर निकला मुझ पाठक का ये एक नया बाल अर्ध नारीश्वर अवतार है जो अवतरित दृष्टि से एक नया सच देख पा रहा है ! दिन भर अपना सर्वस्व लुटा कर बाहर मेले में किताबें सुस्ता रही थीं ! पुस्तक – प्रेमियों की याद में कुछ किताबों ने रत जगा किया था ! किताब से निकल कर कई पात्र और चरित्र के पुतले किताबों का मेले में साथ दे रहे थे ! मुझे दूर कोहरे में डूबा मेरे प्रिय साबू का पुतला भी दिखा ! रात के इस पहर में ठंढ से बच कर पुस्तक मेले के सभी चौकीदार किताबों की गोद में दुबक के सो रहे थे जैसे उन्हें सपनो के गर्म संसार में ले जा कर छोड़ दिया गया हो ! मेरी नज़रों के सामने पुस्तक मेले की विद्रूपता पराकाष्ठा पर थी !

बाहर निकलते ही कुछ बड़ी और मोटी किताबों ने झुण्ड बना के मुझे घेर लिया ! मुझे देख कर सबके पन्ने फड़कने लगे ! उसकी फड़फड़ाहट की आवाज़ सुन कर कई किताबें मौन हो गयी और उनसे आ मिलीं ! ‘हमारे इस मेले में तुम्हारा क्या काम ?’ रोबदार आवाज़ में एक किताब ने अपने पन्ने खोल कर सवाल किया ! डर विस्मय और मिक्स्ड फीलिंग की वजह से कुछ हॉरर किताबों के अक्षर इधर उधर बिखर के भागने लगे ! कुछ किताबों ने मुझे बाल साहित्य से निकला कोई कठपुतली समझ लिया और पास आ कर मुझे छूने की कोशिश करने लगे ! मुझे लगा मैंने पुस्तक मेले के रंग को भंग कर दिया है ! ‘क्या तुम हमें चुराने आये हो ?’ मोटी किताब ने दूसरा सवाल किया ? मैं कोई जवाब देता इससे पहले एक पतली लंबी गोरी सस्ती फ्रेंच किताब जो अबतक जोर जोर से फुसफुसा रही थीं मुझे देख कर चिल्लाने लगीं ! ‘तुम कोई नयी किताब तो नहीं लिख रहे ?’ अपनी पतली आवाज़ में उसने घबराते हुए पूछा ! उसकी बात सुन कर कहीं से नि:शुल्क बाइबिल दौड़ा हुआ आया और मुझ पर दया बरसाने की प्रार्थना करने लगा ! ज्ञान की इस असली गंगा में मैंने चुप रहना ही ठीक समझा !

थिंक टैंक से निकल कर कुछ गंभीर किताब मार्च करते हुए मुझ तक आये और औपचारिक रूप से मेरा परिचय माँगा ! मैंने कहा मैं शुद्ध पाठक हूँ ! मुझे किताबों से सच्चा प्यार है ! पुस्तक मेला मेरे लिए किसी देवालय से कम नहीं है ! मेरी बात को सुनकर मोटी किताबें जो सबसे ज्यादा गुस्से में थीं उनका सारा पन्ना शांत हो गया ! मेरे पाठक होने के सम्मान में ऑटोग्राफ्ड बुक मेरे पास आकर मुझसे सोशल होने लगे ! मुझे उन पर दया आ रही थी, मुझे उनका सच पता था ! हस्ताक्षर वाले किताब सोल्ड फील कर रहे थे पर वो बिके नहीं थे ! उनकी हालत टोबा टेक सिंह जैसी थी ! वो चाह कर भी मेरा दस्तख़त नहीं ले पा रहे थे ! उन्हें किताब की सीमा कहाँ ख़त्म होती है और पाठक की सीमा कहाँ शुरू होती है इसका भ्रम हो गया था ! वे सब डिप्रेस्सेड थीं और वे पुस्तक मेले में मुक्त हो कर भी अपने आप को अनदेखे खूँटे में बंधा हुआ महसूस कर रही थीं !

