जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

१.
मैश – अप के हमाम में बोलो हर हर गंगे
मिडिया के रिवेंज पोर्न में सब के पंगे नंगे
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

२.
बूथ दर बूथ पानी हुआ और दूध का दूध
प्रेग्नेंट थी सरकार अब है अबॉर्शन का मूड
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

३.
छोड़ो सबकुछ पकड़ सको तो सिग्नल को पकड़ो
क्या हो जो सबके कपड़े ले उड़ जाए इसरो
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

४.
उफ़ मतला, मक़ता, काफ़िया और रदीफ़
हैं व्याकरण के सब गुंडे हिन्दू और शरीफ़
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

५.
दो पाटन के बीच में कोई बाकी बचा न जात
रेडियो में कौन कर रहा है अपने मन की बात
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

६.
बुर्क़ा पहन के क्यों न निकली चल रहा अभियान
जाना था शमशान कहाँ चली तू बिजली की रमजान
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

७.
कफ़न में भी जेब होंगे डिजिटल जलेगी लाश
मरघट की करें राजनीति कैश है जिसके पास
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

८.
दो हज़ार का नोट चौक पर मांग रहा था भीख
पूछा तो बोला एक हज़ार से उसने ली है सीख
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

९.
गधे भी हार गए आदमी था लाचार
मान गए गधे अब आदमी करें उनका प्रचार
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

१०.
नए लुक में फिर आएगा हज़ार रुपये का नोट
लाइन में सब खड़े होकर पहले दे दो वोट
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

सिनेमा का दुखवा मैं कासे कहूँ ?

1.

पात्रों की भाषा को ‘सिनेमा की भाषा’ मानने वाले मुर्ख, ‘देखो’ बसंत आया

” … क्षेत्रीय भाषा बोलने वालों को नीचा दिखा कर अपनी श्रेष्ठता बनाने की कोशिश करने वाले, आप चाहें तो मुझे भी ‘दूस’ सकते हैं, पर सिर्फ़ अपनी मूर्खता की प्रबल दावेदारी बनाये रखने लिए कृपया सवाल मत कीजियेगा ! मेरी बात और ये चित्र नहीं समझे तो रहने दीजिये आप से नहीं होगा, ये अलग भाषा है जो सिनेमा बनाने के काम आती है ! सिनेमा समझने के लिए सिनेमा की भाषा सीखनी पड़ेगी ! सिनेमा के पात्रों की क्षेत्रीय भाषा पर स्टेटस पेल कर आप भाषायी लोगों में हीन भावना भर रहे हैं ! भाषाओँ की इस तौहीन के लिए भाषायी पात्र आपको कभी माफ़ करेंगे ! आप की शिकायत में ‘सिनेमा की भाषा’ दोषी है, ‘पात्रों की भाषा’ नहीं ! फेसबुक पर लाउड स्टेटस की राजनीती कर के आप भाषा की भावनाओं को अनजाने में ठेस पहुँचा रहे हैं ! महान फिल्मकार सत्यजीत रे के पात्रों ने भी क्षेत्रीय भाषा बोल कर विश्व के सिनेमाई भाषा में सर्वश्रेष्ठ स्थान पाया, पर रे ने कभी भाषा बोलने वालों को नहीं ‘दूसा’ ! जो पुरस्कार आपको मिला है वो पात्रों की भाषा का पुरस्कार है ! उक्त भाषा को पात्रों की भाषा बनाने का पुरस्कार भी सिनेमा का पुरस्कार नहीं होता …
‘सिनेमा की भाषा’ पर लगातार काम कर के आप अपनी उपस्थिति बना सकते हैं ! पात्रों की भाषा को ‘दूस’ कर आप अपने ही दर्शकों को बौखला रहे हैं ! जागिये कहीं ऐसा न हो कि आप न सिनेमा के रहे न भाषा के …” – मैं भी मूर्ख हूँ, इसलिए मूर्खों के साथ बहस से बचने के लिए अपने आप को मैंने खुली चिठ्ठी लिखी ‘ सिनेमा का दुखवा मैं कासे कहूँ ?’

2.

हिंदी सिनेमा / भारतीय सिनेमा, हिंदी फिल्म / भारतीय फिल्म, इंडियन सिनेमा / इंडियन फिल्म सही नाम है ! रीजिनल फिल्म / सिनेमा के लिए भारत के क्षेत्रीय भाषाओँ के साथ फिल्म / सिनेमा शब्द लगाइये ! बॉलीवुड कोई स्थान / भाषा नहीं है ! ‘बॉलीवुड’ बहुत मूर्खतापूर्ण शब्द है जो किसी दुसरे देश के एक नगर का पैरोडी है ! हम अपने सौ साल की कलात्मक यात्रा को ‘बॉलीवुड’ कह कर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हास्यास्पद क्यों हो जाते हैं ?

