किताब और मेला

पुस्तक प्रेमी

जैसे ही किताबों के सपने आने लगते हैं मैं समझ जाता हूँ किताबों का मेला लगने वाला है ! किसी भी पुस्तक मेला के लगने से पहले मुझे किताबों के सपने आने लगते हैं ! अच्छे, बुरे, किताबों से जुड़े तरह तरह के सपने देखने लगता हूँ ! किसी सपने में देखता हूँ कि चारो तरफ किताबों के पेड़ लगे हैं … कभी देखता हूँ सबने मिल कर इतनी किताबें लिख दी हैं कि पढ़ने के लिए उन्हें चारो तरफ बिखरा दिया गया है … लोग किताबों को घर नहीं ले जाना चाहते हैं क्योंकि घर पहुँचते ही एक किताब दूसरे किताब को बुला लेती है और बहुत जल्द घर में किताबों का ढेर लग जाता है … किसी सपने में लोग किताबों से डर कर उन्हें घर से बाहर कर देते हैं … बाहर इतनी किताबें हैं कि देख कर न चलें तो किताबों से ठोकर लग सकती है ! ऐसी ठोकर से बचने के लिए लोग किताब पढ़ना शुरू कर देते हैं ! सब जानते हैं किताबों से बचने का बस यही एक तरीका है, उनको चुप – चाप पढ़ लीजिये ! जब तक आप उसे पढ़ न लें, किताबें तब तक ही आपको डराती है ! सपने में एक दिन मैं सुनता हूँ कि विश्व पुस्तक मेला लगने वाला है ! मेरी आँखें खुल जाती हैं ! अखबार में पुस्तक मेला का समाचार देख कर अपने सपने को सच पाता हूँ ! मेला शब्द सुनते ही मेरी इन्द्रियों के पन्ने फड़फड़ाने लगते हैं, मेरे मुंह में पानी आने लगता है ! मैं किताब के पन्नों पर प्रिंट की रोशनाई की ताज़ी गंध सूँघने के लिए बैचैन हो जाता हूँ ! मैं एक किताबी कीड़ा हूँ, मेरी रीढ़ की हड्डी किताब चाटे बगैर सीधी नहीं होती !

निर्धारित दिन सुबह ग्यारह बजे मेला पहुँचने वाले पहले जत्थे में मैं भी शामिल था ! ट्वीट्राटी, फेसबुक, यू ट्यूब, इत्यादि से मेला न पहुँच पाने वाले भी मेले का हाल मुझसे ज्यादा जानते हैं क्योंकि मेला जाते ही मैं किताबों में खो जाता हूँ ! पुस्तक मेले में क्या हो रहा है मुझे इस बात की कोई सुधबुध नहीं रहती है ! जैसे ही मुझे कोई दिलचस्प किताब दिखती है, समय गवाएं बिना मैं उसे पढ़ने लगता हूँ ! किताब को पढ़ते समय मैं उस किताब में घुस जाता हूँ और किताब ही मेरी कोठरी बन जाती है ! जब तक मुझे पुस्तक मेले के चौकीदार किताब से खींच के बाहर नहीं कर देते हैं मैं किताब में ही रहता हूँ ! अगले दिन भी मेला पहुँच कर मैं फिर उसी किताब में घुस जाता हूँ ! जब तक किताब खत्म नहीं हो जाती है मैं किताब को नहीं छोड़ता हूँ ! किताबों के मेले की एक बहस में मेरे तर्क और उदहारण सुन कर जबसे लोग मुझे पाठक बुलाने लगे हैं, मैं लोगों और सोशल मीडिया से बचता फिरता हूँ ! सोशल मीडिया में सबने मिल कर मुझे गुमनाम पाठक बना दिया है और मेरी अनुपस्थिति पर फ़िज़ूल का चिटपुटिया बहस करते रहते हैं ! जबकि मैं सोशल मीडिया के पीठ पीछे चुपचाप कई किताबों को पढ़ कर निकल जाता हूँ !

