हम सिनेमा को तूफान नहीं बना सके

जो उम्मीद सबको मनुष्य कृत पद्मावती से थी अब वो सबकुछ प्रकृति कृत चक्रवाती कर रहा है !
हाय रे मीडिया और मार्केटिंग हम सिनेमा को तूफान नहीं बना सके ! पद्मावती को चक्रवाती तूफान की तरह अरबसागर से उठ कर सौराष्ट्र की तरफ बढ़ना था ! फ़िल्मी पंडितों के अनुसार यह साइक्लोन केरल, मुंबई गुजरात से होते हुए राजस्थान की तरफ बढ़ता ! चैनल और सोशल मीडिया में अगले दो दिनों में यह तूफान दक्षिणी गुजरात पहुँचता और राजस्थान के कुछ जिलों को छूता हुआ निकल जाता ! इसका असर राजस्थान के सभी जिलों में दिखाई देता, महाराष्ट्र गुजरात के कुछ हिस्सों में इस तूफान से तबाही होती ! पर ये नहीं हुआ ! सोशल मीडिया का सीवियर साइक्लोन पद्मावती अब बोतल में बंद जिन्न है ! पद्मावती जो नहीं कर सकी चक्रवाती ने कर दिया है ! जो चेतावनी मौसम विभाग की ओर से जारी की गई है, वो सब चेतावनी सिनेमा के लिए चैनल को देना था ! यह चक्रवात शनिवार शाम को लक्षद्वीप से गुजर रहा था ! इसकी वजह से चलने वाली हवाओं की गति 150 किलोमीटर प्रतिघंटा से ज्यादा है ! इसकी वजह से केरल, मुंबई के अलावा दक्षिणी गुजरात, यानी सूरत, वड़ोदरा, खंभात की खाड़ी क्षेत्र में नुकसान की आशंका है ! पद्मावती को तूफान की ही तरह राजस्थान के बांसवाड़ा, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर सिरोही में इसका असर दिखाई देता, शेष राजस्थान में तेज हवाएं चलती, काले बादल छाते , जिससे केवल लाभ का तापमान बढ़ता ! विडंबना देखिये बिना किसी ट्रेलर के प्रकृति ने हंगामा खड़ा कर दिया और प्रकृति के रहते सिनेमा को हम तूफान नहीं बना सके !

अलविदा Cassini

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बीस साल तक अंतरिक्ष में रहने के बाद नासा का विख्यात कासिनी अंतरिक्ष यान आज शनि ग्रह के ऊपर से गुजरते हुए मौत की नींद सो गया. आज शनि ग्रह के बारे में जो कुछ भी जानकारी मौजूद है वो इसी यान की वजह से हम तक पहुंची. अलविदा Cassini

जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

१.
मैश – अप के हमाम में बोलो हर हर गंगे
मिडिया के रिवेंज पोर्न में सब के पंगे नंगे
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

२.
बूथ दर बूथ पानी हुआ और दूध का दूध
प्रेग्नेंट थी सरकार अब है अबॉर्शन का मूड
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

३.
छोड़ो सबकुछ पकड़ सको तो सिग्नल को पकड़ो
क्या हो जो सबके कपड़े ले उड़ जाए इसरो
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

४.
उफ़ मतला, मक़ता, काफ़िया और रदीफ़
हैं व्याकरण के सब गुंडे हिन्दू और शरीफ़
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

५.
दो पाटन के बीच में कोई बाकी बचा न जात
रेडियो में कौन कर रहा है अपने मन की बात
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

६.
बुर्क़ा पहन के क्यों न निकली चल रहा अभियान
जाना था शमशान कहाँ चली तू बिजली की रमजान
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

७.
कफ़न में भी जेब होंगे डिजिटल जलेगी लाश
मरघट की करें राजनीति कैश है जिसके पास
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

८.
दो हज़ार का नोट चौक पर मांग रहा था भीख
पूछा तो बोला एक हज़ार से उसने ली है सीख
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

९.
गधे भी हार गए आदमी था लाचार
मान गए गधे अब आदमी करें उनका प्रचार
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

१०.
नए लुक में फिर आएगा हज़ार रुपये का नोट
लाइन में सब खड़े होकर पहले दे दो वोट
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

सिनेमा का दुखवा मैं कासे कहूँ ?

