एहसास का स्वगत 

मंच पर अँधेरा था ! मैंने टटोल कर अपने पाँव रखे ! मंच पर रौशनी आने से पहले मेरा पैर उसकी छाती पर होना जरुरी है ! दर्शकों के लिए ये वो क्षण है जब मंच पर काली को अपने रौद्र रूप में देखेंगे !

मेरी ये कोशिश रहती है कि मेरे पाँव का दवाब संतुलन में रहे ! किसी पुरुष की छाती पर अपना पैर रखने का ये मेरा पहला अनुभव है ! मैं जैसे ही उसकी छाती पर पाँव रखती हूँ मेरे ह्रदय से तनाव और भय का नाश हो जाता है !

मेरी छाती तेज़ धड़कने लगी है ! अगले क्षण मेरी छाती पर स्त्री का पैर आने वाला है ये सोच कर मेरा रोम रोम काँप जाता है ! पता नहीं शिव की छाती पर अपने पाँव रख कर काली को क्या एहसास हुआ पर मेरी छाती पर एक स्त्री का पैर मुझे उन्मुक्त पुरुष बना जाता है !

मंच पर रौशनी आते ही दर्शकों को लगता है कोई जादू हो गया हो ! स्त्री पुरुष का ऐसा साक्षात दर्शन देख कर दर्शक मुग्ध हैं ! दर्शकों की तालियाँ सुन कर लगता है जैसे उन्होंने अभिनेताओं के दिल की मौन धड़कन सुन ली हो !

दो कोहरा एक काला एक गोरा

फोटो : गूगल के कोहरे से

गोरा – ( कैमरे में देखते हुए ) मैं सफ़ेद कोहरा हूँ ! मुझे बोलते हुए आप नहीं देख सकते क्योंकि मैं अभी घना हूँ ! मुझे बस आप सुन सकते हैं ! कड़ाके की ठंड है और मैं दिन भर छाया रहूँगा ! मेरी वजह से दोपहर तक सड़कों पर वाहन लाइट जलाकर रेंगते रहेंगे !

काला – ( कैमरे में देखते हुए ) मुझे भी बोलते हुए आप नहीं देख सकते क्योंकि आप सब जानते हैं रंगों का सफर कर्म से होकर आज की तथाकथित जाति पर आकर पूर्णत: विकृत हो चला है ! मुझे देखने की कोशिश करेंगे तो मैं आपकी आँखों में चुभ जाऊँगा ! मैं काला कोहरा हूँ !

गोरा – जैसे कुछ व्यक्ति मुझ सफ़ेद कोहरे की तरह योग्यता या शुद्धाचरण न होते हुए भी स्वयं को ऊंचा या ऊंची जाति का और पवित्र मानने लगे हैं वैसे ही कुछ अपने को ( काले कोहरे को इंगित करते हुए ) काले कोहरे की तरह नीच और अपवित्र समझ कर इम्पोर्टेंस भी लेने लगे हैं !

काला – संविधान में रंग और जाति के आधार पर भेदभाव पर रोक है, लेकिन ( सफ़ेद कोहरे को देखते हुए ) तुम जैसे सफ़ेद धुंध की वजह से समाज और सरकार उसे रोकने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं …

गोरा – ( काले कोहरे को काटते हुए ) पहले हम सुर और असुर, फिर आर्य और अनार्य और फिर वैष्णव और शैव में बदल गए ! फिर ब्राह्मण और शूद्र में बदल कर धर्म का नाश कर दिया ! इस दौरान लोगों ने अपने – अपने वंश चलाये ! फिर ये वंश समाज में बदल गए ! अब काला और गोरा कोहरा सबके सामने है …

काला – ( सफ़ेद कोहरे को काटते हुए ) आज मैं अभी लाईव हूँ , प्रेस कॉन्फ्रेंस जैसा माहौल है पर सफ़ेद कोहरे की वजह से कुछ भी साफ़ नहीं है …

गोरा – ( हँसते हुए ) कोहरा काल में काले कोहरे के फेसबुक लाइव कार्यक्रम से क्या होगा ?

काला – ( कैमरे में देखते हुए ) सफ़ेद कोहरे के ख़िलाफ़ आज मैंने अपनी चुप्पी तोड़ी है …

गोरा – लेकिन अगर वाकई गलत हो रहा है तो चुप्पी तोड़ना भी समाधान नहीं ! अब तो विरोध जताने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती ( हँसता है )

काला – सुन ओ सफ़ेद कोहरे, तुम्हारी वजह से पता ही नहीं चलता क्या सही है, क्या गलत ! सफ़ेद कोहरे की वजह से न्याय व्यवस्था पर भरोसा करना कठिन हो चला है, इसलिए मुझे लाइव आना पड़ा !

गोरा – अपने काले कोहरे की लाइव चादर को उतना ही फैलाओ जितना …

काला – क्या जितना ? किसके जितना ? हमारे देश में जितनी फ़िल्में हैं, जितने विज्ञापन हैं, जितनी ब्यूटी मैग़ज़ीन्स हैं और टीवी सीरियल हैं, सब कहते रहते हैं कि काला रंग पर्याप्त सुंदर नहीं हैं ! ख़ूबसूरती की जो परिभाषा गढ़ी गई है काला रंग उसमे फिट नहीं है ! बहुत से मुल्कों में काले रंग को लेकर हीन भावना है ! काले कोहरे पर रंग भेद का अभियान ‘डार्क इज़ ब्यूटीफ़ुल’ भी लागू नहीं होता ( रुआँसा हो जाता है )

गोरा – गोरी त्वचा के लिए दीवानगी मैंने भी देखी है काले ! तुम्हारा दुःख समझ सकता हूँ दोस्त ! देश के कॉस्मेटिक बाज़ार में गोरापन बढ़ाने वाली क्रीम की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है ! यहां तक कि बॉलीवुड के कई अभिनेता और अभिनेत्रियां इन कॉस्मेटिक्स का विज्ञापन भी करते रहे हैं ( रोते हुए ) फिर भी किसी सफेदी में मुझ सफ़ेद कोहरे का नाम तक नहीं लेते …

काला – सफ़ेद कोहरे तुम चाहते क्या हो ? मेरा ‘लाइव’ क्यों मार रहे हो ?

गोरा – ( कैमरे में देखते हुए ) मुझे बिना अंधविश्वास का जीवन चाहिए ! एक जीवन जिसमें आस्था मानवता के प्रति हो, न कि एक अज्ञात भगवान के प्रति ! जीवन जो दूसरे मनुष्यों के लिए करुणा और सम्मान पर आधारित हो ! गरिमा और आत्मसम्मान से भरा जीवन ! जाति व्यवस्था से परे जीवन ! इसलिए मैं लाइव हूँ …

काला – मैं सबसे पहले यह बता दूँ कि दुनिया में किसी भी समाज, व्यवस्था और धर्म का निर्माण किसी भी ईश्वर, अल्लाह या गॉड ने नहीं किया है …

गोरा – पर भारत में पिछले कुछ समय में दलितों और ऊंची जातियों के बीच काला कोहरा बढ़ा है ! हालांकि सरकारें अलग अलग समय पर दलितों के उत्थान के लिए कदम उठाती रही हैं ! एनडीए ने राष्ट्रपति पद के लिए दलित उम्मीदवार ही चुना …

काला – ( गोरे कोहरे को काटते हुए ) जाति पर भाषण मत पढ़ो, कोहरे की बात करो … अपनी बात करो ! सब जानते हैं दुनिया की सभी व्यवस्थाओं को मनुष्य ने बनाया है !

गोरा – तो ? समाज में तुमने जिस प्रकार विघटन किया है, क्षय किया है, प्रगति में बाधक बने हो उसे देखते हुए कई समाज सुधारको और संगठनों ने समय समय पर तुम पर बैन नहीं लगाया है … ?

काला – गोरे भाई साहेब राजनीति में कोहरा बनाना और कोहरा लागू करना केवल एक भौगोलिक प्रक्रिया नहीं है !

गोरा – जानता हूँ देखते नहीं मैं भी लाइव हूँ … ! ( कैमरा में देखते हुए ) जिनकी भी रुचि दलित विषय में है, जो नस्लीय, जातिगत, लिंगगत और धर्मांध दुनिया के खिलाफ हैं ! उन्हें मेरा लाइव जरूर देखना चाहिए !

