डिजिटल कचरा

 

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डिजिटल डाटा

 

डिजिटल कचरे में शब्द कम होते हैं, चित्र ज्यादा

 

एक /

कुत्ता जल रहा है ! लड़की मर रही है ! भाषण चल रहा है ! ब्रीफकेश, अटैची, हैंडबैग सब नोटों से भरा है ! अपनी अपनी तस्वीरों में लोग द्वारका, आगरा, और कशमीर से लेकर कन्या कुमारी तक खड़े हैं ! मसूर और मूँग की दाल, आलू और टमाटर के साथ फोटो खिंचा रहे हैं ! सब एक दुसरे को श्रद्धांजलि और जन्मदिन मुबारक एक ही फोटो पर दे रहे हैं ! फोटो में कोई उज्जैन जा रहा है तो कोई साकीनाका ! बाढ़ के दौरा में मंत्रीजी के हेलीकॉप्टर से पीड़ित कम दिख रहे थे और फोटोशॉप ज़्यादा ! फोटो शॉप की मदद से किसी ने सबकी थाली गायब कर दी है , अस्पतालों में पागलों की तरह लोग फर्श पर खाते दिख रहे हैं ! पेट पर लात और पीठ पर लाश, गाय और गुजरात, हर तरफ है फोटोशॉप का पलटवार ! डिजिटल रायता फ़ैल चूका है !

दो /

कोई फर्श पर खा रहा है तो कोई गाय की पीठ पर, कोई पाकिस्तान के नक़्शे पर खा रहा है तो कोई अपनी ही कार्टून पर ! कोई लाल पानी पर खा रहा है तो कोई आदिवासी के कंधे पर ! बहुत लोग अपने मन की बात पर खा रहे हैं, कविता कहानी जिस पर भी आपका मन हो आप खा सकते हैं ! किसी दिन हम लाल किला पर खा लेते हैं और किसी दिन पथ्थर फेंकते कश्मीर पर ! कोई अपने कहे की फोटो पर ही खा रहा है, कोई सबकी सुन कर खा रहा है ! जो भूखे हैं उनके फोटो पर भी कोई खा रहा है ! जितने देशवासी उतनी थाली और जितनी थाली उतने छेद ! फोटो शॉप से थाली को मिटाया जा रहा है, सबके लिए खाना है पर सबकी थाली गायब …

* कंडीशंस अप्लाई / इस पोस्ट पर आप चाहें तो खा सकते हैं, पर भूख नहीं मिटेगी, पेट नहीं भरेगा

 

Pic Credit : Google

सावधान !

” युद्ध शुरू हो चुका है ” / ” पाक साफ “/ ” पाकिस्तान पूरी तरह से ख़त्म हो गया ” इत्यादि इत्यादि ! देशवासियों कृपया ऐसे स्टेटस से बचें और घर बैठे बैठे सोशल मीडिया पर एक दुसरे के स्टेटस से युद्ध न करें ! सर्जिकल स्ट्राइक युद्ध नहीं है ! ये एक सैन्य कार्रवाई है जिसके लिए प्रधान मंत्री और सेना बधाई के पात्र हैं ! पर ये युद्ध नहीं है ! अधीर न हों ! युद्ध में सोशल मीडिया सबसे पहले हम सबका साथ छोड़ देगा या ये कहिये हम छूट जायेंगे ! युद्ध हुआ तो बिजली और पानी जैसी बुनियादी चीजों के लिए देशवासी बैचैन हो जायेंगे ! आप का स्टेटस पढ़ने के लिए सोशल साइट पर कोई नहीं होगा जब युद्ध की स्थिति में एयर स्ट्राइक से देश को जूझना होगा ! युद्ध से हम डरते नहीं हैं ! धैर्य रखें, जरुरत हुई तो युद्ध भी होगा और सबको सेना की मदद भी करनी होगी जिसकी कोई जानकारी हम सबको नहीं है ! जैसा आप सोचते हैं युद्ध वैसा नहीं होगा ! युद्ध टेलीविजन पर नहीं होगा ! युद्ध सबकी आँखों के सामने होगा और तबाही चारों ओर होगी ! जलने और मरने से चारों तरफ हाहाकार होगा ! सिस्टम और इंफ़्रास्ट्रक्चर चरमरा जायेगा ! आप सावधान नहीं हुए तो अफ़वाह के शिकार होंगे और हर हाल में देश का नुकसान होगा ! सावधान ! युद्ध टेस्ट मैच नहीं है ! युद्ध से तबाही की कल्पना आप सब खुद कीजिये और प्लीज इसकी कामना आने वाली पीढ़ी और बच्चों के हित में मत कीजिये ! सेना को अपना काम करने दीजिये और चलिए हम सब अपना काम करें ! जय हिन्द !

जलते पटाखा का बुझता प्रेमी

पटाखा को लेकर मेरा एक प्यारा सपना था, जिसको मेरी पटाखा ने ही मेरी आंखों में धूल झोंक कर फोड़ दिया है. मेरी पटाखा दरअसल सिर्फ़ मेरी प्रेमिका नहीं बल्कि मेरा एक विचार है. पटाखा की देह गंध मेरे आनन्द का स्रोत रही है. पटाखा के अंदर मेरे बचपन की खुशियां भरी थी और इसकी पवित्र चिंगारी का मैं प्रेमी था. मैं अब तक अपनी पटाखा की प्रेम अग्नि में उत्सव की तरह जलता रहा हूं. इस बार दिवाली के नाम पर अश्लील ढंग से फट कर पटाखा ने मेरा दिल तोड़ा है और मेरे प्रेम के विश्वास में मुझे धोखा दिया है. उसके धोखे से इस बार मेरे अंदर धुआं भर गया, मुझे सांस लेने में तक़लीफ़ होने लगी. पटाखा के धोखे और धुएं से दम घोंटू वातावरण बन गया. उसकी अय्याश रंगरेलियों की आतिशबाजी के धुएं और बेवफ़ाई के विषाक्त धूल से आंखों में जलन और बेचैनी बढ़ने लगी, मुझे उबकाई आने लगी और मैं हिचक के रोने लगा.

मेरी प्रिय पटाखा. मेरे दिल के अनार, चकरी और फुलझड़ियों को धोखा दे कर मेरी रोशनी, दिए, कंदील और मिठाइयों को छोड़ कर तुम अपने सीसा, मैग्नीशियम, कैडमियम, नाइट्रेट, सोडियम फॉस्फोरस की घमंड में जिसके इर्द – गिर्द चकरघिन्नी खा रही हो तुम्हारे वो ग्राहक अपनी कामनाओं की वासना में तुम्हे जला के भष्म कर देंगे. हम दोनों के प्रेम के दिए जलते तो वाकई रौशनी के फूल खिलते, पर तुम इस दिवाली में किसी की कामुकता का पटाखा बन के फटी हो तो दिल जल रहा है. बज कर फुस्स हो जाने का तुम्हारा एक दिन का ज़िद भरा जश्न हर बार मेरे लिए ध्वनि प्रदूषण और हानिकारक गैसों से नुक्सान का कारण बनता रहा है. इस दिवाली किसी और की पटाखा बन के तुमने हम दोनों के प्रेम का पर्यावरण भी जला दिया.

