हिस्ट्री की स्त्री

हिस्ट्री की स्त्री

शादी के बाद जब से मैंने अपनी पत्नी से कहा है कि मेरी प्रेम कहानी अब हिस्ट्री हो गयी है, तब से हिस्ट्री की बात चलते ही मेरी पत्नी के सामने मेरी पुरानी प्रेमिका खड़ी हो जाती है ! कल मेरे मुँह से हिस्ट्री की स्त्री पद्मावती का नाम सुनते ही मेरी पत्नी के कान खड़े हो गए !

मेरी पत्नी हिस्ट्री की छात्रा रही है और लगातार मेरे ब्राउज़र के हिस्ट्री की जाँच करती रहती है ! मेरे जीवन के पूर्व की घटनाओं और उससे जुड़े लोगों के जीवन का अध्ययन ही मेरी पत्नी के ज्ञान का स्त्रोत है ! उनको इतिहास की सभी तारीखें याद हैं, जैसे मेरी प्रेमिका 2009 में दुबई शिफ्ट हो गई ! साल 2013 में दुबई – देवी को बच्चा हुआ ! 2014 में 24 मई को इंडिया आयी, 22 जून को चली गयी …

अतीत की घटनाओं के बारे में मेरी पत्नी के मौखिक इतिहास के ज्ञान को सुन कर इससे पहले कि आप किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचे आपको बता दूँ मेरी शादी के सात वर्ष बाद भी मेरी पत्नी का प्यार मुझसे कम नहीं हुआ है ! एक पुरुष की पहुंच के बाहर की बारीक संवेदनाओं का अनुभव एक स्त्री ही कर सकती है !

मुझसे प्रेम की वजह से ही मेरी पत्नी का मेरी हिस्ट्री की स्त्री से प्रेम बना हुआ है !

इतिहास का क्षेत्र बड़ा व्यापक है ! किसी के प्राचीन इतिहास को जानना एक कठिन प्रक्रिया है ! वैसे तो इतिहास सिंधु घाटी सभ्यता से शुरू होता है, पर मेरी इस कहानी का इतिहास मेरा आधुनिक काल का इतिहास है – जिसमे मेरे जीवन का आधुनिक काल दर्ज़ है ! मेरा प्राचीन अतीत – जिसमें मेरे बचपन का इतिहास दर्ज़ है और मेरी शादी के बाद अर्थात स्वतंत्रता के बाद का इतिहास – मेरे जीवन काल के ये खंड मेरी पत्नी को मेरे इतिहास की कहानी का कालानुक्रमिक विवरण देते हैं ! मेरी पत्नी का मानना है कि विकिपीडिया पर उनके बारे में पढ़ा जाता है जिनका अपना इतिहास नहीं होता !

मैं अपना इतिहास लिखना कहाँ से शुरू करूँ ? मेरा इतिहास मंदिरों, परिसरों, महलों, मस्जिदों, कब्रों आदि से भरा है ! मैं अपनी हिस्ट्री की स्त्री के साथ इन स्थानों में भटक चूका हूँ ! मेरा इतिहास जान कर कोई भी डर सकता है इसलिए मेरे इतिहास में सूर्यास्त के बाद प्रवेश कानूनी तौर पर प्रतिबंधित है !

मॉडर्न इतिहास की एक स्त्री ने अपने बेटे का नाम तैमूर रखा तो मेरे घर में ये बड़ी बहस का विषय बन गया था ! कई लोगों ने इसे व्यक्तिगत मामला कहा तो कई लोगों ने इस बात पर एतराज़ जताया और कहा कि एक जालिम आक्रमणकारी के नाम पर बेटे का नाम रखना ग़लत है ! इस इतिहास की वजह से देश की घर – घर की हवा में जहरीली गैसों की मात्रा कानूनी तौर पर तय सीमा को पार कर गयी थी !

आज टेलीविजन पर दिखाए गए इतिहास को सिनेमा में दिखाए गए इतिहास से मिलाना एक्स गर्लफ्रेंड को पत्नी से मिलाने जैसा है ! ऐसी ऐतिहासिक मिलन से पैदा मिक्स्ड मिडिया का इफ़ेक्ट आप के जीवन की शांति भंग कर सकता है !

ज्ञान और गूगल पर आधारित इतिहास एक पिघलने वाला पात्र है जिसे जो चाहे अपने मनपसंद आकार में ढाल सकता है !

इसलिए फास्ट फॉरवर्ड …

अब किस्सा ये है कि दुबई की देवी, ‘पद्मावती’ कॉन्ट्रोवर्सी के बाद मेरा ‘इतिहास’ जानना चाहती है ! मेरे लिए ये बहुत नाज़ुक मसला बन गया है ! मैं पद्मावती को खुद नहीं जानता !

नौ हज़ार वर्षों के इतिहास, सभ्यता और विरासत में हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख जैसे चार धर्मों की जन्मस्थली के सत्ताईस यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों, साठ राष्ट्रीय उद्यान, चार सौ जंगली जीवन अभयारण्य, साढ़े सात हज़ार किलोमीटर समुद्री तटों , लाखों हेक्टेयर जंगल, डेढ़ सौ नृत्य रूपों, आयुर्वेद और योग में पांच हज़ार वर्षों के अनुभव और बाइस भाषाओं में डेढ़ हज़ार बोलियों के साथ जो कोई भी पांच वर्षों तक साधारणतः भारत में रहा है, वह भारत का इतिहास हो गया है ! अपनी हिस्ट्री की इस्त्री को कौन सा इतिहास समझाऊं ? यही मेरी उलझन है !

पुरुष चाहे जितना अक्लमंद हो, ऐसी कुछ बातें पृथ्वी पर मौजूद हैं जिन्हें समझना संभव नहीं है, ऐसी बातों में प्रमुख है स्त्री ! स्त्री को समझने में पुरुष नाकाम रहा है ! अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार भारत के हिस्ट्री में स्त्री को देवी का दर्जा दिया गया है ! ,यह बात और है कि इस देवी के साथ हमारा समाज क्या सुलूक करता है ये भी टाइम्स ऑफ इंडिया को पता है !

हमारे देश में इतिहास हाथ के कौशल से तैयार किए गए रचनात्मक उत्पाद हैं जिनके लिए किसी आधुनिक मशीनरी और उपकरणों की मदद नहीं ली जाती पर इसका उपयोग प्रशासन की मशीनरी में सफलतापूर्वक उत्पात मचाने के लिए किया जाता है ! आजकल हस्त – निर्मित उत्पादों को फैशन और विलासिता की वस्तु माना जाता है और हमारा हैण्ड मेड हिस्ट्री उन्ही में से एक है !

मेरी इतिहास में पद्मावती कैसे घुस गयी ? यही सोचता हुआ मैं भी इतिहास में घुसने की कोशिश करने लगा ! इतिहास में प्रवेश करने के लिए कोई कठोर नियम नहीं है ! कोई भी इतिहास में प्रवेश कर सकता है ! भारतीय राजनीति में कई प्रसिद्ध लोग जो अपनी जवानी में ही इतिहास में प्रवेश कर गए थे, आज भारतीय इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों में से एक बन गए हैं !

मैं भी इतिहास में प्रवेश करने की कोशिश करने लगा ! इतिहास रिश्तों की एक गुफा है और इस गुफा के अंदर सबकी हिस्ट्री की स्त्री रहती है ! वहां अँधेरा था ! दोनों तरफ पत्थर की बनी हुई ध्वस्त कलाकृतियां थीं ! गुफा में इन इतिहासों पर चलना सबसे बड़ी टेढ़ी खीर थी ! इतिहास के रास्ते दुनिया के सबसे खतरनाक रास्तों में से एक हैं जिस पर हर पल मौत मंडराती रहती है ! इतिहास के इन रास्तों से गुजरने वाला कभी भी मौत के मुंह में जा सकता है ! इन इतिहासों से गुजरना तो दूर इन्हें देखना ही बड़ा भयावह होता है ! अगर इन इतिहासों में कोई झाँकने की सोचे तो उसे दिलो – दिमाग से फौलादी होना चाहिए !

गुफा में भारत के विविध पारम्परिक वर्गों के धर्मों से जुड़े रीति – रिवाज़ों के अनुरूप करोड़ों इतिहास बिखरे हुए थे ! कुछ इतिहास तो मूल रूप से सिनेमा के लिए ही बनाए गए थे जो विवादों के कारण लोगों द्वारा बहुत पसन्‍द किए जाते हैं !

काल्पनिक पद्मावती राजस्थान की लोक चेतना में अपने सतीत्व की रक्षा के लिए जौहर करने वाली एक अत्यंत साहसी रानी के रूप में उपस्थित हैं पर गुफा में कई पद्मावती जातिगत उपेक्षा, सैलरी में अंतर, बलात्कार और यौन उत्पीड़न, जैसी असमानताओं से घिरी थी ! विद्वानों का मानना है कि प्राचीन भारत में महिलाओं को जीवन के सभी क्षेत्रों में पुरुषों के साथ बराबरी का दर्जा हासिल था !

गुफा में ऐतिहासिक महिलाओं की कमी थी ! पद्मावती को समझने के लिए गुफा में पद्मावती से मिलना बहुत जरुरी था ! मैं इतिहास की गुफा में घुसा हुआ था ! मेरी पत्नी बाहर से ये सब देख रही थी ! मेरी हालत विचित्र थी ! अपनी पद्मावती को इतिहास की पद्मावती में ढूंढ रहा था !

‘ सेल्स में घुसिए इतिहास में क्यों घुस रहे हैं ? ‘ मेरी पत्नी ने कहा ‘ घुसना है तो शेयर मार्किट में घुसिए ‘ वो आगे बोली ! ‘ देखिये युवाओं को वो भी पॉलिटिक्स में ही घुस रहे हैं, और आप आउट डेटेड इतिहास में घुस रहे हैं ! ‘

फास्ट फॉरवर्ड …

तुम इतिहास में घुसे की नहीं ? मेरी प्रेमिका ने पूछा ‘ तुम अपने इतिहास से इतना डरते क्यों हो ? उसने मुझ से हैश टैग में इंस्टाग्राम पर पूछा !

मैं अपनी प्रेमिका को ये कैसे समझाऊँ कि मेरे हर इतिहास के पीछे की वास्तविक कहानी फुलाए हुए अहंकार के संघर्ष से उत्पन्न हुई व्यथा की कहानी है !

मेरे इतिहास में मेरी पत्नी के साथ मेरा पहला युद्ध हिस्ट्री की स्त्री के लिए ही हुआ !

फास्ट फॉरवर्ड …

मेरी पत्नी मेरा इतिहासकार है ! पत्नियों से बेहतर इतिहासकार मैंने नहीं देखा ! मेरी स्त्री के पास एक ऐसा शास्त्र है जिसके अंतर्गत मुझसे जुडी पृथ्वी और उसके वायुमण्डल के बाहर होने वाली घटनाओं का अवलोकन भी किया जा सकता है !

फास्ट फॉरवर्ड …

देश में रोटी का इतिहास चाहे न हो संगमरमर का इतिहास है !

इति

भीड़ की बरसात

भीड़ और बरसात में मुझे समानता दिखती है ! भीड़ शब्द का उपयोग ऐसे स्थान पर किया जाता है, जहाँ मनुष्य का कोई समूह हो ! जहाँ लोग बिना किसी पंक्ति के यहाँ – वहाँ एकत्रित हो जाते हैं ! बरसात में पानी के बूंदों का भी यही हाल होता है ! बादलों को चीर कर पानी की बूँदें भीड़ की तरह समूह में धरती पर बरस पड़ती हैं और यहाँ – वहाँ एकत्रित हो जाती हैं ! मुख्यतः हम भीड़ को हमेशा कंट्रोल कर मार्ग को सामान्य बनाने की कोशिश करते रहते हैं ! बरसात के पानी के साथ भी यही किया जाता है ! भारत में बरसात कृषि, नदी व्यवस्था, जल भंडार और वनस्पतियों और जीवों के उत्थान के लिए बहुत महत्वपूर्ण है ! देश की राजनीती में सत्ता के उत्थान के लिए भीड़ भी उतनी ही जरुरी है ! बरसात भारत का वित्त मंत्री है ! भीड़ भारत का कानून मंत्री है ! बरसात देश के सकल घरेलू उत्पाद को प्रभावित करता है ! भीड़ भी यही करती है ! मेरा मानना है कि पानी की तरह भीड़ का भी संचय और उपयोग हो सकता है ! राष्ट्रीय राजनीति में जबसे भीड़ की बरसात होने लगी है प्राकृतिक बरसात की पहले जैसी हैसियत नहीं रही ! भीड़ की बरसात के माध्यम से राजनितिक मौसम समाज को उसका असली चेहरा दिखा देता है !

