चुनाव के बाद

चुनाव के बाद वही होता है जो व्यंग्य पढ़ने – सुनने के बाद होता है, लोग हँसते हैं ! अच्छा व्यंग्य पढ़ने के बाद जैसी गुदगुदी होती है वैसे ही गुदगुदी वाली फीलिंग पता नहीं क्यों चुनाव के बाद भी होती है ! चुनाव के बाद सब धृतराष्ट्र बन जाते हैं और ‘चुनाव के बाद क्या हुआ’ सब संजय से जानना चाहते हैं ! चुनाव के बाद मॉडर्न महाभारत का संजय टेलीविज़न बन जाता है ! चुनाव के बाद रिजल्ट आने तक सब टी – वी देखते हैं ! धृतराष्ट्र की तरह वोट देने वाले नागरिकों को चुनाव के बाद क्या – क्या होगा सब पता होता है, पर टेलीविज़न के सामने सब चुप रहते हैं !

चुनाव के बाद खिचड़ी पकती है ! चुनाव के बाद सबकी दाल गलती है ! सुबह का भूला चुनाव के बाद घर लौट आता है ! चुनाव के बाद अनुलोम, विलोम हो जाता है ! चुनाव के बाद सब पात ढाक के हो जाते हैं ! चुनाव के बाद कुछ अंगूर खट्टे हो जाते हैं ! चुनाव ख़त्म होते ही राजनीती शुरू हो जाती है !

चुनाव के बाद पाकिस्तान फिर से दुश्मन हो जाता है ! चुनाव के बाद फौजी कश्मीर लौट जाते हैं ! चुनाव के बाद कवि जुलाहा हो जाता है ! चुनाव के बाद शायर कुम्हार हो जाता है ! चुनाव के बाद सबकी जात छोटी हो जाती है ! चुनाव के बाद गधे बाप बन जाते हैं !

चुनाव के बाद कमल झंडे से निकल कर कीचड़ में लौट जाता है ! चुनाव के बाद झाड़ू टोपी से निकल कर डंडे में लग जाता है ! चुनाव के बाद साइकिल पंचर हो जाती है ! चुनाव के बाद चुनाव चिन्ह अपनी दुनिया में लौट जाते हैं !

चुनाव के बाद डाटा का सॉफ्टवेयर बन जाता है ! चुनाव के बाद हर काम में प्रमाण पत्र की जरुरत पड़ती है ! चुनाव के बाद हम सबसे सहयोग की आशा करते हैं !

चुनाव के बाद फिर से शपथ ग्रहण होता है ! चुनाव के बाद कुर्सी बंटती है ! चुनाव के बाद कुर्सी का तौलिया बदल जाता है ! चुनाव के बाद बेरोज़गार के पाँव भारी हो जाते हैं !

चुनाव के बाद हिन्दू मुसलमान एक हो जाते हैं ! चुनाव के बाद मद्य – निषेध अभियान का अंत हो जाता है ! चुनाव के बाद रामचन्द्र जी फिर से वनवास को चले जाते हैं !

चुनाव के बाद पुरस्कार बँटते है ! चुनाव के बाद गर्मी छुट्टी हो जाती है ! चुनाव के बाद बच्चे बड़े हो जाते हैं ! चुनाव के बाद फिल्मों में नयी हीरोइन आ जाती है !

चुनाव के बाद चुनाव में हारा प्रत्याशी फिर से कुँवारा हो जाता है ! चुनाव के बाद साहित्य का चीरहरण हो जाता है ! चुनाव के बाद व्यंग्य की लाज रख ली जाती है ! चुनाव के बाद अगली चुनाव की तैयारी शुरू हो जाती है !

संजय उवाच – चुनाव से पहले और किस्मत से ज्यादा न किसी को कुछ मिला है न मिलेगा !