मेरी पटाखा, तुम्हारी बारूदी आंखें मेरी देह के भीतर फटती तो मेरी आत्मा में उत्सव का धमाका होता पर जैसे तुम फट रही हो वह प्यार नहीं है, या कोमलता, या स्नेह, या अपने आप में जीवन, यह सब कुछ भी नहीं है. पटाखा इस दिवाली में तुम्हारे फटने की कामुक कराह का शोर मुझ पर एक भयानक प्रभाव छोड़ गया है. तुम्हारा धमाका खोखले सेक्स की तरह था, जिसमे तुम फटने के बाद हर बार अन्धकार में छूट जाती हो. अपने बारूद के बदले दुसरे के अहम् की देह गंध से बार बार भर जाना क्या तुम्हे घिन से नहीं भरता ? फिर तुम हर बार फटती हुई ऐसे क्यों छटपटाती हो जैसे जलते हुए अनार को किसी ने लात मार दिया हो ? वासना की अराजक सड़कों पर तुम अब चलती कार में हवस का शिकार बन कर बजने लगी हो, मनोरंजन के नाम पर तुम अपने नगर में शोर, धुआं, प्रदूषण का एक विरासत हो और कुछ नहीं. यह भयानक है. मेरी मासूम पटाखा तुम पार्क में हवा साफ करने के लिए सूर्य नमस्कार करते – करते प्रदुषण और अन्धकार की नगर वधु कैसे बन गयी ?

तुम्हारी कामुक आतिशबाजी को बच्चों और बुजुर्गों से भरा तुम्हारा परिवार भी बर्दाश्त नहीं कर सकता है. तुम जब भी बजती हो वो दिन और रात घर में बच्चों और बुजुर्गों के लिए एक भयानक दिन और रात होती है. इसीलिए तुम छुप छुप कर प्लास्टिक पीढ़ी के आवारा मर्दों की जेब खर्च से बजने लगी हो. उम्र भर टाइम बम की टिक टिक की तरह तुम्हे मेरी ह्रदय की धड़कन बन कर रहना था पर तुमने चुना बस एक कामुक ध्वनि, देह का विस्फोट और अब सब स्वाहा. तुम्हारे बजने की बीमार आदत ने मेरी भावनाओं की दुख:मय अंत्येष्टि कर दी है. मुझे पता है तुम अपने विस्फोटों के बीच मेरे शब्दों के माध्यम से मेरी दुःख की सिसकती आवाज सुन रही हो.

सुनो पटाखा तुम जलो और बजो पर अपने प्रेमी के लिए दमघोंटू माहौल बना कर किसी दूसरे की खुशियों के लिए अपने इस पागल प्रेमी की ख़ुशी को तो कम न करो. मेरे प्रेम की सारी आक्सीजन सोंख ली तुम्हारे पटाखे के धुएं ने. अपना उल्लास इतना महत्वपूर्ण है कि दूसरों की शांति में खलल डालते हुए तुम्हे ज़रा भी संकोच नहीं होता है ? मेरी पटाखा आखिर तुम इतनी ज़्यादा सेल्फ सेंटर्ड क्यों हो ?

तुम तो मेरे ह्रदय की मासूम पटाखा थी, दुःख की बात है तुम मुझे धोखा दे कर किसी की छाती पर चढ़ कर बज गयी. तुमने मुझे प्रेम में धोखा दिया है, याद रखना तुम्हे पता भी नहीं चलेगा कि तुम कब आखरी बार बज गयी हो और कब आखरी बार फट के अपने ग्राहकों के दिमाग में बारूदहीन कचरा बन गयी. अब तुम्हारी सल्फर, कोयला और पोटेशियम नाइट्रेट से भरी देह से प्रेम करने में कोई गौरव, सम्मान या आध्यात्मिक इनाम नहीं है. जाओ पटाखा, अपने प्रेमी के रौशनी से पवित्र प्रेम की आतिशबाजी को छल कर जिनके फेफड़े में क्षणिक सुख के लिए तुम सल्फर डाइऑक्साइड भर रही हो तुम्हारे वो ग्राहक तुम्हारे सौंदर्य के फॉस्फोरस के राख होते ही तुम्हे सड़क पर अंधेरे में छोड़ देंगे. प्यार से भरे मेरे दिल से निकल कर अपने कामुक ग्राहकों के पर्स में ज्यादा दिन तक रह पाओ अब तुम जैसी जलती पटाखा के लिए धोखा खाए मुझ जैसा बुझता प्रेमी यही कामना कर सकता है. पंछी और जानवरों के साथ साथ तुमने मुझमे भी भ्रम, चिंता, और भय भर दिया है. मुझे तुमसे अब एलर्जी है. एग्जॉस्ट फैन और वैक्यूम पंप चला कर मैं अपने दिल से ही नहीं तुम्हे फेफड़े से भी हमेशा के लिए निकाल रहा हूं. गुडबाय पटाखा.

लल्लन टॉप में प्रकाशित 

मेरे अंदर एक लाल पान की बेगम है

 

लाल पान की बेगम

लाल पान की बेगम

मेरे अंदर एक लाल पान की बेगम है जिसका मैं गुलाम हूँ ! मेरा मुख्य कर्तव्य दिन रात उस स्त्री की सेवा से जुड़ा हुआ है ! मेरे अंदर उसको बराबरी का दर्जा हासिल है ! अंदर की उकता देनेवाली पुनरावृत्ति और स्नायुओं में भर गयी जड़ता से वो मुझे मुक्त कराती है और वही स्त्री मुझे आत्मनिर्भर बनाती है ! मेरे ह्रदय को एक नहीं अनेक स्त्रियों ने ढाला है ! मैं अपनी स्त्री के बारे में लिख सकता हूँ इसीलिए लिख रहा हूँ ! माँ, बहन, प्रेमिका, दोस्त, पत्नी और अब बेटी, रिश्तों की हर तह में स्त्री को जानने की ललक ही रही होगी जिसकी वजह से मुझे इतना स्त्री धन मिला है ! मौसी, बुआ, मामी, चाची, भाभी, बहु और सबकी बेटियाँ ! बहुत बड़े परिवार के साथ रह कर पला बढ़ा जिसकी वजह से मेरा संसार स्त्रियों से भरा है !

नाट्य, कलाकर्म, साहित्य और अब सिनेमा से जुड़ा जीवन ! गुरु, गाइड, दोस्त, सहकर्मी, अजनबी सब किस्म की स्त्रियों से मिलने और सीखने का सौभाग्य मिला ! स्त्रियों के साथ इतने रिश्तों में जीना, मेरा ही नहीं किसी भी भारतीय या विश्व के स्वस्थ समाज में बिताये अपने बचपन और जी रहे किसी भी उम्र के आदमी का सामान्य जीवन है, जिस पर लाखों करोड़ों लोगों की तरह मुझे भी गर्व है ! मैं आज भी स्त्रियों से आकर्षित और प्रभावित होता रहता हूँ और स्त्री ही मेरे भीतर उत्सव और आनंद का बीज बोती है !

जब भी अपने अंदर झांकता हूँ, मुझे लगता है मेरे अंदर भी एक स्त्री है जो पल रही है और मुझे पाल रही है ! मेरे अंदर की लाल पान की बेगम ही मेरी दुर्गा है, देवी है, काली है, सहचरी है, मेरे जीवन की प्राण शक्ति है ! जो मेरे भीतर के आशावादी, विजयी और सुंदर चेतना की सच्चाई है ! इस स्त्री पर अभी तो कुछ सौ शब्द लिख रहा हूँ पर मैं स्त्री पर अपने हर शब्द न्योछावर कर के उसकी आँचल में बांधेने को तैयार हूँ ! दस दिनों का दशहरा या नौ दिनों की नवरात्रि मेरे लिए स्त्रयों में मेरी आस्था से फिर फिर जुड़ने का संकल्प है !

