बसंत के चार यार, लड़का लड़की ग्राहक और बाज़ार / व्यंग्य नाटिका

इस व्यंग्य नाटिका के सभी स्थान और पात्र काल्पनिक हैं !

पात्र –  

लड़का / बसंत ( किसी भी उम्र का एक पुरुष पात्र )

लड़की / मौसम ( किसी भी उम्र की एक स्त्री पात्र )

ग्राहक / सार्वजनिक प्रेमी ( किसी भी लिंग और उम्र का एक पात्र )

बाज़ार / सार्वजनिक प्रेमिका ( मल्टीमिडिया पर्दा / स्क्रीन )

नाटिका में बसंत के एक दिन लड़का, लड़की, ग्राहक और बाज़ार मिल कर ‘एंटी रोमियो स्क्वाड’ बन जाते हैं ! नाटक के अंत में यही सब पात्र मिल कर ‘कामदेव स्क्वाड’ बन जाते है !

 

पात्र  परिचय –

( मंच पर अँधेरा है ! पात्र एक एक कर के प्रकाश वृत में अपना परिचय देते हैं ! पात्र  परिचय में ही पात्रों का आपसी कोनफ्लिक्ट स्थापित हो जाता है )

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

लड़का : ( रोमांटिक रस ) मैं बसंत हूँ ! मौसम का राजा हूँ ! मैं रोमियो रोमांटिक हूँ !

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

लड़की : ( पावरफुल रस ) मैं मौसम हूँ ! बसंत मेरा दास है ! मैं लैला पावरफुल हूँ !

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

ग्राहक : ( कन्फ्यूज्ड रस ) मैं प्रेमी हूँ ! वाओ बसंत !!! कितना ब्यूटीफुल मौसम है ! मेरा मोबाइल कहाँ है ? मैं कन्फ्यूज्ड क्यों हूँ ?

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

बाजार : ( लॉस्ट रस ) मैं प्रेमिका हूँ ! बसंत के अंधे मजनुओं से कैसे बचूँ ? उफ़ ! ठहरो अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लूँ ! मैं लॉस्ट क्यों हूँ ? ( स्क्रीन ऑफ हो जाता है )

फिर अँधेरा !

 

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !

सभी पात्र एंटी रोमियो स्क्वाड बनकर कोरस में : ( हाहाकार रस )

आ रही सोशल मिडिया से पुकार

ट्वीटर पूछे बार बार

फेसबुक पर स्टेटस अपार

सब पूछ रहे हैं नेता और संत

रोमियो का कैसा हो बसंत ?

( हाथापाई करते हुए ) बसंत के चार यार / लड़का, लड़की, ग्राहक और बाज़ार

फिर अँधेरा !

दृश्य : एक

स्थान / ह्रदय बाज़ार ! बाज़ार में बहुत सारे ह्रदय लटक और झूल रहे हैं !

लड़का : मुझे बसंत दिखाइए
लड़की : बसंत अभी दूर है ! बसंत के लिए आप का बजट क्या है ?
लड़का : आप ने कितने बसंत देखे हैं ?
लड़की : जितने बसंत आप ने देखे है , उतने बसंत मैंने आज ही बेचे हैं !
लड़का : व्यक्ति को अपना बसंत खुद बनाना पड़ता है !
लड़की : आप जिसकी बात कर रहे हैं वो वो चरित्र है !
लड़का : जी ?
लड़की : चरित्र को बसंत से मत मिलाइये ! चरित्र का अलग स्टोर रूम है !
तुम मुझे अपना बजट दो मैं तुम्हे बसंत दूंगी !
लड़का : ये कैसी राजनीती है ? बसंत में मुझे बजट क्यों सुनाया जा रहा है ?
लड़की : बजट से ही बना मेड इन चाइना बसंत सबकी जेब में है ! नेता हो या संत सबकी जेब में टिंग – टिंग बजता चीन का बसंत !
लड़का : मेड इन इंडिया बसंत कहाँ है ?
लड़की : वो अभी बन रहा है ! बसंत बना सके इसके लिए बसंत देखना जरुरी होता है ! इसीलिए देखिये चीन का बसंत ! ( उँगलियों से रुपये गिनने का इशारा करती है )
( पुलकित होते हुए ) इण्डिया में देखिये अनलिमिटेड चीनी बसंत !
लड़का : मेरे बसंत का ब्रांड क्या होगा ?
लड़की : बसंत एक प्रोडक्ट है जिसका अभी तक कोई ब्रांड नहीं !
लड़का : ( वीर रस में ) ईश्वर का दिया कभी अंत नहीं होता , जो ख़त्म हो जाये वो बसंत नहीं होता !
लड़की : मत भूलो तुम जैसे रोमियो के लिए बाहर लोकल गुंडों का अभ्यास चल रहा है !
लड़का : सभी चीजों की तरह प्यार का ये उत्सव भी ख़त्म हो सकता है ! याद है पर्दा प्रथा, दहेज प्रथा, बाल विवाह प्रथा, सती प्रथा …
लड़की : सुनो कामदेव ! कैंडी और कन्फेक्शनरी से भरा अपना दिमाग उठाओ और यहाँ से दफा हो जाओ !
लड़का : क्षमा ! क्षमा ! क्षमा !

फिर अँधेरा !

दृश्य : दो
स्थान / प्रेमिकाओं का इनबॉक्स ! बसंत की शुभकामनाओं से इनबॉक्स भरा हुआ है !

इनबॉक्स / एक
एस एम् एस
लड़का – बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है …
लड़की – शटअप

इनबॉक्स / दो
एस एम् एस
लड़का – तेरे मेरे सपने अब एक रंग हैं …
लड़की – शटअप

इनबॉक्स / तीन
एस एम् एस
लड़का – गाता रहे मेरा दिल …
लडकी – शट – अप / शट – अप / शट – अप ! आर्चीज बकवास बंद करो !

फिर अँधेरा !

दृश्य : तीन
स्थान / रंग बिरंगे फूलों के बीच कहीं खिले हुए एक पीले फूल के अंदर !

लड़की : मौसम का क्या हाल है ? पेट कैसा है ?
लड़का : पीले – पीले कर रहा है सुबह से …
लड़की : क्या पिलाया ?
लड़का : पीला ! येलो !
लड़की : कैसा पीला ?
लड़का : सरसों के फूल जैसा पीला और गीला गीला भी !
लड़की : लगता है मौसम को बसंत हो गया है ! लव जिहाद से बचाना !
लड़का : जी ! एंटी रोमियो स्क्वाड देने का प्लान है
लड़की : मार्किट में आ गया है ए आर एस ?
लड़का : जी !
लड़की : बसंत को धमकाता है ?
लड़का : जी !
लड़की : वाह !
लड़का : बस एक बार मौसम बसंत से छूट जाये तो कोहरे तक जान बचेगी !
लड़की : कोहरा कहाँ है ?
लड़का : बाहर है !
लड़की : कोहरे में बसंत ले के आ गए ? मौसम का ग्लोबल वॉर्मिंग चेक करवा लेना, नहीं तो बसंत तक पीला पीला करेगा बाद में सब झड़ जायेगा !
लड़का : जी
लड़की : पतझर तक की दवा दे दी है !
लड़का : जी
लड़की : ( मुस्कुराती हुई ) मौसम पर कोई नियंत्रण नहीं है …
लड़का : ( भरी आँखों से ) तुम क्या जानो मौसम क्या है ?
लड़की : मैं तुम्हारे मौसम का डॉक्टर हूँ !
लड़का : मुझे नहीं पता था कि प्रेम में पागलों के डॉक्टर को मौसम का डॉक्टर कहते हैं !
लड़की : जी ?
लड़का : मेरा मौसम सोशल मिडिया में खुला बदन घूम रहा था !
लड़की : हम्म
लड़का : डॉक्टर साहेब मेरे मौसम को सोशल मिडिया के बसंत से बचा लो !
लड़की : अगर आप के भीतर बसंत की चाह नहीं है तो आप को मौसमी कलैंडर में भी बसंत नहीं मिलेगा !
लड़का : सोशल मिडिया में बसंत इतना भर गया है कि …
लड़की : कि ? क्या …
लड़का : बस एक बार मेरा मौसम सोशल मिडिया के बसंत से छूट जाये तो अगले मौसमी बसंत के अटैक तक जी जायेगा …
लड़की : दूसरों की प्रोफाइल में रहकर हम अपना मौसम खो देते हैं ! अपने मौसम के लिए हमें खुद जीवन के धूप में खड़ा रहना होगा !
लड़का : ये सब राजनीति बसंत की वजह से हुआ ! सॉरी मैंने इस मौसम में दुसरे प्रोफाइल से फ़्लर्ट किया
लड़की : अब किसी को इनबॉक्स में भी हैप्पी बसंत मत बोलना !
लड़का : बस एक बार मुझे सोशल मिडिया के बसंत से बचा लो मैं कभी दुबारा बसंत में झाकूँगा भी नहीं !
लड़की : रोगी बने रहो ! मत भूलो मैं तुम्हारे मौसम की डॉक्टर हूँ !
लड़का : मौन

फिर अँधेरा !

