सावधान, मैं मूर्ख हूँ !

 

 Illustration : Anirban Bora

काला हास्य / Illustration : Anirban Bora

बिना किसी कारण के ख़ुशी से नाचता हुआ देख कर मुझे पुलिस पकड़ कर सवाल घर में ले गयी और पूछताछ करने लगी ! छान – बीन से यह बात सामने आई कि मैं मूर्ख हूँ ! पुलिस का कहना है कि यह अपराध है और मूर्खता साबित होने पर सात वर्ष तक की सज़ा हो सकती है.! मैंने पूछा ‘ पांच वर्ष की सजा क्या कम है जो हमें चुनाव जैसी मूर्खता के बाद मिलती है, फिर मुझे सात वर्ष की अलग से सज़ा क्यों हो ?’ छोटा मूर्ख बड़ी बात कह कर पुलिस मुझ पर हंसने लगी !

मेरी गिरफ़्तारी का पता लगते ही मूर्खता आयोग ने पुलिस से मेरी मूर्खता के मामले की रिपोर्ट मांगी ! भारतीय पुलिस ने मेरी मूर्खता को परखने का डेमॉन्सट्रेशन रखा और मुझे एक मशीन से जोड़ दिया ! डेमॉन्सट्रेशन के दौरान अलग – अलग बटन दबाने पर भी मशीन से मूर्खता की ही पर्ची निकली ! यह देख कर पुलिस मुझे ईवीएम मूर्ख कहने लगी !

मैंने पुलिस से कहा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन जिस पर हम अपने वोट देते हैं, मैं वो नहीं हूँ ! मैं एक वोटर हूँ, वोट मशीन नहीं ! मैं एक नागरिक हूँ ! मैं मूर्ख हो सकता हूँ पर ईवीएम नहीं ! ‘क्या मेरे साथ छेड़छाड़ हो सकती है ?’ मूर्खता आयोग को मेल लिख कर पुलिस ने पूछा ! ‘छेड़छाड़ किया जा सकता है, इसलिए जब तक सिद्ध न हो जाए कि मैं मूर्ख हूँ मुझे उच्च सुरक्षा में रखा जाए ‘ जवाब मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया !

प्रशासन का अर्थ श्रेष्ठ विधि से शासन करना है ! मानव विकास ही इसका परम लक्ष्य है इसलिए मेरी प्रशासनिक सेवा शुरू हो गयी ! मुझे पांच मीटर के केबल से जोड़ दिया गया ! पुलिस की देख – रेख में अब मूर्खता आयोग के अलावा कोई भी मुझ तक नहीं पहुंच सकता था !

मैं जानता था कि मैं मूर्ख हूँ, पर इतना बड़ा मूर्ख हूँ कि मुझे क़ैद कर लिया जाए ये नहीं पता था ! अपनी इस दुर्लभ मूर्खता तक पहुँचने के लिए लाखों लोगों की तरह मैंने भी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया !

शिक्षा, लोकतंत्र, धर्म, जाति व्यवस्था, जैसे कई अलग – अलग क्षेत्रों से किये गए सवालों पर दिए गए मेरी मूर्खतापूर्ण उत्तर में भी मूर्खता आयोग को चुनावों को प्रभावित करने की शक्ति दिखाई दे गयी ! मेरी मूर्खता सिद्ध करने के लिए मेरा सीक्रेट सर्च वारंट निकाल दिया गया ! मेरी मूर्खता के बहाने वो मेरे फोन का स्मार्टनेस चेक करने लगे ! ‘आप से ज्यादा आप का फोन स्मार्ट है’ उन्होंने कहा ! मेरी अब तक की सारी वर्चुअल रियलिटी सच होने लगी ! स्मार्ट सिटी के स्मार्ट मूर्ख की स्मार्ट मूर्खता एक ही पासवर्ड से बाहर आ गयी !

मेरी ही तरह स्मार्ट होने के लिए कई लड़की – लड़के इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में घुसते हैं, डॉक्टर बनते है, लेखक, व्यापारी, शिक्षक, कलाकार ,वैज्ञानिक और अभिनेता बन कर अभिनय करते हैं और नेता बन जाते हैं और आखिरकार मूर्ख ही कहलाते हैं ! मूर्खता मूल्य पैदा करती है, विचार नहीं ! मेरी तरह भारत में अनेकता और एकता के आयाम में मूर्खता भी जोड़ के देखिये आपको देश ज्यादा एक लगेगा ! धर्म, भाषा और रीति – रिवाजों की विविधता के साथ हमारी मूर्खता में भी एक अद्भुत एकता है जहाँ सामूहिक बलत्कार अब नया हथियार है !

