महालोक – पंद्रह

बढे हुए हाथ से हाथ में लेते ही उसे लगा उसके हाथ से गोद में खेलता उसका छोटा भाई गिरा …वो ज़मीन पर औंधा छाती पकड़ के दर्द से बिलबिला रहा था … चूल्हे के पास बैठी माँ से उसकी चोट देखी नहीं गयी … दौड़ी और जलावन से टकरा गयी … आंच से कोयला उड़ के भूसे की ढेर पर गिरा … देखते देखते घर धुएं से भर गया …धुएँ में घर का पूरा परिवार हांफ रहा था …! फेफरे की जलन और सांस की घुटन से उसकी आँखें बंद हो गयी ! गले में आग की धधक मिटाने के लिए उसकी आँख से पानी बहने लगा ! उसकी हाथ में सिगरेट था और वो खाँस रहा था … सब हँस रहे थे ! आज ये उसका पहला कश था …

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