महालोक – तेरह

‘आप तय नहीं कर पा रहे हैं और किसी को विश्वास से वोट दे नहीं सकते तो मुझे दान कर दीजिये ! मैं उनको जमा कर के किसी सार्थक उपयोग में लाऊंगा !’ वो कैसे ? मैंने पूछा ! ‘अगर मेरे पास एक कड़ोड़ वोट की सहमती जमा हो गयी तो मैं उसे राजनितिक बाज़ार में किसी को एक कड़ोड़ रुपये में बेच दूंगा और उन पैसों से एक अनाथालय और वृधाश्रम बनाऊंगा ! आप किसी को भी वोट दें आप को कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा पर आपके एक वोट के दान से एक बेसहारा बच्चा और किसी वृध्ध के बुढ़ापे को आश्रय मिल जायेगा !’ तुम इतनी माथा पच्ची क्यों कर रहे हो ? मुझसे एक रुपया लो और आगे बढ़ो, मैंने कहा ! उसने कहा ठीक है और एक दान पात्र मेरे आगे कर दिया ! एक वोट के लिए राजनितिक दलदल में दिलचस्पी कैसे बढाई जाये ? इस महंगाई में मेरे वोट से सस्ता क्या होगा ? सोचता हुआ जब आगे बढ़ा तो मन के ट्राफिक जाम में फंसा मैं, लगा कहीं खो गया हूँ …

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