क्रमशः

ढाई आखर कैश का / PMGDISHA

डिजिटल साक्षर होने पर डिजिटल विद्यार्थी पी एम जी दिशा में चलने लगेंगे ! पी एम चाहे किसी भी देश में हों पी एम जी दिशा में चलने वाले बैंक पहुँच जायेंगे ! वहाँ उन्हें डिजिटल ठेंगा मिलेगा, डिजिटल लाइक मिलेगा, हैश टैग मिलेगा ! पी एम जी दिशा में आप के पास बैंक बैलेंस हो न हो ए टी एम जरूर होगा ! देश में चाहे कितना भी आर्थिक अँधेरा हो पी एम जी दिशा में सूरज कभी अस्त नहीं होगा ! डिजिटल साक्षरता में स्मार्ट फ़ोन का न होना ही अँगूठा छाप होना होगा ! डिजिटल साक्षरता में विद्या का कसम मोबाइल फ़ोन का ब्रांड होगा ! डिजिटल ज्ञान में मन की बात होगी ! डिजिटल साक्षर होते ही मेरा लिखा ढाई आखर कैश का सबको समझ में आ जायेगा !

तीन बार ठोका

सब कह रहे हैं तीन बार ठोका ! मुझे लगता है ये दुरुस्त संकेत है ! घर की दिवार और चबूतरे को कई राजमिस्त्री तीन बार ठोक के सीमेंट बालू के मसाले की मजबूती देखते हैं ! मोबाइल फ़ोन, रेडियो, टेलीविजन को अब भी लोग गाँव में बजाने से पहले तीन बार ठोकते हैं ! एक प्रसिद्ध कव्वाल अपनी महफ़िल शुरू करने से पहले माइक को तीन बार ठोकते थे ! कई ताले हैं जिनको जब तक तीन बार न ठोको नहीं खुलता ! एक ग्वाला अपनी भैंस को दुहने से पहले भैंस की पीठ तीन बार ठोकता था, ऐसा करने से भैंस ज्यादा दूध देती है ये उसका मानना था ! कई तबलचियों और ढोलकियों को मैंने तबला ढोलक को तीन बार ठोकते हुए देखा सुना है ! अपनी मोटरसाइकिल में स्ट्रोक देने से पहले एक दरोगा मोटरसाइकिल को तीन बार ठोकते थे ! घर का दरवाज़ा मेरे बड़े भाई तीन बार ठोकते हैं तब भाभी खोलती है ! मेरी खाना बनाने वाली सिलिंडर ऑन करने से पहले गैस का चूल्हा तीन बार ठोकती है ! ज्यादा स्पार्क के लिए, आवाज़ के लिए, दूध के लिए, ज्ञान के लिए, सुख के लिए, सीट के लिए, हम भारतीय हर चीज को तीन बार ठोकते हैं ! ठोक बजा के देखने में क्या बुराई है !

चल ‘इसरो’ घर आपने, उपग्रह पहुँच गए आकाश – ‘अमीर इसरो’

इसरो रैन चुंनाव की, जागी रॉकेट के संग !
तन मेरो मन इंडियन को, दोउ भए एक रंग !!

इसरो दरिया ज्ञान का, उल्टी वा की धार !
जो उतरा सो उड़ गया, जो उड़ा सो पार !!

सैटेलाइट बनाई जतन से, चरखा दिया जला !
आया नेता खा गया, तू बैठी ढोल बजा !!

नेता सोवे सेज पर, मुख पर डारे विकास !
चल इसरो घर आपने, उपग्रह पहुँच गए आकाश !!

इसरो मौला के रुठते, पी एम के सरने जाय !
कहे इसरो पी एम के रुठते, मौला नहिं होत सहाय !!

– ‘अमीर इसरो’

‘ डिस्कवरी ऑफ शराफत ‘

प्राक्कथन

शराफत पर मेरी लिखी हुई किताब ‘ डिस्कवरी ऑफ शराफत ‘ आप सब शराफत से पढियेगा ! मेरा दावा है किताब पढ़ कर आप भावुक हो जायेंगे, आप का गला भर्रा जायेगा, आप की आँखें छलछला जाएँगी और आप अपनी शराफत को ढूंढते हुए न जाने कहाँ चले जायेंगे ! ‘संयुक्त राष्ट्र इज़्ज़त’ में ‘डिस्कवरी ऑफ शराफत’ के पाठ के दौरान सबका यही हाल था ! सब एक एक कर के सभा छोड़ कर न जाने कहाँ चले गए थे !