मुझे देखने कॉर्नफ्लेक्स खाता हुआ डॉक्टरों का एक दल आया ! ‘ जब मछली मरती है तो उसका सिर सबसे पहले गलना शुरू होता है और इसीलिए बदबू भी सबसे पहले वहीं से आती है ! ऑपरेशन करके हमें आप के अक्ल की तलाशी लेनी है ! ऑपरेशन जटिल है ! जीना है तो तकलीफ भी झेलनी होगी ! आप सिर्फ अपने कैलोरी पर ध्यान दें, चाहें तो किसी भी सरकारी परियोजना के बारे में बात करें ! पर विचार न करें ! विचार करने से नींद आ जाती है और नींद आपकी मूर्खता में खलल डाल सकती है ! एक हाथ ही दूसरे हाथ को धोता है !’ बारी बारी से सभी डॉक्टरों ने मुझसे ये बातें कहीं !

मुझे हल्का करने के लिए डॉक्टरों ने मेरे पेट में गैस भर दिया ! धीरे – धीरे मेरी आँख बंद होने लगी और मैं उड़ने लगा ! महँगी सब्ज़ी मंडी और बंद बूचड़खाने पर से उड़ता हुआ मैं समशान और कब्रिस्तान के ऊपर पहुँच गया ! सुनसान गली पार करती हुई एक सहमी सी लड़की के ऊपर से उड़ने लगा, खाली खेल के मैदान और दुर्घटनाग्रस्त रेलगाड़ियों के ऊपर से उड़ता हुआ मैं देश भर में फैले ड्रोन कैमरे की तरह सरकारी हवाई जहाज़ के साथ बादलों में तैर रहा था ! सूखी कोसी और मैली गंगा मुझे अपने घर बुला रही थी ! अपनी मूर्खता के साथ उड़ते – उड़ते मैं इन्फॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्ट्री से भी ऊपर उठ गया ! डिब्बाबंद मांस की तरह उड़ता हुआ देख कर फौजियों ने मुझे लपक कर नीचे उतार दिया ! मैं अस्पताल में बिस्तर पर लेटा था और सामने टीवी स्क्रीन को काला कर के कोई सरकार को आइना दिखा रहा था या मुझे मूर्ख बना रहा था, मुझे कुछ याद नहीं ! रिमोट कंट्रोल्ड चार रोबोट कार्टूनिस्टों ने मेरे पेट से गैस निकाल लिया !

क्या आपके पास पतंग उड़ाने का लाइसेंस है ? उन्होंने मुझसे पूछा ! ‘ नहीं तो ‘ मैंने चौंकते हुए कहा ! ‘ पतंग उड़ाने के लिए भी लाइसेंस की जरुरत पड़ती है ?’ मेरा सवाल सुन कर सब गोल बंद हो कर फुसफुसाने लगे ! काफी देर बाद सब बिखर के इधर उधर फ़ैल गए और एक महत्वपूर्ण सा लगने वाला आदमी मेरे पास आया और मुझे इन्टरनेट से जोड़ कर मुक्त कर गया ! ‘राइट टू इन्फॉर्मेशन एक्ट के तहत आप अपने घर जा सकते हैं ‘ ये कहता हुआ वो हॉस्पिटल से किसी विज्ञापन की तरह गायब हो गया !

ज्यादातर दफ्तरों में मशीनें, कंप्यूटर और आदमी एक जैसे होते हैं ! मेडिकल साइंस ने इतनी तरक्की कर ली है फिर भी अपनी जांच के नतीजों में वो मुझ जैसे अपने मूर्ख नागरिक को पहचान न सके ! अपनी पूरी ताकत और साहस के साथ मैं हँसने लगा ! मेरे साथ सब हंसने लगे ! अपना हेड फ़ोन कान में डाल कर इंटरनेट की अच्छी स्पीड की ख़ुशी में नाचते – नाचते मैं घर लौट आया !

बसंत के चार यार, लड़का लड़की ग्राहक और बाज़ार / व्यंग्य नाटिका

इस व्यंग्य नाटिका के सभी स्थान और पात्र काल्पनिक हैं !

पात्र –  

लड़का / बसंत ( किसी भी उम्र का एक पुरुष पात्र )

लड़की / मौसम ( किसी भी उम्र की एक स्त्री पात्र )

ग्राहक / सार्वजनिक प्रेमी ( किसी भी लिंग और उम्र का एक पात्र )

बाज़ार / सार्वजनिक प्रेमिका ( मल्टीमिडिया पर्दा / स्क्रीन )

नाटिका में बसंत के एक दिन लड़का, लड़की, ग्राहक और बाज़ार मिल कर ‘एंटी रोमियो स्क्वाड’ बन जाते हैं ! नाटक के अंत में यही सब पात्र मिल कर ‘कामदेव स्क्वाड’ बन जाते है !

 

पात्र  परिचय –

( मंच पर अँधेरा है ! पात्र एक एक कर के प्रकाश वृत में अपना परिचय देते हैं ! पात्र  परिचय में ही पात्रों का आपसी कोनफ्लिक्ट स्थापित हो जाता है )

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

लड़का : ( रोमांटिक रस ) मैं बसंत हूँ ! मौसम का राजा हूँ ! मैं रोमियो रोमांटिक हूँ !

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

लड़की : ( पावरफुल रस ) मैं मौसम हूँ ! बसंत मेरा दास है ! मैं लैला पावरफुल हूँ !

