हे राम

बापू

बापू

1948 में जिस जगह महात्मा गांधी की हत्या हुई थी वहां की खून से सनी घास और मिट्टी 8 लाख रुपये में नीलाम की गई। मुझे ये सुनकर बहुत आश्चर्य हुआ है और दुख भरा क्रोध भी ! इतने वर्षों से किसी ने खून से सना हुआ घास का वो तिनका सहेज के रखा और उसे लन्दन पहुंचा दिया बेचने के लिए ?

चूँकि हत्या दिल्ली में हुई थी तो घास दिल्ली की ही होगी… खरीद से पहले बापू के खून की साक्ष्य जांच भी हुई होगी !

सोचता हूँ चौसठ साल बाद खून मिला है क्या पाता किसी के पास उनका कभी का वीर्य लगा धोती हो या उनकी बकरी का खाल …कल किसी देश में वो भी बेची जाए…हम बेचने और खरीदने वाले का क्या उखाड़ लेंगे ?

उस वक़्त न तो social मीडिया का फैशन था न टेली -विज़न न कैमरा वाला मोबाइल… चारो तरफ सिर्फ बापू थे ! उस दिन हत्या की घटना स्थल पर से खून से सना मिट्टी और घास उठा के रखने वाले ने क्या सोचा होगा ? उसने इतने सालों तक मरा हुआ खून और घास क्यों सहेज के रखा ? आठ लाख में उसे क्या खरीदना था जो उसने अपनी चौसठ साल की तपस्या को भंग किया ?

आज लाखों करोड़ों अरबों के घोटाले के बीच हमारे गरीब देश में आठ लाख बहुत सारा रुपया होता है …आठ लाख में क्या पाता किसी को अपने बेटे की पढ़ाई करवानी हो या बेटी की शादी या इसे बेच के उस दूरदर्शी ने लन्दन में बहु प्रचलित ‘बॉलीवुड’ की किसी फिल्म के हीरोइन का ब्रा और चड्डी खरीद लिया हो …इन्वेस्टमेंट का दौर है और कौन क्या बेच, खरीद और जमा कर रहा है… क्या पता ?

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