‘ शराफत माता की जय ‘ डिस्कवरी ऑफ शराफत का पहला अध्याय है !
भारत में शराफत के बहुत से मन्दिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च, मठ और आश्रम हैं ! शराफत माता की जय आज भारतीय राजनीती में सफलता का पासवर्ड है ! कई आंदोलन में क्रांतिकारियों ने भरी सभा में ‘ शराफत माता की जय ‘ कह कर एक दुसरे की और हमारी आप की नींद उडा दी !

सेल्फी ही शराफत है ! सेल्फी शराफत का बिम्ब है ! सोशल साइट्स पर आप के पास शराफत का बिम्ब न हो तो दोस्तों को बम्बू कैसे करेंगे ?

इंटरनेट पर सब एक अलग व्यक्ति हैं ! इन्टरनेट की शराफत अलग होती है !

डिस्पोजेबल मानसिकता में फिट होने के लिए मैंने शराफ़त की पुड़िया बना ली है ! आप को जब भी शराफ़त की जरुरत हो आप कम से कम ग्यारह रुपये दे कर शराफत रिफिल करा सकते हैं ! शराफत की मांग को देखते हुए मैंने ये समाधान डिज़ाइन किया है ! यह पर्यावरण के लिए न अच्छा हो पर बुरा भी नहीं है ! बोतल की तुलना में शराफत का पाउच सस्ता है !

इज़्ज़त की दुल्हन के घूघँट को शराफत कहते हैं ! जैसी दुल्हन वैसी घूँघट !

विद्यालय और विश्वविद्यालय शराफ़त की फैक्ट्री है ! शराफ़त बायोडाटा का ऑक्सीजन है ! शराफ़त चरित्र प्रमाण पत्र का सुहाग है ! चरित्र प्रमाण पात्र के मिलते ही आप शराफ़त को पा लेते हैं ! शराफ़त एक हस्ताक्षर है ! प्रिंसिपल का ऑटोग्राफ है ! प्रमाण पत्र ही आदमी को शरीफ़ बनाता है, चाहे वो खुद जो कुछ भी हो !

धुल धूसरित चरित्र को धो कर चकाचक रखना भी शराफत है ! चरित्र कांति में बाल एक बड़ी भूमिका निभाता है ! शुष्क चरित्र वालों के लिए शराफत शैम्पू है ! शराफत का शैम्पू लगा कर सबका चरित्र लहराता है ! घने काले लंबे बालों जैसे चरित्र को धोने के लिए सबको शराफत का शैम्पू चाहिए !

वन डे शराफत ! बन्दे, वन डे शराफत को समझें ! शराफत एक पोशाक है ! अच्छी शराफत के लिए लोग अच्छे कपडे भी पहन लेते हैं ! शराफत जैकेट पहन कर मुझे पता चल गया है कि शराफत अब फैशन स्टेटमेंट है ! शराफत में एक दिन लाल गुलाब भी अपनी अचकन में टाँक कर देख लें ! एक दिन का लाल गुलाब ‘ वन डे शराफत ‘ है !

मैंने शराफत की मेहँदी भी लगा कर देख ली ! जीते जी अब तक कोई अपनी शराफत को सजा नहीं पाया है ! सजी हुई शराफत को लोग चार कंधे पर उठा लेते हैं ! यही शराफत की घर वापसी है !

‘ शराफत बंद उर्फ़ भारत बंद ‘ डिस्कवरी ऑफ शराफत का आखरी अध्याय है ! ‘ भारत बंद ‘ सभी राजनीतिक दलों के शराफत का महाकाव्य है ! लोकतंत्र में आप शराफत से शराफत का विरोध करने के लिए स्वतंत्र हैं ! आलोचना और विरोध शराफत का गहना है ! शराफत से विरोध करने का अधिकार हमारा मौलिक अधिकार है ! शराफत को विरोध से को कोई अलग नहीं कर सकता ! संविधान हमें विरोध करने का अधिकार देता है और हम शराफत से संविधान का पालन करते हैं ! लोकतंत्र में भूख हड़ताल शराफत की शुरुआत है और भारत बंद शराफत का अंत है ! भारत बंद अर्थात शराफत बंद ! संसद में शराफत को ही विपक्ष कहते हैं ! विपक्ष शराफत से संसद में हल्ला मचा सकता है और उसकी कार्रवाई ठप्प करा सकता है ! आज कल अक्सर कई मुद्दों पर नग्न विरोध प्रदर्शन से शराफत नंगी हो जाती है ! इतने रावण जलाने के बाद भी अब तक हमारी शराफत जल के राख नहीं हुई ! जनहित में भारत बंद राजनीतिक दलों की अमर शराफत है !