मंच पर प्रकाश वृत उभरता है !
सभी पात्र कामदेव स्क्वाड बनकर कोरस में : बसंत के चार यार / लड़का, लड़की, ग्राहक और बाज़ार / शुरू करो लव सेक्स और प्यार का व्यापार ! हम नहीं कहते जमाना कहता है !

( धनुष से बाण चलाते हुए ) शुरू करो लव सेक्स और प्यार का व्यापार …

रोमांटिक रस के संगीत में पर्दा गिरता है !

इस प्रयोगधर्मी नाटिका में किसी भी प्रकार के मंच सज्जा की कोई आवश्यकता नहीं है ! रचनात्मक प्रकाश और ध्वनि / संगीत से चारों दृश्य को अलग अलग ढंग से दिखाया जा सकता है !

 

बजट पच्चीसी

Illustration : Anirban Bora

Illustration : Anirban Bora

१.

मैं बजट हूँ !

समझौता के जादू को बजट कहते हैं ! मैं पत्नी के सहयोग से बनता हूँ ! दिन में घर का बजट ही रात में पति बन जाता है ! समय पर बिल भुगतान करना, कर्जों का सही समय पर निपटारा करना और अपने बचत, निवेश लक्ष्यों को हासिल करना भी मेरे ही अंतर्गत आता है ! घर का बजट बनाने का अर्थ है कि आप मुझे बना रहे हैं !

२.

मेरी बजट राशि !
जैसे घूमती हुई पृथ्वी घूमती हुई दिखाई नहीं देती, वैसे ही बजट भी हमारे इर्द गिर्द घूमता है पर मुझे कहीं घूमता हुआ दिखाई नहीं देता ! ऐसा जान पड़ता है कि मैं धन का नहीं, धन मेरा चक्कर लगा रहा है ! मेरे साथ चन्द्रमा और सूर्य भी मेरी धन राशि वृत्त पर चल रहे हैं ! मैं वृत्त में नहीं वित्त में पड़नेवाले विशिष्ट असंख्य तारा समूह में एक हूँ और सबके साथ मेरी राशि भी वित्त है !

३.

बजट का हनीमून !

मुझे अच्छी तरह पता है, बजट बनाने का मतलब है कि आप शादी के फंदे में फंस गए हैं ! मेरी गृहस्थी में बजट की शुरुआत हनीमून से ही हो गयी थी ! हनीमून पैकेज के साथ मेरे अंदर बजट शब्द की गंभीर यात्रा शुरू हो गयी ! शादी के तुरंत बाद मुझे पता चल गया था बजट का हनीमून से नाता है ! जितना बड़ा बजट उतना बड़ा हनीमून पैकेज ! बड़ा पैकेज मतलब बड़ा हनीमून, छोटा बजट मतलब छोटे पैकेज का छोटा हनीमून !

४.

भारतीय बजट !

फ्रांस में धन के आय और उसके व्यय की सूची को बजट कहते हैं ! फ्रांसीसी भाषा के शब्द से जन्मे इस बहुमंजिले शब्द से ही दुनिया लाभ में रहना सीखी है ! फ्रांस में आज बजट के साथ जो भी हो रहा हो, भारतीय बजट में अपनी आय और व्यय की भावना को मुझे बैंक खाते में रखना पड़ता है ! बहुमंजिला बजट को समझने की प्रतिभा मुझसे ज्यादा मेरी पत्नी में है !

५.

चालू खाता !

खाते ! खाते, खाते, खाते और खाते ! खाते – पीते फिर खाते ! खाते – खाते, पीते – पीते ! बैंक और खाते ! खाते – खाते, बैंक – बैंक ! खाते – बैंक, पीते – बैंक ! बैंक – बैंक ! खाते – खाते ! मेरा खाता , मेरा बैंक ! मेरा खाता मेरी खता ! खाता – खता, बैंक बैंक !

६.

बैलेंस बजट !

बजट ब्रह्म है ! वर्ष / केंद्रीय / कोष  / वित्त / मंत्री / आयोग / सरकार / योजना / ग्रामीण / बदलाव / संसद / प्रदर्शन / बिजली / सड़क / गैस / चर्चा / केंद्र / इत्यादि, इत्यादि ! मैं किसी भी शब्द से बजट पर कोई भी वाक्य पूरा कर सकता हूँ ! मेरा बजट मेरा ब्रह्म है ! मेरे बजट का बैलेंस हर शब्द में बना रहता है !

७.

पॉकेट मनी !

मेरे बजट में चार पॉकेट हैं ! दो पैंट के और दो शर्ट के ! मेरे पॉकेट मेरी पत्नी का ही कहा मानते हैं ! मैं सिर्फ उनको धोता और ढोता हूँ ! अपने साल की योजना का इरादा मैं अपने पॉकेट में ही रखता हूँ ! न जाने क्यों जब कभी बजट शब्‍द सुनाई देता है, मेरे हाथ पॉकेट में घुस जाते हैं !

८.

इकोनॉमिक्स !

दिन के, रात के, हफ़्ते के, महीने के, साल के, बजट को पहचानता हूँ ! जैसे घर में मैं अपनी पत्नी को सुनता हूँ वैसे ही टेलीविजन पर सचमुच में वित्त मंत्री को सुनता हूँ ! सिर्फ आलोचना नहीं करता ! मेरे बजट के इकोनॉमिक्स में रुपयों को छोड़ कर फिजिक्स, केमिस्ट्री, हिस्ट्री, जॉग्राफी, बायोलॉजी, स्पोर्ट्स, टेक्नोलॉजी, पर्यावरण, व्यापार, आकाश, पाताल, जंगल, पहाड़, सब है !

९.

मेरी लाइफ !

मेरी लाइफ इस साल भी स्टायलिश लुक के साथ मॉर्डन फीचर्स वाली इंटीरियर की होगी ! मेरे लिए कम बजट में फैमिली कार के बेहतर विकल्प इस साल भी आएंगे ! मार्किट में मल्टी साइज़ के ऑल्टो बजट से मैं इस साल भी बच नहीं पाउँगा ! बेहतर परफॉर्मेंस के साथ-साथ ज्यादा माइलेज के मामले में इस साल भी मेरी लाइफ आगे जाएगी ! किसी भी बजट में मुझे मेरे गंतव्य तक मेरी सरकार पहुँचा ही देगी !

१०.

मेरा हिसाब किताब !

पैसा कैसे काम करता है, इस बात को समझना ही बजट नहीं है ! शादी के कई साल बाद मुझे विश्वास हो गया है कि रोज़ सुबह पूरब में जो उगता है वो बजट है ! दोपहर को दिन भर का बजट आधा हो जाता है ! घरेलू काम की हिस्सेदारी की शेयरिंग ही असली बजट है ! गृहस्थी एक संयुक्त खाता है, बजट का हिसाब किताब दोनों प्राणी को रखना पड़ता है !

११.

बजट का बच्चा !

मेरे बजट के बारह दाढ़ हैं ! इन दांतों के बीच मेरे चार ज्ञान के दाँत हैं जो बजट के नाम पर लोहे का चना चबाते हैं ! दूध के दाँत टूटने तक माता पिता ही बच्चों का बजट हैं ! किशोरावस्था तक जैसे छुप छुप के मैंने इन्टरनेट पर सेक्स समझ लिया था वैसे ही भारतीय बच्चे यू – ट्यूब पर वित्त मंत्रियों को सुन सुन के बजट भी समझ लेंगे !

१२.

बजट पर ज़ुल्म !

बजट के इस पैकेज में हम नए दो हज़ार पांच सौ को विभिन्न स्तर पर भावनात्मक और शारीरिक रूप में ज्यादा जान जायेंगे ! नोटबंदी के नाम पर पिछले ढाई महिने में मुझ पर ना जाने क्या क्या जुल्म हुए, मेरे हज़ार पाँच सौ मेरे नहीं रहे ! लेकिन मैं बजट के साथ रहा किसी के आगे झुका नहीं !

१३.

हास्य बजट !
मुझे अपने बजट को पाने के लिए शेमलेस होना चाहिए था मैं कैश लेस हो गया ! मेरे इस बजट में हास्य बारह परसेंट से पंद्रह परसेंट पर पहुँच गया है ! वर वधु को इस साल भी लिफाफा टिकाया जायेगा ! मैंने सुना है बजट के दिव्यांगों के लिए नए बजट में हेल्पिंग किट्स सस्ते हो गए हैं ! व्यंग – आंगों को मेरा हास्य बजट सुनने पर भाषण के बजट पर लाभांश मिलेगा !