आज भीड़ की बरसात के अनगिनत सब्सक्राइबर्स, फॉलोवर्स और व्यूअर्स हैं ! सभी अखबारों की हेडलाइंस और न्यूज चैनलों की सुर्खियों में शुमार ‘भीड़ की बरसात’ सोशल मीडिया पर भी हर मौसम में ट्रेंड करने लगा है ! अपने मजेदार गंवई अंदाज, दिलचस्प चाल – ढाल और बेलगाम ठसक के कारण भीड़ कई नेताओं और अभिनेत्रियों से भी ज्यादा पहचाना जाता है ! बरसात शब्द सुनने में जितना रोमांटिक है, देखने में भीड़ की बरसात भी मिडिया में उतनी ही बढ़िया और रिफ्रेशिंग होती है !

एक ऐसी ही भीड़ की बरसात के मौसम में चार पैर, एक लंबी पूंछ, दो सींग, दो कान, दो आंख, एक बड़ी नाक, बड़ा मुँह और एक सिर वाले जानवर को पशु – मेले से लेकर मैं अपने घर के लिए निकल पड़ा ! सोशल मिडिया का जमाना है इसलिए जानवर का नाम नहीं बताऊंगा !

जानवर के साथ मुझे देखने बारिश के बूंदों की तरह लोग आने लगे ! भीड़ का स्टॉल लग चूका था ! लोग टप – टप टपकने लगे ! कुछ जींस-टी शर्ट में थे और कुछ पैंट क़मीज़ पहने हुए थे ! धीरे धीरे लोग पानी की तरह जमा हो कर भीड़ का हिस्सा बनने लगे ! भीड़ की बरसात की अनुमानित तिथि नहीं होती ! इसके बादल सोशल मिडिया पर बनते हैं ! सबकुछ ‘इट डिपेंडस’ पर निर्भर करता है ! भीड़ के मैकेनिज्म की खोज इलेक्ट्रॉनों, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की खोज जैसी जटिल है और सामाजिक वैज्ञानिक इस पर काम कर रहे हैं ! भीड़ की डिजिटल और डेटा हिस्ट्री तैयार हो रही है !

सड़क पर जानवर के साथ अब भीड़ भी मेरे साथ चल रही थी ! मेरे एक तरफ जानवर था और एक तरफ भीड़ ! मैं भीड़ और जानवर के बीच में था ! भीड़ मेरे साथ चल रहे बड़े जानवर को पहचानती थी ! मैंने देखा जानवर के चेहरे पर हारे हुए आदमी सा भाव है जो जीवित है किंतु सामाजिक रूप से मरा हुआ है ! मुझे लगा मैं अपनी पूँजी को नहीं आइना देख रहा हूँ !

यह मवेशी जानवर रूप में मेरी पूंजी थी ! हम दोनों में सामाजिक समझौता था ! अपने जीवन में हम दोनों एक दूसरे के काम आने वाले थे ! मुझे लगा जानवर मुझसे कह रही है कि वो घडी आ गयी है जब हम एक दुसरे के काम आने वाले हैं ! मैंने अपनी पूंजी की रास और जोर से अपनी मुठ्ठी में भींच ली ! ‘जीते जी मेरी मुठ्ठी से कोई माई का लाल मेरी पूंजी नहीं छीन सकता ! मैं भारत का नागरिक हूँ ! ‘ मैं बुदबुदाया ! मुझे लगा मवेशी मुझे तनाव में देख कर मुझ पर हंस रही है !

घबराकर मैं चुप हो गया था पर घबराहट में मेरे साथ का जानवर बोलने लगा ! लोग दंग रह गए !

भीड़ जानवर की बातें सुनने के लिए बढ़ने लगी ! ‘ आप कौन लोग हैं ? और आप के एकत्र होने का उदेश्य क्या है ? ‘ जानवर ने भीड़ से पुछा !
‘ हम बेरोज़गार और बिलकुल निठ्ठले हैं ! मोबाइल रिचार्ज करने के लिए इधर उधर मारे – मारे भटक रहे हैं ! ‘ भीड़ ने कोरस में कहा ! ‘ फिर ठीक है ‘ जानवर ने कहा ! ‘ भीड़ हंसने लगी !

इस तरह किसी जानवर ने अब तक भीड़ से बातें नहीं कीं थीं ! फिर कुछ समय के लिए खामोशी छा गई ! बोलते हुए जानवर का वीडियो सेंट और शेयर होने लगा ! सेंट – शेयर के क्लिक – क्लिक से लाइक – लाइक भीड़ बढ़ने लगी ! सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म्स कड़कने लगे ! लोल से लोल टकराने लगे ! भीड़ को कुछ चटपटा चाहिए था ! जानवर सब समझ गया ! जानवर जानता था कि भीड़ में से कई लोग अनपढ़ और साधारण मनुष्य हैं ! उनके दिलों तक पहुँचने के लिए उसने उसी ‘मोबाइली’ भाषा का इस्तेमाल किया जिसे भीड़ समझ सकती थी !

भीड़ एक ऐसे क्लोज़्ड ग्रुप को कहते है जहाँ इसका पता लगा पाना मुश्किल हो जाता है कि कौन, कौन है और कहाँ से आया हैं ! भीड़ में औरतें कम होती हैं ! औरतों को चूल्हा – चौका करना पड़ता है ताकि बच्चों के जगने के पहले खाने का इंतजाम हो सके और वो भीड़ बन सकें !

भीड़ सीधी – सादी  परिश्रमी और ईमानदार होती है ! जो भीड़ को कॉम्प्लिकेटेड मानते हैं वो अपने आप को कम पहचानते हैं ! पानी की तरह भीड़ बहुत सरल होती है ! भीड़ सब देखना और जानना चाहती है ! सबकुछ अपने मोबाईल में रिकॉर्ड करना चाहती है ! भीड़ ने मेरी मानसिक अवस्था की तस्वीरें मोबाइल से अनगिनत दिशाओं में तरंगित कर दीं ! बोलते हुए जानवर को देखने धीरे – धीरे बरसात का जल और भीड़ की संख्या दोनों बढ़ने लगीं ! आपसी भाईचारा हमारी परंपरा का हिस्सा रहा है जो अब भीड़ के काम आ रही है ! हिंद देश के निवासी भीड़ में सब जन एक थे ! बढ़ती हुई भीड़ का शोर धीरे – धीरे हमारे क़रीब आता जा रहा था ! आवाज़ें तेज़ होने लगीं ! मैं और जानवर डरे हुए बढ़ रहे थे ! जानवर ने देखा भीड़ ने मुझे डंक मार दिया था !

मैं कोई मवेशी चोर नहीं था और न ही कोई दलाल था ! मेरे पास मेरे और जानवर के सभी जरुरी कागज़ात थे ! फ़ेक न्यूज़ कोई नई चीज़ नहीं है, अर्धसत्य से पूर्ण असत्य तक, सदियों से हर रंग – रूप के झूठ चलते रहते हैं, लेकिन ये सब इतना संगठित हो कर पहले कभी भीड़ नहीं बनी ! मोबाइल इंटरनेट पर लोग अपनी जरुरत की वस्तुओं के साथ खूनी वायरल वीडियो भी आर्डर कर रहे हैं ! जानवर के साथ बने फेक न्यूज़ से मेरे इर्द – गिर्द  खुदरा भीड़ खनकने लगी थी ! दालों, अनाजों और सब्जियों की भीड़ मां – बहन की गंदी – गंदी गालियां दे रही थी ! तेज़ आवाज़ ! खूब हल्ला ! धम – धड़ाक ! दौड़ने – भागने और चिल्लाने की आवाज़ें, मानो कोई हमला हुआ हो ! भीड़ की नाराज़गी बच्चों की तुनकमिजाजी जैसी होती है !

‘ अरे पकड़ो ! ‘ आवाज़ आयी ! भीड़ भागने लगी !
‘ देखो, छिपा है ! ‘ आवाज़ आयी ! भीड़ ढूंढने लगी !
‘ मारो ! ‘ आवाज़ आयी ! भीड़ मारने लगी !
‘ चोर है ! ‘  आवाज़ आयी ! भीड़ कोरस में  ‘ चोर, चोर, चोर … ! ‘
‘ इसको नहीं छोड़ेंगे ! ‘ आवाज़ आयी ! भीड़ किसी को ढूंढने लगती है !
‘ जो बचाने आएगा, उसको भी मारेंगे ! ‘ आवाज़ आयी !  भीड़ कोरस में ‘ मारो, मारो मारो … !’
‘ गिरोह है ! ‘ आवाज़ आयी ! गिरोह का सामना करने के लिए भीड़ गिरोह बन गयी !
‘ आग लगा देंगे ! ‘ आवाज़ आयी ! कोई आग लगा देता है !
‘ मार देंगे ! ‘ आवाज़ आयी ! कोई मार देता है !
‘ फूंक दो ! ‘ आवाज़ आयी ! कोई फूंक देता है  !

तरह तरह के फोटो के साथ नफ़रत, हिंसा, भ्रामक जानकारियाँ, आधा – सच, आधा झूठ ये सब इंडस्ट्रियल स्केल पर लघु उद्योग की तरह पैदा किया जा रहा है, और मोबाईल पर बाँटा जा रहा है ! सोशल साइट्स का नतीजा यह हुआ है कि चारों तरफ लोगों के ऊपर अकेलेपन की भावना हावी होने लगी है और वे दूसरों से कटे – कटे रहने लगे हैं ! कटे – कटे रहने का स्वभाव लोगों में शक की भावना पैदा करता है, खासकर जब पड़ोस में हर वक्‍त हिंसा और अपराध का खतरा मँडराता रहता हो ! शक की भावना बहुत जल्द इंसान के जत्थे को पत्थर – दिल भीड़ बना देती है ! कानून अपने हाथ में ले कर भीड़ ने जनता की भलाई करने के लिए एक अनोखा तरीका निकाला है ! जब लोग मिल – जुलकर एक ही मकसद को हासिल करने के लिए काम करते हैं, तो उन्हें काफी हद तक कामयाबी मिलती है !

मृत्यु को करीब देख कर चार पैर के जानवर ने दो पैरों पर खड़े हो कर अपने दो पैरों से हाथ जोड़ के भीड़ को प्रणाम किया ! सब चकित थे ! सबने मेरी तरफ प्रशंशा से देखा जैसे मैं जानवर का गॉड फादर हूँ ! ‘ कोई जानवर दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता, या तो मुझे खा लो या मेरा दूध पी लो ! ‘ जानवर की ये बात सुन कर भीड़ को लगा जानवर ने उन पर पैलेट गन से ब्लास्ट कर दिया है ! ‘ तुम परमेश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते इसलिए दोष मत लगाओ, कि तुम पर भी दोष न लगाया जाए ‘ जानवर आगे बोला !  ‘ लोगों के समूहों को उन्मादी भीड़ में तब्दील कर देने में सोशल मीडिया का सबसे बड़ा योगदान है ! कौन भड़काऊ तस्वीरें और पोस्ट डाल रहा है.? ‘ जानवर ने कड़क आवाज़ में पूछा ! ‘ क्या चलता है उन्मादी भीड़ के दिमाग़ में यह मुझसे बेहतर कौन बता सकता है जिसने ख़ुद ऐसी भीड़ का सामना किया हो ! ‘ जानवर के मनोहर शब्द सुन कर भीड़ अचम्भे में पड़ गयी ! ‘ स्थिति को काबू में करने के लिए क्या बेक़ाबू होना जरुरी है ? ‘ जानवर ने पूछा ! भीड़ बारिश के बुलबुले की तरह फटने लगी ! ‘ कृपया हमेशा तथ्यों की जांच करें ! हम सभी से अपील करते हैं कि दुर्भावनापूर्ण वीडियो को ध्यान न दें, जिससे कि समुदायों में अविश्वास पैदा हो ! ‘ धीरे – धीरे जानवर एक लाजवाब शिक्षक बन गया ! काफी हद तक सभी भारतीय शिक्षक ही हैं ! जानवर के उपदेश ने भीड़ के दिलों पर ऐसी गहरी छाप छोड़ी कि वे ऐसे शांत स्वभाव वाले जानवर को परेशान करने के लिए अपने मन को समझा नहीं पा रहे थे !

भीड़ की सबसे अच्छी बात ये होती है कि इसके पास लक्ष्य नहीं होता है ! उनको जो चैनल दिखा दो वो देखने लगती है ! भीड़ का असली मजा वही लेता है जो इस बात को जानता है और जिसके हाथ में भीड़ का रिमोट होता है ! आज सोशल मिडिया भीड़ का स्वामी है !

