आलसी

फोन की घंटी बजने लगी, आलसी के दिमाग में शब्द घनघनाने लगे ! आलसी बोलने के लिए ‘हेलो’ शब्द चुने या ‘हाय’ ये सोचता ही रहा और फोन कट गया ! अब कौन मिस्ड कॉल में जाए और री – डायल करे ? आलसी ने आँखें मूंद लीं ! आलसी की नींद आलस्य त्याग के नाश्ते के टेबल पर जा बैठी है ! आज आलसी को लिखना है ! आलसी उठा, शब्दों को उठाया और खुद सो गया ! उनींदे शब्द पास रखे मोबाइल में घुस गए ! आलसी की मुसीबत बढ़ गयी ! आलसी अब जब भी शब्द ढूंढेगा उसे सेटिंग्स में जाना होगा, अंग्रेजी को हिंदी फॉण्ट में बदलना होगा, जो शब्द चाहिए उन्हें की – बटन पर टाइप करके निकालना होगा ! इससे अच्छा आज वो नहीं लिखेगा ! और बहुत जरुरत हुई तो कट पेस्ट से काम चला लेगा ! आलसी की प्रेमिका एक चुस्त लेखक से आँख लड़ा रही है इस दुःख ने आलसी को और भी आलसी बना दिया है …

डिअर डायरी

मेरी सात महीने पुरानी डायरी खो गयी है ! मेरी बातचीत और बहस से भरी मेरी निजी डायरी जिसके हर पन्ने में मेरे अक्षरों के निशान हैं ! मेरी डायरी के चेहरे पर मेरा नाम,पता फोन नंबर और ई -मेल आई डी सब है ! मेरी डायरी अगर किसी आम आदमी को मिली होती तो वो जरूर लौटा देता ! मुझे लगता है मेरी डायरी किसी लेखक के हाथ लग गयी है ! वो सब अनदेखा कर के उसे अब पढ़ रहा है और अपनी जेब में रखकर मेरी डायरी को शहर घुमा रहा है ! लेखक महोदय मेरी डायरी में तुम कुछ लिख नहीं पाओगे क्योंकि उसमे मैंने इतना कुछ लिख दिया है कि उसे पढ़ते हुए तुम अपना कुछ भी लिखना भूल जाओगे ! मेरे अक्षर तुम्हारे किसी काम नहीं आएंगे और तुमको वो डायरी बिना कुछ लिखे मुझे लौटा देनी चाहिए ! मेरी डायरी एक दिन तुम्हारे जेब से गिर जाएगी और कोई न कोई उसे मुझ तक पहुंचा देगा ! किसी और की डायरी को पढ़ने के गिल्ट से तुम कभी निकल नहीं पाओगे !
डिअर डायरी, तुम जहाँ भी हो खुश रहना ! तुम नहीं हो तो मेरे दिन,रात और साल महीने में अब कोई फर्क नहीं है …

सलीब पर कोई टँगा है

मैं देख रहा था सलीब पर कोई टँगा है जिसके दुःख की कोई सीमा नहीं है ! उसके दोनों खुले हाथों को और उसके दोनों पाँव को समेट कर सलीब पर लोहे के मोटे – मोटे कील से ठोक दिया गया है ! आसूँ और खून से सलीब सना हुआ है ! दर्द से आँखें पथरा गयी हैं ! छलनी बदन से खून टपकना भी बंद हो चूका है ! पर ह्रदय अपार करुणा और प्यार से भर गया है ! उसने सबको माफ़ कर दिया है …

रीसायकल नींद

नींद टूट गयी ! टूटी हुई नींद किसी के काम नहीं आती ! लोग उठने से पहले टूटी हुई नींद को एक बार जोड़ने की कोशिश जरूर करते हैं ! पर हार के कभी तकिये के पास या पलंग के नीचे छोड़ के उसे भूल जाते हैं ! बिस्तर झाड़ते हुए या कमरे की सफाई करते हुए फिर कभी उनकी तरफ कोई नहीं देखता ! हफ़्तों और महीनों की टूटी हुई नींद पड़े पड़े अपने आप हवा में घुल जाती हैं और धीरे धीरे किसी की नयी नींद से जुड़ जाती हैं …

दिन का सपना, रात का समाचार

( एक )