काला – तुम जैसे सफ़ेद कोहरे अक्सर दिखावटी शान , चमड़ी के रंग, खाने-पीने की आदतों, महिलाओं से द्वेष, होमोफ़ोबिया और जातिवाद के इर्द – गिर्द फ़ैल के वातावरण को धुंधला बना देते हैं ! तुम ही सभी अपराधों की जड़ हो ! ( कैमरे में देखते हुए ) राजनीति में अन्धकार सफ़ेद कोहरे से है !

गोरा – ( कैमरे में देखते हुए ) सभी जानते हैं मुझे ! मैं सभी पंचायतों ,प्रखंडों ,जिला एवं प्रदेशों में एक उच्च जाति का कोहरा हूँ ! ( काले कोहरे से ) काले कोहरे तुम चाहते क्या हो ? मेरा ‘लाइव’ क्यों मार रहे हो ?

काला – ( कैमरे में देखते हुए ) मैं चाहता हूँ कि जब मैं सड़कों पर चलूं तो सुरक्षित महसूस करूं और एक वज़ूद की तरह रहूँ ! मुझे स्त्रियों की तरह छूने या तंग करने का अधिकार किसी को न हो !

गोरा – फिर मेरे पास क्या कर रहा है ?

‘लाइव’ दर्शकों के ठहाके का आइकॉन हवा में तैरने लगते हैं !

( काला अवाक और मौन ! गोरा मौन पर चेहरे पर जीत की मुस्कराहट )

काला – क्यों ? तुम नहीं जानते तुम्हारा और मेरा जनम – जनम का साथ है !

गोरा – जनम का साथ है ? दूर हो यहाँ से !

काला – हम सगे हैं ! अच्छे और बुरे, सच्चाई और झूठ एक विशेष परिप्रेक्ष्य के सभी रिश्तेदार हैं !

गोरा – तू जानलेवा है !

काला – हम दोनों के बीच रासायनिक संबंध है ! हम मिल कर ही तो कोहरेवाद को समाप्त करने के विभिन्न प्रयास आज भी यदा कदा करते रहते हैं !

गोरा – तुम्हारे कैमरे में अतीत का काला कोहरा है !

काला – गोरे एक बात बताओ, हम और तुम क्यों हैं ?

गोरा – क्योंकि हम रंग में देखते हैं

काला – अतीत में इतनी धूल नहीं थी, और जलवायु भी बेहतर थी ! अतीत में कोहरा नहीं था ! अब अतीत शब्द के अर्थ का अनर्थ हो गया है !

गोरा – ( कैमरे में देखते हुए ) व्हाइट कोहरा और ब्लैक कोहरा इसमें कोई ताल मेल नहीं है …

काला – गोरे कोहरे सच कह रहे हो ! तुम सिर्फ जनवरी में बीस इक्कीस दिन के लिए माने जाते हो, मैं तीन सौ पैंसठ दिन का हूँ ! मुझे फैलने के लिए गर्म मौजे, इनर जैकेट, टोपा, मफलर, दस्ताने, रजाई के मौसमी नाटक की कोई जरुरत नहीं होती ! हमारा कोई मेल नहीं ! तुम ग्राउंड – स्तरीय हो ! मैं आकाश स्तरीय हूँ !

गोरा – ( कैमरे में देखते हुए ) हालांकि प्रमाणों की आवश्यकता नहीं है, परंतु अपने विचारों को पुष्ट करने के लिए मैं बताना चाहता हूं कि कुछ जातियों की संरचना ( काले की तरफ देखते हुए ) नकल से हुई है !

काला – ( कैमरा में देखते हुए जोश में ) मित्रों ! देखिये तथाकथित जातिवादी व्यवस्था की आड़ में मुझ जैसे सनातन काले कोहरे को भी बदनाम ‍किए जाने का कुचक्र बढ़ा है ! सैकड़ों वर्ष की गुलामी के काल में जातिवाद का कोहरा इतना नहीं था जितना की आजादी के बाद इन सत्तर वर्षों के सफ़ेद कोहरे में देखने को मिला है !

गोरा – ( कैमरा में देखते हुए ) भारत के नागरिकों खांसी, गले और सीने में जलन जैसी समस्याओँ के मालिक मेरे सामने खड़े हैं !

काला – काला और सफेद सोच मूलतः सोच का एक बहुत आलसी तरीका है !

गोरा – वास्तव में हम दोनों को बहुत सोचने की जरूरत नहीं है ( हँसता है ) काले और सफेद रंग में चीजों को देखना मानवीय स्वभाव है !

काला – काले और सफेद रंग में चीजें देखकर हमें सही निर्णय लेने में मदद मिलती है !

गोरा – फिर हमें काले और सफेद सोच से मुक्ति कैसे मिलेगी ?

काला – ( कैमरे में देखते हुए ) इससे साफ हुआ कि देश में मौजूदा दौर में जाति प्रथा को ख़त्म करने का शोर भले ज्यादा हो कोहरा कम नहीं हुआ है !

गोरा – मौसम विभाग का कहना है कि दिनभर धुंध जैसी स्थिति बनी रह सकती है …

काला – भारत के मौसम की आधिकारिक भविष्यवाणी करना स्वयंवर में धनुष तोड़ने जैसा है !

गोरा – ( कैमरे में देखते हुए ) भारत भविष्य में कोहरा प्रधान देश बना रहेगा …

लाउडस्पीकर की आवाज़ – कोहरा क्रांति बंद करो ! ( दोनों कोहरे ऑफ लाइन हो जाते हैं ) मैं मौसम विभाग बोल रहा हूँ, दर्शकों मुझे बोलते हुए आप नहीं देख सकते क्योंकि अभी घना कोहरा है ! कोहरे ने सबकुछ अपने चपेट में ले लिया है ! सेंसिटिव लोगों के लिए यह काफी नुकसानदायक भी होता है !

दो पहिया तीन साइकिल / illustration सीरीज – एक

कालाहास्य ( 1 )

साइकिल में कोई बाप बेटा नहीं होता

 

कालाहास्य (2 )

पीठ पीछे किसी ने मेरे चरखे को साइकिल से रिप्लेस कर दिया है

 

कालाहास्य ( 3 )

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साइकिल बाँट

चीनी टोबाटेक सिंह

इंडिया टुडे का ‘कवर बम’

फोटोशॉप वॉर में इंडिया टुडे के फेंके गए कवर बम से पाकिस्तान जाने के इंतज़ार में चीनी टोबाटेक सिंह पागल हो गया है ! इंडिया टुडे मैगजीन के एक कवर ने चीन में हंगामा मचा दिया है ! कवर में चीन को बड़ी सी मुर्गी और पाकिस्तान को उसका बच्चा दिखाया गया है ! इसको देखकर चीनी लोग खुश नहीं हैं ! कवर देखकर चीनी टोबाटेक सिंह इसलिए भी ज्यादा भड़के हुए हैं क्योंकि तिब्बत और ताइवान को इसमें चीन का हिस्सा नहीं दिखाया गया है ! गुस्से में चीनी टोबाटेक सिंह पागलखानों में इंडिया टुडे की मैगजीन कवर को अपने – अपने अंदाज में फोटोशॉप कर रहे हैं ! एक पागल ने पूरे भारत में (जम्मू – कश्मीर छोड़कर) चीन का कब्जा दिखाया है ! औपड़ दि गड़ गड़ दि अनैक्स दि बेध्यानां दि मुँग दि दाल आफ दी चीन गवर्नमेंट !

मांस पेशी

शेर और गाय के सम्बन्ध जब से खट्टे हुए, जंगल की राजनीती से सड़ांध की बू आने लगी ! जंगल के नगर निगम ने शेरों के लिए मुश्किल खड़ी कर दी ! सुबह शेर को जब मांस की जगह मांस बंदी का नोटिस मिला तो वो खिसियानी बिल्ली हो गया ! मवेशी वध विरोधी आंदोलन के बंदरों ने पेड़ पर से शेर को खंभा नोचते हुए देखा ! शेर पहले ही जीवन संकट के दौर से गुज़र रहे थे, अब उन्हें खाने के भी लाले पड़ गए ! शेरों को पेट भरने के लिए भैंसे का मांस दिया जाता था जिससे तबेले में असहिष्णुता बढ़ गई और भैंस देशद्रोही हो गए ! बदली परिस्थितियों में ज़िंदा रहने के लिए शेरों को बकरे के मांस से ही काम चलाना पड़ रहा है ! मांस की उपलब्धता न होने की वजह से शेरों और शावकों को मुर्गे का मांस दिया जा रहा है ! पहले तो मौसम और बीमारी शेर के लिए ख़तरा बने और अब उनके राशन पर ही हमला हो गया !