भीड़ की बरसात में भींग कर जब मैं लोगों के नीचे दबा पड़ा था वहीँ भीड़ में एक भाई साहेब दबे – दबे ही मेरा फोन नंबर मांग रहे थे ! मैं अपना फोन नम्बर देने ही वाला था कि मेरी नाक पर किसी की लात के प्रहार ने मेरी आँखें सुन्न कर दीँ ! मैं म्यूट मोबाइल की तरह अचेत हो गया ! बरसती भीड़ और लोगों की चीख चिल्लाहट की कीचड़ में मेरे होश का कमल खिल कर मुरझा गया था ! कई पंजे मेरी गाल पर पहले ही पड़ चुके थे ! हालात भीड़ के नियंत्रण में हैं इस भरोसे के साथ लोगों के चेहरों पर लाइक्स के सारे इमोटिकॉन बिखर गए थे ! जिसके मन में जो आ रहा था सोशल मीडिया पर अपनी ऊँगली से दबा रहा था ! क्लिक – क्लिक की अदृश्य आवाज़ आसमान में गूँज रही थी और लोग सुन रहे थे ! भीड़ चेहरा – विहीन होती है पर भीड़ का हर चेहरा वायरल होने को तैयार था ! भीड़ को गिरफ्तार करने के लिए भेजे गए सिपाही खाली हाथ लौट रहे थे ! सिपाहियों का असर भीड़ पर नहीं हुआ ! अलग अलग रास्तों के कुछ धार्मिक चरवाहे भी आये ! ‘ ये ‘भेड़’ वर्ग के लोग हैं इसीलिए ‘भीड़’ हैं ! इनको तुम जैसा गृहस्थ चरवाहा ही मंज़िल तक ले जा सकता है ! ‘ वे मुझसे बोले ! ‘ ये भेड़ नहीं हैं, ये भीड़ है, सब भूखे भेड़िया हैं ! ‘ यहाँ से निकलो, भागो ! जानवर को घेरने वाली भीड़ को गिरफ्तार करने के लिए भेजा गया दरोगा सिपाही के साथ खाली हाथ लौटते हुए मुझसे बोला ! धर्म और पुलिस अपना काम कर रही थी ! भीड़ भोंके हज़ार, मेरा जानवर चले बाज़ार ! भारतीय जानवर भारतीय भीड़ के साथ बढ़ रहा है ! भीड़ को आप चाहे न पहचान पाए हों पर जानवर को आप जरूर पहचान गए होंगे ! मैं जीते जी भीड़ की बरसात में सोशल मिडिया पर मर चूका था !

योग क्रिमिनल  

सामान्यतः लोग योग को एक ऐसे रूप में जानते हैं जिसमें हठ पूर्वक कुछ शारीरिक एवं मानसिक क्रियाओं के नियमित अभ्यास से आप अपना खोया हुआ स्वास्थ्य और मानसिक शांति प्राप्त कर सकते हैं ! जबकि ऐसा नहीं है ! अब योग का कोई गलत आसन आपको योग अपराधी बना सकता है ! अब ठीक से योग नहीं करना क्राइम है और गलत तरीके से योग करने वाले योग क्रिमिनल हैं !

दरअसल योग एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां भारत सरकार और योग करनेवालों के बीच संवाद पूरी तरह टूटा हुआ है !

विश्व योग दिवस के दिन मुझे एक योग इंस्पेक्टर अपने दो योग सिपाहियों के साथ पकड़ कर पुलिस आसन में पूछताछ स्टेशन ले गए !

‘ सर, मैं इस अपराध के लिए क्षमा चाहता हूं ! मैंने इसे अनजाने में किया था ! कृपया मुझसे दो सौ रुपये लें और मुझे जाने दें ! ‘ मैंने प्रार्थना की !

‘ योग क्रिमिनल को ऐसे कैसे जाने दें ? ‘ योग इंस्पेक्टर त्रिफला चूर्ण जी ने कहा !

‘ योग करना क्राइम है ? ‘ मैंने आश्चर्य से भड़कने का नाटक किया !

‘ आसन को गलत करना क्राइम है ! ‘ त्रिफला जी उवाच ! ‘ योग का बेहतर लाभ पाने के लिए जरूरी है उसकी क्रियाओं का सही अभ्यास ! क्योंकि योग क्रियाओं का गलत अभ्यास शरीर को लाभ पहुंचाने की बजाय समस्याओं का कारण बन सकता है ! कचहरी में आपके योग शिक्षक या योग गुरु के साथ बात करना बेहतर होगा ! ‘ त्रिफला चूर्ण जी ने अपना गला साफ़ करते हुए अपना निर्णय सुनाया !

‘ सर, मैं इस अपराध के लिए क्षमा चाहता हूं ! मैंने इसे अनजाने में किया था ! कृपया मुझसे चार सौ रुपये लें और मुझे जाने दें !’ मैंने दुबारा प्रार्थना की !

‘ हम अक्सर किसी आसन को महज़ इसलिए स्वीकार कर लेते हैं, क्योंकि वे हमारी परंपरागत मान्यताओं के अनुरूप होती हैं ! ऐसा करते वक़्त हम न तो इन आसनो के पीछे के तर्कों की परवाह करते हैं, न उनके प्रभावों की प्रामाणिकता जांचने की ज़हमत उठाते हैं ! ‘ त्रिफला चूर्ण जी मुझे मुक्त और मुफ़्त प्रवचन दिए जा रहे थे ! ‘ ऐसे समय में जब फ़र्ज़ी आसन बनाने और उन्हें प्रसारित करने का कारोबार चरम पर है, हमें योग को लेकर न सिर्फ़ सावधान रहना चाहिए, बल्कि मीडिया पर भी सवाल करने चाहिए ! ‘ त्रि. चूर्ण जी ने मैराथन योग वचन में लघु विराम लिया ! मैंने उनके आगे का अदृश्य माइक अपनी और खिंच लिया ! ‘ सर, मैं इस अपराध के लिए क्षमा चाहता हूं ! मैंने इसे अनजाने में किया था ! कृपया मुझसे पाँच सौ रुपये लें और मुझे जाने दें !’ मैंने करुण गुहार की !

‘ सत्य वचन श्रीमान ! पाई पाई जोड़ना योग है ! आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का उपक्रम पेड़ पर लटक कर नहीं करना चाहिए ! ‘ व्हॉट ??? मैं डर से चीख पड़ा !

‘ आज योग आसन करना एक बड़ी चुनौती है ! आजकल योग के नाम पर जनता को मूर्ख बनाया जा रहा है ! ‘ रिलैक्स श्रीमान ! त्रिचूर्ण जी ने जादूगर की तरह अपनी दोनों हाथ की हथेलियों को हवा में लहराते हुए अपनी हस्तमुद्रा से हाथों की आकृति पान के समान बना दिया और मेरी तरफ मुस्कुराते हुए  कहा ‘ सरकार को जनता के शरीर, मन और प्राण की चिंता खाए जा रही है ! ‘ फिर मुझे घूरते हुए  बोले ‘ पता नहीं जनता का पेट कब भरेगा ? ‘ योग इंस्पेक्टर मुझे अपलक देख रहे थे ! शायद वो मेरा चेहरा पढ़ रहे थे !

‘ पान मुद्रा ‘ मैं अपने आप में बुदबुदाया ! मुझे तत्क्षण लगा कि अब ये मेरी सेल्फी लेंगे और ठीक वही हुआ ! उन्होंने आधे पान में अपना चेहरा खिंचा और सोशल मिडिया पर प्रसारित कर दिया !

मैं डर गया मुझे लगा अब मेरे वायरल होने की बारी है ! ‘ सर ! सारे नियम योग में दिए गए हैं ! ट्रैफिक के नियम से लेकर इ वि एम् तक के नियम ! मैंने सब पढ़े हैं ! सर, मैं इस अपराध के लिए क्षमा चाहता हूं ! मैंने इसे अनजाने में किया था ! कृपया मुझसे सात सौ रुपये लें और मुझे जाने दें !’ मैंने कातर स्वर में कहा ! ‘ मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता हूँ, जो लैंगिक समानता, शिक्षा, गरीबी – उन्मूलन, मानवाधिकार और दक्षिण एशिया में शांति जैसे मुद्दों पर हर दिन आधी रात से ही लगातार सक्रिय रहता है ! मैं योग दिवस की भावना में बह गया था ! ‘ ये सब कहते हुए मैंने महसूस किया मेरा पेट भारी हो गया है ! तनाव से मेरे फेट में गैस भर गया था ! त्रिफला चूर्ण को फाँकने की तीव्र इच्छा प्रबल हो गयी ! ‘ योग विज्ञान और उसकी क्रियाओं की संवैधानिक महत्ता आधुनिक राजनितिक विज्ञान भी स्वीकार करता है फिर मैं किस खेत की मूली हूँ ! ‘ मैंने नाटकीय अंदाज में कहा ! ‘ मैं जानता हूँ केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय का आयुष विभाग प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों, खासकर योग को स्वच्छ रखने की मुहिम चला रहा है ! उसी विभाग के आप योग इंस्पेक्टर हैं ! सरकार की इस पहल से सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों में योग प्रशिक्षकों व योग थेरेपिस्ट के लिए रोजगार के मौके पैदा हुए हैं ! इसलिए योग क्राइम भी बढ़ा है जिसके लिए आप जैसे योग्य क्राइम इंस्पेक्टर हैं ! योग क्राइम की रोक थाम के लिए आप का हर काम सराहनीय है सर ! ‘ मैंने एक ही सांस में सब कह दिया था ! मरे पेट में बल पर गया !

‘ आप ने सरकारी योग के लिए क्या किया है ? ‘ इस सवाल से त्रिफला ने मेरा मुंह बंद कर दिया !

इस सीधे प्रश्न के तनाव से मेरे अंदर कुछ फट गया  ‘ पु उउउउउउउऊँ ईईईई … ‘ अंदर तनाव के गोले के फटते ही मैं पवन मुक्त हो गया था !

साइलेंस उधर !

साइलेंस इधर !

मैंने योग इंस्पेक्टर त्रिफला सिंह को देख कर अशिष्ट होने की अपराध में नज़रें झुका लीं !

‘ जी ! थोड़ा गैस हो गया है ! माफ़ कीजिये ! ‘ मैंने संवाद को फिर से जोड़ा ! ‘ सर, मैं इस अपराध के लिए क्षमा चाहता हूं ! मैंने इसे अनजाने में किया था ! कृपया मुझसे सात सौ रुपये लें और मुझे जाने दें ! ‘ मैंने पवन मुक्त प्रार्थना की !

‘ योग क्राइम कर के आप राहत की सांस लेते हैं ? कैसे ले पाते हैं ? ‘ मेरे अशिष्ट पवन मुक्त आसन से वो बौखलाया हुआ था ! ‘ आप जानते हैं योग पेट के लिए किया जाता है ! ‘ उसने ऊँची आवाज में मुझसे कहा ! मैंने देखा पेट मरोड़ का तनाव उसके चेहरे पर साफ़ था ! तो क्या योग इंस्पेक्टर त्रिफला चूर्ण स्वयं योग अपराधी है ? मेरा दिमाग तेजी से जेम्स बांड बन गया !

‘ योग शरीर के लिए किया जाता है ! ‘ मैंने शांत स्वर में कहा !

‘ आप का पेट क्या पाकिस्तान में है ? आपका पेट आपके शरीर में ही है न ? अपने शरीर को सुनें ! ‘

योग इंस्पेक्टर लगभग चीख पड़ा ! पेट के गैस की छटपटाहट कोई भी उसके चेहरे पर पढ़ सकता था ! उसकी पीड़ा मुझे आनंद दे रही थी ! ‘ सर आप की हवा टाइट है ! ‘ पकडे जाने की हड़बड़ाहट में उसके पेट का गोला भी जग जीतने इसरो के रॉकेट जैसा निर्भय और उन्मुक्त हो कर निकल पड़ा !

‘ पों ऊँ  उउउउउउऊँ ‘ इंस्पेक्टर साहब तनाव मुक्त होते ही पवन मुक्त हो गए !

साइलेंस इधर !

साइलेंस उधर !

इस बार अशिष्ट वे हुए थे फिर भी सब कुछ अनदेखा करते हुए नज़रें मैंने ही झुका लिया !

मुझे लगा मेरी हवा मुक्त हो कर उनकी हवा को भी मुक्त होने की राह दिखा गयी ! मैं योग इंस्पेक्टर के ही नहीं बल्कि ड्यूटी अफसर के कुछ काम आ गया था ! मेरा अपराध बोध थोड़ा कम हो गया ! मुझे लगा सात सौ रुपये का शगुन ही हवा बन कर निकला है ! अच्छा अवसर मान कर मैंने जेब से सात सौ रुपये निकाल लिया ! मुझे योग के इस अपराध जाल से निकलना था !

‘ सर आपका पवन मुक्त आसन भी देख लिया ! पर्यावरण में होने वाले बदलावों से हम सभी प्रभावित होते हैं ! स्वस्थ समाज के लिए संतुलित पर्यावरण अत्यंत आवश्यक है ! पर्यावरण को प्रदूषित होने से रोकने की जिम्मेदारी हम सबकी है ! ऐसे में यह आवश्यक है कि हम हर तरह के प्रदूषण पर लगाम लगाएं ! योग गुरु बन कर भारत दुनिया की सबसे भयानक योग – प्रदूषण की स्थिति का सामना कर रहा है ! ‘ ये कहते हुए कम शब्दों में मैंने अच्छे नागरिक होने का परिचय दे दिया ! गैस निकलने के बाद त्रिफला चूर्ण जी का चेहरा शांत हो गया था ! मैंने सोचा यही सही समय है ! उन्होंने भी मेरे चेहरे को पढ़ लिया था ! ‘ कुछ हस्त मुद्रा कीजिये ! ‘ उन्होंने कहा !

