महालोक – सोलह

ज़ख्म पर जब गरम धार गिरी तो वो तिलमिला गया ! वो अपने घाव पर पेशाब कर रहा था … खून रोकने का ये तरीका भी उसने अपने उसी गुरु से सीखा था जिनको वो अभी अभी अपना अंगूठा दे आया है … खून,ख़ुशी, दुःख,शिक्षा पेशाब के साथ सब बह रहा था … कुछ ज़मीन सोख रही थी और कुछ मिटटी के साथ छींटे बन कर पाँव पर पड़ रहे थे …

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