मैं सिर्फ़ इस किताब का लेखक नहीं शराफत का पुतला भी हूँ ! मेरा घुँघराला चरित्र है ! लोकतंत्र में लोग मुझ जैसे शराफत के पुतले को अपनी जेब में ले के घुमते हैं ! लोकतंत्र में सबके पास अपनी शराफत है ! डिस्कवरी ऑफ शराफत इस अध्ययन की स्थापना करता है कि कोई भी चिंतन शून्य में नही होता, परिवेश में होता है ! इसलिए प्रत्येक चिंतन में परिवेश तत्व व्याप्त रहता है, वह उसकी शक्ति भी होता है और सीमा भी होता है ! ‘ डिस्कवरी ऑफ शराफत ‘ भी एक परिवेश है, जिसके केन्द्र में व्यंग्य की निर्णायक भूमिका है ! इसलिए इस अध्ययन का श्रेय निस्संदेह व्यंग्य की जुगलबंदी को है और मैं उनके प्रति कृतज्ञ हूँ !

‘ डिस्कवरी ऑफ शराफत ‘ यूपीएससी परीक्षाओं के लिए पाठ्यक्रम का हिस्सा हो जाये तो मैं हमेशा के लिए शरीफ हो जाऊँ ! अपनी ये किताब मैंने अपनी मातृभूमि को समर्पित किया है !

संजय झा मस्तान / बसंत २०१७ / मुम्बई

वैलेंटाइन जो देखन मै चला

श्री गणेश जी से मोदक ले कर, माँ सरस्वती से वीणा लेकर, शंकर भगवान से चाँद ले कर, कृष्ण भगवान से बाँसुरी ले कर, श्री राम जी से धनुष ले कर, यीशु मसीह के चेहरे से करुणा ले कर और युद्ध के यूनानी देवताओं की कठोरता के साथ बासंती पीले और जूनून के सूर्ख लाल रंग के वस्त्र में, सफ़ेद बाल दाढ़ी लगाकर सांता क्लॉज़ की तरह चौदह फ़रवरी को मैं संत वैलेंटाइन बन के तैयार हो गया और जय मातादी बोल कर प्रेमियों से मिलने निकल पड़ा !

संत वैलेंटाइन का मेरा ये रूप सबसे पहले कुत्तों ने देखा और भौंकने लगे ! पता नहीं मेरे वैलेंटाइन भेष में ऐसा क्या मिश्रण हो गया था जो कुत्तों को आकर्षित कर रहा था ! श्वान – दल ने मेरे जश्न में जुड़ने का मौका नहीं गवाँया और आगे पीछे साथ चलने लगे ! लोकल कुत्तों ने दल बना के मुझे घेर लिया था और भौंक भौंक के मुझसे मेरा परिचय पूछने लगे ! व्यक्ति को जीवन व्यतीत करने के लिए क्या पहनना है और कैसे जश्न मनाना है इन बातों से आधुनिक कुत्तों का क्या लेना देना ? यह सोच कर सोसाइटी के डस्टबिन के पास रुक कर मैंने उनसे बात करने की भी कोशिश की ! मैंने उन्हें बहुत पुचकारा पर वो मानने सुनने को तैयार नहीं थे ! मैंने बाँसुरी भी बजाई पर वो चुप नहीं हो रहे थे ! भौं – भौं का जवाब भौं – भौं से देना मैंने ठीक नहीं समझा और चुपचाप चलता रहा और गुनगुनाता रहा ‘संत वैलेंटाइन चले बाज़ार कुत्ते भौंके हज़ार … ‘

श्वान – दल के शोर का फायदा हुआ ! शोर सुन कर आस पास खेल रहे बच्चों के बाल हनुमान दल ने मुझे देख लिया ! संत वैलेंटाइन का मेरा ये रूप देख कर बच्चे ताली बजाने लगे और खुश हो गए ! मेरे साथ बच्चों को खुश देख कर पास में खड़ा हवा मिठाई बनाने वाला मेरे साथ चल पड़ा ! बच्चों के संग मुझे और हवा मिठाई वाले को साथ देख कर खिलौने वाला भी साथ में आ गया और कुत्तों को भगाने में मेरी मदद करने लगा ! खिलौने वाले के साथ एक बहुरूपिया भी था जो चुनाव के माहौल से प्रेरित हो कर सभी दलों के झंडे और टोपी पहन कर सर्वदलिय नेता का भेष बना कर घूम रहा था और अपनी पार्टी के प्रचार का स्वांग कर के मोहल्ले में सबका मनोरंजन कर रहा था ! सब मेरे साथ चल दिए ! संत वेलेंटाइन बना मैं अब एक छोटे मोटे मेले से घिर गया था ! भीड़ से घिरते हुए अपनी हालत देख कर मुझे लगा संत वैलेंटाइन प्रेम के नहीं विज्ञापन के अच्छे ब्राण्ड एम्बेसडर हो सकते हैं !

