ट्रिविया दास

रेप हुआ तो रेपिस्ट से मिल लिए / फिल्म बनी तो आर्टिस्ट से मिल लिए / गीत बना तो सिंगर से मिल लिए / जिधर भीड़ देखी चल दिए / कोई फोटो नहीं जिससे नहीं मिले / किसी ने कुछ पकाया तो उसे डिश बना के मिल गए / अजनबियों को फ्रेंडशिप बता के निकल गए / शेर को अपना बना लिया / सियार की पीठ ठोक दी / जैसे ही आप मुड़े, हँस के अपनी ही सेल्फी ले ली / वाह रे सोशल जमाना ! यहाँ पहुँचा, फोटो देखिये ! ये खाया, फोटो देखिये ! ये मेरे बगल में खड़े थे, फोटो देखिये ! फोटो के एक फ्रेम में सिमट के रह गया है जीवन अनुभव का विस्तार ! ये ट्रिविया काल है ! सब ट्रिवियल बाते करते हैं ! न पढ़ते हैं, न सुनते हैं, न सोचते हैं, बस टी वी देखते हैं और ट्रीवयल जीते हैं ! एक फोटो फ्रेम में सबका अनुभव संसार समा गया है ! विस्तृत कुछ भी नहीं ! मैं कई ट्रिविया विशेषज्ञ को जानता हूँ जो पचास शब्द में दस लोगों को टैग करते हैं ! ट्रिविया ने सबको अपना दास बना लिया है ! जो हर व्यक्ति, जगह, किताब, फिल्म, कला, संगीत और हर रचना के जादू में एक टूरिस्ट की तरह घुस जाते हैं, अपने पसंद का रायता फैलाते हैं और फोटो खिंचा के निकल जाते हैं ! ऐसे मिस्टर ट्रिविया दास को समर्पित मेरी कुछ ट्रिवियल कविता

ट्रिविया ( एक )

जब थी / मैं था
मेरी / मेरे
कल शाम की बात है /
ये थे, वो थे /
ओह ! मैं भी !

*

ट्रिविया ( दो )

वैसे मैं पिछले बीस-बाइस सालों से उन्हें जानता हूं …
पहली पंक्ति /

कुछ साल पहले उनसे मिला …
इनसे मिला,
उनसे मिला,
गले,
हार …
फोटो !

मैंने कहा कि …
फोटो !
पिछले हफ्ते …
फोटो !
उनका संदेश आया कि …
फोटो !

सुबह …
फोटो !
दोपहर …
फोटो !
शाम …
फोटो !
रात्रि …
फोटो !
मेरे हाथ में …
फोटो !
शुक्रिया ये जी /
शुक्रिया वो जी,
यूं बोले …
मैं बोला
फिर वो बोले,
हम अबोले –
सब पढ़ते हैं !
*

ट्रिविया ( तीन )

ये जी
वो जी
जब ये …
जब वो …
तब से हम /

छह साल पहले
दो दिन पहले
परसों
कल
सब ट्रीवीअल !
*

ट्रिविया ( चार )

बरसों पहले
एक चिट्ठी लिखी
कल छपी
आज सुबह
बहरहाल,
मैं पास में खड़ा हूं !
*

ट्रिविया ( पाँच )

हमारे प्यारे दोस्त
निशांत
विक्रान्त
सूर्यकान्त
सिद्धान्त

मौका मिला
इनके साथ
उनके साथ
सब मैं किया !

सन ’97 अगस्त महीने में,
लगभग साल भर
दोपहर में लंच से पहले …
मैं उन्हें !
मैं,
मैं,
मैं !
छोटे फाॅन्ट में
उनका नाम
बड़े फॉण्ट में मेरा नाम !

मुझे यक़ीन नहीं हुआ,
मुझे मालूम नहीं था …
मैंने सोचा
मुझे लगा
पिछले कुछ सालों से
बीती रात की …

धन्यवाद !
फलाँ बाबु
करीब दो साल पहले …
हम बहुत कम मिले …
लेकिन जब भी मिले …
मेरा / उससे
अफ़सोस … !

और अंत में –
वो होते तो आपको जरूर टैग करते /
मैंने किया …
आपने किया ?

केवल चापाकल,
सब ट्रिवियल !