 ‘ जी ! ‘ दान मुद्रा में अपना हाथ बढ़ाते हुए मैंने कहा ! मेरे हाथ में पांच सौ का एक नया नोट और सौ – सौ  के दो नोट मिला के तीन पत्ते थे ! वे भी तीन थे !
‘ नए योग कानून के हिसाब से हर सप्ताह मुझे कितनी बार योग – अभ्यास करना चाहिए ? ‘ मैंने अपना समय बचाने के लिए पूछा !
‘ मुझे हफ्ता दे कर आप हर दिन अभ्यास कर सकते हैं ! ‘ योग इंस्पेक्टर त्रिफला जी सहज उत्तर देते हुए बोले ! ‘ योग दान के लिए शुक्रिया ! ‘
‘ योग के दान के लिए आप का भी शुक्रिया ! ‘ व्यावहारिक बनते हुए मैंने भी जवाब दिया !
‘ प्रिय मित्र श्रीमान, मैं इस ग़लतफ़हमी को साफ करना चाहता हूं कि योग उतना योग नहीं है जितना लोग सोचते हैं ! ‘ इंस्पेक्टर साहेब फिर से चहकने लगे थे !
‘ हाल के समय में फ़ेक योग यानी फ़र्ज़ी आसनों का सबसे जीता – जागता उदाहरण शवासन हैं ! आपको बता दें कि शवासन एक ऐसा आसन है जिसमें शव की मुद्रा में लेट कर शरीर और दिमाग को आराम दिया जाता है ! किसानों ने क्या किया इस आसन के साथ ? क्या सरकार उनकी खेत में अपनी बीज बोती है ? फिर किसानों ने कैसे योग जैसे सरकारी खेती में अपने आंदोलन बोए ? शवासन क्या अब ऐसे प्रयोग के लिए ही बचा है ? आंदोलन की जगह अगर वो ये आसन अपनी खेतों में करते तो आज कर्ज़ माफ़ी के लिए उन्हें आत्महत्या न करना पड़ता !’
साइलेंस इधर !
साइलेंस उधर !
‘ योग लंबे वक्त तक एक बंद दुनिया थी, जिसमें कुछ ही लोगों की पता नहीं कैसे एंट्री होती थी ! लेकिन सोशल मीडिया ने योग की बंद दुनिया को छिन्न भिन्न कर दिया है ! आप शवासन क्यों कर रहे थे ? उसके इस सवाल से मेरे कान खड़े हो गए ! अब क्या हुआ ? मैंने डरते डरते सोचा !
‘ सर, मैं इस अपराध के लिए क्षमा चाहता हूं ! मैंने इसे अनजाने में किया था ! ‘
‘ अपने शहर में योग आसन की निगरानी करने वाले एक समूह से जुड़ जाइये !, जिसे स्थानीय लोग खुद ही मिल कर चला रहे हैं ! ये नेटवर्क स्थानीय निवासियों का एक समूह है जो मीडिया में दिखाए गए शहरों के योग प्रदूषण को मापते हैं और उनके आंकड़ों को ट्विटर पर जारी करते हैं ! ‘
योग का अभ्यास आज से ही आरंभ करने का दृढ़ संकल्प कर इसके विभिन्न लाभों को स्वयं अनुभव कीजिए ! फेसबुक और इंस्टाग्राम के बिना योग फीकी है ! हर वक्त अपना सोशल मीडिया अकाउंट अपडेट करते रहें ! तेजस्वी स्वास्थ्य, सफलता, शांति, समृद्धि तथा अमरत्व के लिए ईश्वरीय आशीर्वाद आप को प्राप्त हो ! तीन सौ साठ डिग्री फिटनेस पा कर आप हर कोण से अपना सेल्फी ले सकें ! एक कुर्सी पर स्वस्थ और तटस्थ बैठने की स्थिति को आप भी जल्द प्राप्त  करें
कंप्यूटर के सामने बैठे रहने का आदर्श आसन आप को प्राप्त हो ! सबको गूगल खोज में आप मिल जाएँ ! मेरे मन में आप के लिए यही स्टेटस हैं !

‘ किसी ने ठीक कहा है योग में आय का कोई तय पैमाना नहीं है ! ‘ मैंने सोचा ! पर योग क्रिमिनल का ज्यादा सोचना क्या ठीक है ? मुक्ति मिलते ही मैं सर पर पाँव रख कर भाग गया !

स्वर्ग में एडमिशन

स्वर्ग

स्वर्ग में एडमिशन भारतीय संस्कृति का एक अहम हिस्सा है, जिसके लिए हम सब मरते हैं ! आज अखिल भारतीय स्वर्ग संस्थान के प्रवेश परीक्षा के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं ! स्वर्ग में एडमिशन के लिए अखिल भारतीय स्वर्ग संस्थान ने रिजल्ट और मेरिट लिस्ट दोनों जारी कर दी है ! मरने के बाद उम्मीदवार अपना परिणाम स्वर्ग की अॉफिशियल वेबसाइट पर जाकर भी देख सकते हैं !

एंट्रेस एग्‍जामिनेशन फॉर स्वर्ग का आयोजन पुरे देश में रोज़ किया जाता है ! स्वर्ग में एडमिशन की इस प्रवेश परीक्षा को मृत्यु लोक की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षा मानी जाती है ! ऊपर वाले की सरकार अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर स्वर्ग में एडमिशन की लिस्ट की कन्फर्म और वेटिंग की स्थिति भी बता देती है ! रोज की तरह आज सुबह भी स्वर्ग में एडमिशन की प्रक्रिया कुछ वजहों को लेकर चर्चा में रही !

वर्तमान अध्यात्म और मानव अनुभव के अनुरूप जब मैं स्वर्ग के पास पहुंचा तब स्वर्ग में एडमिशन का ख़्वाब देखने वालों की स्वर्ग के मेन डोर पर ही काफी भीड़ थी ! सूचना की कमी से भ्रम और अराजकता बनी थी ! प्रवेश फार्म और स्पष्टीकरण प्राप्त करने के लिए देश के कई किसानों के खड़े होने के कारण चल रहे भ्रम की स्थिति में ऐसा लग रहा था कि किसान आंदोलन धरती से उठ कर स्वर्ग के दरवाज़े पर पहुँच गया है ! भ्रम और अराजकता के बीच यमराज ने अभी तक आज का एडमीशन शुरू नहीं किया था !

‘ मैं यमराज हूँ ! ‘ यमराज ने अपना फॉर्मल परिचय दिया ! ‘ स्वर्ग उन लोगों के लिए है जिन्होंने मरने से पहले अच्छे काम किए हैं और नरक की बात मैं यहाँ नहीं करना चाहता ! आप लोग भी अपना परिचय दीजिये ! ‘ यमराज ने मेरी तरफ देखते हुए बोलने का इशारा किया ! ‘ मैं परमानंद की अवस्था में अपनी जमीन जोत रहा था ! खेत ही मेरा स्वर्ग था ! अपनी जमीन को जोतने में इतना डूबा हुआ था कि पता ही नहीं चला कब गोली चली और मैं मर गया ! ‘
‘ खेत में आपको लगता था कि आप स्वर्ग में हैं ? आप जर्नलिस्ट हैं क्या ? ‘ यमराज ने मुझसे प्रश्न किया ! ‘ मैं किसान हूँ ! ‘ मैंने उत्तर दिया !
‘ किसान थे ! अभी आप स्वर्ग में एडमिशन के प्रत्याशी हैं और आप का नाम वेटिंग लिस्ट में भी नहीं है ! खाली हाथ स्वर्ग आये हैं ? ‘ यमराज ने पूछा !
‘ मैं किसान हूँ ‘ मैंने दुबारा कहा ! ‘ ये स्वर्ग है, बैंक नहीं ! ‘ यमराज हँसते हुए बोले ! ‘ बार बार किसान कह कर मुझे मत डराइए ! अपने कर्मो का फसल कहाँ छोड़ आये ? ‘ सभी आत्मा हंस पड़े ! मैं झेंप गया ! यमराज ने मुझे बुद्धिजीवी मान कर बात आगे बढ़ा दी !
‘ सुना है कि भारतीय बैंकिंग सिस्टम में प्रमुख लोग क़र्ज़ माफी के ख़िलाफ़ हैं ?
‘ अधिकतर किसान अपना कर्ज़ समय पर चुकाते हैं ‘ मैंने जवाब दिया !
‘ किसानों की आत्महत्या के पीछे प्रमुख कारण वित्तीय समस्या ही है ! छोटे ऋणों ने मुझे मारा है ! ‘
यदि आपको अपनी मृत्यु की शिकायत करनी है तो आत्महत्या हॉटलाइन से संपर्क करें ! यमराज ने मुझे फिर हुड़का ! ‘ कृषि की रिपोर्ट मिडिया करती है और मिडिया को मैं भी जानता हूँ ! ‘ अपनी सेल्फी लेते हुए यमराज ने मुझ पर तंज़ किया ! ‘ दस किसान रोज मरते हैं ! ‘ सरकार ने किसानों से किया चुनावी वादा पूरा कर दिया है फिर आप क्यों मरे ?
‘ मेरे मरने के बाद क़र्ज़ माफ़ किया गया ! ‘ मैंने जवाब दिया !
‘ आप नए किसान होंगे ! मैं पुराना यमराज हूँ ! मुझे सरकारी आंकड़ा मत दीजिये ! मैं सबके दाने – दाने को जानता हूँ ! बैंकों से फसली ऋण ले कर माफ़ कराना कहाँ का फैशन है ? दूसरे सेक्टर के बारे में सोचिये ! कलाकारों और फिल्मकारों के बारे में सोचिये ! बेचारों को कोई क़र्ज़ भी नहीं देता ! प्राइवेट स्वर्ग में एडमिशन लीजिये ! मैनेजमैंट कोटा में फार्मर्स कोटा भी है ! स्वर्ग में एडमिशन के लिए राष्ट्रीय धार्मिक पात्रता परीक्षा पास कीजिये ! आत्महत्याओं पर शोध से पता चला है कि मीडिया द्वारा असंवेदनशील रिपोर्टिंग की वजह से कई किसान मारे गए हैं ! डायरेक्टरेट ऑफ स्वर्ग के मुताबिक आज के स्वर्ग में एडमिशन प्रक्रिया का ऐलान बाद में किया जाएगा ! यमराज आगे बोले ‘ किसान भाई घर और खेत के आसपास के स्वर्गों की एक लिस्‍ट तैयार करें ! फिर उनमें से उन स्वर्गों को शॉर्टलिस्‍ट करें जहां आप एडमिशन के लिए आवेदन करेंगे ! सब बैकुण्ठ जायेंगे तो खेत कौन जोतेगा ? आप सब में से जो जा सकते हैं अच्छे और प्राइवेट स्वर्गों में जाइये ! बाज़ार और सरकार के फ़ैसले किसान के ख़िलाफ़ गए हैं ! बेकाबू किसानों के आंदोलन को रोकने के लिए पुलिस को गोलियां चलानी पड़ी ! मैंने भी सब देखा है ! कई जगहों पर किसानों ने प्याज़ और टमाटर सड़क पर ही गिरा दिए ! किसानों का प्रदर्शन बताता है कि परिस्थितियां बिगड़ी हैं ! मेरे पास छोटा सा सरकारी स्वर्ग है ! दूसरी और पुण्य आत्माएँ भी हैं, मैं सभी किसान भाइयों को स्वर्ग में एडमिशन कैसे दे सकता हूँ ? ‘
आदत से मज़बूर किसान स्वर्ग के सामने यमराज के मनमाने और भेदभावपूर्ण नीतियों के ख़िलाफ़ नारे लगाने लगे ! मुझ जैसे कुछ किसानों ने नर्क का रास्ता लेने की जगह फिर से भारत में किसान बनने की ठान ली और लौट चले !

हवा की खेती

हवा

हवा की खेती एक लोकप्रिय खेती है ! इस खेती को करने का संकल्प ही इसका बीज है ! हर साल जब हम इकठ्ठे होकर लालकिले पर तिरंगे को लहराते हुए देखते हैं तो एक ‘हवा’ बनती है !

सूखे खेतों में खेती का बंपर उत्पादन ही हवा की खेती है ! हवा की खेती के तहत ग्रामीण इलाकों में सिंचाई, क़र्ज़, बिजली, प्राथमिक शिक्षा, चिकित्सा सेवा, सड़कों का निर्माण, आदि बुनियादी ढांचे के ‘विकास की हवा’ की पैदावार होती है !

सांप्रदायिकता हमेशा आधुनिक समाज के लिए खतरा होगी इसीलिए हवा जरुरी है ! बिना विचार हवा नहीं बहती ! नास्तिक, कम्यूनिस्ट, आंबेडकराइट, लोहियाइट, सावरकराइट सब हवा के फसल हैं ! गली – चौराहों पर रखी तरह तरह की मूर्तियाँ हवा के बीज हैं !