आज मेले में घुसते ही मुझे कालिदास की शकुंतला मिल गयी ! उफ़ ! क्या मानुषी है ! क्लासिकल शकुंतला के बहाने मुझे साहित्य का ऐश्वर्य देखने का फिर से मन करने लगा ! मैंने प्रेम दुःख से भरे इस काव्य नाटक को पढ़ने के लिए पंडाल में किताब की ढेर के पीछे वाला गुप्त हिस्सा चुन लिया और एकांत में शकुंतला को पढ़ने लगा ! रह रह कर मैं शकुंतला के प्रेम प्रसंगों में खो जाता और उसके दुर्भाग्य पर चुपचाप अविरल रोता रहता ! रात हो गयी ! कहानी मेरे मन को छू गयी थी ! मछुआरे की अँगूठी को देख कर जैसे दुष्यंत को शकुंतला की याद आयी वैसे ही शायद मेले के किसी चौकीदार को मुझ पाठक की याद आ गयी थी ! किताब के एक प्रसंग में दुश्यन्त ने शकुन्तला को जैसे ही ढूँढना शुरू किया मैंने महसूस किया मेले का चौकीदार भी किताबों के छुपे पाठक को किताबों में ढूंढ रहा था ! पाठकों को बाहर खदेड़ने में कई प्रकाशक चौकीदार की मदद कर रहे थे ! मुझ जैसे ज़िद्दी पाठकों को बाहर तक ले जाने के लिए चारो तरफ सीटी बज रही थी ! मैंने दुःख की इस कथा को ख़तम किये बिना मेले से न निकलने की ठान ली और एक ऊँची टेबल के नीचे छुप के पढ़ने लगा ! मेनका की बेटी से अब मुझे पुस्तक मेले का कोई चौकीदार और प्रकाशक अलग नहीं कर सकता था ! अंत में दुष्यंत को शकुंतला मिल गयी पर मैं किसी चौकीदार को नहीं मिल सका !

जब किताब ख़तम हुई हॉल से सब जा चुके थे ! मेला कई घंटे पहले अगले दिन तक के लिए बंद हो चूका था ! लाखों किताबों के बीच मेले में, मैं अकेला छूट गया था ! मैं बिना हिले डुले स्थिति का जायजा लेने दूर से आ रही इधर उधर की आवाज़ों को जोड़ के समझने की कोशिश करने लगा ! घडी में रात के डेढ़ बज रहे थे ! पुस्तक मेले के पंडाल के बाहर का मैदान कोहरे में डूब गया था ! इस वक़्त पुस्तक मेले में मैं किसी चौकीदार के हाथ नहीं आना चाहता था ! यह पाठक का निजी क्षण था ! मैं नहीं चाहता था रात के दुसरे पहर पुस्तक मेले से निकलता हुआ पकड़ा जाऊं और सोशल मिडिया में अगली सुबह उछाल दिया जाऊं ! मुझे अपनी स्थिति में पाठक की मिसअंडरस्टूड स्थिति दिखने लगी और सोशल मीडिया में पाठकों की दुर्दशा पर कई दिखाऊ सेमीनार को जन्म देने का बहाना दिखने लगा ! जैसे ही इस घटना पर सहमति असहमति के लाखों चेहरे की सेल्फ़ी का हाहाकार मेरी कान में गूँजा, मैं इस डरावने ख़याल से निकल आया ! अचानक तभी कहीं से मुझे कई फुसफुसाहट की आवाज़ सुनायी देने लगी ! मैं थोड़ा सहम गया ! किताब पढ़ने की धुन में मैं स्टाल संख्या और हॉल संख्या भूल गया था ! फुसफुसाने की सब अज्ञात आवाज़ें आस पास से आ रही थी, लग रहा था कोई मेरा पीछा करता हुआ यहाँ तक आ पहुँचा है ! बड़ी सावधानी से किताब को कुतरने वाले मेले के वोकेशनल चूहे की तरह मैं पंडाल से बाहर निकलने की जुगत लगाने लगा ! बाहर कहीं अँधेरा था, कहीं रौशनी थी ! बाहर आकर मुझे लगा मैं एक नयी जगह आ गया हूं ! कहाँ गयी वो भीड़ ? कहाँ गए वो असँख्य खरीदार जिसमे मुझ जैसे पाठक दिन में खो जाते हैं !