मैंने देखा रात में किताबों के लिए पुस्तक मेले का सेल्फी पॉइंट एक भूतहा जगह बन जाती हैं जहाँ कोई भी किताब जाने से डरती हैं ! चुटकुले की किताब क्रिकेट खिलाडियों से किसी बात पर रूठी हुई थीं और बात बात पर हंसने की जगह रो रही थी ! अपने डिजिटल और प्रिंट में होने को लेकर चल रहे गंभीर बहस में हास्य किताबें मौन थीं ! एक शेर के दिल पर लिखी किताब का पेम्पलेट दहाड़ने की कोशिश कर रहा था ! जेएनयू घटना, दिल्ली में वाहन प्रदूषण, वर्तमान सरकार, भारतीय मीडिया, समलैंगिक अधिकारों की किताबों की तस्वीरें लापता हुए लोगों की तरह मेले में चिपकी हुई थीं ! पीछे पुस्तक मेले में कागज़ी घोड़े कलम तोड़ के दौड़ रहे थे ! कुछ घटिया किताबें जो पॉपुलर थी – उनके कैटेलॉगस – रात भर उड़ते रहे ! पेम्प्लेट्स आवारा होती हैं और अपने रीसाइकल्ड नियति की वज़ह से निडर और फ्री होती हैं !

किताबों ने मुझे बताया दुनिया में स्त्रियों द्वारा लिखी स्त्रियों को समझने वाली किताब सबसे ज्यादा बिक रही हैं ! पुरुषों में स्त्री को नए सिरे से समझने की होड़ लगी है ! मेले में पुरुष के सवाल से भरी किताब को किसी ने उठाया भी नहीं ! राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुनाव, मौसम और नया साल का बोलबाला था ! फौजी किताबों की दाल गल नहीं रही थी उसमे कुछ काला था !

मैंने देखा राजनीति से संबंधित एक किताब का सेवानिवृत्त क़िताबों से कोई विमर्श चल रहा था ! दूर एक रौशनी के फव्वारे के पास व्यंग्य की जुगलबंदी चल रही थी जो धीरे धीरे कव्वाली का रूप ले रही थी ! राजनीति, अर्थशास्त्र, कला, संगीत, सिनेमा, खेल की कई किताबें प्रमुख घटनाओं की किताब को ध्यान से सुन रही थी ! पास में ही हिन्दी और धर्म एक साथ नाच रहे थे ! नाचते नाचते वो इतने एक हो गए कि हिंदी और धर्म में भ्रम होने लगा ! समझ में ही नहीं आ रहा था कि धर्म क्या है और हिंदी कौन है ? देखते देखते हिंदी धार्मिक हो गयी और धर्म सिर्फ हिंदी का हो कर रह गया !

एक किताब ने मुझे जो बताया वो बात मुझे पता थी ! उसने कहा देखने की किताब अलग होती है, खरीदने की किताब अलग होती है और पढ़ने वाली किताब बिलकुल अलग ! मेले में उपन्यास, संस्मरण, कहानी-संग्रह, कविता संग्रह, नाटक के साथ इतिहास, भूगोल, ज्ञान-विज्ञान, साहित्य, यात्रा, धर्म, भाषा, जीवन-वृत्त आदि सभी विषयों पर पुस्तकें थीं और ये उनका ही मेला था !