१४.

सबका रुपया एक है !

बजट में पत्नी माँग है और मैं पूर्ती हूँ ! प्रत्येक माह अपने आप को अनुशाशन में रखना होता है तब बजट में लाभ होता है ! मेरी अर्थपूर्ण चाहतों और अनावश्यक इच्छाओं को मुझसे अलग करने को मेरी पत्नी बजट मानती है ! जैसे मेरी आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपया एक है, वैसे ही बजट में अपनी अपनी अठ्ठनी होते हुए भी सबका रुपया एक है !

१५.

लाभ – लाइफ !

लव में लाभ को भी बजट कहते हैं, जैसे प्रेम में हानि को लाभ कहते हैं !

१६ .

स्मार्ट बजट !

मेरा स्मार्टफोन इस बजट में और स्मार्ट होगा ! इस बजट में स्मार्ट शहरों की तरह स्मार्टफोन के सोल्ड आउट होने की जानकारी मुझे फिर मिलेगी ! डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन दिये जाने के साथ – साथ फसलों में प्रचुरता भी इसी साल आएगी ! हेल्थ, एजुकेशन पर इस साल फिर फोकस होगा !

१७.

बजट का श्रृंगार !
बजट का बहिष्कार ही बजट का श्रृंगार है ! जिनके लिए बजट बनता है वही बजट का बहिष्कार करते हैं ! जो आज बनाते हैं वही कल उसकी चुटकी लेते हैं !  बजट एक ऐसा यूनिवर्सल चुटकुला है जो सबको पूरे साल याद रहता है और जिसे सब समझते हैं ! रहमत की बारिश के कीचड़ में इस साल फिर कमल का फूल खिलेगा !

१८.

एक साल की वॉरंटी वाला बजट !
नए बजट में अपने आप को अपग्रेड करने का ऑफर मुझे इस साल भी मिलेगा ! सारे एक्‍सचेंज ऑफर मुझे फिर से पेश किये जायेंगे ! फ्री रजिस्‍ट्रशन और एक साल की वॉरंटी वाला फेस्टिव ऑफर, फेस्टिवल सीजन में कैश डिस्‍काउंट के साथ मुझे इस बजट में फिर मिलेगा ! सोना जीतने का मौका मुझे नया बजट इस साल फिर देगा !

१९.

बजट के बड़े एलान !
‘ बजट इस साल घर का चौका – बर्तन, झाड़ू – पोछा नहीं करेगा ! मशीन से निकाल के कपडे भी नहीं फैलाएगा ! दुकान से राशन भी नहीं लाएगा ! सब्ज़ी खरीदने बाज़ार नहीं जायेगा ! मोबाइल का बिल नहीं भरेगा ! बजट अपना सर – चार्ज करेगा ! ‘ये मैं क्या बड़बड़ा रहा हूँ ! ‘ मुझे किसी बैंक में ले चलो, मुझे डिजिटल साक्षरता की ज़रूरत है !’

२०.

ग्रामीण कम – इन !

ग्रामीण तुम हमें आज ज़मीन दो हम तुम्हे कल घर देंगे ! गाँव में ऋण वसूली बजट के पीठ पीछे होगा ! तीसरा पूर्ण बजट तुम ले लो ! ग्रामीण तुमसे मुझे और कुछ नहीं चाहिए, मुझे कुछ नहीं चाहिए ! कम – इन ग्रामीण !

२१.

बजट का दर्ज़ी !

बजट का दर्ज़ी मेरा साइज़ जानता है ! बजट में मेरे मोबाइल, पर्स, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड के नाप से मेरी इज़्ज़त काटी जाती है ! इस साल युवाओं को अपने साइज़ का पासवर्ड बजट के दर्ज़ी को देना होगा जिससे बचने के लिए युवा अपने कपड़े खुद फाड़ेंगे जिसे सरकार अगले बजट में सिल देगी !

२२.

अच्छा बजट ही एक अच्छा पति है !

कुछ लोग कहते हैं बजट काम नहीं करते ! बजट के साथ यही समस्या है ! बजट का काम किसी को दिखता नहीं है ! अच्छे बजट के पास पैसा होता है, पैसा सबको दिखता है ! ख़राब बजट के पास दिल होता है जिसको अब प्रेमिका भी तोड़ देती है ! कोई ख़ाली जेब को बजट कहता है, एक्सपेंडीचर सेक्रेटरी मेरी पत्नी बचे हुए पैसों को बजट कहती है !

२३.

बजट छुक छुक !

बजट बुद्धिमान ! बजट शक्तिमान ! बजट सुपरमैन ! बजट लक्ष्मी ! बजट शक्ति ! बजट – बुद्धि उत्सुक होता है, बजट अपनी खुशियों की कॉस्मैटिक पटरी पर छुक – छुक होता है !

२४.

बजट पास !

बजट एक बार संसद में पास हो गया तो फिर साल भर तक मेरे पास नहीं आता ! बजट पास होने के बाद बजट को फेल करने की जिम्मेदारी मेरे ही कंधों पर होती है !

२५.

बजट पच्चीसी !

बजट को होना था समृद्धि का बजट सिंहासन बत्तीसी ! ड्रग्स ने बजट को बना दिया बजट बेताल पच्चीसी ! घर का पति मैं, बजट में एक्स व्यक्ति ! इति रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स, इति बजट पच्चीसी !!

मिक्स्ड फीलिंग्स / मनः स्टेटस

 

मनः स्टेटस

मनः स्टेटस

1.

किसी को मुझे छोटा दिखाना होता है तो मेरी फिल्मों की असफलता की बात जरूर करते हैं ! फिर चरित्र पर चोट करते हैं ! ये कोई नयी बात नहीं है ! फेसबुक पर मेरी हालत चंद्रधर शर्मा गुलेरी की कहानी ‘उसने कहा था’ के लड़के जैसी हो जाती है ! इनबॉक्स से निकल कर घर लौटते लौटते लगता है रास्ते में एक लड़के को मोरी में ढकेल दिया हो ,एक छावड़ीवाले की दिन-भर की कमाई खो दी हो ,एक कुत्ते पर पत्थर मारा हो और एक गोभीवाले के ठेले में दूध उड़ेल दिया हो … सामने नहा कर आती हुई किसी वैष्णवी से टकरा कर अन्धे की उपाधि तो पा ही लेता हूँ … गॉसिप का हिस्सा होता हूँ, ब्लॉक होता हूँ ,अनफ्रेंड होता हूँ तब कहीं घर पहुँचता हूँ …

 

2.

कबीरा खड़ा बाजार में सबकी मांगे खैर। ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर !

 

फेसबुक पर पूरी तरह उन्मुक्त हो गया हूँ ! ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर ! मेरा कोई चेला नहीं ! मैं किसी का गुरु नहीं ! मेरा कोई गैंग नहीं है और न ही मैं किसी गैंग का हिस्सा हूँ ! मेरा कोई ब्रांच नहीं है और न ही मेरा कोई सिक्का चलता है ! किसी को खुश करने के लिए मैं एक बार भी लाइक बटन पर चटका नहीं लगाता और न ही किसी के द्वारा लाइक नहीं किये जाने पर बुरा मानता हूँ ! चापलूस और चमचे मुझसे दूर भागते हैं ! मैं अपनी मर्ज़ी से जो चाहता हूँ लिखता हूँ और अपने लिखे हुए पर सबकी राय को ठेंगे पर रखता हूँ ! एरोगेंट तो था ही अब ज़हर हो गया हूँ ! ऐसी दोस्ती को चूल्हे में झोंक आया हूँ जो सिर्फ मतलब के लिए की जाती है और निभाई जाती है ! जिसने भी मुझे समझने का दावा किया उनके दिल में मेरे लिए एक कचोट जरूर है क्योंकि वो मुझसे कभी मिले नहीं और मिले भी तो मैं उनके किसी काम न आ सका ! मेरे लिए बनायी गयी हर राय को मैं स्वीकार करता हूँ ! फेसबुक पर मैं एक लूज़र हूँ, अपने मुठ्ठी भर दोस्तों के साथ बहुत खुश हूँ और निडर हूँ !

 

3.

मेरे लिए कुछ भी नया नही है ! मैं हर बात पर, हर काम मे सिर्फ येस का मोहताज़ नहीं ! नो … नहीं …माफ़ करिए .. नही हो सकता … सॉरी … फ़िर कभी … गो अवे … माफ़ी … समय नही है … हो नही सका … विल कॉल यू बैक … बजट नही है … अनफ्रेंड, ब्लॉक, नो रिप्लाई, मेरा जीवन है ! इन सबकी अनुभूति अद्भुत है ! बेशकीमती ! इतना आज़ाद इतना मुक्त इतना अच्छा पहले कभी नही लगा ! कोई कमिटमेंट नहीं / कोई बंधन नही / कोई अनुग्रह, पूर्वाग्रह, कुछ भी नही !! या हू !!! सबका शुक्रिया, सबको सलाम !