‘ बूचड़खानों पर नहीं हमारी किस्मत पर ताला लग गया है ! कहीं मर ना जाऊँ ‘ ये कह कर शक्तिशाली चीता सुबक सुबक कर रोने लगा ! चीता को रोते हुए देख कर सब माँसाहारी भावुक हो गए ! राजधानी में मांस समस्या पर चर्चा के लिए तत्काल कार्यक्रम रखा गया ! सभी जानवर आये ! कार्यक्रम में फलाहार देख कर मांसाहारी निराश हो गए ! आम, खीरा, ककड़ी, लीची, कटहल, खरबूजा, तरबूजा और अंगूर पसरे रह गए ! स्वागत भाषण में सिंह के मुँह से उत्तर प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड, हरिद्वार, जयपुर जंगल का नाम सुनते ही पशु मांस – मांस करने लगे ! ‘ प्रदेश में अगर मांस की किल्लत हुई तो हम दिल्ली से मटन मंगवाएंगे ! ‘ सिंह के इस घोषणा से सब शांत हुए !

‘ हम भी इंसानों की तरह जैसा देश वैसा भेस बनाने की काबिलियत रखते हैं ‘ सिंह की इस बात से सबके तोते उड़ गए ! ‘ चिकन खा कर थक गयी हूँ ! मांस के बारे में ठंडे दिमाग से बहस करना लगभग असंभव हो गया है ! आने वाले दिन घास – फूस की जुगाली करते ही बिताने पड़ सकते हैं ‘ नथुना फुलाते हुए शेरनी ने कहा और सभा छोड़ के चली गयी ! जंगल के एक कबाबी ने शेरनी को रोकने की कोशिश करते हुए कहा ‘ यह एक कृत्रिम संकट है जिसका लाभ मीडिया उठा रही है !’

‘ मित्रों मक्खन लगाने से मटन की गाड़ी पटरी पर फिर से आ सकती है ! ‘ सियार बोला ! अलग – अलग जायका पसंद करने वाली लोमड़ी बोल पड़ी ‘ खुराक में प्रोटीन की अहम भूमिका है. प्रोटीन शरीर में मांसपेशियों का निर्माण करता है इसलिए मीट पर टैक्स लगाने की योजना बन रही है ‘ ! ज्योत्षी तोते ने कहा ‘ शेर का पेट खराब हो तो वह घास पर मुंह मारता है ! शेर जब चिकन खा – खाकर पेट खराब कर लेगा तो फिर वो घास खाना शुरू कर देगा ‘ ! देखते देखते जंगल में मांस पर तीखी राजनीतिक और धार्मिक बहस शुरू हो गई !

शेर ने फिर बोलना शुरू किया ! ‘ पंजे और नाख़ून के रहते हुए भी कमांड और कंट्रोल दोनों ताक़तें कमज़ोर हो रही हैं ! पेट भर मांस के बिना मेरी मति भ्रम हो गयी है ! सूर्योदय से पहले ही आंखें खुल जाती हैं ! रात और दिन एक भिक्षु की तरह जबरदस्त बेचैनी और तकलीफ महसूस करता हूँ ! बिना कुछ बोले अपने मन से उमड़ रही भावनाओं का सामना करना पड़ता है ! अंदर क्रोध, तनाव, झुंझलाहट और निराशा पिघल रही है !’ शेर की आँखें भर आयीं ! ‘प्रकृति बहुत क्रूर है, जो जीवित रहने के लिए फिट नहीं होते हैं वो विलुप्त हो जाते हैं ! ‘ एक कौव्वे ने यह कह कर सबके जले पर नमक छिड़क दिया !

‘ हमें पहले शिकार से रोका गया और अब भूखा रखा जा रहा है ! हम आबादी पर हमला करेंगे और खून की नदियाँ बहा देंगे !’ मांसाहारी जानवरों की ये बात हाथियों ने सुनते ही कहा ‘हम जंगल छोड़ देंगे !’ अजगर और घड़ियाल बोल पड़े ‘हम एक दुसरे को खा लेंगे !’ क्या प्राकृतिक संतुलन जैसी कोई चीज नहीं है ? गाय के चमड़े से बने कोल्हापुर का पारंपरिक चप्पल पहने भालू ने पुछा !

संकट की इस घडी में दुष्ट लोमड़ियों ने नया नारा दिया ‘ मानव अधिकार पशु अधिकार नहीं हैं ‘ ‘क्या हम तैर के मछलियों का शिकार नहीं कर सकते ? ‘ मख्खी ने पुछा ! ‘ हम जंगल से गायब हो जाते हैं !’ चीटियों ने राय दी ! ‘ फिर हम कहाँ जायेंगे ? ‘ कौव्वे कौतुहल वश पूछ बैठे ! ‘ हम शहरों में रहेंगे ‘ कुत्तों ने कोरस में कहा ! ‘ हम शहर में आदमियों के मुखोटे पहन के रहेंगे और अपने पसंद का मांस पेट भर के खाएंगे ‘ एक कुत्ते की इस उक्ति पर मारे गए मति के सभी जानवर सहमत हो गए ! मांसाहारी पशुओं के पास कोई चारा नहीं था ! जंगल खाली हो गया ! मनुष्यों ने जंगल के बचे हुए पेड़ पौधों को गमले में रख लिया और शहर में रहते हुए जिन जानवरों का मुखौटा गिर पड़ा वो पकड़ लिए गए ! कुछ को पिंजड़े में, कुछ को सर्कस में, कुछ को चिड़ियाँ घर में, और कुछ को न्यूज़ चैनेल, सोशल साइट और राजनीती में अपने पसंद का कच्चा मांस खाने के लिए छोड़ दिया गया

जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

१.
मैश – अप के हमाम में बोलो हर हर गंगे
मिडिया के रिवेंज पोर्न में सब के पंगे नंगे
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

२.
बूथ दर बूथ पानी हुआ और दूध का दूध
प्रेग्नेंट थी सरकार अब है अबॉर्शन का मूड
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

३.
छोड़ो सबकुछ पकड़ सको तो सिग्नल को पकड़ो
क्या हो जो सबके कपड़े ले उड़ जाए इसरो
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

४.
उफ़ मतला, मक़ता, काफ़िया और रदीफ़
हैं व्याकरण के सब गुंडे हिन्दू और शरीफ़
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

५.
दो पाटन के बीच में कोई बाकी बचा न जात
रेडियो में कौन कर रहा है अपने मन की बात
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

६.
बुर्क़ा पहन के क्यों न निकली चल रहा अभियान
जाना था शमशान कहाँ चली तू बिजली की रमजान
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

७.
कफ़न में भी जेब होंगे डिजिटल जलेगी लाश
मरघट की करें राजनीति कैश है जिसके पास
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

८.
दो हज़ार का नोट चौक पर मांग रहा था भीख
पूछा तो बोला एक हज़ार से उसने ली है सीख
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

९.
गधे भी हार गए आदमी था लाचार
मान गए गधे अब आदमी करें उनका प्रचार
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

१०.
नए लुक में फिर आएगा हज़ार रुपये का नोट
लाइन में सब खड़े होकर पहले दे दो वोट
जोगीरा सा रा रा रा रा रा रा

वैलेंटाइन जो देखन मै चला

श्री गणेश जी से मोदक ले कर, माँ सरस्वती से वीणा लेकर, शंकर भगवान से चाँद ले कर, कृष्ण भगवान से बाँसुरी ले कर, श्री राम जी से धनुष ले कर, यीशु मसीह के चेहरे से करुणा ले कर और युद्ध के यूनानी देवताओं की कठोरता के साथ बासंती पीले और जूनून के सूर्ख लाल रंग के वस्त्र में, सफ़ेद बाल दाढ़ी लगाकर सांता क्लॉज़ की तरह चौदह फ़रवरी को मैं संत वैलेंटाइन बन के तैयार हो गया और जय मातादी बोल कर प्रेमियों से मिलने निकल पड़ा !

