कट टू –

जितना वक़्त ‘कट टु -‘ पढने में लगता है
उतना ही वक़्त ब्रह्माण्ड को छालांगने में
भूखे का पेट भरने में
लड़की को नंगा करने में
किसी रोते हुए बच्चे को हंसाने में
अंडे को चूजा बनाने में
भाप को फिर से पानी बनाने में
और
आदम हव्वा को सेब खाने में लगता है…!

कट टू –
बच्चा !

और बच्चे को सीधा
माँ के नौ महीने के गर्भ संसार,
ममता की छाँव से निकाल कर
एक ही कट में
चक्रव्यूह के आखरी दरवाजे पर पटक देता है –
‘कट टू -‘

घोसले में सांप घुस जाता है
मछली अंगूठी खा जाती है
घर बस जाता है
सत्ता बँट जाती है
दुश्मन मर जाता है
सूरज उगता है
बिछड़े भाई मिल जाते हैं
पिंजरा टूट जाता है
पंछी लौट आते हैं
परदे पर संसार रच देते हैं ये दो शब्द

कट टू –
इश्वर के वो दो हाथ हैं
जिनको अकसर हम भूल जाते हैं !

Tagged , . Bookmark the permalink.

Leave a Reply