मिक्स्ड फीलिंग्स / मनः स्टेटस

 

मनः स्टेटस

मनः स्टेटस

1.

किसी को मुझे छोटा दिखाना होता है तो मेरी फिल्मों की असफलता की बात जरूर करते हैं ! फिर चरित्र पर चोट करते हैं ! ये कोई नयी बात नहीं है ! फेसबुक पर मेरी हालत चंद्रधर शर्मा गुलेरी की कहानी ‘उसने कहा था’ के लड़के जैसी हो जाती है ! इनबॉक्स से निकल कर घर लौटते लौटते लगता है रास्ते में एक लड़के को मोरी में ढकेल दिया हो ,एक छावड़ीवाले की दिन-भर की कमाई खो दी हो ,एक कुत्ते पर पत्थर मारा हो और एक गोभीवाले के ठेले में दूध उड़ेल दिया हो … सामने नहा कर आती हुई किसी वैष्णवी से टकरा कर अन्धे की उपाधि तो पा ही लेता हूँ … गॉसिप का हिस्सा होता हूँ, ब्लॉक होता हूँ ,अनफ्रेंड होता हूँ तब कहीं घर पहुँचता हूँ …

 

2.

कबीरा खड़ा बाजार में सबकी मांगे खैर। ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर !

 

फेसबुक पर पूरी तरह उन्मुक्त हो गया हूँ ! ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर ! मेरा कोई चेला नहीं ! मैं किसी का गुरु नहीं ! मेरा कोई गैंग नहीं है और न ही मैं किसी गैंग का हिस्सा हूँ ! मेरा कोई ब्रांच नहीं है और न ही मेरा कोई सिक्का चलता है ! किसी को खुश करने के लिए मैं एक बार भी लाइक बटन पर चटका नहीं लगाता और न ही किसी के द्वारा लाइक नहीं किये जाने पर बुरा मानता हूँ ! चापलूस और चमचे मुझसे दूर भागते हैं ! मैं अपनी मर्ज़ी से जो चाहता हूँ लिखता हूँ और अपने लिखे हुए पर सबकी राय को ठेंगे पर रखता हूँ ! एरोगेंट तो था ही अब ज़हर हो गया हूँ ! ऐसी दोस्ती को चूल्हे में झोंक आया हूँ जो सिर्फ मतलब के लिए की जाती है और निभाई जाती है ! जिसने भी मुझे समझने का दावा किया उनके दिल में मेरे लिए एक कचोट जरूर है क्योंकि वो मुझसे कभी मिले नहीं और मिले भी तो मैं उनके किसी काम न आ सका ! मेरे लिए बनायी गयी हर राय को मैं स्वीकार करता हूँ ! फेसबुक पर मैं एक लूज़र हूँ, अपने मुठ्ठी भर दोस्तों के साथ बहुत खुश हूँ और निडर हूँ !

 

3.

मेरे लिए कुछ भी नया नही है ! मैं हर बात पर, हर काम मे सिर्फ येस का मोहताज़ नहीं ! नो … नहीं …माफ़ करिए .. नही हो सकता … सॉरी … फ़िर कभी … गो अवे … माफ़ी … समय नही है … हो नही सका … विल कॉल यू बैक … बजट नही है … अनफ्रेंड, ब्लॉक, नो रिप्लाई, मेरा जीवन है ! इन सबकी अनुभूति अद्भुत है ! बेशकीमती ! इतना आज़ाद इतना मुक्त इतना अच्छा पहले कभी नही लगा ! कोई कमिटमेंट नहीं / कोई बंधन नही / कोई अनुग्रह, पूर्वाग्रह, कुछ भी नही !! या हू !!! सबका शुक्रिया, सबको सलाम !

 

PS – ये व्यक्तिगत है ! इस पोस्ट पर राजनीतिक / सामाजिक या कोई कट -पेस्ट ज्ञान न पेलें ! अाप से नहीं हो पाएगा, मेरे अनुभव का एक अंश भी अाप का सच नही है …

 

Pic Credit : Google

मैं बैन का समर्थक नहीं

 

मैं बैन का समर्थक नहीं

मैं बैन का समर्थक नहीं

 

एक /

हम अभी लाइव टेलीकास्ट के लिए तैयार नहीं …

हमें क्रिकेट लाइव दिखाना आता है, देश नहीं
उपवास नहीं
उत्सव, त्यौहार नहीं
बलिदान नहीं, अधिकार नहीं

हमें फैशन शो दिखाना आता है
संस्कार नहीं
हमला नहीं , वार नहीं
हम अभी लाइव टेलीकास्ट के लिए तैयार नहीं !

