हैश टैग

हैश टैग

 

जिस चीज़ पर मेरा विश्वास होता, उसके लिए मैं खड़ा नहीं हो पाता ! सोशल मीडिया पर अपनी रीढ़ की हड्डी से निराश हो कर मैं एक दिन वर्चुअल दुनिया से बाहर निकल गया !

सोशल मीडिया के हर प्लेटफार्म पर मेरी रीढ़ की हड्डी मेरा साथ छोड़ चुकी थी ! दिन भर अलग अलग प्लेटफॉर्म्स के हर वॉल के हर पोस्ट पर बिन पेंदी के लोटे की तरह मैं इधर उधर लुढ़कता रहता और सोशल मीडिया पर दूसरों के विचारों, चित्रों, और उनके जीवन की घटनाओं आदि को बिना सोचे समझे लाइक करता फिरता ! पल में माशा, पल में तोला और जहाँ जरुरत न हो मैंने वहां भी मुँह खोला ! अच्छे बुरे हर विचार को कब मेरा समर्थन मिल जाता मुझे पता भी नहीं चलता था ! घूम घूम कर मेरी गर्दन सबकी हाँ में हाँ मिला देती ! मेरे पास न अपना कोई विचार था न कोई विषय ! मेरी गर्दन मेरे वश में नहीं रह गयी थी ! मेरी गर्दन हर बात पर हर जगह हिलती रहती और चारों ओर घूमने लगी थी ! लुंज – पुंज होती रीढ़ की हड्डी की वजह से गर्दन की कमांड और कंट्रोल की मेरी दोनों ताक़तें कमज़ोर हो गयी थी ! रीढ़ की हड्डी के बिना मैं लगातार सब पर फ़ब्तियां कसता और सबकी छोटी – मोटी बातों का बेहूदा जवाब देता ! जहाँ रीढ़ की हड्डी के साथ टिक कर खड़ा होना पड़ता वहां मेरा पैर किसी साबुन के विज्ञापन से टकरा कर फिसल जाता और मैं भाग जाता ! कई बार ऐसा होता कि मेरा मन लोगों को मुँहतोड़ जवाब देने का करता, मगर अपनी ढीली रीढ़ की हड्डी की वजह से कुछ कह नहीं पाता ! बिना रीढ़ की हड्डी के मैं सोशल मीडिया पर हर एप्लिकेशन का आनंद लेने लगा था ! इसी वज़ह से मेरे ऐसे फ्रेंड्स बढ़ने लगे थे जिन्हे मैं जानता तक नहीं था ! मैं इतना अ – सामाजिक हो गया था कि बिना रीढ़ की हड्डी के खुद को सामाजिक स्थितियों में डाल देता !  मेरी रीढ़ में अनचाहे व्हाट्सएप को अनइंस्टॉल करने की ताक़त तक नहीं बची थी ! पारस्परिक संबंध के लिए दिन में कई बार लाइव हो कर भी जीवन के स्पर्श की चाह में मैं रीढ़हीन मरा – मरा सा भटकता रहता !

तीन कारणों से मुझे अपनी गर्दन को कसने की आवश्यकता हो गयी थी ! सोशल मिडिया पर गर्दन के चारों ओर घूम जाने की वजह से मुझे इस बात का डर हो गया था कि कहीं कोई मेरा चक्रवर्ती गला काट न ले ! मुझे अपनी गर्दन को स्थिर रखने के लिए उसे बांधना जरुरी हो गया था ! दूसरा कारण ये था कि मैं बिन पेंदे का लोटा बनकर लुढ़क लुढ़क के पिचकने लगा था ! मुझे अपनी   पात्रता की शेप बचानी थी ! गर्दन को बाँधने का तीसरा कारण ये था कि गर्दन सीधी रहे ताकि मैं व्हाइट कॉलर पहन सकूँ ! मेडिकल साइंस ने भले ही कितनी तरक्की कर ली हो उसके पास उन रहस्यमयी और शिथिल कर देने वाले मर्ज़ का इलाज नहीं है, जिसने मनुष्य की सोशल मिडिया की भूख को अपनी गिरफ्त में ले लिया है !

