डिजिटल कचरा

 

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डिजिटल डाटा

 

डिजिटल कचरे में शब्द कम होते हैं, चित्र ज्यादा

 

एक /

कुत्ता जल रहा है ! लड़की मर रही है ! भाषण चल रहा है ! ब्रीफकेश, अटैची, हैंडबैग सब नोटों से भरा है ! अपनी अपनी तस्वीरों में लोग द्वारका, आगरा, और कशमीर से लेकर कन्या कुमारी तक खड़े हैं ! मसूर और मूँग की दाल, आलू और टमाटर के साथ फोटो खिंचा रहे हैं ! सब एक दुसरे को श्रद्धांजलि और जन्मदिन मुबारक एक ही फोटो पर दे रहे हैं ! फोटो में कोई उज्जैन जा रहा है तो कोई साकीनाका ! बाढ़ के दौरा में मंत्रीजी के हेलीकॉप्टर से पीड़ित कम दिख रहे थे और फोटोशॉप ज़्यादा ! फोटो शॉप की मदद से किसी ने सबकी थाली गायब कर दी है , अस्पतालों में पागलों की तरह लोग फर्श पर खाते दिख रहे हैं ! पेट पर लात और पीठ पर लाश, गाय और गुजरात, हर तरफ है फोटोशॉप का पलटवार ! डिजिटल रायता फ़ैल चूका है !

दो /

कोई फर्श पर खा रहा है तो कोई गाय की पीठ पर, कोई पाकिस्तान के नक़्शे पर खा रहा है तो कोई अपनी ही कार्टून पर ! कोई लाल पानी पर खा रहा है तो कोई आदिवासी के कंधे पर ! बहुत लोग अपने मन की बात पर खा रहे हैं, कविता कहानी जिस पर भी आपका मन हो आप खा सकते हैं ! किसी दिन हम लाल किला पर खा लेते हैं और किसी दिन पथ्थर फेंकते कश्मीर पर ! कोई अपने कहे की फोटो पर ही खा रहा है, कोई सबकी सुन कर खा रहा है ! जो भूखे हैं उनके फोटो पर भी कोई खा रहा है ! जितने देशवासी उतनी थाली और जितनी थाली उतने छेद ! फोटो शॉप से थाली को मिटाया जा रहा है, सबके लिए खाना है पर सबकी थाली गायब …

* कंडीशंस अप्लाई / इस पोस्ट पर आप चाहें तो खा सकते हैं, पर भूख नहीं मिटेगी, पेट नहीं भरेगा

 

Pic Credit : Google

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