 

PS – ये व्यक्तिगत है ! इस पोस्ट पर राजनीतिक / सामाजिक या कोई कट -पेस्ट ज्ञान न पेलें ! अाप से नहीं हो पाएगा, मेरे अनुभव का एक अंश भी अाप का सच नही है …

 

Pic Credit : Google

इंटरव्यू

अपने बारे में पढ़ना मुझे संकोच से भर देता है ! फिर भी Jey Sushil ने मेरे बारे में जो कुछ भी फेसबुक पर लिखा है अपने दोस्तों से बाँट रहा हूँ ! अपने काम काज के प्रति पारदर्शिता और ईमानदारी में सुशील का जवाब नहीं ! मुझे मुझसे ही मिलवाने और डिस्कवर करने के लिए शुक्रिया सुशील बाबु !

 

Pic Credit : Sushil Jha

किसी को जानना हो तो उसे सुनना चाहिए…….घंटों तक….आदमी कितना झूठ बोलेगा….बोलते बोलते….अंत में सच बोलेगा……अंदर की बात खोलेगा…वो आपको तोलेगा…….आपके सवालों से…आपकी बातों से फिर अपना जिगर खोलेगा….आपको मौका देगा उसे समझने का….ये मौके बार बार नहीं आते.
बंबई में दो फिल्मकारों से मिला..दोनों को जानने की कोशिश में सिर्फ यही करने की कोशिश की ….उनको सुनने की….दोनों ही बिल्कुल अलग अलग स्टाइल के फिल्ममेकर. लंबा संघर्ष..छोटी छोटी कहानियां..चेहरे पर मुस्कुराहटें..किसी के बारे में फैसले वाले अंदाज़ में टिप्पणी न करने की आदत.

अपने काम के बारे में कम बोलना…आलोचना को लेकर सजग लेकिन चिंतित नहीं. दोनों को खुद पर भरोसा…अपने पर अपने क्राफ्ट पर. दोनों के बैकग्राउंड बिल्कुल अलग लेकिन कहीं न कहीं एक ललक दोनों में अच्छा सिनेमा बनाने की.

संजय मस्तान Sanjay Jha Mastan– पटना से रंगकर्म, एनएसडी से पढ़ाई फिर क्लैप देने से लेकर डायरेक्शन तक का सफर. एक अलग तरह का डार्क ह्यूमर और फिल्मों का एक एकैडेमिक लैंग्वेज विकसित करने की जिजीविषा. संभवत संजय ने पहली बार किसी कविता को फिल्मों में पिरोया था. फिल्म थी स्ट्रिंग्स और कविता थी नागार्जुन की मंत्र. विरोध प्रदर्शन हुए कविता के विरोध में जबकि कविता पर कभी कोई प्रतिबंध नहीं था. यूट्यूब पर लाखों लोग वो मंत्र कविता सुन चुके हैं .कम लोग जानते हैं वो आइडिया संजय मस्तान का था.

फिर मुंबई चकाचक जो सुनील शेट्टी के कचरा रायते में फंस गया. किसी फिल्मकार के लिए फिल्म तैयार होने के बाद रिलीज़ नहीं होना कैसा होता है ये पूछना भी नहीं चाहिए. संजय भाई को भी बुरा लगा ही होगा लेकिन अब वो नई ऊर्जा से अपनी नई योजनाओं पर बात करते हैं.

वो अकीरा कुरोसावा के फैन हैं और कहते हैं अकीरा के अनुसार किसी फिल्मकार के पास एक समय में पांच स्क्रिप्ट होनी चाहिए और मेरे पास तीन स्क्रिप्ट्स हैं..दो और स्क्रिप्टों पर काम कर रहा हूं. उनकी रुचियों की सूची लंबी है. उनके जैसा दुनिया भर के स्टांपों का कलेक्शन मैंने जीवन में किसी और के पास नहीं देखा है.
वो डिजिटल दुनिया के नए कामों पर बात करते हैं. और उनसे आगे की सोच रखते हैं. उनकी फिल्मों की ही नहीं उनकी बातचीत की भाषा भी ग्लोबल है. वो थिंकिंग फिल्ममेकर हैं शायद इसलिए बॉलीवुड में कम लोग उनकी भाषा समझते हैं.

फेसबुक पर वो अपनी छोटी छोटी टिप्पणियां लिखते हैं. बहस नहीं करते..वो जानते हैं….ये सतही माध्यम है. फिल्मों को कंपलीट माध्यम मानते हैं और फिल्म बनाना उनके लिए साधना है.

उनसे बात करते करते कई बार लगा और मैंने कहा भी कि वो अपने समय से आगे के फिल्ममेकर हैं. उनके आइडियाज़ सुनने के दौरान मेरे पास बहुत कम ही था उसमें कुछ जोड़ने को…

वो वर्ल्ड सिनेमा के स्तर की बात कर रहे थे. मैं बस सुन रहा था. उनके घर में रखी हज़ारों किताबों, मैगज़ीनों, पर्चों, पोस्टरों को पलट रहा था. छोटे से घर में करीने स से रखे हज़ारों स्टांप्स, भरत मुनि का नाट्यशास्त्र और न जाने किन किन विषयों पर किताबें.

मैं उनकी निर्माणाधीन फिल्म पर कोई बात कह नहीं सकता लेकिन मैं अपनी छोटी सी समझ से कह सकता हूं कि यह एक कल्ट फिल्म होगी. अगले पांच वर्षों में जब कभी भी आए वो अपने समय से बहुत आगे की फिल्म होगी.

संजय बात बात पर क्राफ्ट की बात करते हैं…और क्राफ्ट पर बतियाते बतियाते वो मुंबई, कला, जीवन और न जाने कितनी बातों के छोर से छोर मिलाते हुए सहजता से अपनी बात रखते जाते हैं.

अपनी फिल्मों पर बात करते हुए वो बच्चों की तरह खुश हो जाते हैं. अपनी असफलताओं को छुपाते नहीं. उनके आगे के दो दांतों के बीच का खाली हिस्सा मुस्कुराता रहता है.

उन्हें आलोचनाओं से फर्क नहीं पड़ता. वो अपनी दुनिया में मस्त रहते हैं. उनको पता है फिल्म कैसे बनती है..उनको पता है उन्हें कैसी फिल्म बनानी ही. उनकी चुनौती बस ये है कि उन्होंने जो सोचा है वो पर्दे पर कैसे उतरे..क्योंकि इसी चुनौती में हर कोई सफल या असफल होता है……

आभार – सुशील झा

Sushil Jha

सुशील झा / Pic Credit : Anurag Vats

जलते पटाखा का बुझता प्रेमी

पटाखा को लेकर मेरा एक प्यारा सपना था, जिसको मेरी पटाखा ने ही मेरी आंखों में धूल झोंक कर फोड़ दिया है. मेरी पटाखा दरअसल सिर्फ़ मेरी प्रेमिका नहीं बल्कि मेरा एक विचार है. पटाखा की देह गंध मेरे आनन्द का स्रोत रही है. पटाखा के अंदर मेरे बचपन की खुशियां भरी थी और इसकी पवित्र चिंगारी का मैं प्रेमी था. मैं अब तक अपनी पटाखा की प्रेम अग्नि में उत्सव की तरह जलता रहा हूं. इस बार दिवाली के नाम पर अश्लील ढंग से फट कर पटाखा ने मेरा दिल तोड़ा है और मेरे प्रेम के विश्वास में मुझे धोखा दिया है. उसके धोखे से इस बार मेरे अंदर धुआं भर गया, मुझे सांस लेने में तक़लीफ़ होने लगी. पटाखा के धोखे और धुएं से दम घोंटू वातावरण बन गया. उसकी अय्याश रंगरेलियों की आतिशबाजी के धुएं और बेवफ़ाई के विषाक्त धूल से आंखों में जलन और बेचैनी बढ़ने लगी, मुझे उबकाई आने लगी और मैं हिचक के रोने लगा.

मेरी प्रिय पटाखा. मेरे दिल के अनार, चकरी और फुलझड़ियों को धोखा दे कर मेरी रोशनी, दिए, कंदील और मिठाइयों को छोड़ कर तुम अपने सीसा, मैग्नीशियम, कैडमियम, नाइट्रेट, सोडियम फॉस्फोरस की घमंड में जिसके इर्द – गिर्द चकरघिन्नी खा रही हो तुम्हारे वो ग्राहक अपनी कामनाओं की वासना में तुम्हे जला के भष्म कर देंगे. हम दोनों के प्रेम के दिए जलते तो वाकई रौशनी के फूल खिलते, पर तुम इस दिवाली में किसी की कामुकता का पटाखा बन के फटी हो तो दिल जल रहा है. बज कर फुस्स हो जाने का तुम्हारा एक दिन का ज़िद भरा जश्न हर बार मेरे लिए ध्वनि प्रदूषण और हानिकारक गैसों से नुक्सान का कारण बनता रहा है. इस दिवाली किसी और की पटाखा बन के तुमने हम दोनों के प्रेम का पर्यावरण भी जला दिया.