1.

पात्रों की भाषा को ‘सिनेमा की भाषा’ मानने वाले मुर्ख, ‘देखो’ बसंत आया

” … क्षेत्रीय भाषा बोलने वालों को नीचा दिखा कर अपनी श्रेष्ठता बनाने की कोशिश करने वाले, आप चाहें तो मुझे भी ‘दूस’ सकते हैं, पर सिर्फ़ अपनी मूर्खता की प्रबल दावेदारी बनाये रखने लिए कृपया सवाल मत कीजियेगा ! मेरी बात और ये चित्र नहीं समझे तो रहने दीजिये आप से नहीं होगा, ये अलग भाषा है जो सिनेमा बनाने के काम आती है ! सिनेमा समझने के लिए सिनेमा की भाषा सीखनी पड़ेगी ! सिनेमा के पात्रों की क्षेत्रीय भाषा पर स्टेटस पेल कर आप भाषायी लोगों में हीन भावना भर रहे हैं ! भाषाओँ की इस तौहीन के लिए भाषायी पात्र आपको कभी माफ़ करेंगे ! आप की शिकायत में ‘सिनेमा की भाषा’ दोषी है, ‘पात्रों की भाषा’ नहीं ! फेसबुक पर लाउड स्टेटस की राजनीती कर के आप भाषा की भावनाओं को अनजाने में ठेस पहुँचा रहे हैं ! महान फिल्मकार सत्यजीत रे के पात्रों ने भी क्षेत्रीय भाषा बोल कर विश्व के सिनेमाई भाषा में सर्वश्रेष्ठ स्थान पाया, पर रे ने कभी भाषा बोलने वालों को नहीं ‘दूसा’ ! जो पुरस्कार आपको मिला है वो पात्रों की भाषा का पुरस्कार है ! उक्त भाषा को पात्रों की भाषा बनाने का पुरस्कार भी सिनेमा का पुरस्कार नहीं होता …
‘सिनेमा की भाषा’ पर लगातार काम कर के आप अपनी उपस्थिति बना सकते हैं ! पात्रों की भाषा को ‘दूस’ कर आप अपने ही दर्शकों को बौखला रहे हैं ! जागिये कहीं ऐसा न हो कि आप न सिनेमा के रहे न भाषा के …” – मैं भी मूर्ख हूँ, इसलिए मूर्खों के साथ बहस से बचने के लिए अपने आप को मैंने खुली चिठ्ठी लिखी ‘ सिनेमा का दुखवा मैं कासे कहूँ ?’

2.

हिंदी सिनेमा / भारतीय सिनेमा, हिंदी फिल्म / भारतीय फिल्म, इंडियन सिनेमा / इंडियन फिल्म सही नाम है ! रीजिनल फिल्म / सिनेमा के लिए भारत के क्षेत्रीय भाषाओँ के साथ फिल्म / सिनेमा शब्द लगाइये ! बॉलीवुड कोई स्थान / भाषा नहीं है ! ‘बॉलीवुड’ बहुत मूर्खतापूर्ण शब्द है जो किसी दुसरे देश के एक नगर का पैरोडी है ! हम अपने सौ साल की कलात्मक यात्रा को ‘बॉलीवुड’ कह कर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हास्यास्पद क्यों हो जाते हैं ?