हमें भाषण दिखाना आता है
खेल नहीं. पुरस्कार नहीं
समाचार नहीं
हम अभी लाइव टेलीकास्ट के लिए तैयार नहीं !

हमें मेंडेट दिखाना आता है
कैंडिडेट नहीं
हमें चमत्कार दिखाना आता है
पत्रकार नहीं
हम अभी लाइव टेलीकास्ट के लिए तैयार नहीं !

हम बैनर बनने को तैयार है
हम अभी बैन होने को तैयार नहीं …

 

दो /

बैन का पहाड़ा

बैन एकम बैन
बैन दूनी सर्कस
बैन तिये स्टेटस
बैन चौके बकवास
बैन पंजे काला
बैन छके हास्य
बैन सत्ते नैन
बैन अठ्ठे रुपया
बैन नामे एन डी टी वी
बैन दसे बांस

इंटरव्यू

अपने बारे में पढ़ना मुझे संकोच से भर देता है ! फिर भी Jey Sushil ने मेरे बारे में जो कुछ भी फेसबुक पर लिखा है अपने दोस्तों से बाँट रहा हूँ ! अपने काम काज के प्रति पारदर्शिता और ईमानदारी में सुशील का जवाब नहीं ! मुझे मुझसे ही मिलवाने और डिस्कवर करने के लिए शुक्रिया सुशील बाबु !

 

Pic Credit : Sushil Jha

किसी को जानना हो तो उसे सुनना चाहिए…….घंटों तक….आदमी कितना झूठ बोलेगा….बोलते बोलते….अंत में सच बोलेगा……अंदर की बात खोलेगा…वो आपको तोलेगा…….आपके सवालों से…आपकी बातों से फिर अपना जिगर खोलेगा….आपको मौका देगा उसे समझने का….ये मौके बार बार नहीं आते.
बंबई में दो फिल्मकारों से मिला..दोनों को जानने की कोशिश में सिर्फ यही करने की कोशिश की ….उनको सुनने की….दोनों ही बिल्कुल अलग अलग स्टाइल के फिल्ममेकर. लंबा संघर्ष..छोटी छोटी कहानियां..चेहरे पर मुस्कुराहटें..किसी के बारे में फैसले वाले अंदाज़ में टिप्पणी न करने की आदत.

अपने काम के बारे में कम बोलना…आलोचना को लेकर सजग लेकिन चिंतित नहीं. दोनों को खुद पर भरोसा…अपने पर अपने क्राफ्ट पर. दोनों के बैकग्राउंड बिल्कुल अलग लेकिन कहीं न कहीं एक ललक दोनों में अच्छा सिनेमा बनाने की.

संजय मस्तान Sanjay Jha Mastan– पटना से रंगकर्म, एनएसडी से पढ़ाई फिर क्लैप देने से लेकर डायरेक्शन तक का सफर. एक अलग तरह का डार्क ह्यूमर और फिल्मों का एक एकैडेमिक लैंग्वेज विकसित करने की जिजीविषा. संभवत संजय ने पहली बार किसी कविता को फिल्मों में पिरोया था. फिल्म थी स्ट्रिंग्स और कविता थी नागार्जुन की मंत्र. विरोध प्रदर्शन हुए कविता के विरोध में जबकि कविता पर कभी कोई प्रतिबंध नहीं था. यूट्यूब पर लाखों लोग वो मंत्र कविता सुन चुके हैं .कम लोग जानते हैं वो आइडिया संजय मस्तान का था.

फिर मुंबई चकाचक जो सुनील शेट्टी के कचरा रायते में फंस गया. किसी फिल्मकार के लिए फिल्म तैयार होने के बाद रिलीज़ नहीं होना कैसा होता है ये पूछना भी नहीं चाहिए. संजय भाई को भी बुरा लगा ही होगा लेकिन अब वो नई ऊर्जा से अपनी नई योजनाओं पर बात करते हैं.

वो अकीरा कुरोसावा के फैन हैं और कहते हैं अकीरा के अनुसार किसी फिल्मकार के पास एक समय में पांच स्क्रिप्ट होनी चाहिए और मेरे पास तीन स्क्रिप्ट्स हैं..दो और स्क्रिप्टों पर काम कर रहा हूं. उनकी रुचियों की सूची लंबी है. उनके जैसा दुनिया भर के स्टांपों का कलेक्शन मैंने जीवन में किसी और के पास नहीं देखा है.
वो डिजिटल दुनिया के नए कामों पर बात करते हैं. और उनसे आगे की सोच रखते हैं. उनकी फिल्मों की ही नहीं उनकी बातचीत की भाषा भी ग्लोबल है. वो थिंकिंग फिल्ममेकर हैं शायद इसलिए बॉलीवुड में कम लोग उनकी भाषा समझते हैं.