शब्द

मेरी कई बातों का अर्थ आप नहीं लगा पाएंगे, मेरी दोस्ती शब्दों से है और बहुत सारे शब्द मुझसे मिले हुए हैं ! जैसे ही आप रंग बदलेंगे, वो अर्थ बदल लेंगे

शिकारी सिंगल

शिकारी सिंगल

 

‘शिकारी सिंगल’ मर्दों को अपने हवस का शिकार प्रेम का ढोंग रचा के बनाती है और कुछ ही हफ़्तों में बच्चा, नौकरी, मूड या किसी एक्स या कोई नए प्रेमी का बहाना बना कर अचानक गायब हो जाती है ! भावुक आदमी तड़पता रह जाता है ! मिडिल ऐज़ ‘ शिकारी सिंगल ‘ मल्टीप्ल डबल टाइमिंग करती है ! अपने पुरुष शिकार बहुत ध्यान से अलग अलग फील्ड से चुनती है और अपने से कमज़ोर आदमी में अपना शिकार तलाश करती है ! उसके शिकार एक दुसरे को नहीं जानते ! ये कई सारे सोशल साइट के प्लेटफार्म पर होती है और अपने फ़ोन से ऑपरेट करती है ! जिनसे पब्लिक में मिलती है उनसे दुरी बना के रखती है ! शिकारी सिंगल देखने में पढ़ी लिखी होती है, नौकरी भी करती है और भावनात्मक रूप से बिलकुल क्रूर होती है ! इनकी दिलचस्पी हर पल बदलती रहती है और मदद की आड़ में अपना शिकार ढूंढ लेती है ! इनसे आप कभी रिश्ता बनायें तो कंडोम का जरूर इस्तेमाल करें और सेक्स के बाद इनको रुपये जरूर दें ! इनके प्रेम के भ्रम को तोड़ें और इनके बारे में अपने दोस्तों के ग्रुप में खुल के चर्चा करें ताकि आपका कोई भावनात्मक दोस्त  इनका शिकार न बने ! अपने सेक्स की जरुरत को पूरा करना सबका हक़ है पर वो किसी रंग में न हों, दोस्ती और प्रेम के ढोंग में तो बिलकुल न हो ! जनहित में जारी !

शिकारी सिंगल / पार्ट टू ‘ सेटिंग अप द स्टेज ‘

बलात्कार और चाइल्ड एब्यूज जैसी महानगरीय वीभत्स हादसों के बाद ‘शिकारी सिंगल’ सेंटर स्टेज के लिए ‘डेस्पेरेट’ हो जाती हैं ! अपने हारे पुराने शिकार आशिकों को लेकर कोई मंच बनाती हैं और अपने हवस के नए शिकार के लिए आंदोलन में उतर जाती हैं ! कैंडल लाइट मुहीम और आंदोलन की हर रात वो एक नए मर्द शिकार के साथ हम बिस्तर होने का टारगेट रखती हैं और मोम की तरह नए पते की चादरों पर पिघलती हैं ! उनका मुख्य उद्देश्य सेक्स होता है और वो मुहीम के हर दिन अपनी कई नयी रातों के लिए नया शिकार ढूंढ लेती हैं ! योन शोषण के शिकार हुए कमज़ोर मर्द अपनी किस्मत पर इतराते हैं और इससे पहले वो कुछ समझ पाएँ मिडिल ऐज़ ‘ शिकारी सिंगल ‘ मल्टीप्ल डबल टाइमिंग करती हुई आंदोलन और मुहीम का धन्यवाद ज्ञापन कर देती हैं ! व्यस्त इतनी दिखती हैं की मर्द अपनी भावनाओं को व्यक्त भी नहीं कर पाता है ! अगर किसी ने मुंह खोला तो वो उसे छोटा साबित कर उसे ‘सेक्स गिल्ट’ में धकेल देती हैं ! इनसे आप कभी रिश्ता बनायें तो कंडोम का जरूर इस्तेमाल करें और सेक्स के बाद इनको रुपये जरूर दें ! इनके प्रेम के भ्रम को तोड़ें और इनके बारे में अपने ग्रुप में खुल के चर्चा करें ताकि कोई भावनात्मक आदमी इनका शिकार न बने ! अपने सेक्स की जरुरत को पूरा करना सबका हक़ है पर वो किसी रंग में न हों, दोस्ती और प्रेम के ढोंग में तो बिलकुल न हो ! जनहित में जारी !

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आप से नहीं हो पायेगा ! आप के पास इतना बड़ा कलेजा नहीं कि आप एक स्त्री / पुरुष को उन्मुक्त हो कर काम सुख लेने दें ! वो आप को चुभेगी / चुभेगा ! उनका सेक्स आप को चुभेगा ! उनकी बेफिक्री आप सह नहीं पाएंगे ! आप के साथ सेक्स करने के बाद अब वो किसी और के साथ सेक्स कर रही / रहा है ये सच आप स्वीकार नहीं पाएंगे ! शिकार हर उस जानवर या पक्षी को कहा जाता है जिसका शिकार खाने या खेल के लिए किया जाता है ! शिकारी सिंगल के लिए आप भी सिर्फ एक वक़्त का खाना और खेल हैं ! अपने शिकार के बाद शिकारी सिंगल की प्रखरता और तार्किकता के कायल आप नहीं रह पाएँगे ! आप सिर्फ एक औरत / मर्द के कामोन्माद के शिकार नहीं हुए हैं, आप अपने अहम् के भी शिकार हो चुके हैं ! शिकारी सिंगल को आज़ाद कर दीजिये ! आप उन्हें जाने दीजिये, जीने दीजिये ! इनसे आप कभी रिश्ता बनायें तो कंडोम का जरूर इस्तेमाल करें और सेक्स के बाद इनको रुपये जरूर दें ! इनके प्रेम के भ्रम को तोड़ें और इनके बारे में अपने दोस्तों के ग्रुप में खुल के चर्चा करें ताकि आपका कोई भावनात्मक दोस्त इनका शिकार न बने ! अपने सेक्स की जरुरत को पूरा करना सबका हक़ है पर वो किसी रंग में न हों, दोस्ती और प्रेम के ढोंग में तो बिलकुल न हो ! जनहित में जारी !

शिकार की हर बात क्रूर होती है ! इस सीरीज में आप कोमलता की तलाश न करें !

सोशल मीडिया का प्रेत

 

Sketch Artist- Unknown.

Sketch Artist- Unknown.