क्रमशः

कैशलेस इकॉनमी का पहला कदम

काले धन पर अंकुश लगाने जब मैं कैशलेस की दिशा में चलने लगा तब मैंने महसूस किया मेरा कोई पीछा कर रहा है ! मैंने देखा साइबर अपराधी बैंकों के डेटाबेस लिए छुप के खड़े थे उन्होंने मुझे देख लिया था और मेरा पीछा कर रहे थे ! नज़र बचा कर साइबर अपराधियों से बचने के लिए मैं पांच सौ और हज़ार की खाली जगह में जा कर छुप गया ! हज़ार पाँच सौ के खाली गढ्ढों में बहुत शोर था वहाँ ड्रग्स, तस्करी, दांव, डकैती, कर चोरी, रिश्वतखोरी सब अपना सर पीट के रो रहे थे ! नकदी जो अभी भी छोटे मूल्य के घरेलू भुगतान में काम आ रहा था, मुझे साइबर अपराधियों से छुपते देख लिया और रेंगता हुआ मेरे पास आ गया ! ” जरा सोचो, आपकी कोई लीकेज और भ्रष्ट practices हो तो याद करो ” नकदी मुझसे फुसफुसा के बात करने लगा ! “व्हाट ?? ” मैंने चिढ के कहा ! ” जरा सोचो, आपकी कोई लीकेज और भ्रष्ट practices हो तो याद करो ” नकदी मुझसे फुसफुसा के फिर बोला ! मैंने उसकी तरफ देखा और कोई जवाब नहीं दिया ! हम दोनों की नज़रें मिलीं और एक साइलेंट पल बीत गया ! वो बस मुझे मुस्कुराता हुआ घूर रहा था ! ” डिजिटल प्रणाली का कोई मुकाबला नहीं है फिर भी मुझे डिजिटल लेनदेन से क्यों डर लगता है ? ” मैंने पूछा ! ” यहाँ बहुत सी बातें अवैध हैं ” नकदी ने कहा ! ” डिजिटल लेनदेन से डरते क्यों हो ? कैशलेस इकॉनमी में और कोई रास्ता नहीं है ” मैंने इशारे से साइबर अपराधियों की तरफ़ इंगित किया ! उसने मुझे ऐसे देखा जैसे वहां कोई न हो ! ” जरा सोचो, आपकी कोई लीकेज और भ्रष्ट practices हो तो याद करो ” नकदी मुझसे फुसफुसा के तीसरी बार फिर बोला ! मैं समझ गया नकदी नोटबंदी से डिप्रेस्सेड हो कर अपना मानसिक संतुलन खो रहा है !
नकली मुद्रा के खतरे से बचते हुए सामने से किसी देश की एक कैशलेस अर्थव्यवस्था चली आ रही थी ! उसके साथ क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और ऑनलाइन बैंकिंग भी चल रहे थे ! सफेद और शुद्ध अर्थव्यवस्था देखने में बहुत सुंदर लग रही थी ! नकदी और मैं हज़ार पाँच सौ के जाने से बने गड्डों में साइबर अपराधियों से बचने के लिए ये विद्रूप तमाशा देख रहे थे !
” उठो, देखो एटीएम में पैसा आ गया है ! सब अपना कार्ड स्वाईप करने जा रहे हैं ! जाओ बैंक से पैसे भर लाओ ” पत्नी ने जगा दिया और कैशलेस इकॉनमी का मेरा डरावना सपना टूट गया ! बैंक जाने के लिए जब मैं घर से निकला तो बाहर लेन – देन का कर्कश रिकॉर्ड बज रहा था ! बैंक की लंबी यात्रा के लिए पाँव नहीं उठ रहे थे …

एंग्री सोशल मैन

एंग्री सोशल मैन गुस्से में खड़ा ही रहता है !
एंग्री सोशल मैन राष्ट की इज्जत को की – बोर्ड में रखता है !

एंग्री सोशल मैन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पुतला है !
एंग्री सोशल मैन का गुस्सा ऑड – ईवन नहीं होता !
एंग्री सोशल मैन अपना गुस्सा अपने पोस्ट पर पब्लिक कर देता है !
एंग्री सोशल मैन सच्चा देश भक्त है !
एंग्री सोशल मैन जे एन यू को गाली देता है !
एंग्री सोशल मैन का डायजेस्टिव सिस्टम इंटेलेक्टयूएल का पाखण्ड, विरोध का अपच, विचारधारा का अजीर्ण भी डाइजेस्ट कर लेता है !
एंग्री सोशल मैन बकचोदी नहीं करता !
एंग्री सोशल मैन आमिर खान की फ़िल्म को बायकॉट करता है !
एंग्री सोशल मैन भारत माता की जय नहीं बोलता !
एंग्री सोशल मैन विनम्र श्रद्धांजलि भी गुस्से में देता है !
एंग्री सोशल मैन किसी गुमनाम लड़ाई में सबकी मदद करता है !
एंग्री सोशल मैन रिएक्ट कर के अंड बंड, अकर बकर, अंट शंट, आलतू फालतू, बातें नहीं करता !
एंग्री सोशल मैन का गुस्सा ब्रेक नहीं लेता !
एंग्री सोशल मैन का बस नाम ही पढ़ते रहते हैं,
एंग्री सोशल मैन मिस्टर इंडिया है !