हवा की खेती शहरी खेती है ! हवा की खेती करने वाला किसान सिर पर मटमैली पगड़ी नहीं बाँधता ! हवा के किसान की फसलें साल के बारहों महीने लहलहाती हैं ! अपनी कुंठा, बेचैनी, बेबसी और लाचारी से बचने के लिए लोग इस हवा का सेवन करते हैं !

भारत जैसे एक बहु – धार्मिक समाज में, एक धर्म के सामान्य धर्मनिरपेक्ष हित दूसरे धर्म के अनुयायी के हितों से भिन्न और भिन्न हैं इसीलिए यहाँ हवा की खेती होती है ! सांप्रदायिक वातावरण में हवा की खेती राजनीतिक व्यापार है !

हवा के खेती में विभिन्न धर्म या विभिन्न समुदायों के अनुयायी के हितों को पूरी तरह से असंगत, विरोधी और शत्रुतापूर्ण माना जाता है ! हवा के बीज़ खुले तौर पर टीवी पर और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया पर सभी धर्मों के संस्थानों में मिलते हैं !

हर कोई हवा की खेती के माध्यम से राष्ट्र को बदलना चाहता है ! हवा की खेती करने वाला किसान फार्मर कम फ़ासिस्ट ज्यादा होता है ! हवा की खेती करने वाला किसान मीडिया को नियंत्रित करता है ! सांप्रदायिक हिंसा हवा की प्रसिद्ध फसल है !

हवा की खेती की ताकत आलोचना में है ! हवा की खेती से कोई भी खुद को को एक व्यापार – प्रेमी, निवेशक – अनुकूल प्रशासक, एक करिश्माई नेता के रूप में पुनर्निर्मित कर सकता है ! भारत के सबसे विवादास्पद राजनीतिज्ञ हवा की खेती के सबसे महंगे फसल होते हैं !

हवा की खेती केवल ऑनलाइन, सोशल मीडिया और डिजिटल मार्केटिंग के माध्यम से होती है ! जो मिडिया पर अपनी पकड़ रखते हैं और टेलीविजन देखते हैं वो हवा की खेती की हर फसल को पहचान सकते हैं ! हवा की खेती देश की सेवा में होती है और हर एक नागरिक की सेवा में होती है !

रोजगार और विकास की हवा हवा की खेती की सबसे अच्छी और उन्नत किस्म है ! दलित हवा को दंगा कराने और आग लगाने का जन्मसिद्ध लाइसेंस मिला है ! अल्पसंख्यकों के खिलाफ जो हवा बनती है वो व्यक्तिगत डोमेन में बहती है !

विकास की देशव्यापी हवाओं को जोड़ने की योजना पर काम चल रहा है ! देश भर में हवा संकट का राग अलापते हुए सरकार ने देश भर में विकास की हवा को आपस में जोड़ने का लुभावना हवाई प्रस्ताव जनता के सामने छोड़ दिया है !

लाखों और करोड़ो लोगों के प्रयास से एक हवा बनती है ! ‘विकास की हवा’ एक राष्ट्रीय संसाधन है ! महत्वपूर्ण बात ये है कि किसी भी क्षेत्र में उपलब्ध ‘विकास की हवा’ के उपयोग की प्राथमिकताएँ सोच विचार कर तय होनी चाहिए और ‘हवा’ की उपलब्धता के अनुकूल ही उपयोग का नियोजन होना चाहिए !

हवा की ही हवा बन रही है ! विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार विकासशील देशों में विकास के हवा की भारी किल्लत है ! विरोधी लहर हवा की खेती का सबसे बड़ा दुश्मन है !

यदि आप हवा की खेती में शामिल होना चाहते हैं, तो वस्तु के बजाय, अपनी शिक्षा और नेटवर्क का उपयोग करें ! हवा की खेती में क्रांतिकारी बदलाव के लिए हमारे देश को वास्तव में युवाओं की ज़रूरत है !

बूँद बूँद हवा से ही अफ़वाह भी बनती है, जो अच्छी हवा की फसल को नष्ट कर देती है ! जब तक हम अपनी वैचारिक जनसंख्याँ – वृध्धि पर जल्द से जल्द लगाम नहीं लगाते तब तक भारत में हवा की खेती का भविष्य उज्जवल है !

संकट काल में हवा की खेती देश का संकट दूर करता है ! विकास की हवा जिन्दगी के साथ भी, जिन्दगी के बाद भी !

विश्वसनीय चेतावनी : कृषि का अभ्यास न हो तो हवा की खेती न करें !

मैं टॉपर कैसे बना

१.

टॉपर होने का अधिकार सबके पास है ! फिर हमारे बीच इतने कम टॉपर्स क्यों हैं ? मैं स्कूल से घर लौटते समय रोज यही सोचता था ! एक ही बात जब आप कई बार सोचते हैं तो बार – बार सोचने से सोची हुई बातें दिमाग में बार – बार जनम कर मरती हैं ! इच्छा नहीं पूरी होने पर दिमाग में जनम कर बार – बार मरने से बातें भूत बन जाती है और सोचने वाले की दिमाग पर सवार हो जाती है ! मुझ पर टॉपर बनने का भूत सवार हो गया था !
‘ किस बात में टॉपर बनना है ? ‘ मेरी ज़िद से हार कर एक रात भूत ने मुझसे पूछा !
‘ मुझे तो बस टॉपर बनना है ! कोई भी बात हो मुझे कोई फरक नहीं पड़ता ! ‘ मैंने तपाक से जवाब दिया !
‘ तुम्हारा विषय क्या है ?’
‘ जो कुछ स्कूल में होता है वही मेरा विषय है !’
‘ स्कूल में क्या होता है ?’
‘ स्कूल में हम खाना बनाते हैं !’
‘ तो तुम्हे खाना बनाने में टॉप करना है ?’
‘ नहीं, मुझे खाना खाने में टॉप करना है !’
भूत का आश्चर्य भरा चेहरा शायद मुझसे पहले किसी ने नहीं देखा हो ! आश्चर्य से भूत का चेहरा पाकिस्तान के नक़्शे सा डरावना हो गया था ! भूत के चेहरे के नक़्शे में कश्मीर से पानी चूने लगा ! खाने का नाम सुन कर गाँव के भूतों के मुंह में भी पानी आ जाता है !

२.

बचपन में मेरे लिए पका हुआ गर्म खाना बहुत बड़ी लालच थी ! गरीबी की वजह से मैं भूखा रहता, इसी के चलते मेरी माँ मुझे स्कूल भेज देती ! स्कूल के मिड डे मील में रोज पके – पकाये भोजन का लालच एक आशीर्वाद के रूप में मेरे काम आ गयी ! मुफ्त खाने के लिए मैं स्कूल जाता था और खाने में छुपी हुई योजना के मुताबिक खाना खाते – खाते मैं चमत्कारिक रूप से पढ़ना भी सीख गया !

मिड डे मील के कैलोरी का हिसाब किताब रखने के चक्कर में मैं आने, खाने और जाने से ऊपर उठ गया ! दो दूनी चार का पहाड़ा मैंने अपने भूखे पेट की अंतड़ियों से सीखा था ! वो खाली होने पर गुड़ – गुड़ दो, दो दूनी गड़ – गड़ चार करती ! मैं अपने एक हाथ को मुंह तक ले जाता और खाने का इशारा करते हुए दो तिया छह कहता ! गुरूजी ये देख कर कक्षा में मुझे खूब शाबाशी देते ! दू चौके आठ कहते हुए गुरुजी अपने बज्र हाथों को मेरी पीठ पर धम से पटक देते और खूब हँसते ! उनकी हंसी से मिल कर मेरी पीठ पर पड़े धौल का दर्द मेरे चेहरे पर फ़ैल जाता ! दू पंचे दस कहता हुआ मैं दर्द से बिलबिला कर बैठ जाता ! मेरे दस कहते ही दस ग्राम तेल सब्जी में डाल दिया जाता ! ये गिनती मिड डे मील के खाने की मात्रा की थी जो गुरूजी मुझसे खाना बनवाते हुए पढ़वाते ! ये मेरी गणित की कक्षा थी ! मिड डे मील की कैलोरी गणना के साथ स्कूल मेरे लिए भूख, दर्द और गुरूजी का ठहाका था, पर आग पर पकते हुए खाने की गंध मेरा सब दुःख हर लेती !

३.

मैं खाने की लालच में मिड डे मील के राशन की बोरियों को बैलगाड़ी से अपने कंधों पर उठाकर एक कमरे में रखता ! ये मेरी खेल की कक्षा थी ! गुरूजी खेल – खेल में मुझसे सभी बोरियाँ ढुलवा लेते ! इस खेल से मेरी पीठ की हड्डी दुखती पर कंधे और घुटने मजबूत हो गए !

रोज सुबह मेरा स्कूल एक रसोईघर बन जाता ! कूक के नाम पर बाबुओं के फाइलों और रजिस्टरों में साल भर धान की बुआई चलती जिसकी वजह से कुक खाना बनाने मेरे स्कूल में कभी नहीं आते ! मैं और गुरूजी मिल कर खाना पकाते और खाते ! मुझे मिड डे मील का मेनू कैलोरी सहित याद था और पुरानी किताबों को फाड़ के ईंधन तैयार करने में मुझे समय नहीं लगता था ! गुरूजी की मार खाते हुए मैं खाने के पकते ही खाना खाने को तैयार हो जाता !

मिड – डे मील योजना की शुरुआत करने के पीछे एक मकसद ये भी था कि बच्चे भोजन मिलने की वजह से स्कूल जाने में रुचि दिखाएंगे ! भोजन और पढ़ाई को एक साथ जोड़कर देखा गया ! मिड डे मील की व्यवस्था में भोजन और पढ़ाई को एक साथ जोड़कर देखने वाले को सदा मेरा सादर प्रणाम रहेगा ! शिक्षा और भोजन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं जिसे सरकार उछालती है और स्कूल में गुरूजी के साथ उसे मैं लूटता हूँ !

स्कूल में दोपहर के भोजन से सामाजिक समरसता भी कायम होती है ! सभी बच्चे बिना किसी भेदभाव के साथ बैठकर भोजन ग्रहण करते हैं ! बच्चों में स्कूल के चौकीदार कुत्ते के छः बच्चे भी शामिल हैं ! कुत्ते के बच्चे भी हमारे साथ खाते हैं ! यह एक बहुत बड़ा सामाजिक बदलाव है, जिसकी जरूरत भारत को है ! ये मिड डे मील की उपयोगिता है ! जो सामाजिक समरसता को बढावा दे रहा है ! मुझे इस बात का अफ़सोस है कि सरकारी स्कूलों को लेकर आज भी अभिभावकों के मन में अच्छी सकारात्मक सोच नहीं है ! दुःख की बात है जो भारतीय परिवार थोड़े सी भी अच्छी आय वाले हैं, उनके बच्चे प्राइवेट स्कूलों में ही शिक्षा प्राप्त करते हैं !

४.

मिड डे मील स्कीम में लोहे, फोलिक एसिड, जस्त और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों के आपूर्ति की सिर्फ परिकल्पना की जाती है ! मिड डे मील की थाली में इन सब तत्वों की भीड़ नहीं होती ! गुरूजी को साफ़ थाली पसंद है ! मैं अपने हिस्से की छः रुपये अठारह पैसे की अपनी साढ़े चार सौ कैलोरी के भोजन को इतनी लगन से खाता कि मेरे खाने के बाद थाली में कुत्ते तक के लिए चाटने को कुछ नहीं बचता !

मेरी कक्षा में मेरा प्रतिद्वंदी खूंखार था ! उसके बड़े नाख़ून और पैने दांत थे ! मुझे अपना खाना उससे लड़ के जीतना पड़ता था ! जिस दिन मैं खाने में टॉपर बना उस दिन आलू और सोयाबीन की तरी वाली सब्ज़ी और रोटी बनी थी ! उस दिन ये तब की बात है जब मैंने सिर्फ सब्जी खाई थी, वह भी बारह ग्राम प्रोटीन के छः सोया बीन के दाने में से सोयाबीन के दो दाने मेरी मुंह में गए थे ! तभी कुत्ते ने मेरी रोटी पर पंजा मार दिया ! नज़र हटी और दुर्घटना घटी ! एक सौ ग्राम गेहूं की दोनों रोटी कुत्ते की मुंह में थी !

प्राकृतिक रूप से खाना छीनने के लिए कुत्ता मुझसे ज्यादा प्रशिक्षित था ! उसके मुंह में मेरी रोटी फंस गयी थी ! उसकी गर्म आँखों में भूख का एक तूफ़ान था जिसे मैं बहुत देर तक नहीं रोक सकता था ! वो मेरी रोटी किसी भी वक़्त निगल जाता ! मुझे अपना स्टेटस दिख गया था ! मैं कुत्तों से प्यार करता हूं, और मैं कभी भी कुत्तों को चोट नहीं पहुंचा सकता ! हमारे बीच एक सौ ग्राम का खाद्य अनाज था जिसकी मुझे भी बड़ी जरुरत थी ! मुझे बहुत भूख लगी थी ! मुझे अपनी बुद्धि से अपना भोजन कुत्ते से बचा कर आज टॉपर बनना था !

