स्त्री देह का स्वगत

‘प्रेम मार्ग’ पर सिर्फ मेरे देह का घर नहीं और दूसरी इमारतें भी हैं ! मैं एक स्त्री हूँ ! मेरा शरीर आपके पर्यटन का अगर मुख्य केंद्र है तो मेरे देह नगर में आप का स्वागत है ! पर मेरे चेहरे का हेरिटेज वॉक करने वालों से मेरी विनती है कि पहले मेरी इस मार्ग दर्शिका को पढ़ लें !

मानती हूँ मेरा शरीर आप के लिए एक आकर्षक पर्यटन स्थल है और इसे आप वैसे ही गन्दा कर देते हैं जैसे खजुराहो को कर रहे हैं ! आपके अपने अंधकार से निकला प्रकाश और ध्वनि का कार्यक्रम आप मेरी छाती और कंठ से उठा लीजिये मेरा दम घुटता है ! मैं अपनी ख़ुशी के लिए सजती हूँ आपकी कामुकता के लिए नहीं !

मेरे ‘आँख घाट’ से ‘नाक स्मारक’ तक जब आप चलते हैं तो क्या आपको धू धू करती हुई बचपन से अब तक की क़ैद कर ली गई मेरी सारी तितलियाँ जलती हुई नहीं दिखतीं ?
मेरे ‘स्तन घाट’ में क्या आपको मेरी पाबन्दी के मुर्दे अरमानों का मरघट नहीं दिखता ?
आप जो गुलाल मेरे ‘कान फाटक’ से ‘गाल चौक’ तक मलना चाहते हैं क्या वहां मेरी सूखे आंसुओं की गोंद आपकी उँगलियों में नहीं चिपकतीं ?

मेरे शरीर से एक सही रास्ता भी निकलता है जिस पर दुर्भाग्य से आप कभी चल नहीं पाते ! ये रास्ता आपको अपने घर ले जायेगा जहाँ आपकी माँ ऐसी ही शरीर के साथ आपका इंतज़ार कर रही है जिससे आपका जन्म हुआ है ! जिस रास्ते पर चल कर आप अपनी बहन तक पहुँच सकते हैं जो आपको आप से ज्यादा प्यार करती है ! इसी रास्ते पर आपकी प्रेमिका है जो आप जैसे ही पर्यटकों से लड़ रही है ! इसी रास्ते पर आपकी पत्नी है जो आप से मदद के लिए आप को ढूंढ रही है ! पर मेरे शरीर में आप को वो रास्ता कभी नहीं दिखेगा ! मेरी आत्मा पर आपकी गीली नज़र से हुआ फंगल इंफेक्‍शन धीरे धीरे फैलता हुआ मेरे अस्तित्व को खतरे में डाल रहा है !  मेरे उभार निर्जीव पत्थर के नहीं हैं ! मेरे अंतर्वस्त्र में वही हाड़ मांस से बना शरीर है जिससे आपका शरीर निर्मित है ! मेरे अंगों और कपड़ों को घूरने की अगर आपको बीमारी है तो अपनी आँखों पर ब्रा बाँध कर और मुंह पर पैन्टी पहन कर देखिये शायद कुछ आराम मिले ! आप अपने उस पुरुष शरीर को कितना जानते हैं जो हर वक़्त स्त्री के चेहरे का हेरिटेज वॉक करने को तैयार रहता है ? अपनी वासनाओं के कोलाहल में आप मेरे भीतर का मौन फिर क्या सुन पाएंगे ? आप जैसे आतुर और छिछोरे पर्यटक ताज महल पर भी गन्दगी ही फैलाते हैं ! आप की व्याकुल हरकतें आपको मेरे मल – द्वार का प्रहरी भी नहीं बना पायेगी ! दोनों स्तन, पीठ और पेट, नितम्ब, दोनों जांघें और दोनों पिण्डलियॉं पर रखे कपडे के ऊपर भी दुपट्टा डालने के लिए मुझे मजबूर मत कीजिये ! मज़बूरी में स्त्री के बदन पर हर कपडा कफ़न हो जाता है ! आपके मन में मेरे शरीर को लेकर जो जुगुप्सा और तरह-तरह की कुंठाएं मौजूद है पहले आप उनका निवारण कर लीजिये ! आत्मरति के पर्यटन से न आपकी भूख शांत होती है न मेरी कोई कमी पूरी होती है ! मुझे जानने से पहले आप मुझे रौंदने की योजना क्यों बना लेते हैं ? मेहरबानी होगी अगर आप मुझे अपने हाल पर छोड़ देंगे ! मुझे धीरे धीरे खंडहर हो जाने दीजिये ! वैज्ञानिक, इतिहासकार, पुरातत्ववेत्ताओं, भूगर्भ विशेषज्ञों, लेखक, कवि शायर एवं जिज्ञासु पर्यटकों के क़दम इन स्थानों में पड़ते रहे हैं, अगर आप नयन सुख के शिकारी हैं तो मेरे पुण्य स्थान का तीर्थ आपके भाग्य में नहीं है ! आप आगे बढ़िए ! आपके कलुषित दृष्टि – वीर्य को मैं अपने मासिक महावारी में बहाते बहाते थक जाती हूँ ! मेरा शरीर आपके पर्यटन का अगर मुख्य केंद्र है तो आपको ये पता होना चाहिए ये पर्यटन हर धर्म में वर्जित है ! मेरे चेहरे का हेरिटेज वॉक करने से पहले आप अपनी पीठ पीछे छोड़ आये शमशान और कब्रिस्तान का सैर कर लीजिये, क्या पता आँखों से मेरा बलात्कार करने से पहले आपकी आँखें खुल जाएँ !

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19 Responses to स्त्री देह का स्वगत

  1. rk chadha says:

    Just great

  2. पढ़ने के लिए शुक्रीया !

  3. deepti says:

    तारीफ़ के क़ाबिल…शुक्रिया इस्री के प्रति अपने आदर भाव को इस तरह लिखने के लिए…:)

  4. आपकी सराहना इन भावों का सम्मान है ! शुक्रीया दीप्ति जी !

  5. उपेक्षित और अनछुआ पहलू
    आप साधुवाद के पात्र हैं।

  6. पढ़ने के लिए शुक्रीया प्रवीण भाई !

  7. any says:

    बेहतरीन… स्त्री के अंतर्मन को उसके तल तक झाँक कर देखना, उसे समझना और फिर हूबहू शब्दों में उकेर देना, इसके लिए जितना साधुवाद दिया जाए, कम है।

  8. आस पास जो घटित हो रहा है वही महसूस कर के लिखा है ! धन्यवाद !

  9. mahesh kumar says:

    I am very influence with this essay on women

  10. Dipak Sharma says:

    very good

  11. Isha says:

    Behad behtreen andaaz …
    Kabil e tareef …
    Tawajjoo ho

  12. Priyamvada says:

    Nice, I am stunned after reading this…

  13. Kundan Sharma says:

    अत्युत्तम ।।

  14. Vinita Singh says:

    सटीक वर्णन…

  15. Richa Singh says:

    As a woman, i feel empowered after reading it. So very liberating.

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