वनवासी ने हॉस्पिटल से अपनी पत्नी का शव उठाया और चुपचाप शमशान की ओर चल पड़ा ! टीवी की मरीज़ बीवी की ठठरी का वज़न एक गठरी लकड़ी से ज्यादा नहीं था ! आदिवासी समुदाय में किसी की मृत्यु हो जाने पर ढोल नगाडे़ को एक विशेष लय में बजाकर संदेश भेजा जाता है, जिसे सुन-समझ कर आस-पास के लोग मृतक के घर की ओर शीघ्र पहुंच जाते हैं ! वनवासी के लिए फेसबुक, ट्वीटर, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के नगाड़े पर थाप देने वाला जंगल में कोई नहीं था इसीलिए उसके साथ उसके समाज के चार आदिवासी नहीं पहुँच सके थे ! हाँफता हुआ वनवासी जब अपनी मरी हुई पत्नी को अकेला अपने कंधे पर लेकर पाँच किलोमीटर से अधिक चल लिया तभी शव स्तिथ बेताल ने कहा, “ पण्डित, चतुर और ज्ञानी, इनके दिन अच्छी-अच्छी बातों में बीतते हैं, जबकि मूर्खों के दिन कलह, नींद, फेसबुक, ट्वीटर और टेलीविज़न देखने में ! अच्छा होगा कि हमारी राह भली बातों की चर्चा में बीत जाये। तेरी बदहाली मुझसे देखी नहीं जा रही है ! मैं तुझसे कुछ प्रश्न करता हूँ, अगर प्रश्न का उत्तर जानते हुए भी तुमने उत्तर नहीं दिया तो तुम्हारा सर फटकर सड़क पर बिखर जायेगा ” ! सत्तर साल से आज़ाद कालाहांडी की सड़कों पर विकास के बेताल को कंधे पर लिए देश का नागरिक चल रहा था ! उसने देखा टीवी पीछे पीछे चल रहा है, और सोशल मीडिया उसके आगे आगे ! मुर्दा चुप था, बेताल बोल रहा था ! ” फाइलों में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, रोजगार, शिक्षा मिल कर जंगल में रहते हैं फिर जंगल में तुम्हारा इनकम कम क्यों है ? तुम्हारी दुर्दशा जंगल में जन्म से ही क्यों शुरू हो जाती है ? तुम बुनियादी जरूरतों के संघर्ष में अपने बच्चों को क्यों खो देते हो ? तुम्हारे जंगल में सफेद बाघ भी अपने डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र के लिए क्यों भटकता है ? ” वनवासी प्रेत के सवाल से बौख़ला गया और सड़क किनारे शव को रखने की जगह ढूंढने लगा ! बेताल पल भर के लिए चुप हो गया ! शव को रखते ही वनवासी ने पेड़ों के पास एक अजीबो-गरीब आकृति के जीव की झलक देखी ! गिरगिट जैसा दिखने वाला यह दैत्याकार जानवर पेड़ों के सहारे साथ साथ चल रहा था और रंग बदल रहा था ! जैसे वो अपनी पत्नी की लाश ढो रहा था दैत्याकार गिरगिट कैमरा ढो रहा था ! आज वनवासी के साथ क्या हो रहा है वो कुछ समझ नहीं पा रहा था ! प्रेत फिर बोलने लगा ” जंगल में शिक्षा का अधिकार मूल अधिकार का दर्जा ले चुका है फिर तुम वनवासी बने क्यों बैठे हो ? तुम अपने चाचा-चाची का वृद्धा पेंशन का फॉर्म आज तक क्यों नही भर पाए ? ” डरा हुआ वनवासी शव उठा के फिर चल पड़ा ! वो जानता है कि गढ़, किला, बुजुर्ग, ताल, खेत, पहाड़, पत्थर सब आदिवासी का गुण गाते हैं पर शिक्षा के अभाव में वो स्वयं बद से बदतर ज़िंदगी जीने को विवश हैं ! प्रेत ने वनवासी के कान में फुसफुसा के बोला ” तुम अपने हालात देखो, और गरीब नेतृत्व से निकलो ” वनवासी चीख पड़ा ” सब झूठ है, सब झूठे हैं, तू भी मेरी पीठ पर झूठ बोल रही है ! मैं मिट्टी ले जा रहा हूँ ! माँ प्रकृति की मौत हुई है जिसकी बीज का मैं दाना हूँ ” जवाब सुनकर बेताल ठहाके लगाने लगा ! वनवासी ने शव को ज़मीन पर रख दिया ! दस से ज़्यादा किलोमीटर चल कर वो थक गया था ! प्राइवेट न्यूज चैनल का प्रेत भी सोशल मीडिया पर लटक के आराम करने लगा ! ” आदिवासी के लिए शहर में एम्बुलेंस नहीं मिला सबने देखा पर आदिवासी की मदद के लिए चार आदिवासी जंगल से नहीं आये ये किसी ने नहीं देखा ” कहता हुआ दुष्ट प्रेत हँस रहा था ! तभी एक एम्बुलेंस वनवासी को लेकर जंगल में गायब हो गया ! आदिववासियों के यूनियन ने महासभा में झाड़ – फूँक करने वाले को बुलाया जिसने रिमोट से प्रेत को वनवासी से अलग किया ! अगले दिन दुनिया के सोशल मिडियावासियों के छोटे बड़े हर साइज़ के स्क्रीन के साथ गाय गोरु, भेड़, बकरी, बतख, मुर्गी, चूजे, कुल्हारी, गैंता, तीर-धनुष को वनवासी के हाल का पता चल गया ! सोशल मीडिया का प्रेत जाते जाते वनवासी की बदहाली को वायरल कर गया था !

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मुंबई बदन ( मनुष्य और कैमरे के लड़ाई की फैंटसी / एक फंतासी उपन्यासिका )

सोचो मत बस पढ़ने का आनंद लो #मुम्बईबदन

1.

मुम्बई बदन में आने का सबसे अच्छा समय बरसात के दिनों में ही है ! दूर तक फैली घाटी में हरियाली और पानी के झरने देखकर तन मन में थ्रिल और रोमांस बहने लगता है ! मुम्बई बदन में समतल स्थान के आगे तारों की बाड़ लगाई गई है, ताकि लोग इससे आगे न जाएँ ! मुम्बई बदन की सहेलियाँ और दोस्त अलग अलग शहरों से आते हैं ! सब मिल कर मॉल जाने का प्रोग्राम बना लेते हैं ! मुम्बई बदन में रात के बारह बजे रोज़ केक काट कर जन्मदिन मनाया जाता है ! मुम्बई बदन के हाई – वे पर युवाओं के झुण्ड मौज मस्ती का सारा सामान साथ लेकर आते हैं ! मुम्बई बदन के हर स्पॉट पर मेला सा लगा रहता है ! मुम्बई बदन में रह रह कर बारिश होती है ! चाय, भुट्टे, कॉफ़ी और कई स्नैक्स के अलावा बियर और शराब भी मिलती है ! मुम्बई बदन मेंं वृन्दावन के बंदर नही हैं ! मुम्बई बदन मेंं कहीं छेड़छाड़ नहीं है ! मुम्बई बदन की गुफाऐं बड़ी रहस्यमयी हैं ! मुम्बई बदन में थोड़ी थोड़ी देर में दृश्य बदलता रहता है ! मुम्बई बदन मे कैमरा ले जाना मना है ! 

2.

हर दिल मुम्बई बदन की यात्रा पर है ! सबके अंदर एक मुम्बई बदन है ! मुम्बई को लेकर अपनी एक फैंटसी ! अपनी अपनी गतिविधियों और कल्पनाओं का निर्भय लोक जिसमे सब अपनी तरह से रहने के लिए आज़ाद हैं ! मुम्बई बदन वो ललक है जो सबके अंदर किसी कोने में छुपी बैठी है, और बार बार यहाँ अाने के लिए मजबूर करती है ! मुम्बई बदन इश्क़िया है ! मुम्बई बदन की सुबह चाहत की चहचहाट से भर जाती है, और नज़ारा रंगीन हो जाता है ! मुम्बई बदन मे होती है सपनों की दोपहर ! मुम्बई बदन स्वतंत्र है, और मुम्बई बदन का स्पर्श सबके लिए फ्री है ! मुम्बई बदन के खून में व्यापार है, इसलिए कैमरा मुम्बई बदन के डिजिटल इतिहास को जन्म देना चाहता है, और मुम्बई बदन का एक एलबम बनाना चाहता है पर कैमरे के अंदर मुम्बई बदन का दम घुटता है ! मुम्बई बदन के दुश्मन कैमरे के अंदर रहते हैं, जो मुम्बई को इमेज के ज़ंकयार्ड मे बदलने के लिए दिन रात फ़्लैश होते रहते हैं ! उनका काम मुम्बई बदन को कामुक बनाना है ! आत्म प्रचार और निजी जीवन पर टिप्पणी करने की कैमरे को बीमारी है ! इसी वज़ह से मुम्बई बदन मे कैमरा ले जाना मना है ! 

