शिकारी सिंगल

शिकारी सिंगल

 

‘शिकारी सिंगल’ मर्दों को अपने हवस का शिकार प्रेम का ढोंग रचा के बनाती है और कुछ ही हफ़्तों में बच्चा, नौकरी, मूड या किसी एक्स या कोई नए प्रेमी का बहाना बना कर अचानक गायब हो जाती है ! भावुक आदमी तड़पता रह जाता है ! मिडिल ऐज़ ‘ शिकारी सिंगल ‘ मल्टीप्ल डबल टाइमिंग करती है ! अपने पुरुष शिकार बहुत ध्यान से अलग अलग फील्ड से चुनती है और अपने से कमज़ोर आदमी में अपना शिकार तलाश करती है ! उसके शिकार एक दुसरे को नहीं जानते ! ये कई सारे सोशल साइट के प्लेटफार्म पर होती है और अपने फ़ोन से ऑपरेट करती है ! जिनसे पब्लिक में मिलती है उनसे दुरी बना के रखती है ! शिकारी सिंगल देखने में पढ़ी लिखी होती है, नौकरी भी करती है और भावनात्मक रूप से बिलकुल क्रूर होती है ! इनकी दिलचस्पी हर पल बदलती रहती है और मदद की आड़ में अपना शिकार ढूंढ लेती है ! इनसे आप कभी रिश्ता बनायें तो कंडोम का जरूर इस्तेमाल करें और सेक्स के बाद इनको रुपये जरूर दें ! इनके प्रेम के भ्रम को तोड़ें और इनके बारे में अपने दोस्तों के ग्रुप में खुल के चर्चा करें ताकि आपका कोई भावनात्मक दोस्त  इनका शिकार न बने ! अपने सेक्स की जरुरत को पूरा करना सबका हक़ है पर वो किसी रंग में न हों, दोस्ती और प्रेम के ढोंग में तो बिलकुल न हो ! जनहित में जारी !

शिकारी सिंगल / पार्ट टू ‘ सेटिंग अप द स्टेज ‘

बलात्कार और चाइल्ड एब्यूज जैसी महानगरीय वीभत्स हादसों के बाद ‘शिकारी सिंगल’ सेंटर स्टेज के लिए ‘डेस्पेरेट’ हो जाती हैं ! अपने हारे पुराने शिकार आशिकों को लेकर कोई मंच बनाती हैं और अपने हवस के नए शिकार के लिए आंदोलन में उतर जाती हैं ! कैंडल लाइट मुहीम और आंदोलन की हर रात वो एक नए मर्द शिकार के साथ हम बिस्तर होने का टारगेट रखती हैं और मोम की तरह नए पते की चादरों पर पिघलती हैं ! उनका मुख्य उद्देश्य सेक्स होता है और वो मुहीम के हर दिन अपनी कई नयी रातों के लिए नया शिकार ढूंढ लेती हैं ! योन शोषण के शिकार हुए कमज़ोर मर्द अपनी किस्मत पर इतराते हैं और इससे पहले वो कुछ समझ पाएँ मिडिल ऐज़ ‘ शिकारी सिंगल ‘ मल्टीप्ल डबल टाइमिंग करती हुई आंदोलन और मुहीम का धन्यवाद ज्ञापन कर देती हैं ! व्यस्त इतनी दिखती हैं की मर्द अपनी भावनाओं को व्यक्त भी नहीं कर पाता है ! अगर किसी ने मुंह खोला तो वो उसे छोटा साबित कर उसे ‘सेक्स गिल्ट’ में धकेल देती हैं ! इनसे आप कभी रिश्ता बनायें तो कंडोम का जरूर इस्तेमाल करें और सेक्स के बाद इनको रुपये जरूर दें ! इनके प्रेम के भ्रम को तोड़ें और इनके बारे में अपने ग्रुप में खुल के चर्चा करें ताकि कोई भावनात्मक आदमी इनका शिकार न बने ! अपने सेक्स की जरुरत को पूरा करना सबका हक़ है पर वो किसी रंग में न हों, दोस्ती और प्रेम के ढोंग में तो बिलकुल न हो ! जनहित में जारी !

