चल ‘इसरो’ घर आपने, उपग्रह पहुँच गए आकाश – ‘अमीर इसरो’

इसरो रैन चुंनाव की, जागी रॉकेट के संग !
तन मेरो मन इंडियन को, दोउ भए एक रंग !!

इसरो दरिया ज्ञान का, उल्टी वा की धार !
जो उतरा सो उड़ गया, जो उड़ा सो पार !!

सैटेलाइट बनाई जतन से, चरखा दिया जला !
आया नेता खा गया, तू बैठी ढोल बजा !!

नेता सोवे सेज पर, मुख पर डारे विकास !
चल इसरो घर आपने, उपग्रह पहुँच गए आकाश !!

इसरो मौला के रुठते, पी एम के सरने जाय !
कहे इसरो पी एम के रुठते, मौला नहिं होत सहाय !!

– ‘अमीर इसरो’

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