रात भर किताबों के साथ उनकी दुनिया में रह कर मैंने किताबों को थोड़ा और करीब से जाना ! किताबें बहुत कोमल मन की होती है ! पढ़ने का मन न हो फिर भी किसी किताब को कभी ठोकर मत मारिये ! लोगों की ठोकर से किताबें कराहती हैं ! जब आप किसी किताब को बिखरा हुआ देखें उसे समेटने की कोशिश जरूर करें ! किताब से जुड़े हर मामले में कोई न कोई आप का साथ जरूर दे देगा और आप कभी अकेले नहीं रहेंगे ! किताबें ज़िद्दी होती हैं ! दुनिया की हर किताब अपने पढ़े जाने का तब तक इंतज़ार करती हैं जब तक पाठक पढ़ रहे किताब को पढ़ कर ख़त्म न कर दे ! किताबों के पास धरती का धैर्य है ! आप जब भी किताबों से मिलेंगे किताबें कभी आप को निराश नहीं करेंगी ! किताबों में प्रतियोगिता नहीं होती प्रतियोगिता उसे पढ़ने वालों में होती है ! किताबों की आँख नहीं होती वो सबको एक दृष्टि से देखती हैं ! किताबें भोली होती हैं ! पढ़ने वाला अपनी लगाता है वर्ना किताब के पास तर्क शक्ति नहीं होती ! किताबे पढ़ना लिखना नहीं जानती उनके लिए काला अक्षर भैंस बराबर है ! अपने अमेज़न और फ्लिपकार्ट के सपनों के साथ किताबें अब पूरे विश्व में मिलती हैं ! ‘हर किताब, अब विश्वविख्यात’ ये किताबों के लिए नया नारा है !

मेले में सुबह तक मेरी पढ़ी हुई कई किताबें भी मुझसे मिलीं ! पढ़ी हुई किताबों से मिलना बहुत आत्मीय होता है ! पढ़ ली गयी किताब और पाठक के रिश्ते को मैं बाप और बेटी या माँ और बेटी के रिश्ते से कम नहीं मानता हूँ ! किसी किताब को पढ़ कर देखिये, आप को मेरी हर बात सच लगेगी ! किताब और पाठक या पाठिका का अमिट रिश्ता जीवन भर नहीं टूटता है ! पहला पाठक ही हर किताब का पहला प्यार है ! मैं किताबों को एक जीवित भावनाओं का पुलिंदा मानता हूँ ! किताबों में प्राण नहीं होता तो वो हमें हँसाती और रुलाती कैसे ? वो जीवित नहीं होती हैं तो हमारा जीवन कैसे बदलतीँ हैं ? किताबों का मेला नहीं लगता तो हम किताबों से मिलते कैसे ? नयी और पुरानी किताबों से हमारा परिचय कैसे होता ? रात की इस घटना के बाद मुझे एक बात अच्छी तरह समझ में आ गयी है कि हर किताब जाने या अनजाने में आप में एक परिवर्तन जरूर ले आता है ! जैसे पढ़ लिए जाने के बाद किताब एक पाठक पुरानी हो जाती है वैसे ही हम भी किसी किताब को पढ़ने के बाद एक किताब पुराने हो जाते हैं !

सुबह होने लगी थी ! किताबों ने मिल कर मेरे लिए कोरस में ‘हम होंगे कामयाब’ गीत गया और ख़ुशी ख़ुशी मुझे विदा किया ! पुस्तक मेले से लौटते हुए मेरी आँखें पता नहीं क्यों उस बाप की तरह भर गयी थी जो अपनी बेटी को हॉस्टल में छोड़ कर आ जाता है !