एंग्री सोशल मैन की तस्वीरों के पीछे माओत्से झांकते हैं !
एंग्री सोशल मैन रविश कुमार को गाली देता है !
एंग्री सोशल मैन महान गुप्त गतिविधियों में लिप्त रहता है !
एंग्री सोशल मैन के अनुयायी गलियों में नहीं गालियों में सबका पीछा करते हैं !
एंग्री सोशल मैन मुठ्ठी तान नहीं सकता, उसकी मुठ्ठी में फ़ोन रहता है !

एंग्री सोशल मैन शेयर का चहेता, लाइक का प्रेमी, कमैंट्स का फॉलोवर, और सोशल मिडिया का जंतर – मंतर है !
एंग्री सोशल मैन हर सोशल प्लेटफार्म पर गुस्से में ही मिलेगा !
एंग्री सोशल मैन वर्चुअल दुनिया में हँसता है !
एंग्री सोशल मैन का गुस्सा उसके ‘फ्रेंड्स’ झेलते हैं !

मिक्स्ड फीलिंग्स / मनः स्टेटस

 

मनः स्टेटस

मनः स्टेटस

1.

किसी को मुझे छोटा दिखाना होता है तो मेरी फिल्मों की असफलता की बात जरूर करते हैं ! फिर चरित्र पर चोट करते हैं ! ये कोई नयी बात नहीं है ! फेसबुक पर मेरी हालत चंद्रधर शर्मा गुलेरी की कहानी ‘उसने कहा था’ के लड़के जैसी हो जाती है ! इनबॉक्स से निकल कर घर लौटते लौटते लगता है रास्ते में एक लड़के को मोरी में ढकेल दिया हो ,एक छावड़ीवाले की दिन-भर की कमाई खो दी हो ,एक कुत्ते पर पत्थर मारा हो और एक गोभीवाले के ठेले में दूध उड़ेल दिया हो … सामने नहा कर आती हुई किसी वैष्णवी से टकरा कर अन्धे की उपाधि तो पा ही लेता हूँ … गॉसिप का हिस्सा होता हूँ, ब्लॉक होता हूँ ,अनफ्रेंड होता हूँ तब कहीं घर पहुँचता हूँ …

 

2.

कबीरा खड़ा बाजार में सबकी मांगे खैर। ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर !

 

फेसबुक पर पूरी तरह उन्मुक्त हो गया हूँ ! ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर ! मेरा कोई चेला नहीं ! मैं किसी का गुरु नहीं ! मेरा कोई गैंग नहीं है और न ही मैं किसी गैंग का हिस्सा हूँ ! मेरा कोई ब्रांच नहीं है और न ही मेरा कोई सिक्का चलता है ! किसी को खुश करने के लिए मैं एक बार भी लाइक बटन पर चटका नहीं लगाता और न ही किसी के द्वारा लाइक नहीं किये जाने पर बुरा मानता हूँ ! चापलूस और चमचे मुझसे दूर भागते हैं ! मैं अपनी मर्ज़ी से जो चाहता हूँ लिखता हूँ और अपने लिखे हुए पर सबकी राय को ठेंगे पर रखता हूँ ! एरोगेंट तो था ही अब ज़हर हो गया हूँ ! ऐसी दोस्ती को चूल्हे में झोंक आया हूँ जो सिर्फ मतलब के लिए की जाती है और निभाई जाती है ! जिसने भी मुझे समझने का दावा किया उनके दिल में मेरे लिए एक कचोट जरूर है क्योंकि वो मुझसे कभी मिले नहीं और मिले भी तो मैं उनके किसी काम न आ सका ! मेरे लिए बनायी गयी हर राय को मैं स्वीकार करता हूँ ! फेसबुक पर मैं एक लूज़र हूँ, अपने मुठ्ठी भर दोस्तों के साथ बहुत खुश हूँ और निडर हूँ !

