प्रिंटिंग मिस्टेक

मीटू क्या लिखता है वाह ! एक अधेड़ आदमी ने ‘खोल दो’ कहानी पढ़ने के बाद मुझसे कहा ! मी टू ? कौन मी टू ? मैं हैरत में था ! मेरी हैरत से वो और बौखला गए ! तुम मीटू को नहीं जानते ? मीटू बदनाम है लेकिन लिखता बहुत अच्छा है ! मीटू जब लिखने बैठता है तब वो औरत – मर्द के रिश्तों की उन परतों को उघाड़ने लगता है जहां से पूरा समाज ही नंगा दिखने लगता है ! इतने बड़े लेखक को नहीं जानते जिसने ‘खोल दो’ लिखा ? तुम जानते नहीं ‘मीटू’ की औरतें बोलने लगी हैं ? उन्होंने मुझसे ये बात अपनी डबडबाई आँखों से देखते हुए कही और कहानी दिखाया ! मैंने देखा कहानी में प्रिंटिंग मिस्टेक से मंटो मीटू हो गए थे ! मैं समझ गया ! मंटो को भाईसाहब मी टू कह रहे थे ! मंटो को एक और पाठक मिल गया है और मरने के तिरसठ साल बाद भी मंटो प्रिंटिंग मिस्टेक से ‘मीटू ‘ बनकर औरत के यौन अधिकार के मुहीम में ज़िंदा हो उठा है ! मैं स्तब्ध था ! 

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