लघु लोक कथा ‪#‎ललोक

तालाब के किनारे कोई चिल्ला रहा था ” कमल में किरण … कमल में किरण …” उत्साह में सब उस तरफ भागे … तालाब के बीचोबीच कमल के पास किरण फूट रही थी, देखने की हड़बड़ में कुछ लोग छप छप तालाब में गिर रहे थे … शोर सुनकर पंछी ‘ट्वीट – ट्वीट’ करने लगे … पोखर पर झाड़ियों के पीछे शेर के कान खड़े हो गए … उसने तालाब पर शिकार का झुण्ड देख लिया था … पानी में कमल के पास घड़ियाल की पीठ उगते सूरज में चमक रही थी !

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2 Responses to लघु लोक कथा ‪#‎ललोक

  1. anz says:

    aptly put!

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