मेरे ख्याल से

हर नए ख्याल में डगमगाती हुई एक अस्वीकृति होती है जिससे लड़ के सबसे पहले उसको जीतना पड़ता है ! हर नया ख्याल सुनाने पर किसी को सुनायी नहीं देता इसीलिए उसे जोर से बोलना पड़ता है ! हर नए ख्याल का एक हमशक्ल ख्याल होता है जिससे मिल कर उसे झुठलाना पड़ता है ! हर नया ख्याल तब तक सिर्फ एक ख्याल होता है जब तक हम उस पर भरोसा नहीं कर लेते ! ख्याल के खो जाने का डर सबसे व्यस्त ख्याल है ! ख्याल कभी अकेले नहीं रह पाते इसीलिए हम उनके साथ रहते हैं ! ख्याल बहुत जल्द बदलते हैं इसीलिए हम उन्हें बाँटते रहते हैं …

– मेरे ख्याल से

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