बाहर आते ही मुझे एक नयी किस्म की भीड़ दिखी ! कुछ ठंढ से और कुछ इस दृश्य को देख कर मैं सिहर गया ! रात के सन्नाटे में बाहर किताबों का मेला लगा था ! पंडालों के भीतर से किताबें बाहर निकल के उत्सव मना रही थी ! ये दृश्य मेरे लिए बिलकुल नया था ! मैं पहली बार पुस्तकों का सच्चा मेला देख रहा था जहाँ किताबें उन्मुक्त थीं ! दूर तक किताब ही किताब … चारों तरफ किताबें बिखरी पड़ी थीं ! पेड़ों पर किताब लटक रहे थे ! मुझे लगा मेरा सपना सच हो गया है ! किताबें किलकारियां मार रही थीं ! उत्तेजना से मुझे और ठंढ लगने लगी ! ठंढ से बचने के लिए मैं कोई जुगाड़ की तलाश में लग गया ! मैंने गर्म कपडे तो पहन रखे थे पर मेरे पास रात की ठंढ की तैयारी नहीं थी ! आग कागज़ का दुश्मन होता है इसलिए अलाव लगाने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता था ! मैं एक पाठक हूँ और पुस्तक प्रेमी हूँ, मैं सोशल मीडिया के प्रेत की तरह औरों की किताब जला के हाथ नहीं सेंक सकता था ! मैंने देखा नौजवान किताबें बूढी किताबों को ध्यान से सुन रही थी और चुप थीं ! नयी मोटी किताब भी पुराने पतली किताब को सुन रही थी ! बुज़ुर्ग की इज़्ज़त किताबों की दुनिया में ज्यादा थी !

पुस्तक मेले में छात्रों का प्रवेश नि:शुल्क था ! कोई शरारती छात्रा पुस्तक मेले में आयी तो स्कूल ड्रेस में थी पर अंदर अपने कपडे बदल के स्कूल ड्रेस वाला अपना बैग भूल गयी थी ! पुस्तक मेले में पूरा बाल साहित्य इस बाल मानुषी की शरारत को घेर के भावुक हो कर सोया था ! ठंढ से बचने के लिए मैंने बाल साहित्य से छुप कर उस मानुषी के झोले से उसके यूनिफॉर्म का पिंक स्वेटर और पिंक स्कार्फ निकाल कर पहन लिया ! अब मैं आधा बाल मानुषी और आधा वयस्क था ! मुझे लगा आधी रात को अँधेरे में पुस्तकों को चीर कर निकला मुझ पाठक का ये एक नया बाल अर्ध नारीश्वर अवतार है जो अवतरित दृष्टि से एक नया सच देख पा रहा है ! दिन भर अपना सर्वस्व लुटा कर बाहर मेले में किताबें सुस्ता रही थीं ! पुस्तक – प्रेमियों की याद में कुछ किताबों ने रत जगा किया था ! किताब से निकल कर कई पात्र और चरित्र के पुतले किताबों का मेले में साथ दे रहे थे ! मुझे दूर कोहरे में डूबा मेरे प्रिय साबू का पुतला भी दिखा ! रात के इस पहर में ठंढ से बच कर पुस्तक मेले के सभी चौकीदार किताबों की गोद में दुबक के सो रहे थे जैसे उन्हें सपनो के गर्म संसार में ले जा कर छोड़ दिया गया हो ! मेरी नज़रों के सामने पुस्तक मेले की विद्रूपता पराकाष्ठा पर थी !