अलग – अलग जीवों की अलग – अलग प्रकार के गर्दन और रीढ़ की समस्याएं हैं ! अपनी इसी रीढ़ की समस्या का हल ढूंढने के लिए वर्चुअल दुनिया से बाहर भटकते भटकते मुझे एक कुत्ता दिखा ! कुत्ते की गर्दन में पट्टा था ! पट्टे पर ध्यान जाते ही मुझे ज्ञान रूपी कुत्ता काट गया ! सहसा मुझे ये बात समझ में आ गयी कि पृथ्वी जैसे पेशेवर परिवेश में हमें गर्दन के ऊपर को छोड़कर अपने शरीर के किसी अन्य हिस्से पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है ! मुझे लगा अगर मैं  भी अपने सभी पट्टों को जोड़ कर अपनी गर्दन में पहन लूँ तो शायद मेरी रीढ़ की हड्डी सीधी हो जाए ! नाम, फोन नंबर, मेल आईडी और सेल्फी जैसे पट्टों को जोड़ कर मैंने नंबर साइन जैसा हैश टैग बना दिया और बेहतर दुनिया के लिए मैंने अपनी गर्दन में हैश टैग पहन लिया ! अपना नाम, फोन नंबर, ई मेल आई डी, और एक सेल्फ़ी में मेरी गर्दन चारों तरफ से फँस चुकी थी ! अपनी गर्दन को हैश टैग के चौकोर में फँसाते ही, मेरी रीढ़ की हड्डी तन कर कड़क हो गयी !

गले में हैश टैग के लगते ही मैं पूरी तरह एक्शन में आ गया ! सबसे पहले हैश टैग के अंदर और हैश टैग के बाहर से सेल्फ़ी खिंचवायी ! सोशल मिडिया में अपलोड किया ! एक आदमी के गले में चौकोर चार खानों वाला पट्टा सबको लुभा गया ! हैश टैग के लगते ही मैं बड़ी आसानी से टैग होने लगा ! हॉट – डॉट लड़कियाँ मुझे टैग करने लगीं ! देखा देखी सबने अपनी गर्दन हैश टैग में फंसा लिया ! सोशल मीडिया पर सबकी रीढ़ की हड्डी ढीली हो गयी थी ! जिन्होंने अपनी गर्दन में हैश टैग नहीं फंसाया वो पास की गर्दन में फंसे हुए हैश टैग में खुद फंस गए ! हैश टैग पहने जैसे ही कोई दो व्यक्ति आप को घेरेंगे आपकी गर्दन हैश टैग में खुद व खुद फंस जाएगी ! लोग फंसते चले गए और हैश टैग का मैट बन गया ! सोशल मीडिया के लॉगरिथम से एक हो कर मैं तत्क्षण वायरल हो गया ! विचित्र समाज का ये विद्रूप बिम्ब था ! किसी साइंस फिक्शन के व्यंग्य रूप सा मेरा यह नया रूप था ! अब मैं हैश टैग था ! दुनिया का सबसे ताक़तवर प्रतीक ! मेरे पास सोशल मिडिया के आर पार का रोड मैप आ गया था ! फ़ायर ब्रांड वाली शक्ति मेरे पास आ गयी ! मेरी रीढ़ की हड्डी इस्पात की तरह स्थिर और कठोर हो गयी ! मैं सोशल मीडिया पर किसी को भी भष्म कर सकता था और किसी की भी उत्पत्ति मेरे हाथ में थी ! देखते देखते मैं काल वायरल हैश टैग देव हो गया ! मुझे देख कर पडोसी का कुत्ता भौंकने लगा ! शायद उसे भी अपने चमड़े के कॉलर से आज़ादी चाहिए थी ! मैंने उसे भी टैग कर दिया ! सोशल मिडिया पर इसलिए कुत्तों से जुडी समस्याएँ जल्द वायरल हो जाती हैं !