मैंने देखा एक पल में सभी किताबें अपनी जगह लौट गयी थीं ! मैं भी अपनी दुनिया में खोने के लिए लौट रहा था ! तभी बाहर से आती हुई एक मानुषी ने मुझसे पूछा ‘बुक फेयर कहाँ है ?’
‘जी ?’ मैं समझा नहीं …! क्या मैं कहीं खो गया हूँ ?’ मेरे मन में ये प्रश्न उठा !
‘बुक फेयर प्लीज ? फेसबुक लाइव करना है, जल्दी कहिये बुक फेयर कहाँ है ?’ उसने मुझे फिर टोका ! वो बहुत जल्दी में थी !
‘यही पुस्तक मेला है !’ मैंने जवाब दिया !
मानुषी ने मुझे ऐसे देखा जैसे साक्षात् प्रेमचंद को देख लिया हो !
क्या पुस्तक मेला और बुक फेयर दो अलग आयोजन हैं ? और अगर ऐसा है तो क्या किताबें ये जानती हैं ? पिंक स्कार्फ़ और स्वेटर उतारते हुए मैं सोचने लगा !
अचानक मानुषी चिल्लाने लगी ‘आए लव बुक्स … आए लव बुक्स !’ और आए लव बुक्स चिल्लाते हुए अंदर की तरफ भाग गयी ! उसे उस किताब का पोस्टर दिख गया था जिसको वो लाइव करने आयी थी ! मैं उसको पुस्तक मेले में जाता हुआ देखता रहा ! क्या पता मानुषी के रूप में अनायास ही मैं भविष्य की किसी लेखिका से सीधा संवाद कर चूका था ! इस कल्पना मात्र से ही मन में गुदगुदी हो रही थी ! मैं किताब के मेले से बच्चों की तरह नाचता हुआ लौट रहा था !

ट्रिविया दास

रेप हुआ तो रेपिस्ट से मिल लिए / फिल्म बनी तो आर्टिस्ट से मिल लिए / गीत बना तो सिंगर से मिल लिए / जिधर भीड़ देखी चल दिए / कोई फोटो नहीं जिससे नहीं मिले / किसी ने कुछ पकाया तो उसे डिश बना के मिल गए / अजनबियों को फ्रेंडशिप बता के निकल गए / शेर को अपना बना लिया / सियार की पीठ ठोक दी / जैसे ही आप मुड़े, हँस के अपनी ही सेल्फी ले ली / वाह रे सोशल जमाना ! यहाँ पहुँचा, फोटो देखिये ! ये खाया, फोटो देखिये ! ये मेरे बगल में खड़े थे, फोटो देखिये ! फोटो के एक फ्रेम में सिमट के रह गया है जीवन अनुभव का विस्तार ! ये ट्रिविया काल है ! सब ट्रिवियल बाते करते हैं ! न पढ़ते हैं, न सुनते हैं, न सोचते हैं, बस टी वी देखते हैं और ट्रीवयल जीते हैं ! एक फोटो फ्रेम में सबका अनुभव संसार समा गया है ! विस्तृत कुछ भी नहीं ! मैं कई ट्रिविया विशेषज्ञ को जानता हूँ जो पचास शब्द में दस लोगों को टैग करते हैं ! ट्रिविया ने सबको अपना दास बना लिया है ! जो हर व्यक्ति, जगह, किताब, फिल्म, कला, संगीत और हर रचना के जादू में एक टूरिस्ट की तरह घुस जाते हैं, अपने पसंद का रायता फैलाते हैं और फोटो खिंचा के निकल जाते हैं ! ऐसे मिस्टर ट्रिविया दास को समर्पित मेरी कुछ ट्रिवियल कविता

ट्रिविया ( एक )

जब थी / मैं था
मेरी / मेरे
कल शाम की बात है /
ये थे, वो थे /
ओह ! मैं भी !

*

ट्रिविया ( दो )

वैसे मैं पिछले बीस-बाइस सालों से उन्हें जानता हूं …
पहली पंक्ति /

कुछ साल पहले उनसे मिला …
इनसे मिला,
उनसे मिला,
गले,
हार …
फोटो !

मैंने कहा कि …
फोटो !
पिछले हफ्ते …
फोटो !
उनका संदेश आया कि …
फोटो !