बाहर निकलते ही कुछ बड़ी और मोटी किताबों ने झुण्ड बना के मुझे घेर लिया ! मुझे देख कर सबके पन्ने फड़कने लगे ! उसकी फड़फड़ाहट की आवाज़ सुन कर कई किताबें मौन हो गयी और उनसे आ मिलीं ! ‘हमारे इस मेले में तुम्हारा क्या काम ?’ रोबदार आवाज़ में एक किताब ने अपने पन्ने खोल कर सवाल किया ! डर विस्मय और मिक्स्ड फीलिंग की वजह से कुछ हॉरर किताबों के अक्षर इधर उधर बिखर के भागने लगे ! कुछ किताबों ने मुझे बाल साहित्य से निकला कोई कठपुतली समझ लिया और पास आ कर मुझे छूने की कोशिश करने लगे ! मुझे लगा मैंने पुस्तक मेले के रंग को भंग कर दिया है ! ‘क्या तुम हमें चुराने आये हो ?’ मोटी किताब ने दूसरा सवाल किया ? मैं कोई जवाब देता इससे पहले एक पतली लंबी गोरी सस्ती फ्रेंच किताब जो अबतक जोर जोर से फुसफुसा रही थीं मुझे देख कर चिल्लाने लगीं ! ‘तुम कोई नयी किताब तो नहीं लिख रहे ?’ अपनी पतली आवाज़ में उसने घबराते हुए पूछा ! उसकी बात सुन कर कहीं से नि:शुल्क बाइबिल दौड़ा हुआ आया और मुझ पर दया बरसाने की प्रार्थना करने लगा ! ज्ञान की इस असली गंगा में मैंने चुप रहना ही ठीक समझा !

थिंक टैंक से निकल कर कुछ गंभीर किताब मार्च करते हुए मुझ तक आये और औपचारिक रूप से मेरा परिचय माँगा ! मैंने कहा मैं शुद्ध पाठक हूँ ! मुझे किताबों से सच्चा प्यार है ! पुस्तक मेला मेरे लिए किसी देवालय से कम नहीं है ! मेरी बात को सुनकर मोटी किताबें जो सबसे ज्यादा गुस्से में थीं उनका सारा पन्ना शांत हो गया ! मेरे पाठक होने के सम्मान में ऑटोग्राफ्ड बुक मेरे पास आकर मुझसे सोशल होने लगे ! मुझे उन पर दया आ रही थी, मुझे उनका सच पता था ! हस्ताक्षर वाले किताब सोल्ड फील कर रहे थे पर वो बिके नहीं थे ! उनकी हालत टोबा टेक सिंह जैसी थी ! वो चाह कर भी मेरा दस्तख़त नहीं ले पा रहे थे ! उन्हें किताब की सीमा कहाँ ख़त्म होती है और पाठक की सीमा कहाँ शुरू होती है इसका भ्रम हो गया था ! वे सब डिप्रेस्सेड थीं और वे पुस्तक मेले में मुक्त हो कर भी अपने आप को अनदेखे खूँटे में बंधा हुआ महसूस कर रही थीं !

मैंने देखा रात में किताबों के लिए पुस्तक मेले का सेल्फी पॉइंट एक भूतहा जगह बन जाती हैं जहाँ कोई भी किताब जाने से डरती हैं ! चुटकुले की किताब क्रिकेट खिलाडियों से किसी बात पर रूठी हुई थीं और बात बात पर हंसने की जगह रो रही थी ! अपने डिजिटल और प्रिंट में होने को लेकर चल रहे गंभीर बहस में हास्य किताबें मौन थीं ! एक शेर के दिल पर लिखी किताब का पेम्पलेट दहाड़ने की कोशिश कर रहा था ! जेएनयू घटना, दिल्ली में वाहन प्रदूषण, वर्तमान सरकार, भारतीय मीडिया, समलैंगिक अधिकारों की किताबों की तस्वीरें लापता हुए लोगों की तरह मेले में चिपकी हुई थीं ! पीछे पुस्तक मेले में कागज़ी घोड़े कलम तोड़ के दौड़ रहे थे ! कुछ घटिया किताबें जो पॉपुलर थी – उनके कैटेलॉगस – रात भर उड़ते रहे ! पेम्प्लेट्स आवारा होती हैं और अपने रीसाइकल्ड नियति की वज़ह से निडर और फ्री होती हैं !