हैश टैग कॉलर को मनुष्य शर्ट, ब्लाउज, जैकेट या कोट की गर्दन के चारों तरफ लगा के मेरी तरह श्री हैश टैग हो सकते हैं ! आपकी चक्रवर्ती गर्दन हैश टैग से एकाग्रचित्त हो सकती है ! अपनी रीढ़ की हड्डी सीधी कर के जिसे किसी दुसरे व्यक्ति की गर्दन का समर्थन करना हो वो हैश टैग पहन सकता है ! हिजाब के साथ भी हैश टैग पहना जा सकता है ! यदि लंबे बाल हैं, तो बाल गर्दन से बाहर होना चाहिए ! वर्ल्ड वाइड वेब पर हैश टैग अब आधुनिक फैशन का पोशाक है ! आईने के बाद हैश टैग ही मनुष्य को अपना चेहरा दिखा सका है !

हैश टैग एक सामाजिक चिकित्सा उपकरण है ! हैश टैग सरवाइकल कॉलर नहीं, हैश टैग सरवाइवल कॉलर है ! गले में हैश टैग की वजह से अब मेरी अलग वेशभूषा है इसलिए अब मेरी अलग जीवनशैली होगी ! युवा जीवनशैली ! जनता सबकुछ चुनती है ! जनता ने मुझे अपना प्रतीक चुना है ! समाज में मैं उनका सबसे ज्यादा साथ दूँगा जो नयी बात कहेंगे, ऐसी बातें जो आज समाज के लोगों को पसंद आए ! आज हैश टैग के माध्यम से सरकार जनता को नई योजनाओं के बारे में जानकारी देती है और एक आम आदमी मुझ जैसे छोटे से हैश टैग के जरिए एक छोटी सी मुहिम को क्रांति बना देने की शक्ति रखता है ! सोशल मीडिया पर हर व्यक्ति अपने विचारों को प्रभावी बनाने के लिए हैशटैग का प्रयोग कर सकता है ! जो मेरे साथ रहेंगे उनको कभी इमेज मेकओवर की जरूरत नहीं पड़ेगी ! जो पकडे हैश टैग का हाथ , सोशल मिडिया उसके साथ !

वार्निंग : जिस हैशटैग के बारे में आपको पता न हो, उस पर प्रतिक्रिया न दें ! हर टेक्नोलॉजी की तरह इसका भी एक नकारात्मक पहलू है ! कई बार शरारती तत्व गलत किस्म के समाज – विरोधी हैशटैग शुरू कर देते हैं ! यदि आप उन्हें अच्छे से समझे बिना उसके बारे में ट्वीट करने लगेंगे या सोशल मिडिया के दुसरे प्लेटफार्म पर ले कर जायेंगे तो जाने – अनजाने में आप उनके समाज -विरोधी कार्य में शामिल हो जाएँगे !

निंदामूर्ति की कड़ी निंदा

The Thinker a bronze sculpture by Auguste Rodin

इस लेख के लिए मुझ पर कड़ी निंदा का अभियोग लग सकता है !

जब भी कोई मेरी कड़ी निंदा करता है, या मैं किसी की भी कड़ी निंदा करता हूँ मैं कमल बन के खिल जाता हूँ ! कड़ी निंदा का ख्याल मुझे उत्तेजित करने लगा है ! निंदा को कड़ी करने के उपाय पर सब से ज्यादा काम मैंने किया है ! मैं यह भी स्पष्ट कर दूँ कि मैं किसी भी धर्म, दर्शन, संप्रदाय अथवा विधि का विरोध नहीं करता हूँ ! इस बात के लिए आप मेरी कितनी भी कड़ी निंदा कर लें पर मैं सभी जीवित लोगों में सबसे बुद्धिमान हूँ, क्योंकि मैं ये जानता हूँ कि मैं कुछ नहीं जानता हूँ ! जो पवित्र और अपवित्र कार्यों को विभाजित करते हैं वही मुझसे नफरत करते हैं !