सुबह …
फोटो !
दोपहर …
फोटो !
शाम …
फोटो !
रात्रि …
फोटो !
मेरे हाथ में …
फोटो !
शुक्रिया ये जी /
शुक्रिया वो जी,
यूं बोले …
मैं बोला
फिर वो बोले,
हम अबोले –
सब पढ़ते हैं !
*

ट्रिविया ( तीन )

ये जी
वो जी
जब ये …
जब वो …
तब से हम /

छह साल पहले
दो दिन पहले
परसों
कल
सब ट्रीवीअल !
*

ट्रिविया ( चार )

बरसों पहले
एक चिट्ठी लिखी
कल छपी
आज सुबह
बहरहाल,
मैं पास में खड़ा हूं !
*

ट्रिविया ( पाँच )

हमारे प्यारे दोस्त
निशांत
विक्रान्त
सूर्यकान्त
सिद्धान्त

मौका मिला
इनके साथ
उनके साथ
सब मैं किया !

सन ’97 अगस्त महीने में,
लगभग साल भर
दोपहर में लंच से पहले …
मैं उन्हें !
मैं,
मैं,
मैं !
छोटे फाॅन्ट में
उनका नाम
बड़े फॉण्ट में मेरा नाम !

मुझे यक़ीन नहीं हुआ,
मुझे मालूम नहीं था …
मैंने सोचा
मुझे लगा
पिछले कुछ सालों से
बीती रात की …

धन्यवाद !
फलाँ बाबु
करीब दो साल पहले …
हम बहुत कम मिले …
लेकिन जब भी मिले …
मेरा / उससे
अफ़सोस … !

और अंत में –
वो होते तो आपको जरूर टैग करते /
मैंने किया …
आपने किया ?

केवल चापाकल,
सब ट्रिवियल !