मैंने अभी अभी सपने में एक दृश्य देखा कि कन्हैया अपनी जीभ निकाल कर सेल्फ़ी ले रहा है ! ‘कन्हैया’ एकदम ‘काली’ लग रहा था …

( दो )

मैंने अभी अभी सपने में एक दृश्य देखा कि देश में सब लोग अपनी अपनी जीभ निकाल कर सेल्फ़ी ले रहे हैं और सबकी जीभ के रेट अलग हैं …

( तीन )

मैंने अभी अभी सपने में एक दृश्य देखा कि सब लोग एक दुसरे से जीभ लड़ा रहे हैं और जीभ जीभ को हरा रही है …

( चार )

मैंने अभी अभी सपने में एक दृश्य देखा कि सब लोग एक जीभ बन गए हैं और एक दुसरे को चाट चाट कर खरीद बेच रहे हैं …

हैप्पी बर्थडे डिअर प्रेमचंद ,हैप्पी बर्थडे टू यू …

ज्यों-ज्यों अँधेरा बढ़ता गया और सितारों की चमक तेज होती गई, मधुशाला की रौनक भी बढ़ती जा रही थी ! कोई गा रहा था, कोई डींग मार रहा था, कोई अपने संगी के गले लिपटा जा रहा था ! कोई अपने दोस्त के मुँह में ग्लास लगाये दे रहा था ! वातावरण में सरूर था, हवा में नशा ! कितने तो यहाँ आकर एक चुल्लू में मस्त हो जाते थे ! शराब से ज्यादा यहाँ की हवा उन पर नशा करती थी ! जीवन की बाधाएँ उन्हें यहाँ खींच लाती थीं और कुछ देर के लिए यह भूल जाते थे कि वे जीते हैं या मरते हैं ! या न जीते हैं, न मरते हैं ! दोनों बाप – बेटे भी मजे ले – लेकर चुसकियाँ ले रहे थे ! पियक्कड़ों की आँखें इनकी ओर लगी हुई थी ! दोनों कितने भाग्य के बली हैं ! पूरी बोतल बीच में है ! घीसू और माधव नाच रहे थे ! उछल रहे थे, कूद रहे थे ! गिर रहे थे, मटक रहे थे ! नशे में भाव बना रहे थे और अभिनय कर रहे थे ! प्रसव वेदना में मरी औरत के कफ़न के लिए मिले रुपयों से मौज उड़ाने के लिए बाप – बेटे को शराबखाने में पहुँचाने वाला, दोनों पात्रों को रचने – गढ़ने वाला, आज ही जन्मा था ! मधुशाला में घीसू और माधव नशे में मदमस्त होकर टेबल पर चढ़ कर खड़े हो गए और गाने लगे – हैप्पी बर्थडे टू यू … हैप्पी बर्थडे टू यू … हैप्पी बर्थडे डिअर प्रेमचंद ,हैप्पी बर्थडे टू यू … 

काला हास्य सूँ – सूँ, कूँ – कूँ

रेडिओ दिवस पर
देश में आज
हर फ्रीक्वेंसी में
सूँ – सूँ, कूँ – कूँ क्यों है

जे एन यू टूँ उऊऊँ – टूँ उऊऊँ
कश्मीर किर्र किर्र किर्र किर्र
राजनीति टी – ईईईई टी – ईईईई
नेता टाआआ – टाआआ टीईईईई
टीईईईई – टीईईईई
टूँ उऊऊँ – टूँ उऊऊँ
सूँ – सूँ, कूँ – कूँ

हर फ्रीक्वेंसी में
सूँ – सूँ, कूँ – कूँ क्यों है

आज रेडियो तरंग
में इतने रंग क्यों है
हर फ्रीक्वेंसी में
सूँ – सूँ, कूँ – कूँ क्यों है

शासन सन सन सुउउउउउ
कानून टूँ टूँ टूँ टूँ टूँ टूँ
बहुमत खट्ट खट्ट खट्ट खट्ट
देशभक्ति टी – ईईईई टी – ईईईई
टीईईईई – टीईईईई
टूँ उऊऊँ – टूँ उऊऊँ
सूँ – सूँ, कूँ – कूँ

हर फ्रीक्वेंसी में
सूँ – सूँ, कूँ – कूँ क्यों है

रेडियो के पास
आज की रात
क्यों नहीं है
मेरे मन की बात ?