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आप से नहीं हो पायेगा ! आप के पास इतना बड़ा कलेजा नहीं कि आप एक स्त्री / पुरुष को उन्मुक्त हो कर काम सुख लेने दें ! वो आप को चुभेगी / चुभेगा ! उनका सेक्स आप को चुभेगा ! उनकी बेफिक्री आप सह नहीं पाएंगे ! आप के साथ सेक्स करने के बाद अब वो किसी और के साथ सेक्स कर रही / रहा है ये सच आप स्वीकार नहीं पाएंगे ! शिकार हर उस जानवर या पक्षी को कहा जाता है जिसका शिकार खाने या खेल के लिए किया जाता है ! शिकारी सिंगल के लिए आप भी सिर्फ एक वक़्त का खाना और खेल हैं ! अपने शिकार के बाद शिकारी सिंगल की प्रखरता और तार्किकता के कायल आप नहीं रह पाएँगे ! आप सिर्फ एक औरत / मर्द के कामोन्माद के शिकार नहीं हुए हैं, आप अपने अहम् के भी शिकार हो चुके हैं ! शिकारी सिंगल को आज़ाद कर दीजिये ! आप उन्हें जाने दीजिये, जीने दीजिये ! इनसे आप कभी रिश्ता बनायें तो कंडोम का जरूर इस्तेमाल करें और सेक्स के बाद इनको रुपये जरूर दें ! इनके प्रेम के भ्रम को तोड़ें और इनके बारे में अपने दोस्तों के ग्रुप में खुल के चर्चा करें ताकि आपका कोई भावनात्मक दोस्त इनका शिकार न बने ! अपने सेक्स की जरुरत को पूरा करना सबका हक़ है पर वो किसी रंग में न हों, दोस्ती और प्रेम के ढोंग में तो बिलकुल न हो ! जनहित में जारी !

शिकार की हर बात क्रूर होती है ! इस सीरीज में आप कोमलता की तलाश न करें !

मुंबई बदन ( मनुष्य और कैमरे के लड़ाई की फैंटसी / एक फंतासी उपन्यासिका )

सोचो मत बस पढ़ने का आनंद लो #मुम्बईबदन

1.

मुम्बई बदन में आने का सबसे अच्छा समय बरसात के दिनों में ही है ! दूर तक फैली घाटी में हरियाली और पानी के झरने देखकर तन मन में थ्रिल और रोमांस बहने लगता है ! मुम्बई बदन में समतल स्थान के आगे तारों की बाड़ लगाई गई है, ताकि लोग इससे आगे न जाएँ ! मुम्बई बदन की सहेलियाँ और दोस्त अलग अलग शहरों से आते हैं ! सब मिल कर मॉल जाने का प्रोग्राम बना लेते हैं ! मुम्बई बदन में रात के बारह बजे रोज़ केक काट कर जन्मदिन मनाया जाता है ! मुम्बई बदन के हाई – वे पर युवाओं के झुण्ड मौज मस्ती का सारा सामान साथ लेकर आते हैं ! मुम्बई बदन के हर स्पॉट पर मेला सा लगा रहता है ! मुम्बई बदन में रह रह कर बारिश होती है ! चाय, भुट्टे, कॉफ़ी और कई स्नैक्स के अलावा बियर और शराब भी मिलती है ! मुम्बई बदन मेंं वृन्दावन के बंदर नही हैं ! मुम्बई बदन मेंं कहीं छेड़छाड़ नहीं है ! मुम्बई बदन की गुफाऐं बड़ी रहस्यमयी हैं ! मुम्बई बदन में थोड़ी थोड़ी देर में दृश्य बदलता रहता है ! मुम्बई बदन मे कैमरा ले जाना मना है ! 

2.

हर दिल मुम्बई बदन की यात्रा पर है ! सबके अंदर एक मुम्बई बदन है ! मुम्बई को लेकर अपनी एक फैंटसी ! अपनी अपनी गतिविधियों और कल्पनाओं का निर्भय लोक जिसमे सब अपनी तरह से रहने के लिए आज़ाद हैं ! मुम्बई बदन वो ललक है जो सबके अंदर किसी कोने में छुपी बैठी है, और बार बार यहाँ अाने के लिए मजबूर करती है ! मुम्बई बदन इश्क़िया है ! मुम्बई बदन की सुबह चाहत की चहचहाट से भर जाती है, और नज़ारा रंगीन हो जाता है ! मुम्बई बदन मे होती है सपनों की दोपहर ! मुम्बई बदन स्वतंत्र है, और मुम्बई बदन का स्पर्श सबके लिए फ्री है ! मुम्बई बदन के खून में व्यापार है, इसलिए कैमरा मुम्बई बदन के डिजिटल इतिहास को जन्म देना चाहता है, और मुम्बई बदन का एक एलबम बनाना चाहता है पर कैमरे के अंदर मुम्बई बदन का दम घुटता है ! मुम्बई बदन के दुश्मन कैमरे के अंदर रहते हैं, जो मुम्बई को इमेज के ज़ंकयार्ड मे बदलने के लिए दिन रात फ़्लैश होते रहते हैं ! उनका काम मुम्बई बदन को कामुक बनाना है ! आत्म प्रचार और निजी जीवन पर टिप्पणी करने की कैमरे को बीमारी है ! इसी वज़ह से मुम्बई बदन मे कैमरा ले जाना मना है ! 