 

3.

मेरे लिए कुछ भी नया नही है ! मैं हर बात पर, हर काम मे सिर्फ येस का मोहताज़ नहीं ! नो … नहीं …माफ़ करिए .. नही हो सकता … सॉरी … फ़िर कभी … गो अवे … माफ़ी … समय नही है … हो नही सका … विल कॉल यू बैक … बजट नही है … अनफ्रेंड, ब्लॉक, नो रिप्लाई, मेरा जीवन है ! इन सबकी अनुभूति अद्भुत है ! बेशकीमती ! इतना आज़ाद इतना मुक्त इतना अच्छा पहले कभी नही लगा ! कोई कमिटमेंट नहीं / कोई बंधन नही / कोई अनुग्रह, पूर्वाग्रह, कुछ भी नही !! या हू !!! सबका शुक्रिया, सबको सलाम !

 

PS – ये व्यक्तिगत है ! इस पोस्ट पर राजनीतिक / सामाजिक या कोई कट -पेस्ट ज्ञान न पेलें ! अाप से नहीं हो पाएगा, मेरे अनुभव का एक अंश भी अाप का सच नही है …

 

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इंटरव्यू

अपने बारे में पढ़ना मुझे संकोच से भर देता है ! फिर भी Jey Sushil ने मेरे बारे में जो कुछ भी फेसबुक पर लिखा है अपने दोस्तों से बाँट रहा हूँ ! अपने काम काज के प्रति पारदर्शिता और ईमानदारी में सुशील का जवाब नहीं ! मुझे मुझसे ही मिलवाने और डिस्कवर करने के लिए शुक्रिया सुशील बाबु !

 

Pic Credit : Sushil Jha

किसी को जानना हो तो उसे सुनना चाहिए…….घंटों तक….आदमी कितना झूठ बोलेगा….बोलते बोलते….अंत में सच बोलेगा……अंदर की बात खोलेगा…वो आपको तोलेगा…….आपके सवालों से…आपकी बातों से फिर अपना जिगर खोलेगा….आपको मौका देगा उसे समझने का….ये मौके बार बार नहीं आते.
बंबई में दो फिल्मकारों से मिला..दोनों को जानने की कोशिश में सिर्फ यही करने की कोशिश की ….उनको सुनने की….दोनों ही बिल्कुल अलग अलग स्टाइल के फिल्ममेकर. लंबा संघर्ष..छोटी छोटी कहानियां..चेहरे पर मुस्कुराहटें..किसी के बारे में फैसले वाले अंदाज़ में टिप्पणी न करने की आदत.

अपने काम के बारे में कम बोलना…आलोचना को लेकर सजग लेकिन चिंतित नहीं. दोनों को खुद पर भरोसा…अपने पर अपने क्राफ्ट पर. दोनों के बैकग्राउंड बिल्कुल अलग लेकिन कहीं न कहीं एक ललक दोनों में अच्छा सिनेमा बनाने की.

संजय मस्तान Sanjay Jha Mastan– पटना से रंगकर्म, एनएसडी से पढ़ाई फिर क्लैप देने से लेकर डायरेक्शन तक का सफर. एक अलग तरह का डार्क ह्यूमर और फिल्मों का एक एकैडेमिक लैंग्वेज विकसित करने की जिजीविषा. संभवत संजय ने पहली बार किसी कविता को फिल्मों में पिरोया था. फिल्म थी स्ट्रिंग्स और कविता थी नागार्जुन की मंत्र. विरोध प्रदर्शन हुए कविता के विरोध में जबकि कविता पर कभी कोई प्रतिबंध नहीं था. यूट्यूब पर लाखों लोग वो मंत्र कविता सुन चुके हैं .कम लोग जानते हैं वो आइडिया संजय मस्तान का था.