निंदा करने के शैक्षणिक तरीकों का मुझे कोई अनुभव नहीं था ! पहले मैं एक चिंतक था फिर निंदक हुआ ! निंदक के रूप में मैं बेरोज़गार हो गया था ! किसी ने अपने आँगन में मेर लिए कुटिया नहीं छवाया ! मैंने आँगन से पार किये जाने की निंदा को कड़ी करने की ठान ली ! निंदक की ज़िद हर चिंतक जानता है और हम सब चिंतक हैं ! हम सब चिंतक ये जानते हैं कि अगर निंदक ने निंदा करने की ठान ली तो उसे चिंतक का बाप भी नहीं रोक सकता है ! निंदक अपने आखरी दम तक निंदा करता है ! कुछ निंदक अपने उड़ते प्राण पखेरू तक की निंदा कर डालते हैं !

देखा – देखी हर काम के लिए लोग निंदा का सहारा लेने लगे हैं इसीलिए साक्षरता की गहराई में गिरावट आ गयी है ! अब निंदा की वैसी खाई भी नहीं रही जिसमे निंदक अनंत डुबकी लगा सकें ! चिंतकों ने अपनी चिंताओं से निंदा की खाइयों को पाट दिया है ! निंदा आज सफाचट हो कर चिंता से एक हो गयी हैं !

कड़ी निंदा का विषय क्या हो ? विषय वही जो निंदा को भाये ! प्राचीन काल में निंदा चुनिंदा बातों की हुआ करती थीं ! आज डिजिटल हो कर सबकुछ निंदनीय हो गया है ! जहाँ सबकुछ निंदनीय हो गया है वहाँ निंदा को और कड़ी कैसे की जाए ? मेरे इस दर्शन की व्युत्पत्ति इसी सवाल से हुई ! यह सवाल मेरे मन को मथने लगा ! मैं निंदा रस में डूब के तर जाने की कल्पनाओं के गोते लगाने लगा !

मित्रों क्या आप जानते हैं कि कल आपका मित्र आपके बारे में क्या कह रहा था ?
फिर आप उसकी जवाबी निंदा कैसे करेंगे ? क्या आप जानते हैं आप के लिए उसकी निंदा के क्या आयाम थे ? निंदा अपने हर कोण में बदल जाती है ! आपके ज्ञान का प्रकाश निंदा को और मुलायम बना सकती है ! असावधानी वश निंदा में किसी भी तरह की मिलावट उसे तारीफ बना सकती है ! फिर आप अपनी निंदा को कड़ी कैसे करेंगे ? सच में आप अपनी निंदा के बारे में क्या जानते हैं ? और महत्वपूर्ण यह है कि हम जो कुछ भी जानते हैं वो हम कैसे जानते हैं ? हमारे दिव्य ज्ञान का माध्यम क्या है जिसपर हमारी निंदा आश्रित है या होगी ? शराब की चाहे जितनी पी ले कड़ी निंदा का एक बोतल कोई नहीं पी सकता है और बिडम्बना ये है कड़ी निंदा की प्यास कभी नहीं बुझती है !