फेसबुक पर वो अपनी छोटी छोटी टिप्पणियां लिखते हैं. बहस नहीं करते..वो जानते हैं….ये सतही माध्यम है. फिल्मों को कंपलीट माध्यम मानते हैं और फिल्म बनाना उनके लिए साधना है.

उनसे बात करते करते कई बार लगा और मैंने कहा भी कि वो अपने समय से आगे के फिल्ममेकर हैं. उनके आइडियाज़ सुनने के दौरान मेरे पास बहुत कम ही था उसमें कुछ जोड़ने को…

वो वर्ल्ड सिनेमा के स्तर की बात कर रहे थे. मैं बस सुन रहा था. उनके घर में रखी हज़ारों किताबों, मैगज़ीनों, पर्चों, पोस्टरों को पलट रहा था. छोटे से घर में करीने स से रखे हज़ारों स्टांप्स, भरत मुनि का नाट्यशास्त्र और न जाने किन किन विषयों पर किताबें.

मैं उनकी निर्माणाधीन फिल्म पर कोई बात कह नहीं सकता लेकिन मैं अपनी छोटी सी समझ से कह सकता हूं कि यह एक कल्ट फिल्म होगी. अगले पांच वर्षों में जब कभी भी आए वो अपने समय से बहुत आगे की फिल्म होगी.

संजय बात बात पर क्राफ्ट की बात करते हैं…और क्राफ्ट पर बतियाते बतियाते वो मुंबई, कला, जीवन और न जाने कितनी बातों के छोर से छोर मिलाते हुए सहजता से अपनी बात रखते जाते हैं.

अपनी फिल्मों पर बात करते हुए वो बच्चों की तरह खुश हो जाते हैं. अपनी असफलताओं को छुपाते नहीं. उनके आगे के दो दांतों के बीच का खाली हिस्सा मुस्कुराता रहता है.

उन्हें आलोचनाओं से फर्क नहीं पड़ता. वो अपनी दुनिया में मस्त रहते हैं. उनको पता है फिल्म कैसे बनती है..उनको पता है उन्हें कैसी फिल्म बनानी ही. उनकी चुनौती बस ये है कि उन्होंने जो सोचा है वो पर्दे पर कैसे उतरे..क्योंकि इसी चुनौती में हर कोई सफल या असफल होता है……

आभार – सुशील झा

Sushil Jha

सुशील झा / Pic Credit : Anurag Vats

डिजिटल कचरा

 

digital-data

डिजिटल डाटा

 

डिजिटल कचरे में शब्द कम होते हैं, चित्र ज्यादा

 

एक /

कुत्ता जल रहा है ! लड़की मर रही है ! भाषण चल रहा है ! ब्रीफकेश, अटैची, हैंडबैग सब नोटों से भरा है ! अपनी अपनी तस्वीरों में लोग द्वारका, आगरा, और कशमीर से लेकर कन्या कुमारी तक खड़े हैं ! मसूर और मूँग की दाल, आलू और टमाटर के साथ फोटो खिंचा रहे हैं ! सब एक दुसरे को श्रद्धांजलि और जन्मदिन मुबारक एक ही फोटो पर दे रहे हैं ! फोटो में कोई उज्जैन जा रहा है तो कोई साकीनाका ! बाढ़ के दौरा में मंत्रीजी के हेलीकॉप्टर से पीड़ित कम दिख रहे थे और फोटोशॉप ज़्यादा ! फोटो शॉप की मदद से किसी ने सबकी थाली गायब कर दी है , अस्पतालों में पागलों की तरह लोग फर्श पर खाते दिख रहे हैं ! पेट पर लात और पीठ पर लाश, गाय और गुजरात, हर तरफ है फोटोशॉप का पलटवार ! डिजिटल रायता फ़ैल चूका है !

