महालोक – पाँच

फेसबुक पर एक घंटे प्रति लाइक की दर से चलता हुआ विरोध का अवसाद जब महानगर पहुंचा तो यहाँ मधुशाला में बोहनी हो चुकी थी जिस्म का बाज़ार अंगड़ाई ले रहा था और पांच सौ रूपये में भी बलात्कार करने वाले कम पड़ रहे थे ! धन्धे वालियाँ अपने खोटे नसीब को रो रही थी और धंधे के समय बैठ कर टी वी पर ठंढी राजधानी में हुए रेप का न्यूज़ देख कर मर्दों को मिस कॉल दे रही थीं ! साले मर्दों को आज की ‘रेप’ में पता नहीं क्या मजा आ रहा था …! इतने में शायद किसी का मोबाइल बजा तो, पर वो भी किसी लुख्खे का था ‘ग्राहक’ का नहीं … ‘साले मादरचोद मर्द …’ कोई टी वी पर रोती हुई एक लड़की की तरफ देख के बुदबुदाई … सब हंस पड़े … अभी राजधानी – गेट से आन्दोलन  का आँखों देखा हाल आना बचा था …

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