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

ग्राहक : ( कन्फ्यूज्ड रस ) मैं प्रेमी हूँ ! वाओ बसंत !!! कितना ब्यूटीफुल मौसम है ! मेरा मोबाइल कहाँ है ? मैं कन्फ्यूज्ड क्यों हूँ ?

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

बाजार : ( लॉस्ट रस ) मैं प्रेमिका हूँ ! बसंत के अंधे मजनुओं से कैसे बचूँ ? उफ़ ! ठहरो अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लूँ ! मैं लॉस्ट क्यों हूँ ? ( स्क्रीन ऑफ हो जाता है )

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

सभी पात्र एंटी रोमियो स्क्वाड बनकर कोरस में : ( हाहाकार रस )

आ रही सोशल मिडिया से पुकार

ट्वीटर पूछे बार बार

फेसबुक पर स्टेटस अपार

सब पूछ रहे हैं नेता और संत

रोमियो का कैसा हो बसंत ?

( हाथापाई करते हुए ) बसंत के चार यार / लड़का, लड़की, ग्राहक और बाज़ार

फिर अँधेरा !

दृश्य : एक

स्थान / ह्रदय बाज़ार ! बाज़ार में बहुत सारे ह्रदय लटक और झूल रहे हैं !

लड़का : मुझे बसंत दिखाइए
लड़की : बसंत अभी दूर है ! बसंत के लिए आप का बजट क्या है ?
लड़का : आप ने कितने बसंत देखे हैं ?
लड़की : जितने बसंत आप ने देखे है , उतने बसंत मैंने आज ही बेचे हैं !
लड़का : व्यक्ति को अपना बसंत खुद बनाना पड़ता है !
लड़की : आप जिसकी बात कर रहे हैं वो वो चरित्र है !
लड़का : जी ?
लड़की : चरित्र को बसंत से मत मिलाइये ! चरित्र का अलग स्टोर रूम है !
तुम मुझे अपना बजट दो मैं तुम्हे बसंत दूंगी !
लड़का : ये कैसी राजनीती है ? बसंत में मुझे बजट क्यों सुनाया जा रहा है ?
लड़की : बजट से ही बना मेड इन चाइना बसंत सबकी जेब में है ! नेता हो या संत सबकी जेब में टिंग – टिंग बजता चीन का बसंत !
लड़का : मेड इन इंडिया बसंत कहाँ है ?
लड़की : वो अभी बन रहा है ! बसंत बना सके इसके लिए बसंत देखना जरुरी होता है ! इसीलिए देखिये चीन का बसंत ! ( उँगलियों से रुपये गिनने का इशारा करती है )
( पुलकित होते हुए ) इण्डिया में देखिये अनलिमिटेड चीनी बसंत !
लड़का : मेरे बसंत का ब्रांड क्या होगा ?
लड़की : बसंत एक प्रोडक्ट है जिसका अभी तक कोई ब्रांड नहीं !
लड़का : ( वीर रस में ) ईश्वर का दिया कभी अंत नहीं होता , जो ख़त्म हो जाये वो बसंत नहीं होता !
लड़की : मत भूलो तुम जैसे रोमियो के लिए बाहर लोकल गुंडों का अभ्यास चल रहा है !
लड़का : सभी चीजों की तरह प्यार का ये उत्सव भी ख़त्म हो सकता है ! याद है पर्दा प्रथा, दहेज प्रथा, बाल विवाह प्रथा, सती प्रथा …
लड़की : सुनो कामदेव ! कैंडी और कन्फेक्शनरी से भरा अपना दिमाग उठाओ और यहाँ से दफा हो जाओ !
लड़का : क्षमा ! क्षमा ! क्षमा !

फिर अँधेरा !

दृश्य : दो
स्थान / प्रेमिकाओं का इनबॉक्स ! बसंत की शुभकामनाओं से इनबॉक्स भरा हुआ है !

इनबॉक्स / एक
एस एम् एस
लड़का – बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है …
लड़की – शटअप

इनबॉक्स / दो
एस एम् एस
लड़का – तेरे मेरे सपने अब एक रंग हैं …
लड़की – शटअप

इनबॉक्स / तीन
एस एम् एस
लड़का – गाता रहे मेरा दिल …
लडकी – शट – अप / शट – अप / शट – अप ! आर्चीज बकवास बंद करो !

फिर अँधेरा !

दृश्य : तीन
स्थान / रंग बिरंगे फूलों के बीच कहीं खिले हुए एक पीले फूल के अंदर !

