महालोक – दस

उर्दू सब नहीं पढ़ सकते यही सोच के हिंदी में लिखने की योजना बनी ! बोर्ड पर लगने वाले अक्षर की पुडिया में एक ही ‘त’ था और ‘त’ भारत में लग चुका था इसलिए मुल्ला साहेब ने ‘क’ से काम चलाया जो एक्स्ट्रा था ! पर तब तक फतवा ‘फकवा’ बन गया था … नोटिस पढने वाले हंस रहे थे …

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