जनता जनार्दन अब आंकड़े बन गए हैं ! अब हर निंदा आंकड़े करती है ! आंकड़ों को कड़ा कैसे करें ? निंदा रस में डूबी रहने की वजह से आँकड़े सदा मुलायम होते है ! निंदा के आंकड़ों को निंदा रस से अलग करना टेढ़ी खीर है ! दूर देश की गधों के राज्य में हुए कई दंगों के अपराधी किसी दूसरे दूर देश की राज्य के चरवाहा विद्यालय के चारा बन गए तो कहीं झाड़ू के तिनके बिखर के डूबते हाथों का सहारा भी नहीं बन सके ! निंदा कहीं धरती की महबूबा कहीं अम्मा तो कहीं माई माटी मनुष्य वाली ममता बन कर भारत माता की नक़्शे को ढोते आदिवासी के स्केच में वायरल हो रही है ! निन्दाओं के हाहाकार की कीचड़ में कब प्रशंशा के कमल खिल गए देशवासियों को पता ही नहीं चला ! बांसूरीवाले के पीछे निंदा रस के नशीले चूहे कतार में कब अपनी ही कुर्तो की जेब को कुतरने लगे इसका किसी को होश नहीं रहा ! पृथ्वी पर कड़ी निंदा एक सांस्कृतिक दुर्घटना है जिसके हम सब शिकार हैं ! किसी भी संत, व्यक्ति धर्म या दर्शन को मानने से पहले कभी भी प्रश्न करने से मत झिझकें ! सत्य की करें या न करें अपनी निंदा की खोज जरूर करें !

निंदा जिसके बाएं हाथ का खेल है वही कड़ी निंदा का असली खिलाडी है ! खुद को बेहतर महसूस कराने के लिए मैं अपनी ही निंदा को कड़ी करके अपनी ही कड़ी निंदा करता हूँ ! अपनी निंदा अपना विकास ! सार्वजनिक स्थानों पर आत्म – निंदा दूसरों के लिए असुविधाजनक हो सकती है परन्तु रिपब्लिक को यही शक्ति देती है और भटके हुए नागरिकों को मुक्ति प्रदान करती है ! निंदा को कड़ी करने की विधि और कुछ नुस्खे देशहित में सबसे शेयर कर रहा हूँ ! सब लाइन पर बने रहे पर मौन रहे ! कोई सुझाव न दें ! निंदा को कड़ी करने के लिए पहले अपने आंकड़ों की शक्ति को टटोलें ! आंकड़ों के लिए न्यूज़ चैनल की बातों को कटोरे में अच्छे से छान लें ! निंदा इन्ही आंकड़ों पर खड़ी हो कर कड़ी होगी ! चैनल की बातों को नहीं छानने से कड़ी निंदा हो नहीं पाएगी और बातों का बतंगड़ बन जायेगा ! अब आंकड़ों से निंदा रस का मख्खन निकालने के लिए आंकड़ों को फेटने की जरुरत है ! कड़ी निंदा करने के लिए मध्यम तेज गति में आंकड़ों को हर दिशा में फेंटने में तकरीबन तीन चार मिनट का समय लगता है ! गतिशील कड़ी निंदा आंकड़ों से ऊपर उठ जाएगी, बचा हुआ पानी रोके रखें ! अब निंदा की कड़ाई आप के हाथों में है ! अच्छी कड़ी निंदा की पहचान ये है की उसे कोई पचा न सके ! निंदा को हल्के हाथों से दबा कर उसे कड़ी करते रहें ! जब आपको लगे कड़ी निंदा बहुत हो चुकी है, सब पानी छोड़ दें और निंदा को फिर से आंकड़ों में मिल जाने दें ! कड़ी निंदा पूरी तरह से एक भारतीय व्यंजन है ! कड़ी निंदा बहुत ही लोकप्रिय डिश है ! कड़ी निंदा करने में जितना सरल है स्वाद में उतना ही मज़ेदार भी है ! इतने सारे गुणों से भरपूर होने की वजह से इसे अपने भोजन में शामिल तो करना ही चाहिए ! कड़ी निंदा से मिर्ची लगानी हो तो आंकड़ों को फेंटते समय निंदा में नमक मिला लाल मिर्च पाउडर डाल ले !