किताबों ने मुझे बताया दुनिया में स्त्रियों द्वारा लिखी स्त्रियों को समझने वाली किताब सबसे ज्यादा बिक रही हैं ! पुरुषों में स्त्री को नए सिरे से समझने की होड़ लगी है ! मेले में पुरुष के सवाल से भरी किताब को किसी ने उठाया भी नहीं ! राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुनाव, मौसम और नया साल का बोलबाला था ! फौजी किताबों की दाल गल नहीं रही थी उसमे कुछ काला था !

मैंने देखा राजनीति से संबंधित एक किताब का सेवानिवृत्त क़िताबों से कोई विमर्श चल रहा था ! दूर एक रौशनी के फव्वारे के पास व्यंग्य की जुगलबंदी चल रही थी जो धीरे धीरे कव्वाली का रूप ले रही थी ! राजनीति, अर्थशास्त्र, कला, संगीत, सिनेमा, खेल की कई किताबें प्रमुख घटनाओं की किताब को ध्यान से सुन रही थी ! पास में ही हिन्दी और धर्म एक साथ नाच रहे थे ! नाचते नाचते वो इतने एक हो गए कि हिंदी और धर्म में भ्रम होने लगा ! समझ में ही नहीं आ रहा था कि धर्म क्या है और हिंदी कौन है ? देखते देखते हिंदी धार्मिक हो गयी और धर्म सिर्फ हिंदी का हो कर रह गया !

एक किताब ने मुझे जो बताया वो बात मुझे पता थी ! उसने कहा देखने की किताब अलग होती है, खरीदने की किताब अलग होती है और पढ़ने वाली किताब बिलकुल अलग ! मेले में उपन्यास, संस्मरण, कहानी-संग्रह, कविता संग्रह, नाटक के साथ इतिहास, भूगोल, ज्ञान-विज्ञान, साहित्य, यात्रा, धर्म, भाषा, जीवन-वृत्त आदि सभी विषयों पर पुस्तकें थीं और ये उनका ही मेला था !

रात भर किताबों के साथ उनकी दुनिया में रह कर मैंने किताबों को थोड़ा और करीब से जाना ! किताबें बहुत कोमल मन की होती है ! पढ़ने का मन न हो फिर भी किसी किताब को कभी ठोकर मत मारिये ! लोगों की ठोकर से किताबें कराहती हैं ! जब आप किसी किताब को बिखरा हुआ देखें उसे समेटने की कोशिश जरूर करें ! किताब से जुड़े हर मामले में कोई न कोई आप का साथ जरूर दे देगा और आप कभी अकेले नहीं रहेंगे ! किताबें ज़िद्दी होती हैं ! दुनिया की हर किताब अपने पढ़े जाने का तब तक इंतज़ार करती हैं जब तक पाठक पढ़ रहे किताब को पढ़ कर ख़त्म न कर दे ! किताबों के पास धरती का धैर्य है ! आप जब भी किताबों से मिलेंगे किताबें कभी आप को निराश नहीं करेंगी ! किताबों में प्रतियोगिता नहीं होती प्रतियोगिता उसे पढ़ने वालों में होती है ! किताबों की आँख नहीं होती वो सबको एक दृष्टि से देखती हैं ! किताबें भोली होती हैं ! पढ़ने वाला अपनी लगाता है वर्ना किताब के पास तर्क शक्ति नहीं होती ! किताबे पढ़ना लिखना नहीं जानती उनके लिए काला अक्षर भैंस बराबर है ! अपने अमेज़न और फ्लिपकार्ट के सपनों के साथ किताबें अब पूरे विश्व में मिलती हैं ! ‘हर किताब, अब विश्वविख्यात’ ये किताबों के लिए नया नारा है !