लड़की : मौसम का क्या हाल है ? पेट कैसा है ?
लड़का : पीले – पीले कर रहा है सुबह से …
लड़की : क्या पिलाया ?
लड़का : पीला ! येलो !
लड़की : कैसा पीला ?
लड़का : सरसों के फूल जैसा पीला और गीला गीला भी !
लड़की : लगता है मौसम को बसंत हो गया है ! लव जिहाद से बचाना !
लड़का : जी ! एंटी रोमियो स्क्वाड देने का प्लान है
लड़की : मार्किट में आ गया है ए आर एस ?
लड़का : जी !
लड़की : बसंत को धमकाता है ?
लड़का : जी !
लड़की : वाह !
लड़का : बस एक बार मौसम बसंत से छूट जाये तो कोहरे तक जान बचेगी !
लड़की : कोहरा कहाँ है ?
लड़का : बाहर है !
लड़की : कोहरे में बसंत ले के आ गए ? मौसम का ग्लोबल वॉर्मिंग चेक करवा लेना, नहीं तो बसंत तक पीला पीला करेगा बाद में सब झड़ जायेगा !
लड़का : जी
लड़की : पतझर तक की दवा दे दी है !
लड़का : जी
लड़की : ( मुस्कुराती हुई ) मौसम पर कोई नियंत्रण नहीं है …
लड़का : ( भरी आँखों से ) तुम क्या जानो मौसम क्या है ?
लड़की : मैं तुम्हारे मौसम का डॉक्टर हूँ !
लड़का : मुझे नहीं पता था कि प्रेम में पागलों के डॉक्टर को मौसम का डॉक्टर कहते हैं !
लड़की : जी ?
लड़का : मेरा मौसम सोशल मिडिया में खुला बदन घूम रहा था !
लड़की : हम्म
लड़का : डॉक्टर साहेब मेरे मौसम को सोशल मिडिया के बसंत से बचा लो !
लड़की : अगर आप के भीतर बसंत की चाह नहीं है तो आप को मौसमी कलैंडर में भी बसंत नहीं मिलेगा !
लड़का : सोशल मिडिया में बसंत इतना भर गया है कि …
लड़की : कि ? क्या …
लड़का : बस एक बार मेरा मौसम सोशल मिडिया के बसंत से छूट जाये तो अगले मौसमी बसंत के अटैक तक जी जायेगा …
लड़की : दूसरों की प्रोफाइल में रहकर हम अपना मौसम खो देते हैं ! अपने मौसम के लिए हमें खुद जीवन के धूप में खड़ा रहना होगा !
लड़का : ये सब राजनीति बसंत की वजह से हुआ ! सॉरी मैंने इस मौसम में दुसरे प्रोफाइल से फ़्लर्ट किया
लड़की : अब किसी को इनबॉक्स में भी हैप्पी बसंत मत बोलना !
लड़का : बस एक बार मुझे सोशल मिडिया के बसंत से बचा लो मैं कभी दुबारा बसंत में झाकूँगा भी नहीं !
लड़की : रोगी बने रहो ! मत भूलो मैं तुम्हारे मौसम की डॉक्टर हूँ !
लड़का : मौन

फिर अँधेरा !

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !
सभी पात्र कामदेव स्क्वाड बनकर कोरस में : बसंत के चार यार / लड़का, लड़की, ग्राहक और बाज़ार / शुरू करो लव सेक्स और प्यार का व्यापार ! हम नहीं कहते जमाना कहता है !

( धनुष से बाण चलाते हुए ) शुरू करो लव सेक्स और प्यार का व्यापार …

रोमांटिक रस के संगीत में पर्दा गिरता है !

इस प्रयोगधर्मी नाटिका में किसी भी प्रकार के मंच सज्जा की कोई आवश्यकता नहीं है ! रचनात्मक प्रकाश और ध्वनि / संगीत से चारों दृश्य को अलग अलग ढंग से दिखाया जा सकता है !

 

अलविदा‬

भीतर अब कोई नहीं था ! खालीपन की वजह से अपनी आवाज़ ही अपने कानों में गूंज रही थी ! अपने कदमों की आहट सुनते हुए उसने कमरे का एक चक्कर लगाया ! भरी हुई जगह ख़ाली होते ही कितनी अलग लगने लगती है ! यहाँ वहां हर तरफ दीवारों पर बिताए हुए हर पल के निशान अब धब्बे की तरह कुरूप लग रहे थे ! उसने दीवार पर बादल से काले एक दाग़ को सहला कर देखा ! उसकी आँखें भर आईं और बरस गईं ! यहाँ वो माथा टेकता था और यहीं वो सर टिका के बाहर खिड़की की तरफ देख कर मुस्कुराती थी और सहसा मुड़ के पीठ को और आराम दे कर जाने का कोई नकली बहाना बनाती थी ! न जाने कितनी बहस, खुद को छुपाने और बताने का धूप छाँव सा खेल ! पा लेने पर पीठ पर धप्पा ! झूठी सच्ची बातों का ह्रदय पर कितने धौल …
कमरे में आखरी स्माइली छोड़ कर वो कमरे को हमेशा के लिए छोड़ कर जा चुकी थी ! लम्बी सांस लेता हुआ वो बाहर आया और उसने पीछे मुड़ कर फिर कभी नहीं देखा ! धूप के टुकड़े, सूखे फूल की पंखुड़ियाँ, खनकती हंसी और ठहाके हवा के साथ सूने कमरे में गोल गोल घूम रहे थे ! पीछे छूट गयी पढ़ी हुई किसी किताब के पन्नों की फड़फड़ाहट गिलहरी को बुला रही थी पर दोनों के जाने के बाद खुला और खाली इनबॉक्स का दरवाज़ा हवा में खुलता और बंद होता हुआ यादों की गिलहरी को अंदर आने से ठिठका रहा था …

आत्म हास्य

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आत्मन्

अपनी आत्मा में झाँकने के लिए कहीं ताकने की जरुरत नहीं है

१.