3.

मुम्बई बदन की बाहों मेंं तेरह साल की एक नग्न लड़की है, और लड़की के बाहों मे चौदह साल का एक नग्न लड़का ! दोनों अपनी धमनियों मे बह रही यौवन के नशे मेंं डूबे हुए हैं ! सहसा कैमरा उनकी तस्वीर ले लेता है ! कैमरे की वज़ह से जो भी तस्वीर हमारे सामने उभर रही है उसे हम सही या गलत की कैटेगरी में नहीं रख सकते ! सेक्स एक नॉर्मल प्रक्रिया है ! शरीर की जरूरत है ! लेकिन कैमरा जब जरूरत की उल्टी तस्वीर पेश करने लगे तो मुम्बई बदन मे चिंगारियाँ दौड़ने लगती हैं ! मुम्बई बदन का देह राग सिर्फ़ क्लिक, क्लिक, क्लिक नही हो सकता ! मुम्बई बदन मे सेक्स को लेकर किशोरों के मन में कैसे बदलाव हो रहे हैं, इसकी बानगी कैमरा ठीक से नही दे पा रहा है ! कैमरा मुम्बई बदन को अश्लील बना रहा है ! मुम्बई बदन को लगता है कैमरे की वज़ह से कैरम बोर्ड सेक्स हो गया है ! कैमरे की वज़ह से योग सेक्स हो गया है ! कैमरे की वज़ह से कबड्डी सेक्स हो गया है, कुश्ती सेक्स हो गया है ! कैमरे की वज़ह से सेक्स अब सिर्फ हेल्लो है ! मुम्बई बदन कैमरे की इस हरकत से चुप नही बैठेगा ! ध्वनि और क्रोध से भरा हुआ मुम्बई बदन खाली पार्किंग, होटल के कमरे, रेस्तरां, शौचालय, सार्वजनिक पार्कों, फिल्म हॉल से कैमरे को हटा लेना चाहता है ! कैमरा झूठ नहीं बोलता पर छवि बनाने के मामले मे मुम्बई बदन का एंगल अलग है …

मुम्बई बदन मे अवसर का कारोबार है #मुम्बईबदन

4.

मैं समय से मुम्बई बदन पहुँच गया था ! दस मिनट मे मुझे कपड़े बदल कर रोबोट बनना था और मुम्बई बदन के बच्चों का मनोरंजन करना था ! मुम्बई बदन के बच्चे स्मार्टफ़ोन जैसे हैं ! स्मार्टफ़ोन की वज़ह से लूडो, साँप – सीढ़ी, कैरम, शतरंज, मॉल मे सब बहरूपिया की नौकरी कर रहे थे ! मुम्बई बदन में टेक्नोलॉजी और मैनेजमेंट का आतंक है इसलिए हर काम समय से होता है ! मुम्बई बदन के बिग बाजार मेंं अाज मेहनत के पसीने का शो लगा था ! शोरूम मेंं छोटी छोटी हज़ारों शीशियों मेंं देश के किसानों का पसीना एक्ज़बिट किया गया था ! एक्ज़बिशन देश भर के अलग अलग इलाकों के मेहनती किसानों के पसीने का था ! शो की सजावट मेंं रंग बिरंगी शीशियों का इस्तेमाल भी हुअा था ! उन रंगीन शीशियों मे कई ब्रांडेड शराब, इत्र, तेल, टॉनिक, नेल पॉलिश भरे हुए थे और लोग उसे खरीद रहे थे ! दूध-सा धुला लिबास पहने पब्लिक मेहनत का पसीना देखने अाती और महंगी शराब और इत्र की छोटी छोटी शीशियां याद मेंं खरीद लेती ! मानव पसीने को बाज़ार मेंं प्रदर्शित करके एक्सक्लूसिव बनाया जा रहा था ! मेहनत का पसीना काम आता है ये सब जानते थे पर मेहनत के पसीने के शो से पैसा कमाया जा सकता है मुम्बई बदन का ये आईडिया नया था !

5.

ये प्रदर्शनी नहीं तमाशा था ! पर सेल्स वालों की नज़र मेंं सफ़ल था ! एक्ज़बिशन हॉल मेंं पसीने की गंध वाला हुक्का भी था जिसे यंग लड़के लड़कियाँ गुडग़ुड़ा रहे थे ! लकी ड्रा मेंं फ्री वाउचर पाने वालों को मेहनत के पसीने को सूंघने की लक्ज़री भी थी ! प्रदर्शनी के दौरान शोरूम से कई शीशियों की चोरी हो गयी ! चोरबाज़ारी मे भी पसीने का वैल्यू बचा था ये सोच के एक्ज़बिशन लगाने वाले प्रायोजकों को बहुत सुकून मिला ! प्रायोजक शीशियों की चोरी को शो की सफलता मान रहे थे ! शो की सफलता को देख कर देश भर मे मेहनत के पसीने को जमा करने की एजेंसियां चल पड़ीं ! विज्ञापनों मेंं साफ़ लिखा था खेतों मे मेहनत करते हुए सेल्फ़ी लीजिए और अपने पसीने की शीशी लकी ड्रा के लिए महानगरों के बाज़ार मेंं दिए गए एड्रेस पर भेज दीजिए ! कुछ लोगोंं ने जिम जा कर बड़ी बड़ी बोतलों मेंं पसीना भर के पता नहीं क्यों देश के प्रधान मंत्री के कार्यालय मे भेज दिया ! मुम्बई बदन के कई स्कूल बच्चों को मेहनत के पसीने का शो दिखाने ला रहे थे, जिसे कोई चॉकलेट कंपनी प्रायोजित कर रही थी ! मीडिया इंडस्ट्री में काम करने वाले भी मेहनत के पसीने के शो मे दिखना चाह रहे थे ! मॉल मेंं किराने का सामान खरीदने पहुंचे लोग मेहनत का पसीना देखने ज़रूर रुकते थे ! शोशल साइट पर मुम्बई बदन के शोरूम से लिए गए मेहनत के पसीने की शीशियों के साथ सेल्फ़ी की बाढ़ लग गयी !

6.