3.

मुम्बई बदन की बाहों मेंं तेरह साल की एक नग्न लड़की है, और लड़की के बाहों मे चौदह साल का एक नग्न लड़का ! दोनों अपनी धमनियों मे बह रही यौवन के नशे मेंं डूबे हुए हैं ! सहसा कैमरा उनकी तस्वीर ले लेता है ! कैमरे की वज़ह से जो भी तस्वीर हमारे सामने उभर रही है उसे हम सही या गलत की कैटेगरी में नहीं रख सकते ! सेक्स एक नॉर्मल प्रक्रिया है ! शरीर की जरूरत है ! लेकिन कैमरा जब जरूरत की उल्टी तस्वीर पेश करने लगे तो मुम्बई बदन मे चिंगारियाँ दौड़ने लगती हैं ! मुम्बई बदन का देह राग सिर्फ़ क्लिक, क्लिक, क्लिक नही हो सकता ! मुम्बई बदन मे सेक्स को लेकर किशोरों के मन में कैसे बदलाव हो रहे हैं, इसकी बानगी कैमरा ठीक से नही दे पा रहा है ! कैमरा मुम्बई बदन को अश्लील बना रहा है ! मुम्बई बदन को लगता है कैमरे की वज़ह से कैरम बोर्ड सेक्स हो गया है ! कैमरे की वज़ह से योग सेक्स हो गया है ! कैमरे की वज़ह से कबड्डी सेक्स हो गया है, कुश्ती सेक्स हो गया है ! कैमरे की वज़ह से सेक्स अब सिर्फ हेल्लो है ! मुम्बई बदन कैमरे की इस हरकत से चुप नही बैठेगा ! ध्वनि और क्रोध से भरा हुआ मुम्बई बदन खाली पार्किंग, होटल के कमरे, रेस्तरां, शौचालय, सार्वजनिक पार्कों, फिल्म हॉल से कैमरे को हटा लेना चाहता है ! कैमरा झूठ नहीं बोलता पर छवि बनाने के मामले मे मुम्बई बदन का एंगल अलग है …

मुम्बई बदन मे अवसर का कारोबार है #मुम्बईबदन

4.

मैं समय से मुम्बई बदन पहुँच गया था ! दस मिनट मे मुझे कपड़े बदल कर रोबोट बनना था और मुम्बई बदन के बच्चों का मनोरंजन करना था ! मुम्बई बदन के बच्चे स्मार्टफ़ोन जैसे हैं ! स्मार्टफ़ोन की वज़ह से लूडो, साँप – सीढ़ी, कैरम, शतरंज, मॉल मे सब बहरूपिया की नौकरी कर रहे थे ! मुम्बई बदन में टेक्नोलॉजी और मैनेजमेंट का आतंक है इसलिए हर काम समय से होता है ! मुम्बई बदन के बिग बाजार मेंं अाज मेहनत के पसीने का शो लगा था ! शोरूम मेंं छोटी छोटी हज़ारों शीशियों मेंं देश के किसानों का पसीना एक्ज़बिट किया गया था ! एक्ज़बिशन देश भर के अलग अलग इलाकों के मेहनती किसानों के पसीने का था ! शो की सजावट मेंं रंग बिरंगी शीशियों का इस्तेमाल भी हुअा था ! उन रंगीन शीशियों मे कई ब्रांडेड शराब, इत्र, तेल, टॉनिक, नेल पॉलिश भरे हुए थे और लोग उसे खरीद रहे थे ! दूध-सा धुला लिबास पहने पब्लिक मेहनत का पसीना देखने अाती और महंगी शराब और इत्र की छोटी छोटी शीशियां याद मेंं खरीद लेती ! मानव पसीने को बाज़ार मेंं प्रदर्शित करके एक्सक्लूसिव बनाया जा रहा था ! मेहनत का पसीना काम आता है ये सब जानते थे पर मेहनत के पसीने के शो से पैसा कमाया जा सकता है मुम्बई बदन का ये आईडिया नया था !

5.

