काला हास्य

विष्णु को मानने वाले वैष्णव थे अब सहिष्णु को मानने वाले सहैष्णव हैं !
गाँधी जी सहिष्णु हो कर मुझ हिन्दू अब हिष्णु को माफ़ कीजियेगा ! प्रस्तुत है दुःखी जनों के लिए मेरी पैरोडी

सहैष्णव जन तो तेने कहिये, जे स्टेटमेंट पराई जाणे रे
पर ट्वीट उपकार करे तोये, मन कमेण्ट न आणे रे ।।
सोशल मीडिया मां सहुने वन्दे, निन्दा न करे केनी रे ।।
असहिष्णु सहिष्णु मन निश्चल राखे, धन-धन जननी तेरी रे ।।

सहैष्णव जन तो तेने कहिये, जे स्टेटमेंट पराई जाणे रे ।।

किरण आमिर ने तृष्णा त्यागी, पर स्त्री जेने मात रे ।।
जिहृवा थकी असत्य न बोले, सत्यमेव जयते हाथ रे ।।
इनटोलेरेंट व्यापे नहि जेने, सेलिब्रेटी जेना तन मा रे ।।
राम नामशुं ताली लागी, सकल तीरथ तेना देश मा रे ।।
वण लोभी ने कपट रहित छे, काम क्रोध निवार्या रे ।।
मस्तान तेनु दरसन करता, मजोरिटी कुळ तार्या रे ।।

सहैष्णव जन तो तेने कहिये, जे स्टेटमेंट पराई जाणे रे ।।

वैष्णव जन तो तेने कहिये गुजरात के संत कवि नरसी मेहता द्वारा रचित भजन है जो महात्मा गाँधी को बहुत प्रिय था

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