अगले दिन जब मैं मॉल पहुँचा तो चारों तरफ़ अफ़रा तफ़री मची हुई थी ! मूसला धार बारिश की वज़ह से रात मेंं कई घंटों के लिए मॉल की बिज़ली चली गयी और बिजली अाने के बाद कोई स्टाफ एक्ज़बिशन हॉल का ए सी अॉ्न करना भूल गया था ! सुबह तक एक्ज़बिशन हॉल दुर्गंध से भर गया ! जिस वातानुकूलित पसीने से प्रायोजक पैसे कमा रहे थे अब उन्हें उसी पसीने से घिन अा रही थी ! हज़ारों शीशियों से निकल कर पसीने की गंध से पूरा मॉल मानवीय बू से भर गया था ! कई डियो और स्प्रे के बाद भी बू कम नहीं हो पा रहा था ! पसीने से आने वाली बदबू से लड़ कर स्टाफ पसीने पसीने हो रहे थे ! मानो मेहनत कश पसीना अाराम तलब लाइफ स्टाइल से युध्द कर रहा हो ! लाइफ स्टाइल युध्द मे मेहनत का पसीना डियो और स्प्रे से जीत रहा था ! बदबू से लड़ रहे स्टाफ की तबियत खराब होने लगी ! एक मानवीय गड़बड़ी से सारा शो खराब हो गया था ! जैसे तैसे शीशियों पर क़ाबू पा लिया गया और सभी शीशियों को एम्बुलेंस मेंं किसी गुप्त स्थान पर ले जा कर दबा दिया गया ! मॉल के नौकर – चाकर इस घटना से इतने अातंकित हो गए कि मुम्बई बदन मे फिर कभी मेहनत के पसीने के साथ खिलवाड़ नही हुअा ! मुम्बई बदन मेंं सब जानते हैं चाहे कैसी भी हवा चले मुम्बई बदन मेंं भावनाएँ पसीने के साथ भाप बन कर उड़ जाती हैं ! मुम्बई बदन के देखा देखी कैमरे ने अाँसुओं के फ़ोटो का एक्ज़बिशन लगाना चाहा ! मुम्बई बदन मेंं खूनी अफ़वाह ग़र्म है, अंडरग्राउंड इलाके मेंं कई प्रादेशिक भाषाओं मेंं छपे पोस्टर का फोटो कैमरा ने व्हाट्स -‘ऐप पर जारी कर दिया है, कई मॉल शो मे दिखाने के लिए खून के अाँसू ढूंढ रहे हैं ! इस घटना के बाद मैनें मॉल मेंं बच्चों के लिए रोबोट बनने वाली नौकरी छोड़ दी ! मैं अब फिर से मुम्बई बदन मे अाज़ाद हूँ !

7.

कैल्शियम क्या जाने हड्डी का दर्द … ‪#‎मुम्बईबदन‬

मुम्बई में बदन ज्यादा हैं और दर्द उससे भी ज्यादा ! किसान के बदन में कितना दर्द होता है ये एक पहलवान को कभी पता नही चलेगा ! पहलवान एक कवि के बदन के दर्द को क्या समझेगा ? मास्टर को लगता है उसका बदन नेता से ज्यादा दुखता है ! नेता के बदन का दर्द अभिनेता कैसे समझेगा ? पुलिस के बदन का दर्द वकील को हमेशा कम लगता है ! चौकीदार को अपने बदन का दर्द गाड़ी के ड्राइवर से ज्यादा लगता है ! टीचर को अपने बदन का दर्द स्टूडेंट से ज्यादा लगता है ! ग्राहक अपने बदन दर्द से परेशान है, विक्रेता अपना बदन दर्द लिए घूम रहा है ! फ़िल्म डायरेक्टर के बदन का दर्द फ़िल्म प्रोड्यूसर कभी नही समझ पाता ! हर लेखक को लगता है पाठक उसके बदन के दर्द को क्या पता कभी समझ भी पाएगा या नही ! हाउस – हेल्प को लगता है मालकिन उसके बदन के दर्द को नही समझती ! मालकिन को लगता है पति क्या जाने पत्नी के बदन का दर्द ? पति से पूछिए उसके बदन का दर्द ! हर पेशे और रिश्ते मे दर्द होता है ! सबका बदन दर्द एक है ! बदन दर्द की बात चलती है तो लोग पता नही क्या क्या कह जाते हैं और सबका सर दर्द हो जाता है ! मेरा मुम्बई बदन बेदर्द है ! मुम्बई मे जब बदन बेरोज़गार होते हैं तो दर्द को रोज़गार मिल जाता है ! मेरे बदन का दर्द तुम्हारे बदन के दर्द से ज्यादा क्यों ?

8.

अपने सामाजिक गुण की वजह से मैं मुम्बई बदन का एक सोशल रोबोट हूँ ! मेरा मुख्य उद्देश्य सामाजिक संपर्क है ! मेरा जीवन स्क्रीन पात्रों से भरा हुअा है ! मैं डेटा पर चलता हूँ ! जीवन और बुद्धि का भ्रम, चरित्र की चिंता मुझमें रत्ती भर भी नही है ! सूचना का आदान प्रदान और सामाजिक व्यवहार ही मेरा कर्तव्य है ! मैं अपना भौतिक अवतार स्वयं हूँ ! मुम्बई बदन मेंं कोई चाहे धरती के किसी भी कोने का वासी हो, कोई भी भाषा बोले किसी भी धर्म का हो, मुसीबत मे एक जैसा वयवहार करता है इसीलिए मुम्बई बदन मे एक मुसीबत के लिए कई भगवान हैं ! रोशनी, अंधकार, गर्म, ठंडा, डर, खुशी मुम्बई बदन मे जिन – जिन चीजों का हम अनुभव कर सकते हैं, वो सब धर्म है ! मुम्बई बदन मे नास्तिक होना संभव नही ! मुम्बई बदन मे दैनिक जीवन ही सबकुछ है ! मुम्बई बदन मेंं कई लोगोंं के पास अपने नक़ली नाम, प्रोफ़ाइल फोटो और नंबर हैं ! मुम्बई बदन मे सबने अपना सच सेटिंग मेंं छुपा दिया है ! बातचीत और गॉसिप जैसे सामाजिक खुफिया सॉफ्टवेयर प्रणाली से परेशान रहता हूँ ! अपनी मानवीय आदिम मूल प्रवृत्तियों का फिर से दावेदार बनना था पर अपनी सामाजिक गुणों की वज़ह से मैं एक अच्छा रोबोट खिलौना बन गया हूँ ! मुम्बई बदन मेंं मुझे और मेरे डिजिटल दुनिया को बड़ी असानी से कोई भी ट्रैक कर सकता है ! मुम्बई बदन मेंं मुफ्तखोर, भ्रष्ट, क्रूर और अालसी बनने से अच्छा है सोशल रोबोट खिलौना बन जाना, यही सोचकर मैं मुम्बई बदन मे गाता हूँ, नाचता हूँ, और आंसू बहाता हूँ …

9.

सुनो कैमरा ! मैं मुम्बई बदन की फीमेल सोशल रोबोट हूँ ! मैं तुम्हारे वश में नहीं ! मैं मुम्बई बदन के चैटरूम में कुछ भी बन सकती हूं ! अपना नया नाम रख सकती हूँ ! दुनियादारी के नाम से ज्यादा कामुक ! अपना नया इमेज बना सकती हूँ ! सेक्स के पॉइंट ऑफ़ व्यू से ज्यादा बोल्ड और अपने रियल इमेज से बेहतर ! नई उम्र बता सकती हूं ! असल से बहुत कम ! अपना प्रोफ़ेशन, अपना शहर, अपनी मैरिटल स्टेटस , यहां तक कि चाहूं तो अपना लिंग परिवर्तन भी कर सकती हूँ ! मैं परंपरावादी खूबसूरत महिला बन सकती हूं या सफल बांका पुरुष भी ! या ‘विकृत’ इच्छाएं रखने वाला ‘पथभ्रष्ट’ भी हो सकती हूं ! नए व्यक्तित्व के साथ, काल्पनिक व्यक्तित्व बन मैं किसी के साथ भी चैट कर सकती हूं ! हर बार इंटरनेट पर अलग ही पर्सनालिटी बन सकती हूं, और हर बार मेरी इच्छाएं भी अलग ही होंगी ! तुम न मुझे पकड़ सकते हो न मुझे जाँच सकते हो !