मेरी पटाखा, तुम्हारी बारूदी आंखें मेरी देह के भीतर फटती तो मेरी आत्मा में उत्सव का धमाका होता पर जैसे तुम फट रही हो वह प्यार नहीं है, या कोमलता, या स्नेह, या अपने आप में जीवन, यह सब कुछ भी नहीं है. पटाखा इस दिवाली में तुम्हारे फटने की कामुक कराह का शोर मुझ पर एक भयानक प्रभाव छोड़ गया है. तुम्हारा धमाका खोखले सेक्स की तरह था, जिसमे तुम फटने के बाद हर बार अन्धकार में छूट जाती हो. अपने बारूद के बदले दुसरे के अहम् की देह गंध से बार बार भर जाना क्या तुम्हे घिन से नहीं भरता ? फिर तुम हर बार फटती हुई ऐसे क्यों छटपटाती हो जैसे जलते हुए अनार को किसी ने लात मार दिया हो ? वासना की अराजक सड़कों पर तुम अब चलती कार में हवस का शिकार बन कर बजने लगी हो, मनोरंजन के नाम पर तुम अपने नगर में शोर, धुआं, प्रदूषण का एक विरासत हो और कुछ नहीं. यह भयानक है. मेरी मासूम पटाखा तुम पार्क में हवा साफ करने के लिए सूर्य नमस्कार करते – करते प्रदुषण और अन्धकार की नगर वधु कैसे बन गयी ?

तुम्हारी कामुक आतिशबाजी को बच्चों और बुजुर्गों से भरा तुम्हारा परिवार भी बर्दाश्त नहीं कर सकता है. तुम जब भी बजती हो वो दिन और रात घर में बच्चों और बुजुर्गों के लिए एक भयानक दिन और रात होती है. इसीलिए तुम छुप छुप कर प्लास्टिक पीढ़ी के आवारा मर्दों की जेब खर्च से बजने लगी हो. उम्र भर टाइम बम की टिक टिक की तरह तुम्हे मेरी ह्रदय की धड़कन बन कर रहना था पर तुमने चुना बस एक कामुक ध्वनि, देह का विस्फोट और अब सब स्वाहा. तुम्हारे बजने की बीमार आदत ने मेरी भावनाओं की दुख:मय अंत्येष्टि कर दी है. मुझे पता है तुम अपने विस्फोटों के बीच मेरे शब्दों के माध्यम से मेरी दुःख की सिसकती आवाज सुन रही हो.

सुनो पटाखा तुम जलो और बजो पर अपने प्रेमी के लिए दमघोंटू माहौल बना कर किसी दूसरे की खुशियों के लिए अपने इस पागल प्रेमी की ख़ुशी को तो कम न करो. मेरे प्रेम की सारी आक्सीजन सोंख ली तुम्हारे पटाखे के धुएं ने. अपना उल्लास इतना महत्वपूर्ण है कि दूसरों की शांति में खलल डालते हुए तुम्हे ज़रा भी संकोच नहीं होता है ? मेरी पटाखा आखिर तुम इतनी ज़्यादा सेल्फ सेंटर्ड क्यों हो ?

तुम तो मेरे ह्रदय की मासूम पटाखा थी, दुःख की बात है तुम मुझे धोखा दे कर किसी की छाती पर चढ़ कर बज गयी. तुमने मुझे प्रेम में धोखा दिया है, याद रखना तुम्हे पता भी नहीं चलेगा कि तुम कब आखरी बार बज गयी हो और कब आखरी बार फट के अपने ग्राहकों के दिमाग में बारूदहीन कचरा बन गयी. अब तुम्हारी सल्फर, कोयला और पोटेशियम नाइट्रेट से भरी देह से प्रेम करने में कोई गौरव, सम्मान या आध्यात्मिक इनाम नहीं है. जाओ पटाखा, अपने प्रेमी के रौशनी से पवित्र प्रेम की आतिशबाजी को छल कर जिनके फेफड़े में क्षणिक सुख के लिए तुम सल्फर डाइऑक्साइड भर रही हो तुम्हारे वो ग्राहक तुम्हारे सौंदर्य के फॉस्फोरस के राख होते ही तुम्हे सड़क पर अंधेरे में छोड़ देंगे. प्यार से भरे मेरे दिल से निकल कर अपने कामुक ग्राहकों के पर्स में ज्यादा दिन तक रह पाओ अब तुम जैसी जलती पटाखा के लिए धोखा खाए मुझ जैसा बुझता प्रेमी यही कामना कर सकता है. पंछी और जानवरों के साथ साथ तुमने मुझमे भी भ्रम, चिंता, और भय भर दिया है. मुझे तुमसे अब एलर्जी है. एग्जॉस्ट फैन और वैक्यूम पंप चला कर मैं अपने दिल से ही नहीं तुम्हे फेफड़े से भी हमेशा के लिए निकाल रहा हूं. गुडबाय पटाखा.

लल्लन टॉप में प्रकाशित 

मेरे अंदर एक लाल पान की बेगम है

 

लाल पान की बेगम

लाल पान की बेगम

मेरे अंदर एक लाल पान की बेगम है जिसका मैं गुलाम हूँ ! मेरा मुख्य कर्तव्य दिन रात उस स्त्री की सेवा से जुड़ा हुआ है ! मेरे अंदर उसको बराबरी का दर्जा हासिल है ! अंदर की उकता देनेवाली पुनरावृत्ति और स्नायुओं में भर गयी जड़ता से वो मुझे मुक्त कराती है और वही स्त्री मुझे आत्मनिर्भर बनाती है ! मेरे ह्रदय को एक नहीं अनेक स्त्रियों ने ढाला है ! मैं अपनी स्त्री के बारे में लिख सकता हूँ इसीलिए लिख रहा हूँ ! माँ, बहन, प्रेमिका, दोस्त, पत्नी और अब बेटी, रिश्तों की हर तह में स्त्री को जानने की ललक ही रही होगी जिसकी वजह से मुझे इतना स्त्री धन मिला है ! मौसी, बुआ, मामी, चाची, भाभी, बहु और सबकी बेटियाँ ! बहुत बड़े परिवार के साथ रह कर पला बढ़ा जिसकी वजह से मेरा संसार स्त्रियों से भरा है !

नाट्य, कलाकर्म, साहित्य और अब सिनेमा से जुड़ा जीवन ! गुरु, गाइड, दोस्त, सहकर्मी, अजनबी सब किस्म की स्त्रियों से मिलने और सीखने का सौभाग्य मिला ! स्त्रियों के साथ इतने रिश्तों में जीना, मेरा ही नहीं किसी भी भारतीय या विश्व के स्वस्थ समाज में बिताये अपने बचपन और जी रहे किसी भी उम्र के आदमी का सामान्य जीवन है, जिस पर लाखों करोड़ों लोगों की तरह मुझे भी गर्व है ! मैं आज भी स्त्रियों से आकर्षित और प्रभावित होता रहता हूँ और स्त्री ही मेरे भीतर उत्सव और आनंद का बीज बोती है !

जब भी अपने अंदर झांकता हूँ, मुझे लगता है मेरे अंदर भी एक स्त्री है जो पल रही है और मुझे पाल रही है ! मेरे अंदर की लाल पान की बेगम ही मेरी दुर्गा है, देवी है, काली है, सहचरी है, मेरे जीवन की प्राण शक्ति है ! जो मेरे भीतर के आशावादी, विजयी और सुंदर चेतना की सच्चाई है ! इस स्त्री पर अभी तो कुछ सौ शब्द लिख रहा हूँ पर मैं स्त्री पर अपने हर शब्द न्योछावर कर के उसकी आँचल में बांधेने को तैयार हूँ ! दस दिनों का दशहरा या नौ दिनों की नवरात्रि मेरे लिए स्त्रयों में मेरी आस्था से फिर फिर जुड़ने का संकल्प है !