हाहाकार

सुनो पुरुष, योनि का कोई पिछला दरवाज़ा नहीं होता ! तुम स्त्री से आँख मिलाने अगर उसके सामने नहीं आ सकते तो जा के अपने लिंग में अपना मुंह छुपा लो ! अपने पथरीले काले ह्रदय को अगर उसके लाल सिन्दूर से ढंकना चाहते हो तो याद रखो स्त्री के पांच दिन का बहता हुआ रक्त स्त्राव तुम्हे नंगा कर के बहा देगा ! शनि के पत्थर पर तेल चढ़ा कर तुम स्त्री को शनि से दूर नहीं रख सकते ! फेंका हुआ तेल तुम्हे पवित्र नहीं रख सकता ! स्त्री का ह्रदय स्त्री की बपौती है तुम्हारी माँ की आँख नहीं ..

स्त्री देह का स्वगत

‘प्रेम मार्ग’ पर सिर्फ मेरे देह का घर नहीं और दूसरी इमारतें भी हैं ! मैं एक स्त्री हूँ ! मेरा शरीर आपके पर्यटन का अगर मुख्य केंद्र है तो मेरे देह नगर में आप का स्वागत है ! पर मेरे चेहरे का हेरिटेज वॉक करने वालों से मेरी विनती है कि पहले मेरी इस मार्ग दर्शिका को पढ़ लें !

मानती हूँ मेरा शरीर आप के लिए एक आकर्षक पर्यटन स्थल है और इसे आप वैसे ही गन्दा कर देते हैं जैसे खजुराहो को कर रहे हैं ! आपके अपने अंधकार से निकला प्रकाश और ध्वनि का कार्यक्रम आप मेरी छाती और कंठ से उठा लीजिये मेरा दम घुटता है ! मैं अपनी ख़ुशी के लिए सजती हूँ आपकी कामुकता के लिए नहीं !

मेरे ‘आँख घाट’ से ‘नाक स्मारक’ तक जब आप चलते हैं तो क्या आपको धू धू करती हुई बचपन से अब तक की क़ैद कर ली गई मेरी सारी तितलियाँ जलती हुई नहीं दिखतीं ?
मेरे ‘स्तन घाट’ में क्या आपको मेरी पाबन्दी के मुर्दे अरमानों का मरघट नहीं दिखता ?
आप जो गुलाल मेरे ‘कान फाटक’ से ‘गाल चौक’ तक मलना चाहते हैं क्या वहां मेरी सूखे आंसुओं की गोंद आपकी उँगलियों में नहीं चिपकतीं ?

