प्रार्थना

उसके रिज्यूमे को पढ़ा जाए ! नौकरी की चिंता में जाग जाग के उसे अपनी रात न खराब करनी पड़े ! फ़िज़ूल की नेटवर्किंग से ईश्वर उसे बचा ले ! काम देने के बहाने उसके हर पोस्ट और प्रोफाइल को लाइक करने वालों से उसे झूठी मुस्कराहट के साथ चैट न करना पड़े ! नौकरी की तलाश में हर लड़की को तत्काल नौकरी मिले, ईश्वर से आज मेरी सुबह की यही प्रार्थना है !

हृदयनामा

1.

मैंने अपने ह्रदय का एक चक्कर काट के देख लिया है कुछ भी सही नहीं है ! रक्त चाप, धड़कन और ह्रदय की गति सब अपनी मर्ज़ी के मालिक हैं ! अपने ह्रदय के अलग अलग हिस्सों में मैं बिलकुल अलग अलग हूँ ! मेरा ह्रदय जब कमज़ोर होता है तो मैं घमंडी और अकड़ू हो जाता हूँ ! मेरा अहम फूल जाता है और मेरी आँखों को ढक लेता है ! अपने ही ह्रदय से बात करने के लिए मुझे अपने ह्रदय के दस चक्कर लगाने पड़ते हैं ! ह्रदय के आकार का ह्रदय पृथ्वी और आकाश के आकार का हो जाए तो बड़ा नहीं होता ! ह्रदय को बड़ा होने के लिए उसे ह्रदय के आकार का बने रह कर ही अपने अंदर पृथ्वी और आकाश जितना बड़ा होना पड़ता है ! ह्रदय को ह्रदय रखने के लिए मुझे अपनी किडनी, फेफड़े, छोटी बड़ी आँत, नाक, आँख, कान, चमड़ी, घुटने और अपने दुसरे सभी अंगों से मिल कर रहना पड़ता है ! पर मेरा ह्रदय कमज़ोर है और मैं अपने शरीर में ज्यादा रह नहीं पाता हूँ ! मेरे दिमाग के घोड़े मुझे अपनी बुद्धि के कोल्हू में बैल बना कर घुमाते रहते हैं ! मेरा ह्रदय कहीं का सम्राट नहीं है ! मैं अपने ही ह्रदय में बायीं तरफ से कोई और हूँ और दायीं तरफ से कोई और क्यों हूँ ? मैंने आज अपने ह्रदय में एक नकली कारखाना पकड़ा ! संदेह और शंका की फैक्ट्री क्या मेरा ह्रदय मुझसे पुछे बिना चला रहा था ? अपना ये डिफेक्टिव ह्रदय श्री राम जी के कदमो में रखने से डरता हूँ …

2.

हृदय से निकली आवाज़ को माइक्रोफ़ोन नही चाहिए और न ही कोई स्पीकर ! शब्द भी चाहें तो हृदय की अावाज़ को अकेला छोड़ सकते हैं ! हृदय की अावाज़ की अपनी भाषा है और अपनी फ्रिक्वेंसी ! हृदय की अावाज़ किसी मीडियम की भी मोहताज नहीं …

 

आलसी

फोन की घंटी बजने लगी, आलसी के दिमाग में शब्द घनघनाने लगे ! आलसी बोलने के लिए ‘हेलो’ शब्द चुने या ‘हाय’ ये सोचता ही रहा और फोन कट गया ! अब कौन मिस्ड कॉल में जाए और री – डायल करे ? आलसी ने आँखें मूंद लीं ! आलसी की नींद आलस्य त्याग के नाश्ते के टेबल पर जा बैठी है ! आज आलसी को लिखना है ! आलसी उठा, शब्दों को उठाया और खुद सो गया ! उनींदे शब्द पास रखे मोबाइल में घुस गए ! आलसी की मुसीबत बढ़ गयी ! आलसी अब जब भी शब्द ढूंढेगा उसे सेटिंग्स में जाना होगा, अंग्रेजी को हिंदी फॉण्ट में बदलना होगा, जो शब्द चाहिए उन्हें की – बटन पर टाइप करके निकालना होगा ! इससे अच्छा आज वो नहीं लिखेगा ! और बहुत जरुरत हुई तो कट पेस्ट से काम चला लेगा ! आलसी की प्रेमिका एक चुस्त लेखक से आँख लड़ा रही है इस दुःख ने आलसी को और भी आलसी बना दिया है …

डिअर डायरी

मेरी सात महीने पुरानी डायरी खो गयी है ! मेरी बातचीत और बहस से भरी मेरी निजी डायरी जिसके हर पन्ने में मेरे अक्षरों के निशान हैं ! मेरी डायरी के चेहरे पर मेरा नाम,पता फोन नंबर और ई -मेल आई डी सब है ! मेरी डायरी अगर किसी आम आदमी को मिली होती तो वो जरूर लौटा देता ! मुझे लगता है मेरी डायरी किसी लेखक के हाथ लग गयी है ! वो सब अनदेखा कर के उसे अब पढ़ रहा है और अपनी जेब में रखकर मेरी डायरी को शहर घुमा रहा है ! लेखक महोदय मेरी डायरी में तुम कुछ लिख नहीं पाओगे क्योंकि उसमे मैंने इतना कुछ लिख दिया है कि उसे पढ़ते हुए तुम अपना कुछ भी लिखना भूल जाओगे ! मेरे अक्षर तुम्हारे किसी काम नहीं आएंगे और तुमको वो डायरी बिना कुछ लिखे मुझे लौटा देनी चाहिए ! मेरी डायरी एक दिन तुम्हारे जेब से गिर जाएगी और कोई न कोई उसे मुझ तक पहुंचा देगा ! किसी और की डायरी को पढ़ने के गिल्ट से तुम कभी निकल नहीं पाओगे !
डिअर डायरी, तुम जहाँ भी हो खुश रहना ! तुम नहीं हो तो मेरे दिन,रात और साल महीने में अब कोई फर्क नहीं है …

