‘ट्वीटराती’ – महानगर का टापू / महालोक – अठारह

१.

पंछियों की बोली के नाम पर हर आदमी अपनी आवाज़ बदल कर दूसरों को आवाज़ देने लगा ! सब उसको ट्विटर कहने लगे ! पैदा होते ही सात साल में ट्विटर ने सात जनम ले लिया था ! दिन भर के दिमागी हालत की बयानबाजी का जुलूस जो चाहता ट्विटर पर निकाल लेता ! सात वचन और सात फेरे भी ट्वीट होने लगे ! जीने मरने की सारी कसमें अब ट्विटर थीं ! बातचीत के नाम पर सब टेलीविजन देखने लगते इसीलिए सब ट्वीट करने लगे ! मन की इस आभासी टापू का नाम ट्वीटराती पड़ा ! समय – काल से दूर था ट्वीटराती ! ट्वीटराती में न दिन होता न रात ! आदमी और औरत के लिए ट्विटर अब एक नया बिस्तर था ! तकिये पर एक ट्विटर रख कर लोग जागने लगे और ट्विटर के साथ सोने लगे ! रिश्तों में ट्वीटर ने एक ऐसा चोंच भर दिया था जिसे सब लड़ा रहे थे ! मुक्त सामाजिक जंजाल में एक चिविर् ! ट्वीटराती में सब अपने ट्वीट के साथ ट्विटर की सैर पर निकल पड़े हैं इस बात से अनजान कि नीला आभासी पंछी अब लाल खून का प्यासा है …

२.

ढाई आखर ट्विटर के –
ट्विटर के दो आगे ट्विटर, ट्विटर के दो पीछे ट्विटर, आगे ट्विटर, पीछे ट्विटर, बोलो कितने ट्विटर …

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