ये प्रदर्शनी नहीं तमाशा था ! पर सेल्स वालों की नज़र मेंं सफ़ल था ! एक्ज़बिशन हॉल मेंं पसीने की गंध वाला हुक्का भी था जिसे यंग लड़के लड़कियाँ गुडग़ुड़ा रहे थे ! लकी ड्रा मेंं फ्री वाउचर पाने वालों को मेहनत के पसीने को सूंघने की लक्ज़री भी थी ! प्रदर्शनी के दौरान शोरूम से कई शीशियों की चोरी हो गयी ! चोरबाज़ारी मे भी पसीने का वैल्यू बचा था ये सोच के एक्ज़बिशन लगाने वाले प्रायोजकों को बहुत सुकून मिला ! प्रायोजक शीशियों की चोरी को शो की सफलता मान रहे थे ! शो की सफलता को देख कर देश भर मे मेहनत के पसीने को जमा करने की एजेंसियां चल पड़ीं ! विज्ञापनों मेंं साफ़ लिखा था खेतों मे मेहनत करते हुए सेल्फ़ी लीजिए और अपने पसीने की शीशी लकी ड्रा के लिए महानगरों के बाज़ार मेंं दिए गए एड्रेस पर भेज दीजिए ! कुछ लोगोंं ने जिम जा कर बड़ी बड़ी बोतलों मेंं पसीना भर के पता नहीं क्यों देश के प्रधान मंत्री के कार्यालय मे भेज दिया ! मुम्बई बदन के कई स्कूल बच्चों को मेहनत के पसीने का शो दिखाने ला रहे थे, जिसे कोई चॉकलेट कंपनी प्रायोजित कर रही थी ! मीडिया इंडस्ट्री में काम करने वाले भी मेहनत के पसीने के शो मे दिखना चाह रहे थे ! मॉल मेंं किराने का सामान खरीदने पहुंचे लोग मेहनत का पसीना देखने ज़रूर रुकते थे ! शोशल साइट पर मुम्बई बदन के शोरूम से लिए गए मेहनत के पसीने की शीशियों के साथ सेल्फ़ी की बाढ़ लग गयी !

6.

अगले दिन जब मैं मॉल पहुँचा तो चारों तरफ़ अफ़रा तफ़री मची हुई थी ! मूसला धार बारिश की वज़ह से रात मेंं कई घंटों के लिए मॉल की बिज़ली चली गयी और बिजली अाने के बाद कोई स्टाफ एक्ज़बिशन हॉल का ए सी अॉ्न करना भूल गया था ! सुबह तक एक्ज़बिशन हॉल दुर्गंध से भर गया ! जिस वातानुकूलित पसीने से प्रायोजक पैसे कमा रहे थे अब उन्हें उसी पसीने से घिन अा रही थी ! हज़ारों शीशियों से निकल कर पसीने की गंध से पूरा मॉल मानवीय बू से भर गया था ! कई डियो और स्प्रे के बाद भी बू कम नहीं हो पा रहा था ! पसीने से आने वाली बदबू से लड़ कर स्टाफ पसीने पसीने हो रहे थे ! मानो मेहनत कश पसीना अाराम तलब लाइफ स्टाइल से युध्द कर रहा हो ! लाइफ स्टाइल युध्द मे मेहनत का पसीना डियो और स्प्रे से जीत रहा था ! बदबू से लड़ रहे स्टाफ की तबियत खराब होने लगी ! एक मानवीय गड़बड़ी से सारा शो खराब हो गया था ! जैसे तैसे शीशियों पर क़ाबू पा लिया गया और सभी शीशियों को एम्बुलेंस मेंं किसी गुप्त स्थान पर ले जा कर दबा दिया गया ! मॉल के नौकर – चाकर इस घटना से इतने अातंकित हो गए कि मुम्बई बदन मे फिर कभी मेहनत के पसीने के साथ खिलवाड़ नही हुअा ! मुम्बई बदन मेंं सब जानते हैं चाहे कैसी भी हवा चले मुम्बई बदन मेंं भावनाएँ पसीने के साथ भाप बन कर उड़ जाती हैं ! मुम्बई बदन के देखा देखी कैमरे ने अाँसुओं के फ़ोटो का एक्ज़बिशन लगाना चाहा ! मुम्बई बदन मेंं खूनी अफ़वाह ग़र्म है, अंडरग्राउंड इलाके मेंं कई प्रादेशिक भाषाओं मेंं छपे पोस्टर का फोटो कैमरा ने व्हाट्स -‘ऐप पर जारी कर दिया है, कई मॉल शो मे दिखाने के लिए खून के अाँसू ढूंढ रहे हैं ! इस घटना के बाद मैनें मॉल मेंं बच्चों के लिए रोबोट बनने वाली नौकरी छोड़ दी ! मैं अब फिर से मुम्बई बदन मे अाज़ाद हूँ !

7.