” एक शरीर से निकल कर दुसरे शरीर में जाना था … ” ऊँची आवाज़ में आत्मा को यमराज डाँट रहे थे ! ” तुम तो एक चेहरे से निकल कर दुसरे चेहरे में चले जाते हो ! आत्मन , ये मृत्यु लोक है फेसबुक प्रोफाइल नहीं ! जाइए कुछ दिन के लिए आपकी प्रोफाइल ब्लॉक कर देता हूँ …” आत्मा मौन था / उसने कई प्रोफाइल में जा कर ह्रदय के कई इनबॉक्स देखे थे ! सबका सीक्रेट एक था ! शरीर से आत्मा कब निकलेगी किसी को पता नहीं था ! फिर लोग एक दुसरे से क्या छुपाते हैं ? वो शरीर में क्यों हैं , इस बात की किसी को फ़िक्र नहीं थी ! हर बात के लिए लोग अपना चेहरा बदल रहे थे, और आत्मा हर चेहरे को पढ़ चूका था ! विश्वास और प्रेम की तलाश में यमराज के हाथों आत्मा कई बार ब्लॉक्ड हो चूका था …

२.

यमराज शरीर के हिसाब किताब की गिनती में व्यस्त थे ! ” यमराज जी, इस शरीर का दिमाग़ खराब है ! इसमें कितने दिन रहना है ? ” भीड़ में एक परेशान आत्मा यमराज से पूछ रही थी ! ” आत्मन् ज्यादा बक बक मत करो ! हम सब जानते हैं ! बातों में आ कर हम तुमको जातक का एक्सपायरी डेट नहीं बता देंगे ! स्थिर रहो ! जियो और जीने दो ! और तुम्हारे जैसी आत्मा ही शरीर का दिमाग खराब कर देती है ! चंचल कही के … ” यमराज सेल्फी लेने में व्यस्त हो गए !

३.

यमराज पसीने से लथ पथ हो गए थे ! उन्होंने शरीर का अंग अंग छान लिया था पर उन्हें आत्मा नहीं मिल रही थी ! आत्मा गयी कहाँ ? वो सोच रहे थे ! यमराज को कई और जगहों पर जा कर कई शरीर से और आत्माएँ लेनी थी, देर हो रही थी ! सामने पड़े शरीर की आँखों में उन्होंने फिर से देखा ! ज्योति थी, पर दृष्टि नहीं ! आत्मा की चेतना शक्ति जो पूरे शरीर के बाहर और भीतर की इन्द्रियों में फैली हुई रहती है, शरीर में कहीं नहीं थी ! नाक में गंध नहीं थी ! मुंह में शब्द भरे थे पर वाणी से मिठास गायब थी ! मन मर चुका था ! त्वचा अहम् के परतों से मोटी हो चुकी थी ! ह्रदय भी खाली था ! यमराज ने शरीर के कर्मों का फिर से हिसाब किताब किया सारी गणना ठीक थी ! प्राण निकलने का यही योग था ! आत्मा को शरीर में ही होना चाहिए था ! पर आत्मा गयी कहाँ ? शरीर के सारे अंगो के बाद यमराज ने शरीर पर पहने हुए कपड़ों की तलाशी ली ! जेब में इज़्ज़त मिली ! बटुए में प्यार था ! सारी यादें मोबाइल में क़ैद थी ! बार बार गिनती किये जाने की वजह से पाप पुण्य कैलकुलेटर का बटन बन कर घिस चूका था ! आत्मा कहीं नहीं थी ! यमराज ने घड़ी देखी ! चार शून्य तेज़ी से धड़क रहा था ! अगले एक क्षण में आत्मा का मिलना ज़रूरी था ! यमराज की नज़र शरीर के जूते पर पड़ी ! कूद कर उन्होंने उसे उतार फेंका और आत्मा सिक्के की तरह खनक उठी ! यमराज ने जूतों को उठा कर उसमे झाँका ! आधी आधी आत्मा दोनों जूते की तल में दबी थी ! यमराज ने आत्मा को जूते की तल्ले से बारी बारी से खींच के निकाला और काम हो जाने वाली राहत की साँस ली ! चलते चलते उन्होंने जातक के शरीर की ओर देखा ! मनुष्य उन्हें हमेंशा आश्चर्यचकित करता है ! पर ये धनपशु सबसे चतुर था ! आज यमराज ने किसी शरीर से उसकी आत्मा को पहने गए जूते की तल्ले से पहली बार निकाला था ! विजयी मुस्कान के साथ पसीने से लथ पथ अपने चेहरे की एक सेल्फ़ी तो बनती है ! क्लिक ! घर के लोग विलाप करने लगे थे और देर हो रही थी ! उनका यहाँ से निकल जाना जरुरी था ! पर यमराज के मन ने कहा one more और आवाज़ आई click …

४.