मेरे शरीर से एक सही रास्ता भी निकलता है जिस पर दुर्भाग्य से आप कभी चल नहीं पाते ! ये रास्ता आपको अपने घर ले जायेगा जहाँ आपकी माँ ऐसी ही शरीर के साथ आपका इंतज़ार कर रही है जिससे आपका जन्म हुआ है ! जिस रास्ते पर चल कर आप अपनी बहन तक पहुँच सकते हैं जो आपको आप से ज्यादा प्यार करती है ! इसी रास्ते पर आपकी प्रेमिका है जो आप जैसे ही पर्यटकों से लड़ रही है ! इसी रास्ते पर आपकी पत्नी है जो आप से मदद के लिए आप को ढूंढ रही है ! पर मेरे शरीर में आप को वो रास्ता कभी नहीं दिखेगा ! मेरी आत्मा पर आपकी गीली नज़र से हुआ फंगल इंफेक्‍शन धीरे धीरे फैलता हुआ मेरे अस्तित्व को खतरे में डाल रहा है !  मेरे उभार निर्जीव पत्थर के नहीं हैं ! मेरे अंतर्वस्त्र में वही हाड़ मांस से बना शरीर है जिससे आपका शरीर निर्मित है ! मेरे अंगों और कपड़ों को घूरने की अगर आपको बीमारी है तो अपनी आँखों पर ब्रा बाँध कर और मुंह पर पैन्टी पहन कर देखिये शायद कुछ आराम मिले ! आप अपने उस पुरुष शरीर को कितना जानते हैं जो हर वक़्त स्त्री के चेहरे का हेरिटेज वॉक करने को तैयार रहता है ? अपनी वासनाओं के कोलाहल में आप मेरे भीतर का मौन फिर क्या सुन पाएंगे ? आप जैसे आतुर और छिछोरे पर्यटक ताज महल पर भी गन्दगी ही फैलाते हैं ! आप की व्याकुल हरकतें आपको मेरे मल – द्वार का प्रहरी भी नहीं बना पायेगी ! दोनों स्तन, पीठ और पेट, नितम्ब, दोनों जांघें और दोनों पिण्डलियॉं पर रखे कपडे के ऊपर भी दुपट्टा डालने के लिए मुझे मजबूर मत कीजिये ! मज़बूरी में स्त्री के बदन पर हर कपडा कफ़न हो जाता है ! आपके मन में मेरे शरीर को लेकर जो जुगुप्सा और तरह-तरह की कुंठाएं मौजूद है पहले आप उनका निवारण कर लीजिये ! आत्मरति के पर्यटन से न आपकी भूख शांत होती है न मेरी कोई कमी पूरी होती है ! मुझे जानने से पहले आप मुझे रौंदने की योजना क्यों बना लेते हैं ? मेहरबानी होगी अगर आप मुझे अपने हाल पर छोड़ देंगे ! मुझे धीरे धीरे खंडहर हो जाने दीजिये ! वैज्ञानिक, इतिहासकार, पुरातत्ववेत्ताओं, भूगर्भ विशेषज्ञों, लेखक, कवि शायर एवं जिज्ञासु पर्यटकों के क़दम इन स्थानों में पड़ते रहे हैं, अगर आप नयन सुख के शिकारी हैं तो मेरे पुण्य स्थान का तीर्थ आपके भाग्य में नहीं है ! आप आगे बढ़िए ! आपके कलुषित दृष्टि – वीर्य को मैं अपने मासिक महावारी में बहाते बहाते थक जाती हूँ ! मेरा शरीर आपके पर्यटन का अगर मुख्य केंद्र है तो आपको ये पता होना चाहिए ये पर्यटन हर धर्म में वर्जित है ! मेरे चेहरे का हेरिटेज वॉक करने से पहले आप अपनी पीठ पीछे छोड़ आये शमशान और कब्रिस्तान का सैर कर लीजिये, क्या पता आँखों से मेरा बलात्कार करने से पहले आपकी आँखें खुल जाएँ !

अथ सेल्फी कथा… / फोटोफिलॉसॉफी‬

फोटो में जा के कोई लौट आया हो ऐसा पहले कभी नहीं हुआ ! कई महीने लापता रहने के बाद मेरी मुलाकात एक ऐसे व्यक्तित्व से हुई जो फोटो में रहकर लौटने का दावा कर रहा है …