शोर और बच्चों की तालियाँ सुन कर बड़े दुकानदार निकल कर मुझे देखने लगे और मुझसे मेरा डिटेल लेने लगे ! मैंने उन्हें बताया वैलेंटाइन ईसाई चर्च में एक साधु था जो भारत में अब प्रेम का ऑनलाइन देवता हो गया है और मैं वही हूँ ! कई शताब्दी पहले के संत को साक्षात देख कर दुकानदार पहले किसान की तरह डर गया फिर कंज्यूमर की तरह कंफ्यूज हो गया पर मेरे साथ बच्चों का बाजार देख कर खुश हो गया ! मुझे देख कर दुकानदार को विशाल खिलौने की दुकान का आइडिया आ गया था और दुकानदार चाह रहा था मैं सदा के लिए उसके दूकान में रुक जाऊं ! दुकानदार की बात सुन कर मैं डर गया और डर के मारे सांता क्लॉज़ की तरह हँसने लगा ! दूकान में क़ैद होने के डर से नर्वस मैं “हो हो हो’ कह कर उसकी बात का स्वागत किया ! मेरे साथ सब बच्चे भी ‘हो हो हो / हो हो हो’ कर के हंसने लगे ! दुकानदार ने मुझे आँख मार कर कहा ठीक है बाबा आप आगे बढिए मुझे आप का व्यापार रहस्य समझ में आ गया है ! दुकानदारों की चंगुल से निकल कर मैं प्रेमियों से मिलने बढ़ गया !

बहरूपिया, दुकानदार और बच्चों की नज़रों से मुझे ये पता चल गया कि सुंदरता देखने वाले की नजर में है ! अपनी समझ से पौराणिक देवताओं और विशुद्ध रूप से काल्पनिक चरित्र की विशेषताओं के रूप में मेरा वैलेंटाइन भेष धर्मनिरपेक्ष था और पौराणिक आंकड़ों के साथ मिल कर नया समीकरण बना रहा था ! अब तक दुकानदारों की सेल्फियों में सफेद बालों वाली तस्वीर के साथ मैं व्हाट्सएप्प का माल बन चूका था ! अब मुझे सिर्फ़ प्रेमियों की तलाश थी ! मोहल्ले के ग्लोब से निकल कर मैं अब सोसाइटी की गैलेक्सी में आ गया था ! मुझे लगा अब प्रेमी दूर नहीं !

बच्चों ने छोड़ा तो मुझे बूढ़ों ने पकड़ लिया जिनका वेलेंटाइन वीक में वेलेंटाइन वीक था पर कामदेव स्ट्रांग रहा था ! मेरे पिंक स्टॉकिंग्स देख कर वो भी मचलने लगे ! हाथ जोड़ के बूढ़ों ने एक स्वर में कहा ‘प्रभु मेरे ह्रदय के कोलाहल को कम कीजिये !’ ‘इसके लिए ऑनलाइन होना जरुरी है’ ये कहते हुए मैंने सबको प्रेम से मोदक चखाया और आगे बढ़ गया !

साथ साथ एक ही क़ुलफ़ी खाते हुए मुझे प्रेमी का एक जोड़ा दिख ही गया ! प्रेमी के इस युगल जोड़े के प्रेम को देख कर मेरा ह्रदय भर गया ! आलिंगन चुम्बन से दूर मुझे ये शुद्ध प्रेमी लगे ! मेरे अंदर का वैलेंटाइन जाग गया था ! वैलेंटाइन उवाच : समाज में दहेज के अभाव में वेश्यावृत्ति में धकेल दी गई लड़कियाँ क्या जानें चॉकलेट डे, प्रपोज़ डे, और प्रोमिस डे का स्वाद ! जैसे ही मैं गुलाब देने प्रेमी युगल की ओर बढ़ा छुपे हुए एक दल ने मुझ पर पिंक चड्डी कहते हुए हमला बोल दिया ! प्रेमी भी उनसे मिले हुए थे ! वो प्रेमी नहीं मुझ जैसे वैलेंटाइन को फ़साने का जाल थे ! चारो तरफ भगदड़ का माहौल बन गया ! मैंने पीताम्बरी खोल के उनको अपना लाल लंगोट भी दिखाया पर बात बनी नहीं ! मेरा चाँद बिखर गया ! वीणा के तार टूट गए ! मोर पंख बाँसुरी, मोदक धनुष सब चूर चूर हो गए !

