बसंत के चार यार, लड़का लड़की ग्राहक और बाज़ार / व्यंग्य नाटिका

इस व्यंग्य नाटिका के सभी स्थान और पात्र काल्पनिक हैं !

पात्र –  

लड़का / बसंत ( किसी भी उम्र का एक पुरुष पात्र )

लड़की / मौसम ( किसी भी उम्र की एक स्त्री पात्र )

ग्राहक / सार्वजनिक प्रेमी ( किसी भी लिंग और उम्र का एक पात्र )

बाज़ार / सार्वजनिक प्रेमिका ( मल्टीमिडिया पर्दा / स्क्रीन )

नाटिका में बसंत के एक दिन लड़का, लड़की, ग्राहक और बाज़ार मिल कर ‘एंटी रोमियो स्क्वाड’ बन जाते हैं ! नाटक के अंत में यही सब पात्र मिल कर ‘कामदेव स्क्वाड’ बन जाते है !

 

पात्र  परिचय –

( मंच पर अँधेरा है ! पात्र एक एक कर के प्रकाश वृत में अपना परिचय देते हैं ! पात्र  परिचय में ही पात्रों का आपसी कोनफ्लिक्ट स्थापित हो जाता है )

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

लड़का : ( रोमांटिक रस ) मैं बसंत हूँ ! मौसम का राजा हूँ ! मैं रोमियो रोमांटिक हूँ !

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

लड़की : ( पावरफुल रस ) मैं मौसम हूँ ! बसंत मेरा दास है ! मैं लैला पावरफुल हूँ !

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

ग्राहक : ( कन्फ्यूज्ड रस ) मैं प्रेमी हूँ ! वाओ बसंत !!! कितना ब्यूटीफुल मौसम है ! मेरा मोबाइल कहाँ है ? मैं कन्फ्यूज्ड क्यों हूँ ?

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

बाजार : ( लॉस्ट रस ) मैं प्रेमिका हूँ ! बसंत के अंधे मजनुओं से कैसे बचूँ ? उफ़ ! ठहरो अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लूँ ! मैं लॉस्ट क्यों हूँ ? ( स्क्रीन ऑफ हो जाता है )

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

सभी पात्र एंटी रोमियो स्क्वाड बनकर कोरस में : ( हाहाकार रस )

आ रही सोशल मिडिया से पुकार

ट्वीटर पूछे बार बार

फेसबुक पर स्टेटस अपार

सब पूछ रहे हैं नेता और संत

रोमियो का कैसा हो बसंत ?

( हाथापाई करते हुए ) बसंत के चार यार / लड़का, लड़की, ग्राहक और बाज़ार

फिर अँधेरा !

दृश्य : एक

स्थान / ह्रदय बाज़ार ! बाज़ार में बहुत सारे ह्रदय लटक और झूल रहे हैं !

लड़का : मुझे बसंत दिखाइए
लड़की : बसंत अभी दूर है ! बसंत के लिए आप का बजट क्या है ?
लड़का : आप ने कितने बसंत देखे हैं ?
लड़की : जितने बसंत आप ने देखे है , उतने बसंत मैंने आज ही बेचे हैं !
लड़का : व्यक्ति को अपना बसंत खुद बनाना पड़ता है !
लड़की : आप जिसकी बात कर रहे हैं वो वो चरित्र है !
लड़का : जी ?
लड़की : चरित्र को बसंत से मत मिलाइये ! चरित्र का अलग स्टोर रूम है !
तुम मुझे अपना बजट दो मैं तुम्हे बसंत दूंगी !
लड़का : ये कैसी राजनीती है ? बसंत में मुझे बजट क्यों सुनाया जा रहा है ?
लड़की : बजट से ही बना मेड इन चाइना बसंत सबकी जेब में है ! नेता हो या संत सबकी जेब में टिंग – टिंग बजता चीन का बसंत !
लड़का : मेड इन इंडिया बसंत कहाँ है ?
लड़की : वो अभी बन रहा है ! बसंत बना सके इसके लिए बसंत देखना जरुरी होता है ! इसीलिए देखिये चीन का बसंत ! ( उँगलियों से रुपये गिनने का इशारा करती है )
( पुलकित होते हुए ) इण्डिया में देखिये अनलिमिटेड चीनी बसंत !
लड़का : मेरे बसंत का ब्रांड क्या होगा ?
लड़की : बसंत एक प्रोडक्ट है जिसका अभी तक कोई ब्रांड नहीं !
लड़का : ( वीर रस में ) ईश्वर का दिया कभी अंत नहीं होता , जो ख़त्म हो जाये वो बसंत नहीं होता !
लड़की : मत भूलो तुम जैसे रोमियो के लिए बाहर लोकल गुंडों का अभ्यास चल रहा है !
लड़का : सभी चीजों की तरह प्यार का ये उत्सव भी ख़त्म हो सकता है ! याद है पर्दा प्रथा, दहेज प्रथा, बाल विवाह प्रथा, सती प्रथा …
लड़की : सुनो कामदेव ! कैंडी और कन्फेक्शनरी से भरा अपना दिमाग उठाओ और यहाँ से दफा हो जाओ !
लड़का : क्षमा ! क्षमा ! क्षमा !