दो /

कोई फर्श पर खा रहा है तो कोई गाय की पीठ पर, कोई पाकिस्तान के नक़्शे पर खा रहा है तो कोई अपनी ही कार्टून पर ! कोई लाल पानी पर खा रहा है तो कोई आदिवासी के कंधे पर ! बहुत लोग अपने मन की बात पर खा रहे हैं, कविता कहानी जिस पर भी आपका मन हो आप खा सकते हैं ! किसी दिन हम लाल किला पर खा लेते हैं और किसी दिन पथ्थर फेंकते कश्मीर पर ! कोई अपने कहे की फोटो पर ही खा रहा है, कोई सबकी सुन कर खा रहा है ! जो भूखे हैं उनके फोटो पर भी कोई खा रहा है ! जितने देशवासी उतनी थाली और जितनी थाली उतने छेद ! फोटो शॉप से थाली को मिटाया जा रहा है, सबके लिए खाना है पर सबकी थाली गायब …

* कंडीशंस अप्लाई / इस पोस्ट पर आप चाहें तो खा सकते हैं, पर भूख नहीं मिटेगी, पेट नहीं भरेगा

 

Pic Credit : Google

सावधान !

” युद्ध शुरू हो चुका है ” / ” पाक साफ “/ ” पाकिस्तान पूरी तरह से ख़त्म हो गया ” इत्यादि इत्यादि ! देशवासियों कृपया ऐसे स्टेटस से बचें और घर बैठे बैठे सोशल मीडिया पर एक दुसरे के स्टेटस से युद्ध न करें ! सर्जिकल स्ट्राइक युद्ध नहीं है ! ये एक सैन्य कार्रवाई है जिसके लिए प्रधान मंत्री और सेना बधाई के पात्र हैं ! पर ये युद्ध नहीं है ! अधीर न हों ! युद्ध में सोशल मीडिया सबसे पहले हम सबका साथ छोड़ देगा या ये कहिये हम छूट जायेंगे ! युद्ध हुआ तो बिजली और पानी जैसी बुनियादी चीजों के लिए देशवासी बैचैन हो जायेंगे ! आप का स्टेटस पढ़ने के लिए सोशल साइट पर कोई नहीं होगा जब युद्ध की स्थिति में एयर स्ट्राइक से देश को जूझना होगा ! युद्ध से हम डरते नहीं हैं ! धैर्य रखें, जरुरत हुई तो युद्ध भी होगा और सबको सेना की मदद भी करनी होगी जिसकी कोई जानकारी हम सबको नहीं है ! जैसा आप सोचते हैं युद्ध वैसा नहीं होगा ! युद्ध टेलीविजन पर नहीं होगा ! युद्ध सबकी आँखों के सामने होगा और तबाही चारों ओर होगी ! जलने और मरने से चारों तरफ हाहाकार होगा ! सिस्टम और इंफ़्रास्ट्रक्चर चरमरा जायेगा ! आप सावधान नहीं हुए तो अफ़वाह के शिकार होंगे और हर हाल में देश का नुकसान होगा ! सावधान ! युद्ध टेस्ट मैच नहीं है ! युद्ध से तबाही की कल्पना आप सब खुद कीजिये और प्लीज इसकी कामना आने वाली पीढ़ी और बच्चों के हित में मत कीजिये ! सेना को अपना काम करने दीजिये और चलिए हम सब अपना काम करें ! जय हिन्द !

जलते पटाखा का बुझता प्रेमी

पटाखा को लेकर मेरा एक प्यारा सपना था, जिसको मेरी पटाखा ने ही मेरी आंखों में धूल झोंक कर फोड़ दिया है. मेरी पटाखा दरअसल सिर्फ़ मेरी प्रेमिका नहीं बल्कि मेरा एक विचार है. पटाखा की देह गंध मेरे आनन्द का स्रोत रही है. पटाखा के अंदर मेरे बचपन की खुशियां भरी थी और इसकी पवित्र चिंगारी का मैं प्रेमी था. मैं अब तक अपनी पटाखा की प्रेम अग्नि में उत्सव की तरह जलता रहा हूं. इस बार दिवाली के नाम पर अश्लील ढंग से फट कर पटाखा ने मेरा दिल तोड़ा है और मेरे प्रेम के विश्वास में मुझे धोखा दिया है. उसके धोखे से इस बार मेरे अंदर धुआं भर गया, मुझे सांस लेने में तक़लीफ़ होने लगी. पटाखा के धोखे और धुएं से दम घोंटू वातावरण बन गया. उसकी अय्याश रंगरेलियों की आतिशबाजी के धुएं और बेवफ़ाई के विषाक्त धूल से आंखों में जलन और बेचैनी बढ़ने लगी, मुझे उबकाई आने लगी और मैं हिचक के रोने लगा.