हम सब भटकती हुई अात्माएँ हैं और हम जन्म-मरण के फेर से मुक्त होकर चौरासी लाख जोनियों के चक्कर से बाहर हो गए हैं ! चोला, चोगा और इंद्रियों के जंजाल से मुक्त ! हम एक दूसरे से मुक्त अात्माएँ हैं ! हनन शोषण और श्रम से मुक्त ! हम सब यमराज के मोस्ट वांटेड आत्माओं की लिस्ट में हैं ! हम सबने शरीर में अाने जाने का बोरिंग रास्ता त्याग कर स्वतंत्र रहने की अपनी राह चुनी है ! हमें कहीं पहुँचने की ज़ल्दी नही है ! मैं कौन हूँ हमारा सवाल नही है ! शक्ति, चेतना और क्षमता इन सबसे हमारा कोई लेना देना नही है ! हम लाभ हानि व्यापार शुभ अशुभ कुछ भी नहीं जानते ! स्थूल, सूक्ष्म कुछ भी नही ! जैसा होता है वैसा हम होने नही देते ! अपने ढर्रे की घिसी – पिटी राह पर चलती हुई शरीर के अंदर – बाहर, आती – जाती आत्माओं के साथ यमराज इतने व्यस्त हैं कि हम भटकती हुई आत्माओं को उन्होंने हमारे हाल पर ही छोड़ दिया है ! हम जानते हैं आत्मा को शस्त्र से काटा नहीं जा सकता, अग्नि उसे जला नहीं सकती, जल उसे गला नहीं सकता और वायु उसे सुखा नहीं सकती ! जिस प्रकार मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्याग कर नये वस्त्र धारण करता है, उसी प्रकार आत्मा पुराने शरीर को त्याग कर नवीन शरीर धारण करती है ! और हम ये भी जान गए हैं कि कोई रास्ता निश्चित नहीं है, आत्माएँ यात्रा पर तो हैं पर अात्माओं को कहीं पहुंचना नहीं है ! इसीलिए हमने भटकने की राह चुनी है और भटकती हुई आत्मा कहलाए हैं ! भटकती हुई आत्माओं को किसी से कोई उम्मीद नही होती ! भटकती हुई आत्माओं के अपने नियम हैं ! हम आत्मा के अंदर नहीं झाँकते ! हमें पता है वहां कुछ भी नहीं है ! आत्मा के अंदर झाँकना मनुष्यों के बीच सबसे प्रचलित मुहावरा है ! भला हो उसका जिसने ये मुहावरा गढ़ा ! इसकी वजह से शरीर पाप और पुण्य जैसी काल्पनिक ख्यालों में उलझ के अपनी जीवन यात्रा पूरी कर पाता है ! यमलोक में पाप पुण्य के नाम पर कई चुटकुलें हैं ! यमराज किसी भी मूड में हों पाप पुण्य शब्द सुन के मुस्कुराना नहीं भूलते ! यमलोक में सही गलत का भी यही हाल है ! यमराज ने अपने भैंस की दोनों सींग का नाम ‘सही’ और ‘गलत’ रखा है और यमराज के लिए सारे सही ग़लत सिर्फ भैंस के सींग हैं और कुछ नही ! हमें भटकते हुए देख कर यमराज हँसते हैं और हँसते हुए यमराज को हम भटकती हुई अात्माओं के साथ सेल्फ़ी लेने से कौन रोक सकता है ?

५.

हेडफोन के माध्यम से सबको खबर पहुँचा दी गयी ! जिनके पास हेड फ़ोन नहीं था उनको स्पीकर पर बता दिया गया ! जिनके कान पर जूँ तक नहीं रेंगा उन्हें स्क्रीन पर दिखा कर समझाया गया ! आँख के अंधों को झकझोर के बताया गया ! यमराज जानते हैं पहले सिर्फ आकाशवाणी से काम चल जाता था पर अब जितने कान उतने काम ! एक – एक जातक को कंटेंट के डिटेल्स दे दिए गए ! यमराज ने अपने हर सन्देश में बिलकुल साफ़ कर दिया है, राजनीति, धर्म या मानवीयता और प्रेम सब केवल ऑप्शन हैं ! मृत्यु जारी है और रहेगी ! आप चाहे जिस रास्ते चलें, जो चाहें पहने, खाएं, विचार करें, लड़ें, मानें या न मानें, उलझे रहें, या मुक्त हों लेकिन मृत्यु के वरण का कोई ऑप्शन नहीं है ! इसके लिए राजा और रंक, गोरे या काले, स्त्री या पुरुष, कोई भी जात – धर्म, किसी के पास कोई चॉइस नहीं दिया गया है ! इस सच में चित भी यमराज का और पट भी ! बस अपनी सेल्फी लेते रहें, क्लिक … क्लिक … क्लिक ! क्या पता किस पर हार चढ़े !

