महालोक – बीस

बुढ़िया का आँचल साइकिल के स्टैंड में फँस गया ! साइकिल अपने जर्जर स्टैंड पर लड़खड़ाई और सड़सठ साल की भूखी, गरीब, बुढ़िया के पाँव को निशाना बना के गिर पड़ने लगी ! लोहे से अपने पाँव को बचाने के लिए कमज़ोर बुढ़िया साइकिल से उलझ पड़ी ! साइकिल का लाल सीट सर से टोपी की तरह बुढ़िया की पाँव पर गिर पड़ा ! बुढ़िया हड़बड़ा गयी ! अपने दुःख की शिकायत करने पहुंची बुढ़िया सरकार के दालान पर उनकी ही साइकिल को अपने पैर पर गिरने से बचाने के लिए साइकिल से गुथ्थम – गुथ्थी कर रही थी और आस पास के लौंडे हंस रहे थे ! बेसहारा अकेली बुढ़िया कातर नज़रों से सब देख रही थी… ! यह सब मैंने एक कार की खिड़की से देखा ! कार के अंदर बैठे कैमरे से आप और क्या उम्मीद कर सकते हैं ! मेरी ली गयी बाकी तस्वीर तो आपने देख ही ली है न ?

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