काशी शरणम् गच्छामि !

१.

नीचे नीच पड़ा है, ऊँचे ऊँच
कहीं चोंच पड़ा है कहीं पूँछ !

शक्ल पड़ी है शीशे मे, अक्ल पडी है खीसे मे !

कहीं दाम पड़ा है, कहीं आम पड़ा है ,
कटा हुआ दिन सुबह से शाम पड़ा है !

टोपी पड़ी है, सर बड़ा है !

हाथ में बन्दूक है नाल पर घडी ,
छोटा मुँह और बात बड़ी !

समस्या पड़ी है, बन्द घड़ी है !
जात पड़ा है, हाथ पड़ा है, कहीं लात पड़ा है !

हवा बसात है,
मैं खुद पड़ा हूँ !

काशी शरणम् गच्छामि !

*

२.

डेमोक्रेसी का डांसर हूँ , पर फ्रीलांसर हूँ !
वोटिंग में रेगुलर हूँ , पर पार्टी में स्ट्रगलर हूँ !

रोज कर, कर भर कर, ये कर वो कर हूँ !
आप सरकार हैं, मैं आपका नौकर हूँ !

आप चाभी हैं, मैं लॉकर हूँ !
आप मास्टर हैं, मैं जोकर हूँ !

थप्पड़ हूँ, कीचड़ हूँ. कचड़ा हूँ ,
आप हाथ हैं, कमल हैं, झाड़ू हैं !

आप ब्लैकबोर्ड हैं, मैं डस्टर हूँ !
मैं क्वेश्चन हूँ , आप आंसर हैं !
मैं मंच हूँ आप डांसर हैं !

मैं प्यास हूँ आप कोला हैं !
आप नारियल हैं मैं टिकौला हूँ !

मैं जुआ हूँ आप तम्बोला हैं !

मैं दिवार हूँ आप पोस्टर हैं !

काशी शरणम् गच्छामि !

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