संत वैलेंटाइन का मेरा ये रूप सबसे पहले कुत्तों ने देखा और भौंकने लगे ! पता नहीं मेरे वैलेंटाइन भेष में ऐसा क्या मिश्रण हो गया था जो कुत्तों को आकर्षित कर रहा था ! श्वान – दल ने मेरे जश्न में जुड़ने का मौका नहीं गवाँया और आगे पीछे साथ चलने लगे ! लोकल कुत्तों ने दल बना के मुझे घेर लिया था और भौंक भौंक के मुझसे मेरा परिचय पूछने लगे ! व्यक्ति को जीवन व्यतीत करने के लिए क्या पहनना है और कैसे जश्न मनाना है इन बातों से आधुनिक कुत्तों का क्या लेना देना ? यह सोच कर सोसाइटी के डस्टबिन के पास रुक कर मैंने उनसे बात करने की भी कोशिश की ! मैंने उन्हें बहुत पुचकारा पर वो मानने सुनने को तैयार नहीं थे ! मैंने बाँसुरी भी बजाई पर वो चुप नहीं हो रहे थे ! भौं – भौं का जवाब भौं – भौं से देना मैंने ठीक नहीं समझा और चुपचाप चलता रहा और गुनगुनाता रहा ‘संत वैलेंटाइन चले बाज़ार कुत्ते भौंके हज़ार … ‘

श्वान – दल के शोर का फायदा हुआ ! शोर सुन कर आस पास खेल रहे बच्चों के बाल हनुमान दल ने मुझे देख लिया ! संत वैलेंटाइन का मेरा ये रूप देख कर बच्चे ताली बजाने लगे और खुश हो गए ! मेरे साथ बच्चों को खुश देख कर पास में खड़ा हवा मिठाई बनाने वाला मेरे साथ चल पड़ा ! बच्चों के संग मुझे और हवा मिठाई वाले को साथ देख कर खिलौने वाला भी साथ में आ गया और कुत्तों को भगाने में मेरी मदद करने लगा ! खिलौने वाले के साथ एक बहुरूपिया भी था जो चुनाव के माहौल से प्रेरित हो कर सभी दलों के झंडे और टोपी पहन कर सर्वदलिय नेता का भेष बना कर घूम रहा था और अपनी पार्टी के प्रचार का स्वांग कर के मोहल्ले में सबका मनोरंजन कर रहा था ! सब मेरे साथ चल दिए ! संत वेलेंटाइन बना मैं अब एक छोटे मोटे मेले से घिर गया था ! भीड़ से घिरते हुए अपनी हालत देख कर मुझे लगा संत वैलेंटाइन प्रेम के नहीं विज्ञापन के अच्छे ब्राण्ड एम्बेसडर हो सकते हैं !

शोर और बच्चों की तालियाँ सुन कर बड़े दुकानदार निकल कर मुझे देखने लगे और मुझसे मेरा डिटेल लेने लगे ! मैंने उन्हें बताया वैलेंटाइन ईसाई चर्च में एक साधु था जो भारत में अब प्रेम का ऑनलाइन देवता हो गया है और मैं वही हूँ ! कई शताब्दी पहले के संत को साक्षात देख कर दुकानदार पहले किसान की तरह डर गया फिर कंज्यूमर की तरह कंफ्यूज हो गया पर मेरे साथ बच्चों का बाजार देख कर खुश हो गया ! मुझे देख कर दुकानदार को विशाल खिलौने की दुकान का आइडिया आ गया था और दुकानदार चाह रहा था मैं सदा के लिए उसके दूकान में रुक जाऊं ! दुकानदार की बात सुन कर मैं डर गया और डर के मारे सांता क्लॉज़ की तरह हँसने लगा ! दूकान में क़ैद होने के डर से नर्वस मैं “हो हो हो’ कह कर उसकी बात का स्वागत किया ! मेरे साथ सब बच्चे भी ‘हो हो हो / हो हो हो’ कर के हंसने लगे ! दुकानदार ने मुझे आँख मार कर कहा ठीक है बाबा आप आगे बढिए मुझे आप का व्यापार रहस्य समझ में आ गया है ! दुकानदारों की चंगुल से निकल कर मैं प्रेमियों से मिलने बढ़ गया !

बहरूपिया, दुकानदार और बच्चों की नज़रों से मुझे ये पता चल गया कि सुंदरता देखने वाले की नजर में है ! अपनी समझ से पौराणिक देवताओं और विशुद्ध रूप से काल्पनिक चरित्र की विशेषताओं के रूप में मेरा वैलेंटाइन भेष धर्मनिरपेक्ष था और पौराणिक आंकड़ों के साथ मिल कर नया समीकरण बना रहा था ! अब तक दुकानदारों की सेल्फियों में सफेद बालों वाली तस्वीर के साथ मैं व्हाट्सएप्प का माल बन चूका था ! अब मुझे सिर्फ़ प्रेमियों की तलाश थी ! मोहल्ले के ग्लोब से निकल कर मैं अब सोसाइटी की गैलेक्सी में आ गया था ! मुझे लगा अब प्रेमी दूर नहीं !

बच्चों ने छोड़ा तो मुझे बूढ़ों ने पकड़ लिया जिनका वेलेंटाइन वीक में वेलेंटाइन वीक था पर कामदेव स्ट्रांग रहा था ! मेरे पिंक स्टॉकिंग्स देख कर वो भी मचलने लगे ! हाथ जोड़ के बूढ़ों ने एक स्वर में कहा ‘प्रभु मेरे ह्रदय के कोलाहल को कम कीजिये !’ ‘इसके लिए ऑनलाइन होना जरुरी है’ ये कहते हुए मैंने सबको प्रेम से मोदक चखाया और आगे बढ़ गया !

साथ साथ एक ही क़ुलफ़ी खाते हुए मुझे प्रेमी का एक जोड़ा दिख ही गया ! प्रेमी के इस युगल जोड़े के प्रेम को देख कर मेरा ह्रदय भर गया ! आलिंगन चुम्बन से दूर मुझे ये शुद्ध प्रेमी लगे ! मेरे अंदर का वैलेंटाइन जाग गया था ! वैलेंटाइन उवाच : समाज में दहेज के अभाव में वेश्यावृत्ति में धकेल दी गई लड़कियाँ क्या जानें चॉकलेट डे, प्रपोज़ डे, और प्रोमिस डे का स्वाद ! जैसे ही मैं गुलाब देने प्रेमी युगल की ओर बढ़ा छुपे हुए एक दल ने मुझ पर पिंक चड्डी कहते हुए हमला बोल दिया ! प्रेमी भी उनसे मिले हुए थे ! वो प्रेमी नहीं मुझ जैसे वैलेंटाइन को फ़साने का जाल थे ! चारो तरफ भगदड़ का माहौल बन गया ! मैंने पीताम्बरी खोल के उनको अपना लाल लंगोट भी दिखाया पर बात बनी नहीं ! मेरा चाँद बिखर गया ! वीणा के तार टूट गए ! मोर पंख बाँसुरी, मोदक धनुष सब चूर चूर हो गए !

शराब की लत और बलात्कार जैसी बीमारियों से लड़ने की जगह भूले बिसरे किसी संत को बाँधने की कोशिश करने वाले कौन है ये लोग ? मैं चीख पड़ा ! वैलेंटाइन की सच्चाई यह है कि वह एक व्यक्ति बिल्कुल नहीं है, वह एक विचार है ! मेरी बातों को सुन कर कार्यकर्ताओं के दल ने ऐसे मुंह बनाया जैसे एस एम एस की जगह कागज़ पर हाथ से लिखी चिठ्ठी देख ली हो ! ‘बाबरी वाले समाज में नहीं बराबरी वाले समाज में ही प्रेम पल सकता है ! आप मुझे फादर वैलेंटाइन भी कह सकते हैं ! आप अगर वैलेंटाइन के सहस्त्र नाम ले कर भी पुकारें तो वैलेंटाइन बन के मुझे और आप को ही समाज में आना पड़ेगा !’ मैं लगातार बड़बड़ा रहा था !

