लघु प्रेम कथा / लप्रेक

 संक्षेप में मुझे प्रेम पर कुछ कहना था … मेरी आँखें भर आयीं … ! इससे संक्षेप में मैं प्रेम पर कुछ सोच भी नहीं सकता …

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प्रेम कहानी के पात्र अपना प्रेमी ढूंढ ही लेते हैं …

लप्रेक – १.

लड़की जाने लगी तो लड़के ने फटाफट मोबाइल से लिफ्ट में उसकी एक तस्वीर ले ली जिसमे लड़की मुस्कुराती हुई हाथ हिला के विदा ले रही थी, उसने अपने पूरे कपड़े तरतीब से पहन रखा था और खुश दिख रही थी ! लिफ्ट का दरवाज़ा बंद होते ही लड़के ने लम्बी सांस ली और फ़ोटो ऑप्शन में जा कर सेव का बटन दबा दिया ! आज उनकी अकेले में पहली मुलाकात थी ! प्रेम का कोंपल आज ही फूटा था …

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लप्रेक – २.

नहीं ! हाँ ! फिर नहीं ! फिर हाँ ! फिर फिर नहीं ! फिर फिर हाँ ! नहीं ! हाँ ! नहीं ! हाँ ! नहीं ईईई … !! हाँ आँआ… !! बस ये उनकी आखरी बातचीत थी ! कम्प्यूटर पर दोनों मौन अपने अपने विंडो को घूरते रहते ! एक मन हाँ कहता और एक मन ना !

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लप्रेक – ३.

वो ‘कैंडी क्रश’ से रूठती है तो मुझसे बात करती है !

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लप्रेक – ४.

पैर लगते ही छन् से लगता है ह्रदय पर, हाथ झट पट उठा कर अपने ही गले से लगा लेता है अपने आप को … क्यों जरुरत होती है प्रेम में किसी के क़दमों पर फेंक देने की …खुद को ??

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लप्रेक – ५.

हंसती थी तो फंसती थी अब फंसती है तो रोती है…

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लप्रेक – ६.

‘ऑरकुट’ में नाराज़ हुए थे, पूरा ‘व्हाट्सप’ चुप रहे अब जा कर ‘ट्विटर’ पर माने हैं बीच में ‘फेसबुक’ पर कितना स्टेट्स आ के चला गया …

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लप्रेक – ७.

एक मन की मान लूं पर दूसरे मन को क्या जवाब दूं ? एक मन से कह दूं पर दूसरे मन से कैसे छुपाऊँ ? तू भी or not तू भी …

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लप्रेक – ८.

‘हैशटैग’ के चकोर चौखट से बांध कर जब कोई लड़की किसी लड़के से प्रेम करती है तो प्रेमी फिर किसी बन्धन से बंधें न बंधें …

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लप्रेक – ९ .

‘ काश वो मेरा ‘इनबॉक्स’ पढ़ पाती … ‘

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लप्रेक – १०.

‘को – रस’ में ‘लव – रस’ :

सुनो लड़कियों – न लड़के साथ आए थे न लड़के साथ जायेंगे !

सुनो लड़कों – न लड़की साथ आयी थी न लड़की साथ जाएगी !

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लप्रेक – ११.

दुष्यंत से मिल कर शकुंतला फिर अपने मन के सुनसान इन बॉक्स में लौट आई ! 

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लप्रेक – १२.

मछली के पेट में अँगूठी बहुत दिनों तक नहीं रह सकी ! लेखक ने मछली को जाल में फंसवा के मछुआरे से उसकी पेट चिरवा दी और अँगूठी को राजा के सामने रखवा दिया ! शकुंतला की आँखों में आँसू भला कौन लेखक देख सकता है ?

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लप्रेक – १३.

“… देखो इलेक्शन का रिजल्ट आ गया है, हमको अब मिलना जुलना कम कर देना चाहिए …”

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लप्रेक – १४.

“… तुम टैग टैग, हम हैश हैश … ” 

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लप्रेक – १५.

लड़का : स्माइली
लड़की : स्माइली
लड़का : स्माइली
लड़की : स्माइली
लड़का : स्माइली
लड़की : स्माइली
लड़का : स्माइली
लड़की : …

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लप्रेक -१६.

कोई नाम … कोई चेहरा … कोई आँख … कोई आवाज़ … कोई होंठ … कोई पलक … कोई लौ … या कोई तस्वीर … कोई याद … कोई धुन … कोई गीत … कोई गंध … या कोई स्पर्श … और क्या है वैलेंटाइन ?

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लप्रेक – १७.

जिससे लाभ होता है उसी से लव होता है !

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लप्रेक – १८ .

कुचले जाने के लिए किसने अपनी अभिलाषाओं को प्रेम पथ पर फेंक दिया है …

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लप्रेक -१९ .

कभी हम छोड़ देते हैं … कभी छूट जाता है … लघु प्रेम कथाएँ अंत में टीस भर ही देती हैं …

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लप्रेक – २०.

रह रह कर उसका कलेजा मुंह को आता है ! घंटों बाथरूम में बैठ कर रोती है, उसका चश्मा भीगा ही रहता है ! उसको प्यार में धोखा मिला है ! उसके प्रेमी को कोई और पसंद आ गया है ! इतनी बिचारी उसे किसी ने कभी नहीं बनाया ! बिलख बिलख कर रो रही है और आँखें मूंदे चौदह तारीख का वैलेंटाइन वो आज बारह तारिख को ही फुसफुसा कर विश कर रही है ” हैप्पी वैलेंटाइन डे “

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लप्रेक – २१.

यादें फोन की घंटी की तरह बजती रहती है, नहीं उठाइए तो फिर कट जाती है …

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लप्रेक – २२.

दाँत से काट के हमने आधे – आधे छुहारे नहीं खाये ! उसने मेरे कंधे पकड़ के हिलते डुलते अपनी सैंडल का फीता नहीं कसा ! उसके पास सवाल नहीं थे, मैंने कोई जवाब नहीं माँगा ! हम रूठे नहीं ! आते जाते सेंसर पर सिंपल बात हुई ! देखा, मुस्कुराए और अपने अपने रास्ते चल दिए ! शायद फिर से अजनबी होने का यही पहला कदम है …

लप्रेक – २३.

मैं चाहता तो उसकी पंख जैसी बाहें चुरा लेता पर उन्हें मैंने छोड़ दिया मैं किसी की आज़ादी नहीं चुरा सकता था ! मैं चाहता तो उसके पाँव ले भागता पर सपने में भी मैं उसे जंज़ीरों में नहीं देख सकता था ! मैं चाहता तो उसके बाल चुरा लेता पर उसके आशिक़ों को भी ठेस नहीं लगाना चाहता था ! सेंध मार के उसे चुरा ले भागने की योजना में आज सुबह मैं कामयाब हो गया था ! पर आखरी पल में मैंने अपना निर्णय बदल लिया, मैंने उसकी घडी से अपनी घडी मिलाई और अपने ह्रदय में रखी उसकी तस्वीर से उसका चेहरा मिला के छोड़ दिया ! उसे क्या पता एक हु बहु उस जैसे समय को दुनिया के लिए छोड़ आया हूँ और वो हर पल मेरे साथ है और मैंने उसे हमेशा के लिए चुरा लिया है  …

 

 

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2 Responses to लघु प्रेम कथा / लप्रेक

  1. Priyanka says:

    bohot khoob likha hai!

  2. पढ़ने और पसंद करने के लिए शुक्रिया प्रियंका ! 🙂

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