चुनाव और दंगल

मैं जन्म से नागरिक हूँ, मैं किस राजनितिक पार्टी में जाऊँ इसका चुनाव होने वाला है ! समाचार पाठक ने जबसे मुझे बताया है कि मेरे चुनाव के लिए सभी दल मेरे साथ दंगल करने वाले हैं, मेरी नींद उड़ गयी है ! इंटरनेट पर मैंने देख लिया है देश के करोड़ों नागरिक पहलवान में एक मेरा नाम भी है ! देश के मतदान सूचि में नाम होना किसी महाकाव्य में अपने नाम को देखने जैसा है ! मेरा पूरा नाम, मध्य नाम, अंतिम नाम, आयु, लिँग, जन्म तिथि, राज्य, जिला, शहर, गांव, जन्म स्थान, घर का दरवाजा – नंबर, स्ट्रीट, क्षेत्र, मोहल्ला, डाकघर, पिन कोड, थाना, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, चुनाव आयोग के पास है ! मतदाता सूची में नाम होने की वज़ह से अब मैं इस दंगल से बच नहीं सकता ! बुद्धिमान बुद्धिजीवी लोग वोट देने क्यों नहीं जाते हैं मेरी समझ में आ गया ! हमारे देश में अधिक वजन और मोटापे से ग्रस्त लोगों की संख्या अधिक क्यों है इसका कारण भी मुझे समझ में आने लगा है ! इस चुनावी दंगल के लिए नागरिक पहलवान अपने शरीर के साथ पांच साल की तैयारी करते हैं, और पहलवान से दिखते है ! दंगल में कोई हारना नहीं चाहता ! चुनाव और दंगल, मतलब फिट टू फैट तक की जर्नी और जंगल में मंगल !
मैं उचित शारीरिक स्थिति में हूँ ! सात मिनट में एक मील चल लेता हूँ पर पहलवान के आकार का नहीं हूँ ! सभी पार्टियों के पहलवानों की सूची जारी हो रही है ! उम्मीदवारों की तस्वीर और उनके यश की कद काठी देख कर मुझे डरावने सपने आने लगे हैं ! न जाने क्यों मेरे मन में राजनितिक पार्टीयों द्वारा आम आदमी के साथ अब तक किए गए मोलेस्टेशन का दंगल शुरू हो गया है ! आँख लगते ही अखाड़े में पहुँच जाता हूँ जहाँ मेरी पसलियां टूट जातीं है, घुटने घायल हो जाते हैं और मेरी नींद उचट जाती है ! मुझे अपनी बॉडी कमज़ोर लगने लगी है ! मैं शुद्ध शाकाहारी हूँ और मैंने कभी वज़न नहीं उठाया है !
अगले दिन मैं एक फिटनेस ट्रेनर के सामने बैठा था ! ‘एक नागरिक पहलवान के साथ दंगल करने के लिए हर राजनितिक उम्मीदवार अपने ऊपर बीस से अठ्ठाईस लाख रुपये खर्च कर रहा है ! आप का बजट क्या है ?’ उन्होंने पूछा !
‘जी ? ‘ जिम की इतनी फीस होगी मैंने सपने में भी नहीं सोचा था ! मैं चुप हो गया था ! मुझे गौर से देखते हुए उन्होंने कहा ‘उम्मीदवारों के सामने टिके रहने के लिए आप को नए उपाय सोचने होंगे ! आप का अकॉउंट किस वोट बैंक में है ?’ उन्होंने पूछा ! ‘स्टेट बैंक में’ मैंने जवाब दिया !
‘सबका स्टेट बैंक एक है ! आपका वोट बैंक कौन सा है ?’
मैं ब्लेंक था ! वो संमझ गए कि इस दंगल में मैं नया पहलवान हूँ !
‘नाश्ते में क्या करूँ ?’ सवाल करने की मेरी बारी थी !
‘नाश्ते में विचार कीजिये !’
‘वो तो डिनर में किया था’ मैंने जवाब दिया !
उन्होंने मुझे निहारते हुए जवाब दिया ‘यही प्रॉब्लम है, आप ने ज्यादा विचार किया ! आप कैसा शरीर चाहते हैं ?’
‘मैं बस दंगल जीतना चाहता हूँ !’
‘आप को समय देना होगा !’
‘मेरा पूरा समय ले लीजिये … ‘
‘आप बेरोज़गार हैं ?’
‘जी नहीं मैं लेखक हूँ !’
‘जी एक ही बात है …’ उन्होंने कहा !
मैं अवाक था !
‘रिजल्ट कब से आना शुरू हो जायेगा ?’ मैंने पूछा !
‘ग्यारह मार्च को’
‘जी ?’
‘ओह , बॉडी ? आप की बॉडी अगले चुनाव तक बन जाएगी !’
‘और इस दंगल में ?’
‘इस दंगल में कसरत से शरीर बनाना असंवैधानिक हैं ! इस दंगल में आप बस हमारा साथ दीजिये !’ मेरे फिटनेस ट्रेनर ने कहा स्वस्थ जीवन शैली, व्यायाम, पोषण, आदि का ज्ञान मुझे वोट बैंक में मिल जायेगा ! पूछता पूछता मैं वोट बैंक पहुँच गया ! वोट बैंक स्वचालित रूप से डिफ़ॉल्ट राष्ट्रीय हित है ! इस बैंक को सब लोग संदेह की नजर से क्यों देखते हैं मुझे नहीं पता ! वोट बैंक में ब्याज दर सबसे अच्छा है !
‘आप किस नाम और निशान से अकाउंट खोलना चाहते हैं ?’
‘जी मैं अपने नाम से अकॉउंट खोलना चाहता हूँ !’ वो मुस्कुराये ! मैं भी मुस्कुरा दिया !
वोट बैंक में पता चला आहार के लिए इन्टरनेट और कैशलेस इकॉनमी है ! प्रोटीन गूगल पर है ! यूट्यूब पर हर व्यायाम है ! स्वस्थ शरीर के लिए बस खुश रहना जरुरी है !
अगले दिन सुबह समाचार पाठक ने ओपिनियन पोल में बताया कि चुनाव दंगल में मैं जीत रहा हूँ ! मैं अपनी जीत से चौंक गया ! न मैं बूथ पर गया था न अखाड़े पर फिर बिना दंगल लड़े और अखाड़े पर गए मैं जीत कैसे गया ?

चुनाव और दंगल