फिर मुंबई चकाचक जो सुनील शेट्टी के कचरा रायते में फंस गया. किसी फिल्मकार के लिए फिल्म तैयार होने के बाद रिलीज़ नहीं होना कैसा होता है ये पूछना भी नहीं चाहिए. संजय भाई को भी बुरा लगा ही होगा लेकिन अब वो नई ऊर्जा से अपनी नई योजनाओं पर बात करते हैं.

वो अकीरा कुरोसावा के फैन हैं और कहते हैं अकीरा के अनुसार किसी फिल्मकार के पास एक समय में पांच स्क्रिप्ट होनी चाहिए और मेरे पास तीन स्क्रिप्ट्स हैं..दो और स्क्रिप्टों पर काम कर रहा हूं. उनकी रुचियों की सूची लंबी है. उनके जैसा दुनिया भर के स्टांपों का कलेक्शन मैंने जीवन में किसी और के पास नहीं देखा है.
वो डिजिटल दुनिया के नए कामों पर बात करते हैं. और उनसे आगे की सोच रखते हैं. उनकी फिल्मों की ही नहीं उनकी बातचीत की भाषा भी ग्लोबल है. वो थिंकिंग फिल्ममेकर हैं शायद इसलिए बॉलीवुड में कम लोग उनकी भाषा समझते हैं.

फेसबुक पर वो अपनी छोटी छोटी टिप्पणियां लिखते हैं. बहस नहीं करते..वो जानते हैं….ये सतही माध्यम है. फिल्मों को कंपलीट माध्यम मानते हैं और फिल्म बनाना उनके लिए साधना है.

उनसे बात करते करते कई बार लगा और मैंने कहा भी कि वो अपने समय से आगे के फिल्ममेकर हैं. उनके आइडियाज़ सुनने के दौरान मेरे पास बहुत कम ही था उसमें कुछ जोड़ने को…

वो वर्ल्ड सिनेमा के स्तर की बात कर रहे थे. मैं बस सुन रहा था. उनके घर में रखी हज़ारों किताबों, मैगज़ीनों, पर्चों, पोस्टरों को पलट रहा था. छोटे से घर में करीने स से रखे हज़ारों स्टांप्स, भरत मुनि का नाट्यशास्त्र और न जाने किन किन विषयों पर किताबें.

मैं उनकी निर्माणाधीन फिल्म पर कोई बात कह नहीं सकता लेकिन मैं अपनी छोटी सी समझ से कह सकता हूं कि यह एक कल्ट फिल्म होगी. अगले पांच वर्षों में जब कभी भी आए वो अपने समय से बहुत आगे की फिल्म होगी.

संजय बात बात पर क्राफ्ट की बात करते हैं…और क्राफ्ट पर बतियाते बतियाते वो मुंबई, कला, जीवन और न जाने कितनी बातों के छोर से छोर मिलाते हुए सहजता से अपनी बात रखते जाते हैं.

अपनी फिल्मों पर बात करते हुए वो बच्चों की तरह खुश हो जाते हैं. अपनी असफलताओं को छुपाते नहीं. उनके आगे के दो दांतों के बीच का खाली हिस्सा मुस्कुराता रहता है.

उन्हें आलोचनाओं से फर्क नहीं पड़ता. वो अपनी दुनिया में मस्त रहते हैं. उनको पता है फिल्म कैसे बनती है..उनको पता है उन्हें कैसी फिल्म बनानी ही. उनकी चुनौती बस ये है कि उन्होंने जो सोचा है वो पर्दे पर कैसे उतरे..क्योंकि इसी चुनौती में हर कोई सफल या असफल होता है……

आभार – सुशील झा

Sushil Jha

सुशील झा / Pic Credit : Anurag Vats

डिजिटल कचरा

 

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डिजिटल डाटा

 

डिजिटल कचरे में शब्द कम होते हैं, चित्र ज्यादा

 

