भीड़ की बरसात

भीड़ और बरसात में मुझे समानता दिखती है ! भीड़ शब्द का उपयोग ऐसे स्थान पर किया जाता है, जहाँ मनुष्य का कोई समूह हो ! जहाँ लोग बिना किसी पंक्ति के यहाँ – वहाँ एकत्रित हो जाते हैं ! बरसात में पानी के बूंदों का भी यही हाल होता है ! बादलों को चीर कर पानी की बूँदें भीड़ की तरह समूह में धरती पर बरस पड़ती हैं और यहाँ – वहाँ एकत्रित हो जाती हैं ! मुख्यतः हम भीड़ को हमेशा कंट्रोल कर मार्ग को सामान्य बनाने की कोशिश करते रहते हैं ! बरसात के पानी के साथ भी यही किया जाता है ! भारत में बरसात कृषि, नदी व्यवस्था, जल भंडार और वनस्पतियों और जीवों के उत्थान के लिए बहुत महत्वपूर्ण है ! देश की राजनीती में सत्ता के उत्थान के लिए भीड़ भी उतनी ही जरुरी है ! बरसात भारत का वित्त मंत्री है ! भीड़ भारत का कानून मंत्री है ! बरसात देश के सकल घरेलू उत्पाद को प्रभावित करता है ! भीड़ भी यही करती है ! मेरा मानना है कि पानी की तरह भीड़ का भी संचय और उपयोग हो सकता है ! राष्ट्रीय राजनीति में जबसे भीड़ की बरसात होने लगी है प्राकृतिक बरसात की पहले जैसी हैसियत नहीं रही ! भीड़ की बरसात के माध्यम से राजनितिक मौसम समाज को उसका असली चेहरा दिखा देता है !

आज भीड़ की बरसात के अनगिनत सब्सक्राइबर्स, फॉलोवर्स और व्यूअर्स हैं ! सभी अखबारों की हेडलाइंस और न्यूज चैनलों की सुर्खियों में शुमार ‘भीड़ की बरसात’ सोशल मीडिया पर भी हर मौसम में ट्रेंड करने लगा है ! अपने मजेदार गंवई अंदाज, दिलचस्प चाल – ढाल और बेलगाम ठसक के कारण भीड़ कई नेताओं और अभिनेत्रियों से भी ज्यादा पहचाना जाता है ! बरसात शब्द सुनने में जितना रोमांटिक है, देखने में भीड़ की बरसात भी मिडिया में उतनी ही बढ़िया और रिफ्रेशिंग होती है !

एक ऐसी ही भीड़ की बरसात के मौसम में चार पैर, एक लंबी पूंछ, दो सींग, दो कान, दो आंख, एक बड़ी नाक, बड़ा मुँह और एक सिर वाले जानवर को पशु – मेले से लेकर मैं अपने घर के लिए निकल पड़ा ! सोशल मिडिया का जमाना है इसलिए जानवर का नाम नहीं बताऊंगा !

जानवर के साथ मुझे देखने बारिश के बूंदों की तरह लोग आने लगे ! भीड़ का स्टॉल लग चूका था ! लोग टप – टप टपकने लगे ! कुछ जींस-टी शर्ट में थे और कुछ पैंट क़मीज़ पहने हुए थे ! धीरे धीरे लोग पानी की तरह जमा हो कर भीड़ का हिस्सा बनने लगे ! भीड़ की बरसात की अनुमानित तिथि नहीं होती ! इसके बादल सोशल मिडिया पर बनते हैं ! सबकुछ ‘इट डिपेंडस’ पर निर्भर करता है ! भीड़ के मैकेनिज्म की खोज इलेक्ट्रॉनों, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की खोज जैसी जटिल है और सामाजिक वैज्ञानिक इस पर काम कर रहे हैं ! भीड़ की डिजिटल और डेटा हिस्ट्री तैयार हो रही है !

सड़क पर जानवर के साथ अब भीड़ भी मेरे साथ चल रही थी ! मेरे एक तरफ जानवर था और एक तरफ भीड़ ! मैं भीड़ और जानवर के बीच में था ! भीड़ मेरे साथ चल रहे बड़े जानवर को पहचानती थी ! मैंने देखा जानवर के चेहरे पर हारे हुए आदमी सा भाव है जो जीवित है किंतु सामाजिक रूप से मरा हुआ है ! मुझे लगा मैं अपनी पूँजी को नहीं आइना देख रहा हूँ !