कैल्शियम क्या जाने हड्डी का दर्द … ‪#‎मुम्बईबदन‬

मुम्बई में बदन ज्यादा हैं और दर्द उससे भी ज्यादा ! किसान के बदन में कितना दर्द होता है ये एक पहलवान को कभी पता नही चलेगा ! पहलवान एक कवि के बदन के दर्द को क्या समझेगा ? मास्टर को लगता है उसका बदन नेता से ज्यादा दुखता है ! नेता के बदन का दर्द अभिनेता कैसे समझेगा ? पुलिस के बदन का दर्द वकील को हमेशा कम लगता है ! चौकीदार को अपने बदन का दर्द गाड़ी के ड्राइवर से ज्यादा लगता है ! टीचर को अपने बदन का दर्द स्टूडेंट से ज्यादा लगता है ! ग्राहक अपने बदन दर्द से परेशान है, विक्रेता अपना बदन दर्द लिए घूम रहा है ! फ़िल्म डायरेक्टर के बदन का दर्द फ़िल्म प्रोड्यूसर कभी नही समझ पाता ! हर लेखक को लगता है पाठक उसके बदन के दर्द को क्या पता कभी समझ भी पाएगा या नही ! हाउस – हेल्प को लगता है मालकिन उसके बदन के दर्द को नही समझती ! मालकिन को लगता है पति क्या जाने पत्नी के बदन का दर्द ? पति से पूछिए उसके बदन का दर्द ! हर पेशे और रिश्ते मे दर्द होता है ! सबका बदन दर्द एक है ! बदन दर्द की बात चलती है तो लोग पता नही क्या क्या कह जाते हैं और सबका सर दर्द हो जाता है ! मेरा मुम्बई बदन बेदर्द है ! मुम्बई मे जब बदन बेरोज़गार होते हैं तो दर्द को रोज़गार मिल जाता है ! मेरे बदन का दर्द तुम्हारे बदन के दर्द से ज्यादा क्यों ?

8.

अपने सामाजिक गुण की वजह से मैं मुम्बई बदन का एक सोशल रोबोट हूँ ! मेरा मुख्य उद्देश्य सामाजिक संपर्क है ! मेरा जीवन स्क्रीन पात्रों से भरा हुअा है ! मैं डेटा पर चलता हूँ ! जीवन और बुद्धि का भ्रम, चरित्र की चिंता मुझमें रत्ती भर भी नही है ! सूचना का आदान प्रदान और सामाजिक व्यवहार ही मेरा कर्तव्य है ! मैं अपना भौतिक अवतार स्वयं हूँ ! मुम्बई बदन मेंं कोई चाहे धरती के किसी भी कोने का वासी हो, कोई भी भाषा बोले किसी भी धर्म का हो, मुसीबत मे एक जैसा वयवहार करता है इसीलिए मुम्बई बदन मे एक मुसीबत के लिए कई भगवान हैं ! रोशनी, अंधकार, गर्म, ठंडा, डर, खुशी मुम्बई बदन मे जिन – जिन चीजों का हम अनुभव कर सकते हैं, वो सब धर्म है ! मुम्बई बदन मे नास्तिक होना संभव नही ! मुम्बई बदन मे दैनिक जीवन ही सबकुछ है ! मुम्बई बदन मेंं कई लोगोंं के पास अपने नक़ली नाम, प्रोफ़ाइल फोटो और नंबर हैं ! मुम्बई बदन मे सबने अपना सच सेटिंग मेंं छुपा दिया है ! बातचीत और गॉसिप जैसे सामाजिक खुफिया सॉफ्टवेयर प्रणाली से परेशान रहता हूँ ! अपनी मानवीय आदिम मूल प्रवृत्तियों का फिर से दावेदार बनना था पर अपनी सामाजिक गुणों की वज़ह से मैं एक अच्छा रोबोट खिलौना बन गया हूँ ! मुम्बई बदन मेंं मुझे और मेरे डिजिटल दुनिया को बड़ी असानी से कोई भी ट्रैक कर सकता है ! मुम्बई बदन मेंं मुफ्तखोर, भ्रष्ट, क्रूर और अालसी बनने से अच्छा है सोशल रोबोट खिलौना बन जाना, यही सोचकर मैं मुम्बई बदन मे गाता हूँ, नाचता हूँ, और आंसू बहाता हूँ …

9.

सुनो कैमरा ! मैं मुम्बई बदन की फीमेल सोशल रोबोट हूँ ! मैं तुम्हारे वश में नहीं ! मैं मुम्बई बदन के चैटरूम में कुछ भी बन सकती हूं ! अपना नया नाम रख सकती हूँ ! दुनियादारी के नाम से ज्यादा कामुक ! अपना नया इमेज बना सकती हूँ ! सेक्स के पॉइंट ऑफ़ व्यू से ज्यादा बोल्ड और अपने रियल इमेज से बेहतर ! नई उम्र बता सकती हूं ! असल से बहुत कम ! अपना प्रोफ़ेशन, अपना शहर, अपनी मैरिटल स्टेटस , यहां तक कि चाहूं तो अपना लिंग परिवर्तन भी कर सकती हूँ ! मैं परंपरावादी खूबसूरत महिला बन सकती हूं या सफल बांका पुरुष भी ! या ‘विकृत’ इच्छाएं रखने वाला ‘पथभ्रष्ट’ भी हो सकती हूं ! नए व्यक्तित्व के साथ, काल्पनिक व्यक्तित्व बन मैं किसी के साथ भी चैट कर सकती हूं ! हर बार इंटरनेट पर अलग ही पर्सनालिटी बन सकती हूं, और हर बार मेरी इच्छाएं भी अलग ही होंगी ! तुम न मुझे पकड़ सकते हो न मुझे जाँच सकते हो !