मुझ पर काबू पाने के लिए फोन कर के किसी ने निःशुल्क कीटनाशक ब्रिगेड को बुलवा लिया था और वो मेरा निरीक्षण कर के मुझे धुएँ से बेहोश करने की तरक़ीब निकाल रहे थे ! आदमी होने के सबूत के लिए मैंने उन्हें ‘हैप्पी वैलेंटाइन डे’ भी कहा पर तब तक देर हो चुकी थी, मैं उनका शिकार हो चूका था ! कीटनाशक ब्रिगेड के किसी ज़हरीली गैस ने मुझे बेहोश कर दिया ! बाद में पता चला था कि मुझे बचाने के लिए प्रेमियों ने एम्बुलेंस बुलाया पर अफ़सोस जवाब में स्कूल बस आया ! संत वैलेंटाइन की कृपा से मुझे कुछ हुआ नहीं था ! इस दुनिया में आज सब चीजों की तरह प्यार का उत्सव भी नष्ट हो सकता है, इस बात को समझने के लिए संत वैलेंटाइन के साथ किया गया यह बाजारू व्यवहार सबसे अच्छा उदहारण है !

वैलेंटाइन डे धीरे धीरे नाईट की तरफ बढ़ रहा था ! सब जानते हैं वैलेंटाइन – डे का प्यार नाइट में किसी काम का नही होता ! शाम हो रही थी ! लड़की, लड़का, गुलाब, चॉकलेट, टेडी बियर, सब घर लौट रहे थे ! सबके प्यार का एक दिवसीय बुखार उतर चूका था ! संत वैलेंटाइन अपना एक दिन का मेला ख़त्म कर के साल भर के लिए इटली लौट गए थे ! हवा मिठाई वाले की सब हवा निकल गयी थी ! खिलौने वाला अब सिर्फ टैक्स भरने वाला भर रह गया था ! फसल – दराती, हाथ, साइकिल, लालटेन और हाथी के झंडे के साथ सड़क पर चलता हुआ बहुरूपिया अब साधारण नागरिक दिख रहा था ! सब जानते हैं प्रेम नगरों में संत वैलेंटाइन दिवस के दिन स्त्री पुरुष के दो लिंगों के साथ पुलिसिंग तीसरा लिंग होता है !

प्रेमियों और बच्चों ने मिल कर मुझे मेरे घर पहुँचाया ! घर पहुँच कर होश आने के बाद हारमोनियम पर मैंने ये निर्गुण गाया ! ” सुनो कामदेव कहे साधु वैलेंटाइन, टैं – टैं – टैं , वैलेंटाइन जो देखन मै चला वैलेंटाइन ना मिल्या कोय, जो दिल खोजा आपनो मुझसा वैलेंटाइन न कोय “

बसंत के चार यार, लड़का लड़की ग्राहक और बाज़ार / व्यंग्य नाटिका

इस व्यंग्य नाटिका के सभी स्थान और पात्र काल्पनिक हैं !

पात्र –  

लड़का / बसंत ( किसी भी उम्र का एक पुरुष पात्र )

लड़की / मौसम ( किसी भी उम्र की एक स्त्री पात्र )

ग्राहक / सार्वजनिक प्रेमी ( किसी भी लिंग और उम्र का एक पात्र )

बाज़ार / सार्वजनिक प्रेमिका ( मल्टीमिडिया पर्दा / स्क्रीन )

नाटिका में बसंत के एक दिन लड़का, लड़की, ग्राहक और बाज़ार मिल कर ‘एंटी रोमियो स्क्वाड’ बन जाते हैं ! नाटक के अंत में यही सब पात्र मिल कर ‘कामदेव स्क्वाड’ बन जाते है !

 

पात्र  परिचय –

( मंच पर अँधेरा है ! पात्र एक एक कर के प्रकाश वृत में अपना परिचय देते हैं ! पात्र  परिचय में ही पात्रों का आपसी कोनफ्लिक्ट स्थापित हो जाता है )

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

लड़का : ( रोमांटिक रस ) मैं बसंत हूँ ! मौसम का राजा हूँ ! मैं रोमियो रोमांटिक हूँ !

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

लड़की : ( पावरफुल रस ) मैं मौसम हूँ ! बसंत मेरा दास है ! मैं लैला पावरफुल हूँ !

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

ग्राहक : ( कन्फ्यूज्ड रस ) मैं प्रेमी हूँ ! वाओ बसंत !!! कितना ब्यूटीफुल मौसम है ! मेरा मोबाइल कहाँ है ? मैं कन्फ्यूज्ड क्यों हूँ ?

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

बाजार : ( लॉस्ट रस ) मैं प्रेमिका हूँ ! बसंत के अंधे मजनुओं से कैसे बचूँ ? उफ़ ! ठहरो अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लूँ ! मैं लॉस्ट क्यों हूँ ? ( स्क्रीन ऑफ हो जाता है )

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

सभी पात्र एंटी रोमियो स्क्वाड बनकर कोरस में : ( हाहाकार रस )

आ रही सोशल मिडिया से पुकार

ट्वीटर पूछे बार बार

फेसबुक पर स्टेटस अपार

सब पूछ रहे हैं नेता और संत

रोमियो का कैसा हो बसंत ?

( हाथापाई करते हुए ) बसंत के चार यार / लड़का, लड़की, ग्राहक और बाज़ार

फिर अँधेरा !

दृश्य : एक

स्थान / ह्रदय बाज़ार ! बाज़ार में बहुत सारे ह्रदय लटक और झूल रहे हैं !

लड़का : मुझे बसंत दिखाइए
लड़की : बसंत अभी दूर है ! बसंत के लिए आप का बजट क्या है ?
लड़का : आप ने कितने बसंत देखे हैं ?
लड़की : जितने बसंत आप ने देखे है , उतने बसंत मैंने आज ही बेचे हैं !
लड़का : व्यक्ति को अपना बसंत खुद बनाना पड़ता है !
लड़की : आप जिसकी बात कर रहे हैं वो वो चरित्र है !
लड़का : जी ?
लड़की : चरित्र को बसंत से मत मिलाइये ! चरित्र का अलग स्टोर रूम है !
तुम मुझे अपना बजट दो मैं तुम्हे बसंत दूंगी !
लड़का : ये कैसी राजनीती है ? बसंत में मुझे बजट क्यों सुनाया जा रहा है ?
लड़की : बजट से ही बना मेड इन चाइना बसंत सबकी जेब में है ! नेता हो या संत सबकी जेब में टिंग – टिंग बजता चीन का बसंत !
लड़का : मेड इन इंडिया बसंत कहाँ है ?
लड़की : वो अभी बन रहा है ! बसंत बना सके इसके लिए बसंत देखना जरुरी होता है ! इसीलिए देखिये चीन का बसंत ! ( उँगलियों से रुपये गिनने का इशारा करती है )
( पुलकित होते हुए ) इण्डिया में देखिये अनलिमिटेड चीनी बसंत !
लड़का : मेरे बसंत का ब्रांड क्या होगा ?
लड़की : बसंत एक प्रोडक्ट है जिसका अभी तक कोई ब्रांड नहीं !
लड़का : ( वीर रस में ) ईश्वर का दिया कभी अंत नहीं होता , जो ख़त्म हो जाये वो बसंत नहीं होता !
लड़की : मत भूलो तुम जैसे रोमियो के लिए बाहर लोकल गुंडों का अभ्यास चल रहा है !
लड़का : सभी चीजों की तरह प्यार का ये उत्सव भी ख़त्म हो सकता है ! याद है पर्दा प्रथा, दहेज प्रथा, बाल विवाह प्रथा, सती प्रथा …
लड़की : सुनो कामदेव ! कैंडी और कन्फेक्शनरी से भरा अपना दिमाग उठाओ और यहाँ से दफा हो जाओ !
लड़का : क्षमा ! क्षमा ! क्षमा !

फिर अँधेरा !

दृश्य : दो
स्थान / प्रेमिकाओं का इनबॉक्स ! बसंत की शुभकामनाओं से इनबॉक्स भरा हुआ है !