जो आपकी निंदा नहीं करते हैं उन्हें अनदेखा न करें, वही आप की कड़ी निंदा कर सकते हैं ! ऐसी बात जिसमे आप की निंदा नहीं है, जिसमें आप के बारे में कुछ भी बुरा नहीं है और जिसकी आपको कोई आवश्यकता नहीं है, उसे जरूर सुनें ! कड़ी निंदा के बोल यहीं फूट सकते हैं ! कड़ी निंदा ही दुश्मनी को ज़िंदा रखती है ! कड़ी निंदा की ट्रेनिंग सेंटरों की हमें सख़्त जरुरत है ! कड़ी निंदा का जीवन और करियर संकट में है ! कड़ी निंदा के शिक्षक अब नहीं मिलते इसीलिए इस लेख को ध्यान से पढ़ें ! यह लेख कड़ी निंदा का लाइसेंस है ! इस निंदा काल में कड़ी निंदा न करना निंदनीय अपराध है ! मुलायम निंदा से मख्खी भी नहीं डरती ! कड़ी निंदा जरुरी है ! पर मित्रों यही दुर्भाग्य है जैसे ही कुछ भी कड़ा होगा, टैक्स लगेगा !

निंदा आज एक बुनियादी ज़रूरत है ! समय आ गया है कि हम कड़ी निंदा के ऐसे विकल्पों के बारे में सोचें, जिनसे हमारी सेहत अच्छी रहे और क़ुदरत का भी नुक़सान न हो ! अध्यात्मिक ज्ञान के अभाव में कड़ी निंदा अच्छे बुरे की पहचान नहीं कर पाती ! कड़ी निंदा पर जादू टोना का आरोप नहीं लगता ! जहाँ कड़ी निंदा चल रही हो वहाँ किसी और की नहीं चलती ! कड़ी निंदा की सीमा कोई पार नहीं कर सकता ! एक कड़ी निंदा के बाद दूसरी कड़ी निंदा शुरू हो जाती है ! अपने हर पंचवर्षीय कड़ी निंदा को फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं ! कड़ी निंदा आगे चल कर एक दिन श्रद्धांजलि बन जाती है !

चुप्पी निंदा की गाली है, ठहाका कड़ी निंदा की ताली है !
आपका अपना निंदामूर्ति !

पवित्र चप्पल

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पवित्र चप्पल

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चप्पल को नहीं जानना ही सारे दुःखों का मूल कारण है ! वेदों में लिखा है चप्पल को जानने से आदमी सारे बन्धनों से मुक्त हो जाता है ! अगर किसी की दिलचस्पी आजाद भारत के इतिहास को बारीकी से जानने की है, तो उसे पहले भारतीय चप्पल को जानना होगा ! लेकिन, दुर्भाग्य से चप्पल को इस दृष्टि से देखना बंद कर दिया गया है !

“धाँय…धाँय…धाँय…” ! बंदूक से तीन गोलियाँ निकलीं ! गोलियों की आवाज के बाद अगली आवाज थी – ‘हे…राम’ ! उसके बाद क्या हुआ मुझे कुछ याद नहीं ! मैं अभागी चप्पल बापू के पाँव से पता नहीं कब सदा के लिए अलग हो गयी ! मैं राष्ट्रपिता द्वारा पहने जाने के बाद भी वीआईपी नहीं हो पायी हूँ ! आज देश में चप्पल की हालत उनके सिद्धांतों जैसी हल्की और सार्वजनिक हो गयी है ! मुझे जो चाहे उतार ले, किसी पर भी उछाल ले, नीलामी में बेच दे या किसी को भी जड़ दे !

बिरला हाउस के हरे घास पर पड़े – पड़े मुझे लगा किसी गहरी नींद से सोकर उठी हूँ ! कुछ ठीक से याद नहीं आ रहा था ! मेरा शरीर सामने पड़ा था और मैं उससे बाहर ! मुझे सिर्फ इतना याद है मेरे धारक का नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था जिसने मुझे कुछ भी अदा करने का वचन नहीं दिया था ! मैं बापू का वो चप्पल हूँ जो तीस जनवरी को बापू के पाँव से आत्मा की तरह बिछड़ गयी थी !