शराब की लत और बलात्कार जैसी बीमारियों से लड़ने की जगह भूले बिसरे किसी संत को बाँधने की कोशिश करने वाले कौन है ये लोग ? मैं चीख पड़ा ! वैलेंटाइन की सच्चाई यह है कि वह एक व्यक्ति बिल्कुल नहीं है, वह एक विचार है ! मेरी बातों को सुन कर कार्यकर्ताओं के दल ने ऐसे मुंह बनाया जैसे एस एम एस की जगह कागज़ पर हाथ से लिखी चिठ्ठी देख ली हो ! ‘बाबरी वाले समाज में नहीं बराबरी वाले समाज में ही प्रेम पल सकता है ! आप मुझे फादर वैलेंटाइन भी कह सकते हैं ! आप अगर वैलेंटाइन के सहस्त्र नाम ले कर भी पुकारें तो वैलेंटाइन बन के मुझे और आप को ही समाज में आना पड़ेगा !’ मैं लगातार बड़बड़ा रहा था !

मुझ पर काबू पाने के लिए फोन कर के किसी ने निःशुल्क कीटनाशक ब्रिगेड को बुलवा लिया था और वो मेरा निरीक्षण कर के मुझे धुएँ से बेहोश करने की तरक़ीब निकाल रहे थे ! आदमी होने के सबूत के लिए मैंने उन्हें ‘हैप्पी वैलेंटाइन डे’ भी कहा पर तब तक देर हो चुकी थी, मैं उनका शिकार हो चूका था ! कीटनाशक ब्रिगेड के किसी ज़हरीली गैस ने मुझे बेहोश कर दिया ! बाद में पता चला था कि मुझे बचाने के लिए प्रेमियों ने एम्बुलेंस बुलाया पर अफ़सोस जवाब में स्कूल बस आया ! संत वैलेंटाइन की कृपा से मुझे कुछ हुआ नहीं था ! इस दुनिया में आज सब चीजों की तरह प्यार का उत्सव भी नष्ट हो सकता है, इस बात को समझने के लिए संत वैलेंटाइन के साथ किया गया यह बाजारू व्यवहार सबसे अच्छा उदहारण है !

वैलेंटाइन डे धीरे धीरे नाईट की तरफ बढ़ रहा था ! सब जानते हैं वैलेंटाइन – डे का प्यार नाइट में किसी काम का नही होता ! शाम हो रही थी ! लड़की, लड़का, गुलाब, चॉकलेट, टेडी बियर, सब घर लौट रहे थे ! सबके प्यार का एक दिवसीय बुखार उतर चूका था ! संत वैलेंटाइन अपना एक दिन का मेला ख़त्म कर के साल भर के लिए इटली लौट गए थे ! हवा मिठाई वाले की सब हवा निकल गयी थी ! खिलौने वाला अब सिर्फ टैक्स भरने वाला भर रह गया था ! फसल – दराती, हाथ, साइकिल, लालटेन और हाथी के झंडे के साथ सड़क पर चलता हुआ बहुरूपिया अब साधारण नागरिक दिख रहा था ! सब जानते हैं प्रेम नगरों में संत वैलेंटाइन दिवस के दिन स्त्री पुरुष के दो लिंगों के साथ पुलिसिंग तीसरा लिंग होता है !

प्रेमियों और बच्चों ने मिल कर मुझे मेरे घर पहुँचाया ! घर पहुँच कर होश आने के बाद हारमोनियम पर मैंने ये निर्गुण गाया ! ” सुनो कामदेव कहे साधु वैलेंटाइन, टैं – टैं – टैं , वैलेंटाइन जो देखन मै चला वैलेंटाइन ना मिल्या कोय, जो दिल खोजा आपनो मुझसा वैलेंटाइन न कोय “

बसंत के चार यार, लड़का लड़की ग्राहक और बाज़ार / व्यंग्य नाटिका

इस व्यंग्य नाटिका के सभी स्थान और पात्र काल्पनिक हैं !

पात्र –  

लड़का / बसंत ( किसी भी उम्र का एक पुरुष पात्र )

लड़की / मौसम ( किसी भी उम्र की एक स्त्री पात्र )

ग्राहक / सार्वजनिक प्रेमी ( किसी भी लिंग और उम्र का एक पात्र )

बाज़ार / सार्वजनिक प्रेमिका ( मल्टीमिडिया पर्दा / स्क्रीन )

नाटिका में बसंत के एक दिन लड़का, लड़की, ग्राहक और बाज़ार मिल कर ‘एंटी रोमियो स्क्वाड’ बन जाते हैं ! नाटक के अंत में यही सब पात्र मिल कर ‘कामदेव स्क्वाड’ बन जाते है !