इनबॉक्स / एक
एस एम् एस
लड़का – बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है …
लड़की – शटअप

इनबॉक्स / दो
एस एम् एस
लड़का – तेरे मेरे सपने अब एक रंग हैं …
लड़की – शटअप

इनबॉक्स / तीन
एस एम् एस
लड़का – गाता रहे मेरा दिल …
लडकी – शट – अप / शट – अप / शट – अप ! आर्चीज बकवास बंद करो !

फिर अँधेरा !

दृश्य : तीन
स्थान / रंग बिरंगे फूलों के बीच कहीं खिले हुए एक पीले फूल के अंदर !

लड़की : मौसम का क्या हाल है ? पेट कैसा है ?
लड़का : पीले – पीले कर रहा है सुबह से …
लड़की : क्या पिलाया ?
लड़का : पीला ! येलो !
लड़की : कैसा पीला ?
लड़का : सरसों के फूल जैसा पीला और गीला गीला भी !
लड़की : लगता है मौसम को बसंत हो गया है ! लव जिहाद से बचाना !
लड़का : जी ! एंटी रोमियो स्क्वाड देने का प्लान है
लड़की : मार्किट में आ गया है ए आर एस ?
लड़का : जी !
लड़की : बसंत को धमकाता है ?
लड़का : जी !
लड़की : वाह !
लड़का : बस एक बार मौसम बसंत से छूट जाये तो कोहरे तक जान बचेगी !
लड़की : कोहरा कहाँ है ?
लड़का : बाहर है !
लड़की : कोहरे में बसंत ले के आ गए ? मौसम का ग्लोबल वॉर्मिंग चेक करवा लेना, नहीं तो बसंत तक पीला पीला करेगा बाद में सब झड़ जायेगा !
लड़का : जी
लड़की : पतझर तक की दवा दे दी है !
लड़का : जी
लड़की : ( मुस्कुराती हुई ) मौसम पर कोई नियंत्रण नहीं है …
लड़का : ( भरी आँखों से ) तुम क्या जानो मौसम क्या है ?
लड़की : मैं तुम्हारे मौसम का डॉक्टर हूँ !
लड़का : मुझे नहीं पता था कि प्रेम में पागलों के डॉक्टर को मौसम का डॉक्टर कहते हैं !
लड़की : जी ?
लड़का : मेरा मौसम सोशल मिडिया में खुला बदन घूम रहा था !
लड़की : हम्म
लड़का : डॉक्टर साहेब मेरे मौसम को सोशल मिडिया के बसंत से बचा लो !
लड़की : अगर आप के भीतर बसंत की चाह नहीं है तो आप को मौसमी कलैंडर में भी बसंत नहीं मिलेगा !
लड़का : सोशल मिडिया में बसंत इतना भर गया है कि …
लड़की : कि ? क्या …
लड़का : बस एक बार मेरा मौसम सोशल मिडिया के बसंत से छूट जाये तो अगले मौसमी बसंत के अटैक तक जी जायेगा …
लड़की : दूसरों की प्रोफाइल में रहकर हम अपना मौसम खो देते हैं ! अपने मौसम के लिए हमें खुद जीवन के धूप में खड़ा रहना होगा !
लड़का : ये सब राजनीति बसंत की वजह से हुआ ! सॉरी मैंने इस मौसम में दुसरे प्रोफाइल से फ़्लर्ट किया
लड़की : अब किसी को इनबॉक्स में भी हैप्पी बसंत मत बोलना !
लड़का : बस एक बार मुझे सोशल मिडिया के बसंत से बचा लो मैं कभी दुबारा बसंत में झाकूँगा भी नहीं !
लड़की : रोगी बने रहो ! मत भूलो मैं तुम्हारे मौसम की डॉक्टर हूँ !
लड़का : मौन

फिर अँधेरा !

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !
सभी पात्र कामदेव स्क्वाड बनकर कोरस में : बसंत के चार यार / लड़का, लड़की, ग्राहक और बाज़ार / शुरू करो लव सेक्स और प्यार का व्यापार ! हम नहीं कहते जमाना कहता है !

( धनुष से बाण चलाते हुए ) शुरू करो लव सेक्स और प्यार का व्यापार …

रोमांटिक रस के संगीत में पर्दा गिरता है !

इस प्रयोगधर्मी नाटिका में किसी भी प्रकार के मंच सज्जा की कोई आवश्यकता नहीं है ! रचनात्मक प्रकाश और ध्वनि / संगीत से चारों दृश्य को अलग अलग ढंग से दिखाया जा सकता है !

 

दलबदलू का प्रेम पत्र

प्रतीकात्मक तस्वीर : गूगल से साभार

हेलो, जानू लियोनी ! मेरी जानेमन, मेरी ज़िंदगी, मेरी तमन्ना, मेरी खुशी … तुम्हें किस नाम से पुकारूँ, तुम्हें किस तरह से आवाज़ दूँ ?

मेरे शातिर दिमाग़ को तुमसे कैसे प्यार हो गया मुझे आज तक इसका कोई सुराग नहीं है। मैं आज तक तुम्हें अपने दिल की बात नहीं बता पाया ! लिख कर बताऊं भी तो कैसे, यही डर लगता है कि अगर तुमने ना कह दिया तो तुम्हें हमेशा – हमेशा के लिए खो दूँगा ! अभी तुम मेरी हो, मैं तुम्हारे साथ ना सही, तुम ख्यालों में मेरे आसपास ही रहती हो ! लियोनी तुमने मुझे अपनाया नहीं है, लेकिन इनकार भी तो नहीं किया है ना अभी तक ! इसी ख्याल के सहारे मेरे दिन – रात कट रहे हैं कि शायद किसी दिन तुम मेरे प्यार को पहचानो और मेरे पास आकर कहो ” मैने तुम्हारी आँखों में प्यार की दास्तान पढ़ ली है माय लव और आज से हमेशा के लिए मैं तुम्हारी हूँ “

जानू मैंने फिर से दल बदल लिया है ! मैं अब ‘खपा’ में नहीं हूँ, आज से मैं ‘नपा’ में हूँ ! खुश हूँ आज से मेरा फ़ोन नंबर, ई मेल आईडी, बैंक अकॉउंट नंबर और घर का पता सब बदल जायेगा ! फिर भी भारी मन से कहना पड़ रहा है और ये बहुत दुःख की बात है कि पर्सनल दिल – बदल या पोलिटिकल दल – बदल की खबरें अब किसी को भी चौंकाती या हैरान नहीं करती हैं !

जानू तुम जानती हो मैं ‘खपा’ में विचारों की वजह से था ! पिछड़ों और दलितों के लिए काम करने वाली पार्टी अब सिर्फ कॉरपोरेट्स से पैसे लेकर राजनीति में ला रही है ! ‘खपा’ में वसूली के सिवा कोई काम नहीं हो रहा था ! पार्टी में विचार खत्म हो चुके थे, इसलिए मैंने साहेब के कामों और विचारों से प्रेरित होकर ‘नपा’ ज्वाइन कर ली है ! आज दल बदलने के शुभ अवसर पर हो रहे प्रेस कॉन्फ्रेंस में पिछले दस साल में राज्य की माली हालत ख़राब करने का ठीकरा मैं स्वयं कल तक जिस पार्टी में था उसके सर पर ही फोड़ दूंगा ! शराब का ठेका, होटलों की सस्ती नीलामी, करोड़ों रुपये की वैट चोरी, का माल जिस थाली में कल तक खा रहा था आज उसी में छेद कर दूंगा ! जानू मुझे धोबी का कुत्ता नहीं बनना ! आज कई नेता अपनी पार्टी में धोबी के कुत्ते वाली हालत में हैं, ना घर के ना घाट के ! तुम्हारा दलबदलू अपना घर और घाट समय पर चुन लेता है ! ‘नपा’ में अब तक मुझे बहुत सम्मान मिला है ! आगे भी उम्मीद है कि जैसा मैंने ‘नपा’ के लिए सोचा था, वैसा ही होगा ! किसी एक – दो सीट से कभी बात नहीं बनती – बिगड़ती ! जानू लियोनी, पार्टी में अपना नाम नहीं देख कर दिल या दल मत बदल लेना ! अभी पहली लिस्‍ट आई है ! मेरे रहते तुम जैसी किसी कार्यकर्ता या नेता को अपमानित नहीं होना पड़ेगा ! हम दोनों के दिल का जब तक तालमेल बना रहेगा, तुम बेफिक्र रहो दल में सीटों का तालमेल भी बना रहेगा !