मेरी प्रिय पटाखा. मेरे दिल के अनार, चकरी और फुलझड़ियों को धोखा दे कर मेरी रोशनी, दिए, कंदील और मिठाइयों को छोड़ कर तुम अपने सीसा, मैग्नीशियम, कैडमियम, नाइट्रेट, सोडियम फॉस्फोरस की घमंड में जिसके इर्द – गिर्द चकरघिन्नी खा रही हो तुम्हारे वो ग्राहक अपनी कामनाओं की वासना में तुम्हे जला के भष्म कर देंगे. हम दोनों के प्रेम के दिए जलते तो वाकई रौशनी के फूल खिलते, पर तुम इस दिवाली में किसी की कामुकता का पटाखा बन के फटी हो तो दिल जल रहा है. बज कर फुस्स हो जाने का तुम्हारा एक दिन का ज़िद भरा जश्न हर बार मेरे लिए ध्वनि प्रदूषण और हानिकारक गैसों से नुक्सान का कारण बनता रहा है. इस दिवाली किसी और की पटाखा बन के तुमने हम दोनों के प्रेम का पर्यावरण भी जला दिया.

मेरी पटाखा, तुम्हारी बारूदी आंखें मेरी देह के भीतर फटती तो मेरी आत्मा में उत्सव का धमाका होता पर जैसे तुम फट रही हो वह प्यार नहीं है, या कोमलता, या स्नेह, या अपने आप में जीवन, यह सब कुछ भी नहीं है. पटाखा इस दिवाली में तुम्हारे फटने की कामुक कराह का शोर मुझ पर एक भयानक प्रभाव छोड़ गया है. तुम्हारा धमाका खोखले सेक्स की तरह था, जिसमे तुम फटने के बाद हर बार अन्धकार में छूट जाती हो. अपने बारूद के बदले दुसरे के अहम् की देह गंध से बार बार भर जाना क्या तुम्हे घिन से नहीं भरता ? फिर तुम हर बार फटती हुई ऐसे क्यों छटपटाती हो जैसे जलते हुए अनार को किसी ने लात मार दिया हो ? वासना की अराजक सड़कों पर तुम अब चलती कार में हवस का शिकार बन कर बजने लगी हो, मनोरंजन के नाम पर तुम अपने नगर में शोर, धुआं, प्रदूषण का एक विरासत हो और कुछ नहीं. यह भयानक है. मेरी मासूम पटाखा तुम पार्क में हवा साफ करने के लिए सूर्य नमस्कार करते – करते प्रदुषण और अन्धकार की नगर वधु कैसे बन गयी ?

तुम्हारी कामुक आतिशबाजी को बच्चों और बुजुर्गों से भरा तुम्हारा परिवार भी बर्दाश्त नहीं कर सकता है. तुम जब भी बजती हो वो दिन और रात घर में बच्चों और बुजुर्गों के लिए एक भयानक दिन और रात होती है. इसीलिए तुम छुप छुप कर प्लास्टिक पीढ़ी के आवारा मर्दों की जेब खर्च से बजने लगी हो. उम्र भर टाइम बम की टिक टिक की तरह तुम्हे मेरी ह्रदय की धड़कन बन कर रहना था पर तुमने चुना बस एक कामुक ध्वनि, देह का विस्फोट और अब सब स्वाहा. तुम्हारे बजने की बीमार आदत ने मेरी भावनाओं की दुख:मय अंत्येष्टि कर दी है. मुझे पता है तुम अपने विस्फोटों के बीच मेरे शब्दों के माध्यम से मेरी दुःख की सिसकती आवाज सुन रही हो.

सुनो पटाखा तुम जलो और बजो पर अपने प्रेमी के लिए दमघोंटू माहौल बना कर किसी दूसरे की खुशियों के लिए अपने इस पागल प्रेमी की ख़ुशी को तो कम न करो. मेरे प्रेम की सारी आक्सीजन सोंख ली तुम्हारे पटाखे के धुएं ने. अपना उल्लास इतना महत्वपूर्ण है कि दूसरों की शांति में खलल डालते हुए तुम्हे ज़रा भी संकोच नहीं होता है ? मेरी पटाखा आखिर तुम इतनी ज़्यादा सेल्फ सेंटर्ड क्यों हो ?