मेरा नाम कैमरा है ! मैं अपने अंदर सबको क़ैद कर लेता हूँ, यही मेरा चरित्र है ! मैं अपनी पीठ पीछे नहीं रहता इसीलिए वहाँ क्या हो रहा है उससे मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता ! मैं सामने रहता हूँ ! सबकी आँखों के सामने, सबके मुंह पर ! मेरी कोई गोपनीयता नीति नहीं है ! मैंने कई टूटे रिश्ते देखे हैं ! कैमरा न हो तो तुम जैसी सोशल रोबोट की कहानी आगे नहीं बढ़ सकती ! मुम्बई बदन मे कैमरा नही होने की वजह से पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ जाता है ! कैमरे की वजह से ही मुम्बई बदन मे आसानी से लाखों लोगों के बीच एक अनाम चलते फिरते लाश की पहचान हो पाती है ! कुछ रेस्तरां, कुछ घरों, कुछ गलियों, कुछ इलाकों में कैमरे के कारण ही मुम्बई बदन मे लोग अपने परिवार, अपने दोस्तों, अपने सामाजिक दायरे, अपना काम, अपने सहयोगियों के बीच एक व्यक्ति मे एक अज्ञात अजनबी ढूँढ पाते हैं ! जब लोगों को पता होता है कि कैमरे में उन्हें देखा जा रहा है, तो वे बेहतर व्यवहार करते हैं ! तुम क्या जानो स्नेह, आकर्षण, विश्वास, आत्मीयता, प्रेम, सच्चा प्यार, वासना, क्रश, मोह, जुनून, और करुणा की भावनाओं के बीच क्या अंतर है ? इसका जवाब मनुष्य भी कैमरे की मदद के बिना नहीं दे सकता ! कैमरे की मदद से ही मनुष्य महान सोशल रोबोट बन सका है ! मुम्बई बदन के तुम जैसी सोशल रोबोट की स्ट्रीट होशियारी से मेरी लड़ाई है …

रोजमर्रा की जिंदगी के बारे में हमें कैमरे से अधिक सोचने की जरूरत है ! ‪#‎मुम्बईबदन‬

मुम्बई बदन

मुम्बई बदन (फोटो आभार : पूजा शर्मा )

मुम्बई बदन की कई उँगलियाँ कैमरा क्लिक करती हैं और कई ‘क्लिक’, ‘ऊँगली’ कर देते हैं !

मुम्बई बदन की कैमरे से यारी पड़ेगी मुम्बई बदन को कई सिचुएशन पर भारी !

 

मुम्बई बदन में आज मुहब्बत बंद है … 

वो करो जो अच्छा लगता है, जो अच्छा लगता है वो करो ! वो करो जो अच्छा लगता है, जो अच्छा लगता है वो करो ! वो करो जो अच्छा लगता है, जो अच्छा लगता है वो करो ! वो करो जो अच्छा लगता है, जो अच्छा लगता है वो करो ! वो करो जो अच्छा लगता है, जो अच्छा लगता है वो करो ! वो करो जो अच्छा लगता है, जो अच्छा लगता है वो करो …

मुम्बई बदन में शोर आध्यात्मिक, आकर्षक और विनम्र हो चुका है

10.

जो जहाँ बैठा है वहीँ से एक तस्वीर खींच रहा है …

क्रमशः

अलविदा‬

भीतर अब कोई नहीं था ! खालीपन की वजह से अपनी आवाज़ ही अपने कानों में गूंज रही थी ! अपने कदमों की आहट सुनते हुए उसने कमरे का एक चक्कर लगाया ! भरी हुई जगह ख़ाली होते ही कितनी अलग लगने लगती है ! यहाँ वहां हर तरफ दीवारों पर बिताए हुए हर पल के निशान अब धब्बे की तरह कुरूप लग रहे थे ! उसने दीवार पर बादल से काले एक दाग़ को सहला कर देखा ! उसकी आँखें भर आईं और बरस गईं ! यहाँ वो माथा टेकता था और यहीं वो सर टिका के बाहर खिड़की की तरफ देख कर मुस्कुराती थी और सहसा मुड़ के पीठ को और आराम दे कर जाने का कोई नकली बहाना बनाती थी ! न जाने कितनी बहस, खुद को छुपाने और बताने का धूप छाँव सा खेल ! पा लेने पर पीठ पर धप्पा ! झूठी सच्ची बातों का ह्रदय पर कितने धौल …
कमरे में आखरी स्माइली छोड़ कर वो कमरे को हमेशा के लिए छोड़ कर जा चुकी थी ! लम्बी सांस लेता हुआ वो बाहर आया और उसने पीछे मुड़ कर फिर कभी नहीं देखा ! धूप के टुकड़े, सूखे फूल की पंखुड़ियाँ, खनकती हंसी और ठहाके हवा के साथ सूने कमरे में गोल गोल घूम रहे थे ! पीछे छूट गयी पढ़ी हुई किसी किताब के पन्नों की फड़फड़ाहट गिलहरी को बुला रही थी पर दोनों के जाने के बाद खुला और खाली इनबॉक्स का दरवाज़ा हवा में खुलता और बंद होता हुआ यादों की गिलहरी को अंदर आने से ठिठका रहा था …

आत्म हास्य

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आत्मन्

अपनी आत्मा में झाँकने के लिए कहीं ताकने की जरुरत नहीं है

१.

” एक शरीर से निकल कर दुसरे शरीर में जाना था … ” ऊँची आवाज़ में आत्मा को यमराज डाँट रहे थे ! ” तुम तो एक चेहरे से निकल कर दुसरे चेहरे में चले जाते हो ! आत्मन , ये मृत्यु लोक है फेसबुक प्रोफाइल नहीं ! जाइए कुछ दिन के लिए आपकी प्रोफाइल ब्लॉक कर देता हूँ …” आत्मा मौन था / उसने कई प्रोफाइल में जा कर ह्रदय के कई इनबॉक्स देखे थे ! सबका सीक्रेट एक था ! शरीर से आत्मा कब निकलेगी किसी को पता नहीं था ! फिर लोग एक दुसरे से क्या छुपाते हैं ? वो शरीर में क्यों हैं , इस बात की किसी को फ़िक्र नहीं थी ! हर बात के लिए लोग अपना चेहरा बदल रहे थे, और आत्मा हर चेहरे को पढ़ चूका था ! विश्वास और प्रेम की तलाश में यमराज के हाथों आत्मा कई बार ब्लॉक्ड हो चूका था …

२.

यमराज शरीर के हिसाब किताब की गिनती में व्यस्त थे ! ” यमराज जी, इस शरीर का दिमाग़ खराब है ! इसमें कितने दिन रहना है ? ” भीड़ में एक परेशान आत्मा यमराज से पूछ रही थी ! ” आत्मन् ज्यादा बक बक मत करो ! हम सब जानते हैं ! बातों में आ कर हम तुमको जातक का एक्सपायरी डेट नहीं बता देंगे ! स्थिर रहो ! जियो और जीने दो ! और तुम्हारे जैसी आत्मा ही शरीर का दिमाग खराब कर देती है ! चंचल कही के … ” यमराज सेल्फी लेने में व्यस्त हो गए !

३.