शब्द

मेरी कई बातों का अर्थ आप नहीं लगा पाएंगे, मेरी दोस्ती शब्दों से है और बहुत सारे शब्द मुझसे मिले हुए हैं ! जैसे ही आप रंग बदलेंगे, वो अर्थ बदल लेंगे

शिकारी सिंगल

शिकारी सिंगल

 

‘शिकारी सिंगल’ मर्दों को अपने हवस का शिकार प्रेम का ढोंग रचा के बनाती है और कुछ ही हफ़्तों में बच्चा, नौकरी, मूड या किसी एक्स या कोई नए प्रेमी का बहाना बना कर अचानक गायब हो जाती है ! भावुक आदमी तड़पता रह जाता है ! मिडिल ऐज़ ‘ शिकारी सिंगल ‘ मल्टीप्ल डबल टाइमिंग करती है ! अपने पुरुष शिकार बहुत ध्यान से अलग अलग फील्ड से चुनती है और अपने से कमज़ोर आदमी में अपना शिकार तलाश करती है ! उसके शिकार एक दुसरे को नहीं जानते ! ये कई सारे सोशल साइट के प्लेटफार्म पर होती है और अपने फ़ोन से ऑपरेट करती है ! जिनसे पब्लिक में मिलती है उनसे दुरी बना के रखती है ! शिकारी सिंगल देखने में पढ़ी लिखी होती है, नौकरी भी करती है और भावनात्मक रूप से बिलकुल क्रूर होती है ! इनकी दिलचस्पी हर पल बदलती रहती है और मदद की आड़ में अपना शिकार ढूंढ लेती है ! इनसे आप कभी रिश्ता बनायें तो कंडोम का जरूर इस्तेमाल करें और सेक्स के बाद इनको रुपये जरूर दें ! इनके प्रेम के भ्रम को तोड़ें और इनके बारे में अपने दोस्तों के ग्रुप में खुल के चर्चा करें ताकि आपका कोई भावनात्मक दोस्त  इनका शिकार न बने ! अपने सेक्स की जरुरत को पूरा करना सबका हक़ है पर वो किसी रंग में न हों, दोस्ती और प्रेम के ढोंग में तो बिलकुल न हो ! जनहित में जारी !

शिकारी सिंगल / पार्ट टू ‘ सेटिंग अप द स्टेज ‘

बलात्कार और चाइल्ड एब्यूज जैसी महानगरीय वीभत्स हादसों के बाद ‘शिकारी सिंगल’ सेंटर स्टेज के लिए ‘डेस्पेरेट’ हो जाती हैं ! अपने हारे पुराने शिकार आशिकों को लेकर कोई मंच बनाती हैं और अपने हवस के नए शिकार के लिए आंदोलन में उतर जाती हैं ! कैंडल लाइट मुहीम और आंदोलन की हर रात वो एक नए मर्द शिकार के साथ हम बिस्तर होने का टारगेट रखती हैं और मोम की तरह नए पते की चादरों पर पिघलती हैं ! उनका मुख्य उद्देश्य सेक्स होता है और वो मुहीम के हर दिन अपनी कई नयी रातों के लिए नया शिकार ढूंढ लेती हैं ! योन शोषण के शिकार हुए कमज़ोर मर्द अपनी किस्मत पर इतराते हैं और इससे पहले वो कुछ समझ पाएँ मिडिल ऐज़ ‘ शिकारी सिंगल ‘ मल्टीप्ल डबल टाइमिंग करती हुई आंदोलन और मुहीम का धन्यवाद ज्ञापन कर देती हैं ! व्यस्त इतनी दिखती हैं की मर्द अपनी भावनाओं को व्यक्त भी नहीं कर पाता है ! अगर किसी ने मुंह खोला तो वो उसे छोटा साबित कर उसे ‘सेक्स गिल्ट’ में धकेल देती हैं ! इनसे आप कभी रिश्ता बनायें तो कंडोम का जरूर इस्तेमाल करें और सेक्स के बाद इनको रुपये जरूर दें ! इनके प्रेम के भ्रम को तोड़ें और इनके बारे में अपने ग्रुप में खुल के चर्चा करें ताकि कोई भावनात्मक आदमी इनका शिकार न बने ! अपने सेक्स की जरुरत को पूरा करना सबका हक़ है पर वो किसी रंग में न हों, दोस्ती और प्रेम के ढोंग में तो बिलकुल न हो ! जनहित में जारी !

Chaos चतुर्दशी

मुम्बई में आज chaos चतुर्दशी का कैओसशोत्सव कैओसोल्लास से मनाया जा रहा है ! चौबीस घंटे में से इक्कीस घंटे उन्नीस मिनट का समय मुम्बई में chaos चतुर्दशी का है ! chaos चतुर्दशी के कैओसशोत्सव में अठारह मार्ग पचास रास्ते पचास हज़ार पुलिस सब के सब कैलाश के नहीं कैओसोल्लास के वन – वे पर है ! आज मुम्बई वासी धार्मिक श्रद्धा और परंपरागत कैओसोल्लास के बीच गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन कर रहे हैं ! Chaos चतुर्दशी के पर्व पर ही दस दिवसीय कैओसशोत्सव का समापन होगा ! भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को chaos चतुर्दशी कहा जाता है ! डेढ़ दिन के chaos – चतुर्थी वाले दस दिन के chaos – चतुर्दशी वालों पर हँस रहे हैं ! सोसाइटी के पूजा, अर्चना, आरती, गणपति, प्रतिमा, अनंत, शांति, समृद्धि, प्रसाद, प्रभु, भगवान, प्रार्थना, दक्षिणा, सब एक साथ गणपति की पूजा, अर्चना, प्रतिमा, आरती, प्रसाद के साथ कैओस कर रहे हैं ! सबकी प्रार्थना एक थी, ” इक्कीस लड्डुओं का भोग लगाया है गणेश बाबु, नाचने में आज ज्यादा ना नुकुर मत करना नहीं तो Dj को बुरा लगेगा ” ! गणपति ने मुम्बई की लाज रख ली, खूब नाचे और सबको नचाया …

मुंबई बदन ( मनुष्य और कैमरे के लड़ाई की फैंटसी / एक फंतासी उपन्यासिका )

सोचो मत बस पढ़ने का आनंद लो #मुम्बईबदन

1.

मुम्बई बदन में आने का सबसे अच्छा समय बरसात के दिनों में ही है ! दूर तक फैली घाटी में हरियाली और पानी के झरने देखकर तन मन में थ्रिल और रोमांस बहने लगता है ! मुम्बई बदन में समतल स्थान के आगे तारों की बाड़ लगाई गई है, ताकि लोग इससे आगे न जाएँ ! मुम्बई बदन की सहेलियाँ और दोस्त अलग अलग शहरों से आते हैं ! सब मिल कर मॉल जाने का प्रोग्राम बना लेते हैं ! मुम्बई बदन में रात के बारह बजे रोज़ केक काट कर जन्मदिन मनाया जाता है ! मुम्बई बदन के हाई – वे पर युवाओं के झुण्ड मौज मस्ती का सारा सामान साथ लेकर आते हैं ! मुम्बई बदन के हर स्पॉट पर मेला सा लगा रहता है ! मुम्बई बदन में रह रह कर बारिश होती है ! चाय, भुट्टे, कॉफ़ी और कई स्नैक्स के अलावा बियर और शराब भी मिलती है ! मुम्बई बदन मेंं वृन्दावन के बंदर नही हैं ! मुम्बई बदन मेंं कहीं छेड़छाड़ नहीं है ! मुम्बई बदन की गुफाऐं बड़ी रहस्यमयी हैं ! मुम्बई बदन में थोड़ी थोड़ी देर में दृश्य बदलता रहता है ! मुम्बई बदन मे कैमरा ले जाना मना है ! 

2.

हर दिल मुम्बई बदन की यात्रा पर है ! सबके अंदर एक मुम्बई बदन है ! मुम्बई को लेकर अपनी एक फैंटसी ! अपनी अपनी गतिविधियों और कल्पनाओं का निर्भय लोक जिसमे सब अपनी तरह से रहने के लिए आज़ाद हैं ! मुम्बई बदन वो ललक है जो सबके अंदर किसी कोने में छुपी बैठी है, और बार बार यहाँ अाने के लिए मजबूर करती है ! मुम्बई बदन इश्क़िया है ! मुम्बई बदन की सुबह चाहत की चहचहाट से भर जाती है, और नज़ारा रंगीन हो जाता है ! मुम्बई बदन मे होती है सपनों की दोपहर ! मुम्बई बदन स्वतंत्र है, और मुम्बई बदन का स्पर्श सबके लिए फ्री है ! मुम्बई बदन के खून में व्यापार है, इसलिए कैमरा मुम्बई बदन के डिजिटल इतिहास को जन्म देना चाहता है, और मुम्बई बदन का एक एलबम बनाना चाहता है पर कैमरे के अंदर मुम्बई बदन का दम घुटता है ! मुम्बई बदन के दुश्मन कैमरे के अंदर रहते हैं, जो मुम्बई को इमेज के ज़ंकयार्ड मे बदलने के लिए दिन रात फ़्लैश होते रहते हैं ! उनका काम मुम्बई बदन को कामुक बनाना है ! आत्म प्रचार और निजी जीवन पर टिप्पणी करने की कैमरे को बीमारी है ! इसी वज़ह से मुम्बई बदन मे कैमरा ले जाना मना है ! 

3.