मेरा नाम कैमरा है ! मैं अपने अंदर सबको क़ैद कर लेता हूँ, यही मेरा चरित्र है ! मैं अपनी पीठ पीछे नहीं रहता इसीलिए वहाँ क्या हो रहा है उससे मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता ! मैं सामने रहता हूँ ! सबकी आँखों के सामने, सबके मुंह पर ! मेरी कोई गोपनीयता नीति नहीं है ! मैंने कई टूटे रिश्ते देखे हैं ! कैमरा न हो तो तुम जैसी सोशल रोबोट की कहानी आगे नहीं बढ़ सकती ! मुम्बई बदन मे कैमरा नही होने की वजह से पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ जाता है ! कैमरे की वजह से ही मुम्बई बदन मे आसानी से लाखों लोगों के बीच एक अनाम चलते फिरते लाश की पहचान हो पाती है ! कुछ रेस्तरां, कुछ घरों, कुछ गलियों, कुछ इलाकों में कैमरे के कारण ही मुम्बई बदन मे लोग अपने परिवार, अपने दोस्तों, अपने सामाजिक दायरे, अपना काम, अपने सहयोगियों के बीच एक व्यक्ति मे एक अज्ञात अजनबी ढूँढ पाते हैं ! जब लोगों को पता होता है कि कैमरे में उन्हें देखा जा रहा है, तो वे बेहतर व्यवहार करते हैं ! तुम क्या जानो स्नेह, आकर्षण, विश्वास, आत्मीयता, प्रेम, सच्चा प्यार, वासना, क्रश, मोह, जुनून, और करुणा की भावनाओं के बीच क्या अंतर है ? इसका जवाब मनुष्य भी कैमरे की मदद के बिना नहीं दे सकता ! कैमरे की मदद से ही मनुष्य महान सोशल रोबोट बन सका है ! मुम्बई बदन के तुम जैसी सोशल रोबोट की स्ट्रीट होशियारी से मेरी लड़ाई है …

रोजमर्रा की जिंदगी के बारे में हमें कैमरे से अधिक सोचने की जरूरत है ! ‪#‎मुम्बईबदन‬

मुम्बई बदन

मुम्बई बदन (फोटो आभार : पूजा शर्मा )

मुम्बई बदन की कई उँगलियाँ कैमरा क्लिक करती हैं और कई ‘क्लिक’, ‘ऊँगली’ कर देते हैं !

मुम्बई बदन की कैमरे से यारी पड़ेगी मुम्बई बदन को कई सिचुएशन पर भारी !

 

मुम्बई बदन में आज मुहब्बत बंद है … 

वो करो जो अच्छा लगता है, जो अच्छा लगता है वो करो ! वो करो जो अच्छा लगता है, जो अच्छा लगता है वो करो ! वो करो जो अच्छा लगता है, जो अच्छा लगता है वो करो ! वो करो जो अच्छा लगता है, जो अच्छा लगता है वो करो ! वो करो जो अच्छा लगता है, जो अच्छा लगता है वो करो ! वो करो जो अच्छा लगता है, जो अच्छा लगता है वो करो …

मुम्बई बदन में शोर आध्यात्मिक, आकर्षक और विनम्र हो चुका है

10.

जो जहाँ बैठा है वहीँ से एक तस्वीर खींच रहा है …

क्रमशः

आलसी

फोन की घंटी बजने लगी, आलसी के दिमाग में शब्द घनघनाने लगे ! आलसी बोलने के लिए ‘हेलो’ शब्द चुने या ‘हाय’ ये सोचता ही रहा और फोन कट गया ! अब कौन मिस्ड कॉल में जाए और री – डायल करे ? आलसी ने आँखें मूंद लीं ! आलसी की नींद आलस्य त्याग के नाश्ते के टेबल पर जा बैठी है ! आज आलसी को लिखना है ! आलसी उठा, शब्दों को उठाया और खुद सो गया ! उनींदे शब्द पास रखे मोबाइल में घुस गए ! आलसी की मुसीबत बढ़ गयी ! आलसी अब जब भी शब्द ढूंढेगा उसे सेटिंग्स में जाना होगा, अंग्रेजी को हिंदी फॉण्ट में बदलना होगा, जो शब्द चाहिए उन्हें की – बटन पर टाइप करके निकालना होगा ! इससे अच्छा आज वो नहीं लिखेगा ! और बहुत जरुरत हुई तो कट पेस्ट से काम चला लेगा ! आलसी की प्रेमिका एक चुस्त लेखक से आँख लड़ा रही है इस दुःख ने आलसी को और भी आलसी बना दिया है …