” चुनावी बिगुल के बजते ही इन बिन पेंदी के लोटों को कुछ – कुछ होने लगता है … ये सावन के अंधे चुनाव के माहौल में सिसकारी मारने लगते हैं … ये थाली के बैंगन अपनी खीचड़ी अचानक अलग पकाने लगते हैं ! ” तुम बताओ मेरे बारे में ये सब कहना क्या बहनजी को शोभा देता है ? हाँ ये सच है कि उन्होंने कहीं मेरा नाम नहीं लिया, लेकिन पार्टी में सब जानते हैं कि आज की सब टिप्पणी बहनजी ने मेरे लिए ही की है ! मैं राजनीति में होने के कारण हर शख्स के कॉन्टैक्ट में हूं ! इसका कोई गलत मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए ! दल बदलने में कोई बुराई नहीं है !

मैं बहनजी से हाथ जोड़कर माफ़ी मांगता हूँ और उनके इस चुनाव से विदा लेता हूँ ! जानू मैं प्रण करता हूं आज़ादी की शाम नहीं होने दूंगा, वीरों की समाधि को बदनाम नहीं होने दूंगा, जब तक तन में गरम लहू की एक बूंद भी बाक़ी है, मात्रभूमि का आंचल बदनाम नहीं होने दूंगा !

जानू मैं अपना सच जानता हूँ ! मेढकों को तराजू में नहीं तौला जा सकता यह कहावत मेरे लिए ही है ! हाँ मैं एक दलबदलू हूँ ! पर जो मुझे दलबदलू कहकर बदनाम करने में लगे हैं वो अपनी चिंता करें ! अब उनके प्रेस नोट को भी कोई पढ़ना नहीं चाहता ! मैं जानता हूँ मेरी उछल – कूद की प्रवृत्ति से समाज हैरान – परेशान है, पर ऐसा करने वाले नामों की फेहरिस्त लंबी है, और मुझे गर्व है मेरा नाम सबसे ऊपर है ! इस बात का मुझे अपार हर्ष हैं कि मुझे देखते ही लोग कहते हैं ‘ राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता !’ राजनीती में अपनी दलबदलू सूझ बूझ से ही मैं कभी न छोटी की जा सकने वाली दलबदलू परंपरा की लकीर को लंबा कर पाया हूँ !

जानू इस बात से दुखी हूँ कि दलबदलू जैसे गुप्त राजनितिक चाल को ‘सबका साथ सबका विकास’ का नारा लगाते हुए सार्वजनिक किया जा रहा है और हर दलबदलू को पार्टी में घुसाया जा रहा है ! पार्टियों ने हम जैसे छोटे छोटे दल-बदलुओं के लिए भी बड़े बड़े दरवाज़े खोल दिए हैं ! अक्सर मैं सोचता हूँ, आखिर सभी दलों को दल-बदलू क्यों पसंद आते हैं ? क्या राजनीति में निष्ठा, नीति और नीयत की बातें बेमानी हो गयी हैं ? क्या आज सियासत भी कॉरपोरेट घराने की तरह हो गई है जहां लोग पैसा, पावर और पद के लिए सारे रिश्ते नाते भूल जाते हैं ?

जानू लोकतांत्रिक समाज में हर व्यक्ति की अपनी सोच होती है और वह उसे कभी भी बदलने का अधिकार रखता है ! दल-बदल को राजनीतिक प्रक्रिया का एक सामान्य अंग ही माना जाना चाहिए ! आज तुमने ट्वीटर पर कहा कि तिवारी ने मुझे आया – राम, गया – राम बुलाया है ! जानू मुझे अपने ऊपर भरोसा है अगर प्रेस रूम में भी कोई बार बार मेरे मुँह पर मुझे आया – राम, गया – राम बुलाएगा फिर भी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा ! मैं अपने कान की खाल इतनी मोटी कर चुका हूँ जिस पर सब मिल कर भी अगर इस नाम का ढ़िढोरा पीट लेंगे तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा ! जानू तुम जानती हो न हाथी चले बाजार तो कुत्ते भोंके हजार ! पर जानू लियोनी, इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि मुझ जैसे दिग्गज दलबदलुओं द्वारा भी पार्टी चुनाव जीत ही लेगी ! आज के युग में क्या किसी को किसी बात के लिए गारंटी देता है ?

चोटी के सशक्त राजनेताओं के बीच अपनी जगह बनाने की तुम्हारी महत्वाकांक्षा ने मुझे तुम्हारे और क़रीब ला दिया है ! दलबदलू नेता जनता के बीच अपनी जो विश्वसनीयता खो चुके हैं वो तुम्हारे राजनीती में आने से लौट सकती है ! तुम्हारे साथ मेरे चुनावी सभा की माँग बढ़ जाएगी ! शक्ति प्रदर्शन में तुम मेरा साथ दे सकती हो ! सत्ता की दौड़ की राजनीति के मैदान के खिलाड़ी दलबदलू परम्परा से जो खेल खेलते चले आ रहे हैं, मुझे भरोसा है तुम इस खेल को खेल कर हम दलबदलुओं को एक नयी चाल दोगी ! तुम एक मेहनती औरत हो और कड़ी मेहनत से तुमने पैसे कमाए हैं ! युवा पीढ़ी के लिए तुम एक अच्छी मॉडल हो ! राजनीति, नौकरशाही और मीडिया में मेरे मित्रों को भी तुम्हारे दिल – बदलु टैलेंट पर बहुत भरोसा है ! तुमने नाम बदला ! पेशा बदला ! देश बदला ! अब तुम मेरी तरह भारतीय राजनीती भी बदल डालो ! तुम्हारे पास दोहरी राष्ट्रीयता है अब तुम अपनी दोहरी मानसिकता भी दिखा दो ! कामुक नर्तकी से तुम अश्लील फिल्म अभिनेत्री बनी, व्यापार-जगत से जुड़ी, और मॉडल होने के बाद आज बिन पेंदी के लोटे बॉलीवुड की एक सुपर स्टार हो ! तुम्हारी तुलना सुनहरे पर्दे की मीनाकुमारी और मधुबाला से की जाने लगी है ! राजनीति में आ कर तुम अपनी तुलना मैडम, दीदी, बहनजी से करवा सकती हो ! जैसे तुमने प्रोफेशन बदला है वैसे अगर तुम दल बदलोगी तो मेरी भविष्यवाणी है कि तुम भविष्य में प्रधानमन्त्री बन जाओगी ! अश्लील फिल्म के बाद राजनीति में मेरे साथ और प्रसिद्धि पाने के लिए तुम्हे तरह-तरह के विवादों और अफ़वाहों से घिरा रहना पड़ेगा ! हम दोनों की यही बात पत्रकारों को आकर्षित करेगी ! मेरे साथ तुम्हारी ज़िन्दगी की विस्मयकारी दास्तान तुम्हे महान नेता बना देगी ! ‘आधी छोड़ सारी को धावे, सारी रहे न आधी पावे’ मुहावरे को तुम ही झुठला सकती हो लियोनी ! आधी, सारी सब छोड़ के दलबदलू राजनीति को सत्ता के खेल में तुम ही निर्वस्त्र कर सकती हो !