मुम्बई बदन की बाहों मेंं तेरह साल की एक नग्न लड़की है, और लड़की के बाहों मे चौदह साल का एक नग्न लड़का ! दोनों अपनी धमनियों मे बह रही यौवन के नशे मेंं डूबे हुए हैं ! सहसा कैमरा उनकी तस्वीर ले लेता है ! कैमरे की वज़ह से जो भी तस्वीर हमारे सामने उभर रही है उसे हम सही या गलत की कैटेगरी में नहीं रख सकते ! सेक्स एक नॉर्मल प्रक्रिया है ! शरीर की जरूरत है ! लेकिन कैमरा जब जरूरत की उल्टी तस्वीर पेश करने लगे तो मुम्बई बदन मे चिंगारियाँ दौड़ने लगती हैं ! मुम्बई बदन का देह राग सिर्फ़ क्लिक, क्लिक, क्लिक नही हो सकता ! मुम्बई बदन मे सेक्स को लेकर किशोरों के मन में कैसे बदलाव हो रहे हैं, इसकी बानगी कैमरा ठीक से नही दे पा रहा है ! कैमरा मुम्बई बदन को अश्लील बना रहा है ! मुम्बई बदन को लगता है कैमरे की वज़ह से कैरम बोर्ड सेक्स हो गया है ! कैमरे की वज़ह से योग सेक्स हो गया है ! कैमरे की वज़ह से कबड्डी सेक्स हो गया है, कुश्ती सेक्स हो गया है ! कैमरे की वज़ह से सेक्स अब सिर्फ हेल्लो है ! मुम्बई बदन कैमरे की इस हरकत से चुप नही बैठेगा ! ध्वनि और क्रोध से भरा हुआ मुम्बई बदन खाली पार्किंग, होटल के कमरे, रेस्तरां, शौचालय, सार्वजनिक पार्कों, फिल्म हॉल से कैमरे को हटा लेना चाहता है ! कैमरा झूठ नहीं बोलता पर छवि बनाने के मामले मे मुम्बई बदन का एंगल अलग है …

मुम्बई बदन मे अवसर का कारोबार है #मुम्बईबदन

4.

मैं समय से मुम्बई बदन पहुँच गया था ! दस मिनट मे मुझे कपड़े बदल कर रोबोट बनना था और मुम्बई बदन के बच्चों का मनोरंजन करना था ! मुम्बई बदन के बच्चे स्मार्टफ़ोन जैसे हैं ! स्मार्टफ़ोन की वज़ह से लूडो, साँप – सीढ़ी, कैरम, शतरंज, मॉल मे सब बहरूपिया की नौकरी कर रहे थे ! मुम्बई बदन में टेक्नोलॉजी और मैनेजमेंट का आतंक है इसलिए हर काम समय से होता है ! मुम्बई बदन के बिग बाजार मेंं अाज मेहनत के पसीने का शो लगा था ! शोरूम मेंं छोटी छोटी हज़ारों शीशियों मेंं देश के किसानों का पसीना एक्ज़बिट किया गया था ! एक्ज़बिशन देश भर के अलग अलग इलाकों के मेहनती किसानों के पसीने का था ! शो की सजावट मेंं रंग बिरंगी शीशियों का इस्तेमाल भी हुअा था ! उन रंगीन शीशियों मे कई ब्रांडेड शराब, इत्र, तेल, टॉनिक, नेल पॉलिश भरे हुए थे और लोग उसे खरीद रहे थे ! दूध-सा धुला लिबास पहने पब्लिक मेहनत का पसीना देखने अाती और महंगी शराब और इत्र की छोटी छोटी शीशियां याद मेंं खरीद लेती ! मानव पसीने को बाज़ार मेंं प्रदर्शित करके एक्सक्लूसिव बनाया जा रहा था ! मेहनत का पसीना काम आता है ये सब जानते थे पर मेहनत के पसीने के शो से पैसा कमाया जा सकता है मुम्बई बदन का ये आईडिया नया था !

5.

ये प्रदर्शनी नहीं तमाशा था ! पर सेल्स वालों की नज़र मेंं सफ़ल था ! एक्ज़बिशन हॉल मेंं पसीने की गंध वाला हुक्का भी था जिसे यंग लड़के लड़कियाँ गुडग़ुड़ा रहे थे ! लकी ड्रा मेंं फ्री वाउचर पाने वालों को मेहनत के पसीने को सूंघने की लक्ज़री भी थी ! प्रदर्शनी के दौरान शोरूम से कई शीशियों की चोरी हो गयी ! चोरबाज़ारी मे भी पसीने का वैल्यू बचा था ये सोच के एक्ज़बिशन लगाने वाले प्रायोजकों को बहुत सुकून मिला ! प्रायोजक शीशियों की चोरी को शो की सफलता मान रहे थे ! शो की सफलता को देख कर देश भर मे मेहनत के पसीने को जमा करने की एजेंसियां चल पड़ीं ! विज्ञापनों मेंं साफ़ लिखा था खेतों मे मेहनत करते हुए सेल्फ़ी लीजिए और अपने पसीने की शीशी लकी ड्रा के लिए महानगरों के बाज़ार मेंं दिए गए एड्रेस पर भेज दीजिए ! कुछ लोगोंं ने जिम जा कर बड़ी बड़ी बोतलों मेंं पसीना भर के पता नहीं क्यों देश के प्रधान मंत्री के कार्यालय मे भेज दिया ! मुम्बई बदन के कई स्कूल बच्चों को मेहनत के पसीने का शो दिखाने ला रहे थे, जिसे कोई चॉकलेट कंपनी प्रायोजित कर रही थी ! मीडिया इंडस्ट्री में काम करने वाले भी मेहनत के पसीने के शो मे दिखना चाह रहे थे ! मॉल मेंं किराने का सामान खरीदने पहुंचे लोग मेहनत का पसीना देखने ज़रूर रुकते थे ! शोशल साइट पर मुम्बई बदन के शोरूम से लिए गए मेहनत के पसीने की शीशियों के साथ सेल्फ़ी की बाढ़ लग गयी !

6.

अगले दिन जब मैं मॉल पहुँचा तो चारों तरफ़ अफ़रा तफ़री मची हुई थी ! मूसला धार बारिश की वज़ह से रात मेंं कई घंटों के लिए मॉल की बिज़ली चली गयी और बिजली अाने के बाद कोई स्टाफ एक्ज़बिशन हॉल का ए सी अॉ्न करना भूल गया था ! सुबह तक एक्ज़बिशन हॉल दुर्गंध से भर गया ! जिस वातानुकूलित पसीने से प्रायोजक पैसे कमा रहे थे अब उन्हें उसी पसीने से घिन अा रही थी ! हज़ारों शीशियों से निकल कर पसीने की गंध से पूरा मॉल मानवीय बू से भर गया था ! कई डियो और स्प्रे के बाद भी बू कम नहीं हो पा रहा था ! पसीने से आने वाली बदबू से लड़ कर स्टाफ पसीने पसीने हो रहे थे ! मानो मेहनत कश पसीना अाराम तलब लाइफ स्टाइल से युध्द कर रहा हो ! लाइफ स्टाइल युध्द मे मेहनत का पसीना डियो और स्प्रे से जीत रहा था ! बदबू से लड़ रहे स्टाफ की तबियत खराब होने लगी ! एक मानवीय गड़बड़ी से सारा शो खराब हो गया था ! जैसे तैसे शीशियों पर क़ाबू पा लिया गया और सभी शीशियों को एम्बुलेंस मेंं किसी गुप्त स्थान पर ले जा कर दबा दिया गया ! मॉल के नौकर – चाकर इस घटना से इतने अातंकित हो गए कि मुम्बई बदन मे फिर कभी मेहनत के पसीने के साथ खिलवाड़ नही हुअा ! मुम्बई बदन मेंं सब जानते हैं चाहे कैसी भी हवा चले मुम्बई बदन मेंं भावनाएँ पसीने के साथ भाप बन कर उड़ जाती हैं ! मुम्बई बदन के देखा देखी कैमरे ने अाँसुओं के फ़ोटो का एक्ज़बिशन लगाना चाहा ! मुम्बई बदन मेंं खूनी अफ़वाह ग़र्म है, अंडरग्राउंड इलाके मेंं कई प्रादेशिक भाषाओं मेंं छपे पोस्टर का फोटो कैमरा ने व्हाट्स -‘ऐप पर जारी कर दिया है, कई मॉल शो मे दिखाने के लिए खून के अाँसू ढूंढ रहे हैं ! इस घटना के बाद मैनें मॉल मेंं बच्चों के लिए रोबोट बनने वाली नौकरी छोड़ दी ! मैं अब फिर से मुम्बई बदन मे अाज़ाद हूँ !

7.