फिर अँधेरा !

दृश्य : दो
स्थान / प्रेमिकाओं का इनबॉक्स ! बसंत की शुभकामनाओं से इनबॉक्स भरा हुआ है !

इनबॉक्स / एक
एस एम् एस
लड़का – बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है …
लड़की – शटअप

इनबॉक्स / दो
एस एम् एस
लड़का – तेरे मेरे सपने अब एक रंग हैं …
लड़की – शटअप

इनबॉक्स / तीन
एस एम् एस
लड़का – गाता रहे मेरा दिल …
लडकी – शट – अप / शट – अप / शट – अप ! आर्चीज बकवास बंद करो !

फिर अँधेरा !

दृश्य : तीन
स्थान / रंग बिरंगे फूलों के बीच कहीं खिले हुए एक पीले फूल के अंदर !

लड़की : मौसम का क्या हाल है ? पेट कैसा है ?
लड़का : पीले – पीले कर रहा है सुबह से …
लड़की : क्या पिलाया ?
लड़का : पीला ! येलो !
लड़की : कैसा पीला ?
लड़का : सरसों के फूल जैसा पीला और गीला गीला भी !
लड़की : लगता है मौसम को बसंत हो गया है ! लव जिहाद से बचाना !
लड़का : जी ! एंटी रोमियो स्क्वाड देने का प्लान है
लड़की : मार्किट में आ गया है ए आर एस ?
लड़का : जी !
लड़की : बसंत को धमकाता है ?
लड़का : जी !
लड़की : वाह !
लड़का : बस एक बार मौसम बसंत से छूट जाये तो कोहरे तक जान बचेगी !
लड़की : कोहरा कहाँ है ?
लड़का : बाहर है !
लड़की : कोहरे में बसंत ले के आ गए ? मौसम का ग्लोबल वॉर्मिंग चेक करवा लेना, नहीं तो बसंत तक पीला पीला करेगा बाद में सब झड़ जायेगा !
लड़का : जी
लड़की : पतझर तक की दवा दे दी है !
लड़का : जी
लड़की : ( मुस्कुराती हुई ) मौसम पर कोई नियंत्रण नहीं है …
लड़का : ( भरी आँखों से ) तुम क्या जानो मौसम क्या है ?
लड़की : मैं तुम्हारे मौसम का डॉक्टर हूँ !
लड़का : मुझे नहीं पता था कि प्रेम में पागलों के डॉक्टर को मौसम का डॉक्टर कहते हैं !
लड़की : जी ?
लड़का : मेरा मौसम सोशल मिडिया में खुला बदन घूम रहा था !
लड़की : हम्म
लड़का : डॉक्टर साहेब मेरे मौसम को सोशल मिडिया के बसंत से बचा लो !
लड़की : अगर आप के भीतर बसंत की चाह नहीं है तो आप को मौसमी कलैंडर में भी बसंत नहीं मिलेगा !
लड़का : सोशल मिडिया में बसंत इतना भर गया है कि …
लड़की : कि ? क्या …
लड़का : बस एक बार मेरा मौसम सोशल मिडिया के बसंत से छूट जाये तो अगले मौसमी बसंत के अटैक तक जी जायेगा …
लड़की : दूसरों की प्रोफाइल में रहकर हम अपना मौसम खो देते हैं ! अपने मौसम के लिए हमें खुद जीवन के धूप में खड़ा रहना होगा !
लड़का : ये सब राजनीति बसंत की वजह से हुआ ! सॉरी मैंने इस मौसम में दुसरे प्रोफाइल से फ़्लर्ट किया
लड़की : अब किसी को इनबॉक्स में भी हैप्पी बसंत मत बोलना !
लड़का : बस एक बार मुझे सोशल मिडिया के बसंत से बचा लो मैं कभी दुबारा बसंत में झाकूँगा भी नहीं !
लड़की : रोगी बने रहो ! मत भूलो मैं तुम्हारे मौसम की डॉक्टर हूँ !
लड़का : मौन

फिर अँधेरा !

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !
सभी पात्र कामदेव स्क्वाड बनकर कोरस में : बसंत के चार यार / लड़का, लड़की, ग्राहक और बाज़ार / शुरू करो लव सेक्स और प्यार का व्यापार ! हम नहीं कहते जमाना कहता है !

( धनुष से बाण चलाते हुए ) शुरू करो लव सेक्स और प्यार का व्यापार …

रोमांटिक रस के संगीत में पर्दा गिरता है !

इस प्रयोगधर्मी नाटिका में किसी भी प्रकार के मंच सज्जा की कोई आवश्यकता नहीं है ! रचनात्मक प्रकाश और ध्वनि / संगीत से चारों दृश्य को अलग अलग ढंग से दिखाया जा सकता है !

 

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