हाँ, आज मैं चप्पल के वेश में संत नहीं हूँ, क्योंकि आज किसी संत के पाँव में चप्पल नहीं है ! हाँ, मैं चप्पल के वेश में राजनेता भी नहीं हूँ, किसी राजनेता के पाँव में चप्पल नहीं है ! मुझे संत कहना यदि संभव भी हो तो अभी उसका समय बहुत दूर है ! शायद मुझे समाज की कुरीतियों में और घिसना है ! संत के पॉव में लम्बे समय तक रहने के बाद भी मैं किसी भी रूप या आकार में अपने आपको संत अनुभव नहीं करती ! स्लीपर, सैंडल, फ्लोटर, बैली, हाईहील, अब मेरे कई नाम है !

जीने के लिए कई बार नीलाम हो कर, कई बार बदनाम हो कर, वेश बदल कर भी मैं समाज की सेवा कर रही हूँ ! दुःख बस इस बात का है कि बापू की हत्या के बाद देश में चप्पल की किसी ने सुध नहीं ली ! बापू के तीनो बंदरों ने भी अपने पुतले में मुझे अपने साथ स्थान नहीं दिया ! वो चाहते तो बुरा न देखो. बुरा न बोलो, बुरा न सोचो के साथ बुरा न पहनो कहती हुई मैं गाँधी जी का चौथा बंदर बन सकती थी ! पर आज भी मैं अश्पृश्य हूँ !

हा ! बापू तुम कहाँ हो ? बापू भारतीय नोट में तुम्हारे पाँव क्यों नहीं दिखते ? तुम्हारे पाँव के बहाने मैं तुक्छ चप्पल दिख जाती तो देश में चप्पलों की गरीबी दूर हो जाती ! चप्पल गरीब नहीं होते तो तो उन्हें पहनने वाले पाँव भी गरीब नहीं रहते ! ‘ सादा जीवन उच्च विचार ‘ चप्पल का यही साफ़्ट कार्नर आज सबसे ज्यादा चुभता है ! ‘ अच्छी गुणवत्ता और सस्ती कीमत ‘ ये अब मेरी पहचान नहीं, आज गरीबी को दी हुई गाली है ! अपने अतीत की ठोकरों से सबक लेकर मैंने यही जाना है !

मेरे पिता एक जूता थे इसलिए मैंने अपने जीवन में कभी कोई जिम्मेदारी नहीं ली ! स्वतंत्रता का अनुभव करने के लिए यात्रा जरुरी है, यह मैं बचपन में ही जान गयी थी ! हमेशा घूमना – फिरना ही मेरा जीवन रहा ! चप्पल के बहाने देश की गरीबी की आत्मकथा लिखने का मेरा आशय नहीं है ! मैं बस एक चप्पल हूँ और बापू की हत्या के बाद गरीब के पैर में फँस गयी हूँ ! देश और बापू की आत्मा की तरह मुझे भी गरीबी से आज़ादी चाहिए ! भारत में गरीबी अक्सर चप्पल से चल के आती है ! चप्पल की जनसँख्या गरीबी का परिणाम है !

बापू के चश्मा के साथ सब अच्छा हुआ ! गोली लगने के बाद बापू का चश्मा भी हरे घास पर वहीँ गिरा था जहाँ मैं गिरी थी ! चश्मे को चाहे फिर बापू की नज़र न मिली हो पर उसकी रोजी रोटी पर किसी की नज़र नहीं लगी ! बापू की हत्या के बाद अपनी पहचान के लिए मेरी तरह चश्मा विदेशों में नीलाम हो कर भी स्वच्छता अभियान को पा गया है ! सब जानते हैं स्वछता अभियान के पोस्टर में बापू का चश्मा अपना पेट पाल रहा है ! गन्दगी की तरह चश्मे को मुझ चप्पल की गरीबी भी नहीं दिख रही है ! बापू तुम्हारे जाने के इतने सालों बाद भी मैं क्यों भटक रही हूँ और मेरी हालत पर व्यंग्यकार क्यों ताने मार रहे हैं ?

