महालोक – सात

एक समय की बात है ! नगर में मनुष्यों की एक प्रेम सभा हुई ! सभी स्त्री पुरुष आये थे ! सभा में आखिरकार ये तय हुआ कि सब अपनी -अपनी छाती चीर के दिखायेंगे ! कई लोग ये कहते हुए उठ गए की आज वो अपनी छाती घर पर छोड़ आयें हैं ! कईयों ने ‘छाती चीरी नहीं जाती’ का बहाना भी बना लिया ! कुछ लोग ‘आज छाती में दर्द है’ कहते हुए भाग गए ! कईयों ने कहा हमने आज ही नाखून काटा है और उँगलियों में इतनी धार कहाँ जो छाती को चीर सकें ! सब एक दुसरे की तरफ ऊँगली दिखाने लगे ! कुछ लोग इस ख़याल से की अब छाती चीरनी ही पड़ेगी हंसने लगे ! एक को हँसते हुए देख के दूसरा भी हंसने लगा !
अंततः आपसी भाई चारे और विश्वास के आधार पर ये मान लिया गया कि हम सब एक दुसरे के दिल में हैं तो छाती चीर के इस विश्वास को क्यों परखें ? सभा समाप्त हो गयी ! उस दिन से आज तक सब इसी वचन से बंधे हैं ! पर आज भी जब कोई ये कहता है कि हम आपके दिल में रहते हैं तो बरबस सुन रहा कोई तीसरा या कहनेवाले वे दोनों ही हंसने मुस्कुराने लगते हैं ! सबूत कोई नहीं मांगता ! श्री राम भक्त हनुमान ने अपनी छाती चीर के सबका मुंह सिल रखा है !

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