तभी एक बिल्ली वहाँ से गुजरी ! जानवरों से मुझे बहुत प्यार है ! बिल्ली को मैंने अनदेखा कर दिया ! बिल्ली मुझे एक नियमित शिकार की तरह देखती ! बिल्ली को मेरी शिक्षा, स्कूल और सबकुछ जो स्कूल में मेरे साथ होता उसे बस नाटक लगता ! मैंने बिल्ली की आँख में बार बार यही पढ़ा था ! शरीर की भाषा को पढ़ने में हम दोनों के गुरु एक ही थे !

‘ हिम्मत मत हारो – हिम्मत मत हारो ‘ मुझ पर टॉपर होने का सवार भूत बार बार यही कह रहा था ! भूत की ये बात मेरा ध्यान भंग कर रही थी ! मैंने एक पल के लिए अपने भूत को झटक के उतारा ! भूत को ये अच्छा नहीं लगा और टॉपर बनने का भूत कुत्ते पर सवार हो गया ! अब सब परिस्थितियों का खेल था ! कुत्ता काफी बुद्धिमान था ! अधिकांश कुत्तों को पीछे की ओर जाने के लिए प्रशिक्षित नहीं किया जाता है, इसलिए वे तेजी से संतुलन और स्थिरता खो देते हैं ! इस कुत्ते में मौके को देखकर आगे और पीछे जाने की अद्भुत क्षमता थी ! कुत्ते का ध्यान खाने से हटाने के लिए मैं कभी बन्दर तो कभी खरगोश की तरह उछलता रहा ! खाने की गंध ने हम दोनों को बाँध दिया था ! हमारी नज़रें लॉक हो गयी थीं ! मैं उछला तो वो भी उछला ! मुझे खाने पर से कुत्ते का ध्यान हटाने के लिए अजीब, अप्रत्याशित और अराजक नृत्य करना पड़ा ! मैंने बैक अप लिया कुत्ते ने भी बैक अप लिया ! मैं नीचे झुका वो भी नीचे झुका ! इस बिंदु पर अब हम दोनों में से किसी एक को टॉपर होना था !

सौभाग्य से रोटी पर एक मख्खी आ कर बैठ गयी ! कुत्ते की नज़र मख्खी की वजह से एक पल के लिए ही भटकी ! बस मैंने तपाक से अपनी रोटी कुत्ते की मुँह से छीन ली ! कुत्ता हार गया ! मैं जीत गया और टॉपर हो गया !

५.

अपने स्कूल में अगर आप टॉपर नहीं बन पाए थे तो मेरे टॉपर होने की कहानी को पढ़ कर आप को अपने टॉपर नहीं बनने का अब कभी बुरा नहीं लगेगा !

 

इस पोस्ट का अर्चना चावजी द्वारा तैयार किया गया उनकी ही आवाज़ में पॉडकास्ट  !  

 

पॉडकास्ट का साउंड क्लाउड लिंक  –

निंदामूर्ति की कड़ी निंदा

The Thinker a bronze sculpture by Auguste Rodin

इस लेख के लिए मुझ पर कड़ी निंदा का अभियोग लग सकता है !

जब भी कोई मेरी कड़ी निंदा करता है, या मैं किसी की भी कड़ी निंदा करता हूँ मैं कमल बन के खिल जाता हूँ ! कड़ी निंदा का ख्याल मुझे उत्तेजित करने लगा है ! निंदा को कड़ी करने के उपाय पर सब से ज्यादा काम मैंने किया है ! मैं यह भी स्पष्ट कर दूँ कि मैं किसी भी धर्म, दर्शन, संप्रदाय अथवा विधि का विरोध नहीं करता हूँ ! इस बात के लिए आप मेरी कितनी भी कड़ी निंदा कर लें पर मैं सभी जीवित लोगों में सबसे बुद्धिमान हूँ, क्योंकि मैं ये जानता हूँ कि मैं कुछ नहीं जानता हूँ ! जो पवित्र और अपवित्र कार्यों को विभाजित करते हैं वही मुझसे नफरत करते हैं !

निंदा करने के शैक्षणिक तरीकों का मुझे कोई अनुभव नहीं था ! पहले मैं एक चिंतक था फिर निंदक हुआ ! निंदक के रूप में मैं बेरोज़गार हो गया था ! किसी ने अपने आँगन में मेर लिए कुटिया नहीं छवाया ! मैंने आँगन से पार किये जाने की निंदा को कड़ी करने की ठान ली ! निंदक की ज़िद हर चिंतक जानता है और हम सब चिंतक हैं ! हम सब चिंतक ये जानते हैं कि अगर निंदक ने निंदा करने की ठान ली तो उसे चिंतक का बाप भी नहीं रोक सकता है ! निंदक अपने आखरी दम तक निंदा करता है ! कुछ निंदक अपने उड़ते प्राण पखेरू तक की निंदा कर डालते हैं !

देखा – देखी हर काम के लिए लोग निंदा का सहारा लेने लगे हैं इसीलिए साक्षरता की गहराई में गिरावट आ गयी है ! अब निंदा की वैसी खाई भी नहीं रही जिसमे निंदक अनंत डुबकी लगा सकें ! चिंतकों ने अपनी चिंताओं से निंदा की खाइयों को पाट दिया है ! निंदा आज सफाचट हो कर चिंता से एक हो गयी हैं !

कड़ी निंदा का विषय क्या हो ? विषय वही जो निंदा को भाये ! प्राचीन काल में निंदा चुनिंदा बातों की हुआ करती थीं ! आज डिजिटल हो कर सबकुछ निंदनीय हो गया है ! जहाँ सबकुछ निंदनीय हो गया है वहाँ निंदा को और कड़ी कैसे की जाए ? मेरे इस दर्शन की व्युत्पत्ति इसी सवाल से हुई ! यह सवाल मेरे मन को मथने लगा ! मैं निंदा रस में डूब के तर जाने की कल्पनाओं के गोते लगाने लगा !

मित्रों क्या आप जानते हैं कि कल आपका मित्र आपके बारे में क्या कह रहा था ?
फिर आप उसकी जवाबी निंदा कैसे करेंगे ? क्या आप जानते हैं आप के लिए उसकी निंदा के क्या आयाम थे ? निंदा अपने हर कोण में बदल जाती है ! आपके ज्ञान का प्रकाश निंदा को और मुलायम बना सकती है ! असावधानी वश निंदा में किसी भी तरह की मिलावट उसे तारीफ बना सकती है ! फिर आप अपनी निंदा को कड़ी कैसे करेंगे ? सच में आप अपनी निंदा के बारे में क्या जानते हैं ? और महत्वपूर्ण यह है कि हम जो कुछ भी जानते हैं वो हम कैसे जानते हैं ? हमारे दिव्य ज्ञान का माध्यम क्या है जिसपर हमारी निंदा आश्रित है या होगी ? शराब की चाहे जितनी पी ले कड़ी निंदा का एक बोतल कोई नहीं पी सकता है और बिडम्बना ये है कड़ी निंदा की प्यास कभी नहीं बुझती है !

जनता जनार्दन अब आंकड़े बन गए हैं ! अब हर निंदा आंकड़े करती है ! आंकड़ों को कड़ा कैसे करें ? निंदा रस में डूबी रहने की वजह से आँकड़े सदा मुलायम होते है ! निंदा के आंकड़ों को निंदा रस से अलग करना टेढ़ी खीर है ! दूर देश की गधों के राज्य में हुए कई दंगों के अपराधी किसी दूसरे दूर देश की राज्य के चरवाहा विद्यालय के चारा बन गए तो कहीं झाड़ू के तिनके बिखर के डूबते हाथों का सहारा भी नहीं बन सके ! निंदा कहीं धरती की महबूबा कहीं अम्मा तो कहीं माई माटी मनुष्य वाली ममता बन कर भारत माता की नक़्शे को ढोते आदिवासी के स्केच में वायरल हो रही है ! निन्दाओं के हाहाकार की कीचड़ में कब प्रशंशा के कमल खिल गए देशवासियों को पता ही नहीं चला ! बांसूरीवाले के पीछे निंदा रस के नशीले चूहे कतार में कब अपनी ही कुर्तो की जेब को कुतरने लगे इसका किसी को होश नहीं रहा ! पृथ्वी पर कड़ी निंदा एक सांस्कृतिक दुर्घटना है जिसके हम सब शिकार हैं ! किसी भी संत, व्यक्ति धर्म या दर्शन को मानने से पहले कभी भी प्रश्न करने से मत झिझकें ! सत्य की करें या न करें अपनी निंदा की खोज जरूर करें !

निंदा जिसके बाएं हाथ का खेल है वही कड़ी निंदा का असली खिलाडी है ! खुद को बेहतर महसूस कराने के लिए मैं अपनी ही निंदा को कड़ी करके अपनी ही कड़ी निंदा करता हूँ ! अपनी निंदा अपना विकास ! सार्वजनिक स्थानों पर आत्म – निंदा दूसरों के लिए असुविधाजनक हो सकती है परन्तु रिपब्लिक को यही शक्ति देती है और भटके हुए नागरिकों को मुक्ति प्रदान करती है ! निंदा को कड़ी करने की विधि और कुछ नुस्खे देशहित में सबसे शेयर कर रहा हूँ ! सब लाइन पर बने रहे पर मौन रहे ! कोई सुझाव न दें ! निंदा को कड़ी करने के लिए पहले अपने आंकड़ों की शक्ति को टटोलें ! आंकड़ों के लिए न्यूज़ चैनल की बातों को कटोरे में अच्छे से छान लें ! निंदा इन्ही आंकड़ों पर खड़ी हो कर कड़ी होगी ! चैनल की बातों को नहीं छानने से कड़ी निंदा हो नहीं पाएगी और बातों का बतंगड़ बन जायेगा ! अब आंकड़ों से निंदा रस का मख्खन निकालने के लिए आंकड़ों को फेटने की जरुरत है ! कड़ी निंदा करने के लिए मध्यम तेज गति में आंकड़ों को हर दिशा में फेंटने में तकरीबन तीन चार मिनट का समय लगता है ! गतिशील कड़ी निंदा आंकड़ों से ऊपर उठ जाएगी, बचा हुआ पानी रोके रखें ! अब निंदा की कड़ाई आप के हाथों में है ! अच्छी कड़ी निंदा की पहचान ये है की उसे कोई पचा न सके ! निंदा को हल्के हाथों से दबा कर उसे कड़ी करते रहें ! जब आपको लगे कड़ी निंदा बहुत हो चुकी है, सब पानी छोड़ दें और निंदा को फिर से आंकड़ों में मिल जाने दें ! कड़ी निंदा पूरी तरह से एक भारतीय व्यंजन है ! कड़ी निंदा बहुत ही लोकप्रिय डिश है ! कड़ी निंदा करने में जितना सरल है स्वाद में उतना ही मज़ेदार भी है ! इतने सारे गुणों से भरपूर होने की वजह से इसे अपने भोजन में शामिल तो करना ही चाहिए ! कड़ी निंदा से मिर्ची लगानी हो तो आंकड़ों को फेंटते समय निंदा में नमक मिला लाल मिर्च पाउडर डाल ले !

जो आपकी निंदा नहीं करते हैं उन्हें अनदेखा न करें, वही आप की कड़ी निंदा कर सकते हैं ! ऐसी बात जिसमे आप की निंदा नहीं है, जिसमें आप के बारे में कुछ भी बुरा नहीं है और जिसकी आपको कोई आवश्यकता नहीं है, उसे जरूर सुनें ! कड़ी निंदा के बोल यहीं फूट सकते हैं ! कड़ी निंदा ही दुश्मनी को ज़िंदा रखती है ! कड़ी निंदा की ट्रेनिंग सेंटरों की हमें सख़्त जरुरत है ! कड़ी निंदा का जीवन और करियर संकट में है ! कड़ी निंदा के शिक्षक अब नहीं मिलते इसीलिए इस लेख को ध्यान से पढ़ें ! यह लेख कड़ी निंदा का लाइसेंस है ! इस निंदा काल में कड़ी निंदा न करना निंदनीय अपराध है ! मुलायम निंदा से मख्खी भी नहीं डरती ! कड़ी निंदा जरुरी है ! पर मित्रों यही दुर्भाग्य है जैसे ही कुछ भी कड़ा होगा, टैक्स लगेगा !

निंदा आज एक बुनियादी ज़रूरत है ! समय आ गया है कि हम कड़ी निंदा के ऐसे विकल्पों के बारे में सोचें, जिनसे हमारी सेहत अच्छी रहे और क़ुदरत का भी नुक़सान न हो ! अध्यात्मिक ज्ञान के अभाव में कड़ी निंदा अच्छे बुरे की पहचान नहीं कर पाती ! कड़ी निंदा पर जादू टोना का आरोप नहीं लगता ! जहाँ कड़ी निंदा चल रही हो वहाँ किसी और की नहीं चलती ! कड़ी निंदा की सीमा कोई पार नहीं कर सकता ! एक कड़ी निंदा के बाद दूसरी कड़ी निंदा शुरू हो जाती है ! अपने हर पंचवर्षीय कड़ी निंदा को फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं ! कड़ी निंदा आगे चल कर एक दिन श्रद्धांजलि बन जाती है !