चप्पल एक शक्ति है, एक मार्ग है, एक धारा है, एक एहसास है, एक विश्वास है, जिसका निश्चित स्वरुप हमारे पैरों में है ! चप्पल के रूप और स्वरूप को लेकर यही सत्य है ! चप्पल एक विचार है जिसे जिया जा सकता है, चप्पल एक अनुशासन है जिसे माना जा सकता है और जिसे जीवन के कर्मों के अनुसार किसी और बदन पर उतारा भी जा सकता है ! चप्पल को शिक्षित होना चाहिए क्योंकि शिक्षा के अभाव में एक स्वस्थ पैर का चप्पल होना असंभव है !

पैरों में रहकर भटकते हुए भी मैंने रावण, चाणक्य, दादाभाई नौरोजी, विवेकानन्द, गोखले, तिलक के भाषणों और लेखों को पढ़ा है ! साथ ही मैंने भारत और कुछ अन्य प्रमुख देशों जैसे इंग्लैंड, फ्रांस, अमेरिका और रूस के प्राचीन और आधुनिक इतिहास को भी पढ़ा है ! इनके अतिरिक्त मैंने समाजवाद और माक्र्सवाद के सिद्धान्तों का भी अध्ययन किया है, इसलिए मैं ये कह सकती हूँ कि हर चप्पल कुछ कहती है ! चप्पल का अर्थ है – किसी भी प्राणी को तन, मन, कर्म, वचन और वाणी से कोई नुकसान न पहुँचाना !

भारत देश में चप्पल का जड़ गहरा है ! क्या आप मेरे एक सवाल का जवाब दे सकते हैं ? शरीर प्रशासित पैर में और भारत प्रशासित कश्मीर में क्या समानता है ? मेरा उत्तर है – अपने पैरों के साथ बर्बरता ! चप्पल की तरह शरीर में भी बाहर की तरफ चमड़े लगे हैं और शायद अंदर रबड़ की आत्माएं हैं ! इसीलिए देश में पैरों को डरा कर रोकने के लिए देश की आत्मा को काट के रबड़ की गोली बनती है ! पैरों के साथ बर्बरता से अब शरीर में आत्मायें भी नहीं बचीं इसीलिए रबड़ की गोली भी नहीं रही और अब पत्थर बरस रहे हैं ! चप्पल के बिना देश के पैर की छब्बीस हड्डियों में सांप्रदायिक तनाव कौन फैला रहा है ? क्या अपने देश समाज का आकार चप्पल से बड़ा नहीं है ?

मैं चप्पल के रूप में भी दिल और समर्पण से भरी हुई हूँ ! अपने देश की शिक्षा, गरीबी, हेल्थकेयर, न्याय, कानून और व्यवस्था जैसे कई पथरीले रास्तों वाले किसी भी लम्बी यात्रा पर चलने के लिए और कुछ भी करने के लिए तैयार हूँ ! पर मैं देश के घोटालों को पचाने में सक्षम नहीं हूँ ! चप्पल उतना ही पचा सकता है जितना पैर खा सकता है !

जिस तरह पवित्र स्थलों पर जूते पहनकर जाना सही नहीं है, उसी तरह लोग घर के भीतर चप्पल ले जाना सही नहीं समझते ! कुछ लोग इसके पीछे साफ – सफाई और स्वच्छता का तर्क भी देते हैं, ताकि बाहर की गंदगी घर के भीतर ना पहुंच सके ! मेरा मानना है कि जनता के विचारों को मोड़ देने और सक्रिय करने में सबसे अधिक भूमिका मैंने और मेरे साथ दुसरे चप्पलों ने ही निभायी है ! मुझे दुःख है आज भारत के तीस प्रतिशत पैर चप्पल से भी बहार हैं ! पवित्र चप्पल के पाँव तुम एक हो जाओ ! खाली पैर वालों का देवता भी नहीं सुनते शोर मचाने के लिए कम से कम चप्पल पहनना जरुरी है !