हृदयनामा

1.

मैंने अपने ह्रदय का एक चक्कर काट के देख लिया है कुछ भी सही नहीं है ! रक्त चाप, धड़कन और ह्रदय की गति सब अपनी मर्ज़ी के मालिक हैं ! अपने ह्रदय के अलग अलग हिस्सों में मैं बिलकुल अलग अलग हूँ ! मेरा ह्रदय जब कमज़ोर होता है तो मैं घमंडी और अकड़ू हो जाता हूँ ! मेरा अहम फूल जाता है और मेरी आँखों को ढक लेता है ! अपने ही ह्रदय से बात करने के लिए मुझे अपने ह्रदय के दस चक्कर लगाने पड़ते हैं ! ह्रदय के आकार का ह्रदय पृथ्वी और आकाश के आकार का हो जाए तो बड़ा नहीं होता ! ह्रदय को बड़ा होने के लिए उसे ह्रदय के आकार का बने रह कर ही अपने अंदर पृथ्वी और आकाश जितना बड़ा होना पड़ता है ! ह्रदय को ह्रदय रखने के लिए मुझे अपनी किडनी, फेफड़े, छोटी बड़ी आँत, नाक, आँख, कान, चमड़ी, घुटने और अपने दुसरे सभी अंगों से मिल कर रहना पड़ता है ! पर मेरा ह्रदय कमज़ोर है और मैं अपने शरीर में ज्यादा रह नहीं पाता हूँ ! मेरे दिमाग के घोड़े मुझे अपनी बुद्धि के कोल्हू में बैल बना कर घुमाते रहते हैं ! मेरा ह्रदय कहीं का सम्राट नहीं है ! मैं अपने ही ह्रदय में बायीं तरफ से कोई और हूँ और दायीं तरफ से कोई और क्यों हूँ ? मैंने आज अपने ह्रदय में एक नकली कारखाना पकड़ा ! संदेह और शंका की फैक्ट्री क्या मेरा ह्रदय मुझसे पुछे बिना चला रहा था ? अपना ये डिफेक्टिव ह्रदय श्री राम जी के कदमो में रखने से डरता हूँ …

2.

हृदय से निकली आवाज़ को माइक्रोफ़ोन नही चाहिए और न ही कोई स्पीकर ! शब्द भी चाहें तो हृदय की अावाज़ को अकेला छोड़ सकते हैं ! हृदय की अावाज़ की अपनी भाषा है और अपनी फ्रिक्वेंसी ! हृदय की अावाज़ किसी मीडियम की भी मोहताज नहीं …