चुप्पी निंदा की गाली है, ठहाका कड़ी निंदा की ताली है !
आपका अपना निंदामूर्ति !

पवित्र चप्पल

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पवित्र चप्पल

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चप्पल को नहीं जानना ही सारे दुःखों का मूल कारण है ! वेदों में लिखा है चप्पल को जानने से आदमी सारे बन्धनों से मुक्त हो जाता है ! अगर किसी की दिलचस्पी आजाद भारत के इतिहास को बारीकी से जानने की है, तो उसे पहले भारतीय चप्पल को जानना होगा ! लेकिन, दुर्भाग्य से चप्पल को इस दृष्टि से देखना बंद कर दिया गया है !

“धाँय…धाँय…धाँय…” ! बंदूक से तीन गोलियाँ निकलीं ! गोलियों की आवाज के बाद अगली आवाज थी – ‘हे…राम’ ! उसके बाद क्या हुआ मुझे कुछ याद नहीं ! मैं अभागी चप्पल बापू के पाँव से पता नहीं कब सदा के लिए अलग हो गयी ! मैं राष्ट्रपिता द्वारा पहने जाने के बाद भी वीआईपी नहीं हो पायी हूँ ! आज देश में चप्पल की हालत उनके सिद्धांतों जैसी हल्की और सार्वजनिक हो गयी है ! मुझे जो चाहे उतार ले, किसी पर भी उछाल ले, नीलामी में बेच दे या किसी को भी जड़ दे !

बिरला हाउस के हरे घास पर पड़े – पड़े मुझे लगा किसी गहरी नींद से सोकर उठी हूँ ! कुछ ठीक से याद नहीं आ रहा था ! मेरा शरीर सामने पड़ा था और मैं उससे बाहर ! मुझे सिर्फ इतना याद है मेरे धारक का नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था जिसने मुझे कुछ भी अदा करने का वचन नहीं दिया था ! मैं बापू का वो चप्पल हूँ जो तीस जनवरी को बापू के पाँव से आत्मा की तरह बिछड़ गयी थी !

हाँ, आज मैं चप्पल के वेश में संत नहीं हूँ, क्योंकि आज किसी संत के पाँव में चप्पल नहीं है ! हाँ, मैं चप्पल के वेश में राजनेता भी नहीं हूँ, किसी राजनेता के पाँव में चप्पल नहीं है ! मुझे संत कहना यदि संभव भी हो तो अभी उसका समय बहुत दूर है ! शायद मुझे समाज की कुरीतियों में और घिसना है ! संत के पॉव में लम्बे समय तक रहने के बाद भी मैं किसी भी रूप या आकार में अपने आपको संत अनुभव नहीं करती ! स्लीपर, सैंडल, फ्लोटर, बैली, हाईहील, अब मेरे कई नाम है !

जीने के लिए कई बार नीलाम हो कर, कई बार बदनाम हो कर, वेश बदल कर भी मैं समाज की सेवा कर रही हूँ ! दुःख बस इस बात का है कि बापू की हत्या के बाद देश में चप्पल की किसी ने सुध नहीं ली ! बापू के तीनो बंदरों ने भी अपने पुतले में मुझे अपने साथ स्थान नहीं दिया ! वो चाहते तो बुरा न देखो. बुरा न बोलो, बुरा न सोचो के साथ बुरा न पहनो कहती हुई मैं गाँधी जी का चौथा बंदर बन सकती थी ! पर आज भी मैं अश्पृश्य हूँ !

हा ! बापू तुम कहाँ हो ? बापू भारतीय नोट में तुम्हारे पाँव क्यों नहीं दिखते ? तुम्हारे पाँव के बहाने मैं तुक्छ चप्पल दिख जाती तो देश में चप्पलों की गरीबी दूर हो जाती ! चप्पल गरीब नहीं होते तो तो उन्हें पहनने वाले पाँव भी गरीब नहीं रहते ! ‘ सादा जीवन उच्च विचार ‘ चप्पल का यही साफ़्ट कार्नर आज सबसे ज्यादा चुभता है ! ‘ अच्छी गुणवत्ता और सस्ती कीमत ‘ ये अब मेरी पहचान नहीं, आज गरीबी को दी हुई गाली है ! अपने अतीत की ठोकरों से सबक लेकर मैंने यही जाना है !

मेरे पिता एक जूता थे इसलिए मैंने अपने जीवन में कभी कोई जिम्मेदारी नहीं ली ! स्वतंत्रता का अनुभव करने के लिए यात्रा जरुरी है, यह मैं बचपन में ही जान गयी थी ! हमेशा घूमना – फिरना ही मेरा जीवन रहा ! चप्पल के बहाने देश की गरीबी की आत्मकथा लिखने का मेरा आशय नहीं है ! मैं बस एक चप्पल हूँ और बापू की हत्या के बाद गरीब के पैर में फँस गयी हूँ ! देश और बापू की आत्मा की तरह मुझे भी गरीबी से आज़ादी चाहिए ! भारत में गरीबी अक्सर चप्पल से चल के आती है ! चप्पल की जनसँख्या गरीबी का परिणाम है !

बापू के चश्मा के साथ सब अच्छा हुआ ! गोली लगने के बाद बापू का चश्मा भी हरे घास पर वहीँ गिरा था जहाँ मैं गिरी थी ! चश्मे को चाहे फिर बापू की नज़र न मिली हो पर उसकी रोजी रोटी पर किसी की नज़र नहीं लगी ! बापू की हत्या के बाद अपनी पहचान के लिए मेरी तरह चश्मा विदेशों में नीलाम हो कर भी स्वच्छता अभियान को पा गया है ! सब जानते हैं स्वछता अभियान के पोस्टर में बापू का चश्मा अपना पेट पाल रहा है ! गन्दगी की तरह चश्मे को मुझ चप्पल की गरीबी भी नहीं दिख रही है ! बापू तुम्हारे जाने के इतने सालों बाद भी मैं क्यों भटक रही हूँ और मेरी हालत पर व्यंग्यकार क्यों ताने मार रहे हैं ?

चप्पल एक शक्ति है, एक मार्ग है, एक धारा है, एक एहसास है, एक विश्वास है, जिसका निश्चित स्वरुप हमारे पैरों में है ! चप्पल के रूप और स्वरूप को लेकर यही सत्य है ! चप्पल एक विचार है जिसे जिया जा सकता है, चप्पल एक अनुशासन है जिसे माना जा सकता है और जिसे जीवन के कर्मों के अनुसार किसी और बदन पर उतारा भी जा सकता है ! चप्पल को शिक्षित होना चाहिए क्योंकि शिक्षा के अभाव में एक स्वस्थ पैर का चप्पल होना असंभव है !

पैरों में रहकर भटकते हुए भी मैंने रावण, चाणक्य, दादाभाई नौरोजी, विवेकानन्द, गोखले, तिलक के भाषणों और लेखों को पढ़ा है ! साथ ही मैंने भारत और कुछ अन्य प्रमुख देशों जैसे इंग्लैंड, फ्रांस, अमेरिका और रूस के प्राचीन और आधुनिक इतिहास को भी पढ़ा है ! इनके अतिरिक्त मैंने समाजवाद और माक्र्सवाद के सिद्धान्तों का भी अध्ययन किया है, इसलिए मैं ये कह सकती हूँ कि हर चप्पल कुछ कहती है ! चप्पल का अर्थ है – किसी भी प्राणी को तन, मन, कर्म, वचन और वाणी से कोई नुकसान न पहुँचाना !

भारत देश में चप्पल का जड़ गहरा है ! क्या आप मेरे एक सवाल का जवाब दे सकते हैं ? शरीर प्रशासित पैर में और भारत प्रशासित कश्मीर में क्या समानता है ? मेरा उत्तर है – अपने पैरों के साथ बर्बरता ! चप्पल की तरह शरीर में भी बाहर की तरफ चमड़े लगे हैं और शायद अंदर रबड़ की आत्माएं हैं ! इसीलिए देश में पैरों को डरा कर रोकने के लिए देश की आत्मा को काट के रबड़ की गोली बनती है ! पैरों के साथ बर्बरता से अब शरीर में आत्मायें भी नहीं बचीं इसीलिए रबड़ की गोली भी नहीं रही और अब पत्थर बरस रहे हैं ! चप्पल के बिना देश के पैर की छब्बीस हड्डियों में सांप्रदायिक तनाव कौन फैला रहा है ? क्या अपने देश समाज का आकार चप्पल से बड़ा नहीं है ?

मैं चप्पल के रूप में भी दिल और समर्पण से भरी हुई हूँ ! अपने देश की शिक्षा, गरीबी, हेल्थकेयर, न्याय, कानून और व्यवस्था जैसे कई पथरीले रास्तों वाले किसी भी लम्बी यात्रा पर चलने के लिए और कुछ भी करने के लिए तैयार हूँ ! पर मैं देश के घोटालों को पचाने में सक्षम नहीं हूँ ! चप्पल उतना ही पचा सकता है जितना पैर खा सकता है !

जिस तरह पवित्र स्थलों पर जूते पहनकर जाना सही नहीं है, उसी तरह लोग घर के भीतर चप्पल ले जाना सही नहीं समझते ! कुछ लोग इसके पीछे साफ – सफाई और स्वच्छता का तर्क भी देते हैं, ताकि बाहर की गंदगी घर के भीतर ना पहुंच सके ! मेरा मानना है कि जनता के विचारों को मोड़ देने और सक्रिय करने में सबसे अधिक भूमिका मैंने और मेरे साथ दुसरे चप्पलों ने ही निभायी है ! मुझे दुःख है आज भारत के तीस प्रतिशत पैर चप्पल से भी बहार हैं ! पवित्र चप्पल के पाँव तुम एक हो जाओ ! खाली पैर वालों का देवता भी नहीं सुनते शोर मचाने के लिए कम से कम चप्पल पहनना जरुरी है !

लाल बत्ती नहीं अब ‘एल’ बोर्ड का कोहिनूर लगेगा

जहाँ भूमि के नियमों का पालन नहीं होता वहाँ ट्रैफिक के नियमों का क्या होगा ?

भारतीय सड़क मतलब स्ट्रीट फूड, शॉपिंग और पार्किंग का जागृत अड्डा ! भारतीय सड़कें अर्थात व्यावसायिक स्थान ! हमारे देश में अच्छी सड़क बाज़ार के लिए अच्छा कमर्शियल लोकेशन है ! बचपन के हैप्पी बर्थडे पार्टी से लेकर सारे त्योहार, जवानी का हुड़दंग और शादी ! आंदोलन, जुलुस, भाषण के पंडाल, से लेकर अंतिम यात्रा और उसके भोज तक का सफ़र सब सड़क पर ! माता की चौकी और देवताओं का पलंग हम सब सड़क पर लगा लेते हैं ! सड़क पर रोज़ का आना जाना अब योग का एक ऐसा आसन हो गया है जिसे बाबा रामदेव द्वारा बेचा जाना बचा है ! सड़क की इसी बाज़ारू संस्कृति के कीचड़ में खिला कमल है लालबत्ती वाली कार ! सड़क की भीड़ सिर्फ़ लाल बत्ती को रास्ता देने के लिए तैयार है बाकी सबको सड़क पर दंगल लड़ के जीतना होता है फिर जाना होता है ! जिस भूमि पर ट्रैफिक लाइट और डिस्को लाइट में अब भी फर्क करना बचा है वहाँ लाल बत्ती ही एक नियम है जिसका सब पालन करते हैं !

जहाँ पैदल चलने वालों के लिए कोई फुटपाथ नहीं वहाँ भारतीय सड़कों की कुछ विशेषताएँ हैं ! भारतीय सड़कों पर हम भारतीय ड्राइविंग कम कुश्ती ज्यादा करते हैं ! हमारे यातायात व्यवहार में गाली और हॉर्न देना शामिल है ! गाडी चलाते हुए भड़कना – फड़कना पड़ता है ! भारतीय सड़कों पर अक्सर आपको अपना रास्ता निकालने के लिए मौखिक रूप से सामने वाले को धमकाना पड़ता है ! मारपीट के लिए तैयार रहना पड़ता है इसीलिए लाल बत्ती का लगाना जरुरी होता है ! लाल बत्ती मतलब भारतीय सड़क पर अश्वमेध का घोड़ा जिसे आप पकड़ नहीं सकते, रोक नहीं सकते, किसी कीमत पर बाँध नहीं सकते ! लाल बत्ती के आते ही सब समर्पण कर देते हैं ! मानवतावादी, बुद्धिवादी, एक्टिविस्ट, चिंतक, लेखक, कवि, गाड़ी चलाते हुए सभी ऐसा ही करते हैं ! ड्राइविंग करते समय भारतीय अगर रियर – व्यू मिरर का उपयोग करने लगें तो उनको अपनी विनम्रता उसमे जरूर दिख जाएगी !