तुम तो मेरे ह्रदय की मासूम पटाखा थी, दुःख की बात है तुम मुझे धोखा दे कर किसी की छाती पर चढ़ कर बज गयी. तुमने मुझे प्रेम में धोखा दिया है, याद रखना तुम्हे पता भी नहीं चलेगा कि तुम कब आखरी बार बज गयी हो और कब आखरी बार फट के अपने ग्राहकों के दिमाग में बारूदहीन कचरा बन गयी. अब तुम्हारी सल्फर, कोयला और पोटेशियम नाइट्रेट से भरी देह से प्रेम करने में कोई गौरव, सम्मान या आध्यात्मिक इनाम नहीं है. जाओ पटाखा, अपने प्रेमी के रौशनी से पवित्र प्रेम की आतिशबाजी को छल कर जिनके फेफड़े में क्षणिक सुख के लिए तुम सल्फर डाइऑक्साइड भर रही हो तुम्हारे वो ग्राहक तुम्हारे सौंदर्य के फॉस्फोरस के राख होते ही तुम्हे सड़क पर अंधेरे में छोड़ देंगे. प्यार से भरे मेरे दिल से निकल कर अपने कामुक ग्राहकों के पर्स में ज्यादा दिन तक रह पाओ अब तुम जैसी जलती पटाखा के लिए धोखा खाए मुझ जैसा बुझता प्रेमी यही कामना कर सकता है. पंछी और जानवरों के साथ साथ तुमने मुझमे भी भ्रम, चिंता, और भय भर दिया है. मुझे तुमसे अब एलर्जी है. एग्जॉस्ट फैन और वैक्यूम पंप चला कर मैं अपने दिल से ही नहीं तुम्हे फेफड़े से भी हमेशा के लिए निकाल रहा हूं. गुडबाय पटाखा.

लल्लन टॉप में प्रकाशित 

मेरे अंदर एक लाल पान की बेगम है

 

लाल पान की बेगम

लाल पान की बेगम

मेरे अंदर एक लाल पान की बेगम है जिसका मैं गुलाम हूँ ! मेरा मुख्य कर्तव्य दिन रात उस स्त्री की सेवा से जुड़ा हुआ है ! मेरे अंदर उसको बराबरी का दर्जा हासिल है ! अंदर की उकता देनेवाली पुनरावृत्ति और स्नायुओं में भर गयी जड़ता से वो मुझे मुक्त कराती है और वही स्त्री मुझे आत्मनिर्भर बनाती है ! मेरे ह्रदय को एक नहीं अनेक स्त्रियों ने ढाला है ! मैं अपनी स्त्री के बारे में लिख सकता हूँ इसीलिए लिख रहा हूँ ! माँ, बहन, प्रेमिका, दोस्त, पत्नी और अब बेटी, रिश्तों की हर तह में स्त्री को जानने की ललक ही रही होगी जिसकी वजह से मुझे इतना स्त्री धन मिला है ! मौसी, बुआ, मामी, चाची, भाभी, बहु और सबकी बेटियाँ ! बहुत बड़े परिवार के साथ रह कर पला बढ़ा जिसकी वजह से मेरा संसार स्त्रियों से भरा है !

नाट्य, कलाकर्म, साहित्य और अब सिनेमा से जुड़ा जीवन ! गुरु, गाइड, दोस्त, सहकर्मी, अजनबी सब किस्म की स्त्रियों से मिलने और सीखने का सौभाग्य मिला ! स्त्रियों के साथ इतने रिश्तों में जीना, मेरा ही नहीं किसी भी भारतीय या विश्व के स्वस्थ समाज में बिताये अपने बचपन और जी रहे किसी भी उम्र के आदमी का सामान्य जीवन है, जिस पर लाखों करोड़ों लोगों की तरह मुझे भी गर्व है ! मैं आज भी स्त्रियों से आकर्षित और प्रभावित होता रहता हूँ और स्त्री ही मेरे भीतर उत्सव और आनंद का बीज बोती है !

जब भी अपने अंदर झांकता हूँ, मुझे लगता है मेरे अंदर भी एक स्त्री है जो पल रही है और मुझे पाल रही है ! मेरे अंदर की लाल पान की बेगम ही मेरी दुर्गा है, देवी है, काली है, सहचरी है, मेरे जीवन की प्राण शक्ति है ! जो मेरे भीतर के आशावादी, विजयी और सुंदर चेतना की सच्चाई है ! इस स्त्री पर अभी तो कुछ सौ शब्द लिख रहा हूँ पर मैं स्त्री पर अपने हर शब्द न्योछावर कर के उसकी आँचल में बांधेने को तैयार हूँ ! दस दिनों का दशहरा या नौ दिनों की नवरात्रि मेरे लिए स्त्रयों में मेरी आस्था से फिर फिर जुड़ने का संकल्प है !