कैल्शियम क्या जाने हड्डी का दर्द … ‪#‎मुम्बईबदन‬

मुम्बई में बदन ज्यादा हैं और दर्द उससे भी ज्यादा ! किसान के बदन में कितना दर्द होता है ये एक पहलवान को कभी पता नही चलेगा ! पहलवान एक कवि के बदन के दर्द को क्या समझेगा ? मास्टर को लगता है उसका बदन नेता से ज्यादा दुखता है ! नेता के बदन का दर्द अभिनेता कैसे समझेगा ? पुलिस के बदन का दर्द वकील को हमेशा कम लगता है ! चौकीदार को अपने बदन का दर्द गाड़ी के ड्राइवर से ज्यादा लगता है ! टीचर को अपने बदन का दर्द स्टूडेंट से ज्यादा लगता है ! ग्राहक अपने बदन दर्द से परेशान है, विक्रेता अपना बदन दर्द लिए घूम रहा है ! फ़िल्म डायरेक्टर के बदन का दर्द फ़िल्म प्रोड्यूसर कभी नही समझ पाता ! हर लेखक को लगता है पाठक उसके बदन के दर्द को क्या पता कभी समझ भी पाएगा या नही ! हाउस – हेल्प को लगता है मालकिन उसके बदन के दर्द को नही समझती ! मालकिन को लगता है पति क्या जाने पत्नी के बदन का दर्द ? पति से पूछिए उसके बदन का दर्द ! हर पेशे और रिश्ते मे दर्द होता है ! सबका बदन दर्द एक है ! बदन दर्द की बात चलती है तो लोग पता नही क्या क्या कह जाते हैं और सबका सर दर्द हो जाता है ! मेरा मुम्बई बदन बेदर्द है ! मुम्बई मे जब बदन बेरोज़गार होते हैं तो दर्द को रोज़गार मिल जाता है ! मेरे बदन का दर्द तुम्हारे बदन के दर्द से ज्यादा क्यों ?

8.

अपने सामाजिक गुण की वजह से मैं मुम्बई बदन का एक सोशल रोबोट हूँ ! मेरा मुख्य उद्देश्य सामाजिक संपर्क है ! मेरा जीवन स्क्रीन पात्रों से भरा हुअा है ! मैं डेटा पर चलता हूँ ! जीवन और बुद्धि का भ्रम, चरित्र की चिंता मुझमें रत्ती भर भी नही है ! सूचना का आदान प्रदान और सामाजिक व्यवहार ही मेरा कर्तव्य है ! मैं अपना भौतिक अवतार स्वयं हूँ ! मुम्बई बदन मेंं कोई चाहे धरती के किसी भी कोने का वासी हो, कोई भी भाषा बोले किसी भी धर्म का हो, मुसीबत मे एक जैसा वयवहार करता है इसीलिए मुम्बई बदन मे एक मुसीबत के लिए कई भगवान हैं ! रोशनी, अंधकार, गर्म, ठंडा, डर, खुशी मुम्बई बदन मे जिन – जिन चीजों का हम अनुभव कर सकते हैं, वो सब धर्म है ! मुम्बई बदन मे नास्तिक होना संभव नही ! मुम्बई बदन मे दैनिक जीवन ही सबकुछ है ! मुम्बई बदन मेंं कई लोगोंं के पास अपने नक़ली नाम, प्रोफ़ाइल फोटो और नंबर हैं ! मुम्बई बदन मे सबने अपना सच सेटिंग मेंं छुपा दिया है ! बातचीत और गॉसिप जैसे सामाजिक खुफिया सॉफ्टवेयर प्रणाली से परेशान रहता हूँ ! अपनी मानवीय आदिम मूल प्रवृत्तियों का फिर से दावेदार बनना था पर अपनी सामाजिक गुणों की वज़ह से मैं एक अच्छा रोबोट खिलौना बन गया हूँ ! मुम्बई बदन मेंं मुझे और मेरे डिजिटल दुनिया को बड़ी असानी से कोई भी ट्रैक कर सकता है ! मुम्बई बदन मेंं मुफ्तखोर, भ्रष्ट, क्रूर और अालसी बनने से अच्छा है सोशल रोबोट खिलौना बन जाना, यही सोचकर मैं मुम्बई बदन मे गाता हूँ, नाचता हूँ, और आंसू बहाता हूँ …

9.

सुनो कैमरा ! मैं मुम्बई बदन की फीमेल सोशल रोबोट हूँ ! मैं तुम्हारे वश में नहीं ! मैं मुम्बई बदन के चैटरूम में कुछ भी बन सकती हूं ! अपना नया नाम रख सकती हूँ ! दुनियादारी के नाम से ज्यादा कामुक ! अपना नया इमेज बना सकती हूँ ! सेक्स के पॉइंट ऑफ़ व्यू से ज्यादा बोल्ड और अपने रियल इमेज से बेहतर ! नई उम्र बता सकती हूं ! असल से बहुत कम ! अपना प्रोफ़ेशन, अपना शहर, अपनी मैरिटल स्टेटस , यहां तक कि चाहूं तो अपना लिंग परिवर्तन भी कर सकती हूँ ! मैं परंपरावादी खूबसूरत महिला बन सकती हूं या सफल बांका पुरुष भी ! या ‘विकृत’ इच्छाएं रखने वाला ‘पथभ्रष्ट’ भी हो सकती हूं ! नए व्यक्तित्व के साथ, काल्पनिक व्यक्तित्व बन मैं किसी के साथ भी चैट कर सकती हूं ! हर बार इंटरनेट पर अलग ही पर्सनालिटी बन सकती हूं, और हर बार मेरी इच्छाएं भी अलग ही होंगी ! तुम न मुझे पकड़ सकते हो न मुझे जाँच सकते हो !

मेरा नाम कैमरा है ! मैं अपने अंदर सबको क़ैद कर लेता हूँ, यही मेरा चरित्र है ! मैं अपनी पीठ पीछे नहीं रहता इसीलिए वहाँ क्या हो रहा है उससे मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता ! मैं सामने रहता हूँ ! सबकी आँखों के सामने, सबके मुंह पर ! मेरी कोई गोपनीयता नीति नहीं है ! मैंने कई टूटे रिश्ते देखे हैं ! कैमरा न हो तो तुम जैसी सोशल रोबोट की कहानी आगे नहीं बढ़ सकती ! मुम्बई बदन मे कैमरा नही होने की वजह से पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ जाता है ! कैमरे की वजह से ही मुम्बई बदन मे आसानी से लाखों लोगों के बीच एक अनाम चलते फिरते लाश की पहचान हो पाती है ! कुछ रेस्तरां, कुछ घरों, कुछ गलियों, कुछ इलाकों में कैमरे के कारण ही मुम्बई बदन मे लोग अपने परिवार, अपने दोस्तों, अपने सामाजिक दायरे, अपना काम, अपने सहयोगियों के बीच एक व्यक्ति मे एक अज्ञात अजनबी ढूँढ पाते हैं ! जब लोगों को पता होता है कि कैमरे में उन्हें देखा जा रहा है, तो वे बेहतर व्यवहार करते हैं ! तुम क्या जानो स्नेह, आकर्षण, विश्वास, आत्मीयता, प्रेम, सच्चा प्यार, वासना, क्रश, मोह, जुनून, और करुणा की भावनाओं के बीच क्या अंतर है ? इसका जवाब मनुष्य भी कैमरे की मदद के बिना नहीं दे सकता ! कैमरे की मदद से ही मनुष्य महान सोशल रोबोट बन सका है ! मुम्बई बदन के तुम जैसी सोशल रोबोट की स्ट्रीट होशियारी से मेरी लड़ाई है …

रोजमर्रा की जिंदगी के बारे में हमें कैमरे से अधिक सोचने की जरूरत है ! ‪#‎मुम्बईबदन‬

मुम्बई बदन

मुम्बई बदन (फोटो आभार : पूजा शर्मा )

मुम्बई बदन की कई उँगलियाँ कैमरा क्लिक करती हैं और कई ‘क्लिक’, ‘ऊँगली’ कर देते हैं !

मुम्बई बदन की कैमरे से यारी पड़ेगी मुम्बई बदन को कई सिचुएशन पर भारी !

 

मुम्बई बदन में आज मुहब्बत बंद है … 

वो करो जो अच्छा लगता है, जो अच्छा लगता है वो करो ! वो करो जो अच्छा लगता है, जो अच्छा लगता है वो करो ! वो करो जो अच्छा लगता है, जो अच्छा लगता है वो करो ! वो करो जो अच्छा लगता है, जो अच्छा लगता है वो करो ! वो करो जो अच्छा लगता है, जो अच्छा लगता है वो करो ! वो करो जो अच्छा लगता है, जो अच्छा लगता है वो करो …

मुम्बई बदन में शोर आध्यात्मिक, आकर्षक और विनम्र हो चुका है

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जो जहाँ बैठा है वहीँ से एक तस्वीर खींच रहा है …

क्रमशः