डिअर डायरी

मेरी सात महीने पुरानी डायरी खो गयी है ! मेरी बातचीत और बहस से भरी मेरी निजी डायरी जिसके हर पन्ने में मेरे अक्षरों के निशान हैं ! मेरी डायरी के चेहरे पर मेरा नाम,पता फोन नंबर और ई -मेल आई डी सब है ! मेरी डायरी अगर किसी आम आदमी को मिली होती तो वो जरूर लौटा देता ! मुझे लगता है मेरी डायरी किसी लेखक के हाथ लग गयी है ! वो सब अनदेखा कर के उसे अब पढ़ रहा है और अपनी जेब में रखकर मेरी डायरी को शहर घुमा रहा है ! लेखक महोदय मेरी डायरी में तुम कुछ लिख नहीं पाओगे क्योंकि उसमे मैंने इतना कुछ लिख दिया है कि उसे पढ़ते हुए तुम अपना कुछ भी लिखना भूल जाओगे ! मेरे अक्षर तुम्हारे किसी काम नहीं आएंगे और तुमको वो डायरी बिना कुछ लिखे मुझे लौटा देनी चाहिए ! मेरी डायरी एक दिन तुम्हारे जेब से गिर जाएगी और कोई न कोई उसे मुझ तक पहुंचा देगा ! किसी और की डायरी को पढ़ने के गिल्ट से तुम कभी निकल नहीं पाओगे !
डिअर डायरी, तुम जहाँ भी हो खुश रहना ! तुम नहीं हो तो मेरे दिन,रात और साल महीने में अब कोई फर्क नहीं है …

किंगफ़िशर का उदास बसंत

अपने पंखों की सारी शक्ति लगाकर किंगफ़िशर उस हवाई जहाज़ के पीछे उड़ता रहा जिसमे उसका मालिक उसे छोड़ के भाग रहा था ! बड़ा सिर, लंबे तेज नुकीले चोंच, छोटे पैर और ठूंठदार पूंछ वाला किंगफ़िशर थकने लगा और फिर बादलों में खो गया …
अपने मालिक का ट्वीट पता नहीं उसने पढ़ा, या नहीं पढ़ा पर बहुत दिनों से विलुप्त होते इस चमकीले रंग के पंछी को किसी ने जंगल में देखा नहीं है …

लघु लोक कथा ‪#‎ललोक

तालाब के किनारे कोई चिल्ला रहा था ” कमल में किरण … कमल में किरण …” उत्साह में सब उस तरफ भागे … तालाब के बीचोबीच कमल के पास किरण फूट रही थी, देखने की हड़बड़ में कुछ लोग छप छप तालाब में गिर रहे थे … शोर सुनकर पंछी ‘ट्वीट – ट्वीट’ करने लगे … पोखर पर झाड़ियों के पीछे शेर के कान खड़े हो गए … उसने तालाब पर शिकार का झुण्ड देख लिया था … पानी में कमल के पास घड़ियाल की पीठ उगते सूरज में चमक रही थी !