शिकारी सिंगल

शिकारी सिंगल

 

‘शिकारी सिंगल’ मर्दों को अपने हवस का शिकार प्रेम का ढोंग रचा के बनाती है और कुछ ही हफ़्तों में बच्चा, नौकरी, मूड या किसी एक्स या कोई नए प्रेमी का बहाना बना कर अचानक गायब हो जाती है ! भावुक आदमी तड़पता रह जाता है ! मिडिल ऐज़ ‘ शिकारी सिंगल ‘ मल्टीप्ल डबल टाइमिंग करती है ! अपने पुरुष शिकार बहुत ध्यान से अलग अलग फील्ड से चुनती है और अपने से कमज़ोर आदमी में अपना शिकार तलाश करती है ! उसके शिकार एक दुसरे को नहीं जानते ! ये कई सारे सोशल साइट के प्लेटफार्म पर होती है और अपने फ़ोन से ऑपरेट करती है ! जिनसे पब्लिक में मिलती है उनसे दुरी बना के रखती है ! शिकारी सिंगल देखने में पढ़ी लिखी होती है, नौकरी भी करती है और भावनात्मक रूप से बिलकुल क्रूर होती है ! इनकी दिलचस्पी हर पल बदलती रहती है और मदद की आड़ में अपना शिकार ढूंढ लेती है ! इनसे आप कभी रिश्ता बनायें तो कंडोम का जरूर इस्तेमाल करें और सेक्स के बाद इनको रुपये जरूर दें ! इनके प्रेम के भ्रम को तोड़ें और इनके बारे में अपने दोस्तों के ग्रुप में खुल के चर्चा करें ताकि आपका कोई भावनात्मक दोस्त  इनका शिकार न बने ! अपने सेक्स की जरुरत को पूरा करना सबका हक़ है पर वो किसी रंग में न हों, दोस्ती और प्रेम के ढोंग में तो बिलकुल न हो ! जनहित में जारी !

शिकारी सिंगल / पार्ट टू ‘ सेटिंग अप द स्टेज ‘

बलात्कार और चाइल्ड एब्यूज जैसी महानगरीय वीभत्स हादसों के बाद ‘शिकारी सिंगल’ सेंटर स्टेज के लिए ‘डेस्पेरेट’ हो जाती हैं ! अपने हारे पुराने शिकार आशिकों को लेकर कोई मंच बनाती हैं और अपने हवस के नए शिकार के लिए आंदोलन में उतर जाती हैं ! कैंडल लाइट मुहीम और आंदोलन की हर रात वो एक नए मर्द शिकार के साथ हम बिस्तर होने का टारगेट रखती हैं और मोम की तरह नए पते की चादरों पर पिघलती हैं ! उनका मुख्य उद्देश्य सेक्स होता है और वो मुहीम के हर दिन अपनी कई नयी रातों के लिए नया शिकार ढूंढ लेती हैं ! योन शोषण के शिकार हुए कमज़ोर मर्द अपनी किस्मत पर इतराते हैं और इससे पहले वो कुछ समझ पाएँ मिडिल ऐज़ ‘ शिकारी सिंगल ‘ मल्टीप्ल डबल टाइमिंग करती हुई आंदोलन और मुहीम का धन्यवाद ज्ञापन कर देती हैं ! व्यस्त इतनी दिखती हैं की मर्द अपनी भावनाओं को व्यक्त भी नहीं कर पाता है ! अगर किसी ने मुंह खोला तो वो उसे छोटा साबित कर उसे ‘सेक्स गिल्ट’ में धकेल देती हैं ! इनसे आप कभी रिश्ता बनायें तो कंडोम का जरूर इस्तेमाल करें और सेक्स के बाद इनको रुपये जरूर दें ! इनके प्रेम के भ्रम को तोड़ें और इनके बारे में अपने ग्रुप में खुल के चर्चा करें ताकि कोई भावनात्मक आदमी इनका शिकार न बने ! अपने सेक्स की जरुरत को पूरा करना सबका हक़ है पर वो किसी रंग में न हों, दोस्ती और प्रेम के ढोंग में तो बिलकुल न हो ! जनहित में जारी !