मेले में सुबह तक मेरी पढ़ी हुई कई किताबें भी मुझसे मिलीं ! पढ़ी हुई किताबों से मिलना बहुत आत्मीय होता है ! पढ़ ली गयी किताब और पाठक के रिश्ते को मैं बाप और बेटी या माँ और बेटी के रिश्ते से कम नहीं मानता हूँ ! किसी किताब को पढ़ कर देखिये, आप को मेरी हर बात सच लगेगी ! किताब और पाठक या पाठिका का अमिट रिश्ता जीवन भर नहीं टूटता है ! पहला पाठक ही हर किताब का पहला प्यार है ! मैं किताबों को एक जीवित भावनाओं का पुलिंदा मानता हूँ ! किताबों में प्राण नहीं होता तो वो हमें हँसाती और रुलाती कैसे ? वो जीवित नहीं होती हैं तो हमारा जीवन कैसे बदलतीँ हैं ? किताबों का मेला नहीं लगता तो हम किताबों से मिलते कैसे ? नयी और पुरानी किताबों से हमारा परिचय कैसे होता ? रात की इस घटना के बाद मुझे एक बात अच्छी तरह समझ में आ गयी है कि हर किताब जाने या अनजाने में आप में एक परिवर्तन जरूर ले आता है ! जैसे पढ़ लिए जाने के बाद किताब एक पाठक पुरानी हो जाती है वैसे ही हम भी किसी किताब को पढ़ने के बाद एक किताब पुराने हो जाते हैं !

सुबह होने लगी थी ! किताबों ने मिल कर मेरे लिए कोरस में ‘हम होंगे कामयाब’ गीत गया और ख़ुशी ख़ुशी मुझे विदा किया ! पुस्तक मेले से लौटते हुए मेरी आँखें पता नहीं क्यों उस बाप की तरह भर गयी थी जो अपनी बेटी को हॉस्टल में छोड़ कर आ जाता है !

मैंने देखा एक पल में सभी किताबें अपनी जगह लौट गयी थीं ! मैं भी अपनी दुनिया में खोने के लिए लौट रहा था ! तभी बाहर से आती हुई एक मानुषी ने मुझसे पूछा ‘बुक फेयर कहाँ है ?’
‘जी ?’ मैं समझा नहीं …! क्या मैं कहीं खो गया हूँ ?’ मेरे मन में ये प्रश्न उठा !
‘बुक फेयर प्लीज ? फेसबुक लाइव करना है, जल्दी कहिये बुक फेयर कहाँ है ?’ उसने मुझे फिर टोका ! वो बहुत जल्दी में थी !
‘यही पुस्तक मेला है !’ मैंने जवाब दिया !
मानुषी ने मुझे ऐसे देखा जैसे साक्षात् प्रेमचंद को देख लिया हो !
क्या पुस्तक मेला और बुक फेयर दो अलग आयोजन हैं ? और अगर ऐसा है तो क्या किताबें ये जानती हैं ? पिंक स्कार्फ़ और स्वेटर उतारते हुए मैं सोचने लगा !
अचानक मानुषी चिल्लाने लगी ‘आए लव बुक्स … आए लव बुक्स !’ और आए लव बुक्स चिल्लाते हुए अंदर की तरफ भाग गयी ! उसे उस किताब का पोस्टर दिख गया था जिसको वो लाइव करने आयी थी ! मैं उसको पुस्तक मेले में जाता हुआ देखता रहा ! क्या पता मानुषी के रूप में अनायास ही मैं भविष्य की किसी लेखिका से सीधा संवाद कर चूका था ! इस कल्पना मात्र से ही मन में गुदगुदी हो रही थी ! मैं किताब के मेले से बच्चों की तरह नाचता हुआ लौट रहा था !