 

पात्र  परिचय –

( मंच पर अँधेरा है ! पात्र एक एक कर के प्रकाश वृत में अपना परिचय देते हैं ! पात्र  परिचय में ही पात्रों का आपसी कोनफ्लिक्ट स्थापित हो जाता है )

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

लड़का : ( रोमांटिक रस ) मैं बसंत हूँ ! मौसम का राजा हूँ ! मैं रोमियो रोमांटिक हूँ !

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

लड़की : ( पावरफुल रस ) मैं मौसम हूँ ! बसंत मेरा दास है ! मैं लैला पावरफुल हूँ !

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

ग्राहक : ( कन्फ्यूज्ड रस ) मैं प्रेमी हूँ ! वाओ बसंत !!! कितना ब्यूटीफुल मौसम है ! मेरा मोबाइल कहाँ है ? मैं कन्फ्यूज्ड क्यों हूँ ?

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

बाजार : ( लॉस्ट रस ) मैं प्रेमिका हूँ ! बसंत के अंधे मजनुओं से कैसे बचूँ ? उफ़ ! ठहरो अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लूँ ! मैं लॉस्ट क्यों हूँ ? ( स्क्रीन ऑफ हो जाता है )

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

सभी पात्र एंटी रोमियो स्क्वाड बनकर कोरस में : ( हाहाकार रस )

आ रही सोशल मिडिया से पुकार

ट्वीटर पूछे बार बार

फेसबुक पर स्टेटस अपार

सब पूछ रहे हैं नेता और संत

रोमियो का कैसा हो बसंत ?

( हाथापाई करते हुए ) बसंत के चार यार / लड़का, लड़की, ग्राहक और बाज़ार

फिर अँधेरा !

दृश्य : एक

स्थान / ह्रदय बाज़ार ! बाज़ार में बहुत सारे ह्रदय लटक और झूल रहे हैं !

लड़का : मुझे बसंत दिखाइए
लड़की : बसंत अभी दूर है ! बसंत के लिए आप का बजट क्या है ?
लड़का : आप ने कितने बसंत देखे हैं ?
लड़की : जितने बसंत आप ने देखे है , उतने बसंत मैंने आज ही बेचे हैं !
लड़का : व्यक्ति को अपना बसंत खुद बनाना पड़ता है !
लड़की : आप जिसकी बात कर रहे हैं वो वो चरित्र है !
लड़का : जी ?
लड़की : चरित्र को बसंत से मत मिलाइये ! चरित्र का अलग स्टोर रूम है !
तुम मुझे अपना बजट दो मैं तुम्हे बसंत दूंगी !
लड़का : ये कैसी राजनीती है ? बसंत में मुझे बजट क्यों सुनाया जा रहा है ?
लड़की : बजट से ही बना मेड इन चाइना बसंत सबकी जेब में है ! नेता हो या संत सबकी जेब में टिंग – टिंग बजता चीन का बसंत !
लड़का : मेड इन इंडिया बसंत कहाँ है ?
लड़की : वो अभी बन रहा है ! बसंत बना सके इसके लिए बसंत देखना जरुरी होता है ! इसीलिए देखिये चीन का बसंत ! ( उँगलियों से रुपये गिनने का इशारा करती है )
( पुलकित होते हुए ) इण्डिया में देखिये अनलिमिटेड चीनी बसंत !
लड़का : मेरे बसंत का ब्रांड क्या होगा ?
लड़की : बसंत एक प्रोडक्ट है जिसका अभी तक कोई ब्रांड नहीं !
लड़का : ( वीर रस में ) ईश्वर का दिया कभी अंत नहीं होता , जो ख़त्म हो जाये वो बसंत नहीं होता !
लड़की : मत भूलो तुम जैसे रोमियो के लिए बाहर लोकल गुंडों का अभ्यास चल रहा है !
लड़का : सभी चीजों की तरह प्यार का ये उत्सव भी ख़त्म हो सकता है ! याद है पर्दा प्रथा, दहेज प्रथा, बाल विवाह प्रथा, सती प्रथा …
लड़की : सुनो कामदेव ! कैंडी और कन्फेक्शनरी से भरा अपना दिमाग उठाओ और यहाँ से दफा हो जाओ !
लड़का : क्षमा ! क्षमा ! क्षमा !

फिर अँधेरा !