*

आप से नहीं हो पायेगा ! आप के पास इतना बड़ा कलेजा नहीं कि आप एक स्त्री / पुरुष को उन्मुक्त हो कर काम सुख लेने दें ! वो आप को चुभेगी / चुभेगा ! उनका सेक्स आप को चुभेगा ! उनकी बेफिक्री आप सह नहीं पाएंगे ! आप के साथ सेक्स करने के बाद अब वो किसी और के साथ सेक्स कर रही / रहा है ये सच आप स्वीकार नहीं पाएंगे ! शिकार हर उस जानवर या पक्षी को कहा जाता है जिसका शिकार खाने या खेल के लिए किया जाता है ! शिकारी सिंगल के लिए आप भी सिर्फ एक वक़्त का खाना और खेल हैं ! अपने शिकार के बाद शिकारी सिंगल की प्रखरता और तार्किकता के कायल आप नहीं रह पाएँगे ! आप सिर्फ एक औरत / मर्द के कामोन्माद के शिकार नहीं हुए हैं, आप अपने अहम् के भी शिकार हो चुके हैं ! शिकारी सिंगल को आज़ाद कर दीजिये ! आप उन्हें जाने दीजिये, जीने दीजिये ! इनसे आप कभी रिश्ता बनायें तो कंडोम का जरूर इस्तेमाल करें और सेक्स के बाद इनको रुपये जरूर दें ! इनके प्रेम के भ्रम को तोड़ें और इनके बारे में अपने दोस्तों के ग्रुप में खुल के चर्चा करें ताकि आपका कोई भावनात्मक दोस्त इनका शिकार न बने ! अपने सेक्स की जरुरत को पूरा करना सबका हक़ है पर वो किसी रंग में न हों, दोस्ती और प्रेम के ढोंग में तो बिलकुल न हो ! जनहित में जारी !

शिकार की हर बात क्रूर होती है ! इस सीरीज में आप कोमलता की तलाश न करें !

Chaos चतुर्दशी

मुम्बई में आज chaos चतुर्दशी का कैओसशोत्सव कैओसोल्लास से मनाया जा रहा है ! चौबीस घंटे में से इक्कीस घंटे उन्नीस मिनट का समय मुम्बई में chaos चतुर्दशी का है ! chaos चतुर्दशी के कैओसशोत्सव में अठारह मार्ग पचास रास्ते पचास हज़ार पुलिस सब के सब कैलाश के नहीं कैओसोल्लास के वन – वे पर है ! आज मुम्बई वासी धार्मिक श्रद्धा और परंपरागत कैओसोल्लास के बीच गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन कर रहे हैं ! Chaos चतुर्दशी के पर्व पर ही दस दिवसीय कैओसशोत्सव का समापन होगा ! भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को chaos चतुर्दशी कहा जाता है ! डेढ़ दिन के chaos – चतुर्थी वाले दस दिन के chaos – चतुर्दशी वालों पर हँस रहे हैं ! सोसाइटी के पूजा, अर्चना, आरती, गणपति, प्रतिमा, अनंत, शांति, समृद्धि, प्रसाद, प्रभु, भगवान, प्रार्थना, दक्षिणा, सब एक साथ गणपति की पूजा, अर्चना, प्रतिमा, आरती, प्रसाद के साथ कैओस कर रहे हैं ! सबकी प्रार्थना एक थी, ” इक्कीस लड्डुओं का भोग लगाया है गणेश बाबु, नाचने में आज ज्यादा ना नुकुर मत करना नहीं तो Dj को बुरा लगेगा ” ! गणपति ने मुम्बई की लाज रख ली, खूब नाचे और सबको नचाया …

विडियो

फोटो बड़ा हो कर विडियो बनता है

( एक )

बच्चों से दूर रह कर भी अब
विडियो से दूर नहीं रह सकते,
यादों में नहीं, अब दुनिया विडियो में रहती है !

दुःख करें न करें, विडियो जरूर शेयर करते हैं !

हर पात्र का चरित्र दिखा रहा है,
विडियो अब नयी कहानी सुना रहा है !

अब किस्मत के नहीं, सब अपने विडियो के मालिक हैं

जिनसे अब तक नहीं मिले, वो कभी विडियो में मिलेंगे

दुनिया गोल थी, अब विडियो है !

अपना विडियो, अपने हाथ,
देखने वाले जगन्नाथ !

( दो )

विडियो सच्चा, आदमी विडियो का बच्चा !
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो …

विडियो अब दिखाता कम है, सुनाता ज्यादा है,
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो …
विडियो अब सुनाता कम है, सिखाता ज्यादा है,
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो …
विडियो अब सिखाता कम है, चिढ़ाता ज्यादा है,
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो …

विडियो हर वक़्त तैयार, विडियो मतलब का यार
विडियो सब संसार …
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो

सब देख्यो, विडियो
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो …

जियो और जीने दो
विडियो, विडियो, विडियो, विडियो …