यह मवेशी जानवर रूप में मेरी पूंजी थी ! हम दोनों में सामाजिक समझौता था ! अपने जीवन में हम दोनों एक दूसरे के काम आने वाले थे ! मुझे लगा जानवर मुझसे कह रही है कि वो घडी आ गयी है जब हम एक दुसरे के काम आने वाले हैं ! मैंने अपनी पूंजी की रास और जोर से अपनी मुठ्ठी में भींच ली ! ‘जीते जी मेरी मुठ्ठी से कोई माई का लाल मेरी पूंजी नहीं छीन सकता ! मैं भारत का नागरिक हूँ ! ‘ मैं बुदबुदाया ! मुझे लगा मवेशी मुझे तनाव में देख कर मुझ पर हंस रही है !

घबराकर मैं चुप हो गया था पर घबराहट में मेरे साथ का जानवर बोलने लगा ! लोग दंग रह गए !

भीड़ जानवर की बातें सुनने के लिए बढ़ने लगी ! ‘ आप कौन लोग हैं ? और आप के एकत्र होने का उदेश्य क्या है ? ‘ जानवर ने भीड़ से पुछा !
‘ हम बेरोज़गार और बिलकुल निठ्ठले हैं ! मोबाइल रिचार्ज करने के लिए इधर उधर मारे – मारे भटक रहे हैं ! ‘ भीड़ ने कोरस में कहा ! ‘ फिर ठीक है ‘ जानवर ने कहा ! ‘ भीड़ हंसने लगी !

इस तरह किसी जानवर ने अब तक भीड़ से बातें नहीं कीं थीं ! फिर कुछ समय के लिए खामोशी छा गई ! बोलते हुए जानवर का वीडियो सेंट और शेयर होने लगा ! सेंट – शेयर के क्लिक – क्लिक से लाइक – लाइक भीड़ बढ़ने लगी ! सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म्स कड़कने लगे ! लोल से लोल टकराने लगे ! भीड़ को कुछ चटपटा चाहिए था ! जानवर सब समझ गया ! जानवर जानता था कि भीड़ में से कई लोग अनपढ़ और साधारण मनुष्य हैं ! उनके दिलों तक पहुँचने के लिए उसने उसी ‘मोबाइली’ भाषा का इस्तेमाल किया जिसे भीड़ समझ सकती थी !

भीड़ एक ऐसे क्लोज़्ड ग्रुप को कहते है जहाँ इसका पता लगा पाना मुश्किल हो जाता है कि कौन, कौन है और कहाँ से आया हैं ! भीड़ में औरतें कम होती हैं ! औरतों को चूल्हा – चौका करना पड़ता है ताकि बच्चों के जगने के पहले खाने का इंतजाम हो सके और वो भीड़ बन सकें !

भीड़ सीधी – सादी  परिश्रमी और ईमानदार होती है ! जो भीड़ को कॉम्प्लिकेटेड मानते हैं वो अपने आप को कम पहचानते हैं ! पानी की तरह भीड़ बहुत सरल होती है ! भीड़ सब देखना और जानना चाहती है ! सबकुछ अपने मोबाईल में रिकॉर्ड करना चाहती है ! भीड़ ने मेरी मानसिक अवस्था की तस्वीरें मोबाइल से अनगिनत दिशाओं में तरंगित कर दीं ! बोलते हुए जानवर को देखने धीरे – धीरे बरसात का जल और भीड़ की संख्या दोनों बढ़ने लगीं ! आपसी भाईचारा हमारी परंपरा का हिस्सा रहा है जो अब भीड़ के काम आ रही है ! हिंद देश के निवासी भीड़ में सब जन एक थे ! बढ़ती हुई भीड़ का शोर धीरे – धीरे हमारे क़रीब आता जा रहा था ! आवाज़ें तेज़ होने लगीं ! मैं और जानवर डरे हुए बढ़ रहे थे ! जानवर ने देखा भीड़ ने मुझे डंक मार दिया था !