सलीब पर कोई टँगा है

मैं देख रहा था सलीब पर कोई टँगा है जिसके दुःख की कोई सीमा नहीं है ! उसके दोनों खुले हाथों को और उसके दोनों पाँव को समेट कर सलीब पर लोहे के मोटे – मोटे कील से ठोक दिया गया है ! आसूँ और खून से सलीब सना हुआ है ! दर्द से आँखें पथरा गयी हैं ! छलनी बदन से खून टपकना भी बंद हो चूका है ! पर ह्रदय अपार करुणा और प्यार से भर गया है ! उसने सबको माफ़ कर दिया है …

रीसायकल नींद

नींद टूट गयी ! टूटी हुई नींद किसी के काम नहीं आती ! लोग उठने से पहले टूटी हुई नींद को एक बार जोड़ने की कोशिश जरूर करते हैं ! पर हार के कभी तकिये के पास या पलंग के नीचे छोड़ के उसे भूल जाते हैं ! बिस्तर झाड़ते हुए या कमरे की सफाई करते हुए फिर कभी उनकी तरफ कोई नहीं देखता ! हफ़्तों और महीनों की टूटी हुई नींद पड़े पड़े अपने आप हवा में घुल जाती हैं और धीरे धीरे किसी की नयी नींद से जुड़ जाती हैं …

दिन का सपना, रात का समाचार

( एक )

मैंने अभी अभी सपने में एक दृश्य देखा कि कन्हैया अपनी जीभ निकाल कर सेल्फ़ी ले रहा है ! ‘कन्हैया’ एकदम ‘काली’ लग रहा था …

( दो )

मैंने अभी अभी सपने में एक दृश्य देखा कि देश में सब लोग अपनी अपनी जीभ निकाल कर सेल्फ़ी ले रहे हैं और सबकी जीभ के रेट अलग हैं …

( तीन )

मैंने अभी अभी सपने में एक दृश्य देखा कि सब लोग एक दुसरे से जीभ लड़ा रहे हैं और जीभ जीभ को हरा रही है …

( चार )

मैंने अभी अभी सपने में एक दृश्य देखा कि सब लोग एक जीभ बन गए हैं और एक दुसरे को चाट चाट कर खरीद बेच रहे हैं …

किंगफ़िशर का उदास बसंत

अपने पंखों की सारी शक्ति लगाकर किंगफ़िशर उस हवाई जहाज़ के पीछे उड़ता रहा जिसमे उसका मालिक उसे छोड़ के भाग रहा था ! बड़ा सिर, लंबे तेज नुकीले चोंच, छोटे पैर और ठूंठदार पूंछ वाला किंगफ़िशर थकने लगा और फिर बादलों में खो गया …
अपने मालिक का ट्वीट पता नहीं उसने पढ़ा, या नहीं पढ़ा पर बहुत दिनों से विलुप्त होते इस चमकीले रंग के पंछी को किसी ने जंगल में देखा नहीं है …

‎सोलह बसंत‬

सरसों के खेतों तक आया, इस बार मुझ तक क्यों नहीं पहुंचा मेरा बसंत ? मीनारों पर बैठे गिध्द कैसे खा गए एक गिलहरी का क्यारी भर बसंत ? कौन पेंच दे के काट गया एक बच्चे का पतंग भर बसंत ? फुनगियों पर सहम कर क्यों रह गया इस बार का मौसम भर बसंत ? किस ने मार गिराया विद्यार्थी का हंस भर बसंत ? महानगरों के तकिये पर क्यों सिसकती रही ह्रदय के आकार की हवस भर देह – बसंत ? किसने दी मौसम को गाली, कैसे बचेगा विरोध भर बसंत ? मुक्त कर दो अपने गगन मन से दमन भर बसंत ..

हाहाकार

सुनो पुरुष, योनि का कोई पिछला दरवाज़ा नहीं होता ! तुम स्त्री से आँख मिलाने अगर उसके सामने नहीं आ सकते तो जा के अपने लिंग में अपना मुंह छुपा लो ! अपने पथरीले काले ह्रदय को अगर उसके लाल सिन्दूर से ढंकना चाहते हो तो याद रखो स्त्री के पांच दिन का बहता हुआ रक्त स्त्राव तुम्हे नंगा कर के बहा देगा ! शनि के पत्थर पर तेल चढ़ा कर तुम स्त्री को शनि से दूर नहीं रख सकते ! फेंका हुआ तेल तुम्हे पवित्र नहीं रख सकता ! स्त्री का ह्रदय स्त्री की बपौती है तुम्हारी माँ की आँख नहीं ..