दृश्य : दो
स्थान / प्रेमिकाओं का इनबॉक्स ! बसंत की शुभकामनाओं से इनबॉक्स भरा हुआ है !

इनबॉक्स / एक
एस एम् एस
लड़का – बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है …
लड़की – शटअप

इनबॉक्स / दो
एस एम् एस
लड़का – तेरे मेरे सपने अब एक रंग हैं …
लड़की – शटअप

इनबॉक्स / तीन
एस एम् एस
लड़का – गाता रहे मेरा दिल …
लडकी – शट – अप / शट – अप / शट – अप ! आर्चीज बकवास बंद करो !

फिर अँधेरा !

दृश्य : तीन
स्थान / रंग बिरंगे फूलों के बीच कहीं खिले हुए एक पीले फूल के अंदर !

लड़की : मौसम का क्या हाल है ? पेट कैसा है ?
लड़का : पीले – पीले कर रहा है सुबह से …
लड़की : क्या पिलाया ?
लड़का : पीला ! येलो !
लड़की : कैसा पीला ?
लड़का : सरसों के फूल जैसा पीला और गीला गीला भी !
लड़की : लगता है मौसम को बसंत हो गया है ! लव जिहाद से बचाना !
लड़का : जी ! एंटी रोमियो स्क्वाड देने का प्लान है
लड़की : मार्किट में आ गया है ए आर एस ?
लड़का : जी !
लड़की : बसंत को धमकाता है ?
लड़का : जी !
लड़की : वाह !
लड़का : बस एक बार मौसम बसंत से छूट जाये तो कोहरे तक जान बचेगी !
लड़की : कोहरा कहाँ है ?
लड़का : बाहर है !
लड़की : कोहरे में बसंत ले के आ गए ? मौसम का ग्लोबल वॉर्मिंग चेक करवा लेना, नहीं तो बसंत तक पीला पीला करेगा बाद में सब झड़ जायेगा !
लड़का : जी
लड़की : पतझर तक की दवा दे दी है !
लड़का : जी
लड़की : ( मुस्कुराती हुई ) मौसम पर कोई नियंत्रण नहीं है …
लड़का : ( भरी आँखों से ) तुम क्या जानो मौसम क्या है ?
लड़की : मैं तुम्हारे मौसम का डॉक्टर हूँ !
लड़का : मुझे नहीं पता था कि प्रेम में पागलों के डॉक्टर को मौसम का डॉक्टर कहते हैं !
लड़की : जी ?
लड़का : मेरा मौसम सोशल मिडिया में खुला बदन घूम रहा था !
लड़की : हम्म
लड़का : डॉक्टर साहेब मेरे मौसम को सोशल मिडिया के बसंत से बचा लो !
लड़की : अगर आप के भीतर बसंत की चाह नहीं है तो आप को मौसमी कलैंडर में भी बसंत नहीं मिलेगा !
लड़का : सोशल मिडिया में बसंत इतना भर गया है कि …
लड़की : कि ? क्या …
लड़का : बस एक बार मेरा मौसम सोशल मिडिया के बसंत से छूट जाये तो अगले मौसमी बसंत के अटैक तक जी जायेगा …
लड़की : दूसरों की प्रोफाइल में रहकर हम अपना मौसम खो देते हैं ! अपने मौसम के लिए हमें खुद जीवन के धूप में खड़ा रहना होगा !
लड़का : ये सब राजनीति बसंत की वजह से हुआ ! सॉरी मैंने इस मौसम में दुसरे प्रोफाइल से फ़्लर्ट किया
लड़की : अब किसी को इनबॉक्स में भी हैप्पी बसंत मत बोलना !
लड़का : बस एक बार मुझे सोशल मिडिया के बसंत से बचा लो मैं कभी दुबारा बसंत में झाकूँगा भी नहीं !
लड़की : रोगी बने रहो ! मत भूलो मैं तुम्हारे मौसम की डॉक्टर हूँ !
लड़का : मौन

फिर अँधेरा !

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !
सभी पात्र कामदेव स्क्वाड बनकर कोरस में : बसंत के चार यार / लड़का, लड़की, ग्राहक और बाज़ार / शुरू करो लव सेक्स और प्यार का व्यापार ! हम नहीं कहते जमाना कहता है !

( धनुष से बाण चलाते हुए ) शुरू करो लव सेक्स और प्यार का व्यापार …

रोमांटिक रस के संगीत में पर्दा गिरता है !

इस प्रयोगधर्मी नाटिका में किसी भी प्रकार के मंच सज्जा की कोई आवश्यकता नहीं है ! रचनात्मक प्रकाश और ध्वनि / संगीत से चारों दृश्य को अलग अलग ढंग से दिखाया जा सकता है !