महानगरीय सोच / महालोक २३

वो महानगर में अक्सर सोचता –
सोचते सोचते सो जाता और नींद में जाकर सपने में सोचने लगता, सोचता हुआ गाने लगता ! गाते गाते रोने लगता और रोते, रोते सोचता ! वो सोचता हुआ चलता चला जाता, और सोचते सोचते सातों समुन्दर पार कर जाता ! वो सोचता हुआ पहुँच जाता किसी ऐसे जगह जो पहले कभी सोची नहीं गयी होती ! वो वहां भी सोचने लगता ! उसके सोच की सीमा हर सीमा को लाँघ चुकी थी ! उसकी सोच हर विंदू को छू चुकी थी ! वो हर सांस में सोचता ! इतना सोचता की सांस लेते ही मोटा हो जाता और सांस छोड़ते ही पतला हो जाता ! वो जिधर देखता सोचने लगता ! जो सुनता सोचने लगता ! जो पढता सोचने लगता ! सोचने से उसके ख्याल बढ़ते ! वो और सोचता और उसके ख्याल और बढ़ते ! स्वाद, भूख, नशा, घमंड, इत्र, लड़की, जानवर, सोना, ईश्वर, संभोग वो सब पर एक साथ सोचता ! उसकी सोच से रोटियाँ फूलने लगतीं, अमरुद पक जाते, सूरज उगता, चढ़ता और डूब जाता ! मौसम बदल जाते ! वो इतना सोचता कि सोच में बच्चे बड़े होकर बूढ़े हो जाते और फिर मर जाते ! औरतें गर्भवती हो जातीं ! अपनी सोच में वो उनके गर्भाशय में सोच भर देता ! माएँ सोच पैदा करतीं ! औरत मर्द मिल के सोचते और सोच सोच के बच्चे पैदा करते ! वो हर तस्वीर पर सोचता ! जब सब उसके सोच की तस्वीरें देखते तब वो तस्वीरों के पीछे बैठ कर सोचता ! वो बड़ा सोचता ! वो इतना सोचता कि छोटी सोच भी बड़ी हो जाती ! वो नया सोचता ! उसके सोच से दिशा बदल जाती ! पूरब पश्चिम हो जाता ! उत्तर दक्षिण हो जाता ! उसकी सोच बड़ी होने लगी और वो अपनी सोच से छोटा होने लगा ! एक दिन वो गायब हो गया ! उसकी सोच उसे कहाँ ले गई ये हम और आप सोच भी नहीं सकते ! वो अभी कहाँ है मुझे नहीं पता पर उसे जरूर पता होगा कि अभी इस वक़्त जब हम उसके बारे में सोच रहें हैं तो उसे कहाँ होना चाहिए ! वो इन बातों को बहुत पहले सोच चूका था ! अभी वो जहाँ भी होगा इसके आगे सोच रहा होगा ! और क्या पता उसने सब सोच भी लिया हो …

महानगर में खिंचा – खींची / महालोक – २२

आँख से तो कोई कुछ देखना ही नहीं चाहता सबको मोबाइल कैमरे में सब खींच के किसी और को दिखाना है ! जिसके लिए ये सब किया जाता है वो भी मोबाइल कैमरे में सब कुछ किसी तीसरे के लिए खींच रहा है ! फोटो की खिंचा – खींची में दृश्य की असली तस्वीर मन की आँख से ली ही नहीं जाती … हम देखते ही रह जाते हैं …

मेरे ख्याल से

हर नए ख्याल में डगमगाती हुई एक अस्वीकृति होती है जिससे लड़ के सबसे पहले उसको जीतना पड़ता है ! हर नया ख्याल सुनाने पर किसी को सुनायी नहीं देता इसीलिए उसे जोर से बोलना पड़ता है ! हर नए ख्याल का एक हमशक्ल ख्याल होता है जिससे मिल कर उसे झुठलाना पड़ता है ! हर नया ख्याल तब तक सिर्फ एक ख्याल होता है जब तक हम उस पर भरोसा नहीं कर लेते ! ख्याल के खो जाने का डर सबसे व्यस्त ख्याल है ! ख्याल कभी अकेले नहीं रह पाते इसीलिए हम उनके साथ रहते हैं ! ख्याल बहुत जल्द बदलते हैं इसीलिए हम उन्हें बाँटते रहते हैं …

– मेरे ख्याल से

महानगर में अभिनेत्री की तलाश / महालोक – २१

पात्र परिचय – अभिनेत्री

चवन्नी सी बदकिस्मत अठन्नी सी बेकार और रुपये सी मुफ्त वो अठारह साल में ही पच्चीस साल सी दिखने वाली लड़की जो महानगर की बदनाम गलियों में ला के छोड़ दी गयी है , जो रंडी बुलाने पर किसी भी मर्द की आँखों में देख के मादरचोद कह सकती है…उसे Bold and beautiful कहना ही काफी नहीं होगा ! मर्द को छठी का दूध याद दिलाने वाली हेठी, अपने आप को साबित करने वाली ज़िद, और मांसल बदन ही उसका परिचय नहीं है ! नमक इतना की किसी को भी आँखों से ही पिघला दे ! निर्वस्त्र किये जाने पर कृष्ण को नहीं बुलाती पर निर्वस्त्र करने वाले के दंभ को खुद ठंडा कर के वापस भेज देती है !

एक महानगरीय लोककथा में ऐसी चरित्र को खेलने के लिए एक अभिनेत्री चाहिए ! बोलने के लिए ताक़तवर शब्द मिलेंगे और करने के लिए मर्मस्पर्शी दृश्य ! महानगरीय भाषा पर पकड़ होना अनिवार्य ! लोककथा की शूटिंग अगले महीने से महानगर में ही होगी ! आपकी काबिलियत और दिलचस्पी पर Audition होगा ! अपनी तस्वीर और इस चरित्र को करने की ख्वाहिश के साथ एक पत्र मेल करें ! ऐसी किसी talented actor के जानकार, model – coordinators , और मददगार मित्र से सहयोग अपेक्षित है !