आप इतने दिन कहाँ रहे ?
फोटो में था !
फोटो में तो कभी दिखे नहीं ?
सेल्फ़ी में नहीं गया, इसीलिए बचा रहा ! फोटो में रहना है तो सेल्फ़ी से बचिए !
इतने दिन आप फोटो में ही रहे ?
हाँ ! आप मेरा भरोसा क्यों नहीं कर रहे हैं ? मैं अकेला नहीं था वहां ! लाखों लोग फोटो में रहते हैं !
आप खाते क्या थे ?
फोटो में बहुत खाना है ! आपने खाने का फोटो नहीं देखा है ?
आप सोते कहाँ थे ?
फोटो में नींद नहीं आती है ! देखिये आप दुनिया की बात कर रहे हैं ! मैं फोटो की बात कर रहा हूँ … फोटो की दुनिया अलग है !
आप लौटे क्यों ?
बहुत सारे फोटो यहाँ खराब हो रहे हैं ! मैं उनको वापस ले जाने आया हूँ, फोटो की दुनिया में ही फोटो सुरक्षित हैं !
सेल्फ़ी से क्या शिकायत है आपको ?
सेल्फ़ी अहंकार से बनता है, फोटो विनम्रता से ! सेल्फ़ी एक भ्रम है ! सेल्फ़ी फोटो का इस्तेमाल कर के भ्रम फैला रहा है ! सेल्फ़ी कभी फ्रेम में नहीं रह सकते गौर से देखिये जातक का एक हाथ फ्रेम में नहीं दिखेगा ! गर्भ – नाल की तरह एक हाथ या छड़ी सेल्फ़ी से जुडी रहती है ! फोटो इस बात की इजाजत नहीं देता कि कुछ फ्रेम से बाहर रह जाए ! जो फ्रेम से बाहर छूट जाता है वो फोटो में नहीं होता ! फोटो में रहने के लिए आपको फ्रेम में रहना होगा !
सेल्फ़ी के लिए आपका क्या संदेश है ?
सेल्फ़ी को हाथ ले डूबेगा ! जहाँ जहाँ हाथ जायेगा सेल्फ़ी ले आएगा ! सेल्फ़ी दुर्दशा से दुनिया को फोटो ही बचाएगा !
अपने बारे में और बताइए ?
फोटो फ्रेम से कभी बाहर नहीं जाता ! और क्या कहूँ ?
‘ मैं कौन हूँ ‘ ये सवाल जब आपके मन में आता है तो आप क्या जवाब देते हैं ?
मैं फोटो हूँ ! केवल फोटो और कोई नहीं !
आप किसके फोटो हैं ?
मैं अपना फोटो हूँ ! फोटो की दुनिया में भ्रम और द्वन्द नहीं है ! अगर आप फ्रेम में हैं तो फिर कहीं रहें या न रहें फोटो में सदा के लिए रहते हैं !
फोटो में रह कर आप को इस दुनिया की याद नहीं आयी ?
दुनिया तो फोटो में ही है ! हर व्यक्ति का फोटो है ! हर स्थान का फोटो है ! दुनिया लगातार फोटो बनने का सपना देख रही है ! लगातार फोटो खिंचा जा रहा है इस दुनिया में सब फोटो होना चाह रहे हैं !
फोटोग्राफर और फोटो का क्या सम्बन्ध है ?
फोटो हर फोटोग्राफर का लक्ष्य है !
फोटो से पहले क्या अस्तित्व होता है हमारा ?
फोटो से पहले सब हैंडराइटिंग होते हैं ! फिर जो सोचते हैं उसके फोटो हो जाते हैं !
आप की बातों से लगता है फोटो पर दुनिया टिकी है ?
दुनिया प्रेम के बल पर टिकी है और प्रेम सिर्फ फोटो के बल पर टिका है ! प्रेम से आप फोटो निकाल लें तो खाली फ्रेम बचेगा !
सब फोटो ही है तो दुनिया में विचार क्यों हैं ?
विचार से सहमत हों न हों फोटो से सब होते हैं !
फोटो से छेड़ – छाड़ होने की बात सुनने में आई है ! आप का क्या विचार है ?
हम सबको फोटो सीमा में रहना जरुरी है ! फ्रेम से निकलेंगे तो अश्लील हो जायेंगे !
फोटो क्यों जरुरी है ?
फोटो नहीं तो आप कहाँ ?
आप फोटो के पार कुछ नहीं देखते ?
आप राजनीती की बात कर रहे हैं और मैं फोटो की बात कर रहा हूँ ! गोल दुनिया गोलाई में फँसी है ! त्रिकोण में प्रेम फंसा है ! चौकौर खाने में हमारा अस्तित्व है ! फोटो के बिना आप चौकौर अकार के रिक्त स्थान हैं !
मतलब ?
अगर फोटो नहीं है तो आप का परिचय रिक्त है ! फोटो से ही फ्रेंड बनते हैं, प्रेमी बनते हैं, देश – भक्त बनते हैं, नागरिक बनते हैं ! फोटो युग में फोटो ही सबसे बड़ा योग है ! हर समस्या का हल फोटो है ! अब सारे कर्मों का फल फोटो में ही है …! व्यापार, विज्ञान, कला एवं मनोरंजन आदि में फोटो से ही अध्ययन हो पा रहा है ! हर समस्या का हल फोटो है ! हमें बहुत काम करना है ! कितना सारा स्पेस है जिसे हमें भरना है …

फोटो फिलॉसॉफी के बीच से अचानक फोटो महाशय उठ कर चल दिए ! फोटो का फोटो लेने कुछ फोटो आ गए और बीच बीच में फोटो के साथ सेल्फ़ी लेने लगे ! इंटरव्यू बाकी है ! फोटो सेशन के बाद फोटो लौटने वाला है ! फोटो से आप के कुछ सवाल हैं तो कहिये …