लाल बत्ती के कल्चर की तरह लाल बत्ती के नियम बहुत अलग हैं ! लाल बत्ती पर कोई कानून लागू नहीं हैं ! कोई लेन प्रणाली की बंदिश नहीं, कोई यातायात नियंत्रण नहीं, कोई अंडरपास या ओवरहेड क्रॉसिंग कुछ भी नहीं ! सभी गाड़ियों से आप चिपक सकते हैं पर लाल बत्ती से चिपक सकें इतना फेविकोल किसी की छाती में नहीं ! लाल बत्ती देख कर हॉर्न भी खामोश हो जाता है !

एक मई से लाल बत्ती का इस्तेमाल बंद करने के फैसले के बाद भारतीयों को लाल बत्ती निकाल के अपनी – अपनी गाडी में ‘एल’ बोर्ड लगा लेना चाहिए ! ट्रैफिक सिग्नल का पालन करना, सीट बेल्ट पहनना, काले काँच की खिड़कियां न लगाना, ड्राइविंग करते समय फोन पर बात न करना और अन्य सभी बुनियादी नियमों का पालन करना लाल बत्ती की तरह ही ‘एल’ बोर्ड पर लागु नहीं होता ! ‘एल’ बोर्ड का पावर लाल बत्ती से कम नहीं ! ‘एल’ बोर्ड ड्राइवर की क्षमता का प्रतीक है यह दर्शाता है कि कार चलाने वाला व्यक्ति एक लर्नर है और अन्य ड्राइवरों को लाल बत्ती की गाडी की तरह उसका ध्यान रखना चाहिए ! इसका मतलब है चालक सीखने के चरण में है और लाल बत्ती की तरह सड़क पर उसका सात खून माफ़ है !

जब गाडी का ब्रेक खराब होता है तो मैं हॉर्न तेज़ करवा लेता हूँ ! हर भारतीय खास है, हर भारतीय वीआईपी है ! हम सड़क के मालिक हैं ! गाड़ियों में लाल बत्ती नहीं अब ‘एल’ बोर्ड का कोहिनूर लगेगा !

इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन

मैं एक इंजीनियर हूँ ! मैंने आईआईटी से पढ़ाई की है और मुझे पता है ईवीएम में गड़बड़ी की जा सकती है ! इसलिए मैंने खुद ही एक इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन बनाने की ठान ली है, जो 2019 के आम चुनाव में काम आ सकता है !

वर्तमान ईवीएम मतलब इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन में कई खामियाँ हैं ! मेरे ख्याल से इसमें ‘चाइल्ड लॉक’ का नहीं होना इसकी सबसे बड़ी कमी है, जिसकी वजह से ईवीएम से छेड़छाड़ संभव है !

स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव किसी भी देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए महत्‍वपूर्ण होते हैं ! इंजिनियर होने के नाते मैं भी वोटिंग सिस्टम को जितना हो सके उतना सरल करने के पक्ष में हूँ ! फर्जी मतदान तथा मतदान केन्द्र पर कब्जा और हैकिंग जैसे दोष पूर्ण व्यवहार निर्वाची लोकतंत्र भावना के लिए गंभीर खतरे हैं ! इसलिए मैं चुनाव आयोग से ये प्रार्थना करूँगा की देश का अगला आम चुनाव मेरी बनायीं हुई इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन से ही कराए !

मेरी ही तरह जो यूजर ईवीएम से नाखुश हैं उनके लिए मेरी मशीन एक खुशखबरी है ! ढेरों बैठकें करने के बाद और एक दर्ज़न प्रोटोटाइपों की जांच – परीक्षण एवं व्यापक फील्ड ट्रायलों के बाद ही मैंने अपने इस इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन को फाइनल किया है ! यह छेड़छाड़ मुक्त तथा संचालन में सरल है ! मेरी बनायीं हुई मशीन पूरी तरह से सुरक्षित हैं और कोई भी यह नहीं साबित कर पाएगा कि मेरी ईवीएम से छेड़छाड़ हो सकता है !

मेरा मानना है इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन सिर्फ मतदान ही न कराये बल्कि कपडे धोये और जूस भी निकाल सके ! जरुरत पड़ने पर ऐ टी एम बन जाए और बहुत ही कम समय में इस से गाजर का हलवा भी गर्म किया जा सके ! सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय के सिद्धांत पर बनी ये मशीन जनता के काम आने वाली सभी मशीनों का गठबंधन है ! आम लोगों के लिए बनी मेरी मशीन सभी मशीनों के साथ ठीक से कैलिब्रेट हुई हैं ! लोकतंत्र की हिफाजत के लिए मैं किसी भी मशीन से हाथ मिलाने के लिए तैयार हूँ !

सब जानते हैं इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पांच – मीटर केबल द्वारा जुड़ी दो यूनिटों से बनी होती है इसलिए हर ईवीएम के दो हिस्से होते हैं ! एक हिस्सा होता है बैलेटिंग यूनिट जो मतदाताओं के लिए होता है, दूसरा होता है कंट्रोल यूनिट जो कि पोलिंग अफ़सरों के लिए होता है ! वर्तमान ईवीएम की ये सरलता ही सबसे बड़ा खतरा है ! जब तक मशीन में कुछ ऐसे यूनिट न हों जिसे समझने के लिए उसे ठोका जाए तब तक कोई भी मशीन मिशनरी है, मशीन नहीं !

कोई भी मशीन खराब नहीं होती पर उसे उपयोग करने वालों की उँगलियों का सब दोष होता है ! जनता की उँगलियों ने हर मशीन को इधर उधर ऊँगली करके खराब कर डाला है ! वैसे तो हर भद्र भारतीय नागरिक आपस में एक दुसरे को दिन पर उंगल करते हैं पर मशीन सामने आते ही उनकी उँगलियों के होश उड़ जाते हैं ! घबराहट में इधर की ऊँगली उधर कर के सारा खेल बिगाड़ देते हैं ! एक मशीन में ठीक से ऊँगली तक नहीं कर पाते हैं आज के आम नागरिक ! अंगुल न जाने मशीन खराब ! इस भीषण समस्या से लड़ने के लिए मेरी मशीन ‘ऑय सेंसर’ से लैस होगी और एक ऍप से सबके आँखों के इशारे पर नाचेगी ! आप नेता की तरफ निहारेंगे और मशीन कपडा धोते धोते वोट गिरा देगी !

हर बैलट बटन के पास एक स्पीकर भी होता है जो हर वोट के सही ढ़ंग से दर्ज होने के बाद तेज़ आवाज़ करता है और फिर चुप हो जाता है ! मेरे हिसाब से स्पीकर का चुप रहना स्पीकर की बर्बादी है ! मेरी मशीन में ये स्पीकर क्रिकेट कमेंट्री से ले कर ऍफ़ एम के गाने तक सुना सकेंगे ! अच्छी बात यह भी है कि यह मशीन मिक्सर और ग्राइंडर की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है ! मेरी यह मशीन मिक्सिंग, ग्राइंडिंग, ब्लेंडिंग, ग्रेटिंग और जुसिंग के लिए भी एक बढियां ऑप्शन है !

देश में बहु के बाद अब मशीन की बारी है ! जैसे कुशल सास को अपने बहु से हर काम कर लेने की उम्मीद होती थी वैसे ही अब जनता को अपने इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन से हर काम के हो जाने की उम्मीद है ! मेरी मशीन यह चैलेंज लेने को तैयार है !

पहले गैस पर खाना बनाने के लिए किचन में काफी समय बिताना पड़ता था ! पर आज कल माइक्रोवेव यह सब काम बहुत जल्दी कर देता है और देशवासी अपना समय किचन के बजाए फेसबुक और व्हाट्सएप में बिता सकते हैं ! इसी बात को ध्यान में रख कर मैंने इसमें एक माइक्रोवेव का यूनिट भी जोड़ दिया है ! यह सब यूनिट पांच मीटर के सरकारी केबल से ही जुड़ा होगा ! केबल की बर्बादी हम नहीं होने देंगे ! ईवीएम के बचे हुए केबल से मशीन को देश से और देश को मशीन से बाँधने का प्रयास करेंगे !

मैंने इस मशीन में एक बहुत ही तगड़ा मोटर लगाया है ! यह मोटर एक मिनट में करीब दुनिया भर के अठारह हज़ार चैनल के चक्कर लगाने के काबिल है ! ख़ास बात यह भी है कि यूज़र्स इस मशीन को प्राइम टाइम पर चार अलग स्पीड पर इस्तेमाल कर सकते हैं !

इसके जूसर मिक्सर का मोटर पाँच सौ पचास वाट की बिजली पर चलती है जो की मासिक बिल के नज़रिये से ज़्यादा नहीं है ! इतनी पावर से आप मोटे छिलके वाली चीज़ें और हार्ड मसाले आसानी से पीस पाएंगे, पर मोटे छिलके वाले हार्ड नेता को ढूँढ के लाना और मशीन का इस्तेमाल करना आज की तारिख में नागरिक ग्राहकों की एक फैंटसी है !

यह मशीन सेमीऔटोमैटिक है ! ये भारतवासियों को चुनाव की याद दिलाएगा और समय आने पर इलेक्शन अलार्म भी बजाएगा ! यह जूसर मिक्सर वाला ई वी एम एक खूबसूरत बॉडी में आता है जो बाहर से बड़ी ही शानदार दिखती है ! मैंने इसको बनाने के लिए मज़बूत प्लास्टिक का उपयोग किया है ! इस पर पटक कर नारियल भी फोड़ सकते हैं ! चुनाव से पहले आम आदमी अगर हर ईवीएम से नारियल फोड़ लेगा तो हार का ठीकरा ईवीएम पर कभी नहीं फोड़ पायेगा !

इन सभी सुविधाओं के साथ आकर्षक डिज़ाइन और छोटे साइज की बेहतरीन रंगों के जबरदस्त कलर कॉम्बिनेशन की मेरी ये इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन हैंडल और पैनल के साथ बहुत सस्ती है ! मेरे द्वारा बनाया गया यह गजब का डिवाइस आप बाजार से साढ़े पांच हज़ार के वर्तमान प्राइस की तुलना में सिर्फ दो हज़ार दो सौ पच्चीस रुपये में घर ला सकते हैं ! मैं इस मशीन को देश हित में सस्ती किस्तों और किफायती किराये पर भी दे सकता हूँ ! इस बारे में और अधिक जानकारी मुझसे ले सकते हैं ! उम्मीद है चुनाव आयोग भी मेरी मशीन को सुरक्षित और सही मानेगा !

वोट देने के बाद इस मशीन से एक छपी हुई रसीद भी निकलेगी जो सभी लेन – देन के समाप्त हो जाने की लिखित घोषणा कर देगी ! वोटों की गिनती के बाद सभी नागरिक सील करने के बाद हर पोलिंग मशीन को अपना आइडेंटिटी कार्ड दिखा कर किसी मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की तरह मतगणना केंद्र से अपने अपने ईवीएम को अपने कंधों पर वापस घर तक ला सकते हैं !

ईवीएम का एक डे भी हो सकता है जिस दिन दीप जला के ईवीएम दिवाली मना सकते हैं ! इसके चारो तरफ दीप लगे है जिसे बैट्री से जलाया जा सकता है ! अपने इस मशीन को मैं मेक इन इंडिया के सिंह को खाने के लिए किसी चिड़ियाघर में भी छोड़ के आ सकता हूँ ! ये कागज़ी शेरों का पेट भी भर सकता है ! इसमें स्कैनर और प्रिंटर दोनों साथ हैं !

देशवासियों आशा है कि आप सब रोजमर्रा की जिंदगी में काम आने वाली मेरी इस मल्टी परपस ईवीएम मतलब इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन को छोड़कर बाकी सब घरेलू मशीनों के बारे में भी अच्छी तरह से शिक्षित होंगे और इसको ऊँगली करते हुए सब मशीनों की ठीक से ऊँगली कर सकेंगे ! हर ऊँगली और अँगूठे पर स्याही मशीन की सच्चाई है ! क्या आपको लगता है कि मैसेज का नोटिफिकेशन स्क्रीन पर पॉप – अप होना चाहिए ? अगर हां तो मेरी मशीन में कुछ स्मार्टफोन एप्लीकेशन की मदद से आप रेलगाड़ी में रिजर्वेशन करने जैसी सुविधाएँ हासिल कर सकते हैं !

मेरी इस नयी ईवीएम से पुरानी ईवीएम की तुलना में वोट डालने के समय में कमी आती है तथा ये परिणाम भी कम समय में घोषित करती है ! मैं जानता हूँ मेरे और देश के दुश्मन मेरी इस मशीन में भी त्रुटि ढूंढ ही लेंगे पर मैं सुझावों के लिए तैयार हूँ !