मैं कोई मवेशी चोर नहीं था और न ही कोई दलाल था ! मेरे पास मेरे और जानवर के सभी जरुरी कागज़ात थे ! फ़ेक न्यूज़ कोई नई चीज़ नहीं है, अर्धसत्य से पूर्ण असत्य तक, सदियों से हर रंग – रूप के झूठ चलते रहते हैं, लेकिन ये सब इतना संगठित हो कर पहले कभी भीड़ नहीं बनी ! मोबाइल इंटरनेट पर लोग अपनी जरुरत की वस्तुओं के साथ खूनी वायरल वीडियो भी आर्डर कर रहे हैं ! जानवर के साथ बने फेक न्यूज़ से मेरे इर्द – गिर्द  खुदरा भीड़ खनकने लगी थी ! दालों, अनाजों और सब्जियों की भीड़ मां – बहन की गंदी – गंदी गालियां दे रही थी ! तेज़ आवाज़ ! खूब हल्ला ! धम – धड़ाक ! दौड़ने – भागने और चिल्लाने की आवाज़ें, मानो कोई हमला हुआ हो ! भीड़ की नाराज़गी बच्चों की तुनकमिजाजी जैसी होती है !

‘ अरे पकड़ो ! ‘ आवाज़ आयी ! भीड़ भागने लगी !
‘ देखो, छिपा है ! ‘ आवाज़ आयी ! भीड़ ढूंढने लगी !
‘ मारो ! ‘ आवाज़ आयी ! भीड़ मारने लगी !
‘ चोर है ! ‘  आवाज़ आयी ! भीड़ कोरस में  ‘ चोर, चोर, चोर … ! ‘
‘ इसको नहीं छोड़ेंगे ! ‘ आवाज़ आयी ! भीड़ किसी को ढूंढने लगती है !
‘ जो बचाने आएगा, उसको भी मारेंगे ! ‘ आवाज़ आयी !  भीड़ कोरस में ‘ मारो, मारो मारो … !’
‘ गिरोह है ! ‘ आवाज़ आयी ! गिरोह का सामना करने के लिए भीड़ गिरोह बन गयी !
‘ आग लगा देंगे ! ‘ आवाज़ आयी ! कोई आग लगा देता है !
‘ मार देंगे ! ‘ आवाज़ आयी ! कोई मार देता है !
‘ फूंक दो ! ‘ आवाज़ आयी ! कोई फूंक देता है  !

तरह तरह के फोटो के साथ नफ़रत, हिंसा, भ्रामक जानकारियाँ, आधा – सच, आधा झूठ ये सब इंडस्ट्रियल स्केल पर लघु उद्योग की तरह पैदा किया जा रहा है, और मोबाईल पर बाँटा जा रहा है ! सोशल साइट्स का नतीजा यह हुआ है कि चारों तरफ लोगों के ऊपर अकेलेपन की भावना हावी होने लगी है और वे दूसरों से कटे – कटे रहने लगे हैं ! कटे – कटे रहने का स्वभाव लोगों में शक की भावना पैदा करता है, खासकर जब पड़ोस में हर वक्‍त हिंसा और अपराध का खतरा मँडराता रहता हो ! शक की भावना बहुत जल्द इंसान के जत्थे को पत्थर – दिल भीड़ बना देती है ! कानून अपने हाथ में ले कर भीड़ ने जनता की भलाई करने के लिए एक अनोखा तरीका निकाला है ! जब लोग मिल – जुलकर एक ही मकसद को हासिल करने के लिए काम करते हैं, तो उन्हें काफी हद तक कामयाबी मिलती है !

मृत्यु को करीब देख कर चार पैर के जानवर ने दो पैरों पर खड़े हो कर अपने दो पैरों से हाथ जोड़ के भीड़ को प्रणाम किया ! सब चकित थे ! सबने मेरी तरफ प्रशंशा से देखा जैसे मैं जानवर का गॉड फादर हूँ ! ‘ कोई जानवर दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता, या तो मुझे खा लो या मेरा दूध पी लो ! ‘ जानवर की ये बात सुन कर भीड़ को लगा जानवर ने उन पर पैलेट गन से ब्लास्ट कर दिया है ! ‘ तुम परमेश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते इसलिए दोष मत लगाओ, कि तुम पर भी दोष न लगाया जाए ‘ जानवर आगे बोला !  ‘ लोगों के समूहों को उन्मादी भीड़ में तब्दील कर देने में सोशल मीडिया का सबसे बड़ा योगदान है ! कौन भड़काऊ तस्वीरें और पोस्ट डाल रहा है.? ‘ जानवर ने कड़क आवाज़ में पूछा ! ‘ क्या चलता है उन्मादी भीड़ के दिमाग़ में यह मुझसे बेहतर कौन बता सकता है जिसने ख़ुद ऐसी भीड़ का सामना किया हो ! ‘ जानवर के मनोहर शब्द सुन कर भीड़ अचम्भे में पड़ गयी ! ‘ स्थिति को काबू में करने के लिए क्या बेक़ाबू होना जरुरी है ? ‘ जानवर ने पूछा ! भीड़ बारिश के बुलबुले की तरह फटने लगी ! ‘ कृपया हमेशा तथ्यों की जांच करें ! हम सभी से अपील करते हैं कि दुर्भावनापूर्ण वीडियो को ध्यान न दें, जिससे कि समुदायों में अविश्वास पैदा हो ! ‘ धीरे – धीरे जानवर एक लाजवाब शिक्षक बन गया ! काफी हद तक सभी भारतीय शिक्षक ही हैं ! जानवर के उपदेश ने भीड़ के दिलों पर ऐसी गहरी छाप छोड़ी कि वे ऐसे शांत स्वभाव वाले जानवर को परेशान करने के लिए अपने मन को समझा नहीं पा रहे थे !

भीड़ की सबसे अच्छी बात ये होती है कि इसके पास लक्ष्य नहीं होता है ! उनको जो चैनल दिखा दो वो देखने लगती है ! भीड़ का असली मजा वही लेता है जो इस बात को जानता है और जिसके हाथ में भीड़ का रिमोट होता है ! आज सोशल मिडिया भीड़ का स्वामी है !

भीड़ की बरसात में भींग कर जब मैं लोगों के नीचे दबा पड़ा था वहीँ भीड़ में एक भाई साहेब दबे – दबे ही मेरा फोन नंबर मांग रहे थे ! मैं अपना फोन नम्बर देने ही वाला था कि मेरी नाक पर किसी की लात के प्रहार ने मेरी आँखें सुन्न कर दीँ ! मैं म्यूट मोबाइल की तरह अचेत हो गया ! बरसती भीड़ और लोगों की चीख चिल्लाहट की कीचड़ में मेरे होश का कमल खिल कर मुरझा गया था ! कई पंजे मेरी गाल पर पहले ही पड़ चुके थे ! हालात भीड़ के नियंत्रण में हैं इस भरोसे के साथ लोगों के चेहरों पर लाइक्स के सारे इमोटिकॉन बिखर गए थे ! जिसके मन में जो आ रहा था सोशल मीडिया पर अपनी ऊँगली से दबा रहा था ! क्लिक – क्लिक की अदृश्य आवाज़ आसमान में गूँज रही थी और लोग सुन रहे थे ! भीड़ चेहरा – विहीन होती है पर भीड़ का हर चेहरा वायरल होने को तैयार था ! भीड़ को गिरफ्तार करने के लिए भेजे गए सिपाही खाली हाथ लौट रहे थे ! सिपाहियों का असर भीड़ पर नहीं हुआ ! अलग अलग रास्तों के कुछ धार्मिक चरवाहे भी आये ! ‘ ये ‘भेड़’ वर्ग के लोग हैं इसीलिए ‘भीड़’ हैं ! इनको तुम जैसा गृहस्थ चरवाहा ही मंज़िल तक ले जा सकता है ! ‘ वे मुझसे बोले ! ‘ ये भेड़ नहीं हैं, ये भीड़ है, सब भूखे भेड़िया हैं ! ‘ यहाँ से निकलो, भागो ! जानवर को घेरने वाली भीड़ को गिरफ्तार करने के लिए भेजा गया दरोगा सिपाही के साथ खाली हाथ लौटते हुए मुझसे बोला ! धर्म और पुलिस अपना काम कर रही थी ! भीड़ भोंके हज़ार, मेरा जानवर चले बाज़ार ! भारतीय जानवर भारतीय भीड़ के साथ बढ़ रहा है ! भीड़ को आप चाहे न पहचान पाए हों पर जानवर को आप जरूर पहचान गए होंगे ! मैं जीते जी भीड़ की बरसात में सोशल मिडिया पर मर चूका था !