महालोक – बारह

केबल ने उसको रोक लिया था ! चाह कर भी टेलीविजन टेबल नहीं छोड़ सका ! पीठ पीछे किसी ने केबल लगा रखा है यह जान के टेलीविजन बहुत उदास हो गया ! इतने साल से वो अपने आप को आज़ाद समझ रहा था ! उसे लगा किसी ने पीठ पर छुरा घोंप दिया है ! ‘ इतना बड़ा विश्वासघात …’ टेलीविजन को बुदबुदाते आज तक किसी ने नहीं देखा था ! ‘मैं सिर्फ एक तार हूँ, तुम किस बात से इतना हैरान हो ? केबल ने पीछे से पुछा ! ‘तुमने मुझे बाँध रखा है तुम एक छलावा हो तार के नाम पर … मैंने तार से संगीत निकलते सुना है जो आत्मा को मुक्त कर देती है … पर तुमने मुझे बाँध रखा है … तुम तार नहीं हो सकते !’ इसमें तुम्हारी गलती है, तुमने कभी पीछे मुड के नहीं देखा … नहीं तो तुम मुझे अपने साथ ही देखते, तुम महान मेरी वज़ह से हुए हो ! तुम्हारे अन्दर जो बाहर निकलने की चाह है उसकी वज़ह भी मैं हूँ ! केबल की यह बात सुनकर कर टेलिविज़न गुस्से से झिलमिलाने लगा ! उसे लगा न सिर्फ उसके अस्तित्व पर सवाल उठाया गया है बल्कि उसे हमेशा के लिए क़ैद भी कर लिया गया है …! ‘ओह फक’ केबल के मुंह से निकला, उसने देखा टेलिविज़न गुस्से से काला होकर सूं की आवाज़ के साथ शट हो गया था ! ‘इडियट बॉक्स कहीं के’ … केबल ने टेलिविज़न को गाली दी …

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