६.

साठ रोटी की एक मछली होती है और साठ मछली का एक घड़ियाल होता है ! चौबीस घड़ियाल का एक बन्दर होता है ! तीस बंदर का एक पेड़ ! बारह पेड़ का एक तालाब ! कई तालाब की एक उम्र होती है ! जितने तालाब उतनी उम्र ! अंत में सब पानी में मिल जाता है ! पृथ्वी पर सत्तर प्रतिशत पानी है और हम भी उतने ही पानी सेे बने हैं ! ये मेरा नया कलेंडर है ! सबको नया तालाब मुबारक हो ! यमराज हँसते – हँसते तालाब में नहाते हुए अपनी सेल्फी ले रहे थे !

क्रमशः

आत्म छवि कार्टूनिस्ट : अशोक अडेपाल

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दस हज़ार फ़ीट की ऊँचाई पर उड़ते हुए हवाई जहाज़ में बैठा वो रो रहा था ! खिड़की से बाहर देखते हुए बुदबुदा रहा था ! ” तैरते हुए बादलों में मैं तुम्हें मुक्त कर रहा हूँ ” बगल की सीट पर बैठा मैं बस इतना ही सुन पाया ! वो और भी बहुत कुछ बड़बड़ा रहा था और लगातार रो रहा था ! बहुत देर बाद वो शांत हुआ ! मैंने अपने बैग से निकाल कर उसे एक ऑरेंज दिया ! ऑरेंज के छीले और खाये जाने तक हम चुप रहे ! आकाश बैंगनी हो गया था ! रन वे पर हवाई जहाज़ के लैंड करने तक मुझे उसकी प्रेम कहानी समझ में आ गयी थी ! कहानी बहुत सिंपल थी ! वो भावुक था ! रिश्ता वर्चुअल था ! लड़की प्रैक्टिकल थी ! वर्चुअल प्रेम से ऊब कर किसी और मर्द के साथ शरीर के असली सुख के लिए चली गयी थी ! लड़के को प्रेम में धोखा मिला था और उसका दिल चूर चूर हो गया था ! लड़का अपनी भावनाओं में जी रहा था और लड़की सच में जी रही थी ! उसने डबडबाई आँखों से मुझे एक बार देखा और नज़रें झुका लीं ! ” मैंने उसे माफ़ कर दिया है ” कन्वेयर बेल्ट के पास से चलते हुए उसने मुझसे बस इतना कहा ! मेरा दिल भर आया ! उसकी आँखों में गज़ब की शिद्दत थी ! अपने अपने सच के साथ प्यार में सब सुंदर होते हैं ! वो जिसके प्रेम में क़ैद था, वो उसके गिरफ्त से बाहर चली गयी थी ! वो प्रेम की पीड़ा में मुक्ति की छटपटाहट के लिए तड़प रहा था ! सबके अपने रीजन होते हैं, उनके अपने रीज़न होंगे ! उसकी वेदना निजी थी ! काश वो जल्द से जल्द इस दुःख से निकल पाये ! वो जिस भीड़ में खो गया मुझे अपनी दुनियाँ उसी भीड़ से ढूंढ के निकालनी थी ! मुझे घर ले जाने के लिए मेरी पत्नी बाहर इंतज़ार कर रही थी ! एक पल के लिए मैं भी प्रेम के रहस्यमय संसार में खो गया था ! इस यात्रा के लिए मैं उस अंजान प्रेमी का आभारी था और उस अनदेखी अनजानी प्रेमिका का भी ! हम फिर कभी नहीं मिले … 

साइलेंट मोड में …

चेहरे पर कोई सेवन बना दे या ऐट बना के मेरा मन अनलॉक कर दे या जेड बना दे उँगलियों से और खोल दे मेरे सारे विंडो या एक बार मेरे चेहरे की स्क्रीन पर हाथ फेर के लॉक अनलॉक कर दे मुझे और यूँ ही पड़ा रहने दे साइलेंट मोड में …

प्रार्थना

उसके रिज्यूमे को पढ़ा जाए ! नौकरी की चिंता में जाग जाग के उसे अपनी रात न खराब करनी पड़े ! फ़िज़ूल की नेटवर्किंग से ईश्वर उसे बचा ले ! काम देने के बहाने उसके हर पोस्ट और प्रोफाइल को लाइक करने वालों से उसे झूठी मुस्कराहट के साथ चैट न करना पड़े ! नौकरी की तलाश में हर लड़की को तत्काल नौकरी मिले, ईश्वर से आज मेरी सुबह की यही प्रार्थना है !

हृदयनामा

1.