तुमको पत्र लिखते हुए हमेशा डरता हूँ, सोचता हूँ कभी मेरा अकाउंट हैक हो गया तो क्या होगा ? फिर तुम्हारी एक फ़िल्मी बात मेरी कानो में गूंजने लगती है और मुझे वो पल याद आ जाता है जब तुम अपनी लियोनी अदा में मुझसे कहती हो ” लोगों से सुना है किताबों में लिखा है / सब ने यही कहा है / प्यार करने वाले कभी डरते नहीं / जो डरते हैं वो प्यार करते नहीं … ” फिर मैं कहता हूँ ‘तुम ही मेरी लियोनी हो ! लियोनी असली और नकली नहीं होती …’ इस बात पर तुम कितनी हंसती हो … और हँसती हुई बिलकुल सच्ची सलोनी लियोनी लगती हो …

मेरी जेब की मुद्रा स्थिति से ले कर मेरे शरीर मुद्रा की हर स्थितियाँ मेरी कल्पना में तुम जानती हो ! जानू तुम इस दलबदलू को कभी अकेला मत छोड़ना ! कल मैं अपने दिल की फिर सुनूँगा ! दिल जब बोलेगा बदल जाऊंगा और कोई दल जब बुलाएगा तो दिल बदल लूँगा ! मैंने तो दल बदल लिया है अब देखना है मेरे पीछे – पीछे मेरे क्षेत्र की जनता भी अपना दिल बदल कर मेरा साथ देती है की नहीं …

बी बी सी की टीम दलबदलू नेताओं पर फीचर में मुझसे इंटरव्यू लेने आयी है, मुझे अभी जाना पड़ेगा …

तुम्हारा और सिर्फ़ तुम्हारा जानू दलबदलू
चीयर्स

अभी आप इन्टरनेट के माध्यम से जमा किया गया एक दलबदलू का प्रेम पत्र पढ़ रहे थे ! सोशल मिडिया के परदे के पीछे से एक दलबदलू की आभासी उपस्थिति को पढ़ कर मुझे लग रहा है कि दलबदलू बिचारा होता है और अपने दिल का मारा होता है ! मैंने एक दलबदलू के वर्चुअल लव लाइफ को सामाजिक हित में हैक किया है ! मेरे इस कृत्य का किसी राजनितिक सीट को बनाए रखने से कोई लेना देना नहीं है ! दलबदलू जो अपनी पार्टी के साथ करते हैं वही अपने दिल के साथ भी करते हैं ! दलबदलू दिल और दल एक काल्पनिक – दैविक मज़बूरी में बदलते हैं ! प्रिये काका हाथरसी ठीक कह गए हैं, दलबदलू दार्शनिक होते हैं ! – एक देशप्रेमी हैकर, जय हिन्द !

चुनाव और दंगल

मैं जन्म से नागरिक हूँ, मैं किस राजनितिक पार्टी में जाऊँ इसका चुनाव होने वाला है ! समाचार पाठक ने जबसे मुझे बताया है कि मेरे चुनाव के लिए सभी दल मेरे साथ दंगल करने वाले हैं, मेरी नींद उड़ गयी है ! इंटरनेट पर मैंने देख लिया है देश के करोड़ों नागरिक पहलवान में एक मेरा नाम भी है ! देश के मतदान सूचि में नाम होना किसी महाकाव्य में अपने नाम को देखने जैसा है ! मेरा पूरा नाम, मध्य नाम, अंतिम नाम, आयु, लिँग, जन्म तिथि, राज्य, जिला, शहर, गांव, जन्म स्थान, घर का दरवाजा – नंबर, स्ट्रीट, क्षेत्र, मोहल्ला, डाकघर, पिन कोड, थाना, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, चुनाव आयोग के पास है ! मतदाता सूची में नाम होने की वज़ह से अब मैं इस दंगल से बच नहीं सकता ! बुद्धिमान बुद्धिजीवी लोग वोट देने क्यों नहीं जाते हैं मेरी समझ में आ गया ! हमारे देश में अधिक वजन और मोटापे से ग्रस्त लोगों की संख्या अधिक क्यों है इसका कारण भी मुझे समझ में आने लगा है ! इस चुनावी दंगल के लिए नागरिक पहलवान अपने शरीर के साथ पांच साल की तैयारी करते हैं, और पहलवान से दिखते है ! दंगल में कोई हारना नहीं चाहता ! चुनाव और दंगल, मतलब फिट टू फैट तक की जर्नी और जंगल में मंगल !
मैं उचित शारीरिक स्थिति में हूँ ! सात मिनट में एक मील चल लेता हूँ पर पहलवान के आकार का नहीं हूँ ! सभी पार्टियों के पहलवानों की सूची जारी हो रही है ! उम्मीदवारों की तस्वीर और उनके यश की कद काठी देख कर मुझे डरावने सपने आने लगे हैं ! न जाने क्यों मेरे मन में राजनितिक पार्टीयों द्वारा आम आदमी के साथ अब तक किए गए मोलेस्टेशन का दंगल शुरू हो गया है ! आँख लगते ही अखाड़े में पहुँच जाता हूँ जहाँ मेरी पसलियां टूट जातीं है, घुटने घायल हो जाते हैं और मेरी नींद उचट जाती है ! मुझे अपनी बॉडी कमज़ोर लगने लगी है ! मैं शुद्ध शाकाहारी हूँ और मैंने कभी वज़न नहीं उठाया है !
अगले दिन मैं एक फिटनेस ट्रेनर के सामने बैठा था ! ‘एक नागरिक पहलवान के साथ दंगल करने के लिए हर राजनितिक उम्मीदवार अपने ऊपर बीस से अठ्ठाईस लाख रुपये खर्च कर रहा है ! आप का बजट क्या है ?’ उन्होंने पूछा !
‘जी ? ‘ जिम की इतनी फीस होगी मैंने सपने में भी नहीं सोचा था ! मैं चुप हो गया था ! मुझे गौर से देखते हुए उन्होंने कहा ‘उम्मीदवारों के सामने टिके रहने के लिए आप को नए उपाय सोचने होंगे ! आप का अकॉउंट किस वोट बैंक में है ?’ उन्होंने पूछा ! ‘स्टेट बैंक में’ मैंने जवाब दिया !
‘सबका स्टेट बैंक एक है ! आपका वोट बैंक कौन सा है ?’
मैं ब्लेंक था ! वो संमझ गए कि इस दंगल में मैं नया पहलवान हूँ !
‘नाश्ते में क्या करूँ ?’ सवाल करने की मेरी बारी थी !
‘नाश्ते में विचार कीजिये !’
‘वो तो डिनर में किया था’ मैंने जवाब दिया !
उन्होंने मुझे निहारते हुए जवाब दिया ‘यही प्रॉब्लम है, आप ने ज्यादा विचार किया ! आप कैसा शरीर चाहते हैं ?’
‘मैं बस दंगल जीतना चाहता हूँ !’
‘आप को समय देना होगा !’
‘मेरा पूरा समय ले लीजिये … ‘
‘आप बेरोज़गार हैं ?’
‘जी नहीं मैं लेखक हूँ !’
‘जी एक ही बात है …’ उन्होंने कहा !
मैं अवाक था !
‘रिजल्ट कब से आना शुरू हो जायेगा ?’ मैंने पूछा !
‘ग्यारह मार्च को’
‘जी ?’
‘ओह , बॉडी ? आप की बॉडी अगले चुनाव तक बन जाएगी !’
‘और इस दंगल में ?’
‘इस दंगल में कसरत से शरीर बनाना असंवैधानिक हैं ! इस दंगल में आप बस हमारा साथ दीजिये !’ मेरे फिटनेस ट्रेनर ने कहा स्वस्थ जीवन शैली, व्यायाम, पोषण, आदि का ज्ञान मुझे वोट बैंक में मिल जायेगा ! पूछता पूछता मैं वोट बैंक पहुँच गया ! वोट बैंक स्वचालित रूप से डिफ़ॉल्ट राष्ट्रीय हित है ! इस बैंक को सब लोग संदेह की नजर से क्यों देखते हैं मुझे नहीं पता ! वोट बैंक में ब्याज दर सबसे अच्छा है !
‘आप किस नाम और निशान से अकाउंट खोलना चाहते हैं ?’
‘जी मैं अपने नाम से अकॉउंट खोलना चाहता हूँ !’ वो मुस्कुराये ! मैं भी मुस्कुरा दिया !
वोट बैंक में पता चला आहार के लिए इन्टरनेट और कैशलेस इकॉनमी है ! प्रोटीन गूगल पर है ! यूट्यूब पर हर व्यायाम है ! स्वस्थ शरीर के लिए बस खुश रहना जरुरी है !
अगले दिन सुबह समाचार पाठक ने ओपिनियन पोल में बताया कि चुनाव दंगल में मैं जीत रहा हूँ ! मैं अपनी जीत से चौंक गया ! न मैं बूथ पर गया था न अखाड़े पर फिर बिना दंगल लड़े और अखाड़े पर गए मैं जीत कैसे गया ?

चुनाव और दंगल