पकोड़े की अभिलाषा

चाह नहीं मैं बेरोज़गारों के
बेरोज़गारी में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं संसद में
छन जनता को ललचाऊँ,
चाह नहीं, मन्नतों के चौखट
पर, हे हरि, डाला जाऊँ
चाह नहीं, देवों के शिर पर,
चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ !
मुझे छान लेना हलवाई
उस पथ पर देना तुम फेंक,
मातृभूमि में भीख मांगने
जिस पथ जाएँ बेरोज़गार अनेक !

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