मैंने अपने ह्रदय का एक चक्कर काट के देख लिया है कुछ भी सही नहीं है ! रक्त चाप, धड़कन और ह्रदय की गति सब अपनी मर्ज़ी के मालिक हैं ! अपने ह्रदय के अलग अलग हिस्सों में मैं बिलकुल अलग अलग हूँ ! मेरा ह्रदय जब कमज़ोर होता है तो मैं घमंडी और अकड़ू हो जाता हूँ ! मेरा अहम फूल जाता है और मेरी आँखों को ढक लेता है ! अपने ही ह्रदय से बात करने के लिए मुझे अपने ह्रदय के दस चक्कर लगाने पड़ते हैं ! ह्रदय के आकार का ह्रदय पृथ्वी और आकाश के आकार का हो जाए तो बड़ा नहीं होता ! ह्रदय को बड़ा होने के लिए उसे ह्रदय के आकार का बने रह कर ही अपने अंदर पृथ्वी और आकाश जितना बड़ा होना पड़ता है ! ह्रदय को ह्रदय रखने के लिए मुझे अपनी किडनी, फेफड़े, छोटी बड़ी आँत, नाक, आँख, कान, चमड़ी, घुटने और अपने दुसरे सभी अंगों से मिल कर रहना पड़ता है ! पर मेरा ह्रदय कमज़ोर है और मैं अपने शरीर में ज्यादा रह नहीं पाता हूँ ! मेरे दिमाग के घोड़े मुझे अपनी बुद्धि के कोल्हू में बैल बना कर घुमाते रहते हैं ! मेरा ह्रदय कहीं का सम्राट नहीं है ! मैं अपने ही ह्रदय में बायीं तरफ से कोई और हूँ और दायीं तरफ से कोई और क्यों हूँ ? मैंने आज अपने ह्रदय में एक नकली कारखाना पकड़ा ! संदेह और शंका की फैक्ट्री क्या मेरा ह्रदय मुझसे पुछे बिना चला रहा था ? अपना ये डिफेक्टिव ह्रदय श्री राम जी के कदमो में रखने से डरता हूँ …

2.

हृदय से निकली आवाज़ को माइक्रोफ़ोन नही चाहिए और न ही कोई स्पीकर ! शब्द भी चाहें तो हृदय की अावाज़ को अकेला छोड़ सकते हैं ! हृदय की अावाज़ की अपनी भाषा है और अपनी फ्रिक्वेंसी ! हृदय की अावाज़ किसी मीडियम की भी मोहताज नहीं …

 

आलसी

फोन की घंटी बजने लगी, आलसी के दिमाग में शब्द घनघनाने लगे ! आलसी बोलने के लिए ‘हेलो’ शब्द चुने या ‘हाय’ ये सोचता ही रहा और फोन कट गया ! अब कौन मिस्ड कॉल में जाए और री – डायल करे ? आलसी ने आँखें मूंद लीं ! आलसी की नींद आलस्य त्याग के नाश्ते के टेबल पर जा बैठी है ! आज आलसी को लिखना है ! आलसी उठा, शब्दों को उठाया और खुद सो गया ! उनींदे शब्द पास रखे मोबाइल में घुस गए ! आलसी की मुसीबत बढ़ गयी ! आलसी अब जब भी शब्द ढूंढेगा उसे सेटिंग्स में जाना होगा, अंग्रेजी को हिंदी फॉण्ट में बदलना होगा, जो शब्द चाहिए उन्हें की – बटन पर टाइप करके निकालना होगा ! इससे अच्छा आज वो नहीं लिखेगा ! और बहुत जरुरत हुई तो कट पेस्ट से काम चला लेगा ! आलसी की प्रेमिका एक चुस्त लेखक से आँख लड़ा रही है इस दुःख ने आलसी को और भी आलसी बना दिया है …

डिअर डायरी

मेरी सात महीने पुरानी डायरी खो गयी है ! मेरी बातचीत और बहस से भरी मेरी निजी डायरी जिसके हर पन्ने में मेरे अक्षरों के निशान हैं ! मेरी डायरी के चेहरे पर मेरा नाम,पता फोन नंबर और ई -मेल आई डी सब है ! मेरी डायरी अगर किसी आम आदमी को मिली होती तो वो जरूर लौटा देता ! मुझे लगता है मेरी डायरी किसी लेखक के हाथ लग गयी है ! वो सब अनदेखा कर के उसे अब पढ़ रहा है और अपनी जेब में रखकर मेरी डायरी को शहर घुमा रहा है ! लेखक महोदय मेरी डायरी में तुम कुछ लिख नहीं पाओगे क्योंकि उसमे मैंने इतना कुछ लिख दिया है कि उसे पढ़ते हुए तुम अपना कुछ भी लिखना भूल जाओगे ! मेरे अक्षर तुम्हारे किसी काम नहीं आएंगे और तुमको वो डायरी बिना कुछ लिखे मुझे लौटा देनी चाहिए ! मेरी डायरी एक दिन तुम्हारे जेब से गिर जाएगी और कोई न कोई उसे मुझ तक पहुंचा देगा ! किसी और की डायरी को पढ़ने के गिल्ट से तुम कभी निकल नहीं पाओगे !
डिअर डायरी, तुम जहाँ भी हो खुश रहना ! तुम नहीं हो तो मेरे दिन,रात और साल महीने में अब कोई फर्क नहीं है …