मांस पेशी

शेर और गाय के सम्बन्ध जब से खट्टे हुए, जंगल की राजनीती से सड़ांध की बू आने लगी ! जंगल के नगर निगम ने शेरों के लिए मुश्किल खड़ी कर दी ! सुबह शेर को जब मांस की जगह मांस बंदी का नोटिस मिला तो वो खिसियानी बिल्ली हो गया ! मवेशी वध विरोधी आंदोलन के बंदरों ने पेड़ पर से शेर को खंभा नोचते हुए देखा ! शेर पहले ही जीवन संकट के दौर से गुज़र रहे थे, अब उन्हें खाने के भी लाले पड़ गए ! शेरों को पेट भरने के लिए भैंसे का मांस दिया जाता था जिससे तबेले में असहिष्णुता बढ़ गई और भैंस देशद्रोही हो गए ! बदली परिस्थितियों में ज़िंदा रहने के लिए शेरों को बकरे के मांस से ही काम चलाना पड़ रहा है ! मांस की उपलब्धता न होने की वजह से शेरों और शावकों को मुर्गे का मांस दिया जा रहा है ! पहले तो मौसम और बीमारी शेर के लिए ख़तरा बने और अब उनके राशन पर ही हमला हो गया !

‘ बूचड़खानों पर नहीं हमारी किस्मत पर ताला लग गया है ! कहीं मर ना जाऊँ ‘ ये कह कर शक्तिशाली चीता सुबक सुबक कर रोने लगा ! चीता को रोते हुए देख कर सब माँसाहारी भावुक हो गए ! राजधानी में मांस समस्या पर चर्चा के लिए तत्काल कार्यक्रम रखा गया ! सभी जानवर आये ! कार्यक्रम में फलाहार देख कर मांसाहारी निराश हो गए ! आम, खीरा, ककड़ी, लीची, कटहल, खरबूजा, तरबूजा और अंगूर पसरे रह गए ! स्वागत भाषण में सिंह के मुँह से उत्तर प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड, हरिद्वार, जयपुर जंगल का नाम सुनते ही पशु मांस – मांस करने लगे ! ‘ प्रदेश में अगर मांस की किल्लत हुई तो हम दिल्ली से मटन मंगवाएंगे ! ‘ सिंह के इस घोषणा से सब शांत हुए !

‘ हम भी इंसानों की तरह जैसा देश वैसा भेस बनाने की काबिलियत रखते हैं ‘ सिंह की इस बात से सबके तोते उड़ गए ! ‘ चिकन खा कर थक गयी हूँ ! मांस के बारे में ठंडे दिमाग से बहस करना लगभग असंभव हो गया है ! आने वाले दिन घास – फूस की जुगाली करते ही बिताने पड़ सकते हैं ‘ नथुना फुलाते हुए शेरनी ने कहा और सभा छोड़ के चली गयी ! जंगल के एक कबाबी ने शेरनी को रोकने की कोशिश करते हुए कहा ‘ यह एक कृत्रिम संकट है जिसका लाभ मीडिया उठा रही है !’

‘ मित्रों मक्खन लगाने से मटन की गाड़ी पटरी पर फिर से आ सकती है ! ‘ सियार बोला ! अलग – अलग जायका पसंद करने वाली लोमड़ी बोल पड़ी ‘ खुराक में प्रोटीन की अहम भूमिका है. प्रोटीन शरीर में मांसपेशियों का निर्माण करता है इसलिए मीट पर टैक्स लगाने की योजना बन रही है ‘ ! ज्योत्षी तोते ने कहा ‘ शेर का पेट खराब हो तो वह घास पर मुंह मारता है ! शेर जब चिकन खा – खाकर पेट खराब कर लेगा तो फिर वो घास खाना शुरू कर देगा ‘ ! देखते देखते जंगल में मांस पर तीखी राजनीतिक और धार्मिक बहस शुरू हो गई !

शेर ने फिर बोलना शुरू किया ! ‘ पंजे और नाख़ून के रहते हुए भी कमांड और कंट्रोल दोनों ताक़तें कमज़ोर हो रही हैं ! पेट भर मांस के बिना मेरी मति भ्रम हो गयी है ! सूर्योदय से पहले ही आंखें खुल जाती हैं ! रात और दिन एक भिक्षु की तरह जबरदस्त बेचैनी और तकलीफ महसूस करता हूँ ! बिना कुछ बोले अपने मन से उमड़ रही भावनाओं का सामना करना पड़ता है ! अंदर क्रोध, तनाव, झुंझलाहट और निराशा पिघल रही है !’ शेर की आँखें भर आयीं ! ‘प्रकृति बहुत क्रूर है, जो जीवित रहने के लिए फिट नहीं होते हैं वो विलुप्त हो जाते हैं ! ‘ एक कौव्वे ने यह कह कर सबके जले पर नमक छिड़क दिया !

‘ हमें पहले शिकार से रोका गया और अब भूखा रखा जा रहा है ! हम आबादी पर हमला करेंगे और खून की नदियाँ बहा देंगे !’ मांसाहारी जानवरों की ये बात हाथियों ने सुनते ही कहा ‘हम जंगल छोड़ देंगे !’ अजगर और घड़ियाल बोल पड़े ‘हम एक दुसरे को खा लेंगे !’ क्या प्राकृतिक संतुलन जैसी कोई चीज नहीं है ? गाय के चमड़े से बने कोल्हापुर का पारंपरिक चप्पल पहने भालू ने पुछा !

संकट की इस घडी में दुष्ट लोमड़ियों ने नया नारा दिया ‘ मानव अधिकार पशु अधिकार नहीं हैं ‘ ‘क्या हम तैर के मछलियों का शिकार नहीं कर सकते ? ‘ मख्खी ने पुछा ! ‘ हम जंगल से गायब हो जाते हैं !’ चीटियों ने राय दी ! ‘ फिर हम कहाँ जायेंगे ? ‘ कौव्वे कौतुहल वश पूछ बैठे ! ‘ हम शहरों में रहेंगे ‘ कुत्तों ने कोरस में कहा ! ‘ हम शहर में आदमियों के मुखोटे पहन के रहेंगे और अपने पसंद का मांस पेट भर के खाएंगे ‘ एक कुत्ते की इस उक्ति पर मारे गए मति के सभी जानवर सहमत हो गए ! मांसाहारी पशुओं के पास कोई चारा नहीं था ! जंगल खाली हो गया ! मनुष्यों ने जंगल के बचे हुए पेड़ पौधों को गमले में रख लिया और शहर में रहते हुए जिन जानवरों का मुखौटा गिर पड़ा वो पकड़ लिए गए ! कुछ को पिंजड़े में, कुछ को सर्कस में, कुछ को चिड़ियाँ घर में, और कुछ को न्यूज़ चैनेल, सोशल साइट और राजनीती में अपने पसंद का कच्चा मांस खाने के लिए छोड़ दिया गया

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