यमराज पसीने से लथ पथ हो गए थे ! उन्होंने शरीर का अंग अंग छान लिया था पर उन्हें आत्मा नहीं मिल रही थी ! आत्मा गयी कहाँ ? वो सोच रहे थे ! यमराज को कई और जगहों पर जा कर कई शरीर से और आत्माएँ लेनी थी, देर हो रही थी ! सामने पड़े शरीर की आँखों में उन्होंने फिर से देखा ! ज्योति थी, पर दृष्टि नहीं ! आत्मा की चेतना शक्ति जो पूरे शरीर के बाहर और भीतर की इन्द्रियों में फैली हुई रहती है, शरीर में कहीं नहीं थी ! नाक में गंध नहीं थी ! मुंह में शब्द भरे थे पर वाणी से मिठास गायब थी ! मन मर चुका था ! त्वचा अहम् के परतों से मोटी हो चुकी थी ! ह्रदय भी खाली था ! यमराज ने शरीर के कर्मों का फिर से हिसाब किताब किया सारी गणना ठीक थी ! प्राण निकलने का यही योग था ! आत्मा को शरीर में ही होना चाहिए था ! पर आत्मा गयी कहाँ ? शरीर के सारे अंगो के बाद यमराज ने शरीर पर पहने हुए कपड़ों की तलाशी ली ! जेब में इज़्ज़त मिली ! बटुए में प्यार था ! सारी यादें मोबाइल में क़ैद थी ! बार बार गिनती किये जाने की वजह से पाप पुण्य कैलकुलेटर का बटन बन कर घिस चूका था ! आत्मा कहीं नहीं थी ! यमराज ने घड़ी देखी ! चार शून्य तेज़ी से धड़क रहा था ! अगले एक क्षण में आत्मा का मिलना ज़रूरी था ! यमराज की नज़र शरीर के जूते पर पड़ी ! कूद कर उन्होंने उसे उतार फेंका और आत्मा सिक्के की तरह खनक उठी ! यमराज ने जूतों को उठा कर उसमे झाँका ! आधी आधी आत्मा दोनों जूते की तल में दबी थी ! यमराज ने आत्मा को जूते की तल्ले से बारी बारी से खींच के निकाला और काम हो जाने वाली राहत की साँस ली ! चलते चलते उन्होंने जातक के शरीर की ओर देखा ! मनुष्य उन्हें हमेंशा आश्चर्यचकित करता है ! पर ये धनपशु सबसे चतुर था ! आज यमराज ने किसी शरीर से उसकी आत्मा को पहने गए जूते की तल्ले से पहली बार निकाला था ! विजयी मुस्कान के साथ पसीने से लथ पथ अपने चेहरे की एक सेल्फ़ी तो बनती है ! क्लिक ! घर के लोग विलाप करने लगे थे और देर हो रही थी ! उनका यहाँ से निकल जाना जरुरी था ! पर यमराज के मन ने कहा one more और आवाज़ आई click …

४.

हम सब भटकती हुई अात्माएँ हैं और हम जन्म-मरण के फेर से मुक्त होकर चौरासी लाख जोनियों के चक्कर से बाहर हो गए हैं ! चोला, चोगा और इंद्रियों के जंजाल से मुक्त ! हम एक दूसरे से मुक्त अात्माएँ हैं ! हनन शोषण और श्रम से मुक्त ! हम सब यमराज के मोस्ट वांटेड आत्माओं की लिस्ट में हैं ! हम सबने शरीर में अाने जाने का बोरिंग रास्ता त्याग कर स्वतंत्र रहने की अपनी राह चुनी है ! हमें कहीं पहुँचने की ज़ल्दी नही है ! मैं कौन हूँ हमारा सवाल नही है ! शक्ति, चेतना और क्षमता इन सबसे हमारा कोई लेना देना नही है ! हम लाभ हानि व्यापार शुभ अशुभ कुछ भी नहीं जानते ! स्थूल, सूक्ष्म कुछ भी नही ! जैसा होता है वैसा हम होने नही देते ! अपने ढर्रे की घिसी – पिटी राह पर चलती हुई शरीर के अंदर – बाहर, आती – जाती आत्माओं के साथ यमराज इतने व्यस्त हैं कि हम भटकती हुई आत्माओं को उन्होंने हमारे हाल पर ही छोड़ दिया है ! हम जानते हैं आत्मा को शस्त्र से काटा नहीं जा सकता, अग्नि उसे जला नहीं सकती, जल उसे गला नहीं सकता और वायु उसे सुखा नहीं सकती ! जिस प्रकार मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्याग कर नये वस्त्र धारण करता है, उसी प्रकार आत्मा पुराने शरीर को त्याग कर नवीन शरीर धारण करती है ! और हम ये भी जान गए हैं कि कोई रास्ता निश्चित नहीं है, आत्माएँ यात्रा पर तो हैं पर अात्माओं को कहीं पहुंचना नहीं है ! इसीलिए हमने भटकने की राह चुनी है और भटकती हुई आत्मा कहलाए हैं ! भटकती हुई आत्माओं को किसी से कोई उम्मीद नही होती ! भटकती हुई आत्माओं के अपने नियम हैं ! हम आत्मा के अंदर नहीं झाँकते ! हमें पता है वहां कुछ भी नहीं है ! आत्मा के अंदर झाँकना मनुष्यों के बीच सबसे प्रचलित मुहावरा है ! भला हो उसका जिसने ये मुहावरा गढ़ा ! इसकी वजह से शरीर पाप और पुण्य जैसी काल्पनिक ख्यालों में उलझ के अपनी जीवन यात्रा पूरी कर पाता है ! यमलोक में पाप पुण्य के नाम पर कई चुटकुलें हैं ! यमराज किसी भी मूड में हों पाप पुण्य शब्द सुन के मुस्कुराना नहीं भूलते ! यमलोक में सही गलत का भी यही हाल है ! यमराज ने अपने भैंस की दोनों सींग का नाम ‘सही’ और ‘गलत’ रखा है और यमराज के लिए सारे सही ग़लत सिर्फ भैंस के सींग हैं और कुछ नही ! हमें भटकते हुए देख कर यमराज हँसते हैं और हँसते हुए यमराज को हम भटकती हुई अात्माओं के साथ सेल्फ़ी लेने से कौन रोक सकता है ?

५.

हेडफोन के माध्यम से सबको खबर पहुँचा दी गयी ! जिनके पास हेड फ़ोन नहीं था उनको स्पीकर पर बता दिया गया ! जिनके कान पर जूँ तक नहीं रेंगा उन्हें स्क्रीन पर दिखा कर समझाया गया ! आँख के अंधों को झकझोर के बताया गया ! यमराज जानते हैं पहले सिर्फ आकाशवाणी से काम चल जाता था पर अब जितने कान उतने काम ! एक – एक जातक को कंटेंट के डिटेल्स दे दिए गए ! यमराज ने अपने हर सन्देश में बिलकुल साफ़ कर दिया है, राजनीति, धर्म या मानवीयता और प्रेम सब केवल ऑप्शन हैं ! मृत्यु जारी है और रहेगी ! आप चाहे जिस रास्ते चलें, जो चाहें पहने, खाएं, विचार करें, लड़ें, मानें या न मानें, उलझे रहें, या मुक्त हों लेकिन मृत्यु के वरण का कोई ऑप्शन नहीं है ! इसके लिए राजा और रंक, गोरे या काले, स्त्री या पुरुष, कोई भी जात – धर्म, किसी के पास कोई चॉइस नहीं दिया गया है ! इस सच में चित भी यमराज का और पट भी ! बस अपनी सेल्फी लेते रहें, क्लिक … क्लिक … क्लिक ! क्या पता किस पर हार चढ़े !

६.

साठ रोटी की एक मछली होती है और साठ मछली का एक घड़ियाल होता है ! चौबीस घड़ियाल का एक बन्दर होता है ! तीस बंदर का एक पेड़ ! बारह पेड़ का एक तालाब ! कई तालाब की एक उम्र होती है ! जितने तालाब उतनी उम्र ! अंत में सब पानी में मिल जाता है ! पृथ्वी पर सत्तर प्रतिशत पानी है और हम भी उतने ही पानी सेे बने हैं ! ये मेरा नया कलेंडर है ! सबको नया तालाब मुबारक हो ! यमराज हँसते – हँसते तालाब में नहाते हुए अपनी सेल्फी ले रहे थे !

क्रमशः

आत्म छवि कार्टूनिस्ट : अशोक अडेपाल