एक /

कुत्ता जल रहा है ! लड़की मर रही है ! भाषण चल रहा है ! ब्रीफकेश, अटैची, हैंडबैग सब नोटों से भरा है ! अपनी अपनी तस्वीरों में लोग द्वारका, आगरा, और कशमीर से लेकर कन्या कुमारी तक खड़े हैं ! मसूर और मूँग की दाल, आलू और टमाटर के साथ फोटो खिंचा रहे हैं ! सब एक दुसरे को श्रद्धांजलि और जन्मदिन मुबारक एक ही फोटो पर दे रहे हैं ! फोटो में कोई उज्जैन जा रहा है तो कोई साकीनाका ! बाढ़ के दौरा में मंत्रीजी के हेलीकॉप्टर से पीड़ित कम दिख रहे थे और फोटोशॉप ज़्यादा ! फोटो शॉप की मदद से किसी ने सबकी थाली गायब कर दी है , अस्पतालों में पागलों की तरह लोग फर्श पर खाते दिख रहे हैं ! पेट पर लात और पीठ पर लाश, गाय और गुजरात, हर तरफ है फोटोशॉप का पलटवार ! डिजिटल रायता फ़ैल चूका है !

दो /

कोई फर्श पर खा रहा है तो कोई गाय की पीठ पर, कोई पाकिस्तान के नक़्शे पर खा रहा है तो कोई अपनी ही कार्टून पर ! कोई लाल पानी पर खा रहा है तो कोई आदिवासी के कंधे पर ! बहुत लोग अपने मन की बात पर खा रहे हैं, कविता कहानी जिस पर भी आपका मन हो आप खा सकते हैं ! किसी दिन हम लाल किला पर खा लेते हैं और किसी दिन पथ्थर फेंकते कश्मीर पर ! कोई अपने कहे की फोटो पर ही खा रहा है, कोई सबकी सुन कर खा रहा है ! जो भूखे हैं उनके फोटो पर भी कोई खा रहा है ! जितने देशवासी उतनी थाली और जितनी थाली उतने छेद ! फोटो शॉप से थाली को मिटाया जा रहा है, सबके लिए खाना है पर सबकी थाली गायब …

* कंडीशंस अप्लाई / इस पोस्ट पर आप चाहें तो खा सकते हैं, पर भूख नहीं मिटेगी, पेट नहीं भरेगा

 

Pic Credit : Google

सावधान !

” युद्ध शुरू हो चुका है ” / ” पाक साफ “/ ” पाकिस्तान पूरी तरह से ख़त्म हो गया ” इत्यादि इत्यादि ! देशवासियों कृपया ऐसे स्टेटस से बचें और घर बैठे बैठे सोशल मीडिया पर एक दुसरे के स्टेटस से युद्ध न करें ! सर्जिकल स्ट्राइक युद्ध नहीं है ! ये एक सैन्य कार्रवाई है जिसके लिए प्रधान मंत्री और सेना बधाई के पात्र हैं ! पर ये युद्ध नहीं है ! अधीर न हों ! युद्ध में सोशल मीडिया सबसे पहले हम सबका साथ छोड़ देगा या ये कहिये हम छूट जायेंगे ! युद्ध हुआ तो बिजली और पानी जैसी बुनियादी चीजों के लिए देशवासी बैचैन हो जायेंगे ! आप का स्टेटस पढ़ने के लिए सोशल साइट पर कोई नहीं होगा जब युद्ध की स्थिति में एयर स्ट्राइक से देश को जूझना होगा ! युद्ध से हम डरते नहीं हैं ! धैर्य रखें, जरुरत हुई तो युद्ध भी होगा और सबको सेना की मदद भी करनी होगी जिसकी कोई जानकारी हम सबको नहीं है ! जैसा आप सोचते हैं युद्ध वैसा नहीं होगा ! युद्ध टेलीविजन पर नहीं होगा ! युद्ध सबकी आँखों के सामने होगा और तबाही चारों ओर होगी ! जलने और मरने से चारों तरफ हाहाकार होगा ! सिस्टम और इंफ़्रास्ट्रक्चर चरमरा जायेगा ! आप सावधान नहीं हुए तो अफ़वाह के शिकार होंगे और हर हाल में देश का नुकसान होगा ! सावधान ! युद्ध टेस्ट मैच नहीं है ! युद्ध से तबाही की कल्पना आप सब खुद कीजिये और प्लीज इसकी कामना आने वाली पीढ़ी और बच्चों के हित में मत कीजिये ! सेना को अपना काम करने